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जानें एंड्रॉयड नॉगट में क्या कुछ है खास

गूगल अगस्त में अपना लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड नॉगट जारी कर सकती है. उससे पहले जान लें उसकी खासियत.

1. एक स्क्रीन पर खोल सकेंगे दो एप

गूगल ने अप्रैल में नए ऑपरेटिंग सिस्टम का डेवलपर प्रिव्यू वर्जन पेश किया था. इस दौरान इसके कई नए फीचर का खुलासा हुआ था. एंड्रॉयड नॉगट में मल्टी विंडो सपोर्ट फीचर शामिल किया गया है. इसके तहत स्मार्टफोन यूजर फोन की स्क्रीन पर एक साथ दो एप्लीकेशन का इस्तेमाल कर सकेंगे. इतना ही नहीं, नए ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड नॉगट में गूगल ने इमोजी में भी बदलाव किया है.

2. कैमरा एप में सुधार

फोटो कंपोजीशन को बेहतरीन बनाने के लिए एंड्रॉयड नॉगट के कैमरा एप में कई नए फीचर शामिल किए गए हैं. इसके नए कैमरा एप में 4 ग्रिड उपलब्ध कराए गए हैं. दरअसल, आईफोन में तस्वीर के बेहतर कंपोजीशन के लिए ग्रिड का इस्तेमाल किया जाता है. अब एंड्रॉयड यूजर भी इसी तरह की सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे. इसके अलावा नए ऑपरेटिंग सिस्टम में मैनुअल एक्सपोजर फीचर भी शामिल किया गया है. इसके जरिए यूजर सिर्फ स्क्रीन पर टैप कर उसकी ब्राइटनेस को कम या बढ़ा सकते हैं.

3. स्क्रीन से दे सकेंगे नोटिफिकेशन का जवाब

नए ऑपरेटिंग सिस्टम में नोटिफिकेशन या मैसेज का जवाब देने के लिए यूजर को एप खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. किसी भी नोटिफिकेशन का जवाब यूजर सीधे स्क्रीन से ही दे सकेंगे. फोन पर हर एप के सभी नोटिफिकेशन एक साथ दिखाई देंगे. इसके अलावा नोटिफिकेशन में हीरो इमेज यानी जिस व्यक्ति या एप की तस्वीर आती है, उसका आकार पहले से बड़ा हो जाएगा.

4. इंटरनेट डाटा की बचत करेगा

एंड्रॉयड नॉगट फोन में इंटरनेट डाटा की खपत को भी कम करेगा. इसमें गूगल ने नया ‘डाटा सेवर’ फीचर दिया है. इसकी मदद से यूजर पहले की अपेक्षा एप की ओर से खर्च किए जाने वाला मोबाइल डाटा अधिक नियंत्रित कर पाएंगे. फोन में एक बार डाटा सेवर मोड सक्रिय करने पर यह बैकग्राउंड डाटा को भी बंद कर देता है. अगर यूजर बैकग्राउंड में डाटा की खपत करने वाले किसी एप का इस्तेमाल करना चाहेंगे तो इंटरनेट डाटा अपने आप ऑन हो जाएगा. इसके अलावा एंड्रॉयड नॉगट में नंबर ब्लॉक करने का फीचर भी उपलब्ध कराया गया है. हालांकि अभी भी एंड्रॉयड फोन की सेटिंग में बदलाव कर इंटरनेट डाटा सेव किया जा सकता है.

5. बैटरी कम खर्च होगी

स्मार्टफोन में बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने की समस्या से निपटने के लिए गूगल ने रीवैम्प डोज फीचर शामिल किया है. इसके तहत फोन इस्तेमाल न होने पर बैकग्राउंड में चलने वाले एप को पूरी तरह बंद कर देगा. इससे फोन की बैटरी की खपत बिल्कुल न के बराबर हो जाएगी. एंड्रॉयड मार्शमैलो में भी कंपनी ने यह फीचर उपलब्ध कराया था लेकिन नए ऑपरेटिंग सिस्टम में इसे और बेहतर बनाया गया है. इस फीचर का फायदा यह है कि अगर आप फोन का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो इसकी बैटरी एक सप्ताह से अधिक समय तक चलेगी.

रियो ओलंपिक: बिंद्रा बने भारत के ध्वजवाहक

ब्राजील के रियो में खेलों के महाकुंभ ओलंपिक का शुभारंभ हो चुका है. भारतीय समय के मुताबिक, आज सुबह करीब 4 बजे रियो के माराकाना स्टेडियम में भव्य समारोह के साथ ओलंपिक खेलों की शुरुआत हुई.

समारोह में ब्राजील के कलाकारों ने म्यूजिक, थ्रीडी इमेजिंग और लेजर तकनीक का इस्तेमाल कर रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया. समारोह में छह हजार से ज्यादा वॉलिंटियर्स ने भाग लिया. रियो ओलंपिक के मार्च पास्ट में ग्रीस ने सबसे पहले एंट्री की. इस बार ओलंपिक में भारत और शरणार्थी ओलंपिक टीम सहित 209 देशों के 11,000 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं.

अभिनव बिंद्रा ने की भारतीय दल की अगुवाई

2008 बीजिंग ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा की अगुवाई में भारत ने 95वें देश के रूप में स्टेडियम में प्रवेश किया। बिंद्रा का यह आखिरी ओलंपिक है और वह भारत के ध्वजवाहक थे। भारत के 118 में से लगभग 70 खिलाड़ियों और 24 अधिकारियों ने मार्च पास्ट में हिस्सा लिया।

हॉकी और तीरंदाज खिलाड़ियों ने उद्घाटन समारोह में हिस्सा नहीं लिया. पुरूष खिलाड़ियों ने गहरे नीले रंग का ब्लेजर और पैंट तथा महिला खिलाड़ियों ने पारपंरिक साड़ी और ब्लेजर पहन रखा था।

अपने रिकॉर्ड सातवें ओलंपिक खेलों में भाग ले रहे लिएंडर पेस को दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करते हुए देखा गया, वहीं महिला खिलाड़ियों में शटलर ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा तथा जिम्नास्ट दीपा करमाकर ने सभी का ध्यान खींचा।

सफल ओलंपियन तैराक माइकल फेलप्स बने अमेरिकी दल के ध्‍वजवाहक

स्पेनिश और ब्रिटिश टीमों को भी दर्शकों ने खूब समर्थन किया, क्योंकि उनकी अगुवाई क्रमश: टेनिस स्टार राफेल नडाल और एंडी र्मरे कर रहे थे. जमैका का 60 सदस्यीय दल अपने सबसे बड़े स्टार उसैन बोल्ट के बिना परेड में उतरा. दुनिया के सबसे सफल ओलंपियन में से एक तैराक माइकल फेलप्स ने अमेरिका के 500 सदस्यीय दल की अगुवाई की, जिन्होंने लाल, सफेद और नीले रंग की पोशाक पहनी हुई थी.

