Bhabiji Ghar Par Hain! (2026) - Movie Review :
यह एक हिट टीवी सीरियल पर आधारित कौमेडी फिल्म है. यह हिंदी भाषा का एक सिटकौम है जिस का प्रीमियर 2 मार्च, 2015 को टैलीविजन पर हुआ था. जब इस के इतने सारे शो टीवी पर प्रसारित हो चुके हैं तो निर्देशक को फिल्म बनाने की क्या जरूरत पड़ गई. यह 1990 के दशक के हिंदी सिटकौम ‘श्रीमान श्रीमतीजी’ से प्रेरित है.
‘भाभी जी घर पर हैं’ से पहले कई कौमिक शो टीवी पर प्रसारित हुए, मगर उन में ‘तारक मेहता का चश्मा’ और ‘औफिस औफिस’ अधिक पौपुलर हुए. इस के अलावा ‘हम पांच’, ‘खिचड़ी’, ‘देख भाई देख’ भी खासे चर्चित हुए. 2008 में आया ‘तारक मेहता का उलटा चश्मा’ एक हाउसिंग सोसाइटी में स्थापित परिवार केंद्रित सामाजिक कौमेडी था. वहीं 2001 से 2004 तक चले ‘औफिस औफिस’ में पंकज कपूर के नेतृत्व में देश की नौकरशाही व भ्रष्टाचार पर तीखा व्यंग्य था.
‘भाभी जी घर पर हैं’ कौमेडी शो ने पड़ोसी दंपतियों मिश्रण और तिवारी के इर्दगिर्द घूमता है, जहां पति एकदूसरे की पत्नियों की ओर आकर्षित होते हैं और उन्हें प्रभावित करने के लिए विभिन्न असफल मगर हास्यास्पद तरीकों का उपयोग करते हैं.
दोनों अपनीअपनी पत्नियों के साथ उत्तराखंड निकल जाते हैं. वहां मौका पा कर विभूति और अंगूरी मंदिर निकल जाते हैं. उन की तलाश में पीछे तिवारी और अनिता भी निकल पड़ते हैं. इस सफर में सभी की मुलाकात बाहुबली भाइयों शांति (रवि किशन) और क्रांति (दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ) से होती है. शांति का दिल अंगूरी पर आ जाता है और तिवारी का दिल क्रांति भाभी पर आ जाता है. इस के बाद शुरू होता है गलत कहानियों और मजेदार घटनाओं का सिलसिला.
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