Download App

आर्टिफिशियल इंटेलिजैंस (AI) आने वाले समय में चिंताएं बढ़ा सकता है

कभी विज्ञान की कहानियों में भारतीय और दुनिया के साहित्य में ऐसी कहानी किताबों के पन्ने में तक ही सीमित थी याद करिए चंद्रकांता संतति, भूतनाथ और जाने कितनी चर्चित कहानियां जिस में क्षण भर में अपना रूप बदल कर के अपराध घटनाक्रम पारित कर के पात्र निकल जाता है और जब यह पता चलता है, कि सच्चाई क्या थी, देर हो चुकी होती है.

ऐसा ही कुछ आजकल सोशल मीडिया में देखने को मिल रहा है. विज्ञान के इस करतब से दुनियाभर के लोग हैरान परेशान हैं इसलिए कहा भी गया है कि विज्ञान मानव समाज के लिए हितकारी है तो कभीकभी विनाशकारी भी हो सकता है.यही कारण है कि हौलीवुड के इतिहास में सब से लंबी हड़ताल आर्टिफिशियल इंटेलिजैंस से उत्पन्न हालात के कारण हुई.

दरअसल, एआई के पूरी तरह से, जीवन के हर पहलू पर छा जाने के बाद मनुष्य के जीवन में भारी दुश्वार हो सकता है दुनिया के फिल्म उद्योग के लेखक और अभिनेताओं को महीनों एआई तकनीक के उपयोग विरोध में हड़ताल करनी पड़ी.

आखिरकार 8 नवंबर, 2023 को घोषणा हुई कि निर्माता कंपनियों ने यह वादा लिखित रूप में किया है कि वे फिल्म निर्माण के लिए एआई का उपयोग नहीं किया जाएगा. अब सवाल है कि क्या बौलीवुड और भारत के अन्य फिल्म निर्माण के केंद्र के केंद्र भी क्या इसे स्वीकार कर के एआई को प्रतिबंधित करेंगे.

यह तो बात हुई कानून और नैतिकता की बंधन की, मगर यह तकनीक अगर अपराधिक किस्म के लोग उपयोग करेंगे तो उन्हें कौन रोक सकता है और उस का खामियाजा क्या दुनिया को आने वाले समय में नहीं उठाना पड़ेगा?

दुनिया के लिए चिंता का सबब एआई

आज दुनिया एक छोटा सा गांव जैसा बन चुका हिया. ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजैंस अर्थात एआई से सारी दुनिया हैरान और चिंतित है जिस का सब से बड़ा उदाहरण मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई और ‘डीपफेक’ प्रौद्योगिकी से उत्पन्न चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘आवश्यकता है इन तकनीकों के कारण पैदा हुई चुनौतियों के बारे में लोगों को जागरूक और शिक्षित करने की.’

भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में ‘दीपावली मिलन’ कार्यक्रम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “पिछले दिनों गरबा महोत्सव में भाग लेते हुए अपना एक वीडियो देखा, जबकि उन्होंने स्कूल के दिनों से ऐसा नहीं किया है.” उन्होंने हंसते हुए कहा, “यहां तक कि जो लोग उन्हें प्यार करते हैं, वे भी वीडियो को एकदूसरे से साझा कर रहे हैं.”

विविधतापूर्ण समाज में ‘डीपफेक’ एक बड़ा संकट पैदा कर सकते हैं और यहां तक कि समाज में असंतोष की आग भी भड़का सकते हैं क्योंकि लोग मीडिया से जुड़ी किसी भी चीज पर उसी तरह भरोसा करते हैं जैसे आम तौर पर गेरुआ वस्त्र पहने व्यक्ति को सम्मान देते हैं.

एआई के माध्यम से उत्पादित ‘डीपफेक’ के कारण कृत्रिम मेधा का इस्तेमाल ‘डीपफेक’ के लिए होना चिंताजनक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजैंस के इस प्रयोग पर अपनी बात विस्तार से कही मगर सोचने वाली बात यह है कि अगर इस का विध्वंस या आपराधिक गतिविधियों में उपयोग किया जाने लगेगा तब क्या होगा?

