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मां बनी कुमाता : कपूत और कुमाताओं की समाज में कमी नहीं

दा रूलशफा लखनऊ का सब से पौश एरिया है. यहां पर ज्यादातर विधायक ही रहते हैं.

यह उत्तर प्रदेश की विधानसभा के नए लोकभवन के पीछे का इलाका है. दारूलशफा के दूसरी तरफ लखनऊ का सब से पौश हजरतगंज का जनपथ मार्केट है.

दारुलशफा के ही फ्लैट नंबर बी-137 में एटा के एमएलसी व उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति रमेश यादव की दूसरी पत्नी मीरा अपने 2 बेटों 27 साल के अभिषेक और 22 साल के अभिजीत यादव उर्फ विवेक के साथ रहती थी. जबकि रमेश यादव 12, कालीदास मार्ग पर अपने सरकारी आवास में रहते थे.

रविवार की सुबह मीरा सो कर उठी तो उसे छोटा बेटा बेहोशी की हालत में मिला. यह देख कर वह घबरा गई. पति से उस की अनबन चल रही थी, इसलिए मीरा ने अपने दूसरे बेटे अभिषेक को फोन किया. अभिषेक यादव उस समय दारूलशफा से कुछ दूरी पर नरही स्थित दूसरे फ्लैट में रहता था. वह तुरंत मां के पास आया और अपने भाई के कमरे में गया. जब उस ने भाई का हाथ पकड़ा तो उस की नब्ज गायब थी. उसे लगा कि वह मर गया है.

सुबह करीब 7 बजे मीरा के फ्लैट पर नौकर गया था. उस ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया इस के बाद भी मीरा ने दरवाजा नहीं खोला तो नौकर वापस चला गया. इस के बाद ही मीरा ने बड़े बेटे अभिषेक को फोन किया था. अभिषेक के आने के बाद सभी को यह पता चला कि अभिजीत की मौत हार्टअटैक से ही हुई है.

आननफानन में मीरा और उस के परिवार के लोगों ने अभिजीत के दाह संस्कार करने की योजना बना ली. मामले की सूचना दारूलशफा पुलिस चौकी पर मौजूद पुलिस वालों तक पहुंची तो चौकी इंचार्ज ने यह जानकारी हजरतगंज थाने को दे दी. थाने से पुलिस जब दारूलशफा में मीरा के फ्लैट पर पहुंची तो मीरा ने पुलिस को बताया कि अभिजीत की स्वाभाविक मौत हुई है.

मीरा ने पुलिस को बताया कि अभिजीत देर रात घर आया तो उस ने सीने में दर्द होने की बात कही. उसे लगा कि पेट में गैस बन गई होगी. उस ने अभिजीत के सीने पर दवा लगा दी. इस के बाद वह सो गया तो वह भी सो गई. सुबह जब वह सो कर नहीं उठा, तो उस ने बड़े बेटे अभिषेक को बुलाया.

अभिषेक के आने के बाद पता चला कि अभिजीत की मौत हो चुकी है. पुलिस को मीरा और परिजनों ने स्वाभाविक मौत की बात बताई और दाहसंस्कार कराने के लिए मना कर दिया. पुलिस ने भी उन पर मोस्टमार्टम कराने का कोई दबाव नहीं डाला.

इस के बाद घर वाले शव को ले कर दाह संस्कार के लिए बैकुंठधाम के लिए निकल गए. अभी वे लोग घर से एक किलोमीटर दूर सिकंदर बाग चौराहे के नजदीक ही पहुंचे थे कि पुलिस वहां पहुंच गई और उन्हें रोक लिया.

इस बीच पुलिस के बड़े अफसरों को शिकायत मिली थी कि अभिजीत की मौत संदिग्ध है. उस की हत्या की शंका जाहिर की गई थी. इस पर बडे़ अफसरों और लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने शव को दाह संस्कार करने से पहले ही रुकवा दिया. इस के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भेज दिया गया.

रविवार की देर शाम अभिजीत की लाश का पोस्टमार्टम हो गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि अभिजीत की हत्या गला दबा कर की गई थी.

इस रिपोर्ट के आने के बाद पुलिस ने अभिजीत के बड़े भाई अभिषेक की तहरीर के आधार पर भादंवि की धारा 302 और 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर के मामले की पड़ताल शुरू कर दी.

पुलिस ने परिवार के सभी लोगों से बात की. इस में सब से अधिक संदिग्ध अभिजीत की मां मीरा दिख रही थी. पुलिस पूछताछ में मीरा अलगअलग बयान देने लगी, अपने बयान की पुष्टि के लिए वह कोई भी सबूत पेश नहीं कर पाई.

