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रिटर्न गिफ्ट- भाग 1: अंकिता को बर्थडे पर क्या गिफ्ट मिला

मैं  कालिज से 4 बजे के करीब बाहर आई तो शिखा और उस के पापा राकेशजी को अपने इंतजार में गेट के पास खड़ा पाया.

‘‘हैप्पी बर्थ डे, अंकिता,’’ शिखा यह कहती हुई भाग कर मेरे पास आई और गले से लग गई.

‘‘थैंक यू. मैं तो सोच रही थी कि शायद तुम्हें याद नहीं रहा मेरा जन्मदिन,’’ उस के हाथ से फूलों का गुलदस्ता लेते हुए मैं बहुत खुश हो गई.

‘‘मैं तो सचमुच भूल गई थी, पर पापा को तेरा जन्मदिन याद रहा.’’

‘‘पगली,’’ मैं ने नाराज होने का अभिनय किया और फिर हम दोनों खिलखिला कर हंस पड़े.

राकेशजी से मुझे जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ मेरी मनपसंद चौकलेट का डब्बा भी मिला तो मैं किसी छोटी बच्ची की तरह तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं पाई.

‘‘थैंक यू, सर. आप को कैसे पता लगा कि चौकलेट मेरी सब से बड़ी कमजोरी है? क्या मम्मी ने बताया?’’ मैं ने मुसकराते हुए पूछा.

‘‘नहीं,’’ उन्होंने मेरे बैठने के लिए कार का पिछला दरवाजा खोल दिया.

‘‘फिर किस ने बताया?’’

‘‘अरे, मेरे पास ढंग से काम करने वाले 2 कान हैं और पिछले 1 महीने में तुम्हारे मुंह से ‘आई लव चौकलेट्स’ मैं कम से कम 10 बार तो जरूर ही सुन चुका हूंगा.’’

‘‘क्या मैं डब्बा खोल लूं?’’ कार में बैठते ही मैं डब्बे की पैकिंग चैक करने लगी.

‘‘अभी रहने दो, अंकिता. इसे सब के सामने ही खोलना.’’

शिखा का यह जवाब सुन कर मैं चौंक पड़ी.

‘‘किन सब के सामने?’’ मैं ने यह सवाल उन दोनों से कई बार पूछा पर उन की मुसकराहटों के अलावा कोई जवाब नहीं मिला.

‘‘शिखा की बच्ची, मुझे तंग करने में तुझे बड़ा मजा आ रहा है न?’’ मैं ने रूठने का अभिनय किया तो वे दोनों जोर से हंस पड़े थे.

‘‘अच्छा, इतना तो बता दो कि हम जा कहां रहे हैं?’’ अपने मन की उत्सुकता शांत करने को मैं फिर से उन के पीछे पड़ गई.

‘‘मैं तो घर जा रही हूं,’’ शिखा के होंठों पर रहस्यमयी मुसकान उभर आई.

‘‘क्या हम सब वहीं नहीं जा रहे हैं?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘फिर तुम ही क्यों जा रही हो?’’

‘‘वह सीक्रेट तुम्हें नहीं बताया जा सकता है.’’

‘‘और आप कहां जा रहे हैं, सर?’’

‘‘मार्किट.’’

‘‘किसलिए?’’

‘‘यह सीक्रेट कुछ देर बाद ही तुम्हें पता लगेगा,’’ राकेशजी ने गोलमोल सा जवाब दिया और इस के बाद जब बापबेटी मेरे द्वारा पूछे गए हर सवाल पर ठहाका मार कर हंसने लगे तो मैं ने उन से कुछ भी उगलवाने की कोशिश छोड़ दी थी.

शिखा को घर के बाहर उतारने के बाद हम दोनों पास की मार्किट में पहुंच गए. राकेशजी ने कार एक रेडीमेड कपड़ों के बड़े से शोरूम के सामने रोक दी.

‘‘चलो, तुम्हें गिफ्ट दिला दिया जाए, बर्थ डे गर्ल,’’ कार लौक कर के उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और उस शोरूम की सीढि़यां चढ़ने लगे.

कुछ दिन पहले मैं शिखा के साथ इस मार्किट में घूमने आई थी. यहां की एक डमी, जो लाल रंग की टीशर्ट के साथ काली कैपरी पहने हुई थी, पहली नजर में ही मेरी नजरों को भा गई थी.

शिखा ने मेरी पसंद अपने पापा को जरूर बताई होगी क्योंकि 20 मिनट में ही उस डे्रस को राकेशजी ने मुझे खरीदवा दिया था.

‘‘वेरी ब्यूटीफुल,’’ मैं डे्रस पहन कर ट्रायल रूम से बाहर आई तो उन की आंखों में मैं ने तारीफ के भाव साफ पढ़े थे.

उन्होंने मुझे डे्रस बदलने नहीं दी और मुझे पहले पहने हुए कपड़े पैक कराने पड़े.

‘‘अब हम कहां जा रहे हैं, यह मुझे बताया जाएगा या यह बात अभी भी टौप सीक्रेट है?’’ कार में बैठते ही मैं ने उन्हें छेड़ा तो वह हौले से मुसकरा उठे थे.

‘‘क्या कुछ देर पास के पार्क में घूम लें?’’ वह अचानक गंभीर नजर आने लगे तो मेरे दिल की धड़कनें बढ़ गईं.

‘‘मम्मी आफिस से घर पहुंच गई होंगी. मुझे घर जाना चाहिए,’’ मैं ने पार्क में जाने को टालना चाहा.

‘‘तुम्हारी मम्मी से भी तुम्हें मिलवा देंगे पर पहले पार्क में घूमेंगे. मैं तुम से कुछ खास बात करना चाहता हूं,’’ मेरे जवाब का इंतजार किए बिना उन्होंने कार आगे बढ़ा दी थी.

अब मेरे मन में जबरदस्त उथलपुथल मच गई. जो खास बात वह मुझ से करना चाहते थे उसे मैं सुनना भी चाहती थी और सुनने से मन डर भी रहा था.

मैं खामोश बैठ कर पिछले 1 महीने के बारे में सोचने लगी. शिखा और राकेशजी से मेरी जानपहचान इतनी ही पुरानी थी.

कर्ज बना जी का जंजाल- भाग 2: खानदान के 9 लोगों की मौत

परिवार के सभी लोग थे शिक्षित

वह बच्चों को चित्रकला के साथसाथ बालमानस शास्त्र का भी पाठ पढ़ाते थे. उन्होंने शिवशंकर नगर के अपने बंगले का नाम ‘योग’ रखा था. उन की बेटी अर्चना 2 साल से बैंक औफ इंडिया में नौकरी कर रही थी. उन की नियुक्ति कोल्हापुर जिले के बाचनी स्थित शाखा में थी. जबकि बेटा शुभम स्नातक तक पढ़ाई कर ड्राइवर के रूप में नौकरी कर रहा था.

