कब तक जवानों की आहुति देते रहेंगे हम?

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सामाजिक जीवन में हर इंसान सुकून भरी जिन्दगी जीना चाहता है, मगर उन लोगों की जिन्दगी कैसी होती होगी, जो हर पल डर, भूख,जिल्लत, उत्पीड़न, बलात्कार और गोलियों का सामना करते गुजारते हैं. उनकी पीड़ा का अन्दाजा हम शहर में सुकून की जिन्दगी बसर कर रहे लोग कभी लगा ही नहीं सकते. असमानता और दमन से विद्रोह पैदा होता है और नक्सलवाद भी इसी दमन और असमानता का नतीजा है. भारत के एक फीसद लोगों ने देश के 73 फीसदी धन पर कब्जा किया हुआ है. यकीनन इस तरह की असमानताओं में हमेशा असंतोष के बीज होते हैं, जिनमें विद्रोह पैदा करने की क्षमता होती है.

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