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35 दिनों से नहीं आया राजू श्रीवास्तव को होश, एम्स से किया जाएगा शिफ्ट

मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था. अस्पताल में भर्ती हुए उन्हें एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन उन्हें अब तक होश नहीं आया है. फिलहाल वो वेंटिलेटर सपोर्ट सिस्टम पर हैं. इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. आइए बताते हैं.

मिली जानकारी के अनुसार, उनकी सेहत में पहले से काफी सुधार है. लेकिन इस बीच बताया जा रहा है कि उन्हें दिल्ली से मुंबई शिफ्ट किया जाएगा .इस बारे में जब उनके भाई दीपू श्रीवास्तव से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ऐसी कोई भी योजना नहीं है.

 

दीपू श्रीवास्तव ने राजू की सेहत को लेकर बताया कि सेहत में सुधार की स्पीड थोड़ी धीमी है, लेकिन वो जल्द ही ठीक हो जाएंगे. फिलहाल वो वेंटिलेटर पर हैं. दीपू ने आगे बताया कि अस्पताल में उन्हें 35 दिन हो गए हैं.

 

राजू श्रीवास्तव के ब्रेन के अपरहेड तक ऑक्सीजन सप्लाई नहीं पहुंच पा रहा है. इसी वजह से उन्हें होश नहीं आया है. इसका इलाज करने के लिए न्यूरा फीजियोथेरेपी का सहारा लिया जा रहा है.

 

आपको बता दें कि राजू श्रीवास्तव को 10 अगस्त को दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसी दिन उनकी एंजियोप्लास्टी की गई थी. जिम में एक्सरसाइज करते वक्त राजू श्रीवास्तव अचानक गिर गए थे जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने उन्हें उठाया और अस्पताल ले गए.

तोषु को लात मारकर घर से बाहर करेगा वनराज, आएगा ये ट्विस्ट

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में तोषु के गंदी हरकतों  की वजह से जमकर हंगामा हो रहा है. जिससे  दर्शकों को एंटरटेनमेंट का डबल डोज मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि  अनुपमा शाह परिवार के सामने तोषु का पोल खोलती है.  जिसे सुनकर सबको बड़ा झटका लगता है. अनुपमा तोषु को कॉफी जलील करती है. शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए एपिसोड के बारे में…

शो में दिखायाजा रहा है कि तोषु के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के बारे में सुनकर वनराज का सिर शर्म से नीचे झुक जाता है. तो वहीं तोषु अपनी गलती मानने से ही इनकार कर देता है. इसी बीच वनराज उसे जोरदार थप्पड़ लगाता हेै.

 

शो में आप देखेंगे कि समर तोषु को अकेले में खूब जलील करेगा. तो वहीं तोषु अपनी गलती मानने के बदले अनुपमा को ही गलत बताएगा. तोषु दावा करेगा कि अनुपमा की वजह से उसका घर टूट रहा है. ये बात सुनकर वनराज का पारा चढ़ जाएगा. वनराज तोषु को घर से बाहर कर देगा और कहेगा कि इस घर में तोषु के लिए कोई जगह नहीं है.

 

खबरों के अनुसार, किंजल और उसकी बेटी को सहारा देने के लिए अनुज और अनुपमा एक बड़ा फैसला लेने वाले हैं. अनुज और अनुपमा किंजल को गोद लेने की तैयारी करेंगे. अनुपमा और अनुज किंजल के माता पिता बनकर उसकी देखभाल करेंगे.

 

मेरे Parents घर से बाहर नहीं जाने देते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 25 साल की एक कुंआरी लड़की हूं. मेरे मांबाप को लगता है कि घर के बाहर हर कोई मुझे दबोचने के लिए ही बैठा है. इसी वजह से वे कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ते हैं. यहां तक कि अपने कालेज की पढ़ाई के दौरान तक मेरी सहेलियां मेरे इर्दगिर्द ही रहती थीं, जिन से वे मेरी हर खबर रखते थे. अब वे मुझे नौकरी भी नहीं करने देना चाहते हैं. मैं उन्हें लाख बार समझा चुकी हूं कि ऐसा कुछ नहीं है और घर के बाहर मैं अपनी हिफाजत खुद कर सकती हूं, पर उन के कान पर जूं तक नहीं रेंगती. इन सब बातों से घर पर तनाव का माहौल रहता है. मैं क्या करूं?

जवाब

आप जैसी लाखोंकरोड़ों लड़कियां घर वालों के इस रवैए से दुखी रहती हैं और जिंदगी अपने मुताबिक नहीं जी पा रही हैं. इस की सब से बड़ी वजह समाज में लड़कियों की हिफाजत की गारंटी न होना. दूसरी वजह, मांबाप द्वारा लड़कियों को आजादी न देना है.  मांबाप को हमेशा यह डर सताता रहता है कि बेटी के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए या फिर वह प्यारमुहब्बत के चक्कर में पड़ कर घर की इज्जत मिट्टी में न मिला दे. पर ये सब बकवास बातें हैं, जिन से लड़कियों को घुटन और अपनी पैदाइश पर अफसोस होता है.  आप को हिम्मत जुटा कर बगावत करना होगी, तभी नौकरी कर के अपने पैरों पर खड़ी हो पाएंगी, नहीं तो जिंदगीभर यों ही पिंजरे की पंछी बन कर फड़फड़ाती रहेंगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem 

कातिल मां को मिली मौत: घातक साबित हुए नाजायज संबंध

उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के थाना टूंडला क्षेत्र के मोहल्ला इंदिरा कालोनी में 19 सितंबर, 2018 को दोपहर 2 बजे गोली चलने की आवाज से सनसनी फैल गई. गोली चलने की आवाज रिटायर्ड दरोगा रमेशचंद्र के मकान की ओर से आई थी. इस मकान में ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर किराएदार रहते थे.

चूंकि गोली की आवाज फर्स्ट फ्लोर से आई थी, इसलिए नीचे रहने वाले किराएदार तुरंत ऊपर पहुंचे तो वहां किराए पर रहने वाली महिला बेबीरानी खून में लथपथ किचन में पड़ी थी. उसे इस हालत में देखते ही उन्होंने शोर मचाया. इस के बाद तो मोहल्ले के कई लोग वहां पहुंच गए.

महिला के सिर से खून बह रहा था. उस के शरीर में कोई हरकत न होने से लोग समझ गए कि उस की मौत हो चुकी है. घटना के समय मृतका का 4 साल का बच्चा आदित्य घर में ही मौजूद था.

इसी दौरान किसी ने इस की सूचना पुलिस को दे दी. कुछ ही देर में थानाप्रभारी बी.डी. पांडेय पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. पता चला कि हत्या के समय महिला रसोई में खाना बना रही थी. खाना बनाते समय कोई उस के सिर में गोली मार कर चला गया.

पुलिस को पूछताछ के दौरान पता चला कि 35 साल की बेबीरानी अपने 4 साल के बेटे आदित्य के साथ इस मकान में रहती थी. यह मकान रिटायर्ड दरोगा रमेशचंद्र का है. इस बीच मकान मालिक रमेशचंद्र भी वहां पहुंच गए. उन्होंने बताया कि डेढ़ महीने पहले ही बेबी ने उन का मकान किराए पर लिया था. इस से पहले यह इसी क्षेत्र में अमित जाट के मकान में किराए पर रहती थी. थानाप्रभारी ने महिला की हत्या की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी.

इस पर एसएसपी सचिंद्र पटेल, एसपी (सिटी) राजेश कुमार सिंह, सीओ संजय वर्मा फोरैंसिक टीम के साथ वहां पहुंच गए. उच्चाधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. इस के साथ ही पुलिस ने काररवाई शुरू कर दी.

फोरैंसिक टीम द्वारा कई स्थानों से फिंगरप्रिंट उठाए गए. घटनास्थल का जायजा लेने पहुंचे एसएसपी सचिंद्र पटेल के निर्देश पर थानाप्रभारी ने जरूरी काररवाई कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

अधिकारियों ने 4 साल के मासूम आदित्य से पूछा कि घर में कौन आया था? मम्मी को गोली किस ने मारी? आदित्य ने बताया, ‘‘भैया आए थे. उन्होंने ठांय किया और मर गई मेरी मम्मी.’’

उस बच्चे ने भैया का नाम लिया तो पुलिस पता करने में जुट गई कि यह भैया कौन है. पुलिस ने छानबीन की तो जानकारी मिली कि मृतका बेबीरानी के पहले पति रामवीर के बड़े बेटे गुलशन को आदित्य भैया कहता था.

बेबी के पहले पति रामवीर की हत्या 9 साल पहले हो चुकी है. पहले पति की हत्या के बाद बेबी ने अपने प्रेमी विजेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू से दूसरी शादी कर ली. दूसरे पति से 4 साल का बेटा आदित्य है.

दूसरे पति से भी नहीं बनी बेबी की

पुलिस को पूछताछ में पता चला कि शादी के कुछ समय बाद बेबी की दूसरे पति से नहीं पटी और वह उस से अलग हो गया. वर्तमान में वह आगरा में रह रहा है. बेबी पहले पति रामवीर की पेंशन से गुजारा करते हुए बेटे आदित्य के साथ किराए के मकान में रहती थी. बेबी के पास उस के पहले पति का बेटा गुलशन अकसर आयाजाया करता था. पड़ोसियों ने भी गुलशन के वहां आते रहने की बात कही.