पेले खराब तबियत के कारण ओलंपिक मशाल नहीं जला पाए

दिग्गज फुटबाल खिलाड़ी पेले खराब तबियत के कारण ओलंपिक मशाल को नहीं जला पाए. यह जिम्‍मा ब्राजील के मैराथन धावक वंदेरले डी लीमा को दिया गया, जिन्‍होंने कॉल्ड्रन प्रज्‍जवलित कर खेलों का शुभारंभ किया.

सुपरमॉडल गिजेल बुंडचेन का मंच पर कैटवॉक करना रहा दिलचस्‍प

समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण उस वक्त आया, जब दिवंगत गीतकार, संगीतकार टोम जोबिम के गीत 'द गर्ल फ्रॉम इपानेमा' को उनके पोते डेनियल ने गाया. इसके साथ ही सुपरमॉडल गिजेल बुंडचेन को मंच पर कैटवॉक करते देखना भी दिलचस्प था. इसके अलावा अन्य प्रस्तुतियों में दिग्गज सांबा गायक एल्जा साआरेस की प्रस्तुति और कारोल कोनका और 12 साल के बच्चे एम.सी सोफिया का हिपहॉप डांस शामिल था, जो ब्राजील के अश्वेत समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.

उद्घाटन समारोह में ग्लोबल वार्मिंग को लेकर दमदार संदेश दिया गया

उद्घाटन समारोह में रियो के मशहूर 'सांबा' नृत्य के साथ ब्राजील के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन किया गया. रंगारंग कार्यक्रमों के जरिए दुनिया के लिए सबसे बड़े संकट बन रहे ग्लोबल वार्मिंग (विश्व भर के तापमान में वृद्धि) को लेकर संक्षिप्त लेकिन दमदार संदेश दिया गया.

ब्राजीली आयोजकों ने फुटबाल के प्रति अपने जुनून को एकतरफ रखकर लगभग चार घंटे चले उदघाटन समारोह में जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों की कमी को अपना मुख्य विषय बनाया, जिसके साथ 17 दिन तक चलने वाले खेल महाकुंभ की शुरूआत हुई.

ब्राजील के कार्यवाहक राष्ट्रपति टेमर ने की खेलों की शुरुआत की घोषणा

ब्राजील के कार्यवाहक राष्ट्रपति माइकल टेमर ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाक और संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख बान की मून की उपस्थिति में दक्षिण अमेरिका में पहली बार हो रहे खेलों की शुरुआत की घोषणा की। टेमर ने कहा, 'मैं रियो ओलंपिक और आधुनिक युग के 31वें ओलंपिक खेलों की शुरुआत की घोषणा करता हूं।'

मरकाना स्टेडियम से रियो का आकाश आतिशबाजी से नहा रहा था और ऐसे भव्य समारोह में टेमर की घोषणा के साथ साथ प्रतियोगिता की आधिकारिक शुरुआत भी हो गई.

सभी इस पल का इंतज़ार कर रहे थे : थॉमस

उद्घाटन समारोह में इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के अध्‍यक्ष थॉमस बाक ने कहा कि 'हम सभी इस पल का इंतज़ार कर रहे थे. सभी ब्राजील वासियों को इस रात बहुत गर्व महसूस हो रहा होगा.' इसके साथ ही उन्‍होंने खेलों के आयोजन के लिए ब्राजील की जमकर सराहना भी की.

ब्राजील खुली बांहों के साथ पूरी दुनिया का स्‍वागत करता है: नुजमन

वहीं, रियो 2016 आयोजन समिति के चेयरमैन कार्लोस आर्थर नुजमन ने खेलों के महाकुंभ में हिस्‍सा लेने आए खिलाड़ियों का स्‍वागत किया. उन्‍होंने कहा कि 'ओलंपिक का सपना अब एक अद्भुत वास्तविकता है. ब्राजील खुली बांहों के साथ पूरी दुनिया का स्‍वागत करता है. मैं बेहद गौरवपूर्ण महसूस कर रहा हूं. मैं दुनिया के बेहतरीन एथलीटों के बारे में बात करते हुए गर्व महसूस कर रहा हूं.'

पहले दिन भारतीय खिलाड़ी निशानेबाजी, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग, रोइंग और हॉकी के मुकाबलों में पदकों के लिए भिड़ेंगे. आज 12 पदकों का फैसला भी हो जाएगा.

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने रियो ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों को 50 लाख रुपये का नकद पुरस्कार देने की भी घोषणा की है.

पहले दिन भारत की इन खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहें

पहले दिन होने वाले खेल में भारतीय टीम की स्थिति की बात करें तो 10 मीटर एयर पिस्टल में अपूर्वी चंदेला, अयोनिका पाल, जीतू राय और गुरप्रीत सिंह निशाना साधेंगे. भारत की निगाहें 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और इंचियोन एशियाई खेलों में स्वर्ण और रजत दोनों जीतने वाले जीतू राय पर रहेंगी.

रियो में भारत की नजर 8 बार की ओलंपिक चैंपियन रही भारतीय हॉकी टीम पर भी रहेगी. शनिवार को अपने पहले मुकाबले में भारतीय टीम का सामना आयरलैंड से होगा. पी श्रीजेश की कप्तानी में टीम ने हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी में रजत पदक जीता है.

क्या आपने गूगल का ये नया गेम ट्राई किया

रियो ओलंपिक 2016 शुरू हो चुका है. इसी जश्न में शामिल हो गया है सर्च जायंट गूगल. कम्पनी ने अपना शुक्रवार का डूडल रियो में होने जा रहे खेलों के नाम कर दिया है. कम्पनी ने फ्रूट गेम्स के जरिये रियो ओलंपिक की शुरुआत कर दी है.

ऐंड्रॉयड और iOS यूजर इस गेम को खेल सकते हैं. यूजरों को g.co/fruit वेबसाइट पर जाकर गूगल सर्च ऐप को अपडेट करना होगा. इस अपडेट के बाद उन्हें सिर्फ ऐप खोलकर गूगल डूडल खोलना होगा और वे गेम खेल सकेंगे.

गूगल डूडल पर टैप कर यूजरों को कुल 7 गेम्स दिखेंगी जिनमें टेनिस, स्विमिंग, रेसिंग और दूसरे खेल शामिल होंगे. जैसा कि हम ऐंग्री बर्ड्स में देखते हैं, हर 'फ्रूट गेम' में यूजर की परफॉर्मेंस को 3 स्टार्स की रेटिंग मिलेगी. कुछ गेम्स के लिए जहां आपको डिस्प्ले पर टैप करना होगा, वहीं दूसरे गेम्स हैंडसेट सेंसरों का इस्तेमाल करेंगे.

एक ब्लॉग पोस्ट में डूडल के बारे में बताते हुए कम्पनी ने कहा है, 'आज से 2016 के डूडल फ्रूट गेम्स की शुरुआत हो गई है. अगले कुछ हफ्तों में हम रियो के फ्रूट स्टैंड तक का सफर तय करेंगे जहां दुनियाभर के उत्पाद फ्रेशेस्ट फ्रूट के खिताब के लिए आमने-सामने होंगे.'

फैन्स में एक्साइटमेंट बढ़ाने के लिए गूगल ने यूट्यूब, गूगल सर्च और गूगल मैप्स के लिए हाल ही में कुछ 'एन्हांस्ड फीचर' भी लॉन्च किए हैं जिससे यूजर टॉप इवेंट्स और मेडल्स की जीत के अपडेट पा सकेंगे. कम्पनी के मुताबिक 'इन नए फीचरों से फैन्स अपने फेवरिट अथलीट्स और स्पोर्ट्स डिसिप्लिन्स के बारे में ज्यादा जान सकेंगे. 'सर्च पेजों पर ज्यादा विस्तृत परिणाम मिलेंगे, जबकि यूट्यूब पर इवेंट्स की लाइव स्ट्रीमिंग देखी जा सकेगी. गूगल मैप्स स्ट्रीट व्यू का इस्तेमाल कर ओलंपिक वेन्यू देख सकेंगे.

तो अब नहीं बनेगा ‘दिल’ का सिक्वअल

बौलीवुड में हर शुक्रवार कलाकार और निर्देशक की किस्मत बदल जाती है. फिल्म के बाक्स आफिस पर असफल होते ही सभी समीकरण गड़बड़ा जाते हैं. अपनी पिछली फिल्म ‘ग्रैंड मस्ती’ द्वारा सौ करोड़ कमाए जाने से उत्साहित फिल्मकार इंद्र कुमार को उम्मीद थी कि उनकी नई फिल्म ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’ भी सौ करोड़ का बिजनेस कर लेगी. इसलिए इस फिल्म के प्रमोशन के दौरान इंद्र कुमार ने ऐलान किया था कि वह अपनी 90 के दशक की सफल फिल्म ‘दिल’ का सिक्वल बनाएंगे, जिसमें अपनी बेटी श्वेता कुमार को रीलॉंच करेंगे.

ग्रेट ग्रैंड मस्ती का बॉक्स ऑफिस पर इतना बुरा हाल हुआ कि फिल्म की लागत तक वसूल नहीं हो पायी. इसलिए अब इंद्र कुमार इस बात से ही इंकार करते हैं कि उन्होंने कभी दिल का सिक्वल बनाने की बात सोची ही नहीं थी. मीडिया तो यूं ही खबरें फैलाता रहता है.. वाह इंद्र कुमार!! अपनी कही बात से पलटना कोई आपसे सीखे.

धुंधली न पड़े सपनों की उड़ान

दिन मंगलवार, 12 जुलाई, स्थान रांची यूनिवर्सिटी प्रांगण, अवसर रांची यूनिवर्सिटी का 56वां स्थापना दिवस समारोह. शिक्षा मंत्री द्वारा खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा रहा था. इसी दौरान झारखंड की शिक्षा मंत्री, एक महिला खिलाड़ी, 'परिणीता' की कहानी सुन कर रो पड़ीं. उन्होंने तुरंत उसे मंच पर बुलाया. 50 हजार रुपयों की सहायता की घोषणा के साथ उसे गले से लगा लिया. परिणीता की आंखें छलक पड़ी.

जानना चाहेंगे, परिणीता की जिंदगी की कहानी में ऐसा क्या खास था जो खेलमंत्री भी खुद को भावुक होने से रोक नहीं सकीं.

दरअसल झारखंड की राजधानी रांची से 13 किमी दूर कांके के सुंडिल गांव की रहने वाली परिणीता तिर्की फुटबॉल और नेटबॉल खिलाड़ी हैं. उन्होंने कई बार झारखंड का नाम रोशन किया. मगर जिंदगी ने उन्हें कभी भी आसान रास्ते नहीं दिए. हमेशा उन्हें कंटीले पथरीले रासतों से ही गुजरना पड़ा. कदम-कदम पर आर्थिक कठिनाइयों व दूसरी बोझिल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा.

छोटी सी उम्र में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया. घर में खाने के लाले पड़ गए. मां की तबियत भी  ठीक नहीं रहती थी. इस सब के बावजूद परिणीता ने अपना मनोबल टूटने नहीं दिया.

मजदूरी करने के साथ उन्होंने खेल का अभ्यास और पढ़ाई भी जारी रखी. सुबह जल्दी उठ कर और घर के काम निबटा कर वह साइकिल से 6 किमी दूर स्कूल में पढ़ाने जाती है फिर कड़ी धूप और धूलमिट्टी में रोज मजदूरी का काम कर थकी होने के बावजूद कांके डैम के पास के मैदान में करीब 30 गरीब बच्चों को फुटबॉल की ट्रेनिंग देती हैं और अपना अभ्यास भी करती हैं.

फिर घर आ कर कॉलेज की पढ़ाई पूरी करती है. फिलहाल वह एसएस मेमोरियल कॉलेज में बीए पार्ट 2 की छात्रा है. फुटबॉल में ईस्टजोन में 3 बार अपना परचम लहरा चुकी है. वह वर्ष 2013 में टीम की कप्तान भी थी.