ऐसे में पुलिस के शक की पुष्टि हो गई. लखनऊ पुलिस ने घटना के 24 घंटे के अंदर ही अभिजीत की हत्या के आरोप में उस की मां मीरा को गिरफ्तार कर के मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया, जहां से मीरा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

जांच में पता चला कि मीरा यादव और रमेश यादव की पहली मुलाकात सन 1984 में हुई थी. उस समय रमेश यादव एमएलसी थे. मुलाकात के बाद दोनों करीब आ गए. बाद में रमेश यादव ने मीरा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा. मीरा के पिता बैंक में मैनेजर थे. मीरा ने एमए और एलएलबी की पढ़ाई की थी. सन 1986 में दोनों ने शादी कर ली.

इस के बाद रमेश यादव ने उस के रहने की व्यवस्था लखनऊ के दारूलशफा स्थित अपने आवास में कर दी. मीरा 2 बच्चों, अभिषेक और अभिजीत की मां बनी.

मीरा पर्यटन विभाग में क्लर्क के रूप में काम करती थी. लेकिन साल 2012 में रमेश यादव ने उस की नौकरी छुड़वा दी थी. समय के साथ उन के और मीरा के बीच दूरियां बढ़ने लगीं. वह मीरा को खर्च के लिए पैसे भी कम देते थे.

रमेश यादव खुद कालीदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास में रहते थे. दारूलशफा स्थित आवास में उन का आनाजाना नहीं होता था. रमेश यादव वैसे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जिला एटा के रहने वाले थे. वह ज्यादातर समय वहीं गुजारते थे. मीरा का बड़ा बेटा अभिषेक कंस्ट्रक्शन का काम करता था. उस ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी.

छोटा बेटा अभिजीत अपनी पढ़ाई के साथ दूसरे काम करता था. वह कभी किसी काम में सफल नहीं हुआ था. परेशानी बस यह थी कि वह नशे का शिकार हो गया था. अभिजीत को लगता था कि उसे जितना पैसा मिलना चाहिए, वह नहीं मिल रहा है.

इसे ले कर उस का अपनी मां के साथ झगड़ा होता था. झगड़े में अभिजीत मां द्वारा रमेश यादव के साथ की गई शादी को ले कर भी ताने मारता और उस के चरित्र पर भी सवाल उठाता था. मीरा को यह बातें बुरी लगती थीं.

मीरा ने अपने गहने बेच कर बेटे को कुछ बिजनेस शुरू कराया पर वह सफल नहीं रहा. दशहरे के दिन भी अभिजीत ने अपनी मां से पैसे मांगे और न मिलने पर झगड़ा किया. इतना ही नहीं उस ने मां को मारापीटा भी था. मीरा भी बारबार पैसे दे कर थक चुकी थी.

लखनऊ के एएसपी पूर्वी सर्वेश कुमार मिश्रा के अनुसार, पुलिस को दिए गए अपने बयान में मीरा ने कहा, ‘अभिजीत शराब पीने का आदी था. आए दिन शराब पी कर हंगामा करता था. वह रोजरोज के झगड़े से तंग आ चुकी थी.

‘शनिवार की रात करीब 11 बजे अभिजीत शराब के नशे में धुत हो कर घर आया और आते ही गालीगलौज करने लगा. मीरा को लगा कि दशहरे वाले दिन की तरह वह फिर से उस के साथ मारपीट करेगा. उस दिन इस सब से डरी मीरा ने अभिजीत को थप्पड़ मारे और धक्का दे दिया.

‘अभिजीत दरवाजे से टकरा कर नीचे गिर गया. उस के बाद वह दोबारा उठा और मां से हाथापाई करने लगा. तब गुस्से में आ कर मीरा ने उसे दीवार की तरफ धक्का दे दिया. जिस से वह गिर कर बेहोश हो गया. मीरा को लगा कि वह अभी फिर उठेगा और मारपीट शुरू कर देगा. ऐसे में उस ने बेटे के गिरने के बाद अपने दुपट्टे से उस का गला घोंट दिया.’

मीरा ने हत्या का समय रात करीब 12 बजे बताया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उस की मौत का यही वक्त बताया गया था. बेटे को ठिकाने लगा कर वह सोने चली गई.

रविवार की सुबह जब अभिजीत के शरीर में कोई हलचल नहीं दिखी तो मीरा ने समझ लिया कि वह मर चुका है. हत्या के आरोप से बचने के लिए उस ने अपने अपराध को छिपाने की कोशिश शुरू की.

इस काम में मीरा ने सब से पहले अपने दुपट्टे को गैस के चूल्हे पर रख कर जला दिया. अभिजीत की गरदन पर बने निशान को मिटाने के लिए सोफ्रामाइसिन क्रीम लगाई. हजरतगंज पुलिस ने क्रीम और जला हुआ दुपट्टा बरामद कर लिया. एक मां के द्वारा जवान बेटे की हत्या किए जाने की बात पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था. विधान परिषद के सभापति रमेश यादव ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.

पुलिस के सामने बेटे की हत्या कबूल करने वाली मां मीरा ने मीडिया के सामने अपना जुर्म कबूलने की बात को गलत बताया. मीरा ने बताया कि अभिजीत ने खुदकुशी की, जिस से उस के गले पर निशान आया.