बेबी के पहले पति रामवीर से 2 बेटे हैं गुलशन और हिमांशु. पिता की हत्या के बाद बच्चों के दादादादी दोनों को अपने साथ शिकोहाबाद के गांव कटौरा बुजुर्ग ले गए थे. वहीं रह कर दोनों बच्चे बड़े हुए. मृतका के 4 वर्षीय बेटे के बयान के आधार पर पुलिस को यह शक हो गया कि बेबी की हत्या में उस के बेटे गुलशन का हाथ हो सकता है.

जांच के दौरान यह भी पता चला कि दूसरा पति विजेंद्र सिंह पिछले ढाई साल से अपने बेटे आदित्य को देखने तक नहीं आया. चूंकि पुलिस का शक 20 वर्षीय गुलशन की तरफ था, इसलिए पुलिस सरगर्मी से उस की तलाश में जुट गई.

थानाप्रभारी बी.डी. पांडेय दूसरे दिन पुलिस की एक टीम के साथ गांव कटौरा बुजुर्ग पहुंचे. घर पर उस का बीमार भाई हिमांशु मिला. उस ने बताया कि उसे मां की हत्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उस ने बताया कि गुलशन घर पर नहीं है. वह दिल्ली में रह कर काम करता है. लिहाजा पुलिस टीम वहां से बैरंग लौट आई.

29 सितंबर को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर आरोपी गुलशन को ऐत्मादपुर तिराहे से बाइक सहित गिरफ्तार कर लिया. गुलशन बाइक से कहीं जा रहा था. गिरफ्तार करने वाली टीम में थानाप्रभारी बी.डी. पांडेय, एसआई मुकेश कुमार, सुरेंद्र कुमार, इब्राहीम खां, धर्मेंद्र सिंह शामिल थे. गुलशन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा पुलिस ने बरामद कर लिया. आरोपी गुलशन ने थाने में मौजूद एसपी (सिटी) राजेश कुमार सिंह द्वारा की गई पूछताछ में जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

बेबीरानी मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला मैनपुरी के थाना भौगांव अंतर्गत गांव मोटा की रहने वाली थी. उस की शादी थाना शिकोहाबाद के गांव कटौरा बुजुर्ग निवासी 30 साल के रामवीर सिंह से हुई थी, जो रेलवे में खलासी पद पर नौकरी करता था. उस की पोस्टिंग टूंडला में हुई थी तो वह वहीं आ कर बस गया. वह रेलवे कालोनी के क्वार्टर में पत्नी बेबीरानी व दोनों बच्चों गुलशन व हिमांशु के साथ रहने लगा.

तीखे नैननक्श, सुंदर और शोख अदाओं वाली बेबी के प्रेम संबंध हाथरस के सादाबाद के रहने वाले गजेंद्र उर्फ गुड्डू से हो गए थे, जोकि रेलवे में गार्ड था तथा टूंडला के रैस्टकैंप में ही रहता था. रामवीर के ड्यूटी पर जाने के बाद गुड्डू बेबी से मिलने उस के क्वार्टर पर पहुंच जाता था.

इस की भनक जब रामवीर को लगी तो उस ने बेबी पर निगाह रखनी शुरू कर दी. वह पत्नी पर सख्ती करने लगा, जिस की वजह से बेबी अपने पति से नाखुश रहने लगी.

गहरी साजिश रची थी हत्या की

3-4 अक्तूबर, 2009 की आधी रात को जब पूरा परिवार घर में सोया हुआ था, तभी रात लगभग 2 बजे 2 व्यक्ति उस के क्वार्टर पर आए तथा दरवाजा खटखटाया. जैसे ही बेबी ने दरवाजा खोला, उन्होंने सोते हुए रामवीर को दबोच लिया तथा चाकू से उस का गला रेत कर उस की हत्या कर दी. उस समय घर पर उस का बेटा गुलशन 11 साल का था.

बेबी अपने प्रेमी गुड्डू के प्रेमपाश में पूरी तरह बंध चुकी थी. उस से अवैध संबंध थे. अवैध संबंधों में बाधक बनने पर रामवीर भेंट चढ़ गया. इस मामले में तत्कालीन एसएसपी रघुवीर लाल को बेबीरानी ने बताया कि जगदीश नामक व्यक्ति ने दरवाजा खुलवाया था. उस के साथ एक व्यक्ति कोई और था. उन के द्वारा पति को चाकू मारने पर वह चीखीचिल्लाई, लेकिन कोई सहायता के लिए नहीं आया.

घटना के बाद पड़ोसी वहां पहुंचे, लेकिन तब तक बदमाश भाग गए. पुलिस जांचपड़ताल कर ही रही थी, तभी पुलिस को मृतक के 11 वर्षीय बेटे गुलशन ने ऐसी जानकारी दी कि उस से न सिर्फ हत्यारे के बारे में जानकारी मिली बल्कि हत्या की वजह भी सामने आ गई.

एसपी रघुवीर लाल के निर्देश पर मृतक के चश्मदीद बेटे गुलशन व दूसरे बेटे हिमांशु को भी पूरी पुलिस सुरक्षा प्रदान करने के साथ उन बच्चों की मां बेबीरानी को हिरासत में ले लिया गया था.

