भागदौड़ वाली जिंदगी थम सी गई है. दिल्लीमुंबई जैसे भीड़ वाले इलाके भी गांव सरीखे प्रतीत हो रहे हैं क्योंकि सभी अपने घरों में रह रहे हैं. न गलियों में मोटरसाइकिल की आवाज सुनाई दे रही है, न सड़कों पर कारों का तेज हार्न कानों को चुभो रहा है. वहीं पुलिस की मुस्तैदी भी वाकई काबिलेतारीफ है.

एक तरफ घर में ही ऑफिस बन गया है, वहीं बैठेबैठे पेट निकल जाने का खतरा. कोई बोरियत महसूस कर रहा है तो कोई इस बोरियत को दूर करने की कोशिश में लगा है. यह एक दिन का जनता कर्फ्यू नहीं, बल्कि 21 दिनों का लॉक डाउन जैसा कर्फ्यू है.

कुछ लोग तो रात में जाग कर अपना ऑफिस का काम निबटा रहे हैं, जब छोटे बच्चे सो जाते हैं. उसी रात या फिर अगले दिन बॉस को रिपोर्ट कर रहे हैं. वहीं देर रात सोना और सुबह देर से उठना भी किसी सिरदर्दी से कम नहीं.

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भले ही घर में ऑफिस का काम चल रहा है, पर इस बीच आप को अपनी सेहत का भी खयाल रखना है.

तो इस बात का बेहद ध्यान रखें कि अपनी दिनचर्या न बिगड़ने दें. समय पर चाय लें, खाना लें और रोजमर्रा की चीजों को भी जगह दें.

साथ ही, यह भी ध्यान रखें कि कभी खाली पेट न रहें, कुछ न कुछ खाने की चीजें समय समय पर लेते रहें यानी काम अधिक होने के कारण उपवास न करें, कहीं खाली पेट में गैस की समस्या पैदा न हो जाए.

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