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होमगार्ड अर्चना हत्याकांड : मांगा साथ, मिली मौत

‘तुम मेरी बात को समझने की कोशिश करो अर्चना. मैं शादीशुदा हूं. मेरे परिवार में मातापिता, पत्नी और बच्चे हैं. मैं उन को छोड़ कर तुम्हारे साथ नहीं रह सकता. तमाम तरह की दिक्कतें आएंगी,’ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की पुलिस लाइन में तैनात सिपाही प्रदीप ने अपनी प्रेमिका होमगार्ड सिपाही अर्चना रावत को समझाते हुए कहा.

‘तुम केवल अपना मतलब देख रहे हो. जब तुम ने मेरे साथ जिस्मानी संबंध बनाए थे, उस समय यह सब तुम को याद नहीं था. मुझे भी अपने घरपरिवार में जवाब देना होता है,’ परेशान अर्चना ने प्रदीप को समझाने की कोशिश की.

‘देखो, मेरे और तुम्हारे बीच जोकुछ हुआ, उस में तुम्हारी रजामंदी थी,’ प्रदीप बोला.

‘ठीक है मेरी रजामंदी थी, पर तुम ने भी तो मुझे यह नहीं बताया था कि तुम शादीशुदा और बालबच्चेदार हो. मैं ने तो तुम से दोस्ती के बाद शादी का

सपना देखा था,’ रोंआसी हो कर अर्चना ने कहा.

‘अर्चना, तुम भी शादीशुदा थीं. तुम अपने पति को छोड़ चुकी थीं. तब तुम मेरे साथ आईं. मैं ने अपने परिवार को छोड़ा नहीं था. देर से ही सही, पर यह बात मैं ने तुम को बताई तो थी,’ प्रदीप ने कहा.

‘देखो, कब क्या हुआ क्या नहीं, यह सोचने का समय चला गया है. अब फैसला तुम को करना है कि तुम्हें किस के साथ रहना है. अगर मेरा साथ छोड़ने की सोच रहे हो, तो यह समझ लेना कि मैं तुम को भी सुकून से नहीं रहने दूंगी.’’  अर्चना ने धमकी दी.

‘अभी भी तुम गुस्से में हो. हम आराम से बातें करेंगे. अभी मैं चलता हूं,’ कह कर सिपाही प्रदीप अर्चना को छोड़ कर चला आया.

अपने कमरे पर आ कर प्रदीप सोचने लगा कि इस हालात से खुद को कैसे निकाल सके.

प्रदीप उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के गांव दुजाना का रहने वाला था. साल 2012 में उस की नौकरी उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में लगी थी. लखनऊ जिले के गाजीपुर थाने में उस की पहली पोस्टिंग हुई थी. राजधानी लखनऊ में जब मौडर्न पुलिस कंट्रोल रूम खुला, तो प्रदीप की ड्यूटी वहां  लग गई. वहीं पर उस की मुलाकात अर्चना रावत से हुई थी. अर्चना लखनऊ के ही विभूति खंड इलाके के गांव पासी विजयीपुर की रहने वाली थी. वह होमगार्ड में सिपाही थी.

अर्चना अपने परिवार में भाई कमलेश, हरीश और सुरेश के साथ रहती थी. वह अपनी भाभी रानी को बहुत मानती थी.

पुलिस कंट्रोल रूम के बाद अर्चना की तैनाती विभूति खंड थाने में हुई थी. उस ने थाने पर तैनाती नहीं ली, जिस से उस की ड्यूटी लखनऊ पुलिस लाइन में लगा दी गई थी. देखने में खूबसूरत 30 साल की अर्चना बातें भी बहुत प्यार भरी करती थी. मौडर्न पुलिस कंट्रोल रूम में आने वाली शिकायतों को वह बहुत अच्छी तरह से संभालती थी. उस को देख कर कोई कह नहीं सकता था कि वह होमगार्ड की सिपाही है. अर्चना की शादी हो चुकी थी. पति के साथ उस का संबंध ठीक नहीं चला, जिस के चलते उन में अलगाव हो गया. मौडर्न पुलिस कंट्रोल रूम में काम करतेकरते प्रदीप और अर्चना के बीच दोस्ती हो गई थी. वह कई बार अर्चना के घर चला जाता था और वहां आराम से रहता व खातापीता था. नतीजतन, उन की दोस्ती करीबी रिश्ते में बदल गई. अर्चना प्रदीप को अपने जीवनसाथी के रूप में देखने लगी थी. लेकिन प्रदीप ने कभी यह नहीं बताया कि वह शादीशुदा है.

रिश्तों में करीबी आने के बाद जब अर्चना ने एक दिन प्रदीप से अपनी शादी की बात चलाई, तो प्रदीप का सामना हकीकत से हुआ. पर उस ने अर्चना को समझा दिया कि वह शादीशुदा है. यह बात पता चलने के बाद अर्चना और प्रदीप के संबंधों में खिंचाव आना शुरू हो गया था. अपने कमरे पर परेशान प्रदीप को कोई रास्ता नहीं दिख रहा था. वह अर्चना के स्वभाव को जानता था. उसे यह भी पता था कि अर्चना उस को बहुत चाहती है और उस से दूर नहीं जा सकती. इसी बीच प्रदीप के 5 साल के बेटे की तबीयत खराब हो गई. उस ने यह बात अर्चना को बताई और घर जाने के लिए कहा, तो अर्चना को लगा कि प्रदीप बहाना बना कर अपने घर जाना चाहता है.

अर्चना ने प्रदीप को धमकी दी कि अगर वह अपने घर गया, तो वह उस के खिलाफ शोषण का मुकदमा लिखा देगी.

बदनामी से बचने के लिए प्रदीप अपने घर नहीं गया. बीमारी बढ़ने से उस के 5 साल के बेटे की मौत हो गई.

इस से प्रदीप परेशान हो गया था. वह किसी भी तरह से अर्चना से पीछा छुड़ाने की कोशिश करने लगा था.

अर्चना ने प्रदीप से उस की पत्नी और घर वालों का मोबाइल नंबर ले लिया और उन को भी फोन कर के धमकी देने लगी. अब वह पूरी तरह से प्रदीप को परेशान करने पर उतर आई थी.

कोई रास्ता न देख प्रदीप ने अपना तबादला लखनऊ से मुरादाबाद करा लिया. वहां उस की तैनाती पुलिस लाइन में हो गई. प्रदीप के लखनऊ से तबादला होने के बाद अर्चना ने 15 दिसंबर, 2015 को अपने घर वालों को बताया कि वह एक हत्याकांड की जांच के सिलसिले में पुलिस टीम के साथ लुधियाना जा रही है.

दरअसल, लखनऊ में बने एक फाइवस्टार होटल के मैनेजर नमन की हत्या हो गई थी. पुलिस हत्या के खुलासे के लिए हाथपैर मार रही थी. इस हाईप्रोफाइल केस के बारे में लखनऊ में हर किसी को पता था. अर्चना के घर वालों को भी इस बात पर यकीन हो गया था कि वह लुधियाना जा रही है. 19 दिसंबर, 2015 को हापुड़ के सिंभावली थाना क्षेत्र में नया बांस गांव के जंगल में एक लाश मिली. लाश को देख कर उस को पहचान पाना मुश्किल काम था. हापुड़ पुलिस को लाश के पास से एक एटीएम कार्ड मिला था. इस कार्ड की मदद से यह पता चल गया था कि मरने वाली अर्चना रावत है.

यह बात जब अर्चना के घर वालों को पता चली, तो उन का कहना था कि वह नमन हत्याकांड की जांच करने लुधियाना गई थी, तो हापुड़ कैसे पहुंच गई?इस गुत्थी को सुलझाने में लखनऊ और हापुड़ पुलिस को एक हफ्ते का समय लग गया. नमन हत्याकांड से जुड़ा नाम होने के नाते मामला सनसनीखेज हो चला था. 23 दिसंबर, 2015 को अर्चना हत्याकांड में पुलिस महकमे के ही सिपाही प्रदीप  को पकड़ कर पूछताछ की गई, तो सच सामने आया. 

मुरादाबाद तबादला हो जाने के बाद भी अर्चना उस से बातचीत करती थी. वह दबाव बना रही थी कि प्रदीप उसे अपने मातापिता से मिलवाए.

15 दिसंबर, 2015 को अर्चना अपने घर से लुधियाना जाने का बहाना बना कर निकली. उस ने अपनी स्कूटी चारबाग रेलवे स्टेशन की पार्किंग में खड़ी की और दिल्ली जाने वाली ट्रेन पकड़ कर 16 दिसंबर, 2015 की सुबह मुरादाबाद पहुंच गई. प्रदीप ने अर्चना को मुरादाबाद में रेलवे स्टेशन के पास बने एक होटल में ठहराया था. अर्चना के साथ प्रदीप भी होटल में ही रुका था. रातभर वह अर्चना को समझाता रहा कि वह मातापिता से मिलने की बात जाने दे, पर अर्चना हर हाल में प्रदीप के गांव जाना चाहती थी. अर्चना चाहती थी कि प्रदीप के मातापिता भी उस का साथ देंगे, तो प्रदीप अपनी पत्नी और बच्चों को छोड़ कर उस के साथ रहने लगेगा.

17 दिसंबर, 2015 को ड्यूटी के बाद प्रदीप अर्चना को अपनी मोटरसाइकिल से ले कर गांव जाने लगा. रास्ते में भी प्रदीप उसे समझाने की कोशिश कर रहा था, पर अर्चना इस के लिए तैयार नहीं थी. रास्ते में ही प्रदीप ने अपनी मोटरसाइकिल हाईवे से नहर की पटरी पर मोड़ दी और सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव नया बांस के पास गन्ने के एक खेत के पास अर्चना को मोटरसाइकिल से नीचे उतरने को कहा और उसे थप्पड़ मारा. अर्चना ने जब विरोध किया, तो प्रदीप ने पास ही खेत में पडे़ डंडे से पीटपीट कर उसे मार डाला. इस के बाद उस ने डंडा दूर फेंक दिया और अर्चना की लाश को पास के एक कुएं में डाल दिया.

इस के बाद प्रदीप मुरादाबाद लौट आया. वह अपने साथ अर्चना का मोबाइल फोन और पर्स भी उठा लाया था. मुरादाबाद आ कर प्रदीप ने मोबाइल फोन बंद कर के बैग में रखा और उस बैग को लखनऊ जाने वाली ट्रेन में रख दिया. प्रदीप की योजना थी कि अर्चना के घर न पहुंचने पर जब गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी, तो पुलिस उस के मोबाइल नंबरों पर फोन करेगी. उन नंबरों को सर्विलांस पर लगाएगी. बैग में रखा मोबाइल जिस किसी को मिलेगा, वह उसे इस्तेमाल करेगा. पुलिस उस से ही अर्चना के संबंध में पूछताछ करेगी.

लेकिन प्रदीप से एक गलती हो गई कि उस ने अर्चना का जैकेट मौके पर ही छोड़ दिया था. जैकेट की जेब से पुलिस को एटीएम कार्ड मिल गया, जिस के बाद पुलिस अर्चना की लाश की शिनाख्त करने में कामयाब हो गई.

मुरादाबाद जिले के सिंभावली थाने के एसओ दीक्षित कुमार त्यागी ने बताया कि पुलिस के सामने प्रदीप ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. उसे हत्या के आरोप में पकड़ कर अदालत के सामने पेश किया जाएगा.

बाबा का सच

मेरा तबादला उज्जैन से इंदौर के एक थाने में हो गया था. मैं ने बोरियाबिस्तर बांधा और रेलवे स्टेशन आया. रेल चलने के साथ ही उज्जैन के थाने में रहते हुए वहां गुजारे दिनों की यादें ताजा होने लगीं. हुआ यह था कि एक दिन एक मुखबिर थाने में आ कर बोला, ‘‘सर, एक बाबा पास के ही एक गांव खाचरोंद में एक विधवा के घर ठहरा हुआ है. मुझे उस का बरताव कुछ गलत लग रहा है.’’

उस की बात सुन कर मैं सोच में पड़ गया. फिर मेरे पास उस बाबा के खिलाफ कोई ठोस सुबूत भी नहीं था. लेकिन मुखबिर से मिली सूचना को हलके में लेना भी गलत था, सो उसी रात  मैं सादा कपड़ों में उस विधवा के घर जा पहुंचा. उस औरत ने पूछा, ‘‘आप किस से मिलना चाहते हैं?’’

मैं ने कहा, ‘‘दीदी, मैं ने सुना है कि आप के यहां कोई चमत्कारी बाबा ठहरे हैं, इसीलिए मैं उन से मिलने आया हूं.’’

वह औरत बोली, ‘‘भैया, अभी तो बाबा अपने किसी भक्त के घर गए हैं.’’

‘‘अगर आप को कोई एतराज न हो, तो क्या मैं आप से उन बाबा के बारे में कुछ बातें जान सकता हूं? दरअसल, मेरी एक बेटी है, जो बचपन से ही बीमार रहती है. मैं उस का इलाज इन बाबा से कराना चाहता हूं.’’

वह औरत बोली, ‘‘भैया, जितनी जानकारी मेरे पास है, वह मैं आप को बता सकती हूं.

‘‘एक दिन ये बाबा अपने 2 शिष्यों के साथ रात 8 बजे मेरे घर आए थे.

‘‘बाबा बोले थे, ‘तुम्हारे पति के गुजरने के बाद से तुम तंगहाल जिंदगी जी रही हो, जबकि उस के दादाजी परिवार के लिए लाखों रुपयों का सोना इस घर में दबा कर गए हैं.