घटना की रिपोर्ट मृतक के भाई श्यामवीर सिंह ने अपनी भाभी बेबीरानी और उस के प्रेमी गजेंद्र उर्फ गुड्डू व शाहिद के विरुद्ध दर्ज कराई थी.

‘मेरे पिता को हत्यारों ने जिस तरह से मारा है, उन्हें उन की सजा मैं ही दूंगा कोई और नहीं.’ यह बात गुलशन ने तत्कालीन एसपी से कही तो वह भी सन्न रह गए. उन्होंने जब उस से उस के पिता की हत्या के बारे में पूछा तो उस की आंखों में खून उतर आया था.

घटना के चश्मदीद गुलशन ने तब पूरी घटना को बताते हुए कहा था कि बस उसे अपनी रिवौल्वर दे दो, वह अपनी मां को अभी मार देगा. उस ने सिर्फ हत्यारों की पहचान ही नहीं कराई बल्कि अपनी मां की पोल भी खोल दी थी. उस ने बताया, ‘‘बदमाशों ने उस के पिता को पलंग से खींच कर जमीन पर गिराया तभी वह जाग गया था. इस दौरान उस की मां उसे खींच कर दूसरे कमरे में ले जाने लगी थी. पिता की चीख पर जब उस ने पलट कर देखा तो उस ने पिता के गले में चाकू घुसा पाया.’’ इस दौरान उस ने मां के रोने की बात को नाटक बताया था.

गुलशन के सामने हुई थी पिता की हत्या

इस छोटी सी उम्र में अपनी आंखों के सामने हुई पिता की हत्या से उस समय मासूम गुलशन के चेहरे पर बदले की भावना के तीखे तेवर स्पष्ट दिखाई दे रहे थे. पुलिस कस्टडी में बैठी बेबीरानी को तब उस के प्रेम संबंधों के चलते न ही प्रेमी मिल पाया था और न ही पति रहा और बच्चे भी उस से दूर चले गए थे.

पिता की हत्या के बाद बिखरे रिश्ते अंत तक नहीं जुड़ पाए. गुलशन पिता की हत्या का चश्मदीद गवाह था. बेबी जेल से जल्दी छूट आई थी. वह पति की पेंशन से अपना खर्च चला रही थी.

गुलशन ने रिश्तों की बर्फ पिघलाने की हरसंभव कोशिश की. उस ने मां को दादादादी के गांव चल कर रहने की बात कही, लेकिन उस ने साफ इनकार कर दिया.

बेबी व गुड्डू के कोर्ट से बरी होने के बाद दोनों ने शादी कर ली थी. शादी के बाद बेबी के गुड्डू से एक बेटा आदित्य हुआ जो इस समय 4 साल का है. शादी के बाद बेबी की अपने दूसरे पति गजेंद्र से भी नहीं पटी. वक्त गुजरने के साथसाथ बेबी और गजेंद्र अलग हो गए.

गुलशन ने बताया कि वह कई दिन से मां के पास लगातार जा रहा था. छोटा भाई बीमार था, उस का इलाज कराने की बात पर मां ने कहा कि मेरे पास आ कर रहो. गुलशन ने मना कर दिया. उस का कहना था कि जो मेरे बाप को मरवा सकती है, वह मुझे भी मरवा सकती थी.

गुलशन को पिता की जगह आश्रित कोटे से रेलवे में नौकरी मिलने का मामला भी तय हुआ था. मां उस से इस कदर नफरत करने लगी थी कि जब उस की नौकरी लगने का मौका आया तो उस ने सहमतिपत्र पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया. वह उस से बेगाने जैसा व्यवहार कर रही थी. मां के सहमतिपत्र पर हस्ताक्षर जरूरी थे. भाई का इलाज व नौकरी को मना करने पर गुलशन का खून खौल उठा.

गुलशन बना मां का हत्यारा

19 सितंबर को दोपहर 2 बजे वह मां के पास पहुंचा. उस समय वह रसोई में रोटी बना रही थी. आटे की लोई बेल रही थी. गुलशन ने तमंचे से उस के सिर के पीछे गोली मार दी. गोली लगते ही बेबी कटे पेड़ की तरह रसोई में ही गिर गई. उस के हाथ से आटे की लोई छूट कर पास ही गिर गई. घटना को अंजाम दे कर गुलशन तेजी से घर से भाग गया. भागते समय उस के 4 वर्षीय सौतेले भाई आदित्य ने उसे देख लिया था.

मृतका बेबी का 4 साल का बेटा आदित्य अनाथ हो गया. मां की हत्या के बाद अब उसे कहां भेजा जाएगा, कोई नहीं बता रहा है. क्योंकि पिछले ढाई साल से उस का पिता गजेंद्र उर्फ गुड्डू एक बार भी उसे देखने नहीं आया. फिलहाल पुलिस ने उसे पड़ोस में रहने वाली एक महिला को सौंप दिया है.