मीरा ने अपने पति और पुलिस पर खुद को हत्या के आरोप में फंसाने का आरोप लगाया. मीरा ने कहा कि उस ने अभिजीत को नहीं मारा. उस से झगड़ा हुआ था, जिस में उसे चोट लग गई थी. पुलिस ने मीरा को सोमवार 22 अक्तूबर को सीजेएम आनंद प्रकाश सिंह की कोर्ट में पेश किया, जहां से 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

लालच और कुंठा का चित्रण करने वाली फिल्म है ‘‘2 बैंड रेडियो’’

तेजी से बदलते वक्त के साथ बहुत कुछ बदला है. देश व समाज ने काफी प्रगति कर ली है. कई अत्याधुनिक मनोरंजन के साधन आ गए हैं. मगर इंसानी स्वभाव, उसके अंदर के लालच और उस लालच की वजह से उपजने वाली कुंठा आदि आज भी ज्यों का त्यों है. इसी मानवीय स्वभाव को हास्य व व्यंग के साथ फिल्म ‘‘2 बैंड रेडियो’’ में लेकर आ रहे हैं फिल्म निर्माता व अभिनेता राहत काजमी तथा निर्देशक सकी शाह.

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बदले हुए वक्त का ही तकाजा है कि वर्तमान पीढ़ी एफएम रेडियो से वाकिफ है, मगर वह सत्तर के दशक के रेडियो की हकीकत से वाकिफ नही है. जबकि सत्तर के दशक में घर पर रेडियो बजाने के लिए स्थानीय पोस्ट आफिस से रेडियो का इस्तेमाल करने के लिए ‘रेडियो लाइसेंस’ लेना पड़ता था. 70 के दशक की ‘रेडियो लाइसेंस बुक’ आज संग्रहणीय मानी जाती है.

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उल्लेखनीय है कि पोस्ट आफिस से रेडियो लाइसेंस बुक को हासिल करना उतना ही मुश्किल काम हुआ करता था, जितना कि आज के समय में अपने आटोमोबाइल के डीलर के लिए आरसी बुक पाना होता है. उसी ‘‘रेडियो लाइसेंस’’ के रोचक दौर को फिल्मकार राहत काजमी ने फिल्म ‘‘2 बैंड रेडियो’’ में जीवंत किया है. जिसका वर्ल्ड प्रीमियर ‘‘यू के एशियन फिल्म फेस्टिवल’’ में होगा.

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फिल्मकार राहत काजमी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने सबसे पहले कश्मीर की पृष्ठभूमि में फिल्म ‘आइडेंटिटी कार्ड’’ का निर्माण व निर्देशन कर विश्व स्तर पर शोहरत बटोरी थी. इस फिल्म में इस बात का चित्रण था कि कश्मीर मे आईडेंटिटी कार्ड का जो प्रचलन है, उसके चलते वहां के निवासियों को किस तरह की समस्याओं से हर दिन जूझना पड़ता है.

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इसके बाद उन्होंने ‘मंटोस्तान’ और ‘लिहाफ’ जैसी बेहतरीन फिल्मों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायी. अब उनकी कंपनी ‘‘राहत काजमी फिल्मस’’ ने ‘‘तारिक खान प्रोडक्शन’’ और ‘‘जेबा साजिद फिल्मस’’ के साथ मिलकर हास्य व व्यंग युक्त एक अनोखी फिल्म ‘‘2 बैंड रेडियो’’ का निर्माण किया है. इस फिल्म की कहानी 70 के दशक में सेट की गयी है. इसके लेखक राहत काजमी और कुंवर शक्ति सिंह तथा निर्देशन की बागडोर पहली बार फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने वाली सकी शाह ने संभाली है.

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राहत काजमी कहते हैं-‘‘उस दौर को फिर से जीवंत करना उतना आसान नहीं है, जब पोस्ट आफिस हमारी जिंदगी का एक बेहद अहम हिस्सा और बाबूगीरी के दबदबे की पहचान हुआ करता था. वह वक्त विविध भारती और औल इंडिया रेडियो के वर्चस्व का था. हमने हिमालय के एक छोटे से गांव की पृष्ठभूमि पर हमने यह फिल्म बनायी है. जहां रहने वाले लोगों ने कभी रेडियो देखा नहीं है. फिल्म की कहानी वहां पहली बार रेडियो के आने के बाद मचने वाले हंगामे और उससे पैदा होने वाली हंसी पर आधारित है.’’

