क्रिकेट की सब से बड़ी प्रतियोगिता यानी आईसीसी क्रिकेट विश्वकप 2019 का आगाज इंग्लैंड के शहर वेल्स में 30 मई से शुरू हो रहा है. दुनियाभर में करोड़ों क्रिकेट के दीवाने इस महाकुंभ का इंतजार कर रहे हैं. भारतीय टीम के फैंस तो क्रिकेट के कुछ ज्यादा ही दीवाने हैं.

इस दीवानगी की वजह भी है. पिछले कुछ वर्षों से टीम इंडिया जिस अंदाज में खेल रही है और देशविदेश की धरती पर जीत दर्ज कर रही है उस से क्रिकेट के दीवानों की एक और वर्ल्डकप जीतने की उम्मीद ज्यादा बढ़ गई है.

विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन, के एल राहुल, विजय शंकर, महेंद्र सिंह धौनी, दिनेश कार्तिक, केदार जाधव, हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा, जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी, युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव को इस विश्वकप के लिए चुना गया है.

इन खिलाडि़यों को देख कर यही लगता है कि चयनकर्ताओं ने टीम इंडिया को बैलेंस किया है. एक तरफ जहां युवा खिलाडि़यों का जोश देखने को मिलेगा  वहीं दूसरी तरफ उम्रदराज होते खिलाडि़यों का जोश व अनुभव. इस का सब से बड़ा सुबूत धौनी हैं जिन्होंने पिछले दिनों विदेशी धरती पर अपने शानदार प्रदर्शन से यह साबित किया है कि अनुभव के साथ युवाओं जैसा जोश उन में अभी भी बरकरार है.

इस टीम के साथ सब से बड़ा प्लस पौइंट यह है कि अब केवल एक बल्लेबाज के इर्दगिर्द टीम इंडिया का प्रदर्शन टिका नहीं रह गया है. पिछले कुछ मैचों में यह देखा गया है कि रोहित शर्मा, शिखर धवन, विराट कोहली, केदार जाधव जैसे बल्लेबाज अपनी भूमिका बखूबी निभा रहे हैं. इन में से किसी एक बल्लेबाज के जल्दी आउट हो जाने से ऐसा नहीं होता है कि टीम जल्दी ढेर हो जाती है. इन में से कोई न कोई बल्लेबाज टीम को संभाल लेता है.

बल्लेबाजी में कप्तान विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन, के एल राहुल के नाम सब से ऊपर हैं. लेकिन जब ये धुरंधर फेल हो जाएंगे तो टीम इंडिया को जीत में तबदील कराने का माद्दा रखने वाले महेंद्र सिंह धौनी हैं. आईपीएल के मैचों में उन्होंने यह साबित भी किया है.

टीम इंडिया के पास जहां चौकोंछक्कों की बारिश करने वाले हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा और केदार जाधव जैसे औलराउंडर हैं तो जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी जैसे तेज गेंदबाज के अलावा युजवेंद्र चहल व कुलदीप यादव जैसे स्पिन गेंदबाज भी हैं जो किसी भी बल्लेबाज को मैदान से बाहर का रास्ता दिखाने में माहिर हैं.

टीम इंडिया इंग्लैंड की जमीन पर उस इतिहास को दोबारा दोहराना चाहेगी जो 1983 में कपिल देव की टीम ने किया था.

हालांकि, टीम इंडिया ने विदेशी धरती पर हालफिलहाल कई कारनामे किए हैं. टैस्ट मैचों में आस्ट्रेलिया की धरती पर आस्ट्रेलिया को हराना आसान नहीं था, लेकिन टीम इंडिया ने विदेशी धरती पर इतिहास रचा. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि टीम इंडिया विदेशी धरती पर ढेर हो जाती है. महेंद्र सिंह धौनी, विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन जैसे बल्लेबाजों को विदेशी धरती पर खेलने का खासा अनुभव है.

हां, केदार जाधव, रवींद्र जडेजा व विजय शंकर को थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन जो अनुभवी बल्लेबाज हैं उन्हें ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा बशर्ते कि वे उछाल वाली पिचों पर खास ध्यान रखें. टीम इंडिया की एक कमजोरी हमेशा से रही है, क्षेत्ररक्षण की. विदेशी खिलाडि़यों की तरह टीम इंडिया के खिलाडि़यों को फुरतीला बनना होगा. यदि आप एक रन बचाते हैं या फिर सटीक निशाने से गिल्ली उड़ा कर बल्लेबाज को बाहर का रास्ता दिखाते हैं तो यह बड़ी उपलब्धि होगी क्योंकि यहां तो एक रन से ही पासा पलट जाता है.

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टीम इंडिया अपना पहला मैच दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलेगी और हैंपशायर के जिस मैदान में टीम इंडिया खेलेगी वह बल्लेबाजों के लिए अनुकूल माना जाता है. टीम इंडिया ने वर्ष 2004 में इसी ग्राउंड पर केन्या के विरुद्ध खेलते हुए 98 रन से जीत दर्ज की थी तो वहीं इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए टीम इंडिया को वर्ष 2007 और वर्ष 2011 में हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन इस मैदान में टीम इंडिया ने केन्या के विरुद्ध 4 विकेट पर सर्वाधिक 290 रन बनाए थे तो वहीं दक्षिण अफ्रीका ने इंग्लैंड के खिलाफ 5 विकेट पर सर्वाधिक 328 रन बनाए थे.

यानी, टीम इंडिया का पहला मुकाबला रोमांचक और चुनौती वाला होगा. लेकिन यह मैदान बल्लेबाजों के लिए माकूल है जो टीम इंडिया के पास है. खैर, यह तो एक मैच और मैदान की बात है लेकिन अगर इतिहास दोहराना है तो ऐसे कई मैदानों और मैचों में टीम इंडिया को सर्वश्रेष्ठ खेल का प्रदर्शन करना पड़ेगा, तभी इतिहास दोहरा पाएंगे और जो दर्शक या फैंस समय बरबाद कर के मैच देखते हैं उन्हें कुछ तो सुकून मिलेगा.

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