Download App

सरोगेसी से अविवाहित तुषार कपूर बने पिता

अभिनेता तुषार कपूर एक बेटे लक्ष्य के पिता बन गए हैं और इसी के साथ अब अपने समय के मशहूर अभिनेता जीतेंद्र दादा तथा ‘टीवी क्वीन’ के रूप में मशहूर निर्माता एकता कपूर बुआ बन गयी हैं. माना कि तुषार कपूर ने अभी तक शादी नही की है, मगर यह खबर कोई फिल्मी गासिप नही है, बल्कि एक हकीकत है.

पिछले कुछ वर्षों से तुषार कपूर अपनी मित्र मंडली में जब कहते थे कि वह 40 साल की उम्र से पहले ही बिना शादी किए ही पिता बन जाएंगे, तो किसी को भी उन पर यकीन नहीं होता था. एक दो बार तुषार ने अपनी मित्र मंडली के बीच किसी बच्चे को गोद लेने की भी इच्छा जाहिर की थी, पर इस तरह वह पिता बनने वाले हैं, इसकी भनक तो तुषार कपूर की मित्र मंडली को भी नहीं थी. बहरहाल, मुंबई के मशहूर ‘जसलोक अस्पताल’ के डाक्टरों के सहयोग से सरोगसी तकनीक से तुषार कपूर एक बेटे के पिता बने हैं, जिसका नाम उन्होंने लक्ष्य रखा है. लक्ष्य के दादा दादी बनकर जीतेंद्र और उनकी पत्नी शोभा कपूर बहुत खुश हैं.

लक्ष्य का पिता बनने के बाद तुषार कपूर ने कहा-‘‘पिता बनकर मैं खुश हूं. मेरा बेटा लक्ष्य हमारे घर पहुंच चुका है. मेरे दिल व दिमाग में पैतृक भावनाएं उमड़ घुमड़ रही हैं. मेरे पास पिता बनने की खुशी बयां करने के लिए शब्द नहीं है. ईश्वर की कृपा और जसलोक अस्पताल के डाक्टरों की टीम की बदौलत यह संभव हो पाया. अब कई पुरूष इस तकनकी से सिंगल पिता बन सकते हैं.’’

जसलोक अस्पताल में ‘आईवीएफ और जेनेटिक की निदेशक डाक्टर फिरूजा पारखि कहती हैं-‘‘मैं तुषार कपूर के पिता बनने के पक्के इरादे से प्रभावित हूं. उन्होंने हर कदम पर बच्चे की सेहत का ख्याल रखा. वह एक अच्छे भावुक व बेटे की अच्छी परवरिष करने वाले पिता साबित होंगे.’’ एक तरफ तुषार कपूर पिता बनकर खुश हैं, तो दूसरी तरफ दादी बन चुके जीतेंद्र व शोभा कपूर को अपने बेटे तुषार कपूर पर गर्व है. इन्होंने मीडिया को जारी बयान में कहा है-‘‘हम लक्ष्य को पाकर खुश हैं. हम अपने बेटे तुषार के इस निर्णय के साथ हैं. तुषार अच्छा बेटा है. हमें उस पर गर्व है. हमने उसे जो छूट दी है, वह जिस तरह से जिम्मेदारियां निभाता है, उसके अंदर जो दया भाव है, उससे वह एक अच्छा पिता साबित होगा.’’

अक्षय कुमार को पाकिस्तानी अभिनेत्रियों का सहारा

बौलीवुड में चर्चाएं गर्म हैं कि तमिल फिल्म ‘‘कथथि’’ की हिंदी रीमेक फिल्म ‘‘इक्का’’ में अक्षय कुमार पाकिस्तानी फिल्म ‘‘मन मयाल’’ की अदाकारा माया अली और पाकिस्तानी माडल सादिया खान के साथ अभिनय करने वाले हैं. सूत्रों की माने तो ‘‘लायका प्रोडक्शन’’ के निमंत्रण पर माया अली और सादिया खान पिछले सप्ताह भारत आयी थीं. यूं तो ‘‘लायका प्रोडक्शन’’ की तरफ से इस संबंध में चुप्पी साधी गयी है. पाकिस्तानी अभिनेत्री माया अली भी चुप हैं. मगर पाकिस्तान पहुंचने के बाद वहां की मीडिया से बात करते हुए सादिया खान ने कहा है-‘‘मुझे और माया अली को बौलीवुड फिल्म का आफर मिला है. मैं इसमें सिर्फ आइटम नंबर नही कर रही हूं. मुझे फिल्म ‘इक्का’ में अक्षय कुमार की हीरोईन के किरदार का आफर दिया गया है. मुझे फिल्म की पटकथा और अपना किरदार पसंद आया.’’ तो क्या माया अली इस फिल्म में नही होंगी? इस पर सादिया ने कहा है-‘‘अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. क्योंकि अभी भी बातचीत चल रही है.’’ सूत्रों के अनुसार फिल्म ‘‘इक्का’’ में दो हीरोईनें होंगी. इस फिल्म में अक्षय कुमार की दोहरी भूमिका है.