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फिल्म ‘‘2 बैंड रेडियो’’ में ‘‘तेरे बिन लादेन’’ फेम अभिनेता प्रद्युमन सिंह के साथ ‘राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय’ में उनकी वरिष्ठ रही अभिनेत्री नीलू डोगरा ने मुख्य भूमिका निभायी है. जबकि ‘मिस इंडिया ट्यूरिजम’ व सुपर मौडल रह चुकी स्नेहा जग्यासी, इंग्लैंड निवासी अभिनेता जीतेन्द्र राय भी एक खास किरदार में हैं.इ सके अलावा राहत काजमी, रितू राजपूत, जाहिद कुरेशी, तारिक खान, हुसैन खान की भी अहम भूमिकाएं हैं.

फिल्म की निर्देशक सकी शाह कहती हैं-‘‘यह सामाजिक फिल्म है. जो कि हमारे लालची स्वभाव से पैदा होने वाली कुंठा और गहरी उदासी को दर्शाती है.’’

IND v/s AUS : पहले टी20 से सामने आए ये 7 अनोखे आंकड़े

ऑस्ट्रेलिया ने विशाखापट्टनम में खेले गए पहले टी20 में भारत को आखिरी गेंद पर रोमांचक तरीके से तीन विकेट से हरा दिया. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 126/7 का स्कोर बनाया, जिसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने ग्लेन मैक्सवेल के 56 रनों बदौलत जीत हासिल की और दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल की.

आइये नजर डालते हैं पहले मैच के प्रमुख आंकड़ों पर…

– भारत के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय में आखिरी गेंद पर किसी भी टीम की सिर्फ चौथी जीत. ऑस्ट्रेलिया से पहले भारत को 2009 में न्यूजीलैंड, 2010 में श्रीलंका और 2014 में इंग्लैंड ने आखिरी गेंद पर हराया था.

– रविचंद्रन अश्विन (52) के बाद जसप्रीत बुमराह (51) टी20 अंतरराष्ट्रीय में 50 विकेट लेने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय गेंदबाज बने.

– विराट कोहली: किसी भी देश के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय में 500 रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बने. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोहली के इस मैच के बाद 512 रन हैं.

– विशाखापट्टनम में पहली बार विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक नहीं लगा सके. इससे पहले उन्होंने यहाँ हमेशा कम से कम 50 का स्कोर जरूर पार किया था.

– 20 अंतरराष्ट्रीय की एक पारी में 30 से ज्यादा गेंद खेलने के बाद सबसे कम स्ट्राइक रेट के मामले में महेंद्र सिंह धोनी (37 गेंद 29, 78.37 स्ट्राइक रेट) भारत की तरफ से तीसरे स्थान पर पहुंचे. इस मामले में भारतीय रिकॉर्ड युवराज सिंह (32 गेंद 14, 43.75 स्ट्राइक रेट vs पाकिस्तान, ढाका 2016) के नाम दर्ज़ है.

– मयंक मारकंडे भारत के 79वें और पीटर हैंड्सकॉम्ब ऑस्ट्रेलिया के 94वें टी20 खिलाड़ी बने. दोनों ने अपना डेब्यू किया.

– एक ही दिन में भारत में दो टी20 अंतरराष्ट्रीय (भारत-ऑस्ट्रेलिया, विशाखापट्टनम और अफगानिस्तान-आयरलैंड, देहरादून) खेले गए और वर्ल्ड टी20 के अलावा ऐसा पहली बार हुआ है.

बुआ और भतीजे का गठबंधन

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के बाद भी उन पर ऐसे तीर तरक्श नहीं छोड़ रही जैसे राहुल गांधी पर छोड़े जा रहे हैं. जिन्हें पहले जातिवादी और विभाजक कह कह कर गालियां दी जाती थीं उन पर भाजपा की औल फौज चुप हैं. रातदिन केवल राहुल गांधी और सोनिया गांधी का माखौल उड़ाने की कोशिश हो रही है. हालांकि यह कोशिशें अब अपने ही खिसकते समर्थकों को बचाने के लिए हैं. दूसरों को भाजपा में लाने के लिए नहीं.

मायावती और अखिलेश का प्रभाव केवल उत्तर प्रदेश में है. दलित होने के कारण दूसरे राज्यों में मायावती इक्कीदुक्की विधायकों की या कारपोरेशनों वालों में 5-7 वार्डों में जीत जाती हैं पर बाकि दलितों में कोई गहरी पैठ नहीं बना पाई. अन्य राज्यों में या तो राज्य तक सीमित पार्टी में दलित है या फिर कांग्रेस में.

उत्तर प्रदेश में दम ठोकने वाली समाजवादी पार्टी का भी यही हाल है. मुलायम सिंह ने कभी इसे उत्तर प्रदेश से बाहर नहीं फैलाया और उन का पिछड़ा समर्थन कई राज्यों में कांग्रेस के साथ है तो कई राज्यों में किसी स्थानीय पार्टी के साथ.

उत्तर प्रदेश अकेला राज्य है जहां दलितों व पिछड़ों की पार्टियां और दोनों ने कईकई बार राज भी किया है. कांगे्रस को सत्ता में या उस के करीब भी आए अरसे हो चुका है.