कानून का पालन जरुरी

नरेंद्र मोदी ने इसे रेखांकित करते हुए कहा, “यह एक नया संकट उभर रहा है. समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग है जिस के पास समानांतर सत्यापन प्रणाली नहीं है. इस बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया का सहयोग चाहिए.”

पाठकों को बताते चलें कि दरअसल यह तकनीक शक्तिशाली कंप्यूटर और शिक्षा का उपयोग कर के वीडियो, छवियों, आडियो में हेरफेर करने की एक विधि है.

यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “ऐसी फिल्मों का प्रदर्शन भी इस आधार पर मुश्किल हो जाता है कि उन्होंने समाज के कुछ तबकों का अपमान किया है, भले ही उन्हें बनाने में भारी राशि खर्च की गई. जिस तरह सिगरेट जैसे उत्पाद स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियों के साथ आते हैं, उसी तरह ‘डीपफेक’ के मामलों में भी होना चाहिए.”

मगर यह सब तो अगर कानून का पालन किया जाता है तब संभव है कुल मिला कर आर्टिफिशियल इंटेलिजैंस एक ऐसा माइग्रेन जैसा सिरदर्द है जिस का इलाज मानवता के लिए आवश्यक है.

मैं अपने बेटे का स्तनपान छुड़ाना चाहती हूं, बताएं मैं क्या करूं ?

सवाल

मेरा बेटा 6 महीने का होने वाला है. मैं वर्किंग वूमन हूं. 4 महीने की तो मेरी छुट्टियां थीं, 2 महीने से मैं विदआउट सैलरी पर घर पर हूं सिर्फ इसलिए कि मैं बेटे को पूरे 6 महीने तक अपना फीड देना चाहती थी. अब मैं बेटे का स्तनपान छुड़ाना चाहती हूं.

जवाब

स्तनपान छुड़ाने से पहले उसे बोतल से दूध पिलाने की आदत डालें, फिर धीरेधीरे स्तनपान कराना कम करें. बेशक बच्चे के लिए मां का दूध संपूर्ण पोषण होता है, इसलिए स्तनपान छुड़ाने से पहले उसे अन्य आहार देने की आदत डालें.जब बच्चा मां का दूध पीता है तो निप्पल काफी संवेदनशील हो जाते हैं. ऐसे में आप केवल पीठ के बल ही सोएं और ध्यान दें कि ब्रैस्ट पर ज्यादा दबाव न पड़े. ऐसा करने से स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया कम होने लगती है, जिस से बच्चा आसानी से दूध छोड़ पाता है.बच्चे का ध्यान भटकाएं. जब आप को लगे कि वह स्तनपान करना चाहता है.

आप उस के साथ खेल सकती हैं, बाहर घुमाने ले जा सकती हैं.अगर बच्चा ठोस आहार लेता है तो शाम को उसे अच्छी तरह ठोस आहार खिलाएं. इस के अलावा रात के समय सोने से कुछ देर पहले भी उसे बोतल से दूध पिलाएं.स्तनपान छुड़ाने के लिए आप बच्चे से थोड़ी दूरी बना कर सो सकती हैं. जब आप बच्चे के पास सोती हैं तो वह स्तनपान के लिए जिद करता है. आप रात के समय कुछ देर के लिए बच्चे को पैसिफायर (कृत्रिम निप्पल) चूसने के लिए दे सकती हैं. इस से स्तनपान की आदत धीरेधीरे कम होने लगती है. ध्यान रहे कि पैसिफायर का इस्तेमाल लगातार नहीं करना चाहिए.

फेफड़ों के लिए ब्रोकली व बादाम सूप, अनेक गुणों से भरपूर

जब तक सांस है तब तक जीवन है. एक स्वस्थ जीवन के लिए हमारी रैस्पिरेटरी सिस्टम का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है. श्वसन तंत्र में नाक, मुंह, गला, वौयस बौक्स, श्वसन नली और फेफड़े शामिल हैं.

फेफड़े (लंग्स) और श्वसन तंत्र (रैस्पिरेटरी सिस्टम) ऐसे काम करते हैं :

  • शरीर की कोशिकाओं को जीवित रहने के लिए औक्सीजन की आवश्यकता होती है. कार्बन डाइऔक्साइड शरीर में बनती है क्योंकि कोशिकाएं अपना काम करती हैं.
  • फेफड़े और श्वसन तंत्र हवा में मौजूद औक्सीजन को शरीर के अंदर ले जाने की अनुमति देते हैं, साथ ही, शरीर को सांस के साथ छोड़ी गई हवा में मौजूद कार्बन डाइऔक्साइड से छुटकारा पाने की अनुमति भी देते हैं.

इस तरह लंग्स हमारे शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग हैं. इन्हें स्वस्थ रखने के लिए विटामिंस का सेवन जरूरी है, जो स्वस्थ आहार जैसे कि फल, सब्जियां, दालें, अनाज और प्रोटीनयुक्त खाद्य सामग्री से मिलते हैं. ब्रोकली और बादाम सूप फेफड़ों के लिए बहुत हैल्दी हैं क्योंकि इन में भरपूर पोषक तत्त्व होते है. जैसे कि :

विटामिन सी : ब्रोकली और बादाम में विटामिन सी होता है, जो एक शक्तिशाली एंटीऔक्सीडैंट है. यह फेफड़ों को क्लीन्ज करने में मदद करता है और प्रदूषित हवा से होने वाले नुकसान से फेफड़ों को बचाता है.

विटामिन ई : बादाम में विटामिन ई होता है जो फेफड़ों को सुरक्षा प्रदान करता है और खराब हवा के कारण होने वाली हानियों को कम करता है.

फाइबर : ब्रोकली में फाइबर होता है जो जिस्म को प्यूरीफाई करने में मदद करता है और फेफड़ों के स्वास्थ्य को सुधार सकता है.

प्रोटीन : बादाम में मौजूद प्रोटीन फेफड़ों के लिए जरूरी है. यह फेफड़ों के टिशूज को मेंटेन और रिपेयर करने में सहायक होता है.

एंटीऔक्सीडैंट्स : ब्रोकली में अनेक प्रकार के एंटीऔक्सीडैंट्स होते हैं, जैसे सुल्फोरेफेन, जो विषाणुओं के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं और फेफड़ों के स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं.

एंटी इंफ्लेमेटरी गुण : ब्रोकली और बादाम के खाद्य पूरकों में पाए जाने वाले एंटी इंफ्लेमेटरी गुण फेफड़ों की सूजन को कम करने में मदद करते हैं.

आप भी तो नहीं आए थे : एक बिखरे हुए परिवार की कहानी

story in hindi

पाकिस्तान पर इतनी संकीर्णता ठीक नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा ?

डेढ़दो दशक पहले तक भारत में पाकिस्तानी कलाकारों का स्वागत दिल खोल कर होता था. लखनऊ महोत्सव और दिल्ली में आयोजित अनेक सांस्कृति कार्यक्रमों में प्रसिद्ध पाकिस्तानी ग़ज़ल गायक गुलाम अली, नुसरत फतेह अली खान को सुनने के लिए भीड़ उमड़ती थी. रातरात भर चलने वाले उन की गायकी को मंत्रमुग्ध होकर सुनती थी. भारत पाकिस्तान का मैच रोमांच पैदा करता था. पाकिस्तानी क्रिकेटर्स भारत आ कर खुश होते थे, भारतीय खिलाड़ियों के सतह हंसीमजाक करते, साथ घूमते और साथ खातेपीते थे. मगर बीते डेढ़ दशक में बहुसंख्यक धर्म के प्रचार-प्रसार का ऐसा नकारात्मक असर जनता पर पड़ा कि कला और खेल जो सरहदों के नियमों से बहुत ऊपर हैं, उन के प्रति भारतीयों के दिल छोटे और दिमाग कुंद हो गए.

आज भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी कोई मैच होता है, हम गुस्से और तनाव से भर जाते हैं. मैच को खेल की भावना से नहीं बल्कि नफरत और गुस्से की भावना से देखते हैं. मैदान में खेल रहे पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर हूटिंग करते हैं, उन्हें कोसते हैं, गालियां देते हैं. कहीं हम पाकिस्तानी फोबिया से ग्रस्त तो नहीं? अब कोई बड़ा पाकिस्तानी कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए भारत आने को तैयार नहीं है. पाकिस्तान को ले कर जो संकीर्णता आज देखी जा रही है, सुप्रीम कोर्ट में आने वाला एक मामला इस का ताज़ा उदाहरण है, जिस की शीर्ष अदालत ने काफी भर्त्सना की है.

