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जीत के लिए हवन

मध्य प्रदेश में पूजापाठ का दौर अब शबाब पर है. भजभज मंडली के कर्ताधर्ता पूजापाठ, यज्ञ, हवन करने का कोई मौका नहीं छोड़ते, उन्हें बस बहाना चाहिए. इस दफा क्रिकेट के टी 20 वर्ल्ड कप में देश की जीत के लिए उन्होंने सरेराह सड़क पर गेंदबल्ला सामने रख हवन कर डाला, तो उन पर तरस आना कुदरती बात थी.

हिम्मत ने दिलाई वरदी वालों को सजा

बीकौम की छात्रा स्मिता भादुड़ी न तो कोई पेशेवर अपराधी थी और न ही किसी थाने में उस के खिलाफ कोई केस दर्ज था. उस का गुनाह महज इतना था कि वह अपने दोस्त के साथ कार में बैठ कर बातें कर रही थी. बदमाशों की सूचना पर वहां पहुंचे तथाकथित बहादुर पुलिस वालों ने जोश में आ कर सरकारी असलहे से गोलियां दाग दीं. एक गोली ने स्मिता का सीना चीर दिया. पुलिस वालों ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि उन के सिर पर ऐनकाउंटर के बदले मैडल और प्रमोशन पाने का जुनून सवार था. बेगुनाह छात्रा की हत्या का मामला सीबीआई को दिया गया. आखिरकार 3 पुलिस वालों को कुसूरवार मान कर उन्हें माली जुर्माने के साथसाथ उम्रकैद की सजा सुनाई गई.

इसे लाचारी, इंसाफ की राह में कानूनी दांवपेंच की चाल कहें या कुछ और, अपनी होनहार बेटी स्मिता को खो चुके परिवार को इंसाफ के लिए 15 साल का लंबा, थकाऊ और पीड़ा देने वाला इंतजार करना पड़ा. ऐनकाउंटर में शामिल पुलिस वाले इस दौरान न केवल आजाद रहे, बल्कि बचने के लिए तरहतरह के हथकंडे अपनाते रहे. इतना ही नहीं, लंबे वक्त में मजे से नौकरी कर के वे अपने पदों से रिटायर भी हो गए.

पुलिस के डरावने चेहरे से रूबरू हुए स्मिता के परिवार के दर्द का हिसाब शायद कोई कानून नहीं दे सकता है. कुसूरवार पुलिस वाले अब सलाखों के पीछे हैं. इस मामले से सीख भी मिलती है कि किसी की जान की कीमत पर मैडल व प्रमोशन पाने की ख्वाहिश देरसवेर सलाखों के पीछे पहुंचा कर भविष्य अंधकारमय भी कर देती है.

यों मारी गई होनहार छात्रा

स्मिता ऐनकाउंटर मामला रोंगटे खड़े कर देता है. स्मिता भादुड़ी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की मोदी कालोनी में रहती थी. उस के पिता एसके भादुड़ी मोदी कंपनी में बतौर इंजीनियर थे. उन के परिवार में पत्नी प्रतिमा के अलावा 2 बेटियां थीं, बड़ी प्रीति और छोटी स्मिता. उन का एक बेटा सुप्रियो भी था. 21 साला स्मिता बीकौम के आखिरी साल की छात्रा थी. स्मिता की दोस्ती मोहित त्योगी से थी. दोनों के बीच मुलाकातें होती रहती थीं. साल 2000 में 14 जनवरी की सर्द शाम थी वह. स्मिता अपने घर से मोहित से मिलने के लिए निकली. वे दोनों कार नंबर यूपी15जे-0898 से घूमने निकल गए.

दिल्लीदेहरादून हाईवे से सटे गांव सिवाया की कच्ची सड़क पर कार रोक कर वे बातें करने लगे. वहां कार खड़ी देख किसी ने बदमाश होने के शक में पुलिस को खबर दे दी. इसी बीच शाम के तकरीबन साढ़े 7 बजे इलाकाई थाना दौराला इंस्पैक्टर अरुण कौशिक, सिपाही भगवान सहाय व सुरेंद्र के साथ जीप ले कर वहां पहुंच गए. उन्होंने सोचा कि कोई बड़ा गैंग होगा. अपने पीछे पुलिस की गाड़ी देख मोहित ने कार आगे बढ़ा दी. इस पर पुलिस वालों ने पीछा करते हुए एकसाथ 11 गालियां दाग दीं. गोलियां कार पर भी लगीं और एक गोली ने स्मिता के सीने को चीर दिया. कुछ ही देर में उस की मौत हो गई.

बुरी तरह घबराया मोहित कार रोक कर सरैंडर करने की मुद्रा में फौरन बाहर आ गया. पुलिस वालों ने उसे पीटपीट कर दोहरा कर दिया. इस बीच इंस्पैक्टर अरुण कौशिक ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी थी कि बदमाशों से मुठभेड़ हो गई है और दोनों तरफ से गोलीबारी हो रही है. मौके पर पहुंचे तब के एसएसपी आरपी सिंह को भी गुमराह करने की कोशिश की गई, लेकिन दहशतजदा मोहित की जबानी हकीकत खुलते ही सभी के होश उड़ गए. छींटदार सलवारसूट व सफेद रंग का कार्डिगन पहने खून से लथपथ स्मिता कार की सीट पर पड़ी थी. नासमझी का परिचय दे कर इंस्पैक्टर ने खून से अपने हाथ रंग लिए थे. बेगुनाह छात्रा की मौत पर तीनों पुलिस वालों को फौरन सस्पैंड कर दिया गया.

जिन दिनों यह ऐनकाउंटर हुआ था, उन दिनों पुलिस वालों के सिर पर जुनून सवार था कि ऐनकाउंटर करो और प्रमोशन पाओ. दरअसल, पुलिस की नौकरी में थोड़ी बहादुरी से प्रमोशन पा लिया जाता था. इंस्पैक्टर अरुण कौशिक भी इसी फोबिया के शिकार थे. पुलिस ने समझदारी दिखाई होती, तो स्मिता आज जिंदा होती. चश्मदीद गवाह मोहित की तरफ से इंस्पैक्टर अरुण कौशिक, सिपाही भगवान सहाय व सुरेंद्र के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया. खाकी पर खून के छींटे लगने का मामला तूल पकड़ गया. तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया.

