Hindi Story: रोमेश अंकल और प्रीति आंटी को वामिका में अपनी बेटी जया की झलक दिखाई दी. वामिका पर इसलिए भी उन की निर्भरता और भरोसा बढ़ता गया. ऐसे में वामिका का उन्हें छोड़ कर जाना दुख दे रहा था, वहीं उस का मुखौटा चढ़ा चेहरा हैरत में डाल रहा था.

बह के 4 बज रहे थे. अरुण को जगाते हुए वामिका बोली, ‘‘अलार्म बज गया, जल्दी से उठ जाओ.’’

‘‘कुछ देर और सोने दो न.’’

‘‘कैसी बातें करते हो, तुम्हें जाना है यह बात तुम्हें रोज याद दिलानी पड़ती है,’’ वामिका गुस्से से बोली.

मजबूरी में अरुण को उठना पड़ा. उस ने जल्दी से कपड़े पहने और दरवाजे की ओर बढ़ गया.

‘‘गेट खोल कर तालाचाबी वहीं लटका देना और तुम बाहर चले जाना. चाबी मैं आ कर ले लूंगी,’’ वामिका ने रोज की तरह उसे आज फिर याद दिलाया.

‘ओके’ कह कर अरुण जैकेट के हुड से सिर ढके हुए चुपचाप बाहर निकल गया.

उस के जाते ही वामिका ने राहत की सांस ली. एक घंटे बाद वह भी दबेपांव कमरे से बाहर गई और गेट का ताला लगा कर चाबी ले कर वापस आ गई. अभी समय बहुत था, उस ने चादर खींची और सो गई.

अरुण वामिका का बौयफ्रैंड था. वामिका रोमेश अंकल के घर पर किराएदार के रूप में रह रही थी. अंकलआंटी काफी बुजुर्ग थे. उन्होंने कमरा किराए पर देने से पहले शर्त रखी थी कि यहां उस से मिलने कोई लड़का नहीं आना चाहिए. वामिका ने घर लेने के लिए हर शर्त मंजूर कर ली थी लेकिन अरुण से दूर रहना उस के लिए नामुमकिन था. अंकल की नजर बचा कर वह रात में अरुण को कमरे में बुला लेती और सुबह उन के उठने से पहले उसे जाने को कहती. इस से परेशानी दोनों को हो रही थी लेकिन कोई दूसरा उपाय नहीं था.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...