‘‘‘ऐसा कर कि तेरे बीच वाले कमरे की पूर्व दिशा वाला कोना थोड़ा खोद और फिर देख चमत्कार.’

‘‘मैं अपने बीच वाले कमरे में गई, तभी उन के दोनों शिष्य भी मेरे पीछेपीछे आ गए और बोले, ‘बहन, यह है तुम्हारे कमरे की पूर्व दिशा का कोना.’

‘‘मैं ने कोने को थोड़ा उकेरा, करीब 7-8 इंच कुरेदने के बाद मेरे हाथ में एक सिक्का लगा, जो एकदम पीला था.

‘‘उस सिक्के को अपनी हथेली पर रख कर बाबा बोले, ‘ऐसे हजारों सिक्के इस कमरे में दबे हैं. अगर तू चाहे, तो हम उन्हें निकाल कर तुझे दे सकते हैं.’

‘‘मैं ने बाबा से पूछा, ‘बाबा, ये दबे हुए सिक्के बाहर निकालने के लिए क्या करना होगा?’

‘‘वे बोले, ‘तुझे कुछ नहीं करना है. जो कुछ करेंगे, हम ही करेंगे, लेकिन तुम्हारे मकान के बीच के कमरे की खुदाई करनी होगी, वह भी रात में… चुपचाप… धीरेधीरे, क्योंकि अगर सरकार को यह मालूम पड़ गया कि तुम्हारे मकान में सोने के सिक्के गड़े हुए हैं, तो वह उस पर अपना हक जमा लेगी और तुम्हें उस में से कुछ नहीं मिलेगा.’

‘‘आगे वे बोले, ‘देखो, रात में चुपचाप खुदाई के लिए मजदूर लाने होंगे, वह भी किसी दूसरे गांव से, ताकि गांव वालों को कुछ पता न चल सके. इस खुदाई के काम में पैसा तो खर्च होगा ही. तुम्हारे पति ने तुम्हारे नाम पर डाकखाने में जो रुपया जमा कर रखा है, तुम उसे निकाल लो.’

‘‘इस के बाद बाबा ने कहा, ‘हम महीने भर बाद फिर से इस गांव में आएंगे, तब तक तुम पैसों का इंतजाम कर के रखना.’

‘‘डाकखाने में रखे 4 लाख रुपयों में से अब तक मैं बाबा को 2 लाख रुपए दे चुकी हूं.’’

‘‘दीदी, क्या मैं आप के बीच वाले कमरे को देख सकता हूं?’’

वह औरत बोली, ‘‘भैया, वैसे तो बाबा ने मना किया है, लेकिन इस समय वे यहां नहीं हैं, इसलिए आप देख लीजिए.’’

मैं फौरन उठा और बीच के कमरे में जा पहुंचा. मैं ने देखा कि सारा कमरा 2-2 फुट खुदा हुआ था और उस की मिट्टी एक कोने में पड़ी हुई थी. मुझे लगा कि अगर अब कानूनी कार्यवाही करने में देर हुई, तो इस औरत के पास बचे 2 लाख रुपए भी वह बाबा ले जाएगा.

मैं ने उस औरत से कहा, ‘‘दीदी, मैं इस इलाके का थानेदार हूं और मुझे उस पाखंडी बाबा के बारे में जानकारी मिली थी, इसलिए मैं यहां आया हूं.

‘‘आप मेरे साथ थाने चलिए और उस बाबा के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाइए, ताकि मैं उसे गिरफ्तार कर सकूं.’’

उस औरत को भी अपने ठगे जाने का एहसास हो गया था, इसलिए वह मेरे साथ थाने आई और उस के खिलाफ रिपोर्ट लिखा दी. चूंकि बाबा घाघ था, इसलिए उस ने उस औरत के घर के नुक्कड़ पर ही अपने एक शिष्य को नजर रखने के लिए  बैठा दिया था. इसलिए उसे यह पता चलते ही कि मैं उस औरत को ले कर उस के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने थाने ले गया हूं. वह बाबा उस गांव को छोड़ कर भाग गया. इस के बाद मैं ने आसपास के गांवों में मुखबिरों से जानकारी भी निकलवाई, लेकिन उस का पता नहीं चल सका.

मैं यादों की बहती नदी से बाहर आया, तब तक गाड़ी इंदौर रेलवे स्टेशन पर आ कर ठहर गई थी. जब मैं ने इंदौर का थाना जौइन किया, तब एक दिन एक फाइल पर मेरी नजर रुक गई. उसे पढ़ कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए. रिपोर्ट में लिखा था, ‘गडे़ धन के लालच में एक मां ने अपने 7 साला बेटे का खून इंजैक्शन से निकाला.’ उस मां के खिलाफ लड़के के दादाजी और महल्ले वालों ने यह रिपोर्ट लिखाई थी. यह पढ़ कर मैं सोच में पड़ गया कि कहीं यह वही खाचरोंद गांव वाला बाबा ही तो नहीं है.

मैं ने सबइंस्पैक्टर मोहन से कहा, ‘‘मैं इस मामले में उस लड़के के दादाजी से बात करना चाहता हूं. उन्हें थाने आने के लिए कहिए.’’

रात के तकरीबन 10 बजे एक बुजुर्ग  मेरे क्वार्टर पर आए. मैं ने उन से उन का परिचय पूछा. तब वे बोले, ‘‘मैं ही उस लड़के का दादाजी हूं.’’

‘‘दादाजी, मैं इस केस को जानना चाहता हूं,’’ मैं ने पूछा.

वे बताने लगे, ‘‘सर, घर में गड़े धन के लालच में बहू ने अपने 7 साल के बेटे की जान की परवाह किए बगैर इंजैक्शन से उस का खून निकाला और तांत्रिक बाबा को पूजा के लिए सौंप दिया.’’

‘‘दादाजी, आप मुझे उस बाबा के बारे में कुछ बताइए?’’ मैं ने पूछा.

‘‘सर, यह बात तब शुरू हुई, जब कुछ दिनों के लिए मैं अपने गांव गया था. फसल कटने वाली थी, इसलिए मेरा गांव जाना जरूरी था. उन्हीं दिनों यह तांत्रिक बाबा हमारे घर आया और बहू से बोला कि तुम्हारे घर में गड़ा हुआ धन है. इसे निकालने से पहले थोड़ी पूजापाठ करानी पड़ेगी.’’

‘‘मेरी बहू उस के कहने में आ गई. फिर उस तांत्रिक बाबा ने रात को अपना काम करना शुरू किया. पहले दिन उस ने नीबू, अंडा, कलेजी और सिंदूर का धुआं कर उसे पूरे घर में घुमाया, फिर उस ने बीच के कमरे में अपना त्रिशूल एक जगह जमीन पर गाड़ा और कहा कि यहां खोदने पर गड़ा धन मिलेगा.

‘‘उस के शिष्यों ने एक जगह 2 फुट का गड्ढा खोदा. चूंकि रात के 12 बज चुके थे, इसलिए उन्होंने यह कहते हुए काम रोक दिया कि अब खुदाई कल करेंगे.

‘‘इसी बीच मेरी 5 साल की पोती उस कमरे में आ गई. उसे देख कर तांत्रिक गुस्से में लालपीला हो गया और बोला कि आज की पूजा का तो सत्यानाश हो गया है. यह बच्ची यहां कैसे आ गई? अब इस का कोई उपचार खोजना पड़ेगा.

‘‘अगले दिन रात के 12 बजे वह तांत्रिक अकेला ही घर आया और बहू से बोला, ‘तू गड़ा हुआ धन पाना चाहती है या नहीं?’

‘‘बहू लालची थी, इसलिए बोली, ‘हां बाबा.’

‘‘फिर बाबा तैश में आ कर बोला, ‘कल रात उस बच्ची को कमरे में नहीं आने देना चाहिए था. अब उस बच्ची को भी ‘पूजा’ में बैठा कर अकेले में तांत्रिक क्रिया करनी पड़ेगी. जाओ और उस बच्ची को ले आओ.

‘‘इस पर मेरी बहू ने कहा, ‘लेकिन बाबा, वह तो सो रही है.’

‘‘बाबा बोला, ‘ठीक है, मैं ही उसे अपनी विधि से यहां ले कर आता हूं.

‘‘अगले दिन सुबह उस बच्ची ने अपनी दादी को बताया, ‘रात को वह तांत्रिक बाबा मुझे उठा कर बीच के कमरे में ले गया और मेरे सारे कपड़े उतार कर उस ने मेरे साथ गंदा काम किया.’

‘‘जब मेरी पत्नी ने बहू से पूछा, तो वह बोली, ‘बच्ची तो नादान है. कुछ भी कहती रहती है. आप ध्यान मत दो.’

‘‘अगले दिन बाबा ने बीच का कमरा खोद दिया. लेकिन कुछ नहीं निकला. फिर वह बाबा बोला, ‘बाई, लगता है कि तुम्हारे ही पुरखे तुम्हारे वंश का खून चाहते हैं, तुम्हें अपने बेटे की ‘बलि’ देनी होगी या उस का खून निकाल कर चढ़ाना होगा.’

‘‘गड़े धन के लालच में मां ने बिना कोई परवाह किए अपने बेटे का खून ‘इंजैक्शन’ से खींचा और उस का इस्तेमाल तांत्रिक क्रिया करने के लिए बाबा को दे दिया.

‘‘यह सब देख कर मेरी पत्नी से रहा नहीं गया और उस ने फोन पर ये सब बातें मुझे बताईं. मैं तभी सारे काम छोड़ कर इंदौर आया और अपने पोते और महल्ले वालों को ले कर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई.’’

‘‘दादाजी, इस समय वह तांत्रिक बाबा कहां है?’’

‘‘सर, मेरी बहू अभी भी उस के मोहपाश में बंधी है. चूंकि उसे मालूम पड़ चुका है कि मैं ने उस के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है, इसलिए वह हमारे घर नहीं आ रहा है, लेकिन मैं उस पर नजर रखे हुए हूं.’’

सुबह एक मुखबिर आया और बोला, ‘‘सर, एक सूचना मिली है कि अपने इलाके की एक मलिन बस्ती में एक तांत्रिक आज ही आ कर ठहरा है.’’

रात के 12 बजे मैं अपने कुछ पुलिस वालों को साथ ले कर सादा कपड़ों में वहां जा पहुंचा. एक पुलिस वाले ने एक मकान से  धुआं निकलते देखा. हम ने चारों तरफ से उस मकान को घेर लिया. जब मैं ने उस मकान का दरवाजा खटखटाया, तो एक अधेड़ औरत ने दरवाजा खोला और पूछा, ‘‘क्या है? यहां पूजा हो रही है. आप जाइए.’’

इतना सुनते ही मैं ने दरवाजे को जोर से धक्का दिया और बीच के कमरे में पहुंचा. मुझे देखते ही वह तांत्रिक बाबा भागने की कोशिश करने लगा, तभी मेरे साथ आए पुलिस वालों ने उसे घेर लिया और गाड़ी में डाल कर थाने ले आए.

थाने में थर्ड डिगरी देने पर उस ने अपने सारे अपराध कबूल कर लिए, जिस में खाचरोंद गांव में की गई ठगी भी शामिल थी. मैं थाने में बैठा सोच रहा था कि अखबारों में गड़े धन निकालने के बारे में ऐसे ठग बाबाओं की खबरें अकसर छपती ही रहती हैं, फिर भी न जाने क्यों लोग ऐसे बाबाओं के बहकावे में आ कर अपनी मेहनत की कमाई को उन के हाथों सौंप कर ठगे जाते हैं?

इस वैलेंटाइन दिल से दें दिल का तोहफा

आजकल महिलाएं डायमंड ज्वैलरी में खासा इंटरैस्ट ले रही हैं. लें भी क्यों न? डायमंड हर अच्छे ओकेजन की खुशी को दोगुना जो कर देता है, खासतौर पर प्यार के दिन यानी वैलेंटाइन डे पर डायमंड ज्वैलरी एक ऐसा तोहफा है जो आपके दिल की बात को उनके दिल तक पहुंचा देता है.

दरअसल, जब भी वैलेंटाइन डे आता है तो हम इस सोच में डूब जाते हैं कि अपने नजदीकी और खास लोगों को ऐसा कौन सा तोहफा दें, जो भावनाओं को अच्छे से व्यक्त करने में मदद कर सके . खासतौर पर इस दिन अपनी मां, बहन, बीवी, बेटी और गर्लफ्रैंड के लिए तोहफा चुनते वक्त सोचविचार करना पड़ता है. आमतौर पर इस दिन लोग लेटैस्ट गैजेट, बुके, स्टाइलिश ड्रैस, कौस्मैटिक्स या फिर ज्वैलरी आदि गिफ्ट में देते हैं. इन तोहफों को पा कर महिलाओं को खुशी तो बहुत होती है लेकिन उनके चेहरे पर रौनक आती है तो सिर्फ डायमंड की चमक से. यदि ऐसा है तो अपनी वैलेंटाइन को इस बार गिफ्ट करें तारा ज्वैलर्स का हार्ट एम्बर्स कलैक्शन, क्योंकि इस कलैक्शन को सजाया गया है प्योर डायमंड्स से.

अब आपने सुना तो होगा ही कि हीरा महिलाओं का सबसे अच्छा दोस्त होता है. ऐसे में इस वैलेंटाइन डे पर यदि आपको किसी महिला को तोहफा देना हो तो तारा ज्वैलर्स का हार्ट एम्बर्स कलैक्शन बहुत अच्छा विकल्प है. इसे भेंट कर आप उन से अपने प्यार का इजहार कर सकते हैं. इस कलैक्शन में मौजूद हार्ट शेप्ड फिंगर रिंग, ईयररिंग्स और पैंडेंट की वैराइटी आपके दिल की बात को जुबान पर लाने में न केवल आपकी मदद करेगी, बल्कि आपके स्नेह को आपकी वैलेंटाइन तक बखूबी पहुंचाएगी भी.