‘पंजाबी फिल्मों के बाद बौलीवुड में छा जाने की तमन्ना’

इन दिनों पंजाबी फिल्मों में स्टार बनने के बाद बौलीवुड की तरफ मुड़ने वाले कलाकारों की संख्या बढ़ती जा रही है. पंजाबी के स्टार अभिनेता दिलजीत दोसांज के बाद अब बौलीवुड में छा जाने की तमन्ना लेकर पंजाबी की सुपर हिट फिल्म ‘‘मुंडे कमाल दे’’ की चर्चित अदाकारा सुफी गुलाटी भी बौलीवुड पहुंच गयी हैं. सुफी गुलाटी बालीवुड में अपने करियर की शुरूआत गीतकार से निर्माता बने फाएज अनवार और प्रेम प्रकाश गुप्ता की फिल्म ‘‘लव के फंडे’’ से कर रही हैं.

जुलाई में प्रदर्शित होने वाली लेखक व निर्देशक इंदरवेश योगी की फिल्म ‘‘लव के फंडे’’ में सुफी गुलाटी ने लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली अमीर लड़की रिया का किरदार निभाया है, जो कि खुद अपने बिजनेस एम्पायर को संभालती है.

बौलीवुड में कदम रखने के अपने निर्णय की चर्चा करते हुए सुफी गुलाटी कहती हैं-‘‘मुझे लगता है कि मेरी तकदीर में अभिनेत्री बनना लिखा था. मैं पंजाब के ऐसे परिवार से हूं, जहां लड़कियों को घर से बाहर निकलने की आजादी बहुत कम होती है. पर मुझे पढ़ाई करने की छूट मिली. पंजाब में पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने दिल्ली से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया. यह कोर्स करते हुए ही मुझे पंजाबी फिल्म ‘मुंडे कमाल दी’ में हीरोईन बनने का आफर मिला, तो मैंने लपक लिया. जिसे पंजाब में जबरदस्त सफलता मिली. इस फिल्म की सफलता से प्रेरित होकर मैं मुंबई चली आयी. यहां पर मुझे फिल्म ‘लव के फंडे’ मिल गयी. इस फिल्म में मेरा रिया का काफी इमोशनल किरदार है. मेरे किरदार का युवा पीढ़ी पर काफी प्रभाव पड़ेगा. क्योंकि रिया लिव इन रिलेशनशिप में रहती है, जिसकी वजह से उसकी जिंदगी में काफी उतर चढ़ाव आते हैं. इससे अधिक अभी कुछ नही कहूंगी.’’

NSG: समर्थन और विरोध के बीच झूलता भारत

न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (एनएसजी) के सदस्य 48 देशों के संगठन में भारत ने अपने पक्ष में हवा बनाने के लिए भले पूरा जोर गला दिया था, लेकिन यह भी कड़वी सच्चाई है कि एनएसजी में भारत की एंट्री को फिलहाल बड़ा धक्का लगा है. सबसे बड़ा रोड़ा चीन बना हुआ है. हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने बेशक चीनी प्रधानमंत्री शी जिंगपिंग को उनके भारत दौरे पर खूब झूला झुलाया. लेकिन एनएसजी के मामले में चीन ने भारत को झुला दिया. भारत के लिए सुकून की बात यह रही कि चीन की ओर से लगातार रोड़ा अकटाए जाने के बावजूद एनएसजी में भारत की एंट्री को लेकर तीन घंटे चर्चा हुई. लेकिन चर्चा बेनतीजा ही रहा. इसीलिए इस मुद्दे पर एक बार फिर से इसी साल विचार करने की भी खबर है.

सियोल में हुई एनएसजी के 26वें प्लेनरी ‍‍‍मिटिंग भारत उपस्थित तो नहीं था, लेकिन बैठक में भारत के मित्र और शुभाकांक्षी देशों से प्राप्त हुई जानकारी के हवाले से विदेश मंत्रालय की ओर से एक बयान जारी किया गया, जिसमें साफ तौर कहा गया है कि एनएसजी में नए देशों की एंट्री को लेकर चर्चा हुई और भारत के पक्ष में कई देश सामने आए. इसी समर्थन से भारत को एक उम्मीद की किरण नजर आयी है. जबकि बैठक से बहुत पहले ही चीन ने बार-बार दावा करता रहा कि बैठक में भारत की एंट्री पर अगल से चर्चा नहीं होगी, क्योंकि प्लेनरी ‍मि‍‍टिंग में नए सदस्यों की एंट्री पर कभी चर्चा नहीं होती है. बावजूद इसके ‍सियोल में भारत की एंट्री पर तीन घंटे चर्चा हुई और भारत को कई देशों का समर्थन भी मिला.

