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लिंक्डइन पर यूं ही न करें ऑफर एक्सेप्ट

लिंक्डइन पर किसी भी प्रोफेशनल के सैकड़ों दोस्त हो जाते हैं. यहां पर किसी से भी कनेक्ट होने के रिक्वेस्ट को मान लेना बड़ी आम बात है. लिंक्डइन पर ज्यादातर लोगों को जो भी मैसेज किया जाता है वो काम से जुड़ा होता है इसलिए कई लोग प्रोफेशनल दोस्त बनाने से नहीं हिचकिचाते हैं.

लेकिन किसी के भी ऐसे रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट कर लेना क्या ठीक है. ईमेल, ट्विटर या फेसबुक पर आपको नौकरी के लिए अगर कोई कनेक्ट करेगा तो आप सावधान हो जाएंगे. लेकिन लिंक्डइन पर लोग ऐसे सावधान नहीं होते हैं और किसी भी नौकरी से जुड़े ईमेल को पढ़ना बहुत ही आम बात है.

लेकिन लिंक्डइन पर स्पैम और वायरस का कोई भी शिकार हो सकता है. यहां पर आपके काम और पढ़ाई के बारे में, ईमेल और भी काफी कुछ जानकारी मिल जाती है. पढ़ाई हो या अलग अलग जगह नौकरी, इन सभी के बारे में अक्सर तारीख के साथ जानकारी दी होती ही. ऐसी जानकारी किसी के लिए लिंक्डइन पर देना आम बात है इसलिए थोड़ा सावधानी बरतना बहुत जरूरी है.

प्रोफाइल असली नहीं

लिंक्डइन पर कनेक्ट करने के पहले किसी के भी प्रोफाइल को जरा ध्यान से देखिये. अगर उसमें ऐसा कुछ भी दिख रहा है जिसपर विश्वास करना मुश्किल है तो उससे नहीं कनेक्ट करना बढ़िया होगा. अगर किसी के प्रोफाइल में ढेर साली स्पेलिंग की गलतियां हैं तो उससे भी कनेक्ट नहीं कीजिये. हो सकता है कि वो प्रोफाइल असली नहीं हो.

अगर कोई आपसे कनेक्ट करते ही आपके ईमेल के बारे में पूछता है तो थोड़ा सावधान हो जाइए क्योंकि किसी भी हैकर के लिए वो पहला कदम होता है. उसके नाम और कंपनी के नाम के बारे में एक बार गूगल सर्च कर लीजिए ताकि जिससे आप बात कर रहे हैं वो कोई गलत काम करने की ताक में नहीं हो. एक बार उस आदमी के दूसरे सोशल नेटवर्क पर प्रोफाइल चेक कर लेने में कोई हर्ज नहीं है.

प्रोफाइल को देखने से रोकें

लिंक्डइन पर अपने प्राइवेसी टैब में बदलाव करने के बाद कुछ लोगों को अपने प्रोफाइल को देखने से रोक सकते हैं. किसी को भी अपने बारे में बिना किसी वजह के जानकारी नहीं दीजिये. अगर जानकारी मांगी जाए तो उसे सिर्फ उनके ऑफिस के ईमेल पर ऐसी जानकारी देनी चाहिए. वैसे भी, कोई भी कंपनी अगर आपसे जानकारी चाहेगी तो पहले वो आपके लिंक्डइन प्रोफाइल को देखकर आपके बारे में जानकारी तैयार कर लेगी.

लिंक्डइन दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन प्रोफेशनल नेटवर्क है और इसीलिए हैकरों की दुनिया में कई लोग इसपर नजर रखते हैं. 2012 में लिंक्डइन के लाखों सब्सक्राइबर की जानकारी किसी हैकर ग्रुप के हाथों लग गयी थी.

उसका असर ऐसा हुआ है कि चंद महीने पहले एक बार फिर उसका खतरा फैल गया था और लिंक्डइन ने अपने सभी सब्सक्राइबर को पासवर्ड बदलने को कहा था. लिंक्डइन पर अपने बारे में जानकारी की सुरक्षा के बारे में ये वीडियो आप देख सकते हैं.

पुराना स्मार्टफोन भी आ सकता है आपके काम

पुराने स्मार्टफोन को घर के लिए सिक्योरिटी कैमरा बना सकते हैं. ये तो आपने सुना और पढ़ा होगा. ऐसा करना बहुत आसान है और घर के लिए वो काम की चीज होती है. लेकिन पुराने स्मार्टफोन को कई और काम में लाया जा सकता है.

सिक्योरिटी कैमरा और घर के डिवाइस के मीडिया कंट्रोलर के अलावा ये  स्मार्टफोन  कई और काम आ सकते हैं.

– किसी भी नए ऐप को परखने के पहले पुराने  स्मार्टफोन  पर डाउनलोड करना समझदारी का काम होगा. पुराने  स्मार्टफोन  में उन्हें डाउनलोड करके कुछ दिन इस्तेमाल करके देख लीजिए कि वो आपके काम की चीज है कि नहीं.

– घर पर ऐसे  स्मार्टफोन  को रखकर उसे वीडियो चैट के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. बस गूगल हैंगऑउट,स्काइप या कई और ऐप में से कोई एक डाउनलोड कर लीजिए.

– ऑफिस के डेस्क पर पुराने  स्मार्टफोन  में अगर अर्थकैम डाउनलोड करके कनेक्ट कर दें तो दिन भर नए और नायाब तस्वीरें देखने को मिलेंगी. अगर आपके इलाके में पब्लिक कैमरे लगे हैं तो उनसे घर निकलने के पहले ट्रैफिक पर भी एक नजर डाल सकते हैं.

यूं भी हो सकता है इस्तेमाल

– स्मार्टफोन  आपके लिए पुराना हो गया हो लेकिन बच्चों के लिए फिर भी वो बहुत काम की चीज है. एंड्रायड 4.3 या उसके बाद के ऑपरेटिंग सिस्टम पर आप बच्चों के लिए अलग प्रोफाइल बना कर रख सकते हैं. उनके लिए ऐप डाउनलोड करके उनके खेलने या कुछ सीखने का इंतजाम कर सकते हैं. अगर बच्चों के टैबलेट या  स्मार्टफोन  पर समय को सीमित करना चाहते हैं तो उसके लिए जूडल्स किड मोड डाउनलोड कर सकते हैं.

– गेमिंग के शौकीनों के लिए पुराने  स्मार्टफोन  पर वीडियो गेम खेलना शायद बहुत बढ़िया नहीं होगा. लेकिन कई ऐसे गेम हैं जिनके लिए आपको बढ़िया प्रोसेसर और ढेर साड़ी स्टोरेज स्पेस नहीं चाहिए. अगर रेसिंग या स्ट्रेटेजी वाले गेम खेलने हैं जिनमें ग्राफिक्स और वीडियो काफी होता है तो ऐसे गेम के लिए ये  स्मार्टफोन  ठीक नहीं होंगे. लेकिन कई और गेम के लिए ये सबसे बढ़िया डिवाइस हैं.

– अगर टैबलेट पुराना हो गया है तो उसे किसी भी डिजिटल फोटो फ्रेम की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. डेफ्रेम नाम के ऐप को डाउनलोड कर लीजिए और उसके बाद अपने सभी फोटो को उस पर पर लोड कर दीजिए. अगर अपने फ्लिकर या इंस्टाग्राम अकाउंट से चाहें तो उससे भी अपने फोटो को इस पर स्ट्रीम कर सकते हैं.

है कोई दिक्कत तो भगवान को करो कॉल

अगर अब भारतीय क्रिकेट टीम का कोई खिलाड़ी मुश्किल में फंसता है या फिर किसी भी तरह की  जरूरत पड़ने पर वह सीधे क्रिकेट के भगवान से बात कर सकता है. खास बात ये है कि खिलाड़ियों ने इस सीक्रेट कॉ़लिंग का राज खुद नहीं खोला है बल्कि ये बात खुद मास्टर ब्लास्टर ने बताई है.

सचिन तेंदुलकर भले ही टीम का हिस्सा ना हो लेकिन उनका अनुभव और उनकी सीख टीम इंडिया के काम आ रही है. उन्होंने कहा कि मैं टीम के खिलाड़ियों के लिए बड़े भाई की तरह हूं. मैंने उन्हें अपने फोन नंबर दिए है और मुझे काफी फोन भी आते है. साथ ही जो लोग मझे फोन करते हैं इसे लेकर हम बाहर बात नहीं करते हैं.

वहीं नई दिशा में बढ़ रही टीम इंडिया को भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे कामयाब गेंदबाज अनिल कुंबले जैसे खिलाड़ी का साथ हेड कोच के तौर पर मिला है तो दूसरी तरफ क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर पर्दे के पीछे एक तरह से बैटिंग कोच की भूमिका भी निभाते रहेंगे.

कुंबले को लेकर सचिन का कहना है कि उनके पुराने साथी अनिल कुंबले भी कोच के तौर पर अपनी पहली सीरीज में कामयाबी हासिल करेंगे. सचिन ने कहा कि मैंने कुंबले के साथ क्रिकेट खेला है तो मुझे अच्छे से पता है कि वो क्या सोचते हैं और वो मैच से पहले कैसे तैयार होते हैं.

तेंदुलकर का मानना है कि मौजूदा भारतीय टीम को कुंबले जैसे शख्सियत की मौजूदगी से काफी फायदा होगा. उसकी वजह है कि जिस अंदाज में कुंबले ने अपनी क्रिकेट पारी खेली और असाधारण कामयाबी हासिल की. उस फॉर्मूले को अपनाना किसी के लिए भी मुश्किल नहीं होगा.

इंडियाबुल्स ग्रुप पर आईटी की कड़ी कार्रवाई

इंडियाबुल्स ग्रुप पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का बड़ा छापा पड़ा है. देशभर में ग्रुप के प्रमोटरों और दफ्तरों पर आयकर विभाग के छापे पड़ रहे हैं. खबरों के मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर जारी छापों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के करीब 1000 अधिकारी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि ग्रुप के प्रमोटरों के बीच हुए बंटवारे को लेकर गड़बड़ियां सामने आई हैं. इसी वजह से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के छापे पड़ रहे हैं.

गौरतलब है कि इंडियाबुल्स देश का बड़ा बिजनस हाउस है जो रियल एस्टेट, फाइनैंशल सर्विसेज, सिक्यॉरिटीज और पावर सेक्टर में काम करता है. जुलाई 2014 में ग्रुप के प्रमोटरों ने कंपनी को रीस्ट्रक्चर करने के लिए इसमें बंटवारे का फैसला लिया था. प्रमोटरों का यह फैसला कंपनी खड़ा करने के लिए साथ आने के 14 साल बाद आया था.

रीस्ट्रक्चरिंग के तहत चेयरमैन और को-फाउंडर समीर गहलौत का हाउजिंग फाइनैंस, रियल एस्टेट, सिक्यॉरिटीज और होलसेल ट्रेडिंग बिजनस पर नियंत्रण रहा. इस तरह गहलौत के हाथों में इंडियाबुल्स हाउजिंग फाइनैंस लिमिटेड, इंडियाबुल्स रियल एस्टेट लि., इंडियाबुल्स सिक्यॉरिटीज लि. और इंडियाबुल्स होलसेल सर्विसेज लि. का संचालन आ गया था.

तो 90% तक घट जायेंगे आपके डेटा कॉस्ट

दूरसंचार नियामक ट्राई ने आज गैर-दूरसंचार कंपनियों द्वारा सार्वजनिक वाई-फाई लगाए जाने की अनुमति देने पर लोगों के विचार मांगे हैं. ट्राई ने कहा है कि इस तरह के सस्ते वाई-फाई ढांचे से इंटरनेट की कीमतों में 90 फीसदी तक की कमी आ सकती है और तेज गति की इंटरनेट सुविधा भी मिलेगी.

सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्कों के माध्यम से ब्राडबैंड प्रसार पर अपने एक परिचर्चा पत्र में ट्राई ने कहा है कि सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क का अर्थ वृहद है और इसका आशय लाइसेंस धारी सेवा प्रदाताओं द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर वाई-फाई हॉटस्पॉट बनाए जाने तक सीमित नहीं है. इसमें ऐसे छोटे उद्यमी या कोई बेहद छोटी संस्था भी शामिल हो सकती है जो लोगों के साझा प्रयोग के लिए वाई-फाई नेटवर्क का विस्तार करने में भागीदारी कर सकती है. नियामक ने इस संबंध में लोगों से 10 अगस्त तक अपने विचार साझा करने को कहा है.

दूरसंचार कंपनियों के संगठन सीओआईए ने ट्राई के समान स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के प्रस्ताव का समर्थन किया है. संगठन का कहना है कि सरकार को ट्राई के समान स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के सुझाव पर अमल करना चाहिए या अगर अंतरिम भारांश वाले औसत फार्मूले को अपनाने का फैसला करती है तो उसे इस संबंध में स्पष्ट समय सीमा तय करनी चाहिए.

बदल सकता है बल्ला!

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग के बल्ले के आकार को लेकर दिए बयान के बाद अब संभव है कि बल्ले के आकार में बड़े बदलाव देखने को मिले. बल्लेबाजों के बढ़ते प्रभाव के बीच मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) की विश्व क्रिकेट समिति ने मंगलवार को बल्ले की लंबाई और चौड़ाई को सीमित करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं.

क्रिकेट की नियामक संस्था एमसीसी की 2014 में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पिछली शताब्दी के मुकाबले बल्ले की चौड़ाई में 300 प्रतिशत का इजाफा हुआ है जिसका मतलब है कि गलत शॉट भी सीमारेखा तक पहुंच सकता है.

अगर नियम बदले जाते हैं तो अक्टूबर 2017 से बदले हुए बल्ले के साथ बल्लेबाज मैदान में उतरे.

क्या कहते हैं नियम

अब तक क्रिकेट में बल्ले की लंबाई और चौड़ाई के ही नियम थे जिसके चलते कई बल्लेबाजों के बल्ले का एज और पीछे की तरफ से काफी चौड़े होने लगे थे. वार्नर का बल्ला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इसी को देखते हुए पोंटिंग ने वार्नर की आलोचना भी की थी.

क्या है नया नियम

अब नए नियम में बैट की पूरी बनावट (overall depth ) को 60mm से 65mm के बीच निर्धारित किया जा सकता है. वहीं बल्ले के एज को 35mm से 40mm के बीच निर्धारित किया जा सकता है.

जहां तक बल्ले के आकार (overall depth ) की बात करें तो यह 1980 के 18 mm से पहुंच कर यह 80mm तक पहुंच चुकी है, जिसके कारण अब करारे शॉट देखने को मिलते हैं.

इन्हीं बदलाव को देखते हुए एमसीसी के सदस्यों ने (जिसमें रिकी पोंटिंग भी शामिल हैं) बल्ले को लेकर नए नियम की सिफारिश की है.

वार्नर के समर्थन में सचिन

वार्नर ने पिछले सप्ताह कहा था कि चौड़े बल्ले की अपेक्षा सपाट बल्ले के कारण बल्लेबाजों को पिच पर ज्यादा फायदा हो रहा है. तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया के इस सलामी बल्लेबाज का समर्थन किया है.

तेंदुलकर ने कहा, “पिचों को बदलने की जरूरत है. वह गेंदबाजों के लिए मददगार होनी चाहिए. टी-20 क्रिकेट में महान गेंदबाज पर भी बल्लेबाज रिवर्स स्वीप शॉट खेलते हैं. एकदिवसीय में तीन सौ रन भी जीत के लिए काफी नहीं हैं.”

उन्होंने कहा, “इसलिए कम से कम खेल का एक प्रारूप ऐसा होना चाहिए जहां गेंदबाजों को अपना कौशल दिखाने का मौका मिले.”

तेंदुलकर ने कहा, “किसी के लिए भी पांच दिनों तक टेस्ट मैच देखना मुश्किल है, इसलिए आपको पिच में बदलाव करना होगा. मुझे नहीं लगता है कि इसका बल्ले से कोई लेना देना है. मुझे भरोसा है कि पैनल इस बारे में विचार करेगा.”

बैंकों में 29 जुलाई को हड़ताल

सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के बैंक कर्मचारियों ने 29 जुलाई को हड़ताल करने का फैसला किया है. ये बैंककर्मी केंद्र सरकार द्वारा बैंकिंग सुधार नीति में 'जनविरोधी' बदलावों का विरोध कर रहे हैं. बैंककर्मियों के संघ (एआईबीईए) ने इसकी जानकारी दी.

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) देश के नौ ट्रेड यूनियनों से मिलकर बना है और 10 लाख बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है. इसकी अगुवाई में ही हड़ताल बुलाई गई है. बैंक कर्मी की तरह की मांगें रख रहे हैं जिनमें सरकारी बैंकों का निजीकरण नहीं करने और ऐसे बैंकों में निजी पूंजी बढ़ाने जैसी मांगें शामिल हैं. ये बैंकिंग सेक्टर में एफडीआई का भी विरोध कर रहे हैं.

ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉयीज असोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने एक बयान में कहा कि इन मुद्दों के अलावा यूनियन्स क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों एवं कोऑपरेटिव बैंकों के निजीकरण तथा बैंकों का एक-दूसरे में कॉन्सॉलिडेशन और मर्जर का विरोध कर रहे हैं. इन्हीं मुद्दों पर (यूएफबीयू) की ओर से आयोजित बैठक में एक दिन की हड़ताल पर जाने का फैसला लिया गया है.

क्या अनिल शर्मा इतिहास को दोहरा पाएंगे?

14 जुलाई 2016 को एक नया इतिहास रचा जा रहा है.14 जुलाई 1980 को गीता दत्त के अति चहेते ज्योतिषी व फिल्म निर्माता के.सी शर्मा ने अपने 21 वर्षीय बेटे अनिल शर्मा को बतौर निर्देषक फिल्म ‘श्रृद्धांजली’ से लाँच किया था. फिर जब 1981 में फिल्म ‘श्रृद्धांजली’ रिलीज हुई, तो इस फिल्म ने सफलता के नए रिकार्ड बनाए थे.

उसके बाद बतौर निर्देषक अनिल शर्मा की दूसरी फिल्म ‘बंधन कच्चे धागों की’ अफसल रही. मगर ‘हुकूमत’ से वह फिर से चर्चा में आए. उसके बाद उन्होने 2001 में ‘गदरःएक प्रेम कथा’ जैसी फिल्म का निर्देषन कर नया इतिहास रचा था.

‘गदरःएक प्रेम कथा’ और ‘लगान’ एक साथ एक ही दिन रिलीज हुई थी. इन दोनों फिल्मों ने ही बॉलीवुड में सिनेमा को नयी राह दी थी. इस फिल्म में अनिल शर्मा ने अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा से छोटे बच्चे जीत का किरदार निभवाया था.

ज्ञातब्य है कि उत्कर्ष शर्मा, के सी शर्मा का पोता है. बहरहाल, जीत लोगों के दिलो दिमाग में बस गया था. अब जबकि ‘गदरःएक प्रेम कथा’ के रिलीज के 15 साल पूरे हो चुके है. इसी के साथ जीत का किरदार निभाने वाले अभिनेता उत्कर्ष शर्मा 21 साल के हो गए हैं. तो अब इतिहास दोहराने जा रहा है.

14 जुलाई1980 के बाद अब 14 जुलाई 2016 को के.सी शर्मा अपने पोते और अनिल शर्मा अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा को बतौर हीरो लांच कर रहे हैं. इसके लिए अनिल शर्मा बतौर निर्देषक फिल्म ‘जीनियस’ की घोषणा कर रहे हैं, जिसमें उत्कर्ष शर्मा मुख्य भूमिका निभाएंगे. इस फिल्म के लिए हीरोईन की तलाश जारी है. यानी कि 14 जुलाई 2016 को नया इतिहास रचा जाएगा.

अनिल शर्मा ने ‘सरिता’ से खास बातचीत में कहा-‘‘जब में 21 वर्ष का था, तब मेरे पिता ने मुझे बॉलीवुड में लाँच किया था. अब मैं अपने पिता के कहने पर 14 जुलाई को ही अपने बेटे उत्कर्ष को बतौर हीरो बॉलीवुड में लांच कर रहा हूं. मुझे अपने बेटे में उसके बचपन में रही अभिनय के गुण नजर आ गए थे. इसीलिए मैंने उससे फिल्म ‘गदरः एक प्रेम कथा’ में अभिनय करवाया था. अब वह 21 वर्ष का हो गया है. पिछले पांच वर्ष से वह अमरीका में रहते हुए फिल्म मेकिंग की ट्रेनिंग ले रहा था. उसने अमरीका में कुछ लघु फिल्में निर्देषित की हैं. वह एक बेहतरीन अभिनेता है. उसी के लिए मैं 14 जुलाई को फिल्म ‘जीनियस’ शुरू कर रहा हं. वैसे बाद में उत्कर्ष अभिनय के साथ-साथ निर्देषन में भी कदम रखेगा.’’

ज्ञातब्य है कि मथुरा के मशहूर ज्योतिषी रहे स्व.पं. दयालचंद जोशी के घर सिनेमा वालों का तांता लगा रहता था. मथुरा में पं. दयालचंद जोशी से मिलने के बाद वह अपने साथ प. दयालचंद जोशी के बेटे व ज्योतिषी के. सी शर्मा को मुंबई लेकर आयी थीं.

लंबे समय तक के सी शर्मा बॉलीवुड की हस्तियों को ज्योतिषी के रूप में सलाह देते रहे और फिर 14 जुलाई 1980 को उन्होंने अपने 21 वर्षीय बेटे अनिल शर्मा को बॉलीवुड में फिल्म निर्देषक के रूप में लाँच किया था. अब 21 जुलाई 2016 को वह अपने पोते उत्कर्ष शर्मा को बतौर हीरो बॉलीवुड में लांच कर रहे हैं.

जमीनी लड़ाई में फिल्मी चेहरा

कांग्रेस के लिये उत्तर प्रदेश की लड़ाई कितनी कठिन है यह कांग्रेस की चुनावी टीम को देखकर लगने लगा है. कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की अगुवाई करने वाला जमीनी जनाधार वाला कोई नेता नहीं मिल रहा. यही वजह है कि प्रदेश प्रभारी के रूप में उसे गुलाम नबी आजाद को आगे लाना पड़ा जो जम्मू कश्मीर की लड़ाई हार चुके हैं. प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस ने राज बब्बर को मैदान में उतारा है.

राज बब्बर फिल्मी चेहरा हैं. उत्तर प्रदेश में उनकी न तो कोई जातिगत पहचान है और न ही कोई जमीनी जनाधार. वह उत्तर प्रदेश से लोकसभा का चुनाव जीत चुके है. समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव को उपचुनाव में हरा चुके हैं.यही एक उनकी छवि है. समझने वाली बात यह है कि अब हालात बदल चुके है. तब से अब में बहुत बदलाव आ चुका है. समाजवादी पार्टी अब सत्ता में है. कांग्रेस पूरे देश से करीब करीब सत्ता से बाहर हो चुकी है.

राज बब्बर को केवल एक क्षेत्र नहीं जीतना पूरा उत्तर प्रदेश उनके सामने है. राज बब्बर के रूप में कांग्रेस ने अपने नेता में एक धर्म निरपेक्ष छवि दिखाने की कोशिश की है. राज बब्बर का राजनीतिक सफर जनता दल के साथ उस समय के नेता वीपी सिंह से शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी में कोई फिल्मी चेहरा नहीं होता था जब राज बब्बर सपा में रहे. मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह से उनके करीबी रिश्ते रहे है.

1996 में वह अटल बिहारी वाजपाई के खिलाफ सपा से ही लोकसभा का चुनाव लड़ा. अमर सिंह के साथ खटपट होने के बाद वह 2006 में सपा से बाहर चले गये. वहां से वह कांग्रेस गये. 2014 में वह गाजियाबाद से लोकसभा का चुनाव लड़े और हार गये. अब 2017 के लिये वह कांग्रेस के सेनापति के रूप में उत्तर प्रदेश भेजे गये है.

उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई में कांग्रेस को जनाधार वाले नेता की तलाश थी. उसने राज बब्बर के रूप मे जनता के बीच एक फिल्मी चेहरा उतारा है. जिसके बल पर वोट हासिल करना बहुत मुश्किल काम है. ऐसे में राज बब्बर कांग्रेस का कितना भला कर पायेंगे यह तो बाद में पता चल सकेगा. राज बब्बर को चुनावी कमान देकर कांग्रेस ने जता दिया कि उसने अपने स्थानीय नेताओं पर भरोसा नहीं है.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में जिन नामों की चर्चा कर रही है वह भी उत्तर प्रदेश के बाहर के हैं. जब तक कांग्रेस स्थानीय नेताओं पर भरोसा नहीं करेगी तब तक उत्तर प्रदेश में चुनाव जीतना बहुत मुश्किल होगा.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास प्रमोद तिवारी जैसा जनाधार वाला नेता है. जो लगातार विधानसभा के चुनाव जीतता आ रहा है. उनका प्रदेश में नाम है और वह कांग्रेस संगठन को तेजी दे सकते हैं. कांग्रेस के गुटबाजी के चलते प्रमोद तिवारी के नाम पर विचार नहीं किया जाता है.

प्रमोद तिवारी कांग्रेस को चुनावी मैदान में मजबूती से खड़ा कर सकते हैं. उनका संपर्क पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के नेताओं से है. कांग्रेस के रणनीतिकार चाहते हैं कि पार्टी विधानसभा चुनाव के पहले अपने मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा करे. कांग्रेस के लिये यह करना मुश्किल काम है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जीत की उम्मीद न के बराबर है. अगर कांग्रेस किसी तरह से मुख्य लड़ाई में शामिल हो जाये यही बड़ी उपलब्धि हो सकती है. प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस ने फिल्मी चेहरे पर दांव लगाकर अपनी कमजोरी उजागर कर दी है. कांग्रेस के पास नये चेहरों का अभाव है.

डा डा डिंग: खेल से बदलें जिंदगी का रुख

क्या आपने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का एक नया विज्ञापन वीडियो ‘डा डा डिंग’ देखा, जिसमें वे महिला खिलाड़ियों को प्रेरित करती नजर आ रही हैं. यह वीडियो  खेल में  महिलाओं  को प्रतिभागिता  बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है.

तीन मिनट के इस विज्ञापन में राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल हैं, जो 2010 में केवल 15 वर्ष की थीं, सबसे कम उम्र की भारतीय हॉकी टीम की खिलाड़ी बनीं और  खेल  ने  जहां  एक ओर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और वहीं उनके सपनों को भी विस्तार रूप प्रदान किया.

एक छोटे गांव से आने वाली रानी रामपाल  ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर जीत  के साथ उनका आत्मविश्वास और बढ़ता चला गया और आज  वह दुनिया की हर चुनौती का सामना करने  के लिए तैयार हैं.

रानी रामपाल के अलावा फुटबॉलर ज्योति आन बुरेट और क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना और शुभलक्ष्मी शर्मा भी  आपको इस वीडियो में नजर आएंगी. जहां शुभलक्ष्मी शर्मा एक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी हैं, वहीं स्मृति भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए खेलती हैं. अगस्त 2014 में उन्होंने अपना पहला मैच इंग्लैंड की टीम के खिलाफ खेला. इस पहले मैच में ही उन्होंने अर्धशतक बनाकर भारतीय टीम को जीत दिलाने में मदद की.

इसी तरह ज्योति आन बुरेट फुटबॉल खिलाड़ी हैं, यूनिवर्सिटी ऑफ़ एक्सेटर, इंग्लैंड से हेल्थ तथा स्पोर्ट्स में मास्टर करने के बाद ज्योति ने कॉर्पोरेट जगत को तवज्जो न देकर फुटबॉल को कॅरियर बनाया.

हरमनप्रीत कौर भी एक अन्य  महिला  क्रिकेटर हैं, जो  भारत की ओर से दो टेस्ट मैच, 49 वनडे इंटरनेशनल और 53 टी-20 मैच खेल चुकी हैं और कई मैच में भारतीय टीम की कप्तानी भी  कर चुकी है.

वीडियो की मेन हाईलाइट बॉलीवुड दीवा दीपिका पादुकोण, जो पहले राष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुकी हैं, उनका मानना है कि मैं आज जो कुछ भी हूं, जो कुछ भी मैंने हासिल किया है उस सबके पीछे खेल का बहुत बड़ा योगदान है. मैंने कड़ी मेहनत,  प्रतिबद्धता, ध्यान, समर्पण, अनुशासन,  सब खेल के माध्यम से ही सीखा है. स्पोर्ट्स ने मुझे सफलता और विफलता दोनों को सम्भालना सिखाया है. यह खेल ही है जिसकी वजह से मैंने लड़ना सीखा है. इसकी वजह से ही आज मैं अजेय हूं.

इस म्यूजिक वीडियो में आने वाली पीढ़ी से अपील की गई है कि वे पुरानी परंपराओं को तोड़कर अपने जीवन में खेल को जोड़ते हुए सफलता की नई कहानी लिखें. दीपिका पादुकोण महिला खिलाड़ियों की सराहना करती नजर आ रहीं हैं.

जोश से भरा यह विज्ञापन देश की युवतियों को कुछ कर दिखाने का जज़्बा अपने भीतर पैदा करने के लिए प्रेरित कर रहा है. साथ ही यह भी बता रहा है कि फिटनेस की ओर पहला कदम हमेशा ही कठिन होता है, लेकिन अगर एक बार ठान लिया जाए तो कोई मंजिल दूर नहीं.

इस वीडियो में प्रेरित करने वाली इन सभी महिलाओं की ज़िन्दगी भले ही एक दूसरे से काफी अलग हो परन्तु सफलता तक पहुंचने का उनका रास्ता एक ही था और वह था खेल. इनमें से प्रत्येक खिलाड़ी  ने काफी छोटी उम्र में पुरुषों के वर्चस्व वाले खेल  में कदम रखा और अंततः जीत हासिल की.

इन सभी खिलाडियों की आज की सफलता बयां कर रही है कि  जब कोई लडक़ी या महिला किसी खेल को अपनाती है तो वह खेल कैसे उसकी पूरी जिंदगी बदल देता है और वह कैसे अपनी कमजोरियों पर नियंत्रण पाने के साथ साथ  इच्छा शक्ति पर भी विजय पा लेती है.

महिलाऐं हमारे देश की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं और  ऐतिहासिक तौर पर भारतीय महिलाओं  की भूमिका में काफ़ी अंतर आया है पहले जहाँ  परम्परागत तौर  पर नारी की भूमिका घरेलू कामों से जुडी़ रहती थी  और उन्हें  खेल कूद से दूर रखा जाता था लेकिन आज की महिलाओं ने इस क्षेत्र में भी अपना लोहा मनवा लिया है. 

पांच बार ‍विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता की जेता मैरी कॉम,  दुनिया की शीर्ष वरीयता प्राप्त महिला बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल, भारत की पहली विकलांग महिला खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा जिन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई एक कृत्रिम पैर के साथ की. भले ही खेलों में महिलाएं लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं.

लेकिन आज भी हमारे देश में जब सामान्य परिवार की एक लड़की खेल को अपना कॅरियर बनाने को सोचती है तो उसे  घर परिवार के सामने अपनी काबिलियत साबित करनी पड़ती है, तमाम बाधाओं से लड़ना पड़ता है.

 किसी तरह अगर वह घर वालो शादी से पूर्व घर वालों को मना भी ले तो ज़रूरी नहीं कि विवाह के बाद उसका पति या उसके ससुराल वाले उसके इस पैशन को आगे बढाने में उसकी मदद करें.

वैश्विक स्तर पर खेलों में भारतीय महिलाओं की सफलता के बावजूद देश में लड़कियों को खेलों के क्षेत्र में जाने देने को लेकर उत्साह में कमी है. लड़कियों को अभी काफी लम्बा रास्ता तय करना है. हम उम्मीद करते हैं कि ‘डा डा डिंग ‘जैसे वीडियो रुपी ये छोटे छोटे प्रयास भविष्य में अधिक से अधिक लड़कियों को खेल में आगे आने के प्रेरित करेंगे.

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