प्यार जताने का बेहतर तरीका

कई बार पुरुष अपने शर्मीले और शांत स्वभाव की वजह से अपनी भावनाओं को बहुत प्रभावशाली ढंग से अपने दिल ऐ अजीज के आगे नहीं रख पाते. उदाहरण एक बेटे को अपनी मां के स्नेह के आगे सब कुछ छोटा लगता है. यहां तक की वह अपना उनसे लगाव कभी जाहिर नहीं कर पाता. लेकिन वैलेंटाइन डे एक ऐसा मौका है जब आप उन्हें बता सकते हैं कि वो कितनी महत्वपूर्ण हैं आपके लिए. इसी तरह पिता और बेटी का रिश्ता भी स्नेह भावनाओं से सराबोर होता है. ऐसे में बेटी पिता के जीवन में क्या महत्व रखती है इसे बताने के लिए वैलेंटाइन डे एक बहुत अच्छा दिन है और इस दिन को सैलिब्रेट करने के लिए हीरे से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता, क्योंकि यह आपके रिश्ते की डोर को प्यार और विश्वास की मोहर लगा कर और भी मजबूत बनाता है.

इतना ही नहीं हीरों के आभूषणों का महत्व शुरू से ही है. जब बहू ससुराल आती है तो सास उसे अपने पास रखे हीरों के गहने दे कर ही उसका स्वागत करती है. इस भेंट द्वारा सास बहू के लिए अपने स्नेह को प्रकट करती है और उसे नई जिम्मेदारियों को निभाने का हौसला देती है.  वैसे ही पति पत्नी को हीरे के गहने सुहागरात, मैरिज ऐनिवर्सरी, बर्थडे, वैलेंटाइन डे आदि पर गिफ्ट कर उसे खास होने का अहसास कराता है और जीवनभर साथ निभाने, प्यार देने का वादा करता है.वैलेंटाइन डे पर हीरों के गहनों को भेंट करने पर इस दिन की खासीयत और भी बढ़ जाती है. प्यार का यह दिन आपसी बौंडिंग को पहले से ज्यादा मजबूत करने का दिन होता है. रिश्ता कोई भी हो उसकी  मजबूती को हीरे के गहने और भी गहरा कर देते हैं औैर आपको अटूट प्यार के बंधन में बांध देते हैं.

हार्ट शेप की ज्वैलरी गिफ्ट करने के फायदे:

1. दिल के आकार को प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना जाता है. यदि आप अपने दिल की बात को लफ्जों में बयां करने में हिचक रहे हैं तो दिल के आकार की ज्वैलरी अपनी प्रेमिका को तोहफे में दें. आपके दिल की बात उन तक खुद ब खुद पहुंच जाएगी.

2. हार्ट शेप कभी भी आउट औफ फैशन नहीं होता, इसलिए आपका तोहफा भी कभी पुराना नहीं होगा. जब भी आपकी वैलेंटाइन इस तोहफे को पहनेगी उसे रिश्ते में हमेशा नएपन का अहसास होगा.

3. हार्ट के आकार की ज्वैलरी कैजुअल और ट्रैडिशनल दोनों ही तरह के आउटफिट्स पर आपकी वैलेंटाइन पहन सकती है. इसलिए आपका दिया तोहफा हर मौके पर आपकी दिल ए अजीज के नजदीक होगा.

4. दिल का आकार देख कर हमेशा सकारात्मक सोच बनती है, जो आपके रिश्ते को और भी बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्र्ण है.

5. आप हार्ट शेप की ज्वैलरी न केवल अपनी प्रेमिका बल्कि अपनी बेटी, बहन, मां किसी को भी गिफ्ट कर सकते हैं, क्योंकि ये सभी रिश्ते दिल के हैं.

6. हार्ट शेप ज्वैलरी की खासीयत यह भी है कि इसे किसी तय उम्र के लोग ही नहीं, बल्कि बच्चे, बूढ़े और जवान सभी उम्र के लोग आसानी से कैरी कर सकते हैं.

स्टेटस सिंबल है डायमंड

महिलाओं के लिए हीरा केवल ज्वैलरी ही नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल भी है. इसकी बड़ी वजह यह है कि हीरे की ज्वैलरी केवल किसी उत्सव में ही नहीं बल्कि औफिस वगैरह में भी पहनी जा सकती हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि डायमंड ज्यादा वजनदार नहीं होता, तारा ज्वैलर्स का हार्ट एम्बर्स कलैक्शन भी खासतौर पर लाइट वेट ज्वैलरी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. इस कलैक्शन की खासीयत यहीं नहीं खत्म होती. डायमंड के साथ ही इसमें कलर्ड स्टोन मसलन रूबी, इमरल्ड, रैड एंड व्हाइट इनेमल का भी इस्तेमाल किया गया है.कलैक्शन में मौजूद डिजाइन को मौडर्न महिलाओं की पसंद को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है. इस कलैक्शन में मौजूद ज्वैलरी की कीमत 12,000 रुपए से 52,000 रुपए तक है.

जितने क्रिकेटरों के साथ खेला, उनमें वॉ सबसे स्वार्थी : वार्न

स्टीव वॉ के साथ बरसों पुराने शेन वार्न के मतभेद फिर उजागर हो गए जब उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम के दौरान कहा कि जितने क्रिकेटरों के साथ उन्होंने खेला, उनमें आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान सबसे स्वार्थी थे .

वार्न ने चैनल टेन के कार्यक्रम आई एम अ सेलिब्रिटी, गेट मी आउट आफ हेयर कार्यक्रम में कहा, स्टीव वॉ को नापसंद करने के मेरे पास कई कारण हैं. मैने जितने क्रिकेटरों के साथ खेला, उनमें वह सबसे स्वार्थी थे .

वार्न ने 17 साल पुराने वाकये का जिक्र किया जब उन्हें 1999 में वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी टेस्ट से बाहर कर दिया गया था जब आस्ट्रेलिया 1- 2 से पीछे था . उन्होंने कहा, मैं उस पर सबसे ज्यादा उस टेस्ट में बाहर किये जाने के लिये चिढता हूं . हमें वह मैच हर हालत में जीतना था . उस समय कप्तान ( वॉ), उपकप्तान (मैं) और कोच (ज्यौफ मार्श) टीम चुनते थे. मैने अच्छी गेंदबाजी नहीं की लेकिन मुझे लगा कि मुझे बलि का बकरा बनाया गया है.

