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सत्यकथा: प्यार के लिए मौत की दावत

29जून, 2022 सुबह का वक्त था. मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पथरिया पुलिस थाने में तैनात टीआई रजनी शुक्ला थाने पहुंची ही थीं कि अचानक उन की नजर थाने के बाहर बैठी एक महिला पर पड़ी. लगभग 35 साल की महिला जोरजोर से रो रही थी.

टीआई रजनी शुक्ला ने सोचा कि जरूर इस औरत को उस के पति ने मारापीटा होगा, उसी की रपट लिखाने आई होगी. टीआई रजनी शुक्ला ने उस के करीब जा कर  सहानुभूतिपूर्वक पूछा, ‘‘क्या बात है, तुम रो क्यों रही हो? जो भी समस्या है साफसाफ मुझे बताओ.’’

अपने आंसुओं को साड़ी के पल्लू से पोंछते हुए उस महिला ने बताया, ‘‘मैडमजी, मेरा नाम सावित्री है और मैं मिर्जापुर गांव से आई हूं.’’

‘‘क्या तुम्हारे साथ किसी ने बदसलूकी की है? खुल कर बताओ.’’

36 साल की सावित्री पटेल रोती हुई बोली, ‘‘मेरे पति बबलू पटेल, जिन की उम्र 37 साल है, कल रात से घर नहीं पहुंचे हैं. वह रात को गांव में ही एक कार्यक्रम में गए हुए थे, लेकिन वापस नहीं लौटे हैं. मुझे आशंका है कि उन के साथ कोई अनहोनी न हो गई हो.’’

यह सुनने के बाद टीआई शुक्ला उस महिला को वहां से अपने कक्ष में ले गईं और कुरसी पर तसल्ली बैठा कर उन्होंने उस से पूछा, ‘‘आखिर तुम्हें अनहोनी की आशंका क्यों है, उन का किसी से लड़ाईझगड़ा हुआ है क्या?’’

‘‘हां मैडम, कल उन का पड़ोस में रहने वाले एक किसान से झगड़ा हुआ था, मुझे अंदेशा है कि कोई उन की जान ही न ले ले.’’ सावित्री बोली.

‘‘तुम चिंता मत करो, हम तुम्हारे पति को जल्द ही खोज निकालेंगे.’’ टीआई ने सावित्री को दिलासा दी और उस से कुछ जानकारी लेने के बाद बबलू की गुमशुदगी दर्ज कर ली. इस के बाद उन्होंने सावित्री को घर भेज दिया. पुलिस ने अपने स्तर से बबलू के लापता होने की जांच शुरू कर दी.

इस बीच 29 जून, 2022 को दोपहर उस वक्त मिर्जापुर गांव में सनसनी फैल गई, जब गांव के लोगों को पता चला कि बबलू का शव जितेंद्र पटेल के खेत में पड़ा हुआ है.

गांव के कुछ लोगों ने जा कर देखा तो मालूम हुआ कि बबलू पटेल की धारदार हथियार से गला रेत कर के हत्या की गई थी.

पथरिया पुलिस को जैसे ही मिर्जापुर गांव में बबलू की लाश मिलने की सूचना मिली तो टीआई एसआई भूमिका विश्वकर्मा व अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिर्जापुर गांव पहुंच गईं. टीआई की सूचना पा कर घटनास्थल पर फोरैंसिक टीम के साथ दमोह जिले के एसपी डी.आर. तानेवार, एसडीपीओ (पथरिया) आर.पी. रावत भी पहुंच गए.

बबलू की लाश के सिर के नीचे गमछा तकिया की तरह रखा था. शर्ट की कालर पर खून के अलावा संघर्ष के कोई निशान नहीं थे. मौके पर पहुंची फोरैंसिक टीम और पुलिस ने अनुमान लगाया कि सोते समय ही बबलू की हत्या को अंजाम दिया गया है.

मौके पर मौजूद मृतक बबलू के भाई ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि 28 जून की रात बबलू गांव में सचिन पटेल के यहां तिलक समारोह में गया हुआ था. वह देर रात अपने घर लौट भी आया था. लेकिन किसी ने उसे फोन कर के बताया कि कार्यक्रम में उस के रिश्तेदार का किसी से झगड़ा हो गया है. इस के बाद वह फिर सचिन पटेल के घर जाने की बोल कर अपने घर से निकला था, लेकिन सुबह होने तक वापस नहीं लौटा.

सावित्री जिस तरह रोरो कर अपने पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंची थी, उसी समय पुलिस को उस पर संदेह हो गया था. मगर पुलिस सबूत इकट्ठे करने की कोशिश में लगी रही. पुलिस बबलू पटेल की हत्या को ले कर सभी ऐंगल से पड़ताल कर रही थी, मगर पुलिस का शक सावित्री पर आ कर टिक गया था.

जब सावित्री से पुलिस ने बारबार पूछताछ की तो वह बयान बदलने लगी और गुमराह करने की कोशिश की. पुलिस ने जब सावित्री की काल डिटेल्स निकाली तो यह बात सामने आई कि सावित्री की सब से अधिक बातचीत किसी हल्ले रैकवार नाम के आदमी से होती थी. जिस दिन बबलू की हत्या हुई, उस दिन भी दोनों के बीच काफी देर तक बात हुई. पता चला कि हल्ले बबलू पटेल का दोस्त था.

इस के बाद पुलिस को माजरा समझते देर न लगी. पुलिस ने हल्ले को हिरासत में ले कर उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने बबलू की हत्या का सारा राज बता दिया और जुर्म कुबूल कर लिया. पूछताछ में हल्ले ने पुलिस को जो कहानी बताई, वह चौंकाने वाली थी.

मिर्जापुर गांव के बबलू पटेल की शादी करीब 10 साल पहले सावित्री से हुई थी. दोनों के 3 बच्चे हुए, जिन में से 2 बेटेऔर एक बेटी हैं. उस की बेटी की उम्र 9 साल है. बबलू और हल्ले की दोस्ती इतनी पक्की थी कि पूरा गांव उन की मिसाल देता था.

हल्ले का बबलू के घर खूब आनाजाना था. वह बबलू की पत्नी को भाभी कह कर खूब हंसीमजाक करता था. बबलू पटेल शराब पीने का आदी था और नशे की हालत में पत्नी व बच्चों के साथ मारपीट करता था. सावित्री बबलू की इन हरकतों से परेशान रहती थी.