यह तो बात हुई आर्थिक परेशानियों के बीच भी अपना मनोबल न टूटने देने की. वैसे जिंदगी में परेशानियां किसी भी रूप में आ सकती हैं. कभी मानसिक पीड़ा, अवसाद, अपनों से विछोह तो कभी शारीरिक तकलीफें और बीमारियां, इन परेशानियों में उलझ कर हम अपना मकसद भूल जाएं, यह नहीं होना चाहिए.

इसके विपरीत हम उन परेशानियों से जूझते हुए खुद को मजबूत बना सकते हैं. अपने इरादों में कठोरता ला सकते हैं. नए मकसद तलाश सकते हैं. जरूरत है अंदर से मजबूत बनने और मकसद के प्रति एकनिष्ठ रहने की.

फ्रांस के मशहूर दार्शनिक जीन पॉल सारत्रे की कहानी भी काफी प्रेरणास्पद है. बचपन में उन्हें विभिन्न विषयों की पुस्तकें पढ़ना बहुत पसंद था. मगर उनकी एक आंख खराब थी. इस वजह से ज्यादा पढ़ने से उनकी दूसरी आंख पर अतिरिक्त भार पड़ता था. अतिरिक्त भार पड़ने के कारण उनकी आंखों में लगातार दर्द की शिकायत रहने लगी.

तब डॉक्टर ने उन्हें पढ़ने लिखने से मना कर दिया मगर बालक का संकल्प मंदा नहीं हुआ. उनकी जिद पर घरवाले उन्हें पढ़ कर सुनाने लगे. इस तरह उन्होंने एम.ए. पास कर लिया और फिर कई पुस्तकें भी लिखीं. वह अपने विचार दूसरों से लिखवाते और उन्हें किताब के रूप में छपवाते.

दरअसल जीवन का दूसरा नाम समस्या ही है और उन समस्याओं से जूझते हुए आगे बढ़ना जिंदगी है. सफलता उसी व्यक्ति को मिलती है, जो हर तरह की परिस्थितियों में आगे बढ़ना सीख लेता है. जिस का मन अंदर से मजबूत होता है.

हर परिस्थिति में मन को मजबूत बनाना चाहते हैं तो निम्न बातों का रखें खयाल.

इमोशंस पर रखें कंट्रोल

हर रोज कितने ही इमोशंस से हमारा वास्ता पड़ता है. कभी खुशी कभी गम. कभी फ्रस्टेशन तो कभी क्रोध. आज नहीं समझ पाते पर ये छोटी छोटी बातें हमारे दिमाग और इस की शक्ति पर गहरा असर डालती हैं. याद रखें, दिमाग और शरीर का गहरा नाता होता है.

दिमाग में तनाव है, नकारात्मक भाव हैं तो शरीर स्वयं थक कर बोझिल रहने लगता है. जब भी कोई नकारात्मक भावना आपके दिल पर चोट करे तो केवल 90 सेकंड के लिए खुद को उससे प्रभावित होने से रोकें. डेढ़ मिनट का यह समय ही महत्त्वपूर्ण होता है जब कि कैमिकल लोचा आप को अवसाद में डाल सकता है या क्षुब्ध कर सकता है. यदि इस वक्त आप ने स्वयं पर नियंत्रण रख लिया तो फिर संभवतः हमेशा के लिए उस के नकारात्मक प्रभाव से आजाद रहेंगे.

जब दिल टूट जाए

कई लोग जिंदगी में मिलने वाले भावनात्मक धक्कों से जल्द उबर नहीं पाते. खासकर प्रेम और उस से जुड़े दर्द जैसे प्यार न जता पाने का मलाल, प्यार में धोखा, ब्रेकअप का दर्द, बेवफाई, तलाक जैसे हालातों से व्यक्ति जल्द टूट जाता है ओर कामयाबी बहुत दूर चली जाती है. इन चक्करों में अच्छाखासा कॅरियर भी बरबाद कर लेते हैं. जीवन का यह हिस्सा अहम है पर सबकुछ नहीं. दर्द को पीछे छोड़ कर मजबूती के साथ आगे बढ़ना ही जिंदगी है.

इतने मजबूत बनें कि आप उसे जाने दे सकें, जिसे आप प्यार करते हैं. कभी किसी से कोई अपेक्षा न रखें. जो आप की केयर करते हैं वह आप की भावनाएं समझेंगे और जो आप की परवाह नहीं करते, उनके लिए दुखी हो कर अपने मन को कमजोर क्यों बनाएं?

वह करें जो करना चाहते हैं

जब आप अपना पसंदीदा काम कर रहे होते हैं और उस काम में पूरी तरह एकाग्रचित हो जाते हैं तो आप का मन किसी भी हाल में दुखी या परेशान नहीं रह सकता. आप हार नहीं मान सकते. अपने पैशन को जी कर आप न सिर्फ मुश्किलों को खुद पर हावी होने से रोकते हैं, सफलता के नए रास्ते भी खुलते चले जाते हैं.

डायरेक्टर आर्ट ऑफ़ सक्सेस, ए के मिश्रा कहते हैं कि पहले यह तय करें कि आप किस चीज में रुचि रखती है. अपने शौक को पहचानें. उदाहरण के लिए आप को संगीत पसंद है, यह काफी नहीं. आप यदि संगीत के साथ खाते हैं, सोते हैं और सांस लेते हैं तो जरूर इस सपने को पूरा करने के लिए मेहनत करें.

समस्याओं में उलझे नहीं

मुसीबत के समय अकसर व्यक्ति दुखतकलीफ की बातें बारबार सोचने लगता है. ऐसे नकारात्मक विचारों का दोहराव जितना ज्यादा होता है क्रिएटिविटी उतनी ही कम होती जाती है. मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक 24 घंटे में एक सामान्य युवा के मन में 60,000 से ज्यादा विचार चलते हैं.

इस के विपरीत हर वक्त दिमाग परेशान रखने के बजाए एक निश्चित वक्त निकालें जब आप अपनी समस्याओं पर विचार करें और सिर्फ विचार ही न करें, हल निकालने का प्रयास भी करें, ताकि बाकी समय मन लगा कर काम कर सकें.

परिवर्तन ही जीवन है

जिंदगी में ऐसा कुछ भी नहीं, जो हमेशा के लिए आप की जिंदगी में रहे. यदि आप आज खुश हैं तो हो सकता है, कल परेशानी हावी हो जाए. आज दर्द में हैं तो हो सकता है, कल दिल को दिलासा देने वाला मिल जाए. सफलता से बेहद आह्लादित और असफलता से निराश हो कर न बैठें. वह करते रहें जो करना आप को अच्छा लगता है.