दूसरी ओर अंबिका नगर में चौक के करीब रह रहे 49 साल के माणिक याल्लाप्पा वानमोरे पशु चिकित्सक होने के साथसाथ एक समाजसेवी भी थे. वह पशुओं के इलाज के लिए पूरे म्हैसल पंचकोसी में मशहूर थे.

वह अपनी पत्नी रेखा वानमोरे, बेटी अनीता और बेटे आदित्य के साथ रहते थे. बेटी ने ग्रैजुएशन करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, जबकि बेटा आदित्य पढ़ाई कर रहा था.

सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने की कार्रवाई

घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने वैसे लोगों का पता लगा लिया, जिन्होंने वानमोरे बंधुओं को कर्ज दिए थे. फिर पुलिस ने इस मामले में उन से पूछताछ के लिए परिवार को पैसे उधार देने वाले 15 लोगों को हिरासत में ले लिया. हालांकि उन की संख्या और अधिक थी.

पूछताछ में मालूम हुआ कि वह परिवार स्टील के उत्पादों की एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाना चाहता था. उन्होंने लोगों से पैसे इसी के लिए उधार लिए थे.

यूनिट लगने में देरी होने पर उधार देने वाले ब्याज और मूल के पैसे मांगने लगे थे. पैसे मांगने के सिलसिले में वे लोग वानमोरे बंधुओं को परेशान करने लगे थे.

हिरासत में लिए गए लोगों में म्हैसल निवासी नंद कुमार पंवार (52), राजेंद्र बन्ने (50), अनिल बन्ने (35), खंडेराव शिंदे (37), डा. तात्यासाहेब चोगुले (51), अनिल बोराडे (48), शैलेश धूमल (56), प्रकाश पवार (45), संजय बागड़ी (51), पांडुरंग घोरपड़े (56), शिवजी कोरे (65), रेखा चोगुले (45), विजय सुतार (55), गणेश बामने (45) और शुभ्रा कांबले (46) हैं.

इन के अलावा आशु, शैलेश धुमाल, अनाजी कोंडिबा खरात, शामगोंडा कामगोंडा पाटिल, सतीश सखाराम शिंदे, शिवाजी नामदेव खोत, शुभदा मनोहर कांबले, अनिल बाबू बारोड़े, गणेश ज्ञानू बामने, संजय इराप्पा बागड़ी, नरेंद्र हनुमंत शिंदे, राजेश गणपति होटकर, अनिल बालू बोराडे, आण्णासो तातोबा पाटील की खोज के लिए पुलिस ने 7 पुलिस टीमों का गठन किया. उन्हें सांगली जिले के साथसाथ सोलापुर, कोल्हापुर, कर्नाटक जिले में ढूंढने के लिए भेज दिया गया.

वानमोरे परिवार की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने एक ड्राइवर के साथसाथ डाक्टर और शिक्षक को भी शामिल पाया. उन में संजय बागड़ी, तात्यासाहेब चोगुले के नाम सामने आए.

साथ ही यह बात भी उजागर हुई कि होटल व्यवसायी से ले कर स्टेशनरी दुकान वाले तक का कर्ज था. वानमोरे परिवार पर लेनदेन वालों के ढाई से 3 करोड़ रुपयों का कर्जा था.

उधार लिए करोड़ों रुपए आखिर गए कहां

कर्ज के बोझ से 9 लोगों की आत्महत्या की घटना ने सांगली जिले के म्हैसल गांव से ले कर पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया.  इस के पीछे की वजहों के बारे में पुलिस जांच में जुट गई कि आखिर इतना पैसा वानमोरे

भाइयों ने साहूकारों से लिया तो उसे खर्च कहां किया?

इसी के साथ पूरे गांव में किस्मकिस्म की बातें होने लगीं. उन बातों की भनक पुलिस की जांच टीम को लगी. पता लगा कि वानमोरे परिवार पैसे से और अधिक पैसा बनाने के चक्कर में पड़ गया था. उन्हें उम्मीद थी उन के पास खूब सारा पैसा आएगा, इसलिए वे कर्ज ले कर अपनी योजना को अंजाम देने में जुटे हुए थे.

घटना के दिन 19 जून, 2022 की रात को वानमोरे भाइयों के घरों से देर रात तक किसी धार्मिक अनुष्ठान की आवाजें सुनाई दे रही थीं. सोलापुर का अब्बास महमूद अली नामक तांत्रिक वानमोरे परिवार के संपर्क में था. वह दोनों परिवारों के घरों पर आयाजाया करता था.

पुलिस को जब इस बात की जानकारी मिली, तब जांच की सूई अब्बास की ओर घुमा दी. घटनास्थल पर पुलिस को एक चारपहिया वाहन के गुजरने की भी जानकारी मिली, जिस का नंबर एमएच-13 के आधार पर पता चला. पुलिस ने उस के मालिक के बारे में मालूम करने जांच की शुरू की गई.

साथ ही घटना के 1-2 दिन पहले वानमोरे बंधुओं से मिलनेजुलने वालों के बारे में भी जानकारी जुटाई जाने लगी. उन के फोन नंबरों की डिटेल्स निकलवाई गई.

काल डिटेल्स से मालूम हुआ कि वानमोरे भाइयों ने अब्बास और धीरज नामक 2 लोगों से संपर्क किया था. वानमोरे ने सांगली के एक शख्स के नाम सिम कार्ड लिया था. इस पर पुलिस ने दोनों के किसी योजनाबद्ध जाल का भी कयास लगाया गया.

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के शहर में ही मूलेगांव रोड पर बसे सर्वदेनगर में रहने वाला 48 वर्षीय तांत्रिक अब्बास महमूद अली बागबान की चर्चा दूरदूर तक थी. उस के पास लोग अपने दुखों और घरेलू समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए आते थे. वह बाकायदा दरबार लगाता था और लोग उस से मिलने के लिए कतारों में लगे रहते थे.

तांत्रिक भी आया जांच के घेरे में

अब्बास लोगों को गुप्त धन ढूंढने और पैसे से पैसा बनाने के लिए उकसाता रहता था. करीब 13 साल पहले उस ने एक दंपति को जमीन से गुप्त धन निकाल कर देने का लालच दिया था. वह व्यापारी था और उस व्यवसायी का अच्छाखासा कारोबार सोलापुर में ही चल रहा था. वह कारोबारी था मुश्ताक सैय्यद रशीद.

फ्रैंडशिप- भाग 1: नैना ने अपना चेहरा क्यों छिपा लिया

सुनोकल तुम ने मुझे इग्नोर किया था या तुम जल्दी में थीं?”

सागर की गहरी आवाज सुनते ही नैना के कदम रुक गए. उस ने उदास नजरों से सागर की तरफ देखालेकिन कोई जवाब नहीं दिया.

मुझे लगता है कि तुम ने मेरा प्रश्न ठीक से सुना नहीं हैमैं ने तुम से कुछ पूछा है नैनाजवाब क्यों नहीं देतीं?

