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भारत में हाईस्पीड ट्रेन बनाने का काम शुरू

चीन की हाईस्पीड ट्रेन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी चाइना रेलवे रोलिंग स्टॉक कॉरपोरेशन(सीआरआरसी) ने कहा है कि भारत में उसने काम शुरू कर दिया है. कंपनी ने एक बयान में कहा है कि उसके संयुक्त उद्यम का नाम सीआरआरसी पायनियर इंडिया इलेक्ट्रिक कंपनी है और यह हरियाणा में स्थित है.

कंपनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की घोषणा के बाद यह संयुक्त उद्यम स्थापित किया था. सीआरआरसी भारत में रेल परिवहन उपक्रम के लिए असेंबली इकाई स्थापित करने वाली पहली कंपनी है. परियोजना पर कुल 6.34 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ है, जिसमें चीनी कंपनी की 51% हिस्सेदारी है. इस संयंत्र में रेल डीजल इंजनों की मरम्मत होगी और नए इंजन भी निर्मित किए जाएंगे. इसके अलावा यह भारतीय रेलवे को प्रौद्योगिकीय मदद भी उपलब्ध कराएगा.सीआरआरसी के उपाध्यक्ष यू वेइपिंग ने कहा, ‘इस नए संयंत्र के कारण देश में रोजगार के नए मौके आयेंगे और राजस्व में वृद्धि होगी. उन्होंने कहा कि यह औद्योगिकी क्षमता में समन्वय और स्थानीय उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देगा.

इंडियन रेलवे सिस्टम के आधुनिकीकरण में विभिन्न स्तरों पर चीनी सहयोग का समझौता होने के बाद भारतीय रेलवे में चीन का यह पहला बड़ा निवेश है. हालांकि, इंडियन रेलवे के इंजीनियर चीन में ट्रेनिंग ले रहे हैं. लेकिन, अब चीन अपनी तरह की रेलवे यूनिवर्सिटी भारत में बनाने में सहयोग कर रहा है. हाई स्पीड ट्रेन के अलावा भारत और चीन के बीच बेंगलुरु होते हुए चेन्नई से मैसूर वाले रेल रूट पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए तकनीकी सहयोग देने पर भी सहमति बनी है. साथ ही चीन चेन्नई और दिल्ली के बीच हाई स्पीड रेलवे लाइन बनाने की संभावनाओं का भी अध्ययन कर रहा है.

मेरे पति को शराब, बीड़ी सिगरेट, गुटके की लत है. कृपया बताएं मैं क्या करूं.

सवाल

मैं 23 वर्षीय विवाहिता और 2 बच्चों की मां हूं. मेरे पति को शराब, बीड़ी सिगरेट, गुटके की लत है जबकि मुझे इन चीजों से सख्त नफरत है. इस कारण हमारी अकसर लड़ाई होती है. मन करता है कि ऐसे व्यसनी पति को छोड़ दूं पर जब भी मैं उन्हें छोड़ने की बात करती हूं, तो वे मरने की धमकी देने लगते हैं. कृपया बताएं मैं क्या करूं?

जवाब

आप के पति को शराब, बीड़ी सिगरेट आदि का व्यसन पहले से था, इसलिए शादी करने से पहले आप को निर्णय लेना था कि ऐसे व्यक्ति के साथ रह सकती हैं या नहीं. शादी हो जाने और 2 बच्चों की मां बन जाने के बाद पति को छोड़ देने की बात सोचना सरासर बेवकूफी है. पति कोई वस्तु नहीं कि पसंद नहीं आई तो छोड़ दो. आप को पति के दुर्व्यसनों को छुड़ाने का प्रयास करना चाहिए. ये एकाएक तो नहीं छूट सकते पर धीरेधीरे पति में इन्हें छोड़ने की इच्छाशक्ति जगाएं. आवश्यक हो तो किसी नशामुक्ति केंद्र से संपर्क कर सकती हैं. आप के सहयोग और धैर्य से पति इन बुरी आदतों से छुटकारा पा लेंगे.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

ट्विटर करेगा अब भद्दे ट्वीट को फिल्टर

माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर ने अपने नोटिफिकेशन सेटिंग्स में एक क्वालिटी फिल्टर शामिल किया है, जिसे सक्रिय करने पर यह आपके लिए बेकार या भद्दी सामग्री को स्वत: बाहर निकाल देता है. क्वालिटी फिल्टर विभिन्न प्रकार के संकेतों का इस्तेमाल करता है, जैसे अकाउंट किस क्षेत्र का है. साथ ही यह आप तक गुणवत्तापूर्ण ट्वीट पहुंचाने में भी मदद करता है.

ट्विटर ने शुक्रवार को एक ब्लॉग में कहा कि उपयोगकर्ता मोबाइल तