Saali Mohabbat Movie Review : बौलीवुड की लगभग हर फिल्म में प्यार, लव, रोमांस, मोहब्बत, धोखा होता ही है. बिना मोहब्बत के बौलीवुड चल ही नहीं सकता. मोहब्बत पर कुछ यादगार फिल्में बनी हैं जिन में ‘वीरजादा’, ‘जब वी मेट’, ‘ए दिल है मुश्किल’, ‘कल हो न हो’, ‘जब तक है जान’ और ‘आशिकी.’
यह साली मोहब्बत चीज ही ऐसी है कि जब आप किसी से प्यार करते हैं तो किसी भी हद को आसानी से पार कर लेते हैं. मगर जब आप का यह प्यार आप को धोखा दे तो इसे नफरत में बदलते देर नहीं लगती. वर्ष 2010 में बनी फिल्म ‘लव, सैक्स और धोखा’ भी इसी तरह की फिल्म थी. इस फिल्म में लव की परिणति पहले तो सैक्स में होती है, फिर धोखे में फिल्म में. लव, सैक्स और धोखा पर 3 अलगअलग कहानियां थीं. इस फिल्म को एक महिला कलाकार, जो कई फिल्मों में परदे पर नजर आ चुकी है, टिस्का चोपड़ा ने बनाया है. इस से पहले उस ने शौर्ट फिल्म ‘रुबरू’ बनाई थी.
फिल्म की शुरुआत में ही दर्शकों से एक सवाल पूछा जाता है कि क्या महिलाओं की सुंदरता ही उन की सब से बड़ी खूबी होती है. इसी सवाल से फिल्म की कहानी आगे सेट की गई कि एक आम सी साधारण लड़की को सिर्फ सुंदरता के बल पर न आंका जाए. ‘साली मोहब्बत’ भी एक साधारण लड़की की कहानी है. फिल्म को क्राइम और थ्रिलर पसंद करने वालों को ध्यान में रख कर बनाया गया है. मगर इस फिल्म में लौजिक ढूंढ़ना बेवकूफी होगी.
इतिहास गवाह है कि अति सुंदर महिलाओं ने राजाओं को आपस में लड़वाया, उन्हें ले कर बड़ेबड़े युद्ध हुए. सुंदर औरत की वजह से अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को इस्तीफा देना पड़ा. आजकल रूस, यूक्रेन युद्ध में खूबसूरत लड़कियों को जासूसी के काम में लगाया जा रहा है. इस साली मोहब्बत के पीछे दुनिया पागल है.
फिल्म की कहानी एक घरेलू टाइप की महिला स्मिता (राधिका आप्टे) की है, जो अपने पति व बच्चों के साथ रहती है. वह अपने पुश्तैनी घर में रहती है क्योंकि पिता का देहांत हो चुका है. शरत सक्सेना उस का पड़ोसी है और हितैषी है. स्मिता का पति पकंज तिवारी (अंशुमन पुष्कर) घरजमाई बन कर रह रहा है. उस की नजर स्मिता के पिता के घर पर है. उस ने गजेंदर भैयाजी (अनुराग कश्यप) से काफी कर्जा ले रखा है, जिसे वह स्मिता का घर बेच कर चुकाना चाहता है.
एक दिन स्मिता की ममेरी बहन शालू (सौर सेनी मैत्रा) वहां नौकरी करने आती है और शालू के साथ रहने लगती है. शालू अपने जीजा से सैक्स संबंध बना लेती है. स्मिता को शालू और अपने पति की असलियत पता चल जाती है. वह खामोशी से सब सहती रहती है. अचानक एक दिन स्मिता के पति और शालू का एकसाथ मर्डर हो जाता है. मामले की जांच इंस्पैक्टर रतन पंडित, जिस से शालू की नजदीकियां थीं, (दिवेंदु शर्मा) करता है. अब स्मिता की जान को भी खतरा है.
रतन की जांच से सच की एक ऐसी कड़ी सामने आती है जो न सिर्फ कहानी को नया मोड़ देती है बल्कि उन सभी बातों को भी चुनौती देती है जिन पर यकीन किया था. प्यार, नफरत, लालच और धोखे को ले कर गढ़ी गई कहानी में पात्रों के बीच पूर्वानुमान होता है, मगर यही कहानी अलग मोड़ लेती है.
फिल्म की घिसीपिटी कहानी को नए तरीके से पेश किया गया है. निर्देशिका ने शादीशुदा महिला के संघर्ष को सरल तरीके से दिखाया है. कई जगह कहानी प्रिडिक्टिबल लगती है और कहींकहीं तो बोरिंग भी लगती है. म्यूजिक फिल्म की सब से बड़ी कमजोरी है. राधिका आप्टे की ऐक्टिंग बढ़िया है. अनुराग कश्यप को छोड़ कर बाकी सभी कलाकारों की मेहनत साफ दिखती है. फिल्म में कोई शोरशराबा नहीं है. सिनेमेटोग्राफी बढ़िया है.
मोहब्बत की चाह रखने वाले युवाओं को यह फिल्म पसंद आ सकती है या फिर प्यार में धोखा खाए युवकयुवतियां इसे देख सकते हैं. Saali Mohabbat Movie Review