सागर के चेहरे पर हलकी सी झुंझलाहट के भाव देख रही थी नैनालेकिन बोली फिर भी नहीं.

क्या बात है नैनातुम बोलतीं क्यों नहीं?” सागर  की आवाज इस बार तेज और गुस्सेभरी थी. नैना ने फिर भी कोई जवाब नहीं दिया और तेज तेज कदमों से क्लासरूम की तरफ जाने लगी. नैनाजवाब दो,” सागर ने फिर कहा.

नैना की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता देख सागर ने कहा, “ठीक हैतुम अभी जवाब नहीं देना चाहतीं तो मत दो. परसों संडे हैशाम 5  बजे मैं ट्रेजर आइलैंड के बाहर तुम्हारा इंतजार करूंगाबाय नैना.

सागर ने अब नैना के जवाब का इंतजार करना भी जरूरी नहीं समझातेजी से कदम बढ़ाता वह अपनी क्लास में चला गया.

नैना और सागर दोनों ही गुजराती कालेज के स्टूडैंट थे. दोनों की मित्रता पूरे कालेज में प्रसिद्ध थी. एकाध विषय को छोड़ कर दोनों के सभी विषय समान थे.

नैना पढ़ाई के साथ ही महादेवी वर्मा काव्य संसार पर शोध कर रही थी. नैना को साहित्य में यों भी बहुतकुछ अच्छा लगता था. कुछ साहित्यकार उस के विशेष प्रिय थे. उन में महादेवी वर्मा टौप पर थीं. डाक्टर धर्मवीर भारती की गुनाहों के देवता’ उस की प्रिय किताब थी. बचपन से न जाने कितनी बार वह इस किताब को पढ़ चुकी थी. लेकिन मन इस किताब से भरता नहीं था. चंदन और विनती उस के प्रिय पात्र थे.

 मोहन राकेश की अंधेरे बंद कमरे’ भी उस की प्रिय पुस्तक थी. हरबंस की मानसिक उलझन’ तो उसे ऐसी लगती थी जैसे यह उस की अपनी जिंदगी है. इस पुस्तक को पढ़तेपढ़ते नैना की उदासियां ज्यादा गहरी होने लगती थीं. उस का मन किसी और छोर पर पहुंचना चाहता पर बेचैनियां हद से ज्यादा बढ़ने लगतीं और उसे कुछ भी अच्छा न लगता. ऐसी मनोस्थिति  में ह्रदय के भाव कभी कविता के रूप मेंकभी लघुकथा के रूप में पन्नों पर बिखरने लगतेउसे पता न चलता. ऐसे में उस ने कब अपनेआप को खामोशियों  बीच कैद कर लियाउसे नहीं मालूम. रचनाओं के प्रकाशित होने का सिलसिला भी लगभग बारहतेरह वर्ष पूर्व शुरू हुआ जो आज भी चल रहा है.

कालेज में भी एकदो ही उस की मित्र थीं. शोरगुलआधुनिकतादिखावे से उसे चिढ़ थी. सच्चा मित्र वह बस पुस्तकों को मानती थी इसलिए कि वे कभी भी बेवफाई नहीं करतीं. यह बात भी  सही है कि नैना को तलाश थी अच्छे पुरुषमित्र की जो उस की  भावनाओं को समझ सके और उस से  वह सबकुछ कह सके. मित्र तो उस की रोमा भी थी लेकिन वह भी आज के युग के अनुरूप आधुनिक तो थी हीसाथ हीरिश्तों को  यथार्थ की धरती से जोड़ कर देखती मनह्रदय से जुड़ कर वह किसी रिश्ते में विश्वास नहीं करती थी. बसयही बात नैना को पसंद न आती थी. उसे लगता था हम किसी भी रिश्ते को बनाएं चाहे वह रिश्ता कोई भी होउस में हम ईमानदारी रखें. झूठ से नैना को चिढ़ थी. लेकिन रोमा को लंबे समय तक किसी भी रिश्ते के लिए इंतजार करना पसंद नहीं था. वह फास्ट फूड वाली शैली में जिंदगी पसंद करती थी.

नैना का मानना था कि ऐसे रिश्ते बन तो जल्दी जाते हैं पर निभते नहीं हैं और मन को सुकून भी नहीं देते हैं. मन की शांति और विश्वास के लिए मित्रता में ईमानदारी चाहिए. रिश्तों में तड़कभड़कअंधाधुंध एकदूसरे पर रुपए लुटाने व महंगे गिफ्ट देने के रिवाज भी नैना को पसंद न थे. उस से एक प्रकार की दिखावटबनावट का एहसास होता था. फिर आज मित्रता में स्वार्थ और लालच ने इतना स्थान बना लिया है कि सचाई के लिए कोई जगह नहीं बची है.

आज शनिवार है और कल शुक्रवार को सागर ने कालेज में ही संडे को ट्रेजर आईलैंड में मिलने को कहा हैक्या करूं- जाऊं या नहींनैना को ट्रेजर आईलैंड में जाना बिलकुल भी पसंद नहीं थावही तड़कभड़क और आधुनिकता की जीतीजागती तसवीरएसी  केबिनरोबोट जैसे घूमते हुए वेटर नैना को अच्छे न लगते.  महंगे कपड़ों से सजे शौपिंग मौलमौडर्न युवतियांमहिलाएंबच्चेचमकतीदमकती गाड़ियांफास्ट फूड की तरह तेजी से बदलती जा रही जिंदगी के अजीब रंग… नहींइन रंगों में स्वाभाविक चमक नहीं हैतभी तो ये सभी बेजानबनावटी दिखते हैं. तेजी से भागते लोगसमय के साथ कदम से कदम मिलाने में पीछे न रह जाएं शायदइस बात का भी डर हो सकता है.

यह सब सोचतेसोचते ही नैना ने पलंग पर सीधे लेटते ही सामने की दीवार पर नजर दौड़ाई- एक विशाल पेंटिंग पूरी दीवार को घेरे हुए थी. यह औयल पेंटिंग नैना को  बहुत पसंद थी. पेंटिंग का पूरा दृश्य नैना को अजीब सा सुकून देता था. सागर तट का प्यारा सा दृश्य था. तट के किनारे एक नाव बंधी थी. तट के किनारे ही एक लड़का बैठा हुआ था. डूबते सूरज के नजारे को देख रहा था अपनी उदास आंखों से. सुरमई शाम की उस पेंटिंग में उस लड़के की आंखों में अजीब सा आकर्षण था.  नैना बचपन से ही  अपनी सुंदर आंखों की तारीफ सुनती आ रही थी. उसे अपनी आंखों पर नाज भी था. नैना को भी पूरे व्यक्तित्व  में खूबसूरत आंखों का आकर्षण अधिक खींचता था.

पेंटिंग वाले लड़के की आंखों में और सागर की आंखों  में कुछ समानता लगती थी. सागर की आंखों में शांति और एक अजीब सी सचाई झलकती थी. लेकिन इस सचाई पर नैना को कभीकभी शक भी होने लगता कि कहीं आंखों में झलकती सचाई फरेब तो नहींझूठ तो नहीं?    तभी हवा का एक तेज झोंका नैना के कमरे की खिड़की के परदे को हिला गया. खिड़की के बाहर छोटे से बगीचे से झांकती हरियाली मुसकरा पड़ी और हंस दिए कचनार के फूलगुलाब के खूबसूरत पीले व गुलाबी फूल. एक खुशबू सी आ कर नैना के सलोने चेहरे को सहला गई. नैना ने सागर की गहरी आंखों में डूब कर फिर एक बार अपनी सोच की दिशा बदली.

रोमा उस की मित्र थी. दोस्ती थी पर न जाने क्यों उस की स्वतंत्रता में उसे एक स्वच्छंदता का एहसास होता था. उसे उस की थिरकती चंचलता में विश्वास कम होता. उसे लगतारोमा के स्वच्छंद विचारों की आधुनिकता कहीं उसे डुबो न दे. यों तो आधुनिकता की हिमायती नैना भी थी विचारों में रूढ़िवादिताअंधविश्वास नैना को पसंद नहीं. पर प्रकृति पर उसे विश्वास था. मित्रता में उसे यकीन था. कपड़ों की तरह बदलने वाली मित्रों  की  लंबी लाइन से उसे चिढ़  थी. नैना का सोचना था कि मित्रता में जल्दबाजी हमेशा दुख का कारण बनती है. मित्रता में सोचसमझ कर एकदूसरे की रुचियों  को जान कर ही मित्रता करेंतो ज्यादा अच्छा रहता है क्योंकि मित्रता निभाना इस जमाने में बड़ा मुश्किल है.

पूरी जिंदगी में अगर एक भी सच्चा मित्र आप को मिलता है तो आप से बड़ा खुशहाल कोई नहीं.

रोमा के दोस्त रौकी से उसे बड़ी चिढ़ थी. उस के लंबेलंबे हिप्पी कट बाल थेसिगरेट के छल्ले बना कर वह रोमा के चेहरे पर उड़ाता था तो रोमा खुशी के मारे नाच उठती थी. जबतब क्लास छोड़ कर वह रौकी के साथ लौंग ड्राइव पर निकल जाती थी. पूरे कालेज में रोमा और रौकी का अफेयर चर्चा में था. इसे अफेयरप्रेम का नाम नहीं दे सकते. रौकी जैसे कई दोस्त रोमा की लिस्ट में थेजिन के साथ वह अकसर घूमने जाती थी लेकिन प्रेम की गंभीरता जैसी कोई बात  नहीं देखी थी. वह इसे दोस्ती कहती थी. लेकिन कई बार पेड़ों के झुरमुट में उसे अलगअलग मित्रों के साथ चुंबनरत  देखा था. इस पर उस ने रोमा को रोका भी था. पर उस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. हमेशा बातों को ऐसे हवा में उड़ा देती थी जैसे रौकी सिगरेट के छल्ले बना कर हवा में उड़ा देता है. उस के बाद जहां तक नैना को याद हैउस ने रोमा को टोकना बंद कर दिया था. रोमा भी कभी इस विषय पर बात नहीं करती थी. उसे नैना की आदर्शवादिता से नफरत  थी. तो नैना को खाओपियो एंजौय करो की आदत पसंद न थी. फिर भी नदी के दो किनारों की तरह दोनों की दोस्ती थीजो मिलते नहीं पर साथसाथ चलते जरूर हैं.

अचानक मोबाइल की मीठी सी धुन बजने  लगी. नैना विचारों के  समंदर से बाहर निकलीतो मोबाइल पर देखा- खूबसूरत नीले अक्षरों में सागर चमक रहा था. उस ने तुरंत ही मोबाइल उठा लिया. मेरे बारे में सोच रही थी न?” सागर की गहरी आवाज नैना को भली लगी लेकिन उसे कोई जवाब नहीं दियाखामोश रही.

बोलो भी,” सागर की आवाज फिर आई.

उसे अचानक याद आया कि कल ट्रेजर आईलैंड जाना हैतो वह बोली, “ट्रेजर आईलैंड में नहीं मिलेंगेसागर.

तो आप ही फरमाइएकहां मिलोगी?”

चोखी ढाणी चलें…” नैना ने कहा.

कहां…इतनी दूर,..” सागर ने कहा.

नहीं सागरट्रेजर आईलैंड मुझे पसंद नहींनहीं चलेंगे,” नैना की  आवाज में बच्चों सी जिद दिख रही थी.

नहीं चलेंगेअच्छाठीक है बाबाचोखी ढाणी चलेंगे. बसअब ठीक है,” सागर ने पराजित योद्धा के अंदाज में कहा.

ठीक हैठीक है,” नैना ने कहा.

ओकेकल  शाम 5  बजेरीगल टाकीज के सामने  इंतजार करता हूं.

ओके बाय,” नैना ने कह कर मोबाइल औफ कर दिया था.

रिटर्न गिफ्ट: अंकिता को बर्थडे पर क्या गिफ्ट मिला

‘‘चलो, तुम्हें गिफ्ट दिला दिया जाए, बर्थ डे गर्ल,’’ कार लौक कर के उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और उस शोरूम की सीढि़यां चढ़ने लगे.

मैं अपनी भाभी से प्रेम करता हूं, पर वो मुझसे बात भी नहीं करती, मैं क्या करूं ?

सवाल

मेरी उम्र 35 साल है और अभी तक मेरी शादी नहीं हुई है. पिछले 15 साल से मेरा अपनी भाभी के साथ जिस्मानी रिश्ता रहा है. लेकिन हाल ही में मेरे भतीजे ने हम दोनों को बिस्तर पर एकसाथ देख लिया था. तब से मेरी भाभी मुझ से बात नहीं कर रही हैं. मैं उस के बिना रह नहीं सकता. क्या करूं?

जवाब

इस तरह के संबंध बनाए तब जाने चाहिए जब छिपा कर रख सकें, वरना खतरा तो रहेगा ही. भतीजे की जगह अगर भाई या कोई और बड़ा देखता तो क्या हालत होती, इस का अंदाजा आप भी लगा सकते?हैं. आप की?भाभी वही कर रही?हैं जो इस हालत में किसी भी औरत को करना चाहिए. अब आप को चाहिए कि मुफ्त की मलाई का लालच छोड़ कर शादी कर लें और भाभी से जिस्मानी संबंधों की बात को भूल जाएं.

लड़के-लड़कियों का रिलेशनशिप में होना कोई नई बात नहीं हैं और न ही लड़कियों का अपने बौयफ्रैंड्स से छोटेमोटे गिफ्ट्स की उम्मीद लगाना नया है. लड़कियों की अपने बौयफ्रैंड्स से कई तरह की अपेक्षाएं होती हैं. कुछ के लिए रिलेशनशिप में आने का मतलब ही यह होता है कि आज तक जो इच्छाएं पूरी न हो सकीं, अब करेंगे. लेकिन, ये लड़कियां या तो स्कूलगोइंग होती हैं या फिर कालेजगोइंग, और उन के खुद के पास इतने पैसे नहीं होते जो उन के अरमानों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हों.

ऐसे में उन की जरूरतें पूरी करने के लिए प्रकट होते हैं उन के बौयफ्रैंड्स जिन्हें शरूशुरू में तो पैसा लुटाने और अपनी धाक जमाने में बड़ा मजा आता है, लेकिन जैसेजैसे उन के हाथ से पैसा जाने लगता है यह मजा सजा बन कर रह जाता है. डेट्स का बिल, मूवी टिकट, महंगे कैफे में खाना, मिलने पर फूल या चौकलेट, फोन का रिचार्ज विद ऐक्स्ट्रा डाटा पैक, फैस्टिवल और वेलैंटाइन पर अलग तोहफे और बर्थडे पर तो सम झो दीवाला निकल जाता है.

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कहीं आनाजाना हो, तब भी रिकशे से ले कर पानी खरीदने तक का बिल बौयफ्रैंड की जेब से ही खर्च होता है, क्योंकि गर्लफ्रैंड का हाथ बैग में लिपस्टिक के लिए तो हर घंटे जाता है लेकिन पैसों के लिए नहीं. लड़कियों का पैसों के मामले में पूरी तरह से बौयफ्रैंड पर आश्रित हो जाना और हर छोटीबड़ी चीज के लिए उस का मुंह ताकना एक आदत बन जाती है जो समय के साथ पहले से ज्यादा गहराती जाती है.

लड़कियों की प्यार के नाम पर अपने बौयफ्रैंड्स पर यह इकनौमिक डिपैंडैंस लड़कों का जीना मुश्किल कर देती है या यों कहें कि उन्हें बरबाद कर देती है. ये वही लड़के हैं जो बेचारे बाबू, जानु, शोनामोना करते रह जाते हैं और रिलेशनशिप खत्म होने पर इन्हीं गर्लफ्रैंड्स को गोल्डडिग्गर होने का टैग देते फिरते हैं. सोशल मीडिया पर तो ऐसे लड़कों की भरमार है. असल में देखा जाए तो इस में पूरी तरह लड़कियों की गलती नहीं कही जा सकती. लड़कों को खुद को एक लैवल अप दिखाने का कोई मौका छोड़ना पसंद नहीं. ऐसे में पैसा, रुतबा दिखाने से बेहतर क्या होगा?

  1. बौयफ्रैंड खर्च करने को शान मानते हैं

पीयूष एक अमीर घराने का लड़का था जिसे दिन के 700-800 रुपए लुटाना आम बात लगती थी. उस की गर्लफ्रैंड नीता भी खूब खर्चीली थी और आएदिन पापा से पैसे मांग कर खर्च करती थी. पीयूष और नीता रिलेशनशिप में थे और काफी खुश भी थे. लेकिन जब भी दोनों डेट पर जाते तो सारा खर्च पीयूष उठाता. उसे नीता का पैसे खर्च करना खुद की बेइज्जती लगता था. नीता के पास भी पैसे होते थे लेकिन पीयूष ही सारे बिल भरता था.

कालेज के थर्ड ईयर तक आतेआते पीयूष को पैसों की तंगी होने लगी, जिस के चलते अब वह नीता पर खर्च नहीं कर पाता था. नीता के सामने  झुकना और ‘लड़की के पैसों पर जीना’ वाली धारणा लिए रिलेशनशिप में रहना पीयूष को कतई मंजूर नहीं था. उस ने डेट्स पर जाना, नीता के साथ फिल्म देखना, घूमनाफिरना सब कम कर दिया. फिर क्या होना था, नीता और पीयूष के बीच अनबन होने लगी. पीयूष हमेशा टैंशन में रहने लगा, नीता को टाइम भी नहीं देता था. आखिर, कुछ ही दिनों में दोनों का ब्रेकअप हो गया.

2. गर्लफ्रैंड को इंप्रैस करने के लिए करते हैं खर्च

काव्या रोहित को कालेज में मिली थी. रोहित उसे देख कर मानो हवा में उड़ने लगा. जब वे दोनों रिलेशनशिप में आए तो रोहित जबतब उसे अपनी स्कूटी पर घुमाने ले जाता. वह उसे उस की मनपसंद आइसक्रीम खिलाने ले जाता था. काव्या के पास इतने पैसे नहीं होते थे कि वह महंगे कपड़े खरीद पाती. वह रोहित के सामने जानबू झ कर कहा करती थी कि उसे यह या वह ड्रैस लेने का बहुत मन है लेकिन पैसे नहीं हैं अभी. रोहित यह सुन कर सम झ जाता कि उसे काव्या को गिफ्ट में अगली बार क्या देना है. काव्या और रोहित एक ही ग्रुप में थे. कोई और दोस्त काव्या को यह न कहे कि वह रोहित के पैसों पर जी रही है, रोहित उस के साथसाथ गु्रप की बाकी लड़कियों को भी शौपिंग करा आता. वे सभी कहीं कुछ खाने जाते तो काव्या खाने से इसलिए मना कर देती कि उस के पास पैसे नहीं हैं. इस पर रोहित अपने साथसाथ उस के पैसे भी दे देता.

रोहित हर दूसरे दिन अपनी मम्मी से पैसे मांगता था. मम्मी के मना करने पर उन से लड़ भी पड़ता. अपनी गर्लफ्रैंड का दिल जीतने के लिए उसे जो कुछ भी करना पड़ता, वह करता था. पर वह दिन दूर नहीं था जब दोनों का ब्रेकअप हो गया. रोहित और काव्या दोनों को ही ब्रेकअप का दुख था लेकिन ब्रेकअप के बाद रोहित को काव्या पर बहुत गुस्सा आया था. वह अब उस के बारे में किसी को भी कुछ बताता तो यह जरूर कहता कि वह एक पैसा खाने वाली लड़की है जिस ने उस का पैसों के लिए खूब इस्तेमाल किया. ऐसे में यह सम झना बहुत जरूरी हो जाता है कि चाहे आप का बौयफ्रैंड खुद आप पर पैसे लुटाना चाहे, फिर भी आप को उसे खुद पर खर्च करने से रोक देना चाहिए.

3. गर्लफ्रैंड्स खुद के खर्चे उठाना सीखें

ऐसा नहीं है कि हर लड़की अपने बौयफ्रैंड पर ही निर्भर रहती है. ऐसी लड़कियां भी हैं जो अपने खर्चे खुद उठाती हैं. फिर भी जिन लड़कियों को अपने पैसे खर्च करने के बजाय अपने बौयफ्रैंड की जेब ढीली करने में आनंद आता हो उन्हें यह सम झना बहुत जरूरी है कि वे अपने रिलेशनशिप को तो डिसबैलेंस्ड कर ही रही हैं, साथ ही, अपने बौयफ्रैंड की टैंशन और अजीब व्यवहार का कारण भी बन रही हैं.