स्वयं पर विश्वास रखें

यह विश्वास रखें कि आप परिस्थितियों को बदल सकते हैं. मुसीबतों का सामना कर सकते हैं. आप के अंदर काबिलियत है कि आप सफल हो सकें. आप का माइंडसेट ऐसा रहा तो कभी आप परेशानियों से हार नहीं मानेंगे.

यह मत सोचें कि आप का बचपन कठिनाइयां में बीता या तो भविष्य में भी हालात बुरे ही रहेंगे मंजिल पर सदैव अपनी नजर रखें, भले ही परिस्थितियां कैसी भी हों.

जो इंसान आप को खुश रख सकता है, वो आप स्वयं है

यदि आप की खुशी किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर है तो याद रखें, यह हमेशा कायम नहीं रह सकती. किसी और व्यक्ति को इस बात के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता कि आप खुश हैं या दुखी. हर इंसान आजाद है वह करने के लिए जो करना वह चाहता है. बस आप अपने प्रयास सदैव कायम रखें.

मुसकुराएं

जीवन में न चाहते हुए भी कई बार मुसकराना आवश्यक हो जाता है. जब आप परेशान हों, किसी पर नाराज हों या मन में नकारात्मक विचार आ रहे हो तो बस चेहरे पर मुसकुराहट ले आएं. आपको एक नई ऊर्जा और ताजगी महसूस होगी. और आप कुछ खास केर सकेंगे.

तमाम तकलीफों व कमियों को नजरअंदाज कर अपनी आत्मशक्ति के बल पर सफलता के परचम लहराने वाली शख्सियतों की कमी नहीं.

उदाहरण के लिए तमिलनाडु की बीनो जेफाइन गत वर्ष पहली 100% विजुअली चैलेंज्ड आईएफएस ऑफिसर बनी हैं. जन्म से इस शारीरिक दुर्बलता का शिकार होने के बावजूद उन्होंने इंग्लिश में पोस्ट ग्रैजुएशन किया और फिर स्टेट बैंक में पी.ओ. के पद पर काम किया. इसी दौरान सिविल सर्विस एग्जाम 2013 में 34वां स्थान पा कर और आईएफएस ऑफिसर बन कर इन्होंने साबित कर दिया कि मन में जज्बा हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं.

इसी तरह झारखंड की अरुणिमा सिंहा, जो एक बॉलीबॉल प्लेयर थीं, गुंडो द्वारा ट्रेन से फेंके जाने के बाद एक पैर से हाथ धो बैठीं और दूसरा पैर भी बुरी तरह जख्मी हो गया.

पर वह कमजोर नहीं पड़ीं. बेड पर लेट कर आंसू बहाने के बजाए उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने की ठानी. वह पहली ऐसी विकलांग महिला पर्वतारोही बन गईं, जिस ने माउंट एवरेस्ट तक पहुंचने का हौसला दिखाया.

राजलक्ष्मी नई नई डेंटिस्ट बनी थीं और इस क्षेत्र में कुछ बड़ा कर दिखाने का सपना देखती थीं. इसी बीच वर्ष 2007 में एक कार ऐक्सीडेंट में उन के रीढ़ की हड्डी और सपने, दोनों ही टूट गए. पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. अब वह मिस व्हीलचेयर 2014 का खिताब हासिल करने के साथ एमडीएस (और्थोडोंटिक्स) में उच्चतम 73% नंबर ला कर अपना डेंटल क्लीनिक चला रही हैं.

कोलकाता की 87 साल की शीला घोष की कहानी भी कम प्रेरणास्पद नहीं.

वर्ष 2010 में अपने बेटे की मौत के बाद इस उम्र में भी उन्हें घर चलाने के लिए काम करना पड़ता है. वह सड़क के किनारे होममेड चिप्स के पैकेट्स बेचती हैं. उनका पोता बेरोजगार है जबकि बहू को किडनी की बीमारी है जीवन में हुए हादसों से भी वह टूटी नहीं और किसी से रुपए मांगने के बजाए सम्मान के साथ अपने बल पर जी रही हैं और अंतिम सांस तक इस संघर्ष को कायम रखने का जिगर भी रखती हैं.

27 साल की सना इकबाल के पिता का 3 वर्ष पूर्व देहांत हो गया और फिर एक साल पहले काफी टॉर्चर और हैरेसमेंट सहने के बाद उन्होंने पति से भी तलाक ले लिया. परिणामस्वरूप वह गहरे अवसाद में रहने लगीं और अपनी जिंदगी खत्म करने का विचार बार बार उनके जेहन में आने लगा.

मगर फिर मन की शक्ति के बल पर उन्होंने खुद को संभाला और अपने दुधमुंहे बच्चे को जीने का सहारा बना कर दूसरे अवसाद ग्रस्त लोगों में सकारात्मकता का संदेश फैलाने हेतु नवंबर 2015 में अपनी बुलेट पर निकल पड़ीं. बाइक राइडिंग का शौक उन्हें सालों से था.

अपनी तकलीफ भूल कर वह भारतभ्रमण कर जगहजगह एक कर लोगों के मन में जिंदगी के प्रति उत्साह भरने के मिशन में जुट गईं.

Kickass के बाद अब इस वेबसाइट पर भी लगा ताला

मशहूर पायरेसी वेबसाइट किकैस टॉरेंट्स के बंद होने के महीने भर बाद मेटा सर्च इंजन टॉरेंट्ज डॉट ईयू भी बंद हो गया है. अब विजिटरों के लिए इस साइट पर सिर्फ एक बहुत भावुक मेसेज दिख रहा है जिसमें लिखा है, 'Torrentz will always love you. Farewell'. खबर है, कि वेबसाइट के मालिक ने इस मामले में कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है.

2003 में खुला टॉरेंट्ज टॉरेंट फाइल डाउनलोड करने का सबसे पुराना और मशहूर प्लैटफॉर्म था. यह टॉरेंट होस्टिंग साइट बाद में एक मेटा-सर्च इंजन बन गई. टॉरेंट्ज ने कॉपीराइट कॉन्टेंट वाले लोगों को सीज ऐंड डेजिस्ट कम्प्लेंट करने का विकल्प भी दिया था.

माना जा रहा है, कि इसे बंद करने का फैसला किकैस टॉरेंट्स जैसी वेबसाइट बंद होने के बाद बने कानूनी दबाव के तहत ही लिया गया. सोलरमूवी नाम की एक और वेबसाइट ने कानूनी कार्रवाई के डर से हथियार डाल दिए हैं.