जब भी हल्ले सावित्री के घर आता तो सावित्री दिल खोल कर बबलू की हरकतों को हल्ले को बताती थी. इस वजह से हल्ले  सावित्री के प्रति हमदर्दी रखता था. धीरेधीरे यही हमदर्दी उन के बीच प्रेम संबंध में बदल गई.

करीब 4 साल पहले की बात है. एक दिन हल्ले बबलू के घर किसी काम से गया था. उस समय घर पर अकेली सावित्री घर में झाड़ू लगा रही थी. उस के बच्चे घर के पास ही रह रहे दादादादी के पास गए हुए थे. हल्ले ने बाहर से ही सावित्री को देख कर आवाज लगाई, ‘‘अरे भाभी, बबलू घर पर है क्या?’’

‘‘वो तो खेत पर गए हैं, शाम को ही आएंगे,’’ सावित्री बोली.

यह सुन कर हल्ले की तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गई. वह तेज कदमों से उस के घर के आंगन में दाखिल हो गया और आंगन में बिछे पलंग पर बैठ गया. सावित्री घर की दालान में झाड़ू लगा रही थी. हल्ले की निगाहें सावित्री के गले के नीचे ब्लाउज की दरार से उस के उभारों को ताक रही थीं. जैसे ही सावित्री ने हल्ले की हसरत भरी निगाह को देखा तो आंचल संभालते हुए बोली, ‘‘तुम तो बड़े छिपे रुस्तम हो. निगाहें कहीं पर निशाना कहीं पर.’’

हल्ले मौके की नजाकत को देखते हुए बोला, ‘‘क्या करें भाभी दिल है कि मानता नहीं.’’

‘‘इसलिए तो कहती हूं जल्दी से शादी कर लो तो ये ताकझांक की आदत खत्म हो जाएगी,’’ सावित्री चुहल करते हुए बोली.

‘‘भाभी, बबलू को तो तुम्हारी खूबसूरती दिखती नहीं. मैं तो आप से ही मोहब्बत करता हूं, जी चाहता है तुम से ही शादी रचा लूं.’’ हल्ले धीरे से करीब आ कर बोला.

अपनी तारीफ सुन कर लजाते हुए सावित्री बोली, ‘‘दुनिया वाले क्या कहेंगे कि 3 बच्चों की मां को इश्क का भूत चढ़ा है.’’

हल्ले ने सावित्री का हाथ पकड़ कर उसे कमरे के अंदर खींचते हुए कहा, ‘‘भाभी, दुनिया की ऐसी की तैसी, तुम कहो तो मैं तुम्हें पाने के लिए कुछ भी कर सकता हूं.’’

हल्ले ने सावित्री को कमरे पर बिछी चारपाई पर पटक दिया और उस के होंठों को चूमते हुए बोला, ‘‘भाभी, तुम चिंता मत करो. मैं अब बबलू के अत्याचारों से तुम्हें मुक्ति दिलाऊंगा.’’

हल्ले की बातों और स्पर्श से सावित्री के बदन में भी सरसराहट दौड़ गई थी. इस के बाद उस ने भी हल्ले के सामने खुद को समर्पित कर दिया.

देखते ही देखते ही दोनों के तन के सारे  कपड़े उतर चुके थे. वासना की आग में वे सारी सीमाएं लांघ चुके थे. जब दोनों के तन की आग बुझी तो सावित्री ने हल्ले से कहा, ‘‘जल्द ही कोई उपाय सोचो और बबलू को रास्ते से हटा दो.’’

‘‘तुम चिंता मत करो मैं बबलू का इलाज करता हूं,’’ हल्ले ने अपने कपड़े पहनते हुए कहा.

हल्ले और सावित्री के प्रेम संबंधों की जानकारी किसी को नहीं थी, क्योंकि हल्ले बबलू का लंगोटिया यार था और बचपन से ही उस का बबलू के घर बिना किसी रोक के आनाजाना था.

बबलू अकसर शराब पी कर घर आता और पत्नी से सैक्स की चाहत करता, मगर शराब के नशे में धुत बबलू से सैक्स संबंध बनाने में सावित्री को अच्छा नहीं लगता था. जब सावित्री सैक्स के लिए मना

करती तो बबलू उस के साथ बेरहमी से मारपीट करता.

बबलू के वहशीपन से परेशान सावित्री और हल्ले इसी फिराक में थे कि किसी तरह बबलू को रास्ते से हटा दिया जाए, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.

28 जून, 2022 को जब खेत की मेड़ को ले कर बबलू का गांव के एक किसान से झगड़ा हुआ तो सावित्री ने हल्ले के साथ मिल कर बबलू को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. दोनों ने सोचा कि पुलिस उसी किसान पर शक करेगी, जिस के साथ बबलू का झगड़ा हुआ था, मगर पासा उल्टा पड़ गया.

सावित्री ने अपने प्रेमी हल्ले के साथ मिल कर एक योजना बनाई. उस दिन बबलू रात करीब 9 बजे घर से सचिन पटेल के घर आयोजित तिलक समारोह में जाने के लिए निकला था, इसी दौरान सावित्री ने अपने प्रेमी हल्ले को फोन पर जानकारी दी. हल्ले रैकवार ने बबलू को फोन लगा कर कहा, ‘‘दोस्त, आज खेत पर पार्टी रखी है, जल्दी से आ जाओ.’’

शराब बबलू की बहुत बड़ी कमजोरी थी, जैसे ही शराब पीने का औफर बबलू को मिला वह तिलक का कार्यक्रम छोड़ कर घर आ गया. घर उस ने पत्नी को बताया कि तिलक कार्यक्रम में उस के रिश्तेदार की किसी से कहासुनी हो गई है, इसलिए वह देर से ही घर आएगा.

इतना कहकर वह गांव के ही जितेंद्र पटेल के खेत पर चला गया. जैसे ही बबलू खेत पर पहुंचा तो शराब पीने के लिए उतावला हो गया. उस ने हल्ले से कहा, ‘‘यार, रात बहुत हो गई है जल्दी से पैग बना.’’

योजना के मुताबिक हल्ले रैकवार ने बबलू को इतनी शराब पिला दी कि वह वहीं पर अपने गमछा को सिर के नीचे रख कर सो गया.

बबलू के नशे में बेहोश होने के बाद हल्ले ने धारदार हथियार से बबलू का गला रेत कर उस की हत्या कर दी. बबलू की हत्या के बाद प्रेमी हल्ले ने अपनी प्रेमिका सावित्री को पूरी जानकारी दे दी. सुबह होते ही सावित्री ने ही योजना के अनुसार पथरिया थाने में जा कर पति के गायब होने की सूचना दर्ज कराई थी.