अब सवाल यह है कि भारत आखिर एनएसजी की सदस्यता आखिर क्यों चाहता है? हाल ही में पेरिस में हुए जलवायु परिवर्तन को लेकर हुई बैठक में 170 देशों ने पूरे विश्व में कार्बन के उत्सर्जन की मात्रा को कम करने पर सहमति जाहिर करने के साथ इसके प्रति प्रतिबद्धता भी जतायी थी. इस प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए भारत के लिए जरूरी है वह 2030 तक गैर जीवाश्म संसाधन के जरिए 40 प्रतिशत बिजली की उत्पादन की क्षमता को प्राप्त कर ले. इसी कारण भारत का एनएसजी क सदस्यता चाहता है. अगर सदस्यता मिल गयी तो ऊर्जा सुरक्षा बढ़वा देने और जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने में भारत की अपने आपको सक्षम कर पाएगा. वहीं एनएसजी में भारत की एंट्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का मामला बन गया है. हालांकि चीन की सहमति प्राप्त करने के लिए भारत हर किस्म का कूटनीतिक रास्ता अपना रहा है. लेकिन इस कोशिश को एक अओर बड़ा धक्का तब लगा जब हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी को बड़ी हताशा के साथ चीन के दौरे को पूरा करना पड़ा.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भले ही भारत की एंट्री पर भले ही मुहर लगा दी है, लेकिन अगर बराक ओबामा के रहते अगर यह नहीं हो पाया और ट्रंप अगर अगले राष्ट्रपति बन गए तो यह मामला सालों-साल खिंच जाना तय है. जहां तक हिलरी का सवाल है तो अभी तक भारत के समर्थन में हिलरी बराक ओबामा के साथ खड़ी दिख रही हैं और अमेरिका में भारतीय मूल के छात्र हिलरी के समर्थन में है, ऐसे में हिलरी के अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बनने की सूरत में आगे भी एनएसजी में भारत की एंट्री को अमेरिका का समर्थन मिलेगा. इसी की ज्यादा उम्मीद है. बहरहाल, एनएसजी में भारत के कदम रखने के मामले 48 देशों के इस संगठन में एक गुट अलग-थलग हो गया है और इस गुट के नेतृत्व चीन कर रहा है. चीन के नेतृत्व में और भी कई देशों ने सियोल बैठक में भारत के प्रवेश पर अडंगा लगा. इस अडंगे के पीछे परमाणु अप्रसार संधि का जिन्न ही है जो एक बार फिर से भारत का पीछा कर रहा है. दरअसल, चीन समेत एनएसजी में भारत के प्रवेश की मुखालफ करने वाले देश परमाणु अप्रसार संधि का मामला उठा रहे हैं. गौरतलब है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने इंकार कर दिया है. भारत का मानना है कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) यानि परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि अपने आपमें भेदभावपूर्ण संधि है.

1996 में अस्तित्व में आए सीटीबीटी पर अभी तक 178 देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किया है. लेकिन भारत के साथ पाकिस्तान ने भी इस पर हस्ताक्षर नहीं किया. वहीं 1968 में आए परमाणु असप्रसार संधि 190 देशों ने हस्ताक्षर किया है. लेकिन भारत पाकिस्तान, इजराइल और उत्तर कोरिया इसके सदस्य नहीं हैं. दरअसल, एनपीटी का उद्देश्य दुनिया भर में परमाणु हथियार के प्रसार पर पर नियंत्रण करना है. इसका प्रसताव आयरलैंड ने रखा था. इस संधि के तहत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र की श्रेणी में केवल उन्हीं देशों को रखने का प्रावधान किया था जिन देशों ने 1967 से पहले परमाणु हथियार का परीक्षण कर लिया है. यहां गौरलतब है कि भारत ने 1974 में पोखरण में परमाणु पहले परमाणु परीक्षण किया. और भारत के बहुत बाद में पाकिस्तान ने किया. लेकिन उत्तर कोरिया एक राष्ट्र है, जिसने संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद उसका उल्लंघन किया. जहां तक इजराइल का सवाल है तो अपने परमाणु भंडार के बारे में इजराइल ने अभी खुलासा नहीं किया है. इसीलिए इन देशों को परमाणु अप्रसार संधि वाले सदस्य देशों में शामिल नहीं किया गया है. बहरहाल, चीन का तर्क यह है कि भारत अगर एनपीटी यानि परमाणु अप्रसार संधि में शामिल नहीं है तो एनएसजी में शामिल भला कैसे हो सकता है.