मायावती और अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा न खोलना भाजपा के लिए एक संकट पैदा करेगा क्योंकि 80 सीटों पर मुख्य मुकाबला तो उन्हीं से है और उन्हीं से बाद में मिलना न पड़े. इसलिए उन पर न जाए यह संभव नहीं है.

यह देश ऐसा है जहां वक्त पर गधे का बाप बनाना बुद्धिमानी मानी जाती है और जहां पौराणिक गाथाओं में दुश्मनों को पटाना या वक्त पर जी हजूरी करना धर्मयुग है. अमृत मंथन में भी यही हुआ या जिस में विष्णु के 2 अवतार बने थे – कश्यप व मोहिनी व तीसरे अवतार शिव ने जहर पीया था अब जब अवतारों ने पहले दुश्मनों साथ काम करने पर और बाद में उन्हें धोखा देने पर मोहर लगा दी हो वहां उन को हजारों साल बाद पूजने वाले कैसे गलत हो सकते हैं.

सत्ता के अमृत मंथन में कब किस की जरूरत पड़ जाए यह नहीं कहा जा सकता इसलिए मायावती और अखिलेश यादव फिलहाल भाजपा की ट्रौल आर्मी को गोलियों से बचे हैं. चुनाव नजदीक आने पर ही पता चलेगा कि मोहिनी अवतार बन कर अमृत का घड़ा धोखे से छीन कर कैसे देवताओं के हाथों में आता है. पुराणों में ब्लूप्रिंट तैयार है.

स्मार्टफोन हो गया है स्लो? इन तरीकों से बनाएं सुपरफास्ट

जैसे जैसे हमारा स्मार्टफोन पुराना होता जाता है वैसे वैसे उसकी स्पीड में भी कमी आती जाती है. ऐसे में हम उस पुराने फोन से तंग आकर नया फोन खरादने की सोचते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं इसके स्लो होने के पीछे का कारण हमारी कुछ खराब आदतें हैं. अगर हम अपनी आदतों को सुधार लें तो फोन की स्पीड बढ़ जाएगी. आइए आपको बताते हैं फोन की स्पीड बढ़ाने के ऐसे ही कुछ तरीकें.

होम स्क्रीन को साफ रखें

कई लोग ऐसे होते हैं कि स्मार्टफोन की होम स्क्रीन पर बहुत सारे ऐप रखते हैं जो कि फोन के धीमा होने का सबसे बड़ा कारण है. ऐसे में आपके भी फोन के होम स्क्रीन पर कई मौसम, लाइव वालपेपर जैसे ऐप के आईकन हैं तो उन्हें हटा दें.

डाटा सेवर मोड को आन करें

फोन में मौजूद गूगल क्रोम में डाटा सेवर मोड आन करने का फायदा यह होता है कि आप कोई भी साइट ओपन करते हैं तो उस पेज पर मौजूद वीडियो और फोटो की क्वालिटी थोड़ी कमजोर हो जाती है. ऐसे में हेवी पेज आसानी से लोड हो जाते हैं और आपका फोन तेजी से काम करता है.

आटो सिंक

आजकल अधिकतर स्मार्टफोन में आटो सिंक आन ही रहता है जिसे कारण आपके फोन के डाटा का बैकअप बैकग्राउंड में चलता रहता है. फोटो और वीडियो खुद ही गूगल ड्राइव में अपलोड होते रहते हैं. आटो सिंक को बंद कर दें, आपका फोन पहले के मुकाबले तेज चलने लगेगा.

कैशे मेमोरी क्लियर करें

कुछ देर फोन को इस्तेमाल करने पर स्टोरेज में कैशे मेमोरी बनती है जो आपके फोन की स्टोरेज को घेरती है और ऐसे में आपका फोन स्लो हो जाता है. कैशे क्लियर करने के लिए फोन की सेटिंग्स में जाकर स्टोरेज में जाकर कैशे मेमोरी को क्लियर कर दें.

फोन के आपरेटिंग सिस्टम को अपडेट रखें

कई कंपनियां समय-समय पर स्मार्टफोन के लिए अपडेट जारी करते है. ऐसे में आपके फोन में अपडेट आया है तो जरूर अपडेट करें. इसके अलावा आप सेटिंग्स में अबाउंट में जाकर भी अपडेट के लिए चेक कर सकते हैं.

कोई उपाय काम ना करें तो रीसेट करें

अगर सारे जतन करने के बाद भी फोन तेज नहीं चल रहा है तो डाटा का बैकअप लेने के बाद फोन को फैक्टरी रीसेट करें. रीसेट करने के बाद फोन में सेव, गाना, वीडियो, फोटो और मैसेज सबकुछ डिलीट हो जाएंगे. फोन एकदम नए जैसा हो जाएगा.

जानिए ब्लूबेरी के हैरान कर देने वाले फायदे

सेहतमंद रहने के लिए बेहद जरूरी है कि आपका खानपान हेल्दी हो. हम जो भी खाते हैं उसका असर हमारे सेहत पर सीधे तौर पर होता है. हेल्दी डाइट ले कर हम बहूत सी बीमारियों से बच सकते हैं. इस खबर में हम आपको स्वस्थ रहने का एक राज बताने वाले हैं. हाल ही में एक शोध में ये बात सामने आई कि ब्लूबेरी के सेवन से दिल की बीमारी का खतरा 20 फीसदी कम होता है.

शोधकर्ताओं की माने तो एक महीने में प्रतिदिन 200 ग्राम ब्लूबेरी खाने से खून की नलियां बेहतर ढंग से काम करती हैं और ब्लड प्रेशर नार्मल रहता है. इसके अलावा ये बात भी सामने आई कि दिल के मरीजों के लिए ब्लूबेरी किसी दवाई सलीका असर करती है.

जानकारों की माने तो हाई ब्लड प्रेशर के कारण दिल की बीमारी का खतरा अधिक होता है. अगर समय रहते इस बीमारी का इलाज नहीं किया जाए तो व्यक्ति को हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कीडनी की बीमारी का खतरा अधिक हो जाता है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि ब्लूबेरी को साबूत खाना अधिक असरदार होता है. आपको बता दें कि इस स्टडी में करीब 40 लोगों को शामिल किया गया था. इन सभी लोगों को रोजाना 200 ग्राम ब्लूबेरी का जूस पीने को दिया गया. इसके बाद सबके ब्लड प्रेशर, यूरिन और खून की जांच की गई. इसके अलावा ब्लड फ्लो के बढ़ने से आर्टरीज पर इसके असर को भी काफी गौर से देखा गया. शोधकर्ताओं ने देखा कि 200 ग्राम ब्लूबेरी का जूस पीने से सिर्फ दो घंटे के भीतर ही ब्लड बेसल्स और बेहतर ढंग से काम करने लगी थी. वहीं, एक महीने तक लगातार ब्लूबेरी का जूस पीने से ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी में काफी फायदा पहुंचा.

स्टीम लेना है बालों के लिए बेहद फायदेमंद

स्‍टीम चेहरे के लिए जितना फायदेमंद है ठीक उतना ही फायदेमंद बालों के लिये भी है. आप चाहें तो ब्‍यूटी पार्लर जा कर या फिर अपने घर में ही तौलिये को गरम पानी में डुबो कर बालों को स्‍टीम दे सकती हैं. आइये जानते हैं बालों पर स्‍टीम दिये जाने से क्‍या लाभ होते हैं.

हेयर पोर खुलते हैं

बालों में तेल लगाने से पहले अपने बालों को स्‍टीम करें, इससे बालों के पोर खुल जाते हैं. अगर बालों के पोर्स बंद रहेंगे तो उसमें तेल अंदर तक नहीं जा पाएगा और आपके बालों को सही पोषण नहीं मिल पाएगा. स्‍टीम से जड़े मजबूत बनती हैं.

स्‍कैल्‍प की सफाई

अपने स्‍कैल्‍प को रोजाना साफ करने के लिये स्‍टीम लीजिये. वैसे तो, बालों को शैंपू से धोने पर भी स्‍कैल्‍प साफ हो जाती है, लेकिन इतना ही काफी नहीं होता. अगर आप अपने स्‍कैल्‍प को पास से देखेंगी तो पाएंगी की वह गंदी है और इस गंदगी को बिल्‍कुल साफ करने के लिये स्‍टीम की जरुरत पड़ती है.

बाल बढ़ते हैं

अगर आपके बालों की ग्रोथ अच्‍छी नहीं है, तो स्‍टीम लेना शुरु कर दें. इससे जहां कहीं पर भी बाल कम होंगे वह स्‍टीम दा्रा निकलने लगेंगे.

हेयर स्‍टाइल

गीले बालों में हेयरस्‍टाइल बनाना बहुत मुश्‍किल काम होता है. लेकिन अगर आप भाप ले कर अपने बालों में स्‍टाइल बनाएंगी तो आपको आसानी होगी. इससे बाल बिल्‍कुल भी गीले नहीं होते बल्कि इससे बाल उतने ही गीले होते हैं, जितनी आपको जरुरत होती है.

जब आपकी पार्टनर होती है मूड में, तो करती है ये इशारे

ऐसा कहा गया है कि महिलाओं को समझना बेहद मुश्किल हैं. उनके मन में क्या चल रहा हैं, उनकी क्या भावना हैं उसे केवल वे ही जानती हैं. कई बार जब उनकी अंदर फीलिंग आती हैं तो वे अपने साथी को कुछ बोलती नही हैं परंतु इशारे करती हैं. पर इन्हीं इशारों को समझना एक लड़के के लिए बहुत बार मुश्किल हो जाता हैं. उन्हें पता नही चल पाता हैं कि वो क्या करना चाहती हैं. आज आपको कुछ ऐसे ही इशारों के बारे में बताते हैं जिससे आप पता कर सकते हैं कि आप की साथी सेक्स के मूड में हैं.