इस पूरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में पथरिया टीआई रजनी शुक्ला, एसआई बलविंदर, हैडकांस्टेबल अरुण, शुभम, कांस्टेबल नरेंद्र एवं रामकुमार पटेल की भूमिका रही.

पुलिस ने आरोपी हल्ले रैकवार और सावित्री को बबलू की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें दमोह जेल भेज दिया गया.

नशे के आदी बबलू की शराबखोरी की वजह से उस की पत्नी सावित्री ने पति के दोस्त से अवैध संबंध कायम कर लिए, जिस का नतीजा यह हुआ कि उन का हंसताखेलता परिवार उजड़ गया और मासूम बच्चे भी अनाथ हो गए.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

तृप्त मन: राजन ने कैसे बचाया बहन का घर

राशी की शादी हंसी खुशी के माहौल में संपन्न हो गई और वह विदा हो कर अपने ससुराल चली गई. राजन छोटी बहन की पीड़ा को खूब समझ रहा था लेकिन इस समय उसे समझाबुझा कर सही रास्ते पर लाने के अलावा और कोई चारा भी तो नहीं था.

त्यौहार 2022: इस रेसिपी से बनाएं पनीर पुलाव

पनीर पुलाव एक लजीज व्यंजन है इसे लगभग हर कोई खाना पसंद करता है. इसमें पनीर और चावल के साथ-साथ सब्जियां भी होती है. यह इतना ज्यादा स्वादिष्ट लगता है कि इसे बच्चे खाना पसंद करते हैं. आप इसे करी या फिर रायता के साथ परोस सकते हैं. आइए जानते हैं पनीर पुलाव बनाने की विधि.

समाग्री

बासमती चावल

पानी

पनीर

प्याज

गाजर

हरी टमाटर

जीरा

तेजपत्ता

इलायची लौंग

रेड चिली पाउडर

गरम मसाला

विधि

चावल को अच्छे से बीनकर धो लें उसके बाद एक कप पानी में भिंगने के लिए छोड़ दें.अब कुछ देर बाज चावल को माइक्रोवेब में या फिर किसी और चीज में उबाल लें ध्यान रखें कि चावल एकदम खिले-खिले होने चाहिए. अब चावल को ठंडा होने दें.

अब प्याज को छील लो और इसे बारीक लंबा काट लो, गाजर को धोकर लंबा काट लें और इसे लंबा- लंबा काट लें. हरे मटर के दाने को अलग लेकर रख सकती हैं या फिर आप फ्रोजन मटर भी रख सकती हैं.  पनीर के टुकड़े को काट लें और फिर उसमें क्यूब के आकार देदें. पनीर को आप चाहे तो तल भी सकते हैं.

अब कड़ा ही में तेल गर्म करके पहले काजू को भूरा करके निकाल लें , इसके बाद इसे पनीर के साथ रख दें. अब आंच डलाकर घी डालें, जब घी गर्म हो जाए तो उसमें जीरा और हींग डालने के बाद उसमें प्याज डालकर भूने, अब इसमें तेजपत्ता, हरी मिर्च लौंग इलायची डालकर अच्छे से भूनें. इसके बाद आप इसमें गर्म मसाला डाल दें.

जब ये अच्छे से पक जाएं तो उसमें प्याज और बाकी कटी हुई सब्जियां डालकर अच्छे से भूनें उसके बाद उसमें चावल को मिला दें और नमक स्वाद अनुसार डालें. सभी चीजों को मिलाने के बाद 2 मिनट तक पकाएं. अब आप चाहे तो इसे पड़ोस सकते हैं.

Anupamaa: किंजल को लेकर अनुपमा और वनराज में फिर छिड़ेगी जंग!

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ टीआरपी लिस्ट में  लगातार  टॉप पर बना हुआ है. शो में आए दिन  ऐसे-ऐसे मोड़ देखने को मिल रहे हैं जिससे दर्शकों का फुल एंटरटेनमेंट हो रहा है. शो के बिते एपिसोड में आपने देखा कि  पारितोष नशे में अनुपमा-अनुज के घर में जाकर तमाशा करता है.  ऐसे में अनुज का खून खौल जाता है और वह वनराज को फोन करके उसे ले जाने के लिए कहता है.शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए एपिसोड के बारे में…

शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुज और अनुपमा में नाराजगी बढ़ जाती है लेकिन बाद में अनुज बताता है कि वह अनुपमा की वजह से नहीं बल्कि इन बेवजह कलेशों से परेशान है.

 

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तो दूसरी ओर वनराज किंजल को लेकर फिक्रमंद है तो वहीं दूसरी ओर बा उसे किंजल को अनुपमा के घर से लाने के लिए कहती हैं. वह वनराज से कहती हैं कि परिवार में डोर कसी जाती है न कि तोड़ी जाती है. कल अगर तोषू ने कुछ कर लिया तो क्या किंजल सही से रह पाएगी. तू जैसे-तैसे किंजल और परी को वापस लेकर आ…

 

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वनराज और बा, अनुपमा के घर जाते हैं. वह किंजल से कहता है कि मैं तोषू को माफ नहीं करूंगा लेकिन तुम अपने घर चलो. तोषु की सजा परी को नहीं दे सकते. परी को  संभालने के लिए केवल अनुपमा है, लेकिन शाह हाउस में उसे सबकी मदद मिलेगी. बा इसी बीच बोलने से नहीं चूकतीं और कहती हैं कि तू तोषू को एक मौका दे और अगर वो न सुधरे तो कोई फैसला लेना.

 

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तो दूसरी तरफ अनुपमा इस मामले में  टूट पड़ती है. वह वनराज और बा से कहती है कि आप लोग किंजल पर दबाव मत डालिए और वह समझाने लगती है. जिसपर वनराज का खून खौल जाता है और वह कहता  है कि जब मैं तुम्हारे बीच नहीं बोलता तो तुम मेरे और किंजल के बीच में क्यों बोल रही हो. हमें तुमसे परमिशन लेने की जरूरत नहीं है.

हिंदी फिल्मों में वीएफएक्स पर बेवजह करोड़ों रूपए खर्च किए जाते हैं: प्रदीप खड़का

नेपाली सिनेमा के सुपर स्टार प्रदीप खड़का बचपन से ही हिंदी फिल्में और हिंदी टीवी सीरियल देखने के शौकीन रहे हैं.पर अभिनेता बनेंगें ,ऐसा नहीं सोचा था.बचपन में वह अक्सर अपनी मां से सवाल किया करते थे कि टीवी के अंदर लोग कैसे जाते हैं. बहरहाल,उन्होने मार्केटिंग में एमबीए की डिग्री हासिल की.इसके बाद उन्हें नेपाल टीवी पर नौकरी मिल गयी.कुछ समय बाद वह नेपाल टीवी पर नौकरी करते हुए रियालिटी शो निर्माण करने लगे.कुछ लोगों ने उनके दिमाग में भर दिया कि उन्हें अभिनेता बनना चाहिए.तब 2015 में महज 21 साल की उम्र में प्रदीप खड़का ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘प्रदीप मीडिया प्रा.लिमिटेड’ का रजिस्ट्रेशन करवाकर नेपाली भाषा की दो कम बजट वाली फिल्में ‘‘ठुल्ले मंझे’’ तथा ‘‘एस्केप’’ फिल्मों का निर्माण किया.इनमें से ‘एस्केप’ में उन्होने अभिनय भी किया.‘एस्केप’ को  सफलता नहीं मिली,लेकिन एक निर्माता ने उन्हें नेपाली फिल्म ‘‘प्रेम गीत’’ में हीरो बना दिया. इस फिल्म ने सफलता के सारे रिकार्ड तोड़ते हुए प्रदीप खड़का को सुपर स्टार बना दिया. इसके बाद वह ‘प्रेम गीत 2’ मे नजर आए. इस फिल्म ने भी सफलता का परचम लहराया. फिर ‘प्रेम गीत 3’ बनी, जिसे हिंदी में भी डब करके 23 सितंबर को नेपाल,भारत व अन्य देशों में प्रदर्शित किया गया.

प्रस्तुत है प्रदीप खड़का से हुई बातचीत के अंश…

आपकी फिल्म ‘‘प्र्रेम गीत 3’’ पहली नेपाली फिल्म है,जिसे हिंदी में भी डब करके भारत के छह सौ सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया गया.यह ख्याल किसके दिमाग में आया था?

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पहली बात तो मैं स्पष्ट कर दॅूं कि मेरा मकसद नेपाली फिल्म इंडस्ट्री को विकास के पथपर ले जाना है.इसलिए मैं एक समय में एक ही फिल्म में अभिनय करता हूं, उस फिल्म के साथ शुरू से हर विभाग में जुड़ा रहता हूं. तो निर्माता के साथ बैठकर हम सभी ने इसे हिंदी में डब करने का निर्णय लिया था. नेपाली फिल्म इंडस्ट्री छोटी है. नेपाली फिल्मों का बाजार भी छोटा है. तो हम सभी बैठकर अक्सर सोचते रहते थे कि नेपाली फिल्मों के बाजार को किस तरह से बढ़ाकर इस इंडस्ट्री को मजबूत किया जाए. जब हमने देखा कि दक्षिण भारतीय भाषाओं की फिल्में हिंदी में डब होकर रिलीज हो रही हैं, तो हमने सोचा कि हम नेपाली फिल्म को भी हिंदी में डब करके भारत में प्रदर्शित कर 140 करोड़ दर्शकों तक पहुॅच सकते हैं.वैसे भी नेपाल व भारत में काफी समानताएं भी हैं. हमने सोचा कि नेपाल में वर्ष में सौ फिल्में बनती हैं.अगर इनमें से दस फिल्में भी हिंदी में डब करके भारतीय दर्शकों तक पहुॅचे,तो काफी उचित होगा. हमारी कुछ फिल्में मास इंटरटेनर भी बनसकती हैं. पहले हम ‘प्रेम गीत 3’ को हिंदी में डब करके ‘ओटीटी प्लेटफार्म’ पर ले जाना चाहते थे. हमने डबिंग का काम मुंबई में आकर शुरू किया, तभी ‘कोविड ’ महामारी फैल गयी,तो कुछ समय के लिए हमारा काम रूक गया.पर डबिंग का काम पूरा होने के बाद बौलीवुड के कुछ लोगों ने फिल्म देखी,तो उन्होने इसे सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की सलाह दी. फिर हमने ट्रेलर लाॅच किया.जिसका इतना अच्छा रिस्पांस मिला कि हमने इसे सिनेमाघरों में ही प्रदर्शित करने की योजना बनायी.उसके बाद हमने दिल्ली, शिलांग,देहरादून,गौहाटी व मुंबई सहित कई शहरों में गए और लोगों से व मीडिया से अपनी फिल्म पर चर्चा की. हर शहर में लोगों ने हमें खुले दिल से स्वीकार किया.इससे हमारा विश्वास बढ़ गया था कि लोग हमारी फिल्म ‘प्रेम गीत 3’ को भी स्वीकार करेंगे.हमारी फिल्म पूरे विश्व में 1200 सिनेमाघरों में 23 सितंबर को प्रदर्शित हुई,उनमें से सिर्फ भारत में छह सौ सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई.पहले दो दिन तो दर्शकों का जबरदस्त उत्साह रहा. हम खुश हैं. हमने ‘प्रेम गीत 3’ के माध्यम से हमारी नेपाली फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को संदेश दे दिया है कि अगर वह अच्छा काम करेंगे, अच्छी फिल्में बनाएंगे,तो यहां तक पहुॅच सकते हैं. तो हमने एक राह बना दी है. अब बाकी के लोग इस राह को कितना चैड़ा कर पाते हैं,यह तो वक्त बताएगा. भारत के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं.किसी को भी भारत से नेपाल या नेपाल से भारत आने जाने के लिए पासपोर्ट या वीजा की जरुरत नही है. हिमालय की चोटी से लेकर समुद्र के किनारे तक हम खुला रिश्ता रखते हैं. बौलीवुड सिनेमा का खूबसूरत बगीचा है. इसमें नेपाली फिल्म का एक दो फूल लगेगें तो और बेहतर ही होगा.

फिल्म ‘‘प्रेम गीत 3’’ को लेकर क्या कहना चाहेंगें?

इसमें इमोशन की भरमार है.वहीं यह एक पीरियड वाली प्रेम कहानी है.यह प्रेम नामक लड़के व गीत नामक लड़की की प्रेम कहानी है.अब तक हमने फिल्मों में प्यार को पाने के लिए प्रयास करते,हर अवरोध को दूर करते हुए ही देखा है.पर यहां प्रेम में त्याग की बात है.प्रेम एक राज्य का प्रिंस यानी कि राज कुमार है.जबकि गीत एक गांव की साधारण लड़की है.