लेकिन चीन द्वारा इस विरोध का एक दूसरा पहलू भी है और वह चीन का पाकिस्तान का गौड फादर बनना. गौरतलब है कि चीन की शह पर पाकिस्तान ने भी एनएसजी की सदस्यता के लिए आवेदन कर रखा है. चीन चाहता है अगर एनएसजी में भारत को प्रवेश की छूट मिलती है तो पाकिस्तान को क्यों नहीं? क्योंकि भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही परमाणु अप्रसार संधि का सदस्य देश नहीं है. दूसरा तर्क यह है कि अगर अकेले भारत को यहां प्रवेश की अनुमित मिल जाती है तो भविष्य में भारत हमेशा पाकिस्तान को एनएसजी से दूर रखने की कोशिश करेगा. इससे पाकिस्तान को एनएसजी में प्रवेश नहीं मिल पाएगा, क्योंकि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में हर काम सर्वसम्मत निर्णय से होतारहा है.

बहरहाल, आखिर कौन-कौन से वे देश हैं जो एनएसजी में भारत के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं? मोटे तौर पर चीन के अलावा और ऐसे सात देश हैं, जो नहीं चाहते कि भारत एनएसजी में शामिल हो. ब्राजील भी नहीं चाहता कि भारत एनएसजी में शामिल हो. हालांकि पिछले दिनों ब्राजील के साथ भारत की द्विपक्षीय वार्ता काफी सफल रही, लेकिन बावजूद इसके इस मामले में ब्राजील चीन के साथ खड़ा है. वह भी परमाणु अप्रसार संधि पर भारत द्वारा हस्ताक्षर न किए जाने तक एनएसजी में भारत के प्रवेश का विरोध करेगा. वहीं जहां तक स्विट्ज़रलैंड का सवाल है तो वह बार-बार अपना मन बदल रहा है. शुरू से ही उसने एनएजी में भारत का विरोध किया था, लेकिन नरेंद्र मोदी के स्विट्ज़रलैंड दौरे के बाद उसने अपना मन बदल लिया था और उसने भारत का समर्थन करने की घोषणा कर दी थी. लेकिन सियोल बैठक में चर्चा के दौरान उसने एक बार फिर चीन का साथ देते हुए भारत का विरोध किया था.

अब दक्षिण अफ्रीका की बात करें तो भारत के साथ इसके हमेशा से अच्छे संबंध रहे हैं. लेकिन एनएसजी के सवाल पर तमाम संबंधों को किनारा करके दक्षिण अफ्रीका ने अपना विरोध ही दर्ज किया है. भारत को दक्षिण ूअफ्रीका से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी. अब अगर औस्ट्रिया को लें तो ब्राजील की ही तरह यह भी शुरू से ही नहीं चाहता है कि भारत को एनएसजी में कदम रखने का मौका मिले.

आयरलैंड ने भी भारत के आगे यही शर्त रखी है कि भारत पहले एनपीटी में हस्ताक्षर करे, तभी उसे एनएसजी में उसे एंट्री मिले. हालांकि भारत की परमाणु सुरक्षा रिकौर्ड को देखते हुए आयरलैंड ने भारत का समर्थन किया था. लेकिन खबर है कि बैठक में उसने अपना फैसला बदल कर विरोध की जताया है. वहीं यूरोपीय देश तुर्की पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए हमेशा से भारत के एनएसजी में प्रवेश का विरोध करता रहा है. हालांकि इस मामले में भारत के पक्ष में अमेरिका की सक्रियता को देखते हुए बताया जा रहा था कि सियोल बैठक में तुर्की भारत के पक्ष में अपना फैसला सुनाएगा. लेकिन तुर्की के मामले में भारत को आशंका पहले से थी. और हुआ भी वहीं. बैठक में तुर्की कहा कि एनएसजी में सदस्यता के लिए अकेले भारत के आवेदन पर नहीं, बल्कि पाकिस्तान के भी आवेदन पर विचार किया जाना चाहिए.

