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देवर पर भारी पड़ा भाभी से संबंध

‘‘अरे वाह देवरजी, तुम तो एकदम मुंबइया हीरो लग रहे हो,’’ सुशीला ने अपने चचेरे देवर शिवम को देख कर कहा.

‘‘देवर भी तो तुम्हारा ही हूं भाभी. तुम भी तो हीरोइनों से बढ़ कर लग रही हो,’’ भाभी के मजाक का जवाब देते हुए शिवम ने कहा.

‘‘जाओजाओ, तुम ऐसे ही हमारा मजाक बना रहे हो. हम तो हीरोइन के पैर की धूल के बराबर भी नहीं हैं.’’

‘‘अरे नहीं भाभी, ऐसा नहीं है. हीरोइनें तो  मेकअप कर के सुंदर दिखती हैं, तुम तो ऐसे ही सुंदर हो.’’

‘‘अच्छा तो किसी दिन अकेले में मिलते हैं,’’ कह कर सुशीला चली गई. इस बातचीत के बाद शिवम के तनमन के तार झनझना गए. वह सुशीला से अकेले में मिलने के सपने देखने लगा. नाजायज संबंध अपनी कीमत वसूल करते हैं. यह बात लखनऊ के माल थाना इलाके के नबी पनाह गांव में रहने वाले शिवम को देर से समझ आई. शिवम मुंबई में रह कर फुटकर सामान बेचने का काम करता था. उस के पिता देवेंद्र प्रताप सिंह किसान थे. गांव में साधारण सा घर होने के चलते शिवम कमाई करने मुंबई चला गया था. 4 जून, 2016 को वह घर वापस आया था.

शिवम को गांव का माहौल अपना सा लगता था. मुंबई में रहने के चलते वह गांव के दूसरे लड़कों से अलग दिखता था. पड़ोस में रहने वाली भाभी सुशीला की नजर उस पर पड़ी, तो दोनों में हंसीमजाक होने लगा. सुशीला ने एक रात को मोबाइल फोन पर मिस्ड काल दे कर शिवम को अपने पास बुला लिया. वहीं दोनों के बीच संबंध बन गए और यह सिलसिला चलने लगा. कुछ दिन बाद जब सुशीला समझ गई कि शिवम पूरी तरह से उस की गिरफ्त में आ चुका है, तो उस ने शिवम से कहा, ‘‘देखो, हम दोनों के संबंधों की बात हमारे ससुरजी को पता चल गई है. अब हमें उन को रास्ते से हटाना पड़ेगा.’’ यह बात सुन कर शिवम के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. सुशीला इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी. वह बोली, ‘‘तुम सोचो मत. इस के बदले में हम तुम को पैसा भी देंगे.’’ शिवम दबाव में आ गया और उस ने यह काम करने की रजामंदी दे दी. नबी पनाह गांव में रहने वाले मुन्ना सिंह के 2 बेटे थे. सुशीला बड़े बेटे संजय सिंह की पत्नी थी. 5 साल पहले संजय और सुशीला की शादी हुई थी.

सुशीला उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के महराजगंज थाना इलाके के मांझ गांव की रहने वाली थी. ससुराल आ कर सुशीला को पति संजय से ज्यादा देवर रणविजय अच्छा लगने लगा था. उस ने उस के साथ संबंध बना लिए थे. दरअसल, सुशीला ससुराल की जायदाद पर अकेले ही कब्जा करना चाहती थी. उस ने यही सोच कर रणविजय से संबंध बनाए थे. वह नहीं चाहती थी कि उस के देवर की शादी हो. इधर सुशीला और रणविजय के संबंधों का पता ससुर मुन्ना सिंह और पति संजय सिंह को लग चुका था. वे लोग सोच रहे थे कि अगर रणविजय की शादी हो जाए, तो सुशीला की हरकतों को रोका जा सकता है. सुशीला नहीं चाहती थी कि रणविजय की शादी हो व उस की पत्नी और बच्चे इस जायदाद में हिस्सा लें.

लखनऊ का माल थाना इलाका आम के बागों के लिए मशहूर है. यहां जमीन की कीमत बहुत ज्यादा है. सुशीला के ससुर के पास  करोड़ों की जमीन थी. सुशीला को पता था कि ससुर मुन्ना सिंह को रास्ते से हटाने के काम में देवर रणविजय उस का साथ नहीं देगा, इसलिए उस ने अपने चचेरे देवर शिवम को अपने जाल में फांस लिया. 12 जून, 2016 की रात मुन्ना सिंह आम की फसल बेच कर अपने घर आए. इस के बाद खाना खा कर वे आम के बाग में सोने चले गए. वे पैसे भी हमेशा अपने साथ ही रखते थे. सुशीला ने ससुर मुन्ना सिंह के जाते ही पति संजय और देवर रणविजय को खाना खिला कर सोने भेज दिया. जब सभी सो गए, तो सुशीला ने शिवम को फोन कर के गांव के बाहर बुला लिया.