उच्चतम न्यायालय ने भारत में प्रस्तुति देने या काम करने के लिए आने वाले पाकिस्तानी कलाकारों पर पूर्ण प्रतिबन्ध के अनुरोध वाली एक याचिका को 28 नवंबर को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता फैज अनवर कुरैशी से कहा कि पाकिस्तान को ले कर इतनी संकीर्ण मानसिकता ठीक नहीं है.

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एस.वी. एन.भट्टी की पीठ ने कहा कि वह बम्बई उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का इच्छुक नहीं है, जिस ने फैज अहमद कुरैशी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था. इस के साथ ही शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ उच्च न्यायालय द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को रिकौर्ड से बाहर करने की याचिका भी ख़ारिज कर दी.

याचिका में अदालत से केंद्र सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि अदालत भारतीय नागरिकों, कंपनियों, फर्म और एसोसिएशन पर पाकिस्तान के सिने कर्मियों, गायकों, गीतकारों और तकनीशियनों सहित किसी भी पाकिस्तानी कलाकार को रोजगार देने या किसी भी काम अथवा प्रस्तुति के लिए बुलाने, कोई सेवा लेने, या किसी भी संगठन में प्रवेश करने आदि पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाए.

बम्बई उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि याचिकाकर्ता अदालत से जो अनुमति चाहता है वह सांस्कृतिक सद्भाव, एकता और शान्ति को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रतिकूल कदम है और इस याचिका में कोई दम नहीं है.

अदालत ने कहा था कि किसी को भी यह समझना चाहिए कि देशभक्त होने के लिए किसी को विदेश, खासकर पड़ोसी देश के लोगों के प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार करने की जरूरत नहीं है. एक सच्चा देशभक्त वह व्यक्ति है जो निस्वार्थ होता है, जो अपने देश के लिए समर्पित है. वह तब तक ऐसा नहीं हो सकता जब तक कि वह दिल से नेक व्यक्ति नहीं हो. जो व्यक्ति दिल का अच्छा है वह अपने देश में किसी भी सांस्कृतिक गतिविधि का स्वागत करेगा जो देश के भीतर और सीमा पार शान्ति, सद्भाव, मेलजोल, भाईचारे और कला को बढ़ावा देती हो.

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि कला, संगीत, खेल, संस्कृति, नृत्य ऐसी गतिविधियां हैं जो राष्ट्रवाद, संस्कृति और राष्ट्र से ऊपर हैं और ये वास्तव में राष्ट्र में और देशों के बीच शान्ति, सौहार्द, एकता और सद्भाव लाने वाली होती हैं.

लेकिन बम्बई उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए इस प्रवचन का याचिकाकर्ता फैज अहमद कुरैशी पर कोई असर नहीं हुआ और वो उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने भी फैज की याचिका खारिज करते हुए यही सीख दी कि आप को इस अपील के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए. इतनी संकीर्ण मानसिकता ठीक नहीं है.

फैज अहमद कुरैश खुद को एक सिने कर्मी और कलाकार बताता है. लेकिन क्या ऐसा व्यक्ति कलाकार हो सकता है जिस का दिल इतना छोटा और दिमाग इतना कुंद हो? जो भी हो इस फैसले से अब पाकिस्तानी कलाकारों को बुलाने के रास्ते खुल जाएंगे और भगवा गैंग इस का विरोध नहीं कर पाएंगे.

Uttarkashi Tunnel से बाहर आए 41 मजदूर, रैट होल माइनिंग से जीती जंग

उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को आखिरकार 17 दिन के अथक प्रयासों के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. 28 नवम्बर की शाम 7 बजे से ही यह आशा जाग गयी थी कि आज वो खुशखबरी मिल ही जाएगी जिसका इंतज़ार में 41 परिवारों सहित पूरा देश और विश्व कर रहा है. और कुछ ही देर बाद यह सन्देश सुरंग के भीतर से आया कि रैट माइनिंग कर रहे श्रमिक सुरंग में फंसे श्रमिकों तक पहुंच गए हैं. फिर क्या था, चंद मिनटों में ही एक एक कर सारे मजदूर 800 MM के पाइप में स्क्रोल करते हुए बाहर आ गए.

हालांकि इस से कुछ ही देर पहले जब अधिकारी मीडिया को बाइट दे रहे थे तो उनका कहना था कि श्रमिकों को स्ट्रेचर पर एक एक कर बाहर निकाला जाएगा और हर श्रमिक को निकालने में पांच से सात मिनट का वक्त लगेगा. लेकिन जब सुरंग की खुदाई करने वाले उन तक पहुंचे तो उन्होंने झपट कर उन्हें गले लगा लिया और खुशी के मारे अपने पास मौजूद बादाम उन के मुंह में भर दिए. उस के बाद वे एक के पीछे एक उस पाइप में रेंगते हुए करीब आधे घंटे के अंदर बाहर निकल आये. सुरंग के बाहर उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने उन्हें गले लगा कर उनका स्वागत किया और माला पहना कर एम्बुलेंस से डॉक्टरी चेकअप के लिए रवाना किया.

400 घंटे बाद सिल्क्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकलता देख बाहर खड़े लोग और मजदूरों के परिजन जो देश के विभिन्न हिस्सों से आकर अपनों के ज़िंदा बाहर आने की आस लगाए पिछले 17 दिनों से वहां जमे हुए थे, भावुकता के अतिरेक में रो पड़े. उनकी ख़ुशी के इस क्षण का साक्षी वह पर्वत भी था जिसने मजदूरों की हिम्मत और धैर्य तथा उनको बाहर निकालने में जी-जान एक कर देने वालों के आगे अपना मस्तक झुका दिया. इन मजदूरों के इंतजार में जो दीवाली सूनी रह गई थी वह सिलक्यांरा में मनाई गयी. खूब मिठाइयां बंटीं, जोरदार आतिशबाजी हुई और तालियों की गड़गड़ाहट से वादियां गूंजने लगीं.

इस रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन पर दो हफ्तों से ज्यादा समय से पूरा देश टकटकी लगाए बैठा था. 12 नवम्बर दिवाली के रोज सुबह अचानक यह सुरंग भारी मलबा गिरने की वजह से बंद हो गयी. अंदर 41 श्रमिक खुदाई कर रहे थे. ये मलबा इतना कठोर था कि तमाम देशी-विदेशी तकनीक और विदेशी मशीनें इसके आगे बार बार फेल हुई. विदेशी ऑगर मशीन कई बार टूटी और रुकी. आखिर में जब 10 मीटर खुदाई बची तो सारी तकनीकों ने हाथ खड़े कर दिए. मगर इस काम को संभव कर दिखाया उन रैट माइनिंग में माहिर श्रमिकों ने जो चूहे की तरह हाथ से खुदाई करने और सुरंगे बनाने में माहिर थे. 24 लोगों की इस टीम ने दो दिन लगातार खुदाई कर फंसे हुए मजदूरों के लिए बाहर निकलने का रास्ता तैयार कर दिया. गौरतलब है कि रैट माइनिंग देश में प्रतिबंधित है.

दरअसल रैट माइनिंग में पतली सुरंगों में भीतर घुस कर मजदूर हाथ के सहारे छोटे फावड़े से चूहे की तरह खुदाई करते हैं और हाथ से मलबा बाहर निकालते हैं. इसमें पतले से छेद से पहाड़ के किनारे से खुदाई शुरू की जाती है. पोल बनाकर धीरे-धीरे छोटी हैंड ड्रिलिंग मशीन से ड्रिल किया जाता है. ये तरीका बहुत थकाने वाला और जान जोखिम में डालने वाला होता है. इसका इस्तेमाल आमतौर पर कोयले की माइनिंग में खूब होता रहा है. झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर पूर्व में रैट होल माइनिंग जमकर होती है. लेकिन रैट होल माइनिंग चूंकि काफी खतरनाक काम है, इसलिए इसे NGT ने 2014 में बैन कर दिया था. लेकिन यह एक ऐसी स्किल है, जिसका इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन साइट पर किया जाता है. ये प्रक्रिया हमेशा आसान नहीं होती है पर मुश्किल स्थितियों में इसका इस्तेमाल होता है. सिल्क्यारा में भी रैट माइनिंग के माहिर श्रमिकों ने अपने कौशल से अंततः 41 लोगों को नयी जिंदगी दी. इसलि इनकी जितनी तारीफ की जाए कम है.

रोजाना 1 सेब खाने से मिलते हैं ये 10 फायदे

अम्लीय फल सेब पोषक तत्त्वों से भरपूर है. इस के सेवन से केवल ऊर्जा ही नहीं मिलती, बल्कि विभिन्न मैटाबौलिक क्रियाओं के पूरे विकास में भी बहुत मदद मिलती है. वनस्पति शास्त्र में सेब को ‘मालुस पूमिला’ कहते हैं. सेब में शरीर व दिमाग का कायाकल्प करने के लगभग सभी औषधीय गुण हैं. अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए और अनेक रोगों से बचाव के लिए सेब बहुत ही काम आता है. एक बहुत पुरानी कहावत है, ‘रोज एक सेब खाइए, डाक्टर को दूर भगाइए’.

इस एक कहावत से ही पता चलता है कि सेब में कितने पौष्टिक गुण मौजूद हैं. सेब में प्रमुख रूप से सक्रिय औषधि तत्त्व है ‘पैक्टिन’. यह प्राकृतिक औषधि तत्त्व है, जो छिलके के भीतरी हिस्से और गूदे में पाया जाता है. यह कुछ जहरीले पदार्थों को शरीर से निकाल बाहर करने के लिए एकदम सही रसायन है. इस के अलावा पैक्टिन भोजन नली में प्रोटीन पदार्थों को यह सड़ने से रोकता है.

इस में विशेष रूप से विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘बी’ और विटामिन ‘बी कौंप्लैक्स’ की मात्रा भी पाई जाती है. सेब आज भी दुनिया के सर्वाधिक खपत वाले फलों में से एक है. भारत के जम्मूकश्मीर, हिमाचल प्रदेश और कुमाऊं की पहाडि़यों में यह व्यावसायिक फसल के रूप में उगाया जाता है. सेब से मिलने वाले पोषक तत्त्वों में प्रमुख तत्त्व शर्करा है, जो सेब में 9 फीसदी से 51 फीसदी तक पाई जाती है.

इस शर्करा का 85 फीसदी भाग आसानी से हजम हो जाने वाली 2 शर्कराओं से मिल कर बनता है. इस में फ्रूट शुगर (फल शर्करा) 60 फीसदी और ग्लूकोज 25 फीसदी होता है. सेब में गन्ने वाली शर्करा केवल 15 फीसदी ही होती है. सेब को किसी भी रूप में खाया जाए, तो उस का दोहरा फायदा होता है. इस हिसाब से सेब सेहत के लिए अमृत समान फल है. एक दिन में एक सेब खाना लाभदायक होता है. अगर कोई सेब रोज खाता है, तो उसे डाक्टर के पास नहीं जाना पड़ता.

सेब आंतों, लिवर और मस्तिष्क के लिए बहुत फायदेमंद होता है. सेब में विटामिन बहुत ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं. सेब शरीर को सेहतमंद और ताकतवर बनाता है.

* भूखे पेट सेब खाना फायदेमंद माना जाता है. सेब गरमी और खुश्की दूर करता है. सेब का मुरब्बा दिल की गरमी और मस्तिष्क की कमजोरी भी दूर करता है.

* सुबह भूखे पेट सेब खाने के बाद ऊपर से दूध पीना फायदेमंद माना जाता है. इस से स्किन का कालापन भी दूर होता है.

* जुकाम होने पर खाना खाने से पहले सेब को छिलके सहित खाना फायदेमंद माना जाता है और इस से मस्तिष्क की गरमी भी दूर होती है.

* रोज सेब खाने से हाई ब्लडप्रैशर में बहुत फायदा होता है. * सेब खाने से स्मरणशक्ति बढ़ जाती?है और रात को बारबार पेशाब जाना कम हो जाता है.

* सेब पर नमक लगा कर कुछ दिनों तक खाने से सिरदर्द ठीक हो जाता है.

* सेब का मुरब्बा खाने से नींद न आने की समस्या में फायदा होता है और लिवर की दिक्कत भी ठीक हो जाती है.

* सेब को जहां तक हो सके, खाली पेट ही खाना चाहिए. इस से कब्ज की शिकायत नहीं होती.

* जिन लोगों को कब्ज रहती है, उन लोगों को सेब छिलका सहित खाना चाहिए और जिन लोगों को दस्त की समस्या हो, उन्हें सेब बिना छिलके के खाना चाहिए.

* सूखी खांसी होने पर मीठे सेब का सेवन बहुत ही लाभकारी होता है.

मेरी पत्नी मायके से हमारे घर आना ही नहीं चाहती, बताएं मैं क्या करूं ?

सवाल

मैं 30 साल का हूं. शादी को 10 साल हो चुके हैं और मेरे 3 बच्चे भी हैं. मेरी पत्नी मायके में ही रहती है और मेरे पास आने से मना करती है. अगर मैं उस से तलाक मांगता हूं तो वह मना कर देती है. इस समस्या का क्या हल हो सकता है ?

जवाब

यह सच है कि आप की पत्नी आप के साथ ज्यादती कर रही है. लेकिन सबसे पहले आप शांति से उनसे बात करिए और उनसे पूछिए कि वो क्यों ससुराल में रहना नहीं चाहती है. अगर उन्हें कोई परेशानी है तो उसका समाधान निकालिए. इसके अलावा आप उन के घरवालों से भी बात करें कि वह क्यों आप के साथ नहीं रहना चाहती है और वे क्यों अपनी बेटी की गृहस्थी बरबाद कर रहे हैं.

पर अगर फिर भी वो आप की बात नहीं समझती है तो तब आप तलाक के लिए अदालत का सहारा ल सकते हैं. शादी के 10 साल बाद भी पत्नी के मायके में रहने की जिद वाकई गले नहीं उतरती है. इसके अलावा आप उस की घर वापसी के लिए भी मुकदमा दायर कर सकते हैं, क्योंकि सवाल आपके बच्चों के भविष्य का भी है.

खुसरो दरिया प्रेम का : बचपन के प्रेमियों की अधूरी प्रेम कहानी

story in hindi

ड्रग्स के जाल में छात्र

दिल्ली से सटे नोएडा में यूनिवर्सिटी और कालेजों में गांजा और ड्रग्स सप्लाई करनेवाला एक हाई प्रोफाइल रैकेट पकड़ा गया है. सैक्टर-126 थाने की पुलिस ने गिरोह के सरगना सहित 9 लोग पुलिस के हत्थे चढ़े हैं, जिन में नामी एमईटी यूनिवर्सिटी और एशियन ला कालेज के 4 छात्र और एक दिल्ली में रहने वाला अफ्रीकी मूल का निवासी है. पुलिस का कहना है कि ये लोग ताइवान, शिलौंग, उदयपुर जैसी जगहों से गांजा और ड्रग्स मंगा कर छात्रों को बेचते थे.

आरोपियों के कब्जे से अवैध 15 किलो के लगभग शिलौंग और देशी उदयपुर गांजा, 30 ग्राम कोकीन, लगभग 20 ग्राम एमडीएमए (पिल्स), 150 ग्राम चरस, 65 ग्राम विदेशी गांजा बरामद किया है. जिस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 20-25 लाख रुपए है. पकड़े गए लोगों में अक्षय नाम का आरोपी गिरोह का सरगना है जिस की पत्नी थाईलैंड में रहती है. गैंग का सरगना अक्षय कुमार अपने नैटवर्क के जरिए ताइवान का ओजी गांजा मंगाता है और दिल्ली व उस से सटे शहरों के कालेज में सप्लाई करता है. ओजी एक विदेशी गांजा है, जिस की मादकता भारतीय गांजे से काफी अधिक होती है.इस कारण ये काफी डिमांड में रहता है. ओजी को प्रति ग्राम 10 हजार रुपए में बिकती है.

दूसरा आरोपी नरेंद्र राजस्थान से देसी गांजा ला कर यूनिवर्सिटी व एशियन ला कालेज में पढ़ने वाले छात्रों को सप्लाई करता था.छात्रों को जाल में फंसा कर गैंग के रूप में तैयार कर कालेज, पीजी में रहने वाले छात्रछात्राओं को सप्लाई किया जाता था. पकड़े गए आरोपियों में से सागर एमईटी में एमबीए द्वितीय वर्ष का छात्र है. दूसरा छात्र आदित्य यूनिवर्सिटी में बीए, एलएलबी चतुर्थ वर्ष में पढ़ रहा है.दर्शन यूनिवर्सिटी में बीए एलएलबी तृतीय वर्ष का छात्र है.अपूर्व सक्सेना यहां एमबीए द्वितीय वर्ष का छात्र है.

यह सभी छात्र इस यूनिवर्सिटी के साथ अन्य शैक्षिक संस्थानों में छात्र छात्राओं को मादक पदार्थ सप्लाई करते है. इस के लिए ये लोग स्नैपचैट, टैलीग्राम, वाट्सएप के माध्यम से अलगअलग लोगों को अलगअलग नशीला पदार्थ उपलब्ध कराते है. मादक पदार्थों की डिलीवरी के लिए इन के पास निजी राइडर हैं जो जोमैटो की तर्ज पर और्डर मिलते ही डिलीवरी पहुंचाते हैं.एक अभियुक्त राजन दिल्ली से नोएडा के लिए ओला कैब चलाता है. जिस के माध्यम से दिल्ली में रहने वाले नाइजीरियन से यह कोकीन खरीदता था और एमिटी यूनिवर्सिटी के छात्रों को सप्लाई करता था. इस नाइजीरियन की तलाश पुलिस को है.

नोएडा में पिछले कुछ समय से ड्रग्स का काला कारोबार तेजी से बढ़ा है. ग्रेटर नोएडा एनसीआर में ड्रग्स सप्लाई और नशीले पदार्थों की फैक्ट्री के रूप में तेजी से उभरकर सामने आया है. मई में यहां सैक्टर ओमेगा स्थित जज सोसायटी में विदेशी नागरिकों द्वारा चलाई जा रही ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ था. तब पुलिस ने करीब 200 करोड़ रूपए कीमत की 30 किलो ड्रग्स जब्त की थी. इस से 15 दिन पहले ही थाना बीटा-2 पुलिस ने सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र में सेक्टर थीटा टू स्थित तीन मंजिला मकान में चल रही ड्रग्स फैक्ट्री पकड़ी थी.इस में 300 करोड़ रुपए की 46 किलोग्राम ड्रग्स बरामद हुई थी और नौ विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था. इन से पूछताछ से पता चला कि इनके कुछ साथी शहर की मित्रा एंक्लेव में भी फैक्ट्री चला रहे हैं. पुलिस ने मित्रा सोसायटी में दबिश दी तो मौके पर दो विदेशी नागरिकों सहित मेथाफेटामाइन (एमडीएमए) और कच्चा माल बरामद हुआ. आरोपियों के पास से करीब 200 करोड़ की 30 किलो ड्रग्स मिली.

हैरानी की बात है कि इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों और इन का धंधा करने वाले गिरोहों के पकड़े जाने के बावजूद पुलिस और नारकोटिक्स डिपार्टमेंट इन पर काबू पाने और शहर में इनकी सप्लाई पर रोक लगाने में अक्षम साबित हो रहा है. मादक पदार्थों का कारोबार करने वालों की नज़रें शहर के तमाम बड़े कॉलेजों के छात्रछात्राओं पर है जो इनके बीच नशे के आदि हो चुके बच्चों के जरिए आसानी से माल बेच लेते हैं. 14 से 20 साल के युवा इन नशे के सौदागरों के जाल में फंस कर अपना और देश का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी में दीपोत्सव मना कर अन्धेरा दूर करने का प्रयास कर रहे हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें