लोकसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया बेहद लंबी है. लगभग 2 महीने तक चुनाव का कामकाज चल रहा है. बहुत सारे सरकारी विभागों में कामकाज ठप्प है. सरकारी कर्मचारी चुनावी ड्यूटी पर है. यहा तक की पुलिस विभाग में भी बहुत सारे केस पेडिंग है. पुलिस चुनावी ड्यूटी में लगी है. सबसे खराब हालत पोलिंग बूथ पर ड्यूटी देने वाले कर्मचारियों की होती है. इनको अपने घर से दूर गांव-गांव ऐसी जगहों पर जाना होता है जहां रहने खाने तक की कोई व्यवस्था नहीं होती है. किसी जानपहचान वाले के घर रूकना या फिर मतदान स्थल पर रात गुजारनी पड़ती है.इस दौरान वह अपने घर परिवार के संपर्क से भी दूर रहते है. ड्यूटी के समय उनको अपने फोन तक के प्रयोग की अनुमति नही होती है. सबसे अधिक परेशानी शिक्षा विभाग में काम करने वाली शिक्षिकाओं की है. इनमें से तमाम के छोटे बच्चे है. एकल परिवार में रहने के कारण वह बच्चों को छोड़ नहीं सकती और ड्यूटी के समय साथ भी नहीं रख सकती.

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