लेखिका- आशा शर्मा

आदिकाल से ही औरतों के लिए शुचिता यानी वर्जिनिटी एक आवश्यक अलंकार के रूप में निर्धारित कर दी गई है. यकीन न हो तो कोई भी पौराणिक ग्रंथ उठा कर देख लीजिए.

अहिल्या की कहानी कौन नहीं जानता? शुचिता के मापदंड पर खरा नहीं उतरने के कारण जीतीजागती सांस लेती औरत से पत्थर की शिला में परिवर्तित हो जाने का श्राप मिला था.

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