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प्रेम में त्याग की भावना वाली कहानी तो माॅडर्न युग की भी हो सकती थी.ऐसे में इसे 1880 सदी के पीरियड में क्यों रखा गया?

वास्तव में हमने जिस कहानी से प्रेरित होकर ‘प्रेम गीत 3’ की कहानी का ताना बाना बुना है,वह 1800 सदी की ही कहानी है.हमारे देश नेपाल में भी कभी राजा का शासन हुआ करता था,पर अब नही है.हमारे यहां सात राज्य है,जिन्हें मिलाकर पूरा गणराज्य बना है.हमारे नेपाल के जो अंतिम राजा /मोनार्की थे,उनके दो बेटे थे.इसी तरह हमारी फिल्म की कहानी एक हिमालय के राज्य की है. और इस राजा के भी दो बेटे हैं.हमने नेपाल में घटित कई घटनाक्रमों को अपनी इस फिल्म की कहानी का हिस्सा बनाया है.यदि हम इसे माॅडर्न जमाने में ले जाते,तो फिर राजशी लुक नही दिखा सकते थे और कहानी में जो कंफलिक्ट है,वह उस तरह से उभरकर न आ पाता.इसलिए हमने पीरियड फिल्म बनाने की सोची.नेपाल में इस तरह की एक दो फिल्में ही बनी है.पर ‘प्रेम गीत 3’ का स्तर काफी उंचा है.वैसे भी हिमालय किंगडम के नाम से कभी नेपाल जाना जाता था.

नेपाल में भी राजा रहे हैं.तो क्या वहां पर इस तरह का कुछ था?

जी हाॅ!एक वक्त में नेपाल में माओवादी आंदोलन था.जो कि विरोध किया करते थे.तो हमारी फिल्म में भी ऐसे तत्व हैं,जिन्हे विद्रोही नाम दिया गया है.जिन्हें लगता है कि उनकी मांगे पूरी नही हो रही है.ऐसे माओवादी अपनी मांग को लेकर नेपाल में झगड़ रहे थे.इस तरह के तत्व भारत में भी है.तो जो लोग नेपाल के राजनैतिक हालात से थोड़ा बहुत परिचित हैं,वह हमारी फिल्म के साथ रिलेट कर रहे हैं.

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फिल्म के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगें?

-मैंने इसमें प्रेम का किरदार निभाया है,जो हिमालय राज्य का प्रिंस /राज कुमार है और उसे गांव की लड़की गीत से प्यार है.प्रिंस का एक भाई भी है.मगर ज्योतिषियों के अनुसार प्रिंस का ही राजा बनना हर किसी के हित में होगा.अब दो युवाओं के प्रेम के बीच कोई आएगा,तो कंफलिक्ट होना स्वाभाविक है.कहावत है कि प्रेम व युद्ध में सब कुछ जायज है.इसी के चलते प्रेम भी अपने प्यार के लिए सब कुछ करता है.हमारे यहां नेपाल में गीत को मीठा गाना हालेते हैं.उसी तरह से गांव की लड़की गीत एक ऐसी मिठास है,जिसके प्यार को हर वक्त महसूस कर सकते हैं.यह फिल्म प्यार,मोहब्बत और त्याग की कहानी है.

फिल्म को हिमालय पर जाकर फिल्माने की कोई खास वजह रही?

-अमूमन काल्पनिक दृश्यों को सभी फिल्मकार अपनी फिल्मों में तमाम दृश्यों को वीएफएक्स के जरिए दिखाते हैं. लेकिन हमारे यहां इतनी अधिक खूबसूरत लोकेशन है कि हमें कल्पना का सहारा लेकर उसे वीएफएक्स से गढ़ने पर पैसा नही खर्च करना चाहिए.हमारे देश में तो ऐसी खूबसूरत जगहें हैं,जिनके बारे में मैं सपने में भी नहीं सोच पाता.मैं तो चाहता हॅूं कि हर फिल्मकार वीएफएक्स का सहारा लेने से पहले इन लोकेशनों पर जाकर देखें.तो वह यूरोप या स्विटजरलैंड सब कुछ भूल जाएंगे.हमाने अपनी फिल्म ‘प्रेम गीत 3 ’को ऐसी ही लोकेशन यानी कि हिमालय पर फिल्माया है,इस तरह की लोकेशन की तो लोग कल्पना भी नही कर सकते.जबकि इस तरह की लोकेशन पर दिल्ली से फ्लाइट पकड़कर दो तीन घ्ंाटे व काठमांडू से एक घंटे में पहुंच सकते हैं.हमने हमारी फिल्म को हिमालय की पहाड़ियों पर मनंग क्षेत्र में फिल्माया है.

हिमालय के मनंग इलाके में शूटिंग के अनुभव क्या रहे?

-हमने माइनस 29 डिग्री के तापमान में शूटिंग की है. ठंड के चलते हमें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा.वहां पर अधिक से अधिक तापमान माइनस दस सिर्फ एक सप्ताह तक रहा.इतनी ठंड में रोजमर्रा की जिंदगी की हर गतिविधि पर भी असर पड़ता है. मसलन-मुंह धोना या हाथ पैर धोना हो या बिस्तर से नीचे उतरना भी संघर्ष में बदल जाता है.इतनी ठंड के चलते हमारी युनिट के किसी सदस्य का ‘ब्लड क्लाॅटिंग’ यानी कि ‘खून जम’ रहा था.मेरे पैर का एक्सीडेंट हो गया था,जिससे काफी सूजन आ गयी थी.तो हमने काफी दिक्कतों का सामना किया.हमारी पूरी युनिट बहादुरी के साथ डटी रही और हम सभी ने अपने काम को खूबसूरती से अंजाम दिया. लेकिन जब हम सभी ने शूटिंग के बाद जो फिल्म में देखा,वह देख सारे दर्द खुशी में बदल गए.

आपकी राय में हर फिल्म निर्माता को वीएफएक्स पर पैसा खर्च करने की बजाय वास्तविक लोकेशनों पर जाकर अपनी फिल्म को फिल्माना चाहिए?