इंसाफ की लंबी लड़ाई

यह मामला उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तक पहुंचा, तो केस सीबीआई को चला गया. सीबीआई 3 साल तक जांच करती रही. इस बीच तीनों आरोपी जेल से छूट गए और बहाली पा कर नौकरी करने लगे. इतना ही नहीं, इंस्पैक्टर अरुण कौशिक सीओ भी बन गए. केस वापस लेने के लिए सीबीआई ने 26 फरवरी, 2004 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की. अदालत में सुनवाई कई साल चलती रही. आरोपी पुलिस वालों ने पीडि़त परिवार पर कई तरह से दबाव बनाया. मोहित को डरायाधमकाया गया, लेकिन इंसाफ की आस में उस ने हार नहीं मानी. तीनों आरोपियों ने मामले को खत्म करने के लिए हाईकोर्ट से स्टे ले लिया और मजे से नौकरी की. आरोपियों ने कानूनी हथकंडे अपना कर अदालत बदलने की मांग की और कई सुनवाई पर पेश नहीं हुए. नौकरी कर के तीनों रिटायर भी हो गए.

सालों चले केस में गाजियाबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने हत्या, जानलेवा हमले व मारपीट का कुसूरवार करार देते हुए आखिरकार 14 दिसंबर, 2015 को तीनों आरोपियों को उम्रकैद व डेढ़डेढ़ लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई. जज नवनीत कुमार ने अपनी टिप्पणी में कहा कि मामला विरल से विरलतम अपराध की श्रेणी में आता है. वरिष्ठ लोक अभियोजन अधिकारी कुलदीप पुष्कर की इस मामले में अदालत में दी गई यह दलील माने रखती है कि पुलिस का काम कानून का पालन करना और कराना है. अगर पुलिस ही कानून का पालन न करे और कानून का गलत इस्तेमाल कर किसी की हत्या कर दे, तो ऐसे हालात में समाज में दहशत फैलती है. कुसूरवार पुलिस वालों पर आरोप साबित होने में 15 साल, 9 महीने और 16 दिन लग गए. सजा होते ही तीनों को डासना जेल भेज दिया गया.

दर्द से गुजरा परिवार

बेटी की मौत से दुखी भादुड़ी परिवार जिस गम, दहशत और दर्द के दरिया से गुजरा, उस की भरपाई कानून की कोई धारा नहीं करती. पुलिस का घिनौना रूप आज भी उन्हें डराने का काम करता है. उन चंद लफ्जों ने इंजीनियर एसके भादुड़ी की दुनिया हिला दी थी, जब एक पुलिस अफसर ने उन से कहा, ‘आप की बेटी को पुलिस ने गलती से गोली मार दी है और उस की मौत हो गई है.’

उस रात की यादें कोई नहीं भुला पाता. सिरफिरे पुलिस वालों की करतूत से हंसतेखेलते परिवार पर स्मिता की मौत के साथ ही गम व मुसीबतों का पहाड़ टूट गया. बेटी स्मिता की मौत के गम में मां प्रतिमा भादुड़ी डिप्रैशन में आ गईं. लाख समझाने पर भी वे बेटी का दर्द नहीं भुला सकीं. ज्यादा दवाओं के सेवन से उन का लिवर खराब हो गया. वे बीमार हुईं, तो इलाज कराया गया. परिवार माली रूप से परेशान हो गया. बाद में साल 2011 में उन की मौत हो गई. स्मिता का भाई सुप्रियो ग्राफिक डिजाइनर है. दोनों बापबेटे अकेले रहते हैं. अदालत के फैसले से वे खुश तो हैं, लेकिन कहते हैं कि ऐसा करने वालों को फांसी होनी चाहिए थी.               

क्या सबक लेगी पुलिस

स्मिता का मामला उन पुलिस वालों के लिए एक सबक है, जो वरदी की हनक में बिना सोचेसमझे कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं. मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में अव्वल दर्जा हासिल कर रही उत्तर प्रदेश पुलिस में ऐसे पुलिस वालों की एक बड़ी जमात है, जो गंभीर आरोपों से दामन दागदार किए हुए है. उन के कारनामे जनता में डर पैदा करते हैं. पुलिस से आम आदमी कितना सुरक्षित महसूस करता है, इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग आज भी थाने में आने से डरते हैं. पुलिस अगर बेगुनाहों के खून से हाथ रंगने लगे, तो बात सोचने वाली हो जाती है. स्मिता का मामला सबक जरूर देता है कि गलत कामों की सजा देरसवेर मिलती जरूर है. इस मामले में पुलिस वाकई सबक लेगी, इस में शक है.

साइज जीरो की देन ऐनोरैक्सिया

फैशन की दुनिया में फ्रांस पूरे विश्व की अगुआई करता है. लेकिन फ्रैंच सरकार ने हाल ही में एक ऐसा फैसला किया, जिस के कारण अब जल्द ही फैशन की दुनिया में खूबसूरती के पैमाने बदल जाएंगे. दरअसल, फ्रांस में साइज जीरो मौडल और मौडलिंग पर प्रतिबंध लग गया. फैशन और खूबसूरती को केंद्र में रख कर दुनिया में चलने वाले उद्योग के लिए अपनेआप में यह बहुत बड़ा फैसला है. हालांकि इस से पहले 2006 में इटली और स्पेन में और 2013 में इसराईल में भी साइज जीरो पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है. लंदन फैशन वीक में साइज जीरो ले कर जीरो टौलरैंस की चर्चा हुई थी. लेकिन इस पर चर्चा आम नहीं हुई. अब जब फ्रांस ने यह फैसला किया है तो हर तरफ चर्चा हो रही है. इस की वजह यह है कि फ्रांस या कहें पैरिस ही फैशन का पैमाना तय करता रहा है. इसी कारण दुनिया की फैशन इंडस्ट्री एक हद तक इस से स्तब्ध भी है.

दरअसल, प्रतिबंध लगाते हुए फ्रांस की सरकार ने संसद में इस सिलसिले में एक बिल भी पास किया है, जिस में सरकार की ओर से कहा गया है कि जिन मौडल्स का बीएमआई यानी बौडी मास इंडैक्स एक तय पैमाने से कम है, उन के जरीए अपने उत्पाद का प्रचार नहीं किया जा सकेगा और न ही उन्हें फैशन शो का हिस्सा बनाया जा सकता. इस संबंध में हाल ही के दिनों में फ्रांस सरकार ने अपनी संसद में एक कानून भी पास किया है. इस कानून का उल्लंघन होने पर 6 महीने तक की सजा का प्रावधान किया गया है. इतना ही नहीं सजा के साथसाथ 75 हजार यूरो यानी लगभग क्व50 लाख तक जुर्माना भी हो सकता है.