उन्होंने कहा, चयन के दौरान मैने सभी से राय पूछी तो वॉ ने कहा कि तुम नहीं खेल रहे हो. मैने कहा कि टीम क्या होनी चाहिये तो उसने कहा कि मैं कप्तान हूं और तुम नहीं खेल रहे हो . वार्न ने कहा, मैं काफी निराश था. दस साल बाद मेरे कंधे का आपरेशन हुआ. मैने सोचा कि जब हमें हर हालत में जीतना था तो मैं सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकता था. मैं कई अन्य कारणों से भी स्टीव वॉ को पसंद नहीं करता हूं .

उस टेस्ट में वार्न की जगह कोलिन मिलर खेले और आस्ट्रेलिया ने मैच 176 रन से जीता.

 

मिशेल स्टार्क जैसी गेंदबाजी करती है 17 साल की ये लड़की

17 साल की लॉरन चैटल अभी भी सिडनी के एक स्कूल में पड़ती हैं, लेकिन इस उम्र में ही उन्होंने कमाल कर दिया. वह बाएं हाथ की तेज गेंदबाज हैं और उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें भारत में होने वाले महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए टीम में चुन लिया है. उन्हें ऑस्ट्रेलिया की वर्ल्ड कप टी20 टीम में शामिल कर लिया गया है.

लॉरन की गेंदबाजी की खास बात है कि उनका गेंदबाजी एक्शन ऑस्ट्रेलिया के पुरुष तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क से बहुत मिलता है. लॉरन ने कहा कि उनको इस बात का अंदाजा नहीं था, लेकिन अब उनकी कोशिश होगी की वह स्टार्क की तरह ही असरदार हो सकें.

लॉरन के पिता इंग्लेंड में फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलते थे, लेकिन फिर ऑस्ट्रेलिया में आकर बस गए. लॉरन का घर ब्रेडमैन म्यूजियम के पास ही है और वह न्यू साउथ वेल्स के लिए खेलने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी भी बनी.

भारतीय महिला क्रिकेट टीम जब कुछ दिन पहले ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी तब तीन T-20 मैच की सीरीज़ के दूसरे मैच में उन्हें खेलने का मौका मिला हालांकि वह कुछ खास नहीं कर पाई थीं, लेकिन चयनकर्ताओं का भरोसा उन पर बना हुआ है.

 

हार पर बोले धौनी, यह भारतीय से ज्यादा इंग्लिश विकेट था

तीन मैचों की टी-20 श्रृंखला के पहले मैच में श्रीलंका से मिली हार पर टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने कहा कि टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए तैयार की गई पिच भारतीय विकेट की बजाय इंग्लिश विकेट था.

मैच के बाद धौनी ने कहा कि जिस तरह के विकेट पर हम पिछले एक महीने ऑस्ट्रेलिया में खेले हैं, उससे यह विकेट पूरी तरह से अलग था. यह इंग्लिश विकेट की तरह ज्यादा था. उछाल वाली और अलग तरह की पिच थी. विकेट को सही तरह से रोल नहीं किया गया. विकेट को देखते हुए हम बड़े शॉट नहीं खेल पाए जैसा कि हम खेलते हैं.

उनसे पूछा गया कि एक महीने ऑस्ट्रेलिया में खेलने के बाद क्या भारतीय परिस्थितियों में ढलना मुश्किल रहा, इस पर धोनी ने कहा कि भारतीय परिस्थितियों से ज्यादा इंग्लिश परिस्थितियां थीं.

धौनी ने कहा कि उन्हें लगा कि अगर 25-30 रन और बनते तो इससे मुकाबला और दिलचस्प हो सकता था. श्रीलंकाई कप्तान दिनेश चंडीमाल ने भी धौनी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि जब उन्होंने पिच पर नई घास देखी तो समझ गए थे कि टॉस महत्वपूर्ण होगा.

गौरतलब है कि शानदार गेंदबाजी और कप्तान दिनेश चंदीमल की सूझबूझ भरी पारी से श्रीलंका ने कम स्कोर वाले पहले ट्वेंटी20 मैच में पुणे में भारत को दो ओवर शेष रहते हुए पांच विकेट से हरा दिया.

 

 

पीला दुपट्टा, नीरजा और सोनम

अगले सप्ताह फिल्म नीरजा रिलीज हो रही है. फिल्म को रिलीज से पहले ही लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. फिल्म इंडस्ट्री में भी फिल्म का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है. ऐसे में रिलीज के करीब दो सप्ताह पहले नीरजा की स्पेशल स्क्रीनिंग की गई.

नीरजा की स्क्रीनिंग के समय पर सोनम कपूर एक पीले रंग के दुपट्टे के साथ आईं. फिल्म को बीच-बीच में मिल रही तारीफों के बीच सोनम बार-बार अपने दुपट्टे को देख रहीं थी, सहला रही थीं, मुस्कुरा रही थी, भावुक हो रही थी. इतनी महंगे गाउन के साथ एक पीले रंग का दुपट्टा सभी को थोड़ा सा ऑड लग रहा था. लेकिन स्क्रीनिंग के बाद सोनम कपूर के दुपट्टे रखने पर से सस्पेंस उठ गया. इस दुपट्टे को रमा भनोट जो नीरजा भनोट की मां थी. उन्होंने ही सोनम कपूर को गिफ्ट दिया था.

सोनम कपूर नीरजा के परिवार से मिलने जब चंडीगढ़ गई थी तो सोनम की आवाज़ से रमा अचानक बिफर गईं. लाडो-लाडो कहतीं दरवाजे तक बूढ़ीं आखें आ गई. तुरंत उस लाडो को गले से लगा लिया, जिसका वो पिछले 30 साल से इंतजार रही थी. हाथ तुरंत उस अलमीरा में भी चले गए. वहां से एक सुर्ख पीले रंग का दुपट्टा निकाला और नीरजा को दे दिया. रमा ने धीरे से सोनम के कान में कहा कि वो कब से इस दुपट्टे को लाकर अपने पास रखीं हुई थी पर उसने आने में देरी कर दी. सोनम कपूर को समझते देर नहीं लगी कि माजरा क्या है ?

रमा देवी की खुशी का ठिकाना नहीं था. जब तक सोनम उनके घर में थी, उन्होंने लाडो के नाम से पुकारा. फिल्म रिसर्च टीम की मानें तो नीरजा भनोट को पीला रंग पसंद था. पैनएम की फ्लाइट में जाने से पहले ही नीरजा की मां ने नीरजा के लिए पीले रंग का दुपट्टा लाया था. लेकिन जब तक वो उसे दे पाती नीरजा अपनी ड्यूटी के लिए निकल पड़ी थी. नीरजा के ड्यूटी से आने का इंतजार महीने भर पहले तक रमा देवी करती रहीं. उनकी आखिरी सांस तक इंतजार चलता रहा. लेकिन अपने देह त्यागने से पहले उन्होंने उस दुपट्टे को नीरजा का किरदार निभाने वाली सोनम कपूर को दे दिया.

