Hindi Story: सनराइज होटल के लौन में वे गुलाब और गेंदे के पौधों को सींच रहे थे, तभी होटल के मैनेजर अभिलाष ने उन्हें पुकारा, ‘‘विश्वास दा, अब बस करिए. देखिए, आप से कुछ लोग मिलने आए हैं.’’
उन्होंने झूट से सींचना बंद किया और बरामदे की ओर बढ़े.
अभिलाष के साथ एक अधेड़ विदेशी पर्यटक और एक फिल्म कैमरामैन खड़ा था. दोनों ने उन्हें देख कर ‘हैलो’ कहा. विश्वास दा ने सिर ?ाकाया और प्रणाम किया.
तभी अभिलाष बोल उठा, ‘‘दादा, ये विदेशी पर्यटक हैं और हैवलौक द्वीप पर कोई डाक्यूमैंट्री फिल्म बनाना चाहते हैं. मैं ने आप के बारे में बताया, ये लोग आप की फोटो लेंगे, जल्दी से कपड़े बदल कर आइए.
विश्वास दा फौरन होटल के पीछे वाले आउटहाउस में चले गए. मैनेजर पर्यटक और कैमरामैन से बतियाता रहा. कुछ क्षण बाद अपना हुलिया बदल कर लौट आए. उन्होंने सफेद पायजामा और कुरता पहना हुआ था.
अमलतास के पेड़ के नीचे आर्मेट की कुरसियां रखी गई थीं. विदेशी पर्यटक ने दादा को कुरसी पर बैठने को कहा. ठीक उन की ओर मुंह किए कुरसियों पर दोनों पर्यटक महाशय और अभिलाष बैठे हुए थे. कैमरामैन कैमरे को स्टैंड में लगाए उन के पार्श्व में खड़ा था.
‘‘दादा, ये आप से पूछना चाहते हैं कि आज और बीते कल के जमाने के हैवलौक में क्या फर्क है? आप ने अपना संघर्ष कैसे किया? अपनी जमीन को होटलमालिकों को बेच कर क्या आप खुश हैं?’’ अभिलाष ने दादा को बताया.
पहले विश्वास दा ने रूमाल से पसीना पोंछा और अपने को संयत किया. पहली बार कोई उन की वीडियो शूट कर रहा था.
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