यह अजीब संयोग था कि मां का कातिल बना बेटा गुलशन अपने पिता की हत्या में मां के खिलाफ गवाह था. वहीं अब दूसरा बेटा आदित्य मां की हत्या के मामले में अपने बड़े भाई के खिलाफ गवाह है.

अपने प्रेमी की मोहब्बत पाने के लिए उस ने अपनी ही मांग का सिंदूर उजाड़ डाला. जेल से छूटने के बाद प्रेमी के साथ घर बसाया, मगर सब कुछ उजड़ गया.

पहले पति के बेटे की गोली का शिकार बनी मृतका बेबी का शव पोस्टमार्टम कक्ष में रखा रहा. टूंडला में ही मृतका की बहन रेनू रहती है, लेकिन मायका व ससुराल पक्ष से, यहां तक कि बेबीरानी से शादी रचाने वाला गजेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू भी सामने नहीं आया.

बेबी को अपने किए की सजा उसे मौत के रूप में मिली. अपनों के होते हुए भी पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने ही लावारिस लाशों की तरह उस का अंतिम संस्कार किया.

पुलिस ने हत्यारोपी गुलशन को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया ?

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

त्यौहार 2022: जानें कैसे बनाते हैं रोलीपोली ग्लोरी

आइए जानते हैं घर पर कैसे बनाएं आसान तरीके से रोलीपोली ग्लोरी मिठाई . इसे बनाना बेहद ही आसान है. कम समय में मेहमानों के लिए आसान नाश्ता है. 

सामग्री :

ब्रैड पीस,

बड़ा चम्मच मक्खन,

1/2 कप दूध,

बड़े चम्मच चौकलेट सौस,

कुछ फल.

कस्टर्ड के लिए :

बड़े चम्मच वनीला कस्टर्ड,

1/2 कप फेंटी हुई गाढ़ी क्रीम,

1/2 लिटर दूध,

बड़े चम्मच चीनी,

बड़ा चम्मच जैलेटिन,

बड़े चम्मच स्ट्राबेरी जैम,

बड़े चम्मच मिक्स मेवे,

टिन फ्रूट कौकटेल.

विधि :

ब्रैड पीसों के किनारे काट लें. सभी ब्रैड पीसों पर मक्खन लगाएं. मक्खन लगे साइड को पलट दें. दूसरी ओर कुछ दूध छिड़कें तथा सभी ब्रैड पीसों को बेसन की सहायता से पतला कर लें. 

अब इन पर चौकलेट सौस लगाएं. सावधानी से प्रत्येक ब्रैड पीस को लपेटें और रोल बना लें. 

इन रोलों को फायल में लपेट कर फ्रिज में रख दें.

जैलेटिन को गुनगुने पानी में घोल लें. 

फ्रूट कौकटेल का टिन खोल कर जूस अलग कर दें. 

फलों के छोटे टुकड़े काट लें. जैम में थोड़ा पानी मिला कर उसे पतला कर लें.

एक बड़े बरतन में दूध उबलने को रखें. 

कस्टर्ड पाउडर को 1/2 कप ठंडे दूध में घोल लें. 

जब दूध उबलने लगे तो उस में घुला हुआ कस्टर्ड डाल कर लगातार चलाते हुए गाढ़ा होने तक पका लें. इसे ठंडा होने दें. 

क्रीम और चीनी को अच्छी तरह से फेंट लें. इसे कस्टर्ड में मिला दें. जैलेटिन मिला कर अच्छी तरह से हिलाएं. 

एक सर्विंग डिश में सब से नीचे जैम बिछाएंऊपर मेवे तथा कटे फल डालें. 

तैयार कस्टर्ड डालें तथा आधा जमने के लिए फ्रिज में रख दें.

रोल्स को फ्रिज में से निकालें. फौयल हटा कर प्रत्येक रोल के टुकड़े काट लें. 

इन कटे रोल्स को आधे जमे कस्टर्ड के बीच में सैट करें. चैरी या जेम्स से सजाएं तथा ठंडाठंडा सर्व करें.

पदयात्रा: भाजपा चंचला, राहुल गांधी गंभीरा

राहुल गांधी की ऐतिहासिक लंबी पदयात्रा की घोषणा के साथ ही भाजपा के मानो होश फाख्ता हो गए हैं. अब वह वह किसी चंचला नारी की तरह कांग्रेस और राहुल गांधी पर बात-बात पर आक्षेप लगा रही है. वहीं कांग्रेस ने बारंबार अपने व्यवहार में एक गंभीरता को परिलक्षित दिखाया है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कई वरिष्ठ नेताओं के साथ ‘भारत जोड़ो’ यात्रा की विधिवत शुरुआत कर दी है. पार्टी इस यात्रा को देशव्यापी व्यापक जनसंपर्क अभियान बता रही है तथा इससे संगठन को संजीवनी मिलने की उम्मीद है. राहुल गांधी ने पदयात्रा का आगाज ‘विवेकानंद पॉलिटेक्निक’ से 118 अन्य ‘भारत यात्रियों ” और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ पदयात्रा की शुरुआत किया. कांग्रेस पार्टी ने राहुल समेत 119 नेताओं को ‘भारत यात्री’ नाम दिया है, जो कन्याकुमारी से पदयात्रा करते हुए कश्मीर तक की लंबी पदयात्रा करेंगे. यह लोग कुल 3570 किलोमीटर को दूरी तय करेंगे.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विधिवत कन्याकुमारी से अपनी ‘भारत जोड़ो’ यात्रा की औपचारिक शुरुआत की और इस मौके पर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लिखित संदेश के माध्यम से कहा – यह यात्रा भारतीय राजनीति के लिए परिवर्तनकारी क्षण है तथा यह कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम करेगी.
इस तरह कहा जा सकता है कि राहुल गांधी की यह पदयात्रा कई अर्थों में गंभीर संदेश देश को देने लगी है. पूर्व प्रधानमंत्री और अपने पिता राजीव गांधी को श्रीपेरंबदूर में श्रद्धांजलि देने के बाद यह पदयात्रा आरंभ हुई है जो देखते ही देखते भाजपा के लिए मानो सर दर्द बन गई है और कांग्रेस अब आगे निकलती दिखाई दे रही है.

भाजपा के आरोप

राहुल गांधी की पदयात्रा प्रारंभ होने से पहले से ही भारतीय जनता पार्टी की घबराहट दिखाई देने लगी थी और उसके नेता पदयात्रा पर उंगली उठाने लगे थे. जैसे-जैसे पदयात्रा का समय आता गया भाजपा और भी आक्रमक होती चली गई.

पदयात्रा प्रारंभ होने के साथ भाजपा के नेताओं की जैसे की आदत है उन्होंने हर संभव तरीके से राहुल गांधी कि इस ऐतिहासिक पदयात्रा को प्रारंभ में ही मानसिक रूप से ध्वस्त और कमजोर करने का भरसक प्रयास किया. देश में यह संदेश फैलाने का, अपने गोदी मीडिया के माध्यम से प्रयास किया कि यह सब तो सिर्फ और सिर्फ बेकार की कवायद है .

भाजपा के किसी नेता ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा का क्या मतलब है- भाई! भरत तो पहले से ही जुड़ा हुआ है. इस तरह इस अभियान पर प्रश्न चिन्ह लगाने का भरपूर प्रयास किया गया.

मगर आश्चर्यजनक रूप से भाजपा का यह आमोध ब्रह्मास्त्र फेल हो गया. क्योंकि देश की जनता राहुल गांधी को बड़ी गंभीरता से देख रही है और भारत जोड़ो यात्रा को सकारात्मक भाव से ले रही थी.
भाजपा का जब भारत जोड़ो पर प्रश्न चिन्ह का तीर नहीं चला तो भाजपा ने दूसरा तीर चलाया और कहा कि राहुल गांधी तो 42000 की टीशर्ट पहन कर के पदयात्रा पर निकले हैं.

भाजपा का यह तीर भी भोथरा सिद्ध हुआ देश की जनता ने उसे गंभीरता से नहीं लिया क्योंकि आरोप लगाने वाले स्वयं भाजपा के चाहे वह प्रधानमंत्री हो अथवा गृह मंत्री या अन्य नेता स्वयं लाखों रुपए के बेशकीमती वस्त्र धारण करते हैं. इनकी फिजूलखर्ची सारा देश देख रहा है इनके स्वभाव में कहीं भी किफायतदारी नहीं है. ऐसे में यह तीर अर्थात उपदेश-” पर उपदेश कुशल बहुतेरे” कहावत बनकर रह गया.

भाजपा इस तरह अनेक तरह से राहुल गांधी पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप के तीर चला रही है. मगर यह सारे बाण, रामलीला की नौटंकी की तरह राहुल गांधी के आस पास से निकलते जा रहे हैं और राहुल गांधी मुस्कुराते हुए पदयात्रा करते अपना संदेश देश को देते चले जा रहे हैं.

राहुल गांधी की इस पदयात्रा से अब जहां भाजपा हतप्रभ है वही विपक्ष के अन्य बड़े नेताओं का भी होश काम नहीं कर रहा है. चाहे वे नीतीश कुमार हों या फिर ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री पद के दावेदार सभी के मुंह में ताला लग गया है. अन्यथा होना यह चाहिए कि विपक्ष की एकता की बात करने वाले यह नेता खुलकर राहुल गांधी की पदयात्रा को समर्थन करते. अभी तलक सिर्फ शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राहुल गांधी की पदयात्रा के पक्ष में अपना वक्तव्य दिया है, बाकी सारे नेता खामोश है उनकी खामोशी अपने आप में एक प्रश्न है.