भारत का विरोध करने वाले देश में एक न्यूजीलैंड भी है. यह भी शुरू से भारत का विरोध करता रहा है. बताया जाता है कि अमेरिकी दबाव में आकर न्यूजीलैंड विरोध का रास्ता छोड़ दिया था. लेकिन उसके बाद सियोल बैठक में इस मामले में न्यूजीलैंड का रूख साफ नहीं हो पाया है. बहरहाल, इस साल के एनएसजी में भारत समेत नए देश की दावेदारी पर फिर से बैठक होनी है. अब तो यह समय ही बताएगा कि भारत को अकेले इसमें प्रवेश मिल जाएगा या पाकिस्तान भी इसमें शामिल होगा?

अफ़्तारी की सियासत

ज्ञात इतिहास में कांग्रेस पहली दफा रोजा अफ़्तारी की पार्टियां आयोजित नहीं करेगी और श्रुति व स्मृति के आधार पर कहा जा सकता है कि आरएसएस पहली बार रोजा अफ़्तारी का जलसा कर रहा है. दूसरी बात ज्यादा दिलचस्प अहम और चिंताजनक है. कल तक मुसलमानो और इस्लाम के नाम से बिदकने वाले संघ की सेहत या तो गड़बड़ है या फिर दशकों पुराना मर्ज ठीक हो रहा है, यह कहना थोड़ा मुश्किल है पर इतना जरूर तय है कि राजनीति नई करवट ले रही है. यह करवट दो टूक कहा जाए तो शुद्ध धार्मिक है, इसके पीछे कोई उदारता, उपकार या भाईचारे की भावना नहीं है, बल्कि स्वार्थ है जिसका मकसद यह है कि पंडे मौलवी सब मिलबांट कर खाएं अपने अपने अनुयायियों को लूटें.

देश का माहौल दान दक्षिणा और धार्मिक बना रहे इसके लिए सब एकजुट होने तैयार हैं. भाजपा सत्ता में है और आगे भी बने रहने जरूरी हो गया है कि वह मुस्लिम वोटों का बटवांरा करे. उदाहरण उत्तर प्रदेश का लें तो भाजपा को मुस्लिम वोट नहीं चाहिए, वह चाहती है कि ये वोट सपा, बसपा और कांग्रेस में बंट जाएं तभी उसे फायदा है. बिहार में कांग्रेस लालू और नीतीश के साथ थी इसलिए मुस्लिम वोटो का बंटवारा नहीं हुआ. पश्चिम बंगाल मे ममता मुस्लिम वोट वटोर ले गईं, तो तमिलनाडु में जयललिता के खाते में ये वोट गए.

रोजा अफ़्तारी इन्हीं समीकरणों का आविष्कार है कि अब भाईचारे का दिखावा किया जाए, ठीक वैसे ही जैसे पंडित नेहरू और उनके वारिसान करते थे, लेकिन अब सोनिया हिम्मत हारते अफ़्तारी सियासत से किनारा करते उनके खजूर और राशन गरीबों में बांटने की बात कर रही हैं, तो कांग्रेस की गिरती माली हालत देख लोग मज़ाक में कह भी रहे हैं कि बेहतर होगा कि ये खजूर (काजू तो बचे नहीं) और राशन वह जकात और खैरात समझ खुद रख ले, अल्ला ताला ने चाहा तो फिर अच्छे दिन आएंगे, जो हाल फिलहाल नागपुर में ठहर गए हैं.

संघ का सच और मंशा अभी हर कोई नहीं समझ रहा कि भारत माता की जय बुलवाने वह साम, दाम, दंड, भेद सब हथकंडे अपनाएगा. अभी तो अफ़्तारी की आड़ में मुसलमानो को पुचकारा जा रहा है. अब कट्टर मुस्लिमों और संगठनों की रणनीति और प्रतिकिया आना बाकी है, मुमकिन है जवाब में वे भी नवरात्रि के दिनो में लंगर और भंडारे आयोजित करने लगें, यानि गंगा जमनी तहजीब को शबाब पर लाकर ही छोड़ें, ताकि दुकान चलती रहे. इसके लिए दोनों धर्मों के दुकानदार गले मिलने भी तैयार हैं और जरूरत पड़े तो काटने भी.

क्रिकेट छोड़ रिंग में उतरे भज्जी

टीम इंडिया के स्पिनर हरभजन सिंह इन दिनों टीम इंडिया से बाहर हैं. हालांकि उन्‍हें कुछ दिनों पहले टी-20 विश्वकप में और आईपीएल-9 में मैदान पर देखा गया था. लेकिन हाल के दौरे में भज्‍जी को टीम में शामिल नहीं किया गया है.

क्रिकेट के मैदान से बाहर भज्‍जी इन दिनों काफी मौज मस्‍ती कर रहे हैं. उन्‍हें कुछ दिनों पहले भारत के महान रेसलर द ग्रेट खली के साथ देखा गया था. खली के साथ उन्‍होंने अपनी तसवीरें सोशल मीडिया में शेयर भी की. खली से उनकी मुलाकात खास तो है, लेकिन उससे भी खास है खली के स्‍टूडेंट को रिंग में मात देना.

जी हां, ये कोई मजाक नहीं है, बल्कि सही खबर है. दरअसल पंजाब के जलांधर में सीडब्‍ल्‍यूई एकेडमी में हरभजन सिंह को आमंत्रित किया गया था. भज्‍जी ने वहां पहुंचकर काफी मजा किया. इस दौरान खली के स्‍टुडेंट ने उन्‍हें रिंग में ललकारा. भज्‍जी ने भी उनके ललकार को चुनौती के रूप में तुरंत स्‍वीकार कर लिया और रिंग में उतर गये.

भज्‍जी के रिंग में उतरने के साथ ही पूरे हॉल में तालियों की गुंज सुनाई पड़ने लगी. तालियों की गुंज तब और तेज हो गयी जब भज्‍जी ने खली के स्‍टूडेंट को देखते ही देखते मात दे दिया. हरभजन सिंह ने रेसलर को मिनटों में उठाकर पटक दिया. हरभजन सिंह के इस कारनामे के बाद खली भी काफी खुश हुए और उन्‍हें पुरस्‍कार के तौर पर एक गदा भेंट की.

ऐप की जाल में फंस रहीं मछलियां

पुडुचेरी के तट के नजदीक 35 वर्षों से मछली पकड़ रहे के. अंजापुली का काम करने का तरीका अब बदल गया है. अब वह समुद्र में जाने से पहले अपना फोन निकालकर एक एंड्रॉयड ऐप में लॉग इन करते हैं.

उन्होंने बताया, '2004 की सुनामी के बाद हम पहले के मुकाबले बहुत कम मात्रा में मछली पकड़ पा रहे थे. मछलियों के मूवमेंट का पता लगाना मुश्किल हो गया था.' इन दिनों मछुआरों को पता होता है कि उन्हें किस जगह पर मछली मिल सकती है. उन्हें यह जानकारी फिशर फ्रेंड मोबाइल एप्लिकेशन (FFMA) से मिलती है.

यह ऐप उन्हें मछली की लोकेशन के साथ ही लहरों की ऊंचाई और हवा की रफ्तार के बारे में भी सटीक डेटा अवलेबल कराता है. ऐप को एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) ने क्वालकॉम और टीसीएस के साथ मिलकर 2013 में तैयार किया था.

इसका इस्तेमाल तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में लगभग 10,000 मछुआरों के परिवार कर रहे हैं. ऐप में मछलियों के मूवमेंट की जानकारी हर 24 घंटे में अपडेट की जाती है.

इसमें कोरल रीफ और डूबे हुए जहाजों के मलबे जैसे डेंजर जोन भी बताए जाते हैं. हवा की रफ्तार और लहरों की ऊंचाई जैसी जानकारियां भी हर 6 घंटे में अपडेट की जाती हैं.

मछुआरों का कहना है कि ऐप की मदद से वे ज्यादा मछलियां पकड़ रहे हैं. इससे उनकी कमाई बढ़ी है. चेन्नई के रहने वाले मछुआरे के एलेक्स ने बताया, 'पहले मैं 6 से 10 टन तक मछली पकड़ता था, लेकिन ऐप की मदद से मैं 20 टन तक मछली पकड़ लेता हूं.' मछुआरों ने बताया कि ऐप से उनकी यात्रा का समय और खर्चे भी घटे हैं.

मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंसेज के तहत आने वाली इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (INCOIS) सुनामी के खतरे से लेकर लहरों के अनुमान तक समुद्र से जुड़ी प्रत्येक चीज को ट्रैक करती है.

यह सैटेलाइट इमेज लेकर उन्हें MSSRF के पास भेजती है, जो इमेज से मिलने वाली जानकारी को प्रोसेस कर उसे ऐप पर अपलोड करती है.

मछुआरे समुद्र में जाने से पहले ऐप के डेटा का इस्तेमाल यह तय करने के लिए करते हैं कि उन्हें मछली पकड़ने के लिए किस रूट का इस्तेमाल करना है.

क्वालकॉम के सीनियर मैनेजर (गवर्नमेंट अफेयर्स), अनिर्बान मुखर्जी ने बताया, 'हमने इस एंड्रॉयड ऐप के इस्तेमाल के बारे में मछुआरों को ट्रेनिंग देने में भी MSSRF की मदद की है.' इस ऐप का एक अन्य महत्वपूर्ण फीचर एक अलार्म है, जो नाव के इंटरनेशनल वॉटर बाउंड्री के पास पहुंचने पर बजना शुरू कर देता है.

तमिलनाडु के पास समुद्र में भारत के मछुआरों के श्रीलंका की सीमा में जाने से उनके गिरफ्तार होने का खतरा रहता है. श्रीलंका की नौसेना ने कुछ मामलों में भारतीय मछुआरों के अपनी सीमा में आने पर उन पर गोलीबारी भी की है. अब इस ऐप का इस्तेमाल कर मछुआरे इस तरह के जोखिमों से आसानी से बच सकते हैं.

तुषार का पिता बनना और IVF का बढ़ता चलन

आईवीएफ तकनीक के द्वारा अब तक महिलायें बच्चों को जन्म देती थी. अभिनेता तुषार कपूर पहली चर्चित पुरूष हस्ती हैं, जिन्होनें आईवीएफ के जरीये सिंगल फादर बनने का फैसला किया. आईवीएफ तकनीक के जरीये वह पिता बन चुके हैं. उनको बेटा हुआ है, उसका नाम लक्ष्य रखा गया है. मुम्बई के जसलोक अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर के आईवीएफ विभाग की डाक्टर फिरूजा पारिख ने कहा ‘ तुषार में पिता बनने का इरादा पक्का था. हर स्टेज पर उनका सहयोग मिलता रहा. इससे साफ दिखता है कि वह अच्छे पिता की तरह अपने बच्चे की परवरिश कर सकेगे.’ जसलोक अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर के आईवीएफ विभाग की डाक्टर फिरूजा पारिख ने बताया कि कुछ समय से कई पुरूष और महिलाओं ने सिंगल पैरेंट बनने के लिये आईवीएफ तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है.

अगर इस चलन की शुरूआत को देखे तो साल 2005 में कोलकाता में पहली घटना का पता चलता है. वहां पर अमित बनर्जी नामक युवक इस तरह से पिता बना था. भारत के मुकाबले विदेशों में इस तरह का चलन पुराना है. आम लोग ही नहीं तमाम सेलेब्रेटी तक इसका सहारा लेकर सिंगल पैरेंट बन चुके है. दुनिया के सबसे अच्छे फुटबाल खिलाडी क्रिस्टियानों रोनाल्ड ने 2010 में सिंगल पैरेटस बने. पाप स्टार रिकी मार्टिन दो बच्चों के पिता हैं. भारत में आईवीएफ तकनीक से पिता तो कई शादीशुदा अभिनेता बन चुके हैं. इनमें शाहरूख खान और आमिर खान का नाम सामने आ चुका है. 2013 में शाहरूख और उनकी पत्नी गौरी ने आईवीएफ तकनीक से अपने तीसरे बच्चे अबराम को जन्म दिया. आमिर खान और किरण राव ने बच्चे आजाद को जन्म दिया.

तुषार कपूर का मसला थोडा अलग इसलिये है क्योकि वह बिना शादी के आईवीएफ तकनीकि के जरीये पिता बने है. यह सामाजिक रूप से क्रांतिकारी कदम है. भारत में विवाह एक सामाजिक बंधन होता है. इसे एक समाजिक संस्था माना जाता है. वहां इस तरह की शुरूआत नये विचारों को जन्म देगी. सिंगल पैरेंटस के रूप में कई महिलाओं ने लडकियों को गोद लिया है. कई ने शादी भी नहीं की और अपनी गोद ली बच्ची के साथ जीवन गुजार रहे है. किसी लडके ने यह काम पहली बार किया है. समाज में कुंवारे रहने वाले लडको की संख्या तेजी से बढती जा रही है. ऐसे में यह शुरूआत नई दिशा देने का काम कर सकती है. यह सही है कि इससे धर्म का प्रचार करने वाले लोग आहत होंगे, वह इसे धर्म और संस्कृति पर हमला भी मान सकते है.

जिस तरह से तुषार के पिता अभिनेता जीतेन्द्र और मां शोभा ने अपने घर में आये नये मेहमान लक्ष्य का स्वागत किया है उससे साफ है कि उनको समाज की दकियानूसी सोच की परवाह नहीं है. तुषार के इस कदम ने केवल बालीवुड ही नहीं देश को भी एक संदेश दिया है. हमारे समाज में तमाम ऐसे नेता रहे हैं, जिनका कोई उत्तराधिकारी नहीं रहा है. इस तरह से उत्तराधिकार की परेशानी हल हो सकती है. बिना शादी किये भी पिता बनने का सपना पूरा किया जा सकता है. इसे विवाह संस्था पर हमला मानने के बजाये समाज की एक नई शुरूआत मानना ज्यादा अचछा होगा. जो बहुतों को खुशियां दे सकता है.

रोड, रेलवे और पावर मिनिस्ट्री को मिलेंगे एक्स्ट्रा फंड

सरकार सड़क, रेलवे और पावर सेक्टर को और 25,000 करोड़ रुपये देने की तैयारी में है. बजट के दौरान इन्हें जितनी रकम देने का वादा किया गया था, यह पैसा उससे अलग है. इससे इन क्षेत्रों पर सरकारी खर्च बढ़ेगा, जिससे इकॉनमी की रफ्तार तेज करने में मदद मिलेगी. अतिरिक्त फंड के लिए तीनों मंत्रालयों (रोड ट्रांसपोर्ट और हाइवेज, रेलवे और पावर) की फाइनैंस मिनिस्ट्री से बातचीत आखिरी दौर में है.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) भी इन सेक्टरों में ऐलोकेशन बढ़ाने के पक्ष में है. सरकार का मानना है कि उसने हाल में जो रिफॉर्म्स किए हैं, उनके साथ इन सेक्टर्स पर खर्च बढ़ाने से इकनॉमिक ग्रोथ तेज होगी. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि फाइनैंस मिनिस्ट्री ने मंत्रालयों को वैसे प्रॉजेक्ट्स की फाइनल लिस्ट पेश करने को कहा है, जिसकी फंडिंग एक्सट्रा फंड से की जाएगी.

रोड मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय ने बजट ऐलोकेशन के अलावा 15,000 करोड़ की मांग की थी. हालांकि, फाइनैंस मिनिस्ट्री ने इसमें से 10,000 करोड़ रुपये देने का वादा किया है. मौजूदा साल के लिए हाइवे कंस्ट्रक्शन का टारगेट 15,000 किलोमीटर (41 किलोमीटर रोजाना) है, जिस पर कुल 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे.

रेलवे मिनिस्ट्री को 12,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं. रेवेन्यू में गिरावट और प्रॉजेक्ट कॉस्ट में बढ़ोतरी के चलते रेलवे को फंड की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. रेलवे बोर्ड के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, 'अडिशनल ग्रॉस बजटरी सपॉर्ट (जीबीएस) का इस्तेमाल अटके प्रॉजेक्ट्स को क्लीयर करने, रेलवे लाइनों के आधुनिकीकरण और अपग्रेडेशन और कुछ रूट्स पर भीड़ कम करने में किया जाएगा. इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़े कुछ प्रॉजेक्ट्स पर भी काम तेज किया जा सकता है.'

रेलवे ने रोजाना 7 किलोमीटर रेल लाइन बनाने का टारगेट तय किया है. मौजूदा साल में उसे 45,000 करोड़ का ग्रॉस बजटरी सपॉर्ट (जीबीएस) मिला है और इस साल के लिए उसका टोटल प्लान खर्च 1.21 लाख करोड़ रुपये है. साथ ही, मिनिस्ट्री को आगामी सातवें पे कमीशन से जुड़े खर्च का बोझ भी उठाना होगा. पे कमीशन के चलते रेलवे के सैलरी खर्च में कम से कम 29,000 करोड़ की बढ़ोतरी हो सकती है. पावर मिनिस्ट्री को अतिरिक्त आवंटन के तौर पर 3,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है.

नशे की हालत में पूनम पांडे का MMS हुआ वायरल

पब्लिसिटी पाने के चक्कर में एक्ट्रैस पूनम पांडे हर हथकंडा अपना रही है. अपनी बोल्ड तस्वीरें शेयर करना अब पूनम के लिए आम बात हो गई है. पूनम कभी ट्विटर पर सेमी न्यूड सेल्फी डालती हैं, तो कभी बोल्ड पोज में फोटो अपलोड करती हैं.

इसके अलावा पूनम का एक MMS भी लीक हो चुका है. हम उस MMS की बात कर रहें हैं जो एक पार्टी में बनाया गया था. साल 2013 में पूनम ने अपनी कुछ सहेलियों के साथ रात भर पार्टी की थी और इसी दौरान उनका MMS बनाया गया था.

इस वीडियो को अगर ध्यान से सुनें, तो समझ में आ जायेगा की पूनम पूरी तरह से दारू के नशे में चूर हैं और अश्लील डांस कर रहीं हैं. पूनम की सहेली कह रही है की वो पूनम का वीडियो नेट पर डालेंगी और वायरल करेंगी. ये MMS पिछले डेढ़ साल से इंटरनेट पर है और इन दिनों फिर से वायरल हो रहा है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें