Editorial : जैसा हमारे यहां मंदिरों में बोलबाला है वैसा ही अमेरिका में चर्चों का है. रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप सिरफिरे होने के बावजूद अगर राष्ट्रपति बन पाए हैं तो चर्चों की वजह से ही.
अमेरिका में चर्चों ने किस तरह अपना साम्राज्य स्थापित कर रखा है, इस का एक उदाहरण यूटा नाम के राज्य में घाटे में चल रहे शहर फिलमोर के बारे में पता चलना है. 3,000 से कम आबादी वाले इस शहर में चर्चों की भरमार है. एक है सैंट्रल बैपटिस्ट चर्च, उस के हौल में 150 लोग एकसाथ बैठ कर पास्टर के प्रवचन सुन सकते हैं. हर रविवार को सुबह 10 बजे संडे मौर्निंग वर्शिप होती है. बच्चों के लिए संडे बाइबिल स्कूल 10 बजे शुरू होता है और सप्ताह में एक बार वयस्कों को 7 बजे शाम को बाइबिल की पट्टी पढ़ाई जाती है.
ओपन डोर बैपटिस्ट चर्च भी संडे मौर्निंग के प्रवचन के लिए बुलाता है.
होली फैमिली कैथोलिक मिशन नाम का एक और चर्च कैथोलिकों के लिए है. अमेरिका में प्रोटेस्टैंटों और कैथोलिकों के अलावा दूसरे कई और सैक्ट हैं और हरेक के चर्च वहां के हर छोटेबड़े शहर में स्टारबक्स और मैक्डोनल्ड की तरह हैं.
मौरमोनों के 5 चर्च हैं ताकि किसी को डोनेशन देने के लिए ज्यादा दूर जाना न पड़े. हर चर्च में दानपात्र हैं और चैक व बैंकट्रांसफर से पैसा चढ़ाने की सुविधा उपलब्ध है.
चर्च के बिना लोग न शादी कर सकते, न बच्चे को समाज में ला सकते हैं और न ही मौत पर चार लोगों को इकट्ठा कर सकते हैं.
आबादी कितना पैसा देती है, यह गुप्त है. लेकिन तसवीरें साफ बताती हैं कि सभी चर्चों के पास खासा पैसा है. ये सभी चर्च डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक हैं. ये बाइबल प्रवचन के बाद अकसर ट्रंप प्रवचन देते हैं. उम्मीद की जाती है कि हर भक्त अपनी आय का 10 फीसदी हिस्सा चर्च को दान करे और साथ ही, चर्च के कार्यक्रमों में खर्च भी करे.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





