उस समय उन दोनों को पता नहीं था कि झगड़े की वजह क्या है. सिर्फ आंसुओं से भरी उदास आंखों से सुधाकर के घर को देखते हुए वह गाड़ी में चढ़ी थी. प्रेम और घृणा, दोनों को ही जैसे उस ने बचपन में ही आत्मसात कर लिया था.

देहरादून से थोड़े समय बाद ही उस के पापा का ट्रांसफर मथुरा हो गया, जहां से उस ने स्नातक की परीक्षा पास की. अंगरेजी से एमए करने के लिए उस ने दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया और वहीं दिल्ली में होस्टल में रह कर अपनी पढ़ाई करने लगी थी.

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