छत्तीसगढ़ आजकल दंतैल वन्य प्राणी हाथियों के आगमन से सुर्खियों में है. ऐसा कोई दिन नहीं होता जब छत्तीसगढ़ में हाथी मारा नहीं जाता, मर नहीं जाता, अथवा किसी को मार नहीं देता. अथवा गांव में आकर भय का माहौल पैदा नहीं कर देता या हाईवे पर चलने लगता है.

लगभग 250 हाथियों का अलग-अलग झुंड महासमुंद, रायगढ़ , सरगुजा , कोरबा अंचल में निरंतर भ्रमण कर रहा है इस आगमन से लोग मुसीबत जदा हैं. वहीं हाथी भी अपने रहवास के लिए , स्वच्छंद जीवन के लिए आक्रमक हो गया है. हाथी अगर युवा है तो उसे लगभग एक टन भोज्य के रूप में आहार चाहिए होता है. प्रस्तुत है छत्तीसगढ़ के वन्य प्राणी हाथियों और आम आदमी के संघर्ष पर एक खास रिपोर्ट-

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