4. हर समय तोहफों की अपेक्षा न करें

लड़कियों का हर समय तोहफे मांगते रहना या अपने बौयफ्रैंड से महंगे तोहफे लेने की अपेक्षाएं असल में लड़कों के लिए परेशानी का सबब बन जाती हैं. वे कभी दोस्तों से पैसे उधार मांगते हैं तो कभी बड़े भाईबहन से. मम्मीपापा अगर पैसे के लिए मना कर दें तो वे उन से लड़ाई झगड़े पर उतर आते हैं. पैसों को ले कर बौयफ्रैंड की यह टैंशन गर्लफ्रैंड अपनी अपेक्षाएं कम कर आसानी से दूर कर सकती है.

5. अपने बिल खुद भरें

हर चीज में लड़कियां लड़कों से आगे हैं तो इस में क्यों पीछे रहें. लड़कियों को जरूरत है कि वे डेट्स या मूवीज का पूरा बिल न सही पर अपने हिस्से का तो दे ही दें. इस से बेचारे बौयफ्रैंड का कम से कम थोड़ा बो झ तो कम होगा.

6. मनपसंद चीजों के लिए पैसे बचाना सीखें

लड़कियों को भी अपने घर से अच्छाखासा जेबखर्च तो मिल ही जाता है. और अगर किसी महंगी चीज को खरीदने का मन करे तो उस के लिए पैसे बचाएं. अपने खुद के पैसों से खरीदी हुई चीज का मोल कहीं ज्यादा होता है.

7. पैसे नहीं हैं तो इच्छाएं कम रखें

हर सुंदर चीज पर दिल आ जाना और अपने बौयफ्रैंड की तरफ नजर घुमा लेना बहुत सी लड़कियों की आदत होती है. यह एक बुरी आदत है क्योंकि आप की इच्छाएं पूरी करना आप के बौयफ्रैंड का काम नहीं है. अगर पैसे नहीं हैं तो ऐसी इच्छाएं रखना कम कर दीजिए. यानी, रिलेशनशिप में खर्च केवल लड़का ही उठाए, यह सरासर गलत है. लड़कालड़की दोनों ही रिलेशनशिप में बराबर की हिस्सेदारी रखते हैं, तो बिल्स के भी बराबर हिस्से होने चाहिए.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem 

ऑनलाइन गेम: हत्यारा बनाने की मशीन

दरअसल, ऑनलाइन गेम यानी कि पहले का पबजी ऐसा नशा बनकर सामने आया है जिसके कारण आए दिन नासमझ नाबालिग कहे जाने वाले बच्चों द्वारा नृशंस हत्या की घटनाएं घटित हो रही है.

ऐसे में समाज और सरकार को चाहिए कि ऑनलाइन गेम पर जितनी जल्दी हो सके अंकुश लगाया जाए. यह किशोरों को हत्यारा बनाने की एक ऐसी मशीन है जिस का सच अब सामने आ चुका है.

हम आपको आज लखनऊ की नवीनतम घटना की जानकारी दे रहे हैं जिसमें एक 16 साल के नाबालिग लड़के ने सिर्फ इसलिए अपनी मां की हत्या कर दी उसकी मां उसे ऑनलाइन गेम खेलने से समझाया करती थी.

मोबाइल पर बैटल ग्राउंड गेम (पुराना नाम पब जी) खेलने से रोकने पर नवाबों की नगरी कहे जाने वाले लखनऊ के पंचम खेड़ा की यमुना पुरम कालोनी निवासी मह‍िला राधिका वर्मा (बदला हुआ नाम) की शनिवार देर रात उनके ही जाये सगे बेटे ने गोली मारकर हत्या कर दी . किशोर राहुल (बदला हुआ नाम) ने मां  की हत्या की साजिश 10 दिन पहले रची थी उसके लिए पिताजी की पिस्टल पर उसका ध्यान केंद्रित हुआ और पिता की लाइसेंसी पिस्टल अपने कब्जे में लेकर आखिरकार उसने अपने ही हाथ  अपनी मां की हत्या कर दी.और सोचने लगा कि वह पुलिस से बच सकता है.

मामला उजागर होने के बाद पुलिस अधिकारी ने हमारे संवाददाता को बताया कि पिता की पिस्तौल अपने कब्जे में करने के लिए राहुल ने बड़े ही शातिराना ढंग से इसके लिए पिता  की  अलमारी की डुप्लीकेट चाबी बनवाई और पिस्टल अपने कब्जे में कर ली थी.

यु ट्यूब से सीखा गोली चलाना

शनिवार 4  जून 2022 की देर रात करीब एक बजे उसने अलमारी से पिता की पिस्टल कब्जे में ली और सो रही मां पर गोली दाग दी. हत्या करने के बाद उसने मां के शव को छुपा भी दिया, बाद में शव से आ रही बदबू को छिपाने के लिए वह कमरे में तीन दिन से रूम फ्रेशनर छिड़क रहा था. पुलिस की छानबीन में सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि राहुल ने यू-ट्यूब से पिस्टल चलाना सीखा  मां   राधिका की हत्या करने से पहले उसने कई बार यू-ट्यूब पर गोलियां चलाने के वीडियो देखे थे .

वस्तुत:आज देश में करोड़ों की संख्या में युवा ऑनलाइन गेम में लगे रहते हैं और ऑनलाइन गेम  उनका जीवन बन गया है, राहुल भी बैटल ग्राउंड गेम खेलने का भयंकर आदी हो गया था. आसपास के लोगों ने भी उसके मोबाइल फोन के लत लगने  की बात पुलिस को बताई है. बेटे की बिगड़ती आदत को देखते हुए कई दिन से राधिका उसे समझा बूझा रही थी.

करीब दो सप्ताह पूर्व एक दिन राधिका को बहुत गुस्सा आया उसने राहुल को बुरा भला कर करके समझाया  और राहुल  से उसका मोबाइल फोन छीन लिया था. इसके बाद राहुल अपने रंग दिखाने लगा  उसने अपने नाना से बात कर मोबाइल फोन वापस दिलाने के लिए कहा था.

नाना ने बेटी से बात की, जिसके बाद किशोर को दोबारा मोबाइल फोन मिल गया था.इस घटना के बाद से ही किशोर मां की हत्या की साजिश रच रहा था. मृतका के प‍िता ने बताया कि किशोर किसी की बात नहीं सुनता था. वह अक्सर लोगों को उलटे जवाब ही देता था.

इन आदतों के कारण ही उसे कई स्कूलों से भी निकाला जा चुका था. वर्तमान में राहुल लखनऊ में सेनानी विहार स्थित एक स्कूल में 10वीं का छात्र था .

