Health Issues: उम्र बढ़ने के साथ लगभग सभी पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार धीरे-धीरे बढ़ता है. इसे चिकित्सकीय भाषा में बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) कहते हैं. ये अधिकतर उनके पेशाब करने के तरीके में अचानक बदलाव के आने से होता है, मसलन बार-बार टॉयलेट जाना, पेशाब करने में ज़ोर लगाना आदि. कई बार लोग इससे डर जाते है और समझने लगते है कि कहीं उन्हे कैंसर तो नहीं हुआ. मन में डर लगना बहुत ही स्वाभाविक है, लेकिन राहत की बात यह है कि शरीर में होने वाली ऐसी हर समस्या उतनी डरावनी नहीं होती, जितना हम सोच लेते हैं.

इस बारें में मुंबई की कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, की यूरो ऑन्कोलॉजी, रोबोटिक और लेप्रोस्कोपिक यूरो सर्जन डॉ. आकाश शाह, कहते है कि प्रोस्टेट अखरोट के आकार की एक ग्रंथि होती है, जो पेशाब की थैली के ठीक नीचे होती है. अधिकतर उम्र बढ़ने के साथ इसमें कुछ सामान्य बदलाव आते हैं. अक्सर हमें जिन लक्षणों से डर लगता है, वे जानलेवा नहीं होते, बल्कि वे केवल हमारे शरीर की ओर से एक इशारा होते हैं कि अब हमें अपने स्वास्थ्य पर थोड़ा और ध्यान देने की ज़रूरत है.

प्रोस्टेट से जुड़ी ज़्यादातर समस्याओं के पीछे मुख्य रूप से दो कारण होते हैं.  इन्हें समझ लेने से बीमारी का डर और रहस्य कम हो जाता है,

  • बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH): इसे आसान भाषा में कहें तो, यह बस उम्र के साथ प्रोस्टेट का बढ़ना है, यह कैंसर नहीं होता. इसे उम्र के साथ होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव मान सकते हैं, जो थोड़ा असुविधाजनक ज़रूर हो सकता है, क्योंकि जैसे-जैसे प्रोस्टेट धीरे-धीरे बढ़ता है, यह मूत्र नली (urethra) पर दबाव डालता है, जिससे पेशाब करने में दिक्कत आने लगती है. कई पुरुषों को इन लक्षणों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनमें असहजता बढ़ती जाती है.
  • प्रोस्टेटाइटिस (Prostatitis):

यह समस्या केवल उम्र वाले व्यक्ति की ही नहीं, बल्कि 30 और 40 की उम्र के युवाओं में देखी जाती है. असल में यह प्रोस्टेट में होने वाली सूजन या इन्फेक्शन है. इसकी वजह से अचानक पेट या कमर के निचले हिस्से में भारीपन और तेज़ दर्द महसूस हो सकता है. कभी-कभी यह समस्या लंबे समय तक भी बनी रह सकती है.

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