आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी का जन्मदिन है. इसी उपलक्ष्य में भाजपा ने 14 से 20 सितम्बर तक मोदी जी के जन्मदिन को ख़ास बनाने के लिए साप्ताहिक उत्सव की योजना बना रखी थी. किन्तु यह दाव उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है. आज के दिन दुनिया भर के अलग देशों के नेताओं ने भले ही प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई दी हों, किन्तु देश का युवा देश में बढ़ रही बेरोजगारी को ले कर भारी गुस्से में नजर आ रहा है.
यही कारण भी है कि युवाओं ने आज के दिन (17 सितंबर) को राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस घोषित कर दिया. और यह घोषणा प्रधानमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में की गई है. और इसी कारण यह “#राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस” और “#नेशनल एम्प्लॉयमेंट डे” ट्विटर पर लगातार ट्रेंड कर रहा है. यह हैश सिर्फ ट्रेंड नहीं कर रहा बल्कि इस ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन को लेकर चल रहे सभी हैशटेग को काफी पीछे पछाड़ दिया है. यह हेशटेग एक तौर से सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया प्रदर्शन में भी बदल चूका है.
युवा आज के दिन को बेरोजगार दिवस क्यों कह रहे हैं?
नेशनल स्टेटिस्टिक्स ऑफिस (एनएसओ) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि भारत में अप्रैल-जून क्वार्टर की जीडीपी -23.9 प्रतिशत तक नीचे गिर गई. यह भारत की अब तक की बड़ी त्रासदियों में से एक बताया जा रहा है. इसे लेकर सरकार कहती रही कि यह कोरोना का इफ़ेक्ट था, लेकिन हकीकत यह कि देश की जीडीपी लगातार गिरती हुई ही आ रही थी. जिसे युवा भलीभांति समझ रहा था. और युवाओं में इसे ले कर भारी रोष था. इस के अलावा सब से बड़ा फेक्टर बेरोजगारी का रहा है. पिछले साल के ही आकड़े पर जाया जाए तो देश में पिछले 45 सालों की सब से बड़ी बेरोजगारी चल रही थी. और इस साल यह समस्या कई गुना बढ़ गई है.
सीएमआईई की रिपोर्टो में हुए खुलासे में बेरोजगारी को लेकर कई भयानक खुलासे सामने आए हैं. जिस में रिपोर्ट में कहा गया कि लॉकडाउन के पहले सप्ताह में ही देश में बेरोजगारी डर 23% तक जा पहुंची चुकी है. इसके अलाव कई रिपोर्ट भारत में बेरोजगारी के संकट को लेकर कई ग ग्राउंड सर्वे करवा चुकी है.
इसके अलावा यह माना जा रहा है कि मोदी सरकार के प्रति युवाओं का एक प्रकार का रोष बीताया जा रहा है, जहां एकेडमी से जुड़े छात्रों ने इस कैंपेन में हिस्सा लिया है, हालिया समय में जिस प्रकार से पुरे देश के छात्रों का एग्जाम को ले कर सरकार के खिलाफ विरोध चलता रहा वह भी इस का एक बड़ा फेक्टर है.
सोशल मीडिया पर पहले भी विरोध
इस से पहले भी यूनिवर्सिटी एग्जाम कोक लेकर ट्विटर कैंपेन लगातार सरकार के खिलाफ सक्रिय रहा है. बल्कि एग्जाम देने वाले युवा लगातार 3 महीने तक सरकार के इस अड़ियल फैसले के खिलाफ सोशल मीडिया कैंपेन चलते रहे. इसके बाद “डिसलाइक” वाला मामला यूट्यूब पर मोदीजी के लिए बड़ा सरदर्द बन चूका है. यह पहली बार ऐसा हुआ कि मोदी के चर्चित शो ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लाइक के मुकाबले लाखों की समझया में डिसलिखे देखने को मिले. उसके बाद तो फिलाहाल यह रवायत बन गई है कि भाजपा के यूट्यूब चैनल से कोई भी वीडियो अपलोड होती है उस में लिखे से अधिक डिसलाइक देखने को मिलता है.
विपक्ष भी चार्ज मोड में
ऐसे में मोके की नजाकत को समझते हुए, युवाओं के साथ इस कैंपेन में विपक्ष ने भी हिस्सा लिया है. कांग्रेस नेता व पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर पर पहले तो प्रधानमत्री को जन्मदिन की बधाई दी, उसके बाद कैम्पेन में हिस्सा लेते हुए “नेशन एम्प्लॉयमेंट डे” के नाम से हेशटेग लगाकर सरकार और मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने ट्वीट में लिखा’
“यही कारण है कि आज देश का युवा राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस मनाने पर मजबूर है.रोजगार सम्मान है. सरकार कब तक यह सम्मान देने से पीछे हटेगी?”
बहरहाल, युवाओं के आक्रोश का सामना इस बार प्रधानमन्त्री को खुद करना पड़ रहा है, जाहिर है इस समय देश में हालत सामान्य बिलकुल भी नहीं हैं. शिक्षा, बेरोजगारी, और जीडीपी को ले कर युवा सरकार से ख़ासा नाराज चल रहे हैं. अब इसे देख कर कहा जा सकता है कि देश की गरीब आबादी जिस पर सब से ज्यादा चोट इस लॉकडाउन पर पड़ी, वह ट्विटर पर तो नहीं आ सकती लेकिन आती तो शायद सरकार को इस से और भयानक रोष देखने को मिल सकता था.

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