बसपा प्रमुख मायावती अब राजनीति नहीं कर रहीं बल्कि भाजपा की खुशामद ज्यादा कर रहीं हैं जिसमें उनके व्यक्तिगत स्वार्थ और आर्थिक हित भी हैं .  इस सच से परे तय है वे वह दौर नहीं भूली होंगी जब 80 - 90 के दशक में उनके राजनैतिक गुरु और अभिभावक बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम का एक थिंक टेंक हुआ करता था जिसका फुल टाइम काम धर्म ग्रन्थ पढ़ कर उनमें से ऐसे तथ्य और उदाहरण छांटना होता था जिनमे दलितों को तरह तरह से  प्रताडित करने के स्पष्ट संदर्भ और निर्देश हैं .

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