Editorial : चीन आज न केवल भारी मात्रा में सस्ते कंज्यूमर गुड्स बना रहा है बल्कि नई वैज्ञानिक व तकनीकी खोजें भी निरंतर कर रहा है. अमेरिकी और यूरोपीय निर्माता चीन से आज उसी तरह भयभीत हैं जैसे 5 दशकों पहले वे जापान से थे.
चीन इलैक्ट्रिक व्हीकल्स बनाने में सब से आगे है. लाखों की गिनती में बीवाईडी व अन्य चीनी ब्रैंड्स यूरोप में छा गए हैं. स्टोर तो पहले से ही चीनी कपड़ों, खिलौनों, घरेलू सामान से लदे पड़े हैं.
आम चीनी अभी भी कम सुविधाओं के साथ रह सकता है, इसलिए उन के पास बहुतकुछ बचत होनी ही है जो देश निर्माण, शिक्षा, सड़कों, विशाल भवनों आदि में निवेश हो रही है. यूरोप और अमेरिका अपनी मेहनत व नए सामान का मोटा फायदा आज ही खा जाना चाहते हैं. चीन में विवाह न करने से एक बड़ी संख्या औरतों की है जो पुरुषों के बराबर काम कर रही हैं.
चीन की विशेषता उस के यहां धर्म न होना है. उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और भारत जैसे देश अपना काफी समय व शक्ति धर्म में लगा रहे हैं. भारत में तो सारी बचत धार्मिक गंगा में बहा दी जाती है जहां वह बदबूदार गटर के साथ मिल कर हर रोज नष्ट हो रही है.
चीन की प्रयोगशालाएं दुनिया को सिखा रही हैं, दुनिया से अब वे सीख नहीं रहीं. अमेरिका और यूरोप की सवाल करने की शक्ति अब धूमिल हो गई है. चीन की आंतरिक क्षेत्रीय प्रतियोगिता उसे लगातार बढ़ने को प्रेरित कर रही है. अमेरिका में जहां पहले नए निर्माण होते थे, अब घुसपैठियों को पकड़ने या उन्हें पकड़ने से रोकने के लिए समय लगने लगा है. इमीग्रेशन एंड कस्टम एनफोर्समैंट (आइस) में लोग ज्यादा भरती किए जा रहे हैं बजाय खोजी प्रवृत्ति जगाने वाली कंपनियों में.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