मौडलों के लिए सरकारी निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि मौडलिंग कैरियर शुरू करने से पहले सेहत के लिए सरकारी जांच से गुजरना होगा. जांच में मौडल की लंबाई और लंबाई के अनुपात में वजन और चेहरे के गठन की जांच करानी होगी. इस के बाद एक फिटनैस सर्टिफिकेट दिया जाएगा. इस के बगैर कैरियर की शुरुआत नहीं हो सकती. बगैर इस सर्टिफिकेट के किसी मौडल को असाइन नहीं किया जा सकता. अगर कोई मौडल इस सर्टिफिकेट के बगैर काम करती है तो उस पर लगभग क्व2 लाख 70 हजार का जुर्माना होगा. वहीं एजेंसी के लिए कहा गया है कि किसी विज्ञापन में अगर मौडल की फिगर को स्पैशल इफैक्ट के जरीए छरहरा दिखाया जा रहा है तो स्पष्ट शब्दों में यह लिखा होना चाहिए. इस का उल्लंघन करने पर विज्ञापन एजेंसी के खिलाफ काररवाई के तहत जेल या जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं. यहां तक कि इंटरनैट पर किसी वैबसाइट को साइज जीरो या ऐनोरैक्सिया का समर्थन करते पाया गया तो इसे भी कानूनन अपराध माना जाएगा.

साइज जीरो

मोटेतौर पर साइज जीरो का आशय सब जान चुके हैं. यह जीरो फिगर का पर्याय बन चुका है. लेकिन यह साइज जीरो आखिर है क्या? दरअसल, यह जीरो साइज महिलाओं की ड्रैस का साइज है. मोटे तौर परमहिलाओं की फिगर का माप छाती, कमर और नितंबों से लिया जाता है. एक आदर्श फिगर का मानदंड क्रमश:

30-22-32 इंच (76-56-81 सैंमी.) से ले कर 33-25-35 इंच (84-64-89 सैंमी.) के बीच माना जाता है.

बहरहाल, इस प्रतिबंध के बाद फ्रांस में इस का काफी विरोध किया जा रहा है. विरोध में तर्क दिया जा रहा है कि ऐनोरैक्सिया और छरहरी काया एक नहीं हैं. ऐनोरौक्सिया एक तरह की बीमारी है, तो छरहरी काया शारीरिक गठन है. जबकि एक संतुलित पैमाने के अनुसार 5 फुट 7 इंच की लंबाई के लिए आदर्श वजन 55 किलोग्राम माना गया है.

क्या है ऐनोरैक्सिया

गौरतलब है कि आजकल लड़कियां अपनी फिगर को ले कर अत्यधिक सचेत हैं. इन में से बहुत सारी ऐनोरैक्सिया से पीडि़त हो जाती हैं. ऐनोरैक्सिया वह मैडिकल स्थिति है, जिस में भूख बिलकुल मर जाती है. यह अपनेआप में पूरी तरह से कोई बीमारी नहीं है. इसे एक तरह का भावनात्मक विकार माना गया है, जिस में मोटा हो जाने के भय के कारण व्यक्ति खाना खाने से कतराता है. तब यह ऐनोरैक्सिया नर्वोसा कहलाता है. यह इटिंग डिसऔर्डर भी कहलाता है. इस तरह का डिसऔर्डर लड़कों के बजाय ज्यादातर लड़कियों में ही पाया जाता है. ऐसी लड़कियां खाना खाने के बाद उलटियां करने लगती हैं ताकि शरीर में फैट न जमा हो.

ऐनोरैक्सिया की शिकार

इस डिसऔर्डर से मरने वाली मौडलों की सूची बहुत लंबी है. बताया जाता है कि अब तक इस बीमारी से लगभग 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. कुछ समय पहले इस तथाकथित साइज जीरो डाइट ने ब्राजीलियन मौडल अना कैरोलिना रेस्टन की जान ले ली थी. उन का कोई डाइट चार्ट नहीं था. वे केवल और केवल सेब और टमाटर खाती थीं.

इसी तरह ऐनोरैक्सिया की ताजा शिकार हैं कैलिफोर्निया की मशहूर मौडल रशैल फराक. वे लगातार मौत की ओर बढ़ रही हैं. लंबे समय से वे ऐनोरैक्सिया नर्वोसा से पीडि़त हैं. 37 साल की फराक का वजन महज 18 किलोग्राम है. इस वजन के साथ कोई अस्पताल भी उसे भरती करने को तैयार नहीं है. हालांकि इलाज चल रहा है. लेकिन यह काफी महंगा है. सोशल मीडिया में रशैल फराक के इलाज के लिए फंड इकट्ठा किया जा रहा है. रशैल को अपनी गलती का एहसास हो गया है और वे फिर से स्वस्थ होना चाहती हैं. लेकिन इलाज का खर्च उठाना उन के बस की बात नहीं है. इसीलिए विभिन्न सोशल मीडिया में रशैल फराक ने यह कहते हुए अपील की है कि मेरा नाम रशैल है. मेरी मदद कीजिए. मुझे आप की मदद की सख्त जरूरत है. रशैल और उस के पति ने एक ‘गो फंड मी’ नाम का एक पेज भी बनाया है. इस पेज के जरीए दुनिया भर से मदद की अपील की गई है. मगर कोलंबिया विश्वविद्यालय में इटिंग डिसऔर्डर पर शोध करने वाली विशेषज्ञों की एक टीम का कहना है कि भले ही इलाज के लिए फंड इकट्ठा हो जाए, पर रशैल की हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि उस के ठीक होने में शक है.

डाइट के फेर में

वैसे छरहरा होने की चाह केवल लड़कियों में ही नहीं होती. एक ब्रिटिश रोमांटिक कवि लौर्ड बायरन को भी थी. छरहरी काया की चाह में ये ब्रिटिश कवि साल के हर मौसम में पसीना बहा कर दुबला होने की चाह में ऊनी कोट पहना करते थे. सुबह नाश्ते में वे ब्रैडस्लाइस का एक टुकड़ा और 1 कप चाय, शाम को 1 कप ग्रीन टी और डिनर में थोड़ी सी सब्जी लेते थे. 1806 में लौर्ड बायरन का वजन 88 किलोग्राम था, जो 1811 में घट कर 57 किलोग्राम रह गया.

आस्ट्रिया के सम्राट फ्रांत्स जोसेफ की प्रेमिका ऐलिजाबेथ बन विटेल्सबाथ ने कभी अपना वजन 48 किलोग्राम से अधिक नहीं होने दिया. बताया जाता है कि वे खाने में केवल संतरा और दूध लेती थी. रोज अपनी कमर का माप लिया करती थीं. वजन जरा भी अधिक हो तो खानापीना बंद कर देती थीं. इसी तरह लेडी डायना भी अपनी फिगर को ले कर बहुत सचेत थीं. बहुत नापतौल कर खाना खाती थीं. हालिया साइज जीरो कौन्सैप्ट की शुरुआत पश्चिम में हुई. हौलीवुड अभिनेत्रियां केटी मौस, जेडी किड, सारा जेसिका, केट बोसवर्थ, एलेक्सा चुंग, निकोल रित्शे अपने जीरो साइज के लिए जानी जाती हैं. लेकिन यही साइज जीरो आज पश्चिम फैशन दुनिया के गले की फांस बन चुका है. पर अब इस से पीछा छुड़ाने का जुगाड़ शुरू हो गया है. जहां एक तरफ एक के बाद एक देश साइज जीरो पर प्रतिबंध लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अरमानी, विक्टोरिया बेकहैम जैसे नामीगिरामी फैशन हाउसों ने साइज जीरो मौडल से काम न कराने का फैसला कर लिया है.

