'अरे हमारी 'हिडिम्बा' के आगे तो उसकी बोलती बंद हो जाती है. आगे पीछे दुम हिलने लगता है.लगता ही नहीं कि मेरा बॉस है. 'हिडिम्बा' गरजी नहीं कि जनाब की सिट्टी-पिट्टी गुम.... हा,  हा, हा.....' मनोज पार्टी में अपने दोस्तों के आगे पत्नी की तारीफ कर रहा था या उसकी भारी-भरकम काया का मज़ाक उड़ा रहा था, ये बात रागिनी को समझ में नहीं आयी. वो उसकी बात पर ना तो हंस पायी और ना नाराज़ हो पायी. हां, अपने लिए 'हिडिम्बा' शब्द सुनकर उसके दिल को बहुत ठेस पहुंची और पार्टी में आने का सारा मज़ा ख़त्म हो गया. खाना भी उसने बेमन से खाया और घर आकर वह बाथरूम में बंद होकर काफी देर तक सुबकती रही.

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