-वीएफएक्स का उपयोग सिर्फ एक्सटेंशन या रिमूवल वाले हिस्से के लिए ही करना ठीक रहता है.कम बजट वाली फिल्म के लिए तो वीएफएक्स बिलकुल नहीं करना चाहिए.नेपाली फिल्म इंडस्ट्री के लिए तो वीएफएक्स गैर वाजिब है.वीएफएक्स मे काफी मैन पाॅवर और पैसा लगता है,जो कि मेरी नजर में गलत है.बौलीवुड के फिल्मकार इतना अधिक पैसा खर्च करने में सक्षम है. लेकिन इमानदारी से कहॅूं तो मुझे बड़े बजट की वीएफएक्स वाली हिंदी फिल्मों में ढेर सारी कमियां नजर आती हैं. देखिए,वीएफएक्स से आप सब कुछ उत्तम दर्जे का नहीं पेष कर सकते. मेरी फिल्म में जो हिमालय की वास्तविक संुदरता है,उसे आप करोड़ों रूपए वीएफएक्स पर खर्च करके भी नहीं ला सकते? मैं तो यही कहॅूंगा कि इस तरह के वीएफएक्स पर पैसा बर्बाद करने की बजाय हम फिल्म के वास्तविक लोकेषन पर फिल्माकर बेहतरीन फिल्म बना सकते हैं. दर्शक को भी फिल्म देखते समय नकलीपन नजर नहीं आएगा. और हम इमोशन को डिस्टै्क्ट करने से बचा सकते हैं.

क्या आपको लगता है कि भारत व नेपाल के कल्चर में समानताएं हैं.इमोशनंस एक जैसे हैं,इसका फायदा अपकी फिल्म को मिल रहा है?

-जी हाॅ!यह कटु सत्य है.आप कल्चर व इमोशंस की बात कर रहे हैं.आप गौर करेंगे,तो पाएंगे कि भारत व नेपाल के त्यौहार और लोगों के ‘सरनेम’ वगैरह भी एक जैसे ही हैं.सिंह,सेन,थापा,शर्मा दोनो जगह हैं.हमारे यहां दसई होता है और भारत में दशहरा होता है.इसी तरह से कई त्यौहार दोनो देशों में होते है, सिर्फ नाम में थोड़ा सा अंतर है.देवनागरी लिपि एक जैसी है.

नेपाल फिल्म इंडस्ट्री में किस तरह के बदलाव आप देख रहे हैं?

सबसे बड़़ा बदलाव तकनीक का है.पहले हम रील्स पर काम करते थे. अब हम डिजिटल पर काम कर रहे हैं.हम द्रोण से शूटिंग करते हैं. अभी हमने पोस्ट प्रोडक्शन पर ज्यादा इंवेस्टमेंट नही किया है.

बौलीवुड के किस कलाकार से प्रभावित हैं?

मैं तो अमिताभ बच्चन, गोविंदा, शाहरुख खान, सलमान खान, इरफान खान, नवाजुद्दीन सिद्दिकी व मनोज बाजपेयी आदि से प्रभावित होकर आया हॅूं. जैसे समुद्र से पानी की भाप बनकर हिमालय पर जाकर ठंडी होकर बर्फ बनता है और वहां से पिघलकर पुनः समुद्र में मिल जाता है.मैं भी इसी तरह हिंदी फिल्में देखकर प्रभावित होता था, अब वहां से पिघलकर पुनः वापस भारत में आ गया हॅूं.तो मैं बौलीवुड जैसे समुद्र में एक बूंद बनकर आया हॅूं.

भारत भूमि युगे युगे: इंसाफ का नया तराजू

ऊपर वाले और नीचे वालों की बेरहमी का कहर   झेल रहे भगवा गैंग के मुसलिम नेता सैयद शाहनवाज हुसैन के खूबसूरत चेहरे की रंगत उड़ी हुई है. पहले तो बिहार में नीतीश की पलटी से उन का मंत्री पद गया, फिर मोदी-शाह ने पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति से भी चलता कर उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया. तीसरा बखेड़ा दिल्ली की एक महिला ने उन पर बलात्कार का आरोप मढ़ खड़ा कर दिया. अब शाहनवाज गुनगुना सकते हैं कि गम उठाने के लिए मैं तो जिए जाऊंगा.

यह कथित बलात्कार अप्रैल 2018 में दिल्ली के छतरपुर स्थित एक फार्महाउस में नशीले पदार्थ के सेवन के पश्चात संपन्न हुआ था. पुलिस ने पूरी कोशिश की कि वे बच जाएं लेकिन हाईकोर्ट को दाल में कुछ काला लगा तो मामला आगे बढ़ रहा है.

बलात्कारी और डिस्काउंट

बलात्कार की विशेषताओं पर अगर कुछ पौइंट्स लिखे जाएं तो एक ही काफी होगा कि 80 फीसदी मामलों में बलात्कारी ऊंची जाति वाला और पीडि़ता नीची जाति की होती है. पौराणिक काल से यह रिवाज लोकतंत्र तक कायम है जिस का पाक मकसद पतिता के उद्धार का होता है. मामला गुजरात के चर्चित बिलकीस बेगम के साथ 21 जनवरी, 2008 को हुए बलात्कार का है जिस में 11 ब्राह्मण आरोपियों को सजा हुई थी.

अच्छे चालचलन के चलते ये बलात्कारी 15 अगस्त को छोड़ दिए गए तो गोधरा विधायक सी के राउल के भीतर बैठा मनु फनफना कर बोला, ‘बलात्कारी अगर ब्राह्मण समाज से हैं तो संस्कारी होंगे.’ वैसे भी हिंदुओं के संविधान मनु स्मृति में बहुत साफ निर्देश है कि-

अगुप्ते क्षत्रियावैशये शूद्रा वा

ब्राह्मणों व्रजन

शतानि पच्च दण्डय

स्यास्तहस्त्रम त्वन्जयस्त्रियम

(मनु स्मृति, अध्याय 8, श्लोक 385)

अर्थात, यदि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य किसी शूद्र वर्ण की किसी स्त्री के

साथ बलात्कार करता है तो उसे केवल 500 पर्ण का आर्थिक दंड देना होगा.

फटकार योग

आम और खास लोगों को अपनी दुकानदारी के लिए भड़का कर नीमहकीमी से अरबों बनाने वाले बाबा रामदेव से दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस जयराम भम्भानी नाराज हो कर जो बोले उस का सार यह है कि आप खूब चेले और भक्त बना लें, लेकिन   झूठ बोल कर लोगों को गुमराह न करें. इस फटकार से बाबा की मोटी चमड़ी पर सिलवट भी पड़ी होगी, ऐसा लगता नहीं जिस ने कोरोनाकाल में एलोपैथी के खिलाफ जम कर जहर उगला था और अपनी फर्जी दवा कोरोनिल बेच कर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ भी किया था. इस बाबा ने वैक्सीन को भी खूब कोसा था.

