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ईपीएफओ से पीएफ निकालना हुआ आसान

रिटायरमेंट फंड मैनेज करने वाली संस्था ईपीएफओ ने उस प्रोविज़न में रियायत दी है, जिसमें पीएफ विदड्रॉल जैसे सेटलमेंट क्लेम्स के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) देना जरूरी था. यह प्रावधान ऐसे सभी सब्सक्राइबर्स के लिए था, जिन्होंने 1 जनवरी 2014 के बाद मेंबरशिप छोड़ी है.

एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (ईपीएफओ) ने क्लेम ऐप्लिकेशन फॉर्म्स पर यूएएन देना पिछले साल दिसंबर से अनिवार्य बना दिया था. एक अधिकारी ने बताया, 'इस शर्त में रियायत देने का फैसला ऐसे मेंबर्स की मुश्किलों को देखते हुए किया गया है, जिन्हें यूएएन अलॉट नहीं किया गया था. यूएएन को शुरुआत में ऐसे सभी मेंबर्स को अलॉट किया गया था, जो जनवरी से जून 2014 के दौरान सब्सक्राइबर्स थे. यह फैसला ऐसे मेंबर्स को राहत देने के लिए किया गया है, जिन्होंने 1 जनवरी 2014 से पहले नौकरी छोड़ दी थी.'

यह फैसला किया गया है कि क्लेम फॉर्म बिना यूएएन के भी स्वीकार किया जा सकता है अगर मेंबर के छोड़ने की तारीख 1 जनवरी 2014 से पहले की है. इसके अलावा, कुछ मामलों में ऑफिसर इंचार्ज अपनी समझ से बिना यूएएन के क्लेम फॉर्म जमा करने की इजाजत दे सकता है.

यूएएन को क्लेम फॉर्म पर कोट करना इस मकसद के साथ अनिवार्य बनाया गया था कि इससे गलतियों की आशंका कम होगी. चूंकि यूएएन आधार, बैंक अकाउंट और अन्य चीजों से जुड़ा रहता है, ऐसे में यह क्लेम दाखिल करने वालों को बिना किसी दिक्कत के अपना बकाया हासिल करने में मदद देता है. ईपीएफओ ने जुलाई 2015 में यूएएन नंबर देना शुरू किया था. वह मेंबर्स को अब तक चार करोड़ यूएएन अलॉट कर चुका है. मेंबर्स अपना यूएएन खुद भी ऐक्टिवेट कर सकते हैं और इसे किसी अन्य ऑनलाइन बैंक अकाउंट की तरह मैनेज कर सकते हैं.

अब कटे फटे नोट निशुल्क होंगे एक्सचेंज

बैंकों की ग्राहक सेवा में और सुधार लाने के लिये आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वह 5,000 रूपए मूल्य तक के नोटों की निशुल्क अदला-बदली करें. अदला-बदली किए जाने वाले नोटों की अधिकतम सीमा 20 होगी. सरल शब्दों में कोई भी व्यक्ति या तो 20 कटे-फटे नोट या 5000 रुपए मूल्य तक के नोटों को बैंक से निशुल्क बदल सकता है.

रिजर्व बैंक ने कहा है कि यदि बदले जाने वाले ऐसे पुराने नोटों की संख्या 20 से ज्यादा है तो बैंक शुल्क लगा सकते हैं. खराब और पुराने नोटों को बदलने की सुविधा प्राधिकृत बैंक शाखाओं और बिना-चेस्ट (खजाना) वाली शाखाओं पर उपलब्ध है.

बैंकों से कहा गया है कि यदि उन्हें 5,000 रूपए मूल्य से अधिक अथवा 20 से ज्यादा पुराने नोट बड़ी संख्या में दिये जाते हैं, तो वह यह कहकर उन्हें स्वीकार कर सकते हैं कि इनका मूल्य बाद में क्रेडिट कर दिया जायेगा. बड़ी संख्या में मिलने वाले नोटों के एवज में बैंक सेवा शुल्क ले सकते हैं. यदि दिये गये नोटों का मूल्य 50,000 रूपए से अधिक है तो बैंकों को सावधनी बरतनी चाहिये.

बिना-चेस्ट वाली बैंक शाखाओं से कहा गया है कि वह प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पांच नोट को प्रक्रिया के अनुरूप देख जांच कर उसका विनिमय मूल्य काउंटर पर दें.

पाकिस्तान में टैलेंट नहीं है: अफरीदी

एक इंटरव्यू में जब शाहिद अफरीदी से पूछा गया कि टीम सेलेक्शन में मेरिट को कितनी अहमियत दी जाती है, तो अफरीदी का कहना था, "जिस तरीके का टैलेंट इस वक्त सामने आ रहा है और जिसके हवाले से हम बहुत सी बातें करते हैं कि पाकिस्तान में बड़ा टैलेंट है. सॉरी पाकिस्तान में अभी वो टैलेंट नहीं है, जिस लेवल के क्रिकेट खिलाड़ियों कि डिमांड है."

उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पाकिस्तान क्रिकेट टीम में नहीं चुना गया तो कोई इशू नहीं है. यानी ये उनके लिए कोई मायने नहीं रखेगा.

यह पूछा जाने पर कि पाकिस्तान महिला क्रिकटे टीम को बहेतर बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए, अफरीदी ने कहा कि पहले मर्दों की टीम को तो ठीक कर लें. उनका कहना था कि जब मर्दों के लिए ही सहूलियत मुहैया नहीं है तो जरा सोचिए औरतें किन हालात का सामना कर रही होंगी.

अपनी रिटायरमेंट पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वो पहले चाहते थे कि एक अच्छी टीम बनाकर रिटायर हों. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. उनका कहना था कि एक खिलाड़ी की हैसियत से वो दूसरे पाकिस्तानी खिलाड़ियों से बहुत बेहतर हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तानी क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में बहुत सुधार हो सकता है लेकिन वो इसके बारे में कुछ कहेंगे तो उन्हें नोटिस मिल जाएगा.

जौहरियों को सरकार का तोहफा

आभूषण को उत्पाद शुल्क के दायरे में लाने का विरोध कर रहे सर्राफा कारोबारियों को मोदी सरकार ने बड़ी राहत दी है. अब गत वर्ष 15 करोड़ रुपये से कम का कारोबार करनेवाले ज्वैलर्स को उत्पाद शुल्क के लिए पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

पहले यह सीमा 12 करोड़ रुपये थी. साथ ही चालू वित्त वर्ष में 10 करोड़ रुपये से कम का कारोबार रहने तक ज्वैलर्स को उत्पाद शुल्क से छूट रहेगी. सरकार ने यह भी साफ किया है कि जॉब वर्कर (ज्वैलरी के कारीगरों) के यहां उत्पाद शुल्क के अधिकारी छापेमारी नहीं करेंगे. इसके अलावा सेंपल के तौर पर ज्वैलरी एक जगह से दूसरी जगह भेजने पर कोई उत्पाद शुल्क नहीं लगेगा और न ही उत्पाद शुल्क अधिकारी ट्रांजिट के दौरान ज्वैलरी चैक करेंगे.

वहीं पुरानी ज्वैलरी से नयी ज्वैलरी बनवाने पर ग्राहकों को सिर्फ वैल्यू एडीशन की राशि पर उत्पाद शुल्क का भुगतान करना होगा. वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि सरकार ने ज्वैलर्स के साथ विचार विमर्श के लिए गठित की गयी उप समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है. मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने समिति की उस सिफारिश को भी स्वीकार कर लिया है जिसके तहत एक करोड़ रुपये से कम ड्यूटी का भुगतान करने वाले ज्वैलर्स की इकाइयों का प्रथम दो वर्षों तक उत्पाद शुल्क का ऑडिट नहीं किया जायेगा.

मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने उत्पाद शुल्क का पंजीकरण कराने के लिए जरूरी कारोबार की सीमा को भी बढ़ा दिया है. जिन ज्वैलर्स का कारोबार गत वित्त वर्ष में 15 करोड़ रुपये से कम था,उन्हेंउत्पाद शुल्क के लिए पंजीकरण लेने की आवश्यकता नहीं होगी. पहले यह सीमा 12 करोड़ रुपये थी.

इसी तरह जिन ज्वैलर्स का कारोबार मौजूदा वित्त वर्ष में 10 करोड़ रुपये को पार करता है तो उन्हें उत्पाद शुल्क के लिए पंजीकरण कराना होगा. पहले यह सीमा 6 करोड़ रुपये थी. साथ ही अगर किसी ज्वैलर्स का कारोबार मार्च 2016 में 85 लाख रुपये से अधिक है तो उसे पंजीकरण कराने की जरूरत होगी. सरकार ने दस करोड़ की कारोबारी सीमा ज्वैलर्स की मांग पर लागू की है. इसकी कमेटी ने सिफारिश नहीं की थी.

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट 2016-17 में ज्वैलरी पर एक प्रतिशत (इनपुट और कैपिटल गुड्स क्रेडिट  के बिना) उत्पाद शुल्क लगाने का एलान किया था जिसका देशभर में ज्वैलर्स ने विरोध किया था.

सरकार के फैसले का स्वागत

ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी ट्रेडर्स फेडरेशन (जीजेएफ) के चेयरमैन जीवी श्रीधर ने कहा, ‘जीजेएफ की आरे से हम रत्न व आभूषण उद्योग को सरकार के समर्थन की सराहना करते हैं. इससे व्यापार बढ़ेगा क्योंकि उद्योग को उत्पाद शुल्क लगाने के बारे में स्पष्टीकरण का इंतजार था.’

तो ये निभायेंगे कपिल का किरदार

बहुत कम ऐसी फिल्में होती हैं, जो बायोपिक बेस्ड हों और बॉक्स ऑफिर पर न चलें. एक अजहर को छोड़ दें, तो खिलाडिय़ों पर तो अब तक जितनी भी बायोपिक बनी हैं, उन्हें दर्शकों ने काफी पसंद किया है. वैसे इन दिनों बॉलीवुड में क्रिकेट खिलाडिय़ों की बायोपिक पर फिल्म बनाने की होड़ लगी हुई है. पहले मोहम्मद अजहरुद्दीन के जीवन पर आधारित अजहर आई. महेंद्र सिंह धोनी पर भी एमएस धोनी: द अन्टोल्ड स्टोरी लगभग बनकर तैयार है और अब चर्चा कपिल देव की बायोपिक पर है.

चर्चा है कि 1983 में भारत की वर्ल्ड कप जीत पर भी फिल्म बनने जा रही है. रमन राघव के डायरेक्टर अनुराग कश्यप इस पर फिल्म बनाने की प्लानिंग कर चुके हैं. इस फिल्म में 1983 के दौरान टीम के हालात. वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचने की खुशी और प्रेशर… आखिर में वेस्टइंडीज टीम पर जीत तक सारा रोमांच दिखाया जाएगा. फिल्म में कपिल देव, जो उस वक्त टीम के कैप्टन थे एक अहम कड़ी होंगे. वो कपिल देव ही थे  जिन्होंने फाइनल मैच में विवियन रिचड्र्स को काफी दूर तक भागकर कैच आउट किया था.

ये मोमेंट एक ऐसा गोल्डन मोमेंट था, जिसे कोई भी फैन फिल्म में मिस नहीं करना चाहेगा. अब सवाल यह है कि बॉलीवुड में ऐसा कौन एक्टर है, जो कपिल देव की भूमिका निभाने में समर्थ है? दरअसल, इस फिल्म में कपिल देव पर सर्वाधिक फोकस रहेगा, क्योंकि फिल्म के केंद्र में कपिल ही होंगे. ऐसे में व्लर्ड कप के अलावा भी कपिल की जिंदगी के कुछ हिस्सों को भी जगह दी जाएगी. खबरों की मानें, तो कपिल देव के रोल के लिए अर्जुन कपूर से सम्पर्क किया गया है. चूंकि इन दिनों अर्जुन अपनी आगामी फिल्म हॉफ गर्लफ्रैंड की शूटिंग में बिजी हैं. हाल ही वो राजस्थान में शूटिंग शेड्यूल खत्म करके मुंबई लौटे हैं. सूत्रों के अनुसार, अर्जुन फिल्म की कहानी सुनने के बाद इस पर हां या ना कहेंगे.

‘रुस्तम’ का टाइटल ट्रैक रिलीज

अक्षय कुमार की अगली फिल्म 'रुस्तम' का टाइटल ट्रैक रिलीज हो गया है. 'रुस्तम वही' नाम के इस गाने में अक्षय कुमार की रुस्तम पावरी के किरदार में पूरी जर्नी की झलक दिखाई गई है.

सस्पेंस और थ्र‍िल से भरपूर इस गाने में रुस्तम पावरी की जिंदगी के कई पहलूओं को दिखाया गया है. गाने में 1950 के दशक के लाइफस्टाइल की झलक भी दिखाई गई है. सुक्रिती कक्कड़ ने इस फास्ट ट्रैक को आवाज दी है. मनोज मुनताशिर ने इस गाने को लिखा है.

टीनू सुरेश देसाई के निर्देशन में बनी यह फिल्म केएम नानावटी बनाम महाराष्ट्र राज्य के केस पर आधारित है. इस फिल्म में अक्षय नेवी ऑफिसर की भूमिका में हैं. यह फिल्म रितिक रोशन स्टारर फिल्म 'मोहेन जोदाड़ो' के साथ 12 अगस्त को रिलीज होने जा रही है.

खुद हिस्ट्री में फेल होते थे आशुतोष गोवारिकर

जल्द अपनी आने वाली फिल्म 'Mohenjo Daro' को पर्दे पर उतारने के लिए तैयार जाने माने निर्देशक आशुतोष गोवारिकर के बारे में एक दिलचस्प बात सामने आई. बॉलीवुड में हिट हिस्टोरिकल फिल्में देने वालें आशुतोष गोवारिकर स्कूल के दिनों में हिस्ट्री सब्जेक्ट में फेल हो जाते थे.

हालांकि गोवारिकर अपने स्कूल के दिनों में भले ही हिस्ट्री में पास नहीं हुए हों, लेकिन बीते दिनों की अनकही कहानियां हमेशा से उन्हें आकर्षित करती रही हैं.  इतिहास के बैकग्राउंड पर बेस्ड अपनी आने वाली फिल्म मोहेन जोदारो के प्रमोशनल इवेंट में गोवारिकर ने संवाददाताओं को बताया, 'मुझे डेट्स कभी याद नहीं रहतीं. मैं हिस्ट्री के सब्जेक्ट में पास नहीं हुआ… मेरा ज्योग्रफी से भी कोई वास्ता नहीं. लेकिन, मुझे अनकही कहानियां लुभाती हैं. आशुतोष ने कहा, मोहन जोदारो और सिंधु घाटी सभ्यता का जिक्र करते हुए जो भी शहर या समाज है जिसे मैं जानता नहीं था. इसने मुझे उस काल की कहानी बयां करने के लिए आकर्षित किया.

अपनी पहली फिल्म 'लगान' से 52 साल के इस फिल्मकार ने हमेशा से ऐसे काल को दिखाना पसंद किया है जिनके बारे में इतिहास की किताबों में सिर्फ पढ़ा गया हो. 'जोधा अकबर' के बाद सिंधु घाटी सभ्यता के दौर को चित्रित करती मोहन जोदारो के लीड एक्टर रितिक रोशन के साथ उनकी दूसरी फिल्म है. उन्होंने कहा, वहां क्या कुछ हुआ होगा, किस तरह के लोग होंगे और कैसे वो रहते होंगे, इस बात में मेरी दिलचस्पी रही है. मुझे खुशी है मैंने यह फिल्म बनाई और मुझे उम्मीद है कि मैंने फिल्म के साथ न्याय किया है.

बाजार में छा गई चांदी की राखी

भाई और बहन के बीच प्रेम के त्यौहार रक्षाबंधन में राखी का बहुत महत्व होता है. कलाई में राखी को बांध कर रक्षाबंधन को सैलीब्रेट किया जाता है. राखी धागे से तैयार होती है. समय के साथ धागे से तैयार होने वाली राखी बदल गई है. अब सूती धागे के साथ रेशम के धागे से राखी तैयार होने लगी है. राखी अब सूत और रेशम के साथसाथ सोने और चांदी से भी तैयार होने लगी है.

सोने से बनने वाली राखी मंहगी होती है. ऐेसे में चांदी से बनने वाली राखी काफी पंसद की जाने लगी है. चांदी से तैयार होने वाली राखी 150 रूपये से लेकर 1000 रूपये तक में मिलती है. कुछ राखियां चांदी और सोने के पानी से तैयार की जाती है. इनकी कीमत 100 से लेकर 250 रूपये तक होती है. वैसे शौकीन लोगों के लिये आर्डर पर सोने चांदी और डायमंड से राखी तैयार की जाती है. इनकी कीमत 1 लाख तक होती है.

लखनऊ के चैक सर्राफा बाजार में विनोद ज्वेलर्स के मालिक विनोद माहेश्वरी का कहना है कि ग्राहकों को सबसे अधिक चांदी से तैयार राखी पंसद आती है. 4-5 साल पहले जब इस तरह की राखी का चलन शुरू हुआ था तब से अब तक उसकी मांग दिनोदिन बढ़ती जा रही है. चांदी की राखी के गिफ्ट पैक के साथ रोली, अक्षत जैसे जरूरी सामान भी रखे जाते है. अब लोग साधारण राखियों की जगह पर चांदी की राखी पंसद करने लगे है.

चांदी के ब्रेसलेट तो लोग पहले से ही पहनना पसंद करते हैं और अब राखी भी पसंद करने लगे है. इस बार राखी के त्यौहार के समय चांदी की राखियों की डिमांड ब-सजयने वाली है.ऐसे में राखियों के त्यौहार में डिजाइनर राखी का मजा लीजिये.

अरुणाचल बना केन्द्र सरकार के गले की फांस

कांग्रेस मुक्त भारत के अपने अभियान में सफल होने के लिये भारतीय जनता पार्टी ने जो हथकंडे खेले अब उसकी साख पर ही बट्टा लगा रहे हैं. उत्तराखंड और अरूणाचल प्रदेश में चुनी हुई कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने का जो काम केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया अदालत ने उसको सही नहीं माना और वहां कांग्रेस की सरकारों को बहाल कर दिया.

केन्द्र सरकार के फैसले पर अदालत का निर्णय एक सबक जैसा है. देश के संविधान के हिसाब से काम न करने से सरकार केन्द्र सरकार अलोचना से घिर गई है.राजनीतिक रूप से उत्तराखंड और अरूणाचल बहुत महत्वपूर्ण भले न हो पर यहां मिली सफलता ने कांग्रेस को उठ खड़े होने की ताकत दे दी है.वह केन्द्र सरकार के विरोधी दलों के प्रति सौतेलेपन को मुद्दा बनाकर विपक्ष की लड़ाई का केन्द्र बिन्दू बन सकती है.

विपक्ष में रहते भाजपा जिस नैतिकता की बात करती थी सरकार में आते ही उसे तार-तार करके रख दिया है. 2 साल में मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिया गया यह तीसरा बड़ा झटका है.

सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र द्वारा नियुक्त राज्यपालों की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि ‘राज्यपाल का कंडक्ट न सिर्फ निष्पक्ष होना चाहिये बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिये. उनको राजनीतिक दलों की लड़ाई से दूर रहना चाहिये.’

प्रदेशो में जबजब विरोधी दल की सरकार होती है राज्यपाल की भूमिका और कामकाज पर सवाल उठते हैं. उत्तर प्रदेश में राज्यपाल को लेकर सत्तापक्ष समाजवादी पार्टी के कुछ नेता नाराज रहते हैं. कई बार राज्यपाल पर आरएसएस का आदमी होने को आरोप तक लगाया जाता है. जब भाजपा सत्ता में थी तब वह दूसरे दलों पर ऐसे आरोप लगाती थी. सत्ता मे आकर वह भाजपा वही काम कर रही है जिसके लिये कभी वह कांग्रेस को कोसा करती थी.

अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने दिल्ली में अरूणाचल भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. अरूणाचल प्रदेश की ही तरह यह उत्तराखंड में पहले ही हो चुका है.

उत्तराखंड में भी मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सत्ता को दोबारा हासिल करने में सफलता पाई थी. इन फैसलों का प्रभाव भाजपा की इमेज पर पड़ा है. भाजपा इस बात को जानती समझती है.

पूरे देश में यह संदेश गया है कि केन्द्र की मोदी सरकार ने संविधान के खिलाफ काम किया है.अदालत के फैसले के बाद केन्द्र सरकार पूरी तरह से बेनकाब हो गई है.संविधान के मुददे पर पार्टी इस तरह को जोखिम नहीं लेना चाहती थी.इसके बाद भी ऐसा हो गया जिससे केन्द्र सरकार को बचना चाहिये था.       

मोदी सरकार के रणनीतिकार द्वारा संवैधानिकता और राजनीतिक मर्यादा को ताक पर रखकर की जाने वाली इन योजनाओं के फेल होने पर सरकार पर सवालिया निशान लगने लगे हैं.

भाजपा संविधान की रक्षा की दुहाई देती थी पर सत्ता में आकर वह बदल चुकी है. केन्द्र और राज्य सरकार के बीच संबंधों को संविधान में पूरी तरह से समझाया गया है.केन्द्र सरकार अपने अधिकार का दुरूपयोग करके राज्य सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करती है. इससे तानाशाही की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है.  

‘रैकेट की रानी’ पर फिल्म, प्रेरक और लाजवाब होगी: शाहरुख

बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान ने टेनिस स्टार सानिया मिर्जा की आत्मकथा ‘ऐस अगेन्स्ट ऑड्स' का विमोचन किया. उन्होंने इस अवसर पर पत्रकारों से कहा, ‘‘सही में मुझे लगता है कि हम अपनी लड़कियों के प्रति जितना अधिक प्यार दिखाएंगे, अपनी महिलाओं के प्रति जितना प्यार और सम्मान दिखाएंगे, हमें सानिया जैसी कई विश्वस्तरीय उपलब्धियां देखने को मिलेंगी. इस दुनिया में महिलाओं की तुलना में किसी ने भी बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की है.' शाहरुख ने कहा, वह (सानिया) ‘रैकेट की रानी’ है.

सानिया ने हमारे देश को गौरवान्वित किया है. हम पीटी उषा, मेरी कॉम और सानिया मिर्जा जैसे लोगों को याद करते हैं जिनसे प्रेरणा लेकर कई लड़कों और लड़कियों ने खेलों को पेशेवर कॅरियर के तौर पर अपनाया और हमारे देश का मान बढ़ाया.

इस अवसर पर सानिया ने कहा, ‘‘मैंने केवल इतना किया कि उनसे (शाहरुख) कहा कि क्या आप मेरी जिंदगी के अहम हिस्से का विमोचन कर सकते हो. मेरे बस इतने कहने पर वो यहां आ गए.'

उन्होंने कहा, ईश्वर की कृपा से मेरा कॅरियर लंबा रहा. कोर्ट के अंदर और बाहर मनोरंजक कॅरियर रहा. मुझे खुशी है कि मैं इसे पेश करने में सफल रही.

इस किताब में सानिया की महिला युगल में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनने की यात्रा तथा अपना सपना साकार करने के लिये उन्होंने जिन चुनौतियों का सामना किया उनका वर्णन है. हार्पर कालिन्स किताब का प्रकाशक है और यह देश के प्रमुख बुकस्टोर पर उपलब्ध है.

सानिया पर फिल्म, बहुत प्रेरक और लाजवाब होगी

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरूख खान का मानना है कि टेनिस स्टार सानिया मिर्जा पर बनने वाली कोई भी फिल्म प्रेरक होगी. और वह चाहेंगे कि इस तरह की फिल्म का निर्माण वह करें.

अभिनेता ने हैदराबाद में ‘एस अगेंस्ट ऑड्स’ शीषर्क वाली सानिया की आत्मकथा के औपचारिक विमोचन के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘जब भी सानिया पर फिल्म बनेगी, मुझे लगता है कि वह बहुत प्रेरक और लाजवाब होगी.’

 हल्के फुल्के अंदाज में शाहरूख ने कहा, ‘और.. मैं नहीं जानता.. आप उन्हीं से पूछें कि क्या वह मुझे उनके प्रेमी की भूमिका अदा करने की इजाजत देंगी. लेकिन, निश्चित तौर पर मैं इस फिल्म का निर्माण करूंगा.’

शाहरूख ने यह उम्मीद जताई कि भारतीय खेलों पर आधारित फिल्में जल्दी ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सक्षम होंगी.

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