,मारीच , अहिरावन , महिषासुर , असुर ,

उपनाम हो तुम ,

हमारा यज्ञ प्रारंभ होते ही तुम राक्षसों की

तरह तडपोगे;

जान लो इतना कि अब तुम ही केवल

समाज की आवाज ना हो ,

चरित्रहीन , अविश्वासी , श्रद्धाहीन , लीचड़ तुम हो

जलो गलो पिघलो , बेशर्म , बेहया , निर्लज्ज

समाज कलंकी

तुम अपनी ही बैचेनी में जल जाओ .....

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