लगता है बाबा के योग और आयुर्वेद सहित पतंजलि के विभिन्न प्रोडक्ट्स की भी पोल खुलने लगी है. उस का गाय का घी और शहद भी उत्तराखंड में मिलावटी पाया गया है. इस के बाद भी लोग हिंदुत्व, योग और धर्म के नाम पर वेबकूफ बन रहे हैं.

क्रिकेट के सुदामा

लोग अमीर होने के लिए मेहनत के अलावा क्या नहीं करते. यूट्यूब पर वीडियो देखते हैं, व्रत व पूजापाठ करते हैं. वे तांत्रिकोंमांत्रिकों और ज्योतिषियों के   झांसे में आ कर मेहनत से कमाया पैसा चढ़ा कर उन्हें अमीर बनाते रहते हैं और खुद और गरीब होते चले जाते हैं. लेकिन क्रिकेटर विनोद कांबली ने गरीब होने के लिए इतने जतन किए कि अब उन के फाके करने की नौबत आ गई है. आचरेकर के अखाड़े में सचिन तेंदुलकर के सखा रहे विनोद इन दिनों मुंबई में बीसीसीआई से मिलने वाली 30 हजार रुपए महीने की पैंशन से गुजारा कर रहे हैं.

जिन लोगों को गरीब नहीं होना है उन्हें इस महत्त्वाकांक्षी और प्रतिभाशाली बल्लेबाज से सबक लेना चाहिए कि आमदनी से ज्यादा खर्च, फुजूलखर्ची, दिखावे की जिंदगी और नशेपत्ते की लत कुबेर को भी फुटपाथ पर ले आती है.

त्यौहार 2022: ऐसे बनाएं आलू पोहे

सामग्री

– पोहा (250 ग्राम)

– प्याज (4)

– आलू (4)

– तेल ( 100 ग्राम)

– जीरा (1/4 बड़े चम्मच)

– राई (1/4 बड़े चम्मच)

–  बारीक कटा हरा धनिया

– हरी मिर्च (2)

– आलू को उबालकर और छोटे टुकड़े कर लें, प्याज बारीक काट लें.

– हरी मिर्च के भी बारीक टुकड़े कर लें.

– पोहा थोड़े से पानी में 2से 3 मिनट तक भिगो दें और निकाल कर चलनी में रखें ताकि अतिरिक्त पानी   सूख जाए.

– कढ़ाई में तेल डालें  और गरम होने पर राई, जीरा और हरी मिर्च डालें, बारीक कटे प्याज डालकर सुनहरी    रंग तक भून लें.

– इसमें कटे हुए आलू डाल कर थोड़ी देर चलाते रहें, पोहे कढ़ाई में डाल कर अच्छी तरह सब मिला लें.

Anupamaa: छोटी अनु को किडनैप करेगा तोषु, आएगा ये ट्विस्ट

टीवी सीरियल अनुपमा में लगातार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो की कहानी के ट्रैक को दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं. शो के बिते एपिसोड में आपने देखा कि तोषु अनुज के घर जाकर खूब तमाशा करता है.  और किंजल से अपनी बेटी को छिनने की कोशिश करता है लेकिन नाकामयाब हो जाता है.  ऐसे में वह अनुपमा की बेटी छोटी अनु को मोहरा बनाएगा. शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए एपिसोड के बारे में…

शो  में दिखाया जा रहा है  कि कपाड़िया और शाह परिवार के बीच अनुपमा जिम्मेदारियों में उलझती सी नजर आ रही है. पहले जहां एक्स हसबैंड वनराज शाह ने अनुपमा की जिंदगी मुश्किल कर रखी थी वहीं अब उसका सगा बेटा पारितोष भी उसकी जान का दुश्मन बन बैठा है.

 

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अनुपमा का एक लेटेस्ट प्रोमो सामने आया है. जिसमें दिखाया गया था कि अनुपमा-अनुज और छोटी की फोटो दीपक पर गिर जाती है और उसमें छोटी  की फोटो जल जाती है. अनुपमा इसे अपशगुन मानती है और यह सब देखकर बहुत परेशान हो जाती है. तभी वहां तोषू की एंट्री होती है.

 

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तोषू अनुपमा को धमकी देता है और कहता है, दर्द हुआ ना ? ऐसा ही दर्द मुझे हो रहा है मिसेज अनुपमा कपाड़िया. आपने मुझे मेरी बेटी से दूर करके मेरा घर जला दिया. अब उसी आग में जलने की बारी आपकी है. माना जा रहा है कि अनुपमा से बदला लेने के लिए तोषू छोटी को किडनैप करने वाला है.

 

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माना जा रहा है कि  तोषू अनुपमा से बदला लेने के लिए उसकी बेटी को किडनैप करेगा. वह समझ सके कि बेटी से दूर होने का दुख क्या होता है. शो में ये देखना दिलचस्प होगा कि अनुपमा कैसे तोषु का अक्ल ठिकाने लगाती है?

न्याय पर मीडिया दबाव

मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि उन्हें ठीक से न्यायसंगत निर्णय लेने में मीडिया ट्रायलों से तकलीफ होने लगी है क्योंकि मीडिया पहले से ही फैसले सुना देती है कि कौन कितना अपराधी है. सनसनी फैलाने में इलैक्ट्रौनिक टीवी चैनल और सोशल मीडिया आगे हैं जबकि प्रिंट मीडिया व समाचारपत्र काफी संयत हैं. आमतौर पर जज चाहते हैं कि जब फैसला उन के हाथों में हो, तो उन को समाचारपत्रों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर प्रचारित की जा रही बातों को सुनना न पड़े ताकि वे उस तरह के तर्कों से प्रभावित न हों.

मीडिया से ज्यादा न्यायपूर्ण निर्णय देने में जो बात आज आड़े रही है और जिस का जिक्र मुख्य न्यायाशीश ने नहीं किया वह है सरकार व सत्ताधारी पार्टी के बयान जो पहले तो मतलब के मामले उछालते हैं और फिर उन्हें बुरी तरह ले उड़ते हैं. 2012-13 के दौरान भाजपाई सोच वाले कंपट्रोलर जनरल औफ इंडिया (लेखा विभाग के महानिरीक्षक) विनोद राय ने मीडिया की बात व निराधार तथ्यों के आधार पर कोयला खानों के ठेकों और टैलीकौम स्कैमों पर लाखोंकरोड़ों के घपलों की रिपोर्टें जारी कर दी थीं.

