Arvind Kejriwal : शराब घोटाले मामले में अरविंद केजरीवाल सरकार बेदाग साबित हुई है. अदालत ने सिर्फ फैसला ही नहीं दिया है बल्कि सीबीआई और ईडी जैसी जांच एजेंसियों की जम कर खिंचाई भी की है. ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है लेकिन सुधरने का नाम ये दोनों ही एजेंसियां नहीं ले रहीं जो सरकार के इशारे पर नाचती, खासतौर से, विपक्षी नेताओं को फंसाती हैं लेकिन अदालत में वे कुछ साबित नहीं कर पातीं, यानी, इन का काम भाजपाविरोधी नेताओं का मनोबल गिराना रह गया है. यही हाल सीएजी का भी है, जिस का औडिट अकसर मनगढ़ंत होता है , जो जांच में अहम रोल निभाता है.
27 फरवरी, 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत के विशेष जज जितेंद्र सिंह के एक फैसले ने भारत के चुनावी लोकतंत्र और देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों की कलई एक बार फिर खोल कर रख दी. दिल्ली की पिछली केजरीवाल सरकार, जिस के खिलाफ 100 करोड़ रुपए के शराब घोटाले की जांच देश की सब से बड़ी जांच एजेंसियां सैंट्रल ब्यूरो औफ इन्वैस्टीगेशन (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रही थीं, के सभी आरोपियों को कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया. कानूनी तौर पर इसे डिस्चार्ज करना कहते हैं जिस में आरोप तय होने से पहले ही आरोपमुक्त कर दिया जाता है, यानी, मामला ट्रायल पर ही नहीं आता.
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपी अब इस घोटाले से मुक्त हैं. यही नहीं, कोर्ट ने सीबीआई और ईडी के काम के तरीके और उन की नीयत पर सवाल भी उठाए, कहा कि यह पूरा केस एक फ्रौड केस है, जिस में न कोई रिकवरी हुई, न पैसे के लेनदेन को कोई एजेंसी साबित कर पाई.
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