‘मगर पूरब में हम जाएंगे कहां?’

‘सिक्किम और कहां,’ वह उसे चौंकाता हुआ सा बोला, ‘वहां तुम्हें भारत-चीन की सीमा भी दिखा देंगे.’

वह चौंक कर बैठ गई, ‘क्या सचमुच, वह भारत-चीन की सीमा देख सकती है. क्या आर्मी वाले उसे वहां जाने देंगे?’

‘और क्या,’ सुधाकर हंस पड़ा था, ‘वहां कोई युद्ध तो हो नहीं रहा, जो जाने नहीं देंगे. अलबत्ता तुम वहां चीनी सिपाहियों से हाथ भी मिला सकती हो, बातें भी कर सकती हो.’

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