शिवम ने अपने साथ राघवेंद्र को भी ले लिया था. वे तीनों एक जगह मिले और फिर उन्होंने मुन्ना सिंह को मारने की योजना बना ली. उन तीनों ने दबे पैर पहुंच कर मुन्ना सिंह को दबोचने से पहले चेहरे पर कंबल डाल दिया. सुशीला ने उन के पैर पकड़ लिए और शिवम व राघवेंद्र ने उन को काबू में कर लिया. जान बचाते समय मुन्ना सिंह चारपाई से नीचे गिर गए. वहीं पर उन दोनों ने गमछे से गला दबा कर उन की हत्या कर दी. मुन्ना सिंह की जेब में 9 हजार, 2 सौ रुपए मिले. शिवम ने 45 सौ रुपए राघवेंद्र को दे दिए. इस के बाद वे तीनों अपनेअपने घर चले गए. सुबह पूरे गांव में मुन्ना सिंह की हत्या की खबर फैल गई. उन के बेटे संजय और रणविजय ने माल थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया. एसओ माल विनय कुमार सिंह ने मामले की जांच शुरू की. पुलिस ने हत्या में जायदाद को वजह मान कर अपनी खोजबीन शुरू की. मुन्ना सिंह की बहू सुशीला पुलिस को बारबार गुमराह करने की कोशिश कर रही थी. पुलिस ने जब मुन्ना सिंह के दोनों बेटों संजय और रणविजय से पूछताछ की, तो वे दोनों बेकुसूर नजर आए.

इस बीच गांव में यह पता चला कि सुशीला के अपने देवर रणविजय से नाजायज संबंध हैं. इस बात पर पुलिस ने सुशीला से पूछताछ की, तो उस की कुछ हरकतें शक जाहिर करने लगीं. एसओ माल विनय कुमार सिंह ने सीओ, मलिहाबाद मोहम्मद जावेद और एसपी ग्रामीण प्रताप गोपेंद्र यादव से बात कर पुलिस की सर्विलांस सैल और क्राइम ब्रांच की मदद ली. सर्विलांस सैल के एसआई अक्षय कुमार, अनुराग मिश्रा और योगेंद्र कुमार ने सुशीला के मोबाइल को खंगाला, तो  पता चला कि सुशीला ने शिवम से देर रात तक उस दिन बात की थी. पुलिस ने शिवम का फोन देखा, तो उस में राघवेंद्र का नंबर मिला. इस के बाद पुलिस ने राघवेंद्र, शिवम और सुशीला से अलगअलग बात की. सुशीला अपने देवर रणविजय को हत्या के मामले में फंसाना चाहती थी. वह पुलिस को बता रही थी कि शिवम का फोन उस के देवर रणविजय के मोबाइल पर आ रहा था.

सुशीला सोच रही थी कि पुलिस हत्या के मामले में देवर रणविजय को जेल भेज दे, तो वह अकेली पूरी जायदाद की मालकिन बन जाएगी, पर पुलिस को सच का पता चल चुका था. पुलिस ने तीनों को साथ बिठाया, तो सब ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. 14 जून, 2016 को पुलिस ने राघवेंद्र, शिवम और सुशीला को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया. वहां से उन तीनों को जेल भेज दिया गया. सुशीला अपने साथ डेढ़ साला बेटे को जेल ले गई. उस की 4 साल की बेटी को पिता संजय ने अपने पास रख लिया. जेल जाते समय सुशीला के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी. वह शिवम और राघवेंद्र पर इस बात से नाराज थी कि उन लोगों ने यह क्यों बताया कि हत्या करते समय उस ने ससुर मुन्ना सिंह के पैर पकड़ रखे थे.

अंदरूनी बीमारियां और अंधविश्वास

मर्दों के बजाय औरतों के नाजुक अंगों की बनावट इस तरह की होती है, जिन में बीमारियों वाले कीटाणु आसानी से दाखिल हो सकते हैं. इस की वजह से उन में तमाम तरह की बीमारियां देखने को मिलती हैं. ये बीमारियां मर्द औरत के असुरक्षित सैक्स संबंध बनाने, असुरक्षित बच्चा जनने, माहवारी के दौरान गंदे कपड़े का इस्तेमाल करने व अंगों की साफसफाई न रखने की वजह से होती हैं. इस से औरतों के अंगों पर घाव होना, सैक्स संबंध बनाते समय खून का बहना व तेज दर्द, पेशाब में जलन व दर्द, अंग के आसपास खुजली होना, जांघों में गांठें होना व अंग से बदबूदार तरल जैसी चीज निकलने व मर्दों के अंग पर दाने, खुजली, घाव जैसी समस्याओं से दोचार होना पड़ता है. अगर इन का समय से डाक्टरी इलाज न कराया जाए तो औरतों में बांझपन, एचआईवी एड्स, गर्भाशय में गांठ व कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां जन्म ले सकती हैं. अकसर औरतों में होने वाली अंदरूनी बीमारियों में वे समय से इलाज न करा कर झाड़फूंक जैसे अंधविश्वासों में पड़ कर शारीरिक, माली व दिमागी शोषण का शिकार हो जाती हैं. 12वीं जमात तक पढ़ी शीला को कुछ दिनों से पेड़ू में दर्द की शिकायत थी. इस के बाद उस के अंग के आसपास दाने निकलने शुरू हो गए और फिर बदबूदार पानी बहने लगा. शीला ने अपनी  यह समस्या पड़ोस की एक औरत को बताई, तो उस ने बताया कि उसे किसी बुरी आत्मा के साए ने जकड़ लिया है. एक तांत्रिक बाबा हैं, जो उस की इस समस्या का हल कर सकते हैं.

शीला बाबा के पास पहुंची, तो बाबा ने बताया कि उस के ऊपर किसी चुड़ैल का साया है, जिस की वजह से उसे यह समस्या हो रही है. शीला ने बाबा से अपनी इस समस्या का उपाय पूछा, तो बाबा ने कहा कि इस के लिए अनुष्ठान करना पड़ेगा, जिस पर तकरीबन 20 हजार रुपए का खर्च आएगा. शीला ने अपने पति को बिना बताए उस बाबा को 20 हजार रुपए दे दिए और झाड़फूंक कराना शुरू कर दिया. लेकिन जब 2 महीने बीतने के बाद भी शीला की समस्या घटने के बजाय और बढ़ गई, तो उस ने अपने पति को यह बात बताई. शीला का पति पढ़ालिखा था. उस ने शीला को समझाबुझा कर एक लेडी डाक्टर को दिखाया, तो डाक्टर ने शीला को अंग की बीमारी बताई. उस डाक्टर ने शीला और उस के पति का एकसाथ इलाज किया और शीला कुछ ही हफ्तों में पूरी तरह ठीक हो गई. इस सिलसिले में डाक्टर मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि अकसर मर्दऔरत द्वारा असुरक्षित सैक्स संबंध बनाने की वजह से अंग में इंफैक्शन की शिकायत हो जाती है. यह समस्या औरत से मर्द में या मर्द से औरत में फैलने की वजह बनती है.

अंग में इंफैक्शन की वजह से औरत में पेशाब करते समय दर्द या जलन की तकलीफ बढ़ जाती है. इस के अलावा संबंध बनाते समय औरत को तेज दर्द होता है, वहीं मर्दों में अंग से स्राव, अंडकोषों में दर्द, अंग पर दाने व पेशाब करते समय दर्द व जलन की समस्या देखने को मिलती है. ये सभी समस्याएं इंफैक्शन की वजह से होती हैं, न कि भूतपे्रत या टोनेटोटके की वजह से. ऐसे में इन बीमारियों का इलाज झाड़फूंक से कराना कभीकभी जानलेवा भी साबित हो जाता है. अगर किसी औरत या मर्द में इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें अपने नजदीकी अस्पताल में जा कर जरूर डाक्टरी सलाह लेनी चाहिए.

बांझपन में झाड़फूंक

अकसर औरतों में बच्चा न होने की समस्या देखने को मिलती है, जो कई वजह से होती है. अगर औरत की बच्चेदानी में किसी तरह की गांठ हो या उसे किसी तरह का इंफैक्शन हो, तो बच्चा पैदा होने में यह वजह रुकावट बनती है. ऐसे में बहुत सी औरतें बच्चा पाने की लालसा में झाड़फूंक करने वाले बाबाओं के पास चली जाती हैं, जहां उन्हें बच्चा तो नहीं पैदा होता है, बल्कि बाबाओं द्वारा माली व शारीरिक शोषण जरूर झेलना पड़ जाता है. कभीकभी पाखंडी बाबाओं द्वारा बच्चा पैदा करने के नाम पर झाड़फूंक करने की आड़ में औरतों की इज्जत भी लूट ली जाती है, जिस के चलते कभीकभी उन के बच्चा ठहर जाता है. औरतें ये बातें इसलिए छिपा जाती हैं, क्योंकि उन्हें बांझपन के ताने से छुटकारा मिल जाता है.

ऐसे तमाम मामले सामने आते रहते हैं, जिन में झाड़फूंक करने वाले पाखंडी बाबाओं द्वारा औरतों की इज्जत लूटने की वारदातें सामने आती हैं. बाद में पोल खुलने पर इन बाबाओं को जेल की हवा भी खानी पड़ती है. डाक्टर प्रीति मिश्रा के मुताबिक, अकसर किशोरावस्था से ही नाजुक अंगों की साफसफाई न करने की वजह से औरतों के अंग में इंफैक्शन हो जाता है, जो उन में बच्चा न पैदा होने की समस्या को जन्म देता है. इस हालत में औरतों को चाहिए कि वे अपने परिवार के लोगों के साथ बातचीत कर के किसी अच्छे डाक्टर को अपनी समस्या बताएं. बांझपन आज के दौर में शाप नहीं रहा है, बल्कि इस का समय से इलाज कराने से औरतें आसानी से मां बन सकती हैं. अगर किसी औरत या मर्द की बच्चा पैदा करने की कूवत में किसी तरह की कमी होती है, तो पतिपत्नी आपसी रजामंदी से टैस्ट ट्यूब बेबी या किराए की कोख से भी औलाद का सुख ले सकते हैं.

एचआईवी का खतरा

सामाजिक संस्था ‘गौतम बुद्ध जागृति समिति’ के सचिव श्रीधर पांडेय का कहना है कि अकसर औरत या मर्द में से किसी एक के अंग में होने वाला इंफैक्शन उस के साथ सैक्स करने की वजह से दूसरे साथी में चला जाता है, जिसे एसटीडी यानी यौन संचारी रोग के नाम से जाना जाता है. यह बीमारी मर्द व औरत द्वारा मुख मैथुन या गुदा मैथुन, संक्रमित अंगों को आपस में रगड़ने की वजह से होती है. इस के अलावा मर्द का इंफैक्शन वाला वीर्य जब औरत के अंग में जाता है, तो मर्द की बीमारी औरत को भी लग जाती है. इस हालत में इलाज की जगह बाबाओं से झाड़फूंक कराना न केवल घातक साबित होता है, बल्कि समय से इलाज न होने से औरत और मर्द में एचआईवी होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

श्रीधर पांडेय का आगे कहना है कि उन की संस्था नोएडा, उत्तर प्रदेश में एड्स नियंत्रण सोसाइटी के सहयोग से एचआईवी एड्स से बचाव को ले कर जागरूकता का काम कर रही है. इस दौरान वे तमाम ऐसे एचआईवी पीडि़तों से मिले, जो पहले अंग के इंफैक्शन से पीडि़त थे और झाड़फूंक व इलाज में देरी होने की वजह से इन का यह इंफैक्शन एचआईवी में बदल गया.

इस तरह के लोगों में औरतों की तादाद सब से ज्यादा थी, क्योंकि औरतें अकसर अपनी बीमारी का इलाज डाक्टर से कराने के बजाय झाड़फूंक में ज्यादा विश्वास रखती हैं, जिस की वजह से उन को इस तरह की घातक बीमारियों का सामना करना पड़ता है. डाक्टर मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि अगर औरत या मर्द के अंगों में किसी तरह की खुजली, दाने या घाव दिखाई पड़ते हैं, तो इस का समय रहते इलाज शुरू कर देना चाहिए, जिस से बीमारी के फैलने का खतरा कम हो जाता है. अगर यह समस्या औरत या मर्द में से किसी एक को है, तो उस दौरान दोनों को आपस में संबंध बनाने से बचना चाहिए या सैक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए.

अंग के इंफैक्शन में साफसफाई का खास खयाल रखना चाहिए. साथ ही, किसी तरह के अंधविश्वास से दूरी बना कर रखने में ही भलाई होती है. डाक्टर प्रीति मिश्रा कहती हैं कि औरतों में सैक्स संबंधी बीमारियों के नतीजे ज्यादा घातक होते हैं, जिस से वे तनाव का भी शिकार होती हैं. ऐसे में वे झाड़फूंक के अंधविश्वास में आसानी से पड़ जाती हैं. अगर किसी औरत में अंग के इंफैक्शन के लक्षण दिखाई दें, तो उसे अपनी समस्या अपने पति व परिवार वालों को बिना संकोच के बतानी चाहिए, जिस का समय रहते इलाज किया जा सके. डाक्टर प्रीति मिश्रा आगे बताती हैं कि अकसर अंग में इंफैक्शन की वजह से पैदा होने वाला बच्चा या तो समय से पहले पैदा हो जाता है या बेहद कमजोर व अंधा भी हो सकता है. मां में इंफैक्शन की वजह से उस के बच्चे को निमोनिया जैसी बीमारियां भी आसानी से जकड़ लेती हैं. अगर कोई औरत अपने अंदरूनी अंग में इंफैक्शन से पीडि़त है, तो उस के पेट में लंबे समय तक दर्द बना रह सकता है. उस के गर्भाशय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी जन्म ले सकती है. एचआईवी होने का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में आज के जमाने में हर शख्स की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह विज्ञान के तर्कों पर चलते हुए समय पर अपना इलाज कराए, न कि पाखंडी बाबाओं के चक्कर में पड़ कर अपनी जान जोखिम में डाले.

जब ठगे गए बिग बी…

फिल्म तीन को समीक्षकों ने भले ही सराहा हो, लेकिन बॉक्स ऑफिस के लिहाज से ये निराशजनक रही. फिल्म के सात निर्माताओं को 10 करोड़ का घाटा हुआ. इसका निर्माण 15 करोड़ में हुआ, इस राशि में अमिताभ की फीस शामिल नहीं थी. प्रिंट व प्रमोशन के 8 करोड़ सहित कुल निर्माण लागत 23 करोड़ हुई.

भारत में फिल्म ने 20 करोड़ रुपए कमाए, जिसमें वितरकों का शेयर 10 करोड़ रहा. ओवरसीज मार्केट से 2 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ. संगीत और अन्य अधिकारों के बदले एक करोड़ की राशि मिली. यानी निर्माताओं के पास महज 13 करोड़ रुपए आए. बच्चन को कम रखनी थी फीस इस घाटे का सीधा असर अमिताभ की फीस पर पड़ा.

फिल्म के रिलीज से पहले तक इन टीवी सैटेलाइट अधिकारों की कीमत 15 करोड़ तक आंकी गई थी, लेकिन फ्लॉप होने के बाद बमुश्किल 8 करोड़ की राशि तय हुई. जानकार कहते हैं ‘प्रयोगधर्मी फिल्म के लिए फीस के तौर पर सैटेलाइट अधिकार अपने पास रखना अमिताभ का गलत फैसला था.

गौरतलब है कि अमिताभ की फीस 6-8 करोड़ के बीच रहती है, इस लिहाज से उन्हें अधिक आय की उम्मीद थी. लेकिन ये आंकड़ा उनकी ही फीस के समकक्ष आ गया. वैसे तो उन्हें फिल्म के बजट के अनुरूप कम फीस ही रखनी थी. सैटेलाइट अधिकार यदि निर्माताओं के पास रहते तो उनका घाटा कुछ कम हो सकता था..’

प्रमोशन में नदारद थे नवाज और विद्या

फिल्म से जुड़े एक अन्य सूत्र का कहना है ‘टाइटल ‘तीन’ था, लेकिन नवाजुद्दीन सिद्दीकी और विद्या बालन के रोल फिल्म में कमतर थे. पूरी फिल्म बच्चन पर केंद्रित होकर रह गई. प्रमोशन में भी विद्या और नवाज की गैरमौजूदगी का असर बॉक्स ऑफिस पर रहा.

तो रिवर राफ्टिंग इंस्ट्रक्टर होते ये अभिनेता

बॉलीवुड अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा पिछले काफी वक्त से नित्या मेहरा के निर्देशन में बनी आगामी फिल्म 'बार बार देखो' की तैयारियों में व्यस्त हैं. सिद्धार्थ ने काफी कम समय में हिन्दी सिनेमाजगत में अपनी एक खास पहचना बना ली है. लेकिन हाल ही में सिद्धार्थ ने बताया है कि अगर वह अभिनेता न होते तो क्या होते.

रोमांच पसंद करने वाले सिद्धार्थ मल्होत्रा का कहना है कि अगर वह अभिनेता नहीं होते तो रिवर राफ्टिंग प्रशिक्षक बनना पसंद करते, क्योंकि इसमें बेहद 'रोमांच और डर' है. सिद्धार्थ ने हाल ही में अपने प्रशंसकों के साथ एक लाइव फेसबुक चैट की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर वह बॉलीवुड में सफल नहीं होते तो राफ्टिंग प्रशिक्षक बनना पसंद करते.

सिद्धार्थ ने कहा, ‘मैं रिवर राफ्टिंग प्रशिक्षक बनना चाहता हूं. इसमें बेहद रोमांच, उत्साह, साहस और डर है.’ उन्होंने अपने प्रशंसकों को अपने पसंदीदा निर्देशकों के बारे में भी बताया, जिनके साथ वह काम करना पसंद करते हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं इम्तियाज अली, राजकुमार हिरानी और जोया अख्तर के साथ काम करना चाहता हूं.’

आगामी फिल्म 'बार-बार देखो' में सिद्धार्थ के साथ कैटरीना कैफ मुख्य किरदार में नजर आएंगी. इस फिल्म में ये दोनों पहली बार साथ में रोमांस करते हुए नजर आएंगे. फिल्म में इन दोनों ने अपने लुक के साथ भी काफी बदलाव किया है. इसके अलावा सिद्धार्थ ने अभिनेत्री जैकलिन फर्नांडीज के साथ अपनी अगली एक्शन फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है.

स्नैपडील ने रिटर्न पॉलिसी में किए बड़े बदलाव

स्नैपडील से स्मार्टफोन, कंप्यूटर समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रॉडक्ट्स की वापसी पहले से ज्यादा मुश्किल होगी क्योंकि अब कोई आइटम वापस करते वक्त आपको डॉक्युमेंट भी देने होगा. यह डॉक्युमेंट आपको स्नैपडील के ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर से बनवाने होंगे जिसमें सामान में गड़बड़ी बताई जाएगी और डॉक्युमेंट बनने के सात दिनों के अंदर इसे कंपनी को देना होगा, तभी सामान वापस हो सकेगा.

हालांकि, स्नैपडील का कहना है कि यह पॉलिसी पुरानी है, लेकिन कुछ सेलर्स ने बताया कि उन्हें 11 जुलाई को मिले ईमेल से पहले इसकी जानकारी नहीं थी. कंपनी ने विक्रेताओं को भेजे ईमेल में कहा, 'इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स: हमें ब्रैंड/ओईएम के सर्विस सेंटर से एक डॉक्युमेंट चाहिए होता है जिसमें कहा गया हो कि जो सामान डिलिवर हुए उनमें गड़बड़ी है. रिफंड या रिप्लेसमेंट रिक्वेस्ट की प्रोसेसिंग से पहले हम शिकायत की जांच के लिए क्वॉलिटी चेक करेंगे. वही आइटम्स रिटर्न या रिप्लेस होंगे जिसमें गड़बड़ी पाई जाएगी.'

विक्रेताओं ने कंपनी के इस कदम का स्वागत किया है. ऑनलाइन सेलर्स ग्रुप ई-सेलर सुरक्षा फोरम के संजय ठाकुर ने कहा, 'सबसे बड़ा बदलाव 'नो क्वेश्चन आस्क्ड' पॉलिसी को हटाया जाना है जिससे उनकी डिलिवरी कॉस्ट बढ़ जाती है. अब बेवजह की वापसी और ग्राहकों के फ्रॉड्स कम होंगे.'                                                                                                                                                         

देश में कम हो जाएगा तेल?

कंजंप्शन और एक्सपेंशन योजनाओं को देखते हुए ऑइल प्रॉडक्ट्स के नेट एक्सपोर्टर भारत के पास अगले 15 सालों में शायद कोई सरप्लस कपैसिटी ना हो. देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन के चीफ ऑफ रिफाइनरीज ने यह बात कही है. कंपनी के डायरेक्टर (रिफाइनरीज) संजीव सिंह ने बताया, 'हम पहले से ही बहुत ज्यादा सरप्लस में नहीं हैं. 15 सालों में सभी योजनाबद्ध कदमों के बावजूद देश शायद डेफिसिट में रहे. लेकिन, यह चिंता की बात नहीं है क्योंकि हम इंपोर्ट कर सकते हैं.'

भारत की सालाना रिफाइनरी कपैसिटी 23 करोड़ टन है. सिंह ने कहा कि मौजूदा इकाइयों के एक्सपेंशन योजना के मुताबिक, यह 2030 तक 30 करोड़ टन पर पहुंच जाएगी. इसके अलावा, सरकार वेस्ट कोस्ट पर 6 करोड़ टन की एक नई रिफाइनरी बनाने की संभावनाएं तलाश रही है. इसके बनने के बाद डिमांड-सप्लाई की स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा. पिछले दो साल में देश से पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स का नेट एक्सपोर्ट घटा है. यह गुजरे फिस्कल में 3.23 करोड़ टन था, जो इससे एक साल पहले 4.26 करोड़ टन था.

रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक कारों के ऑइल और गैस की डिमांड पर संभावित असर का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा, '2030 तक कुछ भी बड़े तौर पर बदलने नहीं जा रहा है. तेल और गैस खपत के 2040 तक बढ़ने के आसार हैं.' उन्होंने हालांकि कहा, 'अगर टेक्नॉलजी में रैडिकल बदलाव होते हैं और हमारी खपत घटती है तो डिमांड नीचे आ जाएगी.' सिंह ने कहा, 'क्रूड मार्केट बहुत बड़ा है, लेकिन प्रॉडक्ट्स केवल कुछ कंपनियों के पास ही हैं.'

ब्राउजर के गैरजरूरी टैब खुद हो जाएंगे बंद

अक्सर इंटरनेट चलाते समय कई टैब खोलने की आदत पड़ जाती है लेकिन यूजर उसे बंद करना भूल जाते हैं जिसकी वजह से अधिक डाटा की खपत होती है और कंप्यूटर हैंग होने लगता है. मगर ब्राउजर के ये टैब खुद-ब-खुद बंद भी हो सकते हैं लेकिन इसके लिए एक्सटेंशन की मदद लेनी होगी.

गूगल क्रोम वेब स्टोर पर मौजूद Tab Wrangler एक्सटेंशन की सहायता से क्रोम ब्राउजर में खोले गए पुराने टैब जो प्रयोग नहीं किए जा रहे हैं वह तय समय के बाद खुद ब खुद बंद होने लगते हैं.

इस मुफ्त एक्सटेंशन को अपने ब्राउजर में शामिल करने के लिए ‘क्रोम ब्राउजर’ खोलें, उसके सर्च बार chrome webstore टाइप करें. यहां बाईं ओर सर्च का विकल्प मिलेगा, उसमें Tab Wrangler टाइप कर दें. साथ ही सर्च बार के नीचे दिए गए विकल्पों में से Extensions का चयन करें. अब आपके सामने सबसे ऊपर Tab Wrangler लिखा मिलेगा, उस पर क्लिक करें और वह आपके ब्राउजर में शामिल हो जाएगा.

इसका आइकन यूआरएल बार के दाईं तरफ दिखाई देगा. जरूरत पड़ने पर ऑटोमैटिक बंद होने वाले फीचर को रोक भी सकते हैं. इसके अलावा बंद हुए टैब को दोबारा खोलने के लिए इस एक्सटेंशन के आइकन को दबाने के बाद आपको रीस्टोर करने का विकल्प भी मिल जाएगा.

खुद तय करें टैब का समय

जब इस एक्सटेंशन को ब्राउजर में शामिल करेंगे तो उसमें 20 मिनट का समय पहले से सेट होता है. यानी कोई भी टैब 20 मिनट इस्तेमाल न होने पर खुद बंद हो जाएगा. इसमें दिए गए समय को कम और ज्यादा भी कर सकते हैं. समय को बदलने के लिए ब्राउजर के यूआरएल बार के पास दिए गए एक्सटेंशन के आइकन पर क्लिक करें. इसके बाद नई डिस्प्ले खुलेगी जिसमें ऊपर की ओर ‘ऑप्शन’ लिखा मिलेगा. इस पर क्लिक कर दें. यहां से आपको 20 मिनट का समय दिखाई देगा. इसके समय को यहीं से बढ़ा या घटा भी सकते हैं.

पसंदीदा टैब को कर सकते हैं लॉक

ब्राउजर में किसी एक टैब को खुला रखना चाहते हैं तो उसे लॉक किया जा सकता है. इसके लिए एक्सटेंशन के आइकन पर जाना होगा. इसके बाद जो स्क्रीन खुलेगी उसमें Tab Lock पर क्लिक करें. यहां से ब्राउजर में खुली सभी वेबसाइट को एक साथ देख सकते हैं. इसके अलावा जिस टैब को लॉक करना चाहते हैं उसके सामने दिए गए बॉक्स पर टच कर दें. यह वेबसाइट तब तक लॉक रहेंगी जब तक आपका कंप्यूटर खुला रहेगा. वहीं स्थायी तौर पर किसी वेबसाइट को खुला रखना चाहते हैं तो एक्सटेंशन के आइकन पर दोबारा क्लिक करने के बाद ऊपर की तरफ तीसरे नंबर पर दिए गए ‘ऑप्शन’ पर क्लिक करने के बाद सबसे नीचे Auto-Lock लिखा मिलेगा, उसके नीचे दिए गए बॉक्स में जिस वेबसाइट को लॉक करना चाहते हैं उसका यूआरएल कॉपी कर शामिल कर दें.

तो ये हैं राजन के उत्तराधिकारी

आरबीआई के गवर्नर के पद हेतु नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया का नाम फाइनल बताया जा रहा है. अगले 48 घंटो में पनगढ़िया के नाम की औपचारिक घोषणा हो सकती है. वर्तमान आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का कार्यकाल 4 सितंबर को खत्म हो रहा है और उन्होंने आरबीआई गवर्नर के पद के कार्यकाल के विस्तार के लिए पहले ही मना कर दिया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आज अफ्रीकी देशों के दौरे के वापस लौटने के बाद नए नाम का ऐलान हो सकता है. मोदी 7 जुलाई से चार अफ्रीकी देशों, मोजाम्बिक, केन्या, तंजानिया और दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर थे और वह कल ही स्वदेश लौटे हैं. हालांकि पीएम कार्यालय ने इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है लेकिन कार्यालय की ओर से कहा गया है कि 18 जुलाई से पहले आरबीआई के नए गवर्नर का नाम घोषित कर दिया जाएगा. पनगढ़िया के कार्यालय की ओर से भी इस बात पर किसी भी तरह का कॉमेन्ट करने से इनकार कर दिया गया.

गौरतलब है कि वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ (विश्व मुद्रा कोष), डब्ल्यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) और यूएन (संयुक्त राष्ट्र) में काम कर चुके पनगढ़िया को नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों का समर्थक माना जाता है. अरविंद पनगढ़िया कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रफ़ेसर भी रहे हैं. पनगढ़िया को 5 जनवरी 2015 को देश के पहले नीति आयोग (नैशनल इंस्टिट्यूशन फॉर ट्रांसफ़र्मेशन इंडिया) का उपाध्यक्ष बनाया गया था. पनगढ़िया एशियन डिवेलपमेंट बैंक के चीफ इकॉनमिस्ट भी रह चुके हैं.

तो इन्हें बॉलिंग कोच बनाना चाहते हैं कुंबले

ऐसी खबर आ रही है कि टीम इंडिया के नये हेड कोच अनिल कुंबले चाहते हैं कि इस बार टीम के बॉलिंग कोच की कमान जहीर खान के हाथ में हो, उनकी दिली इच्छा है कि इस बार कोई इंडियन खिलाड़ी ही इस पोस्ट पर हो.

लेकिन जब इस बारे में क्रिकेट सलाहकार समिति के अहम सदस्य सौरव गांगुली से पूछा गया तो उन्होंने ऐसी किसी भी बात से इंकार कर दिया लेकिन हां उन्होंने बातों-बातों में ये इशारा जरूर किया कि इस बारे में निर्णय बीसीसीआई लेगी और वो, लक्ष्मण और तेंदुलकर का इन सारी बातों से कोई लेना-देना नहीं है.

हालांकि गांगुली ने कहा कि कुंबले खुद बॉलर हैं ऐसे में हो सकता है कि बीसीसीआई बॉलिंग कोच रखे ही नहीं लेकिन अगर इस पोस्ट के लिए जहीर फाइनल होते हैं तो निश्चित रूप में वो एक अच्छी च्वाइस होंगे लेकिन उनका नाम फाइनल होने से पहले ये देखना होगा कि वो साल भर के लिए खाली है कि नहीं.

गौरतलब है कि टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान के बारे में क्रिकेट के कई दिग्गजों ने कहा है कि उन्हें टीम इंडिया का बॉलिंग कोच बनना चाहिए क्योंकि टीम इंडिया को बॉलिंग में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

ट्विटर और इंस्टाग्राम की लत बनाएगी मालामाल

युवराज सिंह, नेहा धूपिया, साइना नेहवाल और सोनाक्षी सिन्हा जैसे सेलेब्रिटी प्रायोजित ट्वीट के जरिए कई बड़े ब्रांड का प्रमोशन करते हैं. भारतीय ही नहीं, विदेशी हस्तियां जैसे जस्टिन बीबर और किम कारदशियां किसी ब्यूटी प्रोडक्ट या फिर खाने के उत्पाद के समर्थन में इंस्टाग्राम और ट्विटर पर पोस्ट करती रहती हैं. उदाहरण के लिए सोनाक्षी ने अपने ट्विटर अकाउंट एक फोटो साझा की थी, जिसमें वह कॉफी कंपनी स्टारबक्स की कॉफी पीते हुए नजर आ रही थीं. इन हस्तियों को किसी ब्रांड के प्रमोशन के लिए प्रति ट्वीट एक लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक दिए जाते हैं.

पैसे कमाने का फंडा

इंस्टाग्राम पर कई मार्केटिंग एजेंसियां लोकप्रिय इंस्टाग्राम यूजर और विज्ञापनदाताओं के बीच एक समझौता कराती हैं. इनमें सबसे चर्चित कंपनी मोबाइल मीडिया लैब है. समझौते के तहत प्रभावशाली यूजर अपनी फोटो इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हैं. इस फोटो में वे उन ब्रांड के कपड़े या असेसरीज इस्तेमाल करते हैं, जिन ब्रांड से उन्होंने समझौता किया है. उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति ने एडिडास के जूते पहनकर फोटो खींची और पोस्ट की, साथ ही नीचे एडिडास के जूते बेचने वाली ई-कॉमर्स साइट का लिंक भी डाल दिया तो उसे देखने वाले लोगों के बीच में एडिडास की मार्केटिंग हो जाती है.

एक फोटो दिलाएगी हजारों रुपये

इंस्टाग्राम पर सेलेब्रिटी और ब्रांड के बीच समझौता कराने वाली मार्केटिंग एजेंसी मोबाइल मीडिया लैब के मुताबिक अगर आपके एक लाख फॉलोवर हैं तो एक प्रायोजित फोटो पोस्ट करने पर 700 से 900 डॉलर यानी लगभग 43 हजार से 55 हजार रुपये कमा सकते हैं. अगर किसी के पांच लाख फॉलोवर हैं तो 2,000 से 3,000 डॉलर (करीब 1.34 लाख से 2 लाख रुपये) प्रति फोटो कमाई की जा सकती है. मोबाइल मीडिया लैब की मानें तो फैशन जगत के कुछ सेलेब्रिटी तो एक फोटो पोस्ट करके 8,000 डॉलर (लगभग 5.3 लाख रुपये) तक कमा लेते हैं.

आम यूजर यूं हो सकते हैं मालामाल

ट्विटर

माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर आम यूजर भी अपने ट्वीट से पैसे कमा सकता है. कई वेबसाइट प्रायोजित ट्वीट की सुविधा देती हैं. एडडाइनेमो ऐसी वेबसाइट है, जो 100 फॉलोवर वाले ट्विटर यूजर को ट्वीट की सुविधा देती है.

हालांकि यह वेबसाइट आपके ट्वीट के प्रभाव के आधार पर भुगतान करती है. इस पर अकाउंट बनाने के लिए addynamo.com पर जा सकते हैं. साइन-अप करने के बाद अपना ईमेल एड्रेस, ट्विटर हैंडल और अकाउंट की जानकारी सबमिट कर दें.

ट्विटर के जरिए लॉग-इन करने पर आपको प्रायोजित ट्वीट के बारे में जानकारी मिलेगी कि आपको किसी खास ब्रांड के बारे में ट्वीट करना है. इस ट्वीट को यूजर अपने हिसाब से लिखेंगे. फिर इसे सबमिट कर दें. इसके बाद यह वेबसाइट बताएगी कि आपका ट्वीट ब्रांड के प्रमोशन के लिए उचित है या नहीं.

ऐसे मिलेगा पैसा

इस वेबसाइट के जरिए अगर आपने 20 डॉलर (करीब 1,350 रुपये) की कमाई कर ली तो यह रकम आपके अकाउंट में भेज दी जाएगी. वेबसाइट पर 20 डॉलर की कमाई होने के बाद ही यूजर को बैंक अकाउंट को उससे जोड़ने का विकल्प मिलेगा.

माइलाइक्स से भी कमाई

माइलाइक्स ट्विटर पर प्रायोजित ट्वीट के लिए पैसे देने वाली शानदार वेबसाइट है. आपके ट्वीट में दिए गए लिंक पर अगर एक व्यक्ति ने क्लिक किया तो यह आपको 0.42 डॉलर देगी. इसका इस्तेमाल करने के लिए mylikes.com/ पर जाएं.

इंस्टाग्राम पर सेल्फी को बनाएं विज्ञापन

अमेरिकी कंपनी स्टाइलनिटी की वेबसाइट पर सेल्फी पोस्ट कर पैसे कमाए जा सकते हैं. यह वेबसाइट आपकी सेल्फी को विज्ञापन में बदल देती है. साइट पर जितने अधिक लोग यूजर की सेल्फी को पसंद करेंगे, उसकी कमाई उतनी ही ज्यादा होगी.

ऐसे करें इस्तेमाल

सेल्फी को वेबसाइट पर पोस्ट करने के बाद उन ब्रांड को इसमें टैग कीजिए, जिनके प्रोडक्ट आपकी सेल्फी में दिख रहे हैं. उदाहरण के लिए अगर आपने ‘एडिडास’ की जैकेट पहकर कोई सेल्फी खींची है तो ‘एडिडास’ कंपनी के वेरिफाइड अकाउंट को

इस सेल्फी में टैग करें. कपड़ों के अलावा घड़ी, स्मार्टफोन आदि भी सेल्फी में शामिल किए जा सकते हैं.

यूजर उन्हीं ब्रांड को सेल्फी में टैग कर सकते हैं, जिनके प्रोडक्ट, जैसे कपड़े, घड़ी आदि उनकी सेल्फी में दिख रहे हैं. सेल्फी पोस्ट करने के लिए stylinity.com पर अकाउंट बना सकते हैं.

अकाउंट रजिस्टर करने के बाद बाईं ओर सेल्फी पोस्ट करने का विकल्प मिल जाएगा. यहां सेल्फी के साथ उन ब्रांड के कपड़े या जूतों के लिंक टैग करने पड़ेंगे, जिनके उत्पाद को यूजर ने सेल्फी में पहन रखा या वह उसके आसपास मौजूद है.

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