‘क्या गुम है किसी के प्यार में’ का होगा होगा अंत? पढ़ें खबर

स्टार प्लस का मशहूर शो ‘गुम है किसी के प्यार में’ में इन दिनों बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो का ट्रैक दर्शकों को कॉफी पसंद आ रहा है. लेकिन इसी बीच शो को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. जिसे सुनकर फैंस को बड़ा झटका लगा है. आइए बताते हैं, क्या है पूरा मामला…

बताया जा रहा है कि ये शो अब खत्म होने वाला है. रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर का महीना, शो का आखिरी महीना होगा. खबरों के अनुसार, शो में अब विराट और सई को मिलाने के बाद कुछ दिखाने के लिए कुछ भी दिलचस्प नहीं होगा. रिपोर्ट के मुताबिक विराट और सही मिल जाएंगे और उनके दोनों बच्चे सवी और विनायक भी साथ आ जाएंगे.

 

बताया जा रहा है कि पाखी को कोई बीमारी हो जाएगी जिसके बाद वह सई और विराट को साथ करके इस दुनिया को छोड़ देगी. सई पाखी को वादा करेगी की जिस तरह वह विनायक से प्यार करती है और उसका ध्यान रखती है उसी तरह विनायक को पूरा प्यार देगी. इसके बाद विराट और सई की लव स्टोरी की दोबारा शुरुआत होगी.

 

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शो का लेटेस्ट प्रोमो सामने आया है. इस प्रोमो के अनुसार, सालों बाद पाखी और सई मिलती है.  दोनों एक-दूसरे को देखकर हैरान हो जाते हैं. घर में घुसते ही पाखी सई से कहती है कि हम अपनी जिंदगी में कितना भी आगे क्यों न बढ़ जाएं लेकिन अतीत हमें पीछे खींच ही लेता है.  उसका जवाब देते हुए सई कहती है,  अब मैं वो सई नहीं हूं जिसे आप जानती हैं. लेकिन आज भी वहीं पाखी हैं जो विराट से प्यार करती थी.

 

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सई आगे कहती है कि अब तो आप उनकी पत्नी भी बन चुकी हैं. सई की बातों पर पाखी उससे अजीब सी मांग करती है और कहती है कि विराट की दूसरी पत्नी, पहली पत्नी से कुछ मांगना चाहती है. क्या तुम मेरे साथ विराट के घर चलोगी. शो में अब ये देखना दिलचस्प है कि क्या सई पाखी की बात मानेगी?

दीवाली स्पेशल -भाग 2 : जिंदगी जीने का हक

 

 

 

 

 

 

 

 

जूही के आते ही मानो घर में बहार आ गई. सभी बहुत खुश और संतुष्ट नजर आते थे लेकिन केशव अब प्रभव की शादी के लिए बहुत जल्दी मचा रहे थे. प्रभव ने कहा भी कि उसे इत्मीनान से परीक्षा दे लेने दें और वैसे भी जल्दी क्या है, घर में भाभी तो आ ही गई हैं.

‘‘तभी तो जल्दी है, जूही सारा दिन घर में अकेली रहती है. लड़की हमें तलाश करनी है और तैयारी भी हमें ही करनी है. तुम इत्मीनान से अपनी परीक्षा की तैयारी करते रहो. शादी परीक्षा के बाद करेंगे. पास तो तुम हो ही जाओगे.’’अपने पास होने में तो प्रभव को कोई शक था ही नहीं सो वह बगैर हीलहुज्जत किए सपना से शादी के लिए तैयार हो गया. लेकिन हनीमून से लौटते ही यह सुन कर वह सकते में आ गया कि पापा प्रणव की शादी की बात कर रहे हैं.

‘‘अभी इसे फाइनल की पढ़ाई इत्मीनान से करने दीजिए, पापा. शादीब्याह की चर्चा से इस का ध्यान मत बटाइए,’’ प्रभव ने कहा, ‘‘भाभी की कंपनी के लिए सपना आ ही गई है तो इस की शादी की क्या जल्दी है?’’

‘‘यही तो जल्दी है कि अब इस की कोई कंपनी नहीं रही घर में,’’ केशव ने कहा.

‘‘क्या बात कर रहे हैं पापा?’’ प्रभव हंसा, ‘‘जब देखिए तब मैरी के लिटिल लैंब की तरह भाभी से चिपका रहता है और अब तो सपना भी आ गई है बैंड वैगन में शामिल होने को.’’

सपना हंसने लगी.

‘‘लेकिन देवरजी, भाभी के पीछे क्यों लगे रहते हैं यह तो पूछिए उन से.’’

‘‘जूही मुझे बता चुकी है सपना, प्रणव को इस की ममेरी बहन प्रिया पसंद है, सो मैं ने इस से कह दिया है कि अपने ननिहाल जा कर बात करे,’’ कह कर केशव चले गए.

‘‘जब बापबेटा राजी तो तुम क्या करोगे प्रभव पाजी?’’ अभिनव हंसा, ‘‘काम तो इस ने पापा के साथ ही करना है. पहली बार में पास न भी हुआ तो चलेगा लेकिन जूही, तुम्हारे मामाजी तैयार हो जाएंगे अधकचरी पढ़ाई वाले लड़के को लड़की देने को?’’

‘‘आप ने स्वयं तो कहा है कि देवरजी को काम तो पापा के साथ ही करना है सो यही बात मामाजी को समझा देंगे. प्रिया का दिल पढ़ाई में तो लगता नहीं है सो करनी तो उस की शादी ही है इसलिए जितनी जल्दी हो जाए उतना ही अच्छा है मामाजी के लिए.’’

जल्दी ही प्रिया और प्रणव की शादी भी हो गई. कुछ लोगों ने कहा कि केशव जिम्मेदारियों से मुक्त हो गए और कुछ लोगों की यह शंका जाहिर करने पर कि बच्चों के तो अपनेअपने घरसंसार बस गए, केशव के लिए अब किस के पास समय होगा और वह अकेले पड़ जाएंगे, अभिनव बोला, ‘‘ऐसा हम कभी होने नहीं देंगे और होने का सवाल भी नहीं उठता क्योंकि रोज सुबह नाश्ता कर के सब इकट्ठे ही आफिस के लिए निकलते हैं और रात को इकट्ठे आ कर खाना खाते हैं, उस के बाद पापा तो टहलने जाते हैं और हम लोग टीवी देखते हैं, कभीकभी पापा भी हमारे साथ बैठ जाते हैं. रविवार को सब देर से सो कर उठते हैं, इकट्ठे नाश्ता करते हैं…’’

‘‘फिर सब का अलगअलग कार्यक्रम रहता है,’’ केशव ने अभिनव की बात काटी, ‘‘यह सिलसिला कई साल से चल रहा है और अब भी चलेगा, फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब मैं भी छुट्टी का दिन अपनी मर्जी से गुजारा करूंगा. पहले यह सोच कर खाने के समय पर घर पर रहता था कि तुम में से जो बाहर नहीं गया है वह क्या खाएगा लेकिन अब यह देखने को सब की बीवियां हैं, सो मैं भी अब छुट्टी के रोज अपनी उमर वालों के साथ मौजमस्ती और लंचडिनर बाहर किया करूंगा.’’

‘‘बिलकुल, पापा, बहुत जी लिए… आप हमारे लिए. अब अपनी पसंद की जिंदगी जीने का आप को पूरा हक है,’’ प्रणव बोला.

‘‘लेकिन इस का यह मतलब नहीं है कि पापा बाहर लंचडिनर कर के अपनी सेहत खराब करें,’’ प्रभव ने कहा, ‘‘हम में से कोई तो घर पर रहा करेगा ताकि पापा जब घर आएं तो उन्हें घर खाली न मिले.’’

‘‘हम इस बात का खयाल रखेंगे,’’ जूही बोली, ‘‘वैसे भी हर सप्ताह सारा दिन बाहर कौन रहेगा?’’

‘‘और कोई रहे न रहे मैं तो रहा करूंगा भई,’’ केशव हंसे.

‘‘यह तो बताएंगे न पापा कि जाएंगे कहां?’’ प्रणव ने पूछा.

‘‘कहीं भी जाऊं, मोबाइल ले कर जाऊंगा, तुझे अगर मेरी उंगली की जरूरत पड़े तो फोन कर लेना,’’ केशव प्रिया की ओर मुड़े, ‘‘प्रिया बेटी, इसे अब अपना पल्लू थमा ताकि मेरी उंगली छोड़े.’’

लेकिन कुछ रोज बाद प्रिया ने खुद ही उन की उंगली थाम ली. एक रोज जब रात के खाने के बाद वह घूमने जा रहे थे तो प्रिया भागती हुई आई बोली, ‘‘पापाजी, मैं भी आप के साथ घूमने चलूंगी.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘क्योंकि आप सड़क पर अकेले घूमते हैं और मैं छत पर तो क्यों न हम दोनों साथ ही टहलें?’’ प्रिया ने उन के साथ चलते हुए कहा.

‘‘मगर तुम छत पर अकेली क्यों घूमती हो?’’

‘‘और क्या करूं पापाजी? प्रणव को तो 2-3 घंटे पढ़ाई करनी होती है और मुझे रोशनी में नींद नहीं आती, सो जब तक टहलतेटहलते थक नहीं जाती तब तक छत पर घूमती रहती हूं.’’

‘‘टीवी क्यों नहीं देखतीं?’’

‘‘अकेले क्या देखूं, पापाजी? सब लोग 1-2 सीरियल देखने तक रुकते हैं फिर अपनेअपने कमरों में चले जाते हैं.’’

 

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