 

कॉलेज गर्ल्स के बीच फंसे ओमकार कपूर

निर्देशक  लव रंजन की फिल्म प्यार का पंचनामा  2 से बतौर अभिनेता बॉलीवुड डेब्यू कर चुके ओमकार कपूर की लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती ही  जा रही  है. हाल ही में ओमकार को पिल्लै कॉलेज द्वारा उनके कॉलेज फेस्टिवल अलेग्री के लिए  मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया.

ओमकार जो फिल्म प्यार का पंचनामा 2 से घर घर में प्रसिद्ध हो चुके हैं वे जब इस फेस्टिवल में पहुंचे तो उन्होंने वहां पर मौजूद सारी महिलाओं का ध्यान अपनी  और आकर्षित कर लिया.

ओमकार जैसे ही कॉलेज के ऑडिटोरियम में पहुंचे वैसे ही लड़कियों ने तो उन्हें चारो तरफ से घेर लिया और  वहां पर मौजूद सारे विद्यार्थी उन्हें  देखते ही बहुत उत्साहित हो गए और वे उनके गाने पर डांस करने लगे और उनके साथ डांस करने का निवेदन भी किया.

ओमकार के प्रसंशक उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब थे जिसकी वजह से वहां पर आयोजित समारोह में भी देरी हो गयी, इतना ही नहीं वहां पर मौजूद एक प्रोफेसर ने उनसे अपनी बेटी के लिए जन्मदिन की बधाई देते हुए एक विडियो भी बनवाया क्यूंकि वो उनकी बहुत बड़ी प्रसंशक है. समारोह की समाप्ति के बाद ओमकार ने  अपने प्रसंशकों के साथ सेल्फ़ी भी क्लिक किये. 

 

मासूमियत पर डाका

रेयान इंटरनेशनल स्कूल के क्लास वन के दिव्यांश काकरोरा का शव स्कूल के टैंक में तैरता हुआ पाया गया था. दिव्यांश के माता-पिता का कहना है कि उनके बच्चे के साथ कुछ गलत हुआ है. इनका इशारा यौन शोषण की तरफ है. क्योंकि जब टैंक से निकाला गया तब उसकी बौडी नंगी थी उसके पौटी के रास्ते पर रूई लगी थी. लेकिन दिल्ली पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि दिव्यांश के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ है. हालांकि माता-पिता द्वारा उठाए सवालों का जवाब फिलहाल दिल्ली पुलिस ने नहीं दिया है. अंतिम रिपोर्ट आनी अभी बाकी है.

कुछ दिन पहले गाजियाबाद के एक क्रेच में भी बाल यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था. क्रेच की संचालिका का 65 वर्षीय ससुर चार साल की बच्ची के साथ अकेले में दुष्कर्म किया करता था. घर में, मौल में, स्कूल में, स्कूल बस में बच्चों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हर रोज घट रही है.

राष्ट्रीय अपराध रिकौर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि 2012 में बच्चों के साथ दुष्कर्म के 38,172 मामले दर्ज हुए, लेकिन 2014 में आंकड़ा बढ़कर 39,172 हो गया. दो साल में दुष्कर्म के 1251 मामलों में वृद्धि हुई. इनमें से नब्बे फीसदी मामलों में दुष्कर्म परिचित ही पाए गए. ह्यूमन राइट्स वौच के मुताबिक देश में हर साल करीब 7200 बच्चे यौन उत्पीड़न के शिकार होते हैं. इंग्लैंड में हुए एक अध्‍ययन में पाया गया कि 2012 से लेकर 2014 तक पचास हजार बाल यौन उत्पीड़न के दर्ज  किए गए. वहीं चाइल्ड कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार सही आंकड़ा चार लाख के आसपास है, जिसमें से 85 फीसदी मामले दर्ज ही नहीं होते हैं. उस पर भी दो-तिहाई मामलों में परिवार का कोई सदस्य या परिवार का कोई भरोसेमंद ही दोषी होता है.

कुछ समय पहले कैथोलिक पादरी ने अपने बयान में कहा था कि दो फीसदी पादरी बच्चों का यौन शोषण करते हैं. हाल ही में मदरसे में यौन शोषण की घटना सामने आयी थी. मलयालम फिल्‍ममेकर और राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अली अकबर ने 70 के दशक में मदरसे में तालीम हासिल करने के दौरान यौन शोषण की बात को स्वीकार किया था. इससे पहले मलयाली अखबार की पत्रकार राजीना में अपने साथ हुए मदरसे में यौन उत्पीड़न की चर्चा फेसबुक में की थी. वहीं आसाराम बापू द्वारा आश्रम में नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सुर्खियां बन चुका है. 

मद्रास हाईकोर्ट ने एक ब्रिटिश नागरिक द्वारा एक बच्ची का यौन शोषण मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश एन किरूबकरण ने कहा कि पोकसो जैसे सख्त कानून के बावजूद बच्चों के साथ दुष्कर्म हो रहा है. इसीलिए सरकार को बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वालों को नपुंसक बनाने के प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए. इसके जादुई नतीजे सामने आएंगे. हालांकि 2012 में सरकार ने प्रोटेक्शन औफ चिल्ड्रेन फ्रौम सेक्सुअल औफेंसेज एक्ट (संक्षेप में पोकसो एक्ट) पारित करने का मकसद यौन उत्पीड़न से बच्चों को सुरक्षा देने के लिए किया गया था. लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस कानून में स्कूलों में यौन उत्पीड़न के मामले में स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही को शामिल नहीं किया गया. जबकि 2007 में महिला व बाल विकास मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि 65 फसदी बच्चों का यौन उत्पीड़न स्कूलों में होता है.

बहरहाल, 2012 में पारित पोकसो एक्ट के तहत पहला मामला दर्ज होने में दो साल लग गए. 2014 में इसके तहत 8904 मामले दर्ज किए गए. राष्ट्रीय अपराध रिकौड्स ब्यूरो के अनुसार बच्चों के बलात्कार के 13,766 मामले सामने आए. नाबालिग लड़कियों का शीलभंग करने के इरादे से हमले 11,335 मामले और यौन शोषण के 4,593 मामलों के अलावा नाबालिग लड़कियों निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या शक्ति प्रयोग के 711 मामले; घूरने के 88 और पीछा करने के 1,091 मामले दर्ज किए गए. इन सभी घटनाओं में पोकसो के तहत मामले दर्ज नहीं हुए.

नीतीश को मोदी के बराबर खड़ा करने की तैयारी

बिहार में नरेंद्र मोदी को पटखनी देने के बाद अब नीतीश कुमार दिल्ली पहुंच कर मोदी को चुनौती देंगे. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी के कद के बराबर खड़ा करने की तैयारी उनकी पार्टी जदयू ने कर दी है. पिछले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के सामने बौने नजर आए नीतीश कुमार ने ताजा बिहार विधानसभा चुनाव में अपने कद को बड़ा साबित कर डाला. विधानसभा चुनाव में नीतीश को मात देने के लिए मोदी को खुद ही मैदान में उतरना पड़ा था, लेकिन 243 सीटों वाली विधानभा में भाजपा को 53 सीटों पर समेट कर नीतीश-लालू गठबंधन ने मोदी को धूल चटा कर आम चुनाव की हार का बदला लिया.

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह साफ लहजे में कहते हैं कि नीतीश कुमार की अगुवाई में नेशनल लेवल पर राजनीतिक मंच बनाने की मुहिम शुरू की गई है. बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू, राजद और कांग्रेस के महागठबंधन को मिली कामयाबी के बाद दूसरे राज्यों में भी महागठबंधन बनाने की कोशिशें की जा रही हैं. उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल में होने वाले विधानभा के चुनाव में जदयू बड़ी भूमिका निभाएगा. सभी राज्यों में नीतीश प्रचार के लिए जाएंगे और जिन दलों के साथ गठबंधन बनेगा उसके लिए प्रचार करेंगे.

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों जदयू को मिली करारी हार के बाद नीतीश ने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी और जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बना दिया था. 2009 के आम चुनाव में जदयू को 20 सीटें मिली थी पर 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी की लहर में उसे केवल  2 सीटों पर ही जीत मिली ओर भाजपा 12 से 32 सीटों पर पहुंच गई थी. उसके बाद पिछले साल 243 सदस्यों वाले बिहार विधानसभा में महागठबंधन ने 178 सीटों पर कब्जा कर लिया है. इसमें जदयू की झोली में 71, राजद के खाते में 80 और कांग्रेस के हाथ में 27 सीटें गई हैं. विधानसभा चुनाव के हीरे नीतीश और लालू ही रहे. पिछले विधानसभा में 22 सीट पर सिमटने वाले राजद ने इस बार 80 सीटें जीत ली. वहीं दूसरी सबसे बड़ी फतेह कांग्रेस को मिली है, जो 4 से 27 सीटों तक पहुंच गई है. महागठबंधन ने राजग को महाझटका देते हुए उसे 58 सीट पर समेट डाला. 

क्षेत्रीय दलों के गठबंधन को बिहार में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब दूसरे राज्यों में भी महागठबंधन बनाने की कवायद शुरू हुई है. बिहार की तरह दूसरे राज्यों में भी महागठबंधन को कामयाब बनाने की उम्मीद से नीतीश कुमार इलाकाई दलों के नेताओं से लगातार मिल रहे हैं. नीतीश को पता है कि दिल्ली तक पहुंचने के लिए उत्तर प्रदेश समेत कुछेक राज्यों में महागठबंधन को कामयाब बनाना जरूरी है.

नीतीश और नरेंद्र मोदी की सियासी खुन्नस काफी पुरानी है और मोदी प्रधनमंत्री बन गए हैं लेकिन नीतीश ने कभी भी खुद को मोदी से कमतर नहीं माना है. नीतीश कुमार भले ही बार-बार सफाई देते रहें कि उन्हें प्रधनमंत्री की कुर्सी की चाहत नहीं हैं, पर पिछले लोकसभा चुनाव से पहले 6 मार्च 2014 को उनके मन में दबी चाहत निकल कर बाहर आ गई थी. बिहार के बगहा जिला में संकल्प यात्रा के जलसे में उन्होंने कहा था कि जो लोग प्रधनमंत्री की दावेदारी लेकर टहल रहे हैं, वह उनसे ज्यादा काबिल और अनुभवी हैं. नीतीश ने नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा था कि एक उम्मीदवार को संसद और दूसरे को राज्य का तर्जुबा नहीं है. अपने को दोनों से बेहतर सबित करने के लिए उन्होंने कहा कि उन्हें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को चलाने का अनुभव है. 

साल 2012 में नरेंद मोदी के लगातार तीसरी बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही नीतीश उनसे कन्नी कटाने लगे थे. मोदी को उनकी जीत पर बधाई न देकर नीतीश ने अपनी खुन्नस को सबके सामने जाहिर भी कर दिया था. मोदी की जीत के बाद भाजपा में उनकी मजबूत होती हैसियत से नीतीश को उस समय ही अहसास हो गया था कि 2014 के लोकसभा चुनाव में राजग के प्रधनमंत्री के तौर पर नीतीश की दावेदारी को मोदी से तगड़ी चुनौती मिल सकती है. हालांकि 2002 में गुजरात में हुए गोधरा कांड के बाद से नीतीश को लगने लगा कि नरेंद्र मोदी के साथ मंच शेयर करने या उनके साथ फोटो खिंचवाने से उनका मुस्लिम वोट छिटक सकता है.

इसी वजह से साल 2009 में लुधियाना में हुए एनडीए की रैली में मोदी-नीतीश के हाथ मिलाए फोटो की वजह से पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान काफी बवाल मचा था. नीतीश ने भी उस फोटो के अखबारों में छपने पर खुल कर नाराजगी जाहिर की थी. 12 जून 2010 को नीतीश ने पटना में राजग की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद भोज का आयोजन किया था, पर उसमें नरेंद्र मोदी के आने की वजह से भोज को रद्द कर अपनी किरकिरी भी करा चुके हैं.

मोदी को मात देने की मुहिम में लगे नीतीश पिछले साल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद से ही लगातार आप के अरविंद केजरीवाल, असम के तरूण गोगई, शिवसेना के रामदास कदम, रांकपा के शरद पवार, तृणमूल की ममता बनर्जी, वामपंथी सीताराम येचुरी, जनता दल के एचडी देवेगौड़ा, इनेलो के अभय चैटाला, झारखंड विकास मोर्चा के बाबूलाल मरांडी, झामुमो के हेमंत सोरेन, अगप के प्रफुल्ल कुमार महंत, अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल जैसे नेताओं से लगातार संपर्क में हैं. अपने शपथ ग्रहण समारोह में वह एक मंच पर 9 राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित 15 दलों के नेताओं को खड़ा कर चुके हैं. इन 15 दलों के पास राज्य सभा की केल 244 सीटों में से 132 पर कब्जा है. इस हिसाब से मोदी विरोधी दलों को राज्य सभा में पूरा बहुमत है. इससे साफ हो जाता है कि नीतीश अपने धुर प्रतिद्वंद्वी नरेंद्र मोदी को मजबूत चुनौती देने के साथ उन्हें बेचैन करने की बिसात बिछाने में लगे हुए हैं.

जदयू के विधन पार्षद रणवीर नंदन कहते हैं कि बिहार में महागठबंधन को कामयाबी मिलने के बाद पश्चिम बंगाल, असम, तामिलनाडु, पंजाब ओर उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में इस तरह के प्रयोग का रास्ता साफ हुआ है. बिहार में महागठबंधन ने नरेंद्र मोदी की लोकसभा चुनाव वाली चमक को काफी पफीका कर दिया है. इसलिए जदयू अब साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक नीतीश कुमार के कद को नरेंद्र मोदी की तरह राष्ट्रीय स्तर का बनाने कसरत में लग गया है.

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