योगी सरकार के राज में महिलाएं चलाएगी हाई टेक नर्सरी

बागवानी को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका में सुधार के दोहरे उद्देश्य को पूरा करने के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार ने मनरेगा योजना के तहत  इज़राइली तकनीक पर आधारित  150 हाई-टेक नर्सरी स्थापित करने का निर्णय लिया है.

इन हाईटेक नर्सरी का संचालन उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं करेंगी.

योजनान्तर्गत प्रत्येक जिले में बेर, अनार, कटहल, नींबू, आम, अमरूद,  ड्रेगन-फ्रूट आदि फल तथा स्थानीय भौगोलिक आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक सब्जियां उगाने के लिए दो-दो हाईटेक नर्सरी विकसित की जा रही हैं.

सरकार गुणवत्तापूर्ण फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के साथ-साथ हाई-टेक नर्सरी में गुणवत्ता वाले पौधे और बीज विकसित करना चाहती है. सरकार के इस कदम का एक और उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की बढ़ती संख्या के लिए पर्याप्त फसल उपलब्ध कराना भी है.

उल्लेखनीय है कि बस्ती और कन्नौज में क्रमशः फलों और सब्जियों के लिए इंडो-इजरायल सेंटर फॉर एक्सीलेंस की स्थापना की गई है, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध मिल सके.

ये 150 हाईटेक नर्सरी राज्य के कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों के परिसर, बागवानी विभाग के अनुसंधान केंद्र में स्थापित की जाएंगी ताकि किसानों को आसानी से प्रशिक्षित किया जा सके. उद्यान विभाग के अनुमान के अनुसार प्रत्येक हाई-टेक नर्सरी की औसत लागत लगभग एक करोड़ रुपये होगी.

इन नर्सरियों को उचित बाड़, सिंचाई सुविधा, हाई-टेक ग्रीन हाउस जैसी बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जाएगा और सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) / राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्य समूहों के माध्यम से इनका रखरखाव किया जाएगा.

इन नर्सरी से उत्पादित पौधों को इच्छुक स्थानीय किसानों, क्षेत्रीय स्तर पर किसान उत्पादन संगठनों (एफपीओ), राज्य स्तर पर अन्य निजी नर्सरी, राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्य सरकारों और अन्य के पौधरोपण के लिए बेचा जाएगा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले 5 वर्षों में बागवानी फसलों की खेती के क्षेत्र को 11.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 16 प्रतिशत  करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है  ताकि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को पर्याप्त फल और सब्जियां मिल सकें.

मानसून में एक्ने और आयल फ्री स्किन पाइये

हर किसी को मानसून के मौसम का इंतजार होता है. क्योंकि गर्मी से राहत जो मिलती है. फिर चाहे हलकी बूंदाबांदी हो या फिर हैवी रेन , दिल को अलग ही सुकून मिल जाता है. लेकिन ये मौसम जितना सुहावना होता है, उतनी ही इस मौसम में नमी भी होती है, जो एक्ने का कारण बनती है. खासकर के ये मौसम ऑयली व कोम्बिनेशन स्किन वालों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं होता है. लेकिन परेशान होने से समस्या का समाधान नहीं निकलता , बल्कि इस समय पर सही ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने की जरूरत होती है,  जो स्किन को क्लीन करने के साथ उसके पीएच लेवल को भी बैलेंस में बनाए रखे, ताकि आप मानसून के सीजन को खुशीखुशी एंजोय भी कर सके और स्किन पर एक्ने जैसी कोई समस्या भी न हो. इसके लिए बायोडर्मा का सेबियम जैल मोशेंट बेस्ट प्रोडक्ट है, जो स्किन को क्लीयर व हैल्दी बनाने का काम करता है.

क्यों होती है एक्ने की समस्या 

मानसून के मौसम में बहुत ज्यादा नमी होती है, जिसके कारण त्वचा में सीबम का अत्यधिक उत्पादन होने के कारण स्किन तेलिए लगने लगती है. जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण माना जाता है. क्योंकि चिपचिपे व तेलिए फेस पर गंदगी, पसीना आसानी से चिपकने के कारण एलर्जी व  पोर्स के क्लोग होने के साथ एक्ने व ब्रेअकाउट्स का कारण बनता है. खासकर के ऑयली व कोम्बिनेशन स्किन वालों को एक्ने की समस्या का ज्यादा सामना करना पड़ता है. क्योंकि स्किन केयर के अभाव में स्किन बैरियर ठीक से कार्य करने में सक्षम नहीं होने के कारण उस पर तुरंत एलर्जी का कारण बनने के साथ पोर्स को ब्लोक भी कर देता है. जिससे चेहरे पर एक्ने आने के साथ धीरेधीरे आपके चेहरे की रंगत भी फीकी पड़ने लगती है. ऐसे में सही स्किन प्रोडक्ट यानि क्लीन्ज़र से स्किन की केयर करने की जरूरत है.

बायोडर्मा का सेबियम जैल मोशेंट  

ये खास इसलिए है , क्योंकि ये स्किन को बिना ड्राई किए क्लीन करने का काम करता है. इसमें है जिंक सलफेट व कॉपर सलफेट जैसे इंग्रीडिएंट , जो स्किन को बिना कोई नुकसान पहुंचाए , उसकी एपिडर्मिस लेयर यानि स्किन की आउटर लेयर को क्लीन करके सीबम सेक्रेशन को भी कम करने का काम करता है , जिससे एक्ने की समस्या नहीं होती है. साथ ही ये चेहरे पर एक्ने के कारण होने वाले दागधब्बों को भी कम करता है. इसका सोप फ्री फार्मूला स्किन के पीएच लेवल को भी बैलेंस में रखता है. जिससे स्किन पर कोई प्रोब्लम हुए बिना  स्किन प्रोब्लम्स ठीक हो जाती हैं.

यूएसपी जानकर खरीदें 

जेंटली क्लीन योर स्किन 

स्किन के लिए वही प्रोडक्ट अच्छा होता है, जो उस पर हार्श इफेक्ट डाले बिना स्किन को क्लीन करता है. क्योंकि जेंटल प्रोडक्ट्स स्किन से गंदगी को न सिर्फ आसानी से रिमूव करने का काम करते हैं , बल्कि स्किन के नेचुरल आयल को भी स्किन में बनाए रखते हैं. जिससे स्किन हाइड्रेट भी बनी रहती है, साथ ही स्किन से डस्ट, गंदगी भी रिमूव हो जाती है. जो स्किन को खूबसूरत बनाने के साथ एक्ने फ्री स्किन देने का काम करती है.

पीएच लेवल को बनाए रखे 

ये सेबियम जैल मोशेंट स्किन के पीएच लेवल को बैलेंस में रखने के साथ स्किन पर प्रोटेक्टिव बैरियर का काम करता है. इससे स्किन पर इंफेक्शन व बैक्टीरिया के पनपने के चांसेस काफी कम हो जाते हैं. साथ ही स्किन को बाहरी वातावरण से होने वाले नुकसान से भी प्रोटेक्शन मिलती है. और स्किन का मोइस्चर भी बना रहता है. जो हैल्दी व अट्रैक्टिव स्किन के लिए बहुत जरूरी होता है.

सीबम के अत्यधिक उत्पादन को रोके 

जब त्वचा पर अत्यधिक सीबम का उत्पादन होने लगता है, तो ये न सिर्फ स्किन पर ग्रीसी इफेक्ट देने का काम करता है, साथ ही पोर्स को भी क्लोग करके एक्ने का कारण बनता है. लेकिन इस सेबियम जैल मोशेंट में जिंक सल्फेट की मौजूदगी स्किन पर ज्यादा आयल को उत्पन्न होने से रोकने में मदद करता है. साथ ही इसमें कॉपर सलफेट स्किन पर बैक्टीरिया को पनपने से रोकने के साथ स्किन को हैल्दी बनाने में मददगार है.

पोर्स को क्लोग होने से रोके 

ये प्रोडक्ट नोन कॉमेड़ोजेनिक , नोन डाई और इसका सोप फ्री फार्मूला  होने के कारण ये एक्ने प्रोन, ऑयली व कोम्बिनेशन स्किन के लिए बेस्ट प्रोडक्ट है. क्योंकि अगर आप बिना सोचेसमझें व फिर इंग्रीडिएंट्स को बिना देखे ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीद लेते हैं , तो कई बार उनमें ज्यादा केमिकल्स का इस्तेमाल होने के कारण ये पोर्स के क्लोग करने का कारण बनते हैं. जो एक्ने व स्किन एलर्जी का बड़ा कारण है. जबकि इस प्रोडक्ट को आप सेफली यूज़ कर सकते हैं.

डर्मेटोलोजिस्ट  टेस्टेड 

जो भी ब्यूटी प्रोडक्ट आप मार्केट से खरीदें, देखें कि वो  डर्मेटोलोजिस्ट  टेस्टेड होना चाहिए. आपको बता दें कि ये प्रोडक्ट  डर्मेटोलोजिस्ट  टेस्टेड है, जिससे इसका स्किन पर किसी भी तरह का कोई रिएक्शन नहीं होने के साथ ये एक्ने को ट्रीट भी करेगा और स्किन के नेचुरल आयल को भी बनाए रखेगा. दुनियाभर में सेलिब्रिटीज भी इस प्रोडक्ट को यूज़ करने की सलाह देते हैं.  ये माइल्ड होने के साथ स्किन के लिए अच्छा होने के साथ आंखों को भी किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है.

कैसे अप्लाई करें 

इसे आप हफ्ते में सातों दिन अपने मोर्निंग व इवनिंग रूटीन में शामिल करें. बस आपको जरूरत है इस क्लीन्ज़र को अपने गीले चेहरे पर लगाने की. ध्यान रखें ये फोम वे में वर्क करेगा. फिर आप पानी से चेहरे को अच्छे से धो कर आराम से चेहरे को साफ कर लें. इससे आपका चेहरा क्लीन होने के साथसाथ आपको कुछ ही दिनों में एक्ने  फ्री स्किन मिल जाएगी.  तो फिर आज ही इसे अपने ब्यूटी रूटीन में शामिल करके पाएं हैल्दी व एक्ने फ्री स्किन.

ड्रग्स केस में फंसे शक्ति कपूर के बेटे सिद्धांत कपूर, पढ़ें खबर

बॉलीवुड के मशहूर एक्टर शक्ति कपूर (Shakti Kapoor) के बेटे सिद्धांत कपूर (Siddhanth Kapoor)  पर ड्रग्स लेने का गंभीर आरोप लगा है. रिपोर्ट के अनुसार, एक पार्टी में कथित तौर पर सिद्धांत कपूर ड्रग्स का सेवन करते पाए गए. इसके बाद उन्हें बेंगलुरु में हिरासत में लिया गया है.

बताया जा रहा है कि सिद्धांत कपूर इस समय पुलिस की हिरासत में हैं. सिद्धांत कपूर ने ‘चुप चुप के’, ‘भूल भुलैया’, ‘भागम भाग’ जैसी फिल्मों में बतौर सहायक निर्देशक काम किया है. जबकि उन्होंने ‘जज्बा’, ‘हसीना पारकर’ और ‘चेहरे’ जैसी बॉलीवुड फिल्मों में अहम किरदार निभाया है.

 

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हाल ही में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने क्लीन चिट दे दी थी. उन्हें पिछले साल एक क्रूज ड्रग्स बस्ट मामले में गिरफ्तार किया गया था. आर्यन खान ने पिछले साल लगभग एक महीना जेल में बिताया था और बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया.

 

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एक रिपोर्ट के मुताबिक शक्ति कपूर से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो सकी. सिद्धांत की बात करें तो वो कई फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं.

 

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शाह परिवार को खरी-खोटी सुनाएगी बरखा, अनुपमा देगी करारा जवाब

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में लगातार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो के बिते एपिसोड में आपने देखा कि बरखा ने बापूजी और वनराज की जमकर बेईज्जती की. तभी अनुपमा आती है और वह बापूजी से माफी मांगती है. तो दूसरी तरफ वह बरखा को भी जवाब देती है. शो के आनेवाले एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते है, शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि बापूजी उसे कुछ तोहफे देंगे. बरखा शाह हाउस से आया हुआ सारा सामान टेबल के नीचे रखवाएगी और यह सब वनराज देख लेगा. बरखा भी देख लेगी कि वनराज ने उसे ऐसा करते हुए देख लिया है.

 

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शो में आप ये भी देखेंगे कि अनुज अनुपमा से पूछेगा कि वनराज को घर के बाहर क्यों रोक लिया गया था. अनुपमा बताएगी कि शाह परिवार का नाम गेस्ट लिस्ट में नहीं था. अनुज और शाह परिवार की बॉन्डिंग देख बरखा को जलन होगी.  तभी अंकुश उसे शांत करवाने की कोशिश करेगा लेकिन बरखा का पारा बढ़ता जाएगा.

 

शो में ये भी दिखाया जाएगा कि अनुपमा पूजा करने की बात करेगी  तभी बरखा घर और बिजनेस को लेकर अनाउंसमेंट करेगी. अनुज सबको बताएगा कि घर और बिजनेस की असली मालकिन अनुपमा है.

 

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अनुपमा जैसे ही कुछ कहने लगेगी, बरखा म्यूजिक ऑन कर देगी और सबको डांस करने के लिए कहेगी. अनुपमा यह देखकर थोड़ा परेशान होगी और जाकर म्यूजिक बंद कर देगी और भजन लगा देगी. शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि सारा और अधिक नजदीक आएंगे. दूसरी तरफ बरखा अनुपमा से प्रॉपर्टी छीनने के लिए चाल चलेगी.

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