उन के तर्क लचर थे. कांग्रेस सरकार को दबाव में झुकना पड़ा. जजों ने सरकारी मोहर लगे झूठ के कारण कितनों को जेलों में भेज दिया. आज 15 साल बाद विनोद राय अपनी गलती मान रहे हैं क्योंकि उन आरोपों में किसी को सजा नहीं पर उन आरोपों के लिए कितने ही जेलों में महीनों, सालों बंद रहे और कांग्रेस सरकार ने राज खो डाला.

आज कोई विनोद राय पनपता है तो उस पर विनोद राय जैसे ही आरोप लगा कर उसे बंद कर दिया जाता है. सो, डर के मारे सब ने मुंह सी लिया है.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने टीवी चैनलों और सोशल मीडिया को फटकारा, यह बहुत अच्छा है पर फटकार से काम नहीं चलता. सुप्रीम कोर्ट चाहे तो ट्रायल कोर्टों को आदेश दे सकती है कि निराधार आरोप लगाने वालों के खिलाफ दायर किए गए मुकदमों में महीनों में नहीं बल्कि सप्ताहों में सजा दे दी जाए मुजरिम चैनलों व सोशल मीडिया पर भारी जुर्माना लगाया जाए. ऐसा हो जाए तो काफी हद तक सुधार हो सकता है. सोशल मीडिया चैनल को बंद करने या चलाने वाले को गिरफ्तार करने का आदेश फिर भी गलत होगा. लेकिन कोरा कथन काफी नहीं है.

समाज को आलोचना करने का हक यथावत रहना चाहिए. आलोचना करने वाले को ही पकड़ कर बंद कर देने की जो पौराणिक परंपरा आज फिर से पिछले दरवाजे से लाई जा रही है, बंद होनी चाहिए. टीवी चैनल और सोशल मीडिया असल में पौराणिक सोच को थोपने के षड्यंत्र के हिस्से हैं. इन के निशाने पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, स्टालिन या निर्भीक पत्रकार नहीं हैं, इन के निशाने पर सवर्णों की औरतें, पिछड़ों के नेता, दलितों के मुखर होते विचारक, मुसलमानों के हक मांगने वाले लोग हैं. इन का उद्देश्य यह है कि धर्म का व्यापार न केवल चले, पौराणिक गाथाओं की तरह फलेफूले और राजा को सुरक्षा भी मिले. ये चाहते हैं कि देश उन के कहने पर चले जैसे विश्वामित्र के कहने पर राजा दशरथ ने रामायण की कथा में राम और लक्ष्मण को बालावस्था में ही आश्रम की सुरक्षा के लिए भेज दिया था.

आज न्यायपालिका में पौराणिक सोच वाले कम नहीं हैं. अमेरिका जैसे उन्नत व स्वतंत्र देश में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के मनोनीत वकील घोषित रूप में चर्च की सोच के गुलाम नजर आते हैं.

भारत का लोकतंत्र आज फिर जंगखाई पुरानी पटरियों पर उतर चुका है. परिणाम चाहे घातक व भयंकर बढ़ती बेरोजगारी, मंहगाई, अभावों, अराजकता, सर्विलैंस स्टेट के रूप में सामने आ रहा हो लेकिन मंदिर व्यवसाय तो चमक रहा है न. और जब बढ़ते मंदिर, बढ़ती वर्णव्यवस्था व महिलाओं की अपमानजनक स्थिति का लक्ष्य पूरा हो रहा हो तो किसे न्यायसंगत निर्णयों की आवश्यकता है. भगवा सरकार तो यही चाहती है न.

52 वर्ष की उम्र में मुझे Pimples निकल रहा है, क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 52 वर्ष है. अमूमन किशोरावस्था में लड़कियों को पिंपल्स की शिकायत होती है लेकिन तब मेरे चेहरे पर कोई पिंपल नहीं निकला. चेहरा एकदम साफसुधरा और ग्लो करता था. कभी निकलता भी था तो एकाध, वह भी अपनेआप ठीक हो जाता था. कोई निशान भी नहीं पड़ता था चेहरे पर. 50 की उम्र तक ऐसा ही चलता रहा लेकिन अब मेरे चेहरे पर पिंपल्स की भरमार है. एक्ने के निशान जाने का नाम नहीं लेते. चेहरा देखने में भद्दा लगता है. मुझे बहुत बुरा लगता है, अपनेआप को इस तरह देखने की आदत जो नहीं रही कभी. कई क्रीमें लगा चुकी हूं लेकिन एक के बाद एक पिंपल्स निकलते आ रहे हैं. मेकअप करना भी अच्छा नहीं लगता है. आप ही कोई राय दें.

जवाब

आप की परेशानी हम सम  झ रहे हैं. चेहरे पर दागधब्बे हो जाएं तो खूबसूरती कम हो जाती है. टीनएज में तो ऐसा होता है लेकिन आप की उम्र में पिंपल्स का होना दर्शा रहा है कि आप डाइट अच्छी नहीं ले रही हैं. आप के शरीर में जरूरी विटामिंस की कमी हो गई है.

विटामिन ए एक एंटी औक्सीडैंट है जो मुफ्त कणों (फ्री रैडिकल्स) से लड़ता है. यह शरीर में होने वाली सूजन को कम करता है. इस की कमी को पूरा करने के लिए टमाटर, हरीमिर्च और गाजर खानी चाहिए.

विटामिन बी 3 की कमी से भी त्वचा पर दागधब्बे और दाने होते हैं. इस के एंटीइंफ्लेमेटरी गुण एक्ने का इलाज करने में मदद करते हैं. यह त्वचा की चमक भी बढ़ाने का काम करता है. साथ ही, कीलमुंहासों को रोकने का काम भी करता है. यह चेहरे पर जमा होने वाले औयल को कम भी करता है.

विटामिन डी इम्यूनिटी बढ़ाने में भरपूर सहयोग करता है. यह भी चेहरे पर होने वाली सूजन को कम करता है. यह एक्ने को कंट्रोल करने में मदद करता है. साथ ही, यह विटामिन हड्डियों को मजबूत करने का भी काम करता है.

विटामिन ई इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है जो एंटी औक्सीडैंट का काम करता है. यह विटामिन त्वचा की नमी को कम करता है और कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देता है, जिस से चेहरे पर चमक आती है.

आप अपनी बौडी टैस्ट करवाइए जिस से पता चले कि आप की बौड़ी में किन विटामिंस की कमी है. डाक्टरी परामर्श लीजिए, जल्दी ही इस समस्या से नजात मिल जाएगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

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