Download App
Home » पृष्ठ 3462

असिन का बैंड बाजा बरात

दक्षिण भारतीय फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री असिन ने कुछ साल मुंबई में हिंदी फिल्मों में अभिनय कर बिताए. ठीकठाक चलते कैरियर में ब्रेक तब लगा जब उन का दिल बिजनैसमैन राहुल शर्मा ने चुरा लिया. प्यार का यह सिलसिला अब शादी में तबदील हो गया है. दिलचस्प बात यह है कि इस शादी को फिक्स कराने में खिलाड़ी भइया अक्षय कुमार का अहम योगदान है. दरअसल, राहुल शर्मा अक्षय के करीबी मित्र हैं और असिन ने अक्षय के साथ एक फिल्म में काम करने के दौरान राहुल से बातचीत की और शादी फिक्स होने तक अक्षय की भूमिका निरंतर सक्रिय रही. शायद इसीलिए असिन ने अपनी वैडिंग का पहला कार्ड अक्षय कुमार को ही दिया और उन्हें अपनी वैडिंग का बैस्ट मैन भी बनाया है.

हाफ गर्लफ्रैंड पर सस्पैंस

बतौर लेखक चेतन भगत का भले ही खूब मजाक उड़ाया जाता रहा हो लेकिन भारत के वे पहले युवा उपन्यासकार हैं जिन के ज्यादातर उपन्यासों पर बनी फिल्में सफल रही हैं. फिर चाहे वह ‘थ्री इडियट्स’ हो या ‘काईपोचे’ और ‘टू स्टेट्स’. अब उन की लेटेस्ट नौवेल ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ पर भी फिल्म बनाई जा रही है. पहले खबर थी कि इस फिल्म में अभिनेता सुशांत सिंह भोलेभाले बिहारी युवक माधव का किरदार निभाएंगे और कृति सेनन दिल्ली की मौडर्न लड़की रिया का. पर अब अटकलें लग रही हैं कि निर्देशक मोहित सूरी ‘आशिकी 2’ व ‘एक विलेन’ की स्टार श्रद्धा कपूर के साथ यह फिल्म बनाने की सोच रहे हैं. अब मोहित को श्रद्धा या कृति में किसी एक को चुनना होगा. तब तक सस्पैंस कायम रहेगा.

देश का पहला ट्रांसजैंडर बैंड

संगीत की दुनिया में यशराज बैनर और सोनू निगम ने एक अनोखी पहल करते हुए देश का पहला ट्रांसजैंडर बैंड लौंच किया है. 6 पैक बैंड नाम के इस म्यूजिक ग्रुप में 6 ट्रांसजैंडर सिंगर हैं और पहले एलबम में गाने भी 6 ही हैं. इस एलबम के कुछ गानों में सोनू निगम और अनुष्का शर्मा ने आवाज भी दी है.

यह स्वागत योग्य कदम इसलिए भी है क्योंकि हम इस समुदाय की पहचान पर सवाल तो खड़े करते आए हैं, इन्हें जबतब दुत्कारते भी रहे हैं लेकिन मुख्यधारा में लाने की कोशिश में कभी कदम आगे नहीं बढ़ाए. काबिलीयत को जैंडर के तराजू में तोलना बंद कर हमें ऐसे टैलेंट्स को आगे ला कर उन्हें मुख्यधारा में जोड़ कर सामाजिक ढांचे को दुरुस्त करने की बड़ी आवश्यकता है. यशराज ने इस बैंड के साथ न सिर्फ गाने रिकौर्ड किए हैं बल्कि इन को ले कर वीडियो भी शूट किया है.

सितारों की आत्मकथा

फिल्म कलाकार जबतब अपनी आटोबायोग्राफी रिलीज कर अपनी जिंदगी के निजी पहलुओं से पाठकों को वाकिफ कराते रहे हैं. ओमपुरी, नसीरुद्दीन शाह की आत्मकथाएं इस लिहाज में काफी संजीदा मानी गई हैं. पिछले दिनों जब शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी आत्मकथा ‘एनीथिंग बट खामोश’ लौंच की तो फिल्म व राजनीति के तमाम किस्सों को जगजाहिर किया. अब अभिनेता इमरान हाशमी भी अपनी आत्मकथा अप्रैल माह में रिलीज करने की तैयारी में हैं. गौरतलब है कि इमरान के 5 वर्षीय पुत्र को कैंसर हो गया था जिस को ले कर इमरान ने लंबा संघर्ष किया और बेटे को इस बीमारी से बाहर लाने के अनुभवों पर इस किताब को लिखा है.