पश्चिम की फैशन दुनिया से भारत में भी साइज जीरो का चलन शुरू हुआ. करीना कपूर खान साइज जीरो की पर्याय बनीं. इस के बाद कैटरीना कैफ, प्रियंका चोपड़ा से ले कर दीपिका पादुकोण तक बहुत सारी अभिनेत्रियां इस राह पर चलीं. लेकिन हमारे यहां विद्या बालन, सोनाक्षी सिन्हा, परिणीति चोपड़ा, हुमा कुरैशी, सनी लियोनी ने साइज जीरो न होते हुए भी दर्शकों के दिलों में जगह बनाई है.

किचन टाइल्स साफ करें ऐसे

किचन को रोज पूरी तरह से साफ करना हर किसी के लिए मुश्किल होता है. ऐसे में किचन फ्लोर और किचन वाल टाइल्स पर गंदगी जमा होने लगती है और जब सफाई करने की बारी आती है तो समझ में नहीं आता कि इसे कैसे साफ करें.

जानिए, कुछ आसान उपाय जो टाइलों पर जमा गंदगी साफ करने में आप की सहायता करेंगे:

किचन फ्लोर की सफाई

  1. किचन फ्लोर पर रोज पोंछा लगाएं. पोंछे के पानी में डिटर्जैंट या कीटाणुनाशक का प्रयोग जरूर करें. यह ध्यान रखें कि जिस कपड़े से पोंछा लगा रही हैं, वह साफ हो और इस्तेमाल के बाद भी उसे अच्छी तरह धो लें.
  2. यदि आप के घर में चींटियां हों, तो पोंछे के पानी में 1 बड़ा चम्मच नमक डाल लें.
  3. यदि आप कुछ दिनों के बाद फर्श साफ कर रही हैं, तो पोंछा गरम पानी से लगाएं.
  4. पोंछा लगाने के बाद फर्श को दूसरे सूखे पोंछे से साफ करें. इस से फर्श चमक उठेगा और फर्श पर धूल भी नहीं जमेगी.
  5. यदि फर्श पर कुछ गिर जाए तो उसे तुरंत साफ करें. वहां दाग न बनने दें.

सफाई किचन की टाइलों की

किचन की टाइलों को आप निम्न घरेलू चीजों से भी साफ कर सकती हैं:

  1. सिरका: 2 कप सिरका और 2 कप पानी को मिला कर स्प्रे बोतल में भर लें. फिर इसे टाइलों पर स्पे्र कर माइक्रो फाइबर कपड़े से साफ करें. यह कपड़ा दूसरे किसी भी कपड़े की तुलना में गंदगी को ज्यादा अच्छी तरह अवशोषित कर लेता है और इस से सतह पर खरोंचें भी नहीं पड़तीं.
  2. बेकिंग सोडा: बेकिंग सोडे का इस्तेमाल कर आप टाइलों पर लगे दागों से आसानी से छुटकारा पा सकती हैं. बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट बना लें और फिर उसे दागों पर लगाएं. 10-15 मिनट तक सूखने दें. फिर गीले कपड़े से साफ करें. यदि दाग फिर भी साफ न हों तो किसी पुराने टूथब्रश से रगड़ कर साफ करें.
  3. ब्लीच या अमोनिया: यदि आप को अपनी टाइलों पर कीटाणु दिखाई दें, तो ब्लीच और पानी को समान मात्रा में मिला लें. इस मिश्रण को कीटाणु वाली सतह पर गोलाकार मुद्रा में लगाएं. अब टाइलों को गरम पानी से साफ करें. इस के बाद सूखे कपड़े से साफ कर लें. याद रखें ब्लीच का इस्तेमाल करने से पहले हाथों में दस्ताने जरूर पहन लें

ध्यान रखें

  1. टाइल्स को साफ करने के लिए कभी तेजाब या अन्य हार्ड लिक्विड क्लीनर का प्रयोग न करें.
  2. यदि रोज किचन वाल टाइल्स साफ करती हैं तो पानी में थोड़ा सा डिटर्जैंट मिला कर साफ करें.
  3. टाइल्स को लोहे की जाली से रगड़ कर साफ करने की कोशिश न करें.

मेकअप ट्रिक्स फौर औयली स्किन

गरमी का मौसम आते ही धूप, धूलमिट्टी और पसीने से त्वचा चिपचिपी होने लगती है. ऐसे मौसम में औयली स्किन और भी ज्यादा औयली और चिपचिपी होने लगती है. ऐसी त्वचा की खूबसूरती निखारने के लिए ब्यूटी टिप्स बता रही हैं मेकअप आर्टिस्ट पिंकी चावला:

औयली स्किन मेकअप: औयली स्किन वाली महिलाएं गरमी के मौसम को भी अन्य मौसमों की तरह ऐंजौय कर सकती हैं. स्किन चाहे कैसी भी हो अगर खूबसूरती को निखारने के लिए आप समर में कुछ स्पैशल ट्रिक्स का इस्तेमाल करेंगी, तो आप की त्वचा भी रहेगी फ्रै श और सुंदर.

स्किन क्लीनिंग पर दें ध्यान: मेकअप करने से पहले चेहरे को धोएं और स्क्रब करें. फिर उसे क्लींजर, क्लींजिंग मिल्क से साफ करें. क्लींजर त्वचा को गहराई से साफ तो करते ही हैं साथ ही अतिरिक्त औयल को भी औब्जर्ब कर लेते हैं. मेकअप करने से पहले अपने चेहरे को अलकोहल फ्री टोनर से साफ करें. इसे क्लींजर से चेहरा साफ करने के 5 मिनट बाद ही लगाएं.

फेस मेकअप: स्किन में ऐक्स्ट्रा शाइन लाने के लिए औयल फ्री, चिकनाई सोखने वाले फाउंडेशन और टिंटेड मौइश्चराइजर का प्रयोग करें. औयली स्किन पर मेकअप से पहले ऐंटीशाइन प्राइमर लगाएं. जरूरत के अनुसार इसे दोबारा भी लगा सकती हैं.

मौइश्चराइजर व फाउंडेशन: अगर आप अच्छी क्वालिटी का मौइश्चराइजर लगाएंगीतो मेकअप ज्यादा देर तक टिका रहेगा और आप का लुक भी बेहतर लगेगा. हमेशा औयल फ्री या वाटर बेस्ड मौइश्चराइजर का प्रयोग करें. औयल फ्री फाउंडेशन त्वचा के ओपन पोर्स को पूरी तरह ढक देता है. अच्छे रिजल्ट के लिए इसे थोड़े से मौइश्चराइजर के साथ मिला कर चेहरे पर ब्रश या उंगलियों की मदद से लगाएं.

