सरिता, बीस साल पहले, जुलाई (द्वितीय) 2006
Woman Struggle: एक बार तकदीर ने अंजलि की खुशियां छीन ली थीं. दूसरी बार उसे फिर अपनी इच्छाओं का गला घोंट कर ऐसा फैसला लेना पड़ रहा था क्योंकि एक मां के लिए उस की ममता से बढ़ कर कुछ नहीं होता. क्या उस का यह त्याग उस की सब से बड़ी जीत थी या सब से बड़ी हार?
‘‘नानी, मां की शादी हो रही है?’’ सौरभ ने उत्सुकता भरे स्वर में अपनी नानी से पूछा तो उन की आंखों में दर्द उमड़ पड़ा. बड़ी कठिनाई से वे ‘हां’ कह पाईं.
‘‘नानी, जैसे फिल्मों में दिखाते हैं वैसे ही मां भी दुलहन बनेंगी?’’ उस ने फिर पूछा.
‘‘मुझेनहीं पता,’’ मीना ने नाती को टालते हुए कहा.
4 वर्ष का सौरभ दुनियादारी से तो बेखबर था लेकिन जो कुछ घर में हो रहा था उसे शायद वह सहजता से स्वीकार नहीं कर पा रहा था. स्वीकार तो घर में कोई नहीं कर पा रहा था लेकिन इस के सिवा दूसरा रास्ता भी नजर नहीं आ रहा था. मीना रोने लगी तो सौरभ उन के नजदीक खिसक आया और उन के आंसू पोंछता हुआ बोला, ‘‘नानी, रोओ मत. अब मैं आप से कुछ नहीं पूछूंगा. बस, एक बात और बता दो, जिन से मम्मी की शादी हो रही है वे कौन हैं?’’
मीना स्वर को संयत करती हुई बोलीं, ‘‘वे तेरे पापा हैं.’’
‘‘अच्छा, मैं अब पापामम्मी दोनों के साथ रहूंगा,’’ सौरभ खुशी से उछल पड़ा तो मीना उस का चेहरा देखती रह गईं.
अंजलि अपनी मां और बेटे की बातें बगल के कमरे में बैठी सुन रही थी. उस के हाथ का काम छूट गया और वह बिस्तर पर निढाल सी लेट गई. अतीत की काली परछाइयां जैसे उस के चारों ओर मंडराने लगी थीं.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





