Satirical Story In Hindi : लोकतंत्र अब जनता की आवाज से नहीं, उस की शिकायतों की गिनती से पहचाना जाने लगा है. समस्याएं जस की तस हैं, बस उन के लिए बनाए गए पोर्टल बदल गए हैं. सिस्टम मुसकरा कर भरोसा दिलाता है कि सबकुछ औनलाइन हो चुका है, बस, समाधान अभी लाइन में है.
राजनजी सुबहसुबह अखबार ले कर बैठते हैं तो सुर्खियां ही उन का रक्तचाप बढ़ाने के लिए काफी होती हैं. अखबार में एक तरफ प्रधानमंत्री शिकायत निवारण पोर्टल पर जनता के भरोसे की बात छपी होती है तो दूसरी तरफ लिखा होता है कि देश में शिकायतों के निस्तारण का नया रिकौर्ड बना है. राजनजी को यह पढ़ कर अपने ही पेट में अपच की गैस हो जाती है पर अफसोस, उन के घर में कुकिंग गैस लाइन नहीं है.
कहानी शुरू होती है मंगल कालोनी से, जिस के चारों तरफ कुकिंग गैस पाइपलाइन का जाल बिछा है, बस, बीच के टुकडे़ यानी राजनजी की मंगल कालोनी अछूती रह गई है. ऐसा नहीं कि सरकार ने काम नहीं किया, उस ने बहुतकुछ किया. उस ने बजट पास किया, घोषणा की, उद्घाटन करवाया, बैनर भी लगवाए लेकिन पाइपलाइन की कृपा वहीं जा कर रुक गई जहां कालोनी के प्रभावशाली बिल्डर का ‘प्रभाव’ शुरू होता है.
बिल्डर का तर्क सीधा है, वे चाहते हैं कि इतनी सारे गैस कनैक्शन एकसाथ उपलब्ध करवाने के एवज में गैस कंपनी बिना रसीद ‘सुविधा शुल्क’ प्रदान करे. उन की मांग पूरी न करने तक पाइपलाइन कालोनी की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकती. यह उन का ‘प्राइवेट कस्टम चैकपोस्ट’ है, जिसे न तो पुलिस रोक सकती है, न प्रशासन और न ही कोई समाधान पोर्टल.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





