दर्शकों ने तो पूरा लुत्फ उठाया लेकिन संस्कृति के ठेकेदारों के पेट में मरोड़े उठीं क्योंकि पहली बार किसी नाटक में स्त्री पुरुष के प्रेम संबंधों को बेहद वास्तविक और सहज रूप से दिखाने की हिम्मत किसी ने की थी. भोपाल के रवीन्द्र भवन में खेला गया नाटक जुगनू की जूलियट उस समय विवादों और आलोचनाओं से घिर गया जब इसमें कथित रूप से कुछ अश्लील दृश्य दिखाये गए. इफ्तेखार नाट्य समारोह के अंतर्गत इस नाटक की कहानी बेहद सपाट थी जिसमें नायिका चांदनी और नायक जुगनू एक दूसरे से प्यार करते हैं जो चांदनी के भाई सल्जू को नागवार गुजरता है.

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