ट्रांसल्यूशन पाउडर: फाउंडेशन लगाने के बाद ट्रांसल्यूशन पाउडर लगाएं. इसे फाउंडेशन लगाने के करीब 10 मिनट बाद लगाएं. ट्रांसल्यूशन पाउडर लाइट कलर का ही हो. इस से फोरहौड, चीक्स और नोज को हाईलाइट करें.

कंसीलर: औयली स्किन पर अधिकतर पिंपल्स व मार्क्स होते हैं. ऐसे में अपनी स्किनटोन से मिलताजुलता कंसीलर पिंपल्स व मार्क्स पर ब्रश या उंगलियों से थपथपाते हुए लगाएं ताकि वे छिप जाएं.

औयल ब्लौटिंग शीट: अपने पास हमेशा औयल ब्लौटिंग शीट रखें. इस से आप आराम से फेस पर आए ऐक्स्ट्रा औयल को औब्जर्ब कर सकती हैं.

आईज मेकअप: गरमी में पसीने की वजह से आईज मेकअप ज्यादा देर न टिक फैल जाता है. इस के लिए आप मोबिलीन न्यूयौर्क वौल्यूम ऐक्सप्रैस मसकारा और यार्डले ऐक्टिव लैश मसकारे का प्रयोग करें. यह आप की आईलैशेज को घना दिखाने के साथसाथ देर तक टिका भी रहेगा. आईब्रो पैंसिल से आंखों को सही आकार दें और आईशैडो लाइट ब्राउन या ग्रे ही लगाएं. इस में आईज अट्रैक्टिव लगेंगी.

चीक्स मेकअप: औयली स्किन के लिए लिक्विड ब्लशर का इस्तेमाल करें. यह चीक्स पर एकसार सा लगेगा और फैलेगा भी नहीं. इसे ब्रश की सहायता से चीक्सबोंस से ले कर कनपटियों तक फैला कर लगाएं. यह स्किन को अलग ही ग्लो देगा.

लिप्स मेकअप: गरमी के मौसम में अपने लिप्स पर लिपबाम और पैट्रोलियम जैली लगाना न भूलें. इन्हें लगाने से लिप्स स्मूद रहते हैं और लुक भी बेहतर रहता है.

औयली स्किन होने के कारण

अन्य स्किन की तुलना में औयली स्किन वाली महिलाएं अधिक उम्र तक जवां दिखती हैं. ऐसी स्किन पर रिंकल्स, फाइन लाइन आदि पड़ने की संभावना जल्दी नहीं रहती है. लेकिन औयली स्किन बहुत जल्दी शाइन करने लगती है, जिस से मेकअप बहुत ही जल्दी उतर जाता है. ऐसी स्किन पर पिंपल्स और ऐक्ने जल्दी होते हैं. औयली स्किन के कारणों को जान कर उन का समाधान करें.

जैनेटिक्स: त्वचा के प्रकार निर्धारण करने में जैनेटिक्स महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अगर आप की फैमिली में किसी की स्किन औयली होगी तो वह आप की स्किन पर भी प्रभाव डालेगी. वह आप की स्किन के पोर्स से अधिक से अधिक औयल छोड़ेगी.

अधिक मात्रा में प्रयोग: हम सभी अपनी स्किन को साफ, सौम्य और सुंदर बनाने के लिए ब्यूटी प्रोडक्ट्स का प्रयोग करते हैं. लेकिन अत्यधिक क्रीम, जैल, कैमिकल पील आदि से स्किन में औयल पैदा होता है जिस से स्किन औयली होती है.

मौसम का बदलाव: मौसम का बदलना भी औयली स्किन का कारण होता है. गरम और उमस वाला मौसम औयल के लैवल को बढ़ाता है. गरम और ठंडे मौसम में जब ज्यादा औयल निकलता है, तो स्किन को ड्राई होने से बचाता है और औयली स्किन को और ज्यादा औयली कर देता है.

हारमोनल बदलाव: यौवन, गर्भावस्था, रजोनिवृत्ति हारमोन की अस्थिरता को बढ़ावा देते हैं. ऐसे समय में महिलाओं के शरीर से अधिक औयल का उत्पादन होता है.

दवा: अत्यधिक औयली स्किन दवा के सेवन से भी होती है. जैसे हारमोनल बर्थ कंट्रोल पिल्स और हारमोनल रिप्लेसमैंट दवाओं से. सुंदर त्वचा और अच्छी सेहत के लिए ऐसी दवाओं का सेवन डाक्टर की सलाह से व कम से कम करें.

तनाव: तनाव शरीर पर बहुत प्रभाव डालता है. जब तनाव होता है उस समय भी औयल का उत्पादन ज्यादा होता है, जिस से स्किन औयली हो जाती है.

औयली स्किन की बेसिक देखभाल

  1. एक बोतल में एकतिहाई गुलाबजल, एकतिहाई विज हैजल और एकतिहाई डिस्टिल वाटर मिलाएं. फिर बोतल को फ्रिज में रख दें. जरूरत के अनुसार त्वचा पर लगा कर फ्रैश हो जाएं.
  2. औयली स्किन वाली महिलाएं हमेशा मुंह धोने के लिए कुनकुने पानी का इस्तेमाल करें. कुनकुना पानी चेहरे पर जमी गंदगी को बेहतर ढंग से साफ करता है.
  3. औयली स्किन वाली महिलाएं नियमित रूप से त्वचा की साफसफाई करें. दिन में 2 बार पूरे फेस को अच्छी तरह साफ करें ताकि औयल कम हो सके.
  4. चेहरे पर बहुत ज्यादा स्क्रब न करें. हफ्ते में 2-3 बार ही करें.
  5. समयसमय पर नैचुरल फेस मास्क का प्रयोग करेें. यह फेश से ऐक्स्ट्रा औयल को सोख लेता है और चेहरे से हार्मफुल बैक्टीरिया को भी हटाता है.

न करें ये फैशन मिस्टेक

दिल्ली शहर फैशनपरस्त महिलाओं का है. खासतौर पर दिल्ली मैट्रो का महिला कोच. रोजाना 20 मिनट के सफर में मैट्रो में कई नए फैशन से रूबरू हुआ जा सकता है. मार्केट में क्या लेटैस्ट है, मैट्रो में मौजूद लड़कियों के पहनावे को देख कर ही पता चल जा मैट्रो में एक लड़की को देख कर पता चला कि क्रौप टौप की तरह क्रौप जैकेट्स भी फैशन में हैं. लेकिन जैसे ही वह लड़की मैट्रो से उतरी तो लोगों की मुसकराहट का सबब बन गई. वजह जैकेट ही थी. दरअसल, उस लड़की की जैकेट इतनी छोटी थी कि जरा सा भी हाथ ऊपरनीचे करते ही जैकेट के नीचे पहना इनर दिखने लग जाता था. अब स्टाइलिश जैकेट की ही तरह स्टाइलिश इनरवियर भी ले लेती तो उसे फैशन डिजास्टर का शिकार न होना पड़ता.

एक छोटी सी फैशन मिस्टेक पूरे लुक की धज्जियां उड़ा देती है. फैशन डिजाइनर विनीता पाणिग्रही कहती हैं कि फैशन को आजमाने से पहले उसे समझने की जरूरत होती है. यदि ऐसा हो जाए तो फैशन ब्लंडर्स से बचा जा सकता है. वाकई, फैशनेबल बनने की होड़ में महिलाएं अकसर कौपी कैट बन जाती हैं. दूसरों की नकल कर वे खुद पर ऐसी चीजें आजमाने लगती हैं, जो उन्हें बिलकुल सूट नहीं करतीं. यहीं से शुरुआत होती है फैशन मिस्टेक्स की.

सैक्सी दिखने के लिए स्किन ऐक्सपोजर: सैक्सी लुक फैशन का एक हिस्सा है. विनीता बताती हैं कि ओवरऔल ड्रैसअप, हेयरस्टाइल, फुटवियर और परफैक्ट ऐटीट्यूड लुक को सैक्सी बनाता है न कि क्लीवेज, वेस्टलाइन और ओपन बैक का दिखावा. इस के अलावा किस अवसर पर सैक्सी दिखना चाहिए, इस बात को ले कर भी महिलाओं में काफी भ्रम है, जबकि घर से ले कर दफ्तर तक कहीं भी सैक्सी लुक अपनाया जा सकता है.

कपड़ों में न हों फिट तो कैसे होंगी हिट: कुछ महिलाओं पर फैशन का भूत इस कदर सवार रहता है कि उन के लिए शरीर का आकारप्रकार कोई माने नहीं रखता. ऐसे में कई बार आउटफिट साइज में छोटे आ जाते हैं और उन्हें पहनने से वे बौडी शेप को उभारने लगते हैं, जो भद्दा लगता है. साइज में बड़े कपड़े पहनना भी फैशन ब्लंडर्स में गिना जाता है.

ज्यादा चुस्त कपड़े हों या फिर ढीलेढाले, दोनों ही सूरत में आप की ही बौडी शेप बिगड़ती है. अत: अपने साइज के कपड़े पहनें. मोटी महिलाओं को ज्यादा टाइट कपड़े नहीं पहनने चाहिए. ज्यादा टाइट कपड़ों में न तो शरीर पतला दिखता है और न ही लुक अच्छा लगता है, उलटे इस से मांसपेशियों पर खराब प्रभाव पड़ता है. दुबलीपतली महिलाओं को बहुत स्किन टाइट कपड़े नहीं पहनने चाहिए वरना वे और भी पतली लग सकती हैं.

रंगों में फेरबदल है जरूरी: कुछ चुनिंदा रंग कुछ लोगों पर बहुत फबते हैं, लेकिन दूसरे रंगों से परहेज कर आप फैशनपरस्त लोगों की लिस्ट में खुद को शामिल नहीं कर पाएंगी.

गुलाबी रंग हर लड़की का फैवरेट होता है, लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि हर अवसर पर आप गुलाबी रंग का आउटफिट ही पहनें. रंग बदल कर पहनने से पर्सनैलिटी में निखार आता है. अवसर और जगह के हिसाब से रंगों का चुनाव आप को फैशनेबल बनाएगा. फिर भी किसी विशेष रंग को पहनने से परहेज हो तो उस के अलग शेड्स से क्या दुश्मनी? उन्हें तो ट्राई किया ही जा सकता है. लेकिन रंग में फेरबदल करने के साथ रंगों के सही कौंबिनेशन का ज्ञान भी बहुत जरूरी है. कलर सैंस होना बहुत महत्त्वपूर्ण है जैसे 2 बोल्ड कलर्स का कौंबिनेशन फैशन एरर कहलाएगा. इतना ही नहीं हर रंग के लिए एक सही समय होता है. यदि लाल रंग तेज धूप में पहन लिया जाए तो वह उस समय के हिसाब से काफी चटक है, तो पीला रंग रात में भद्दा लगता है.

गरीबी की वजह

इस देश में गुलामी, गरीबी, जाति की ऊंचनीच रखने में भाषा का बड़ा हिस्सा रहा है. पंडों ने गरीबों को सदियों से पढ़ना पाप घोषित कर रखा था और राम ने शूद्र शंबूक को मारा भी इसीलिए था कि वह पढ़ रहा था. मुगलों ने अपने कामकाज के लिए थोड़े से लोगों को पढ़ाया, पर वह नाकाफी था और हिंदू नीची जातियों को तो छोडि़ए, मुसलमान भी ज्यादातर अनपढ़ हैं. अंगरेजों ने इस बारे में उदारता बरती, पर 1857 के बाद उन्होंने समाज सुधारों का काम हिंदुस्तानियों पर छोड़ दिया और हिंदुस्तानी नेताओं ने सिर्फ ऊंची जातियों को पढ़ाया. 1947 के बाद आजादी की कुछ शर्तों या वादों में से हरेक को पढ़ाना शामिल था और चाहे सरकारी स्कूल कहिए या आरक्षण, पढ़ने का मौका बहुतों को मिला.

अब एक नई भाषा थोपी जा रही है. अंगरेजी तो पहले से ही थी, अब कंप्यूटर की भाषा थोपी जा रही है, ताकि जानकारी थोड़े से लोगों के हाथों में रहे. हर चीज को कंप्यूटर पर औनलाइन करने का मतलब है कि देश की 98 फीसदी जनता को अब न अपने बारे में कुछ पता चलेगा, न दूसरों के बारे में. उलटे अगर उन्होंने सरकारी औनलाइन भाषा में अपनी बात नहीं की तो वे सरकार की निगाहों में आदमी ही नहीं रहेंगे, आधी सदी पहले तक अछूतों की तरह. आधार कानून बनवा कर सरकार ने, इस में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों शामिल हैं, एक आदमी की मौजूदगी उस का कंप्यूटर पर होना बना दिया है. कंप्यूटर से बात करने के लिए उसे खास पंडों की जरूरत होगी, जो पहले के विघ्न खत्म करने वाले पंडों की तरह दक्षिणा ले कर काम करेंगे. किसी की भी कंप्यूटर की पत्री में गलत जानकारी डाल देना अब आसान हो गया है और एक बार जानकारी गलत डल गई, तो हजारों रुपए खर्च किए बिना ठीक न होगी.

आम गरीब अधपढ़ों को अब न मकान मिलेगा, न स्कूल में दाखिला, न सस्ती खाद, न वोटर कार्ड. अगर उन के पास कंप्यूटर पत्री नहीं होगी या उस में गलती होगी. अब कंप्यूटरों से शिकायत भी नहीं की जा सकती. पहले हाकिम से लिखवा कर काम करवाया जा सकता था, पर जम कर बनती औनलाइन सरकार में हाकिम भी कंप्यूटर के आगे फेल रहेगा. कंप्यूटर एक तरह से पिछले जन्म के पापपुण्य का फल देने वाला हो जाएगा. आम आदमी की हर गलती कंप्यूटर में दर्ज रहेगी, चाहे उस ने कल की थी या 10 साल पहले. आधार कार्ड की सहायता से कंप्यूटर पूरा कच्चाचिट्ठा रखेगा. अब हर समय बिग बौस सिर पर सवार रहेगा. खबरदार, जो कोई गलती की. केवल कंप्यूटर की भाषा जानने वाले ही इस का तोड़ निकाल सकेंगे. कंप्यूटर हैक कर के पिछलीअगली जानकारी बदली जा सकती है, पर उस के लिए जन्म महापंडित की तरह लेना होगा या महापंडित को पैसे दे कर पिछले पापों से छुटकारा पाना होगा. आम जना तो फिर गुलाम होने जा रहा है.

सुंदरता से मिलता है आत्मविश्वास: नरगिस फाखरी

फिल्म ‘रौकस्टार’ से बौलीवुड में डैब्यू करने वाली अभिनेत्री नरगिस फाखरी ने बौलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. नम्र स्वभाव और स्पष्टभाषी नरगिस ने अपने बोल्ड अंदाज के जरीए यह दिखा दिया है कि कैमरे के आगे भी वे किसी सीन को परफौर्म करने में जरा भी नहीं घबरातीं. उन्हें बोल्ड फोटोशूट से भी कोई परहेज नहीं है

आसान नहीं थी राह

अमेरिका की नरगिस फाखरी मुंबई में अकेली रहती हैं. वे अपनी मां से मिलने कभीकभी अमेरिका जाती रहती हैं, क्योंकि वे भी वहां अकेली रहती हैं. शुरू में नरगिस की मां को यहां की फिल्म इंडस्ट्री और नरगिस के काम को समझना थोड़ा मुश्किल हुआ था पर जब नरगिस ने अपनी फिल्में मां को दिखाईं, तो उन्होंने भी नरगिस का आगे बढ़ने में सहयोग किया. मुंबई आ कर खुद को सैटल करना नरगिस के लिए आसान नहीं था. 2009 के स्विमसूट कैलेंडर से उन्हें अच्छे पैसे मिले और फिर उन्होंने यहां रहने का निश्चय कर लिया. नरगिस को कैलेंडर में देख कर ही उन्हें फिल्म रौकस्टार मिली. नरगिस फाखरी अपनी सेहत का खास ध्यान रखती हैं. अपनी खूबसूरती को बनाए रखने के लिए संतुलित आहार लेती हैं और खूब पानी पीती हैं. वे कहती हैं कि ग्लैमर वर्ल्ड में हमेशा सुंदर दिखना आवश्यक है. सुंदरता से आत्मविश्वास बढ़ता है. ऐसे में अपनी सुंदरता को बनाए रखने के लिए वे फलोंसब्जियों का खूब सेवन करती हैं.

स्किन केयर जरूरी

त्वचा को चिकना और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए नरगिस क्लींजिंग, फेशियल, स्क्रब आदि का प्रयोग करती हैं. वे कहती हैं कि त्वचा हमेशा सुंदर दिखे इस के लिए यह ध्यान रखना चाहिए कि आप की त्वचा नमीयुक्त रहे. सूखी त्वचा में रैशेज दिखाई देते हैं. जब नरगिस दिनरात बाहर शूटिंग में व्यस्त रहती हैं, तो वालनट स्क्रब के द्वारा मेकअप को हटाती हैं. इस से मेकअप रोमछिद्रों से पूरी तरह बाहर निकल जाता है. साथ ही चेहरे का रक्तसंचार भी सुचारु रहता है. रात को सोते समय वे मौइश्चराइजर जरूर लगाती हैं. मल्टी कल्चरल बैकग्राउंड से होने की वजह से नरगिस के घर में बचपन से ही नैचुरल स्टफ अधिक प्रयोग किया जाता था. जब वे भारत आईं तो उन्हें लगा कि वे मदर नेचर के पास आ गई हैं, क्योंकि यहां हर वह चीज उपलब्ध है, जिसे खा कर या लगा कर आप अपनी त्वचा को सुंदर रख सकती हैं. इस के अलावा नरगिस नियमित वर्कआउट भी करती हैं. अमेरिका के न्यूयौर्क में वे काफी दूर तक टहल सकती थीं, पर भारत में ऐसा संभव नहीं है. इसीलिए वे घर पर ही डीवीडी लगा कर जुंबा वर्कआउट करती हैं.

नरगिस चूंकि ठंडी जगह से आई हैं, इसलिए भारत जैसे गरम स्थान पर अपनी त्वचा का खास खयाल रखना पड़ता है. वे उन्हीं उत्पादों का इस्तेमाल अपनी त्वचा के लिए करती हैं, जो उन्हें सूट करते हैं. वे धूप में अधिक नहीं जातीं. उन्हें अधिक मेकअप का भी शौक नहीं है. वे अपनी आंखों और होंठों पर अधिक ध्यान देती हैं. उन्हें हेयर कलर पसंद नहीं. नरगिस फाखरी कहती हैं कि बालों को सुंदर बनाए रखने के लिए वे सप्ताह में 1 बार बालों की मसाज करवाती हैं. इस के अलावा अधिक मीठा नहीं खातीं और गहरी नींद सोती हैं. फिलहाल नरगिस फिल्म ‘बैंजो’ में अमेरिका की एक डीजे की भूमिका निभा रही हैं. इस फिल्म के लिए उन्होंने काफी तैयारी की है. इस में रितेश देखमुख उन के कोस्टार हैं. इस फिल्म में उन्हें महाराष्ट्रियन कल्चर को करीब से जानने का मौका मिला है. जिस से वे बहुत खुश हैं.

क्यों डोनेट किया गया WWE सुपरस्टार चायना का दिमाग

WWE सुपरस्टार चायना की मौत के बाद ये कंफर्म हो गया है कि उनका दिमाग सेंट्रल ट्रॉमैटिक एंसीफैलोपैथी की रिसर्च के लिए दान में दिया जाएगा. इस बात की जानकारी चायना के मैनेजर एंथॉनी एंजैल्डो ने दी है.

चायना के मैनेजर एंथनी ने कहा, "हम चायना का दिमाग दान में देना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि रिसर्च से जो भी जानकारी निकलकर सामने आए वो हमें पता चले ताकि हम उस टेस्टिंग को कैमरे में कैद कर लें और चायना की डॉक्यूमैंट्री में इस्तेमाल कर सकें”.

कौन कौन है डोनेशन लिस्ट में

इससे पहले केविन नैश, मिक फोले और रॉब वैन डैम जैसे सुपरस्टार्स भी अपना दिमाग रिसर्च के लिए डोनेट करने पर राजी हुए हैं. जॉन सीना ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि वो भी अपना दिमाग रिसर्च के लिए दान में दे सकते हैं. जॉन सीना अपने शरीर के काफी हिस्से पहले से ही डोनेट कर चुके हैं. जॉन सीना ने कहा था कि वो लोगों की मदद करने के लिए ये कर सकते हैं.

क्या है सीटाई?

सीटीई (क्रोनिक ट्रॉमैटिक एंसीफैलोपैथी) एक तरह की दिमाग की बीमारी है. इस दशक में सीटीई की रिसर्च नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है  जिस से कि एथलीट्स के सही सेहत के बारे में जानकारी मिल सके. साल 2013 में रिलीज हुई फिल्म कंकसन में इस बीमारी के बारे में दिखाया गया था.

भारत को मिला चौथा ओलंपिक टिकट

रियो ओलंपिक के लिए हरियाणा के एक और पहलवान संदीप तोमर ने भी अपना टिकट पक्का कर लिया है. हरियाणा के सोनीपत के फ्री स्टाइल पहलवान संदीप तोमर ने मंगोलिया में हुई विश्व क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में यूक्रेन के आंद्रे यात्सेनको को 11-0 से मात दे कांस्य पदक हासिल किया.  उन्होंने 57 किग्रा वर्ग में तीसरा स्थान हासिल कर भारत को एक और कोटा दिला दिया.  

मुकाबले में इकलौते भारतीय पहलवान सिलेक्ट…

– विश्व क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में रविवार को मुकाबले में एकमात्र संदीप ने ही जीत हासिल की, बाकी अन्य भारतीय पहलवानों को खाली हाथ लौटना पड़ा.

– बता दें कि रियो डी जेनेरियो में पांच से 21 अगस्त तक होने वाले ओलंपिक खेलों में हर वजन वर्ग के सिर्फ तीन शीर्ष पहलवान ही ओलिंपिक कोटा हासिल कर सकते थे, इसलिए संदीप को तीसरा स्थान प्राप्त करने के लिए अपने वर्ग के कांस्य पदकधारी से भिड़ना पड़ा.

– संदीप ने कांस्य पदक के क्वालीफिकेशन राउंड के दौरान खुद को संभाले रखा और दबदबा बनाते हुए यूक्रेन के पहलवान आंद्रिय यातसेंको को 11-0 से पराजित किया.

– ओलिंपिक क्वालीफिकेशन से पहले संदीप ने तुर्की के सेजान एकगुल को 11-0 और किर्गिस्तान के युलुकबेक झोलदोशबेकोव को 4-1 से शिकस्त देकर सेमीफाइनल राउंड में जगह बनाई.

– हालांकि वह सेमीफाइनल राउंड की बाधा पार नहीं कर सके और अजरबैजान के मिरजालाल हसन जादा से करीबी मुकाबले में 8-8 से हार गए.

– संदीप ने कांस्य पदक के मुकाबले में मोलदोवा के एलेक्साडरू चिरतोआका को 10-0 से शिकस्त देकर सुनिश्चित किया कि उन्हें ओलिंपिक में लड़ने का मौका मिले.

नरसिंह यादव (74 किग्रा) ने गत वर्ष लास वेगस में हुई विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के साथ भारत को पहला ओलंपिक कोटा दिलाया था. इस वर्ष हाल में एशियाई क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में योगेश्वर दत्त ने 65 किग्रा में स्वर्ण पदक जीतकर और हरदीप ने ग्रीको रोमन वर्ग के 98 किग्रा में रजत पदक जीतकर भारत को ओलंपिक कोटा दिलाया था.

वजन वर्ग 57, 65 और 74 किग्रा हमारी ताकत: गुरु महाबली सतपाल

संदीप के क्वालीफाई करने पर खुशी व्यक्त करते हुए द्रोणाचार्य अवॉर्डी कुश्ती गुरु महाबली सतपाल ने कहा, यह बड़ी अच्छी बात है कि जिन तीन वजन वर्गों 57, 65 और 74 किग्रा में हमें ओलंपिक में सबसे ज्यादा पदक की उम्मीद है, उनमें भारत को ओलंपिक कोटा मिल चुके हैं. ये वजन वर्ग हमेशा हमारी ताकत रहे हैं और पिछले दो ओलंपिक में हमने ऐसे ही वजन वर्गों में पदक जीते हैं. मैं संदीप को ओलंपिक कोटा हासिल करने के लिए बधाई देता हूं जिन्होंने देश को चौथा ओलंपिक टिकट दिलाया है.

भरोसे पर खरे उतरे संदीप

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें खुशी है कि संदीप उनके भरोसे पर खरे उतरे. उनकी इस साल एशियन चैंपियनशिप की स्वर्णिम सफलता और उनकी मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उन्होंने उन्हें दल में शामिल करने की पहल की जिससे उन्हें विरोध का भी सामना करना पड़ा लेकिन उन्हें खुशी है कि संदीप ने न सिर्फ ओलंपिक कोटा दिलाया बल्कि एक चैम्पियन की तरह खेलते हुए मुकाबला जीते.

अब तक ये पहलवान हो चुके चयनित

इससे पहले लंदन ओलम्पिक के कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त (पुरुषों की 'फ्रीस्टाइल' 65 किलोग्राम), नरसिंह पंचाम यादव (पुरुषों की 'फ्रीस्टाइल' 74 किलोग्राम) और हरदीप सिंह (ग्रीको-रोमन 98 किलोग्राम) ने रियो डी जेनेरियो में 5 से 21 अगस्त तक होने वाले ओलंपिक खेलों में जगह बनाई है.

अगले 3 महीने बेहद अहम

कोटा हासिल करने के बाद संदीप तोमर बहुत खुश हैं. उन्हें लगता है कि इस क्वालीफायर से पहले उन्होंने जो कड़ी मेहनत की, यह उसी का फल है. उन्होंने कहा कि, “मैं फाइनल में चूकने के बाद वह थोड़ा निराश था, लेकिन मेरे लिए जहां तक संभव हो, अपने दिमाग से उस हार को निकालना महत्वपूर्ण था. अब मुझे अपना सारा ध्यान ओलिंपिक पर लगाना होगा और यह अगले तीन महीने काफी अहम होने वाले हैं”.

जीत से उत्साहित संदीप ने कहा कि इस जीत ने ओलंपिक के लिए टॉनिक का काम किया है और वह ओलंपिक में पदक जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

 

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