21 दिन के लाकडाउन की घोषणा के बाद पूरा देश थम गया. देश बोले तो घिसती रगड़ खाती इकोनोमी. इस इकोनोमी में खुद को सुरक्षित पाते वह मालदार लोग आते हैं जिन की तिजोरियां भरी हुई हैं, बैंक खातों के अंक हर सेकंड बढ़ते जाते हैं. उन्हें चिंता है तो अपने नफेनुकसान की. गिरते शेयरों की. बंद पड़े अपने कारखानों की. फिर आता है वह पढ़ालिखा तबका जिन के लिए कोरोना से लड़ाई मतलब बालकोनी से हाथ हिलाना, सोशल मीडिया पर ‘घरों पर ही रहने’ का सन्देश देना, कहीकहीं भूखे को खाना खिला इन्स्टा, ट्विटर पर फोटो चिपका देना और पलायन करने वाले गरीब मजदूरों को दिन भर गाली देना है.

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