रितिका की साला खड़ूस

बौलीवुड में स्पोर्ट्स ड्रामा बीते सालों में एक हिट जौनर बन कर उभरा है. राजकुमार हीरानी भी इस जौनर में फिल्म ‘साला खड़ूस’ ले कर आए हैं जो बौक्सिंग पर केंद्रित है. आर माधवन स्टारर इस फिल्म में बौक्सर रितिका सिंह अपना बौलीवुड डेब्यू कर रही हैं. रितिका एक प्रोफैशनल बौक्सर हैं, लेकिन फिल्म का कथानक सुन कर उन्होंने अभिनय का जोखिम उठाया. अब एक रियल बौक्सर को परदे पर बौक्सिंग स्टार के किरदार में देखना काफी दिलचस्प होगा. फिल्म में आर माधवन एक गुस्सैल बौक्सिंग कोच की भूमिका में हैं जबकि रितिका उन की शागिर्द बनी हुई हैं.

सानटिना का जलवा

महिला टैनिस डबल्स की नंबर 1 जोड़ी स्विट्जरलैंड की मार्टिना हिंगिस और हैदराबाद की सानिया मिर्जा ने वर्ष 2016 में शानदार शुरुआत कर नई बुलंदियों को छू लिया है. पहले जोड़ी ने ब्रिसबेन इंटरनैशनल खिताब अपने नाम कर लिया. फिर दोनों ने डब्लूटीए सिडनी इंटरनैशनल टैनिस, टूर्नामैंट का महिला डबल्स खिताब जीत लिया. पिछले वर्ष इस जोड़ी ने 9 खिताब जीते थे. इस से पहले यह रिकौर्ड जिगी फर्नांडिस और नताशा ज्वेरेवा की जोड़ी के नाम था. अपने शानदार खेल से सानिया मिर्जा न सिर्फ भारत का नाम रोशन कर रही हैं बल्कि नई लड़कियों को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं. उन्होंने दिखा दिया है कि खेल के प्रति समर्पण भावना के बीच उम्र आड़े नहीं आती. शाबाश सानिया. इस ऐतिहासिक जीत के दौरान समर्थकों ने सानिया व मार्टिना की जोड़ी को सानटिना कह कर प्रशंसित किया. दोनों की जोड़ी कई सालों से जिस तरह जीत दर्ज कर रही है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले वर्षों में उन का रिकौर्ड तोड़ना बेहद कठिन होगा.

ताकि क्रिकेट का भला हो सके

जब से जस्टिस लोढ़ा समिति ने सुप्रीम कोर्ट को क्रिकेट से संबंधित रिपोर्ट सौंपी है तब से बीसीसीआई के अधिकारियों, सरकार के मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों की नींद गायब है. बीसीसीआई के आकाओं ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है. उन्होंने बोर्ड से संबद्ध सभी इकाइयों को पत्र लिख कर राय मांगी है कि वे अपनी राय बताएं वरना उन्हें अब यहां से बाहर कर दिया जाएगा.

लोढ़ा समिति के विरोध में अपनी आवाजें वही बुलंद कर रहे हैं जो वर्षों से खेल संघों में अपना दबदबा बनाए हुए हैं और उन की राजनीति से पूरा खेल चौपट हो चुका है. खेलों के जरिए अपनी तिजोरियां भरने वाले कोई और नहीं, बल्कि वही घाघ लोग हैं जो देश को चलाने का दंभ भरते हैं. देश को तो ये लोग लूट ही रहे हैं, अब वे सब से अमीर संस्था बीसीसीआई में भी कुंडली मार कर वर्षों से बैठे हुए हैं. वे क्रिकेट को कारोबार बना कर उस से मालामाल हो रहे हैं.

लोढ़ा समिति की प्रमुख सिफारिशें :

–       किसी राजनीतिज्ञ को क्रिकेट संस्था का हिस्सा नहीं होना चाहिए.

–       पदाधिकारियों की उम्र 70 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए.

–       बीसीसीआई में एक राज्य का एक ही मत होना चाहिए.

–       आईपीएल और बीसीसीआई के अलगअलग गवर्निंग काउंसिल हों.

–       बीसीसीआई को सूचना अधिकार कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए.

–       इन-बिल्ट मैकेनिज्म तैयार कर सट्टेबाजी को वैध कर दिया जाए.

अगर सुप्रीम कोर्ट लोढ़ा समिति की सिफारिश मान ले तो इन की जेबें गरम नहीं होंगी, इसलिए ये सभी तिलमिलाए हुए हैं और विरोध करने के लिए एकजुट होने लगे हैं. शरद पवार की अगुआई वाले मुंबई क्रिकेट संघ ने तो स्पष्ट कर भी दिया है कि वह पारदर्शिता और मुद्दे पर समर्थन तो करेगा पर बाकी चीजों पर एमसीए सहज नहीं है.

बीसीसीआई में हमेशा से दबदबा बड़े उद्योगपतियों का या फिर राजनेताओं का रहा है पर लोढ़ा समिति ने बीसीसीआई की कार्यप्रणाली में चारचांद लगाने के लिए बड़े बदलावों की सिफारिश की है तो इन के पेट में दर्द उठ रहा है. यानी ये नहीं चाहते हैं कि क्रिकेट का भला हो. इस का सीधा सा मतलब है कि बीसीसीआई में इन का वर्चस्व खत्म हो जाएगा, जो ये नहीं चाहते हैं.

लोढ़ा समिति की सिफारिश में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय खिलाडि़यों का चुनाव सिर्फ वही कर सकते हैं जो पूर्व टैस्ट खिलाड़ी हों, उन के पास गहरी जानकारी के साथसाथ अनुभव भी होते हैं और इस के 5 चयनकर्ताओं के बजाय सिर्फ 3 ही रहें. अभी तक खिलाडि़यों के चुनाव ऐसे व्यक्ति करते आए थे जिन्होंने न तो कभी क्रिकेट खेला और न ही उन्हें कोई गहरी जानकारी है. लोढ़ा समिति ने ऐसी रिपोर्ट की सिफारिश यों ही नहीं कर दी, इस के लिए न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा ने कई क्रिकेटरों व जानकारों से बातचीत की है, छोटीछोटी बातों को ले कर चर्चा की है और तब क्रिकेट की बेहतरी के लिए यह सुझाव दिए हैं. ऐसे में बीसीसीआई के पदाधिकारियों को इस का समर्थन करना चाहिए, न कि विरोध. एक तो ज्यादातर सरकारी कमजोरियां गठन के बाद सही निष्कर्ष पर पहुंचती नहीं, और जो पहुंचती हैं उन्हें रसूखदार अपने प्रभाव से दबा देते हैं. ऐसे में लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर कितना गौर फरमाया जाता है, जटिल प्रश्न है.

चीन में विनिर्माण आंकड़ा गिरने से बाजार में भूचाल

वर्ष 2016 की शुरुआत भारत के लिए अच्छी नहीं रही. पठानकोट में पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने हमला किया जिस में सेना के कई जवान शहीद हो गए. अफगानिस्तान में भारतीय वाणिज्यिक दूतावास पर हमला हुआ. बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई के लिए भी वर्ष की शुरुआत अच्छी नहीं रही. करीब 3 सप्ताह से तेजी पर चल रहे बाजार में, चीन में विनिर्माण क्षेत्र के लगातार 28वें माह गिरावट रहने से भूचाल आ गया. इसी दौरान सऊदी अरब और ईरान के बीच राजनयिक संपर्क टूटने की खबर आई जिस से निवेशकों में निराशा छा गई और सूचकांक 540 अंक लुढ़क कर 26 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से काफी नीचे आ गया.

इस दौरान रुपया डौलर के मुकाबले 2 माह के निचले स्तर पर यानी 66.61 पैसे तक पहुंच गया. नैशनल स्टौक एक्सचेंज भी इस दौरान 8 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे उतर गया और सूचकांक 172 अंक तक गिर गया. नए साल के तीसरे कारोबारी दिन में भी बाजार में नकारात्मक माहौल रहा और सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई.