किकैस टॉरेंट्स पर आरोप है कि वह 1 बिलियन डॉलर कीमत की अवैध रूप से कॉपी की गई फिल्में, संगीत और दूसरा कॉन्टेंट डिस्ट्रिब्यूट कर रही थी. किकैस के मालिक कथित रूप से पोलैंड के आर्टम वॉलिन हैं जिन्हें फिलहाल गिरफ्तार कर लिया गया है.

किकैस के खिलाफ दर्ज की गई कम्प्लेंट में लिखा है कि यह वेबसाइट 'एक सोफिस्टिकेटेड और यूजर फ्रेंडली माहौल देती थी जिसमें यूजर कॉपीराइट प्रोटेक्टेड कॉन्टेंट को ढूंढ सकते थे.' फिल्में, विडियो गेम, टीवी प्रोग्राम, म्यूजिक और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को डिस्ट्रिब्यूट करने वाली यह वेबसाइट अमेरिका के न्यायिक विभाग के मुताबिक 69वीं सबसे ज्यादा विजिट की जाने वाली वेबसाइट थी.

कम्प्लेंट में इसकी कीमत 54 मिलियन डॉलर से ज्यादा आंकी गई है जिसका ऐड रेवन्यू 12.5 मिलियन डॉलर से 22.3 मिलियन डॉलर के बीच है.

ब्रिटेन, आयरलैंड, इटली, डेनमार्क, बेल्जियम और मलेशिया में ब्लॉक किए जाने के बाद किकैस ने कई बार डोमेन बदली है और दुनियाभर में फैले कम्प्यूटर सर्वरों से काम किया है. इनमें से एक शिकागो में भी मौजूद है.

अब हर कॉल ड्रॉप पर फ्री टॉक टाइम

टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन ने एक नई पहल की पेशकश की है. इसके तहत ऐसे ग्राहक जिनकी कॉल में किसी भी वजह से रुकावट आती है, उन्हें 10 मिनट का मुफ्त टॉकटाइम दिया जाएगा. वोडाफोन इंडिया ने बयान में कहा, 'वोडाफोन डिलाइट बोनान्जा के तहत उन सभी ग्राहकों को दस मिनट का मुफ्त टॉकटाइम दिया जाएगा जिनकी बातचीत में किसी तरह की रुकावट आई है.'

इस ऑफर का लाभ लेने के लिए कॉल ड्रॉप से बात न कर पाने वाले ग्राहकों को 199 नंबर पर 'BETTER' लिखकर एसएमएस करना होगा जिसके बाद उनके नंबर पर दस मिनट का टॉकटाइम डाल दिया जाएगा. देशभर में कई ऑपरेटरों के नेटवर्क पर उपभोक्ताओं को कॉल ड्रॉप की दिक्कत झेलनी पड़ रही है. सरकार ने ऑपरेटरों के साथ बैठक कर उन्हें इस स्थिति में सुधार करने को कहा है.

वोडाफोन इंडिया के निदेशक (कन्जयूमर) संदीप कटारिया ने कहा, 'हमारे नेटवर्क पर हर एक कॉल महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी तरह की रुकावट नहीं आनी चाहिए. कई बार बातचीत में रुकावट आती है. इस तरह की बातचीत को जारी रखने के लिए हम 10 मिनट का टॉकटाइम ऑफर कर रहे हैं.'

“गीता को किसी मजहब में नहीं बांधा जा सकता”

लगभग 25 साल पहले बलदेव राज चोपड़ा के दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक ‘‘महाभारत’’ में अभिनय कर शोहरत बटोरने के बाद कई कलाकार राजनीति का हिस्सा बनते हुए ‘भारतीय जनता पार्टी’ में शामिल होकर सांसद बन गए थे. उसके बाद इन में से कोई भी कलाकार अभिनय के क्षेत्र में कोई खास उपलब्धि हासिल नही कर पाया.

ऐसे ही कलाकारों से एक हैं- ‘महाभारत’ में भगवान कृष्ण का किरदार निभाने वाले अभिनेता नितीश भारद्वाज. मगर नितीश भारद्वाज यह नहीं मानते कि वह असफल हैं या स्टार नहीं बन पाए. बहरहाल, वह आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘‘मोहनजो दारो’’ में दुर्जन का किरदार निभाकर उत्साहित हैं, जो कि शरमन का चाचा है. और शरमन के किरदार में हृतिक रोशन हैं.

जब हाल ही में नितीश भारद्वाज से हमारी मुलाकात हुई ,तो हमने उनसे सीधा सवाल किया कि क्या वह राजनीति से जुड़ने के अपने निर्णय को सही मानते हैं? इस पर ‘‘सरिता’’ पत्रिका से नितीश भारद्वाज ने कहा- ‘‘कोई भी निर्णय सही या गलत नहीं होता है. निर्णय के सही या गलत होने का फैसला तो समय करता है.

देखिए, इंसान जानबूझकर कोई गलत निर्णय नहीं लेता है. पर इंसान के निर्णय को सही या गलत समय ठहराता है. परिस्थितियां ठहराती हैं. इतना ही नहीं उसे सही या गलत मानना भी उस व्यक्ति पर ही निर्भर करता है. मैं अपनी राजनीतिक पारी को सही मानता हूं. क्योंकि मुझे सही भारत देखने का मौका मिला. मुंबई में जन्मे और परवरिश पाए लोग भारत को सही अर्थो में कहां समझ पाते हैं.

सांसद की हैसियत से मुझे भारत के तमाम राज्यों के गांवों में जाने, वहां के लोगों से मिलने, वहां के लोगों की आस्था, उनकी समस्याओं, उनकी खुशी आदि का हिस्सा बनने का मौका मिला. जिससे मुझे बहुत कुछ समझने का अवसर मिला. इससे मैंने देश के संस्कार और उसकी विविधता को जाना है, जिसका फायदा मुझे आने वाले फिल्मी कैरियर में मुझे मिलेगा.’’

जब हमने उनसे पूछा कि उन्होंने पिछले 25 साल में क्या क्या किया. तो नितीश भारद्वाज ने कहा- ‘‘धारावाहिक ‘महाभारत’ में भगवान कृष्ण का किरदार निभाने के बाद से अब तक मैं बहुत कुछ करता रहा. मैंने भारत के अलावा लंदन में भी थिएटर किया. रेडियो 4 के काम किया. अंग्रेजी थिएटर किया. कई पुरस्कार मिले. मान सम्मान मिला. कैलाश मानसरोवर पर ‘‘ए क्वेस्ट इन द गाड’’ नामक एक शोधपरक किताब लिखी. मैंने महाराष्ट्र की तुलजा भवानी के मंदिर में भी जाकर फोटोग्राफी की और उन दुर्लभ चित्रों को महाराष्ट्र पर्यटन विभाग ने पोस्टर के रूप में छापा है.

‘मध्यप्रदेश पर्यटन निगम’ के चेयरमैन की हैसियत से मैंने मध्यप्रदेश में पर्यटन का विकास किया. सांसद होते हुए मुझे पूरा भारत घूमने का मौका मिला. भारत की सभ्यता संस्कृति की विविधता को बहुत करीब से जानने व समझने का अवसर मिला. सीरियल‘गीता रहस्य’ के अलावा मराठी फिल्म ‘‘पितृश्रण’’ का निर्देशन किया.

इस फिल्म को कई अवार्ड मिले. फिल्म को सराहा गया. बहुत जल्द मेरी हिंदी फिल्म ‘‘यक्ष’’ भी प्रदर्शित होगी. इसमें शीर्ष भूमिका निभाने के साथ ही इसका लेखन व निर्देशन मैंने ही किया है. फिल्म ‘‘मोहनजो दाड़ो’’ में अभिनय किया है. इस तरह मैं निरंतर अलग अलग विधाओं में काम करता रहा हूं और काम कर रहा हूं.

पांच साल तक जमशेदपुर से सांसद रहा. सांसद की हैसियत से भी मुझे बहुत कुछ रचनात्मक काम करने के अवसर मिले. पर अब सोच लिया है कि बचा हुआ जीवन सिर्फ सिनेमा को समर्पित करना है.’’

जब हमने नितीश भारद्वाज से पूछा कि सांसद रहते हुए जब वह भारत घूम रहे थे, तब देश की राजनीतिक सामाजिक स्थितियों को लेकर उनकी अपनी समझ क्या बनी. इन दिनों जो हालात हैं,उसको लेकर वह क्या सोचते हैं?

इस सवाल पर नितीश भारद्वाज ने कहा- ‘‘पिछले दो वर्षो में पूरे विश्व में भारत की सामाजिक राजनीतिक स्थिति बेहतर हुई है. पूरे विश्व में भारत का मान सम्मान बढ़ा है. लोगों की सोच भारत के प्रति बदली है. अब लोगों ने मान लिया है कि भारत सिर्फ विकास की ओर जाएगा. अब संयुक्त राष्ट्र में भी भारत के प्रति मत बढे़ हैं. कई दशकों के बाद देश के पूरे सिस्टम को बदलते हुए हम एक नयी राह पर चलना चाहेंगे, तो उसमें समय लगेगा. हमें यह समय सरकार को देना चाहिए.

मैं यह बात एक आम इंसान के तौर पर कह रहा हूं. एक नागरिक की हैसियत से हमें चाहिए कि हम मोदी जी को समय दें. क्योंकि हमें नजर आ रहा है कि यह व्यक्ति और यह सरकार अब लोगों से काम करवाना चाहती है. विश्व को लेकर यह मेरा अनुभव है कि बिना श्रम के कोई इंसान या कोई देश आगे नहीं बढ़ सकता. फिर चाहे जापान हो, जर्मनी हो या पश्चिमी देश हों. यह सभी श्रम के बल पर ही आगे आए हैं.

जब किसी चीज पर गुणवत्ता का सवाल उठता है,तो हमें जर्मनी का नाम याद आता है. चाहे गाड़ी का मामला हो या कुछ और हो. जर्मनी के लोग मेहनत करते हैं और गुणवत्ता के स्तर पर कहीं समझौता नहीं करते. सरकार का काम अवसर प्रदान करना है, यह काम  सरकार कर रही है. फिल्म इंडस्ट्री में भी हर मेहनती इंसान ही आगे बढ़ा है.’’  

भगवान कृष्ण का किरदार निभाने के बाद नितीश भारद्वाज ने स्वंय ‘गीता रहस्य’’ नामक धारावाहिक बना चुके हैं. इसलिए हमने उनसे पूछा कि क्या वजह है कि वेद, पुराण या ‘रामायण’ की तुलना में गीता आज की तारीख में ज्यादा प्रासंगिक हैं? इस पर नितीश भारद्वाज ने कहा- ‘‘क्योंकि गीता को किसी मजहब में नहीं बांधा जा सकता. वह सिर्फ हिंदुत्व तक सीमित नही है. गीता,हिंदू या सनातन धर्म तक भी सीमित नहीं है. गीता में इंसान को सिर्फ कर्म करने की बात कही गयी है. इंसान चाहे जिस धर्म को मानता हो,सभी के लिए कर्म जरूरी है. गीता का सार कालातीत नहीं, बल्कि मनुष्य से भी परे है. कर्म हर इंसान के साथ रहेगा. मेरा मानना है कि जब हम मनुष्य गीता के माध्यम से कर्म के सिद्धांत को समझ लेंगे,तो सारे झगडे़/ कलह/टकराव अपने आप खत्म हो जाएंगे.

आपने कृष्णा का किरदार निभाने के बाद गीता से क्या सीखा? इस पर उन्होंने कहा- ‘‘बहुत कुछ सीखा. कर्म का सिद्धांत सीखा. मेरे लिए कर्म ही धर्म है. धर्म की जितनी व्याख्याएं हैं, उनमें सबसे बड़ी व्याख्या कर्म की है.’’ 

ये है भारत का सबसे महंगा शहर

भारतीय पर्यटकों के लिए मुंबई देश का सबसे महंगा शहर है लेकिन विश्व में यह दुनिया में उनके लिए दूसरा सबसे कम महंगा शहर है. ट्रिप एडवाइजर के छठे ट्रिपइंडेक्स सिटीज के अनुसार देश की आर्थिक राजधानी मुंबई भारत में सबसे महंगा शहर है. हालांकि, विश्व में यात्रा के लिए हनोई के बाद यह दूसरे सबसे कम खर्चीला शहर है.

रिपोर्ट के अनुसार भारतीयों की तीन दिन की यात्रा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे महंगा शहर अमेरिका का न्यू यॉर्क है जहां इसका खर्च करीब 1,24,201 रुपये आएगा. यह मुंबई के मुकाबले तीन गुना अधिक है.

दक्षिण अफ्रीका का केपटाउन वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे कम खर्चीला शहर है. इसके बाद मलयेशिया के क्वालालंपुर, थाइलैंड के बैंकॉक और रूस के मॉस्को का नंबर आता है.

इस अध्ययन में एक चार सितारा होटल में तीन रात रुकने, शहर की तीन महत्वपूर्ण जगह घूमने, हर दिन के दोपहर के खाने, टैक्सी और रात के खाने इत्यादि का खर्च जोड़कर आकलन किया गया है. भारत में घूमने के लिए सबसे सस्ता शहर पुणे है जहां इन सबका खर्च 26,595 रुपये बैठता है.

डैनिश फिल्म के रीमेक पर राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने दी सफाई

‘अक्स’,‘रंग दे बसंती’, ‘दिल्ली 6’ और ‘‘भाग मिल्खा भाग’’ जैसी फिल्मों के सर्जक राकेश ओम प्रकाश मेहरा का दावा है कि उनके पास कई मौलिक कहानियां  हैं, जिन पर वह फिल्में बनाना चाहते हैं. मगर कई कहानियों का नंबर आ ही नहीं पा रहा है.

मसलन वह पिछले 27 वर्षों से शरत चंद्र के उपन्यास ‘‘देवदास’’ पर भी फिल्म बनाना चाहते हैं. राकेश ओमप्रकाश मेहरा का दावा है कि वह एक दिन ‘देवदास’ पर अपनी सोच के अनुसार फिल्म जरुर बनाएंगे.

इतना ही नहीं वह मानते हैं कि हम भारतीय फिल्मकारों को हौलीवुड फिल्मों का मुकाबला करने के लिए भारतीय कथानक पर आधारित मौलिक व बेहतरीन फिल्में बनानी होंगी. तो दूसरी तरफ वह एक डैनिश यानी कि विदेशी फिल्म ‘‘एवरी बडी इज फेमस’’ का हिंदी रीमेक बना रहे हैं. आखिर यह विरोधाभास क्यों?

राकेश ओमप्रकाश मेहरा के इस कृत्य पर पूरा बौलीवुड आश्चर्यचकित है. हाल ही में जब राकेश ओम प्रकाश मेहरा से हमारी मुलाकात हुई, तो हमने उनसे इसी बाबत सवाल किया. तब‘‘सरिता’’ पत्रिका के साथ एक्सक्लूसिब बात करते हुए राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने कहा- ‘‘पहली बात तो मैं स्पष्ट कर दूं कि हम जो फिल्म बना रहे हैं, वह रीमेक नहीं है. वह डैनिश फिल्म ‘एवरीबडी इज फेमश’ का एडॉप्टेशन है. इसका भारतीयकरण है. इसकी वजह यह है कि इस फिल्म की कहानी बड़ी सुंदर है. बाप बेटी की कहानी है. इस फिल्म को देखकर आपको भारतीय कहानी ही नजर आएगी.

हम इस फिल्म को अनिल कपूर के साथ बना रहे हैं. तीन चार दिन की शूटिंग कर ली है. उनका सीरियल ‘24’ का दूसरा सीजन खत्म होने के बाद आगे की शूटिंग करेंगे. हॉलीवुड ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की कहानी है. मसलन,आप प्रेमचंद की किसी कहानी पर फिल्म बनाएं.’’

राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने आगे कहा- ‘‘मैं इस फिल्म का सिर्फ निर्माता हूं. इसकी कहानी अतुल की है, जो कि इसका निर्देशन कर रहे हैं. रोमियो जूलिएट भी विदेशी कहानी है. इसकी कहानी इटली की है. पर इसी पर अमरीका पर फिल्म ‘टाइटैनिक’ बनी. मेरे कहने का अर्थ यह है कि अतुल नकल नहीं कर रहा है. कल को मैं ‘हेलन ऑफ प्राइट’ से प्रभावित होकर फिल्म बनाउं. हॉलीवुड की मशहूर फिल्म या किसी कहानी से इंस्पायर होकर फिल्म बनाना अलग बात है. मगर किसी फिल्म या कहानी की नकल करना अलग बात है.

बड़े बड़े भारतीय लेखकों से प्रभावित होकर दूसरे भारतीय लेखकों ने महाकाव्य लिखे हैं. हमारे ‘महाभारत’ से प्रभावित होकर विदेशों में ‘ओड़ीसी’ लिखा गया. ग्रीक मैथोलॉजी आप पढे़ंगे, तो आपको अहसास होगा कि आप ‘महाभारत’ पढ़ रहे हैं.

हमारे ‘महाभारत’ में द्रौपदी है, वहां हेलन टॉय हैं. अब आपने कोरियन फिल्म उठायी और उसको ज्यों का त्यों बना दिया. यह नकल होती हैं. जो कि गलत है. पर किसी फिल्म के कथानक का मूल अंश लेकर नए सिरे से कहानी गढ़कर अपने वीजन के आधार पर फिल्म बनायी, तो वह नकल नहीं, गलत नहीं है.’’

राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए दावा किया कि उन्होने तो डैनिश फिल्म के कथानक की आत्मा को लेकर नए सिरे से कहानी लिखवायी है. खुद राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से कहा- ‘‘फिल्म ‘एवरी बडी इज फेमस’ की कहानी का जो मूल है, वह बाप बेटी की कहानी है, उसे ही उठाया है. बेटी 17-18 साल की है. उसका पिता संगीतकार बनना चाहता था, जो बन नहीं पाया. अब वह अपना सपना अपनी बेटी के द्वारा पूरा करना चाहता है. पर बेटी की रूचि उस तरह के संगीत में नहीं है. बेटी आज के जमाने की है. उसकी रूचि किसी अन्य तरह के संगीत में है. यही बाप बेटी के बीच टकराव है.

आप अपने आस पास देखें, तो पाएंगे कि आज की तारीख में युवा पीढ़ी पश्चिमी संगीत से बहुत प्रभावित है. तो सवाल है कि यह युवा लड़की उस संगीत से जुड़ेगी या नहीं जुड़ेगी.पिता का अलग तरह के संगीत से जुड़ाव है. तो मुझे बहुत प्यारी कहानी लगी. इसलिए हमने हरी झंडी दी. हम लोग रोमियो जूलिएट पर भी फिल्म बना सकते हैं.’’

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