1. पार्टनर से करीबी :- जब भी आपकी साथी आपको आंखों से कुछ इशारे कर रही हो या आपके बेहद करीब आ जाए. आपको अपनी बाहों में लेने की कोशिश करे तो ये भी आपके लिए एक संकेत हैं. आप इस संकेत को पहचाने और इस पल को जाने ना दे.

2. हाथों द्वारा इशारा :- कई बार महिलाये जब मूड में होती हैं तो अपने पार्टनर को अपने पास ही रखती हैं, उससे बार बार टच होती हैं. इसके अलावा अगर वे अपने हाथों को आपके सिर पर या आपके चेस्ट पर रखती है तो ये भी इस बात का संकेत है कि वो आपके साथ सहज महसूस कर रही है.

3. सांसों का तेज होना :- ऐसा देखा गया हैं की जब भी मनुष्य उतेजित होता हैं तो उसकी सांसें तेज हो जाती हैं. अगर आप के साथी की सांसें भी तेज और गर्म हो रही हों और वो केवल आपको ही निहारती रहें, तो इसका मतलब है कि आपकी साथी मूड में हैं.

4. आपको फॉलो करे :- अगर आपको किसी दिन ऐसा लगे कि आज आपकी साथी आपको फॉलो कर रही हैं. वह केवल वही कर रही जो आप कर रहे हैं या आपको उस काम से खुशी मिले. तो ये भी आपके साथी आपके लिए एक संकेत हैं कि वो आपके साथ रोमांस के मूड में हैं.

जब पकड़े जाएं निकर डाउन

पिछले दिनों दिल्ली में मैट्रो ट्रेन के अंदर का एक एमएमएस तब सुर्खियों में आया जब एक बेखबर प्रेमी जोड़ा आपत्तिजनक अवस्था में प्रेमालाप में व्यस्त दिखा. इंटरनैट की दुनिया में जहां यह क्लिप वायरल हो चुका था, वहीं सैकड़ोंहजारों लोगों के मोबाइल का मसाला भी बन चुका था. कोई इसे मैट्रो रेल प्रशासन की चूक बता रहा था, तो कोई बेशर्मी की हद मान रहा था. मनोचिकित्सक प्रांजलि मल्होत्रा कहती हैं, ‘‘देखिए, युवकयुवतियों के लिए युवा उम्र में 2 मुख्य पहलू होते हैं. पहला आकर्षण, जो अपोजिट सैक्स के प्रति चरम पर होता है और दूसरा, एकदूसरे के फिजिकल संपर्क में आने का होता है.

‘‘उपर्युक्त दोनों ही अवस्थाएं स्वाभाविक हैं और इस समय शारीरिक हारमोंस भी ऐक्टिव रहते हैं. फलस्वरूप, वे एकदूसरे का सामीप्य चाहते हैं और उत्तेजना के आवेग में उन्हें किसी बात की परवा नहीं होती.’’

प्रांजलि बताती हैं कि एक उम्र के बाद युवकयुवतियां मातापिता, भाईबहन से अलग अपनी पहचान बनाना चाहते हैं. शुरुआत  होती है सोशल मीडिया से, जहां वे डीपी में अपना फोटो खींच कर लगाते हैं, एकदूसरे पर कमैंट्स करते हैं, उन्हें दोस्तों व सहेलियों के साथ वक्त बिताना अच्छा लगता है. वे निडर होने लगते हैं और न सिर्फ बातचीत में निडरता होती है, पहनावे में भी निडरता दिखने लगती है. उत्सुकता की चाह में कभीकभी ऐसा कर गुजरते हैं, जो बाद में सामाजिक व नैतिक शर्मिंदगी का कारण बनता है. पकड़े जाने पर उन के लिए स्थिति से सामना करना असहज भी होता है.

कब होता है ऐसा

मातापिता की गाइडैंस व स्कूली शिक्षा से निकलने के बाद कालेज में पढ़ने वाले स्टूडैंट्स आपस में घुलमिल जाते हैं. उन्हें एकदूसरे का साथ व सामीप्य भाने लगता है. यह इच्छा तब और भी ज्यादा जाग्रत हो जाती है जब :

–       छुट्टियों में उन्हें घर जाना हो.

–       कुछ दिन बिछुड़ने का गम हो.

–       होस्टल के कमरे में अकेला रहना पड़े.

–       कोचिंग सैंटर या इंस्टिट्यूट का आखिरी सत्र हो.

–       पोर्न वीडियो देखते समय भी सैक्स संबंध बनाने की इच्छा जाग्रत होती है.

–       पिकनिक व पार्टी के दौरान भी युवाओं में अपने पाटर्नर के साथ सैक्स करने की चाह बढ़ जाती है, क्योंकि माहौल ही ऐंजौयमैंट का होता है. ऐेसे में अपने को रोक पाना संभव नहीं हो पाता.

कहां बनाते हैं संबंध

युवावस्था में एकदूसरे का सामीप्य युवाओं को इतना अधिक सुकून देता है कि वे ज्यादा से ज्यादा समय साथ बिताना चाहते हैं. इसलिए पार्क, राह चलते, सिनेमाघरों, मैट्रो, बस, कार आदि में एकदूसरे का चुंबन, आलिंगन करतेकरते उन में शारीरिक संबंध बनाने की तीव्र इच्छा जाग्रत हो जाती है. इस के लिए वे पिकनिक स्पौट, होटल, घर में, एकांत जगहों में व यहां तक कि झाडि़यों में भी सैक्स संबंध बनाने से गुरेज नहीं करते.

पकड़े जाने का खतरा

युवकयुवती का हाथ में हाथ डाले घूमना, गले लगना, साथ बैठना आजकल के दौर में आम है मगर जब यह साथ शारीरिक संबंधों को अंजाम देने लगता है तो कभीकभी नई मुसीबतों से भी दोचार होना पड़ सकता है. मसलन, पार्क की एकांत जगह अथवा झाडि़यों के पीछे, पिकनिक स्पौट पर, लाइब्रेरी के एकांत में, कार के अंदर, खुली सड़क पर, टैरिस इत्यादि पर सैक्स संबंध बनाते पकड़े जाने पर सामाजिक शर्मिंदगी उठाने के साथसाथ कानूनी डंडा भी चलने का डर बना रहता है.

दिल्ली हाईकोर्ट के एडवोकेट, अवधेश कुमार दुबे कहते हैं, ‘‘सार्वजनिक जगहों पर अश्लीलता अथवा अश्लील हरकत करना न सिर्फ सामाजिक बुराई है बल्कि कानून की नजर में जुर्म भी है, फिर चाहे वे पतिपत्नी ही क्यों न हों. ‘‘सार्वजनिक जगहों पर अश्लील हरकत करते हुए पकड़े जाने पर उन पर आईपीसी की धारा 292 व 294 के तहत कानूनी कार्यवाही भी की जा सकती है.’’

असहज स्थिति

शारीरिक भूख को शांत करने की जल्दी में युवा भूल जाते हैं कि आपत्तिजनक स्थिति में पकड़े जाने पर न सिर्फ पारिवारिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी जिंदगी प्रभावित हो सकती है. युवतियों के लिए तो यह स्थिति और भी नुकसानदायक हो सकती है.

जब पकड़े जाएं

घर कालेज, पार्क, पिकनिक स्पौट या फिर अन्य किसी भी जगह, अनायास ही मित्रों, शिक्षकों, सगेसंबंधियों, मातापिता, भाईबहनों द्वारा रंगेहाथों पकड़े जाने पर घोर शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है. ऐसे में सहज रहें और भागने की कोशिश कतई न करें. गलती स्वीकार करने में ही भलाई है. आगे से दोबारा ऐसी गलती न करने का वादा करें. मातापिता अथवा नजदीकी रिश्तेदारों द्वारा पकड़े जाने पर सहजता से सामना करें और इस  रिश्ते को सरलता से स्वीकारें. सार्वजनिक जगहों पर खुद पर काबू रखें. जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहीं मानषी ग्रोवर कहती हैं, ‘‘फिजिकल रिलेशन मैटर औफ चौइस पर डिपैंड करता है. हां, यह अलग बात है कि छिपे रिश्ते जब उजागर होते हैं, तो उन का सामाजिक दुष्प्रभाव देखने को मिलता है. शिक्षा के प्रारंभिक दौर में सैक्स ऐजुकेशन बढ़ते बच्चों को सहीगलत का निर्णय लेने में सही राह दिखा सकती है.’’

समाजसेवी डा. गुलरेज शेख  (बीडीएस), जो एमपी अल्पसंख्यक मोरचा के प्रदेश उपाध्यक्ष (भाजपा) भी हैं, का मानना है कि बढ़ते बच्चों के शारीरिक हारमोंस जिस तीव्रता से बढ़ते हैं, उस गति से मानसिक रूप से वे मैच्योर नहीं होते. इस उम्र में सैक्स व इस से जुड़ी चीजों में उन की दिलचस्पी स्वाभाविक रूप से जाग्रत होती है. यौन गतिविधियों में शामिल ऐसे बच्चे दिखें भी तो मातापिता या अभिभावक को उन पर डंडे बरसाने के बजाय प्यार से समझाना चाहिए.

VIDEO : कलरफुल स्ट्रिप्स नेल आर्ट

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– अपने नए और पुराने जींस का ध्यान रखें समय के साथ-साथ जींस को भी मरम्मत की जरूरत होती है. अगर उसमें कोई छोटी-मोटी खामियां हो तो दर्जी के पास जाएं, न कि उसे पहनना ही छोड़ दें.

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