कौल ड्रौप का मुआवजा देने से इनकार

भारतीय दूर संचार नियामक यानी ट्राई कौल ड्रौप के मामले पर सख्त हो गया है. उस ने कौल ड्रौप पर सेवा प्रदाताओं को हर्जाना भरने का निर्देश दिया है. ट्राई ने पिछले वर्ष 16 अक्तूबर को दूरसंचार उपभोक्ता सुरक्षा विनियामक में संशोधन करते हुए उपभोक्ता को कौल ड्रौप की स्थिति में प्रति कौल ड्रौप पर 1 रुपया मुआवजा देने का निर्देश दिया था.

निर्देश में कौल ड्रौप पर अधिकतम 3 रुपए प्रतिदिन की सीमा भी निर्धारित की गई थी. केंद्र सरकार ने भी उस पर सख्ती दिखाई और संसद में कौल ड्रौप से छुटकारा दिलाने का देश को आश्वासन दिया. ट्राई ने 1 जनवरी से नया नियम लागू करने को कहा था लेकिन सेवा प्रदाता कंपनियां मुआवजा देने के बजाय न्यायालय पहुंच गईं.

सेवा प्रदाताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय में ट्राई के आदेश को चुनौती दी है. सेवा प्रदाताओं के एकीकृत संगठन का कहना है कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है. फैसला आने तक हर्जाना नहीं दिया जा सकता. कौल ड्रौप से सेवा प्रदाता कंपनियां भारी फायदा उठा रही हैं. उन्हें 1 मिनट बात करने के लिए जितने पैसे लेने होते हैं वह पैसा महज कुछ सैकंड की वार्त्ता में कमा लेती हैं. हालांकि कंपनियां इसे तकनीकी दिक्कत बताती हैं लेकिन उपभोक्ता की जेब पर वे लगातार डाका डाल रही हैं.

उपभोक्ता के लिए कौल ड्रौप बड़ा संकट है. इस वजह से सामाजिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं. व्यक्ति जो बात करना चाहता है, कौल ड्रौप के कारण वह अधूरी रह जाती है. आधी बात का मतलब दूसरे पक्ष के लिए परेशानी पैदा कर सकता है. सेवा प्रदाताओं को न्यायालय जाने के बजाय ट्राई को आश्वासन देना चाहिए कि उस के निर्देशों का पालन किया जाएगा, इसलिए उसे थोड़ी राहत दी जाए.

आधिकारिक संपर्क लिखना अनिवार्य

आयकर विभाग ने सूचना तकनीकी के इस दौर में धोखाधड़ी से करदाताओं को बचाने के लिए कई कारगर तरीके इस्तेमाल किए हैं और इस दिशा में लगातार सुधार की प्रक्रिया जारी है. इसी क्रम में एक कदम आगे बढ़ाते हुए विभाग ने आयकर के संदर्भ में आयकर नहीं देने वाले व्यक्ति तथा कंपनी को भेजे जाने वाले नोटिस में संबद्ध अधिकारी के कार्यालय का फोन नंबर और उस का ईमेल पता लिखना अनिवार्य कर दिया है. नोटिस भेजने वाले अधिकारी के लिए हर बार के पत्राचार में फोन और अपना ईमेल का पता लिखना जरूरी होगा. इस से पत्राचार की प्रामाणिकता बढ़ने के साथ ही धोखाधड़ी से भी बचा जा सकता है.

वित्त मंत्रालय में इस आशय का आदेश पारित कर दिया है और उसे राजस्व महानिदेशालय के सचिव को भेज दिया गया है. आयकर विभाग में अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा धोखाधड़ी किए जाने और करदाता को परेशान करने के कई मामले सामने आए हैं. सामान्य आदमी उन के झांसे में आ जाता है. कई बार फर्जी नोटिस भेज कर व्यापारियों से पैसा ऐंठने के मामले भी सामने आते हैं. इस व्यवस्था से नोटिस की प्रामाणिकता के साथ ही करदाता को फर्जी लोगों के चंगुल से बचाया जा सकेगा.

फर्जी लोग करदाता को डरातेधमकाते हैं और कई बार पैसा ले कर करदाता को छूट देने का आश्वासन देते हैं. बेचारा करदाता आसानी से उन के चंगुल में फंस जाता है. उम्मीद की जानी चाहिए कि इस तरह का नोटिस पा कर करदाता फर्जी लोगों के जाल में नहीं फंसेगा और पारदर्शी तरीके से आयकर विभाग को एक कदम आगे बढ़ कर काम करने का अवसर मिलेगा.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें