Download App

शान पर न पड़े कहीं नुकसान भारी

अमीरों के बच्चों के हाथों बड़ी तेज पावरफुल गाडि़यों से निर्दोषों की हत्याओं के मामले बढ़ रहे हैं. अब किस्तों में मर्सिडीज, औडी, जगुआर काफी आसानी से मिलने लगी हैं और नए पैसे वालों के बच्चे इन का मोह छोड़ नहीं पाते और इन्हें सैरसपाटे के लिए निकाल इन की पूरी पावर टैस्ट करने में लग जाते हैं.

हमारे देश में जहां रोड सैंस बिलकुल नहीं, तेज दौड़ती गाड़ी खाली सड़क पर भी खतरा है, क्योंकि कब कहां से कौन बिना देखे रुके निकल जाए, पता नहीं.‘जौली एलएलबी’ में युवा बेटे के हाथों पटरी पर हुई मौत के से मुकदमे देश भर की अदालतों में चल रहे हैं. राजस्थान में सीकर के विधायक के बेटे ने जयपुर में 3 को बीएमडब्लू से मार डाला. अब वह 1-2 माह जरूर जेल में रहे, पर शानशौकत से मानो बैंगलुरु के जिंदल के स्वास्थ्य केंद्र में आया हो और फिर घर लौट जाएगा.

इस देश में बड़ी गाडि़यां शान के लिए जरूरी हैं स्पीड के लिए नहीं, क्योंकि यहां की सड़कों पर अनुशासन का नामोनिशान नहीं है. सड़कों का प्रबंध करने वाले असल में बिगड़ैल बच्चों से भी ज्यादा बिगड़े हैं और उन्हें कोई दोष नहीं देता.

नई तकनीक के कारण सड़कों की बनावट तो ठीक हो गई है पर उन पर चलने वालों की नहीं. पढ़ेलिखे कार वाले, स्कूटर वाले, अनपढ़ औटोरिकशा वाले, साइकिल वाले सब सड़कों को बेघरों के शौच करने की जगह सा मानते हैं, जहां जो मरजी जैसा मरजी करा जा सके.

इन सड़कों पर वे बच्चे जिन के खून में उबाल हो, दिमाग में मांबाप के पैसे की गरमी हो और हाथ में पावरफुल गाड़ी हो, वे मिनटों में  आपे से बाहर हो जाते हैं. अगर साथ में शराब की बोतल, 2 गर्लफ्रैंड और 2 लड़के हों तो कहने ही क्या.

कानून इस में कुछ नहीं कर सकता. मातापिता भी बेबस से ही होते हैं. इकलौते बच्चे उन के पीछे क्या करते हैं, उस पर उन का जोर बहुत कम होता है. बच्चों के साथियों का प्रैशर इतना होता है कि मौजमस्ती एक वर्ग के लिए पिता की कमाई का सदुपयोग करने का अकेला तरीका बचा है.

यह जिम्मेदारी असल में मातापिता की ही है कि वे अपने बच्चों को अनुशासन में रखें वरना उन्हें ही नुकसान उठाना होगा. यह नुकसान उस शान से कहीं भारी होगा जिस पर वे इतरा रहे होते हैं. शान के लिए महंगे कपड़े खरीदें, बड़ा मकान बनवाएं, महंगी घड़ी दिलाएं, पर पावरफुल गाड़ी न दें. हो सके तो सरकार को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ज्यादा तेज चलने वाली गाडि़यां ही न बनने दे.                     

क्या सिद्धार्थ आनंद लौटाएंगे 35 करोड़ रुपये

‘‘सलाम नमस्ते’’, ता रा रम पम’’, ‘‘बचना ऐ हसीनो’’, ‘‘अनजाना अनजानी’’ फेम लेखक व निर्देशक सिद्धार्थ आनंद आज उस दिन को कोस रहे हैं, जिस दिन उन्होंने हृतिक रोशन के साथ फिल्म ‘‘बैंग बैंग’’ निर्देशित करने के अलावा संजय दत्त को लेकर एक्श्न फिल्म ‘‘बदला’’ निर्देशित करने की जिम्मेदारी स्वीकार की थी. जी हां! हृतिक रोशन अभिनीत फिल्म ‘‘बैंग बैंग’’ की असफलता के साथ ही सिद्धार्थ आनंद के सितारे भी गर्दिश में चले गए. ‘बैंग बैंग’ की असफलता के बाद सिद्धार्थ आनंद भी बेरोजगार हो गए थे. उन्होंने हृतिक रोशन के साथ अपनी दूसरी एक्शन फिल्म ‘रफ्तार’ को शुरू करने की बजाय बड़ी मुश्किल से एक निर्माता से बात करके संजय दत्त के साथ फिल्म ‘‘बदला’’ की योजना बनायी.

सूत्रों की माने तो जेल से सजा काटकर वापस आने से पहले ही सिद्धार्थ आनंद व संजय दत्त के बीच एक्शन फिल्म ‘‘बदला’’ को लेकर बातचीत हो गयी थी. तय यह हुआ था कि संजय दत्त फरवरी माह में जेल से बाहर आएंगे और अप्रैल माह से वह इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर देंगें. सब कुछ तय हो जाने के बाद सिद्धार्थ आनंद ने सोचा था कि अभिनेता संजय दत्त के जेल से बाहर आते ही उनके सितारे भी चमक जाएंगे. सूत्रों का दावा है कि फिल्म ‘बदला’ के निर्माण के लिए निर्माता ने सिद्धार्थ आनंद को पैंतीस करोड़ रुपये भी दे दिए थे. पर जेल से बाहर निकलने के बाद भी संजय दत्त के सितारे नहीं चमके. और न ही सिद्धार्थ आनंद के  सितारे चमके. अंततः निर्माता के दबाव में सिद्धार्थ आनंद को मजबूरन ‘‘बदला’’ हमेशा के लिए बंद करने का ऐलान करना पड़ गया. पर सिद्धार्थ आनंद की मुसीबतें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. सूत्रों के अनुसार अब निर्माता ने सिद्धार्थ आनंद से कह दिया है कि उन्हें ‘बदला’ के निर्माण के लिए दिए गए 35 करोड़ रूपए वापस कर दें. मगर सिद्धार्थ आनंद इन पैंतीस करोड़ रूपए को वापस करने के लिए तैयार ही नहीं है.

इतना ही नहीं संजय दत्त के साथ वाली फिल्म ‘‘बदला’’ के बंद होने के बाद सिद्धार्थ आनंद ने एक बार फिर हृतिक रोशन पर दांव लगाने का निर्णय लेते हुए फिल्म ‘‘रफ्तार’’ पर काम शुरू किया. सिद्धार्थ आनंद फिल्म ‘‘रफ्तार’’ की शूटिंग नवंबर माह में शुरू करने का फैसला भी कर लिया. इस इस फिल्म के लिए सिद्धार्थ आनंद ने निर्माता की तलाश जोर शोर से शुरू की, पर कोई भी निर्माता हृतिक रोशन की इस फिल्म के साथ जुड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ. हर तरफ से निराश होने के बाद सिद्धार्थ आनंद ने सफल फिल्म ‘अनजाना अनजानी’ के निर्माता रहे साजिद नाड़ियादवाला से संपर्क किया, लेकिन अफसोस साजिद ने भी हृतिक का नाम सुनते ही इस फिल्म से जुड़ने से साफ इंकार कर दिया. सूत्रों के अनुसार साजिद नाड़ियादवाला का मानना है कि हृतिक रोशन के साथ ‘रफ्तार’ का बजट ज्यादा है, इतने बड़े बजट में वह हाथ नहीं डाल सकते.

‘‘बदला’’ और ‘‘रफ्तार’’ के बाद दोनों पर ग्रहण लगने के बाद अब सिद्धार्थ आनंद की समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें? मगर बौलीवुड में किसी को भी सिद्धार्थ आनंद से सहानुभूति नहीं है. बल्कि बौलीवुड के बिचौलिए तो सवाल उठा रहे हैं कि सिद्धार्थ आनंद यह कैसे भूल गए कि बौलीवुड में हर शुक्रवार को लोगों की किस्मत बदलती है और किस्मत बदलने के साथ ही सारे रिश्ते व दोस्त बदल जाते हैं…

सिद्धार्थ आनंद की परवरिश इसी फिल्मी माहौल में हुई है. सिद्धार्थ आनंद के पिता बिट्टू आनंद ने अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म ‘‘शहंशाह’’ का निर्माण किया था. जबकि सिद्धार्थ आनंद के दादा यानी कि ग्रैंड फादर इंदर राज आनंद मशहूर फिल्म लेखक रहे हैं. इंदर राज आनंद ने ‘सफर’, ‘संगम’, ‘एक दूजे के लिए’ सहित 120 फिल्में लिखी थी. इतना ही नहीं वह मशहूर फिल्म अभिनेता व निर्देशक टीनू आनंद के भतीजे हैं. इसके बावजूद यदि सिद्धार्थ आनंद को बौलीवुड कार्यशैली समझ में नहीं आ रही है, तो फिर उन्हें कौन समझा सकता है? बौलीवुड में हमेशा से सफलता व सफल लोगों को ही सलाम किया जाता रहा है. असफल लोगों को बौलीवुड में लोग बहुत जल्दी भूल जाते हैं.

हृतिक रोशन व आशुतोष के मगरमच्छी आंसू

बौलीवुड में एक बहुत पुरानी कहावत है-‘‘आप उतने ही अच्छे होते हैं, जितनी आपकी पिछली फिल्म बाक्स आफिस पर अच्छी यानी कि सफल साबित होती है.’’ इस कहावत के अनुसार हृतिक रोशन तो 2014 में ही खराब अभिनेता साबित हो गए थे, जब उनकी 140 करोड़ रूपए की लागत वाली फिल्म ‘‘बैंग बैंग’’ को लागत वसूल करना मुश्किल हो गया था. सूत्रों के अनुसार इस फिल्म ने बाक्स आफिस पर कुल 181 करोड़ रूपए ही कमाए थे. सभी को पता है कि बाक्स आफिस पर जो रकम इकट्ठा होती है, उसमें से सिनेमा हाल के किराए व मनोरंजन कर आदि को काटने के बाद निर्माता के हाथ में मुश्किल से चालीस प्रतिशत रकम ही आती है. अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि 181 करोड़ में से निर्माता के हाथ में कितनी रकम लगी होगी.

बौलीवुड की उसी कहावत के आधार पर ‘व्हाट इज योर राशी’’ तथा ‘‘खेले हम जी जान से’’ जैसी बुरी तरह से असफल फिल्मों की वजह से फिल्मकार आशुतोष गोवारीकर भी दर्शकों के साथ बौलीवुड के कई निर्माताओं का विश्वास खो चुके थे. परिणामतः आशुतोष की नई फिल्म ‘मोहनजो दाड़ो’ के साथ जुड़ने के लिए कोई तैयार नहीं था. ऐसे में ‘एक अंधा एक कोढ़ी’ के तर्ज पर ‘‘मोहनजो दाड़ो’’ में हृतिक रोशन व आशुतोष गोवारीकर की जोड़ी बन गयी. कई प्रयासों के बाद आशुतोष गोवारीकर इस फिल्म के निर्माण में अपने साथ डिज्नी को जोड़़ने में कामयाब हो गए थे.

मगर ‘मोहनजो दाड़ो’ की बाक्स आफिस पर जो दुर्गति हुई है, उसके लिए आशुतोष गोवारीकर के साथ साथ हृतिक रोशन भी बराबर के गुनाहगार हैं. इस फिल्म को डुबाने में इनका अपना योगदान है, भले ही इस बात को यह दोनों स्वीकार न करें. अपनी पिछली फिल्मों की असफलता के बावजूद ‘मोहनजो दाड़ो’ को हृतिक रोशन व आशुतोष गोवारीकर ने प्रमोट नहीं किया. हृतिक रोशन के पास मीडिया से मिलने का वक्त ही नहीं था, जबकि हृतिक रोशन घर पर खाली बैठे हुए थे. तो दूसरी तरफ फिल्म के लेखक व निर्देशक के साथ साथ सह निर्माता होते हुए भी आशुतोष गोवारीकर ने मीडिया से मिलना जरुरी नहीं समझा.

हृतिक रोशन व आषुतोष गोवारीकर का दावा रहा है कि उन्हे किसी की मदद नही चाहिए, उनके फैन उनकी फिल्म देखने जरुर आएंगे. इन दोनों कलाकारों के पास एक नहीं दो दो पीआर की टीम थी, पर इन दोनों ही पीआरओ इन्हे नहीं समझा पाए कि मीडिया के माध्यम से फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाना आवश्यक है. अपनी फिल्म को लेकर अति उत्साहित या पहले से ही असफल मान चुके आशुतोष गोवारीकर ने मीडिया को अपनी फिल्म शुक्रवार, 12 अगस्त को सुबह के तीन शो होने के बाद साढ़े बारह बजे दिखायी, अन्यथा हर निर्माता मीडिया को अपनी फिल्म कम से कम एक दिन पहले दिखा देता है. जिन निर्माताओं को अपनी फिल्म पर भरोसा होता है, वह तो एक सप्ताह पहले भी दिखा देते हैं.

वैसे ‘‘मोहनजो दाड़ो’’ की बाक्स आफिस पर जो दुर्गति हो रही है,उ सको लेकर बौलीवुड में कई तरह की चर्चांएं गर्म हैं. सूत्रों के अनुसार बौलीवुड के बिचौलियों के बीच आम चर्चा है कि इस फिल्म में आशुतोष गोवारीकर ने अपनी जेब से पैसे नहीं लगाए थे, इसलिए उन्होंने बेमन से इस फिल्म का निर्माण किया है, अन्यथा एक निर्देशक के तौर पर उन्होंने जो गलतियां इस फिल्म में की हैं, वह न करते. तो कुछ बिचौलिए सीधे हृतिक रोशन को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. इनका दावा है कि हृतिक रोशन ने इस फिल्म में सबसे ज्यादा घटिया परफार्मेंस दी है. वह इस फिल्म की शूटिंग के दौरान अपने अभिनय पर ध्यान देने की बनिस्बत अपनी पत्नी सुजेन और अभिनेत्री कंगना रानौट के साथ झगड़ने पर ही ध्यान देते रहे.

मगर हृतिक रोशन और आशुतोष गोवारीकर अपनी फिल्म की असफलता के लिए फिल्म इंडस्ट्री को कटघरे में खड़ा कर रह हैं. इनका आरोप है कि फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने उनकी फिल्म के खिलाफ काम कर उन्हे परास्त करने के लिए लामबंदी की. आशुतोष गोवारीकर अभी भी दावा कर रहे हैं कि उन्होने अपनी फिल्म में इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में पेश किया, मगर मीडिया ने इसकी धज्जियां उड़ा दी.

बहरहाल, बौलीवुड से जुड लोग इसे हृतिक रोशन व आशुतोष गोवारीकर के मगरमच्छी आंसू बता रहे हैं.

भ्रूण हत्या पर ‘‘मेरा क्या कसूर’’

इन दिनों सरकार ने ‘बेटी पढ़ाओ’ और ‘बेटी बचाओ’ जैसी मुहिम चला रखी है. सरकार की तरफ से भ्रूण हत्या रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. मगर लेखक, निर्माता व अभिनेता त्रिलोक नौलखा का मानना है कि भ्रूण हत्या रोकने के लिए सरकार की तरफ से समुचित उपाय नहीं किए गए हैं. वह कहते हैं-‘‘हमारी राय में भ्रूण हत्या के खिलाफ सरकार को जिस तरह से कदम उठाने चाहिए, उस तरह से कदम उठाने में पूरी तरह से नाकामयाब रही है. इसीलिए हमने राजस्थान की पृष्ठभूमि पर एक रोचक कथा के साथ फिल्म ‘मेरा क्या कसूर’ का निर्माण किया है. इसमें मैने नकारात्मक किरदार निभाया है, जो कि फिल्म में अंततः स्वीकार करता है कि उसने अपनी जिंदगी में हमेशा गलत ही किया है. हमने औरत के गर्भ में ही लड़कियों भ्रूण की हत्या कर दिए जाने की वजहों को भी रेखांकित किया है. इतना ही नही हमने अपनी फिल्म में भ्रूण हत्या को राकने का कारगर व प्रभावशाली उपाय भी बताया है.’’

जब हमने कहा कि आमिर खान अपने टीवी शो ‘‘सत्यमेव जयते’’ में भी भ्रूण हत्या का मसला उठा चुके हैं, पर इससे कोई असर नहीं हुआ. इस पर फिल्म के निर्देशक निरंजन भूधदरा ने कहा-‘‘आमिर खान के टीवी शो ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया था. उनके शो को देखने के बाद हमने नए सिरे से भ्रूण हत्या के मसले पर गहन शोध कार्य किया. हमने पाया कि भ्रूण हत्या सबसे ज्यादा राजस्थान में ही होती हैं. हमने अपनी फिल्म की कहानी भी राजस्थान में ही रखी. हमने अपनी इस फिल्म में साफ तौर पर कहा है कि यदि लड़कियों को औरत के गर्भ में ही इसी तरह मारा जाता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब हर पुरूष कुंवारा रह जाएगा. क्योंकि पुरूष से विवाह के लिए इस संसार में औरत ही नहीं होगी. हमने अपनी फिल्म में इस बात पर जोर दिया है कि संसार में कई तरह के कर्म करने का हक सिर्फ लड़को को दिया गया है, लड़कियों को नहीं. इसे बदलने की जरुरत है. एक पिता या माता का दाह संस्कार या अंतिम संस्कार बेटा ही नहीं बल्कि बेटी भी कर सकती है.’’

‘पार्च्ड’ में राधिका आप्टे के सेक्स सीन हुए लीक

जुलाई माह में लंदन में संपन्न ‘‘लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल’’ के दौरान 14 से बीस जुलाई के बीच चार दिन दिखायी गयी निर्माता अजय देवगन और लेखक व निर्देशक लीना यादव की फिल्म ‘‘पार्च्ड’’ को काफी पसंद किया गया. सूत्रों के अनुसार लंदन के दर्शकों ने इस फिल्म में मौजूद हिंसा व सेक्स दृश्यों के साथ साथ अति गंदी गंदी गालियों का जमकर मजा उठाया. इस फिल्म फेस्टिवल में फिल्म के प्रदर्शन के ‘‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’’ के स्टूडियो जाकर ‘लाइव’ बातचीत करते हुए फिल्म ‘‘पार्च्ड’’ के निर्माता अजय देवगन ने कहा-‘‘हम अपनी इस फिल्म के माध्यम से मानवता का संदेश दे रहे हैं.’’ इसी बातचीत के दौरान अजय देवगन ने कहा-‘‘हमें गर्व है कि हमने ऐसी फिल्म बनायी.’’ जबकि फिल्म की लेखक व निर्देशक लीना यादव ने कहा-‘‘गांव में सेक्स कैसे होता है, उसे दिखाने के लिए यह कहानी बतायी है. इस फिल्म में हमने पुरुषों द्वारा औरतों की प्रताड़ना का चित्रण किया है.’’

लंदन में संपन्न इस फिल्म फेस्टिवल व लंदन में बीबीसी वर्ल्ड न्यूज के साथ फिल्म के निर्माता अजय देवगन व लीना यादव की खास बातचीत के ठीक एक माह बाद 14 अगस्त को ‘‘यूट्यूब’’ पर फिल्म ‘‘पार्च्ड’’ के दो सेक्स सीन का वीडियो लीक हो गया. इनमें से एक वीडियो में आदिल हुसेन और राधिका आप्टे के बीच संभोग दृश्य का वीडियो है. तो दूसरे वीडियो में राधिका आप्टे और तनिष्ठा चटर्जी एक दूसरे के खुले वक्षस्थलों के साथ खेलते हुए नजर आ रही हैं. इन दोनों वीडियो में सेक्स के साथ साथ ‘‘फ्रंट न्यूडिटी’’ है. अब इन दोनो वीडियों को लीक कर कौन सी मानवता का संदेश पहुंचाया जा रहा है, यह बात हमारी समझ से परे है? दूसरी बात  क्या औरत की प्रताड़ना के चित्रण के लिए इन दोनों दृश्यों का फिल्म में होना अति आवश्यक है?

वास्तव में फिल्म ‘‘पार्च्ड’’ के राधिका आप्टे वाले इन दोनों सेक्स दृश्यों के वीडियो के लीक होने के बाद कई तरह के सवाल और कई तरह की बातें बौलीवुड में हो रही हैं. सूत्रों की माने तो भारत के सिनेमा घरों में फिल्म ‘पार्च्ड’ को प्रदर्शित करने के लिए इस फिल्म को ‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ के पास भेजा गया है. सूत्रों का दावा है कि यह फिल्म अभी भी ‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ में फंसी हुई है. ‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ को फिल्म ‘‘पार्च्ड’’ में मौजूद अनगिनत गंदी व भद्दी गालियों एवं कई दृश्यों पर आपत्ति है. सूत्रों की माने तो फिल्म ‘‘पार्च्ड” के राधिका आप्टे वाले जिन दो सेक्स सीन का वीडियो इंटरनेट पर लीक किया गया है, उन पर ‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ को सबसे ज्यादा आपत्ति है. तो क्या निर्माता ने ‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ पर दबाव बनाने के लिए या चुनौती देने के लिए यह वीडियो लीक किए हैं? इन दृश्यों को इंटरनेट पर लीक करके कहीं यह संदेश देने का प्रयास तो नही किया गया कि ‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ को जो करना हो वह करे, हमने तो दर्शकों तक यह दृश्य पहुंचा दिए.

इस तरह की चर्चाओं की सबसे बडी वजह यह भी है कि यह वीडियो सेंसर बोर्ड से लीक नहीं हुए हैं, इस बात को फिल्म ‘‘पार्च्ड’’ के एक निर्माता असीम बजाज एक अंग्रेजी दैनिक से बात करते हुए कबूल कर चुके हैं. वैसे भी अब ‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ ने फिल्म निर्माताओं से फिल्म का डीवीडी नहीं बल्कि फिल्म को डीसीपी फार्मेट में लेना शुरू कर दिया है, इससे अब ‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ से फिल्म के लीक होने की सारी संभावनाएं खत्म हो गयी हैं. तभी तो फिल्म ‘‘पार्च्ड’’ के एक निर्माता असीम बजाज ने मुंबई के एक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र से कहा है कि यह लीक नहीं है, बल्कि उन्हे लगता है कि अमेरिका या फ्रांस से किसी ने यह वीडियो अपलोड कर दिया है, क्योंकि अमेरिका व फ्रांस में यह फिल्म प्रदर्शित हुई है.

तभी तो एक अंग्रेजी अखबार से फिल्म ‘‘पार्च्ड’’ के एक निर्माता ने कहा है-‘‘राधिका आप्टे मेरी बहन की तरह हैं. हमने औरत का शोषण करने या नारी को एक पदार्थ की तरह फिल्म में उपयोग नहीं किया है. हमने फिल्म सेंसर बोर्ड के पास भेजी है. यह दृश्य फिल्म के कथानक का अहम हिस्सा हैं. हम इन दृश्यों को लेकर शर्मिंदा नहीं है.’’ वहीं बौलीवुड का एक तबका राधिका आप्टे के इन लीक हुए सेक्स सीन को फिल्म ‘‘पार्च्ड’’ के प्रचार का एक हथकंडा भी मान रहा है.

इतना ही नहीं असीम बजाज ने यह भी स्वीकार किया है कि उनका ईरादा भारत में इस फिल्म के प्रदर्शन से पहले इन दोनों सीन में राधिका आप्टे के ब्रेस्ट/वक्षस्थल और शरीर के अन्य हिस्सों को ब्लर कर देने का था. असीम बजाज ने यह भी दावा किया है कि इन दृश्यों के लीक होने से वह काफी आहत हैं. मगर मानवता का संदेश देने की बात करने वाले फिल्म ‘पार्च्ड’ के ही निर्माता अजय देवगन इन सीन के लीक पर चुप्पी साधे हुए हैं.

वैसे असीम बजाज ने आगे कहा है-‘‘इन वीडियों में ऐसा कुछ भी नही है, जिस पर बवाल मचाया जाए. हमारे यहां सेक्स को लेकर कुछ ज्यादा ही हल्ला किया जाता है. हमारे देश में बलात्कार के वीडियो खुलेआम देखे जाते हैं. मगर सेक्स अभी भी हौव्वा बना हुआ है. यह फिल्म उन औरतों की कहानी है, जो उनको पीसने की लगातार चली आ रही प्रथा के खिलाफ उठ खड़ी होती हैं.’’

जबकि सेक्स सीन में राधिका आप्टे के साथ नजर आ रहे अभिनेता आदिल हुसेन इस दृश्य के लीक होने से परेशान हैं. उन्होने एक अन्य अंग्रेजी अखबार से कहा है- ‘‘जब कल मुझे दृश्य के लीक होने के बारे में पता चला, तो मुझे बड़ा अजीब सा लगा. इससे पता चलता है कि कैसे यौन संबंध हमारे देश में लोगों को पागल कर रहे हैं. तभी तो आप प्रेम दृश्य व सेक्स दृश्य ही लीक करते हैं. इससे यह बात उजागर होती है कि हम सभी सेक्स के प्रति कितना उतावले रहते हैं, मगर हम सेक्स को लेकर खुलकर बात करना पसंद नहीं करते. हम इसे कालीन के नीचे ढंककर रखना पसंद करते हैं.

इंटरनेट पर लीक इस वीडियो को शीर्षक दिया गया है-‘‘राधिका आप्टे सेक्स सीन’’. इस पर टिप्पणी करते हुए आदिल हुसेन कहते हैं-‘‘इसे ‘आदिल हुसेन सेक्स सीन’ शीर्षक क्यों नहीं दिया गया. इससे भी भारत मे प्रचलित पितृसत्तात्मकता की मानसिकता ही उजागर होती है. यदि एक पुरूष यह सब करता, तो अलग बात हो जाती. मगर एक औरत कर रही है,इसलिए इसका हौव्वा बनाया जा रहा है. जबकि पश्चिमी देशों में इस तरह के सीन बहुत सामान्य तरीके से फिल्मों में दिखाए जाते हैं. यह सीन लीक करने का काम भी किसी औरत ने नहीं बल्कि पुरूष ने ही किया होगा. और वह भी कोई न कोई भारतीय आदमी.’’

फिल्म की कहानी गुजरात दूर दराज के एक गांव में पुरूष दासता और पितृसत्ता की सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ने पर आमादा तीन औरतों की है. जी हां! फिल्म ‘‘पार्च्ड’’ की कहानी गुजरात की तीन औरतों की है. तीनों की परिस्थितियां अलग अलग हैं. सूत्रों के अनुसार फिल्म मे सुरवीन चावला एक वेश्या है, जो कि सर्कस का हिस्सा बनकर गांवव आयी हुई है. जबकि राधिका आप्टे और तनिष्ठा चटर्जी एक ही गांव में पड़ोसी हैं. तनिष्ठा चटर्जी विधवा है, तो वहीं राधिका आप्टे का पति उसकी इसलिए पिटायी करता है कि उसने अब तक उसे बच्चा नहीं दिया. सुरवीन, राधिका आप्टे को लेकर आदिल हुसेन के पास ले जाती है.

बौलीवुड में यह चर्चाएं भी गर्म है कि फिल्म‘‘पार्च्ड’’ के निर्माताओं रअजय देवगन और असीम बजाज को अपनी फिल्म के कथानक पर भरोसा नही है, इसलिए सेक्स दृश्यों को इंटरनेट पर लीक कर ललचाने का काम किया गया है, मगर यदि यह सीन फिल्म में ज्यों का त्यों उस वक्त न रहे, जब फिल्म सिनेमाघर में होगी, तो..इसे दर्शकों के संग धोखाधड़ी ही कहा जाएगा. 

सहवाग-अंजुम एमसीसी के ऑनरेरी लाइफ मेंबर बने

टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग मेलबर्न के ऑनरेरी लाइफ मेंबर क्लब में शामिल हो गए हैं. सहवाग से पहले यह सम्मान सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली को मिल चुका है. वहीं भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी अंजुम चोपड़ा को भी इस क्लब में शामिल किया गया है.

एमसीसी ने अपने बयान में कहा कि वीरेंद्र सहवाग को ऑनरेरी लाइफ मेंबर क्लब में शामिल किये जाने का फैसला लिया गया है. 37 साल के वीरेंद्र सहवाग ने कुल 104 टेस्ट व 251 वनडे मैच, 19 टी-20 मैच खेले हैं.

एमसीसी हेड जॉन स्टीफेंस ने कहा कि नये ऑनरेरी सदस्य का स्वागत हमेशा ही अच्छा अनुभव रहता है, वीरेंद्र सहवाग उसी कड़ी का एक हिस्सा हैं. एमसीसी की आधिकारिक साइट ने अपने बयान में कहा है कि सहवाग अपने कॅरियर में बेहतरीन खिलाड़ी रहे.

एमसीसी की ऑनरेरी लिस्ट में शामिल होने वाले भारतीय खिलाड़ी

नारी कॉट्रेक्टर (1969)

अजीत वाडेकर (1978)

चंदू बोर्ड (1981)

फारूक इंजीनियर (1981)

बापू नंदकर्णी (1981)

बिशन सिंह बेदी (1982)

बीएस चंद्रशेखर (1982)

ईएएस प्रसन्ना (1984)

एस वेंकटराघवन (1988)

जीआर विश्वनाथ (1990)

मोहिंदर अमरनाथ (1993)

सुनील गावस्कर (1993)

दिलीप वेंगसरकर (1993)

कपिल देव (1995)

सैयद किरमानी (1995)

रवि शास्त्री (1995)

किरन मोरे (1999)

राहुल द्रविड़ (2008)

अनिल कुंबले (2008)

सचिन तेंदुलकर (2010)

सौरव गांगुली (2015)

अंजुम चोपड़ा (2016)

वीरेंद्र सहवाग (2016)

एमसीसी के बारे में

मेलबर्न क्रिकेट क्लब दुनिया का सबसे अधिक सक्रिय क्रिकेट क्लब है. यह क्लब लॉर्ड्स मैदान का मालिक है और क्रिकेट के नियमों का संरक्षक भी है. इसकी स्थापना 1787 में की गयी थी, तबसे इसे क्रिकेट के नियमों को बनाने वाली मुख्य संस्था के रूप में देखा जाता है.

मौजूदा समय में इसका घर लॉर्ड्स को माना जाता है. इस क्लब के 18000 पूर्णकालिक व 5000 सहायक सदस्य हैं. इस क्लब के सदस्य मैदान पर मालिकाना हक रखते हैं और एमसीसी की संपत्ति पर भी इन्ही का अधिकार होता है. इस क्लब के तकरीबन 2000 सदस्य हर साल क्रिकेट के मैदान पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं.

अमर के बाद जया प्रदा की वापसी

समाजवादी पार्टी में अमर सिंह के बाद अब जया प्रदा की भी वापसी की राह बन गई है. जया प्रदा को फिल्म विकास परिषद का उपाध्यक्ष बनाया जा रहा है. अमर सिंह और जया प्रदा समाजवादी पार्टी में बहुत समय पहले रहे, फिर पार्टी से बाहर हुये. अब अमर सिंह के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद जया प्रदा को भी उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद का उपाध्यक्ष बनाकर मंत्री स्तर का दर्जा दिया जा सकता है. विधानसभा चुनाव के पहले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव अपने पुराने भरोसेमंद साथियों को अपने साथ जोड़ लेना चाहते है. वह पूरी ताकत और भरोसे के साथ विधानसभा चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं. असल में मुलायम सिंह यादव की नजर एक बार फिर से दिल्ली की कुर्सी पर है. वह पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह से विकास चाहते थे, वह अखिलेश यादव सरकार में नहीं हो पाया है. ऐसे में दिल्ली की कुर्सी तक पहुंचना सरल काम नहीं है.

मुलायम अब अपने पुराने साथियों के भरोसे से दिल्ली की कुर्सी पर अपना दावा मजबूत करने में लगे हैं. दिल्ली की कुर्सी के लिये मुलायम का मुकाबला बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से है. 2019 के लोकसभा चुनाव में उम्मीद की जा रही है कि देश में गैर कांग्रेस और गैर भाजपा की सरकार बन सकती है. ऐसे में प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार बिहार और उत्तर प्रदेश से हो सकते हैं. अगर समाजवादी पार्टी 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव जीत लेगी, तो दिल्ली की कुर्सी पर उसका दावा मजबूत हो सकता है. उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटे हैं जो देश में सबसे अधिक हैं. दिल्ली में सरकार बनाने के लिये जिस मजबूत ताने बाने की जरूरत है, वह अखिलेश यादव टीम में नजर नहीं आ रही है. इस बात को लेकर मुलायम सिंह यादव चिन्ता में रहते हैं. वह कई बार यह कह चुके हैं कि देश के दूसरे राज्यों में सपा के विस्तार के लिये जो काम होना चाहिये, वह नहीं हो रहा है.

इस समय लोकसभा में मुलायम परिवार के 5 और राज्य सभा में 1 सदस्य है. दिल्ली की राजनीति में किसी एक परिवार के इतने सदस्य कभी नहीं रहे हैं. भविष्य में भी ऐसी उम्मीद कम ही दिखती है. मुलायम को लगता है कि इतनी बड़ी ताकत के बाद भी वह दिल्ली की दौड़ में पीछे रह गये, तो सबसे खराब बात होगी. ऐसे में वह अमर सिंह और जया प्रदा जैसे पुराने लोगों को पार्टी में जोड़ लेना चाहते हैं. जिससे दिल्ली में उनकी आवाज बुलंद रहे. देखने वाली बात यह है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मुलायम की समाजवादी पार्टी क्या कमाल दिखाती है? दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश हो कर ही जाता है. जो उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों को जीत लेगा, वह ही दिल्ली पर अपनी दावेदारी ठोक पायेगा.            

गूगल डुओ बदल देगा वीडियो कॉलिंग की दुनिया

सर्च इंजन गूगल ने एंड्राइड और IOS उपयोक्ताओं के लिए अपनी वीडियो कॉलिंग एप गूगल डुओ शुरू की है. बाजार में इसका मुकाबला एप्पल की फेसटाइम और माइक्रोसॉफ्ट की स्काइप से होगा. इस वीडियो कॉलिंग एप की घोषणा गूगल ने तीन महीने पहले अपनी आई ओ डेवलपर कॉन्फ्रेंस में की थी. इसके पीछे उसका लक्ष्य वीडियो कॉलिंग की मुश्किलों को कम करना है.

गूगल समूह के उत्पाद प्रबंधक अमित फुले ने एक बयान में कहा कि वीडियो कॉलिंग दूसरी सबसे अच्छी चीज है जो किसी को बिल्कुल पास लेकर आता है. हमने एक ऐसे इंटरफेस का डिजायन किया है जो बहुत आसान, साधारण और स्वागतयोग्य है. भारत जैसे देशों के लिए इसे नेटवर्क कनेक्टिविटी के हालातों को ध्यान में रखकर डिजायन किया गया है. हमें उम्मीद है कि वीडियो कॉलिंग के अनुभव को हम और अधिक निजी बना पाएंगे. अगले कुछ दिनों में यह पूरी तरह उपलब्ध हो जाएगा. निजता और सुरक्षा के लिहाज से इसे इनक्रिप्टेड बनाया गया है.

क्या है अलग

Google का दावा है कि ये अब तक का सबसे फास्ट और इंटरफेस के मामले में सिंपल वीडियो कॉलिंग एप है. ये एप भी 1 टू 1 वीडियो कॉलिंग एप मोबाइल के साधारण कॉल जैसा ही काम करेगा. इसे आप जैसे ही ओपन करेंगे खुद ब खुद सेल्फी कैमरा ऑन हो जाएगा. आपको स्क्रीन पर सिर्फ एक बटन दिखाई देगा जो कि कॉल करने के लिए होगा. बाकी एप की तरह ही इससे भी आपने जिसे कॉल किया है वो आपको लाइव देख सकेगा. आप चाहें तो फ्लिप करके रियर कैमरा भी यूज कर सकते हैं.

लॉग इन करना भी जरूरी नहीं

आपको यह जाकर भी हैरानी होगी कि यह एप महज 5MB का है और इसकी खासियत यह है कि दूसरे वीडियो कॉलिंग एप की तरह इसमें आपको अकाउंट बना कर लॉग इन करने की जरुरत नहीं होगी. यह आपको फोन नंबर के जरिए काम करेगा.

पानी में ‘तैर’ सकेगा अगला आईफोन!

अगला आईफोन कैसा होगा, यह जानने के लिए आप भी उत्सुक हैं? उसके बारे में कई जानकारियां लीक हुईं हैं, कई अफवाहें उड़ रही हैं. और इन्हीं लीक हुईं जानकारियों में एक बात यह भी है कि नया आईफोन 'तैर' सकता है.

वैसे नेक्स्ट आईफोन के बारे में कौन-सी अफवाह अफवाह साबित होती है और कौन-सी सच साबित होती है, यह तो लॉन्च के बाद ही पता चलेगा. उम्मीद की जा रही है कि फोन 16 सितंबर को लॉन्च होगा.

खबर है कि एप्पल मोबाइल ऐसी तकनीक से लैस होगा जिसके जरिए अंडरवॉटर तस्वीरें ली जा सकेंगी. कंपनी ने कुछ दिनों पहले अंडरवॉटर पिक्चर टेकनीक का पेटेंट हासिल किया है. लेकिन, यह बात अभी तय नहीं है कि एप्पल का नया फोन वॉटरप्रूफ होगा या नहीं.

आईफोन 6sको ही लीजिए, इसके जो विडियोज इंटरनेट पर मौजूद हैं, उनके मुताबिक उसे पानी के बाउल में डाला जाता है और उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचता. लेकिन, कंपनी ने वॉटरप्रूफिंग की कोई बात नहीं की. बल्कि फोन को किसी भी लिक्विड में न डालने की सलाह ही दी.

कार्ड से भुगतान होगा सस्ता

कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक कदम और बढ़ाया है. सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक सेवाओं के लिए डेबिट या क्रेडिट कार्ड तथा नेट बैंकिंग के जरिये किए जाने वाले सभी भुगतान के लिए सौदा लागत वह वहन करेगी. सरकार ने देश में कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है.

इस समय सरकार को किए जाने वाले भुगतान पर लेन-देन की लागत या मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ग्राहक उठाते हैं. वित्त मंत्रालय ने इस बारे में एक आधिकारिक परिपत्र जारी किया है. इसमें कहा गया है कि अन्य मर्चेंटों की तरह एमडीआर लागत उठाने के लिए सरकारी विभागों को उचित कदम उठाने चाहिए. डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड या किसी डिजिटल तरीके से सरकार को भुगतान के लिए एमडीआर लागत का वहन किसी भी तरह जनता को नहीं करना चाहिए.

इसमें कहा गया है कि डेबिट, क्रेडिट कार्डों या डिजिटल तरीके से इस तरह के भुगतान पर लेनदेन के लिए इंटरमीडियरीज को किए जाने वाले भुगतान का तौर तरीका तय किया जा रहा है. इस बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश उचित समय पर जारी किए जाएंगे. सरकार द्वारा सरकारी भुगतान व संग्रहण में क्रेडिट, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के कदमों के तहत वित्त मंत्रालय ने यह पहल की है.

रिजर्व बैंक ने 2012 में डेबिट कार्ड पर 2000 रुपए तक की ट्रांजैक्‍शन वैल्‍यू पर एमडीआर की सीमा 0.75% और 2000 से ज्‍यादा की ट्रांजैक्‍शन वैल्‍यू पर 1 फीसदी की सीमा तय की थी. हालांकि, आरबीआई ने क्रेडिट कार्ड भुगतान पर एमडीआर की कोई सीमा तय नहीं की है. देश में इस समय 61.5 करोड़ डेबिट कार्ड धारक और 2.3 करोड़ क्रेडिट कार्ड धारक हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें