Mirzapur Season 3: 3 सीजन ओटीटी पर खूबखूनखच्चर मचाने के बाद 'मिर्जापुर' अब सिनेमाघरों में आई है. यह बौलीवुड में नया प्रयोग है जहां सीरीज पर आधारित कोई फिल्म आई हो. हालांकि मेकर्स ने कोई नया तीर नहीं मारा है, उन्होंने वही कहानी लगभग नए रंगरोगन के साथ सवा 3 घंटे में सजा कर पेश किया है.

फिल्म की टाइमलाइन आप को वापस 2018 के पहले सीजन के 6ठे एपिसोड के आसपास ले जाएगी जहां गुड्डू (अली फजल) और बबलू (जितेंद्र) मिर्जापुर के बाहुबली कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) का गैंग जौइन कर चुके हैं, यानी वह समय जब मुन्ना भैया (द्विवेंदु) जिंदा था.

कहानी में नया तड़का लगाने के लिए राजस्थान से बब्बन यादव (रवि किशन) की एंट्री कराई गई है. बब्बन चोरी की ड्रग्स का अपना धंधा ले कर कालीन भैया के पास बिजनैस प्रपोजल लाता है. लेकिन बब्बन सिर्फ माल बेचने नहीं आया, उस की नजर मिर्जापुर की गद्दी पर है. इस के लिए वह कालीन का पुराना राइवलरी रति शंकर से हाथ मिलाता है और कालीन को निपटाने का प्लान बनाता है.

बस, इसी के इर्दगिर्द पूरी फिल्म का तानाबाना बुना गया है जिस का अंत बब्बन के खात्मे पर खत्म होता है. वहीं बब्बन यादव के राइटहैंड के तौर पर बिरजू लौहार (मोहित मलिक) को भी बढ़िया ट्विस्ट के लिए के साथ लाया गया है. बिरजू का संबंध कालीन भैया की पत्नी बीना त्रिपाठी (रसिका दुग्गल) से होता है.

मोटामोटी फिल्म में कुछ नए किरदारों के साथ सारे पुराने किरदार भर दिए गए हैं और दिमाग लगाने का काम दर्शकों पर छोड़ दिया गया है कि वे याद करें कि पुराने किरदारों के आपस में क्या समीकरण थे. फिल्म में गालीगलौज, वायलैंस और इंटिमेट सीन डाले गए हैं जो बिलकुल भी परिवार के साथ देखने लायक नहीं है. हालांकि जिन्होंने सीरीज देखी है उन्हें यह मसाला फिल्म लगेगी क्योंकि वे किरदारों के बैकग्राउंड को रिलेट करते हुए देखेंगे. फिल्म में दोतीन ट्विस्ट के साथ थ्रिल भी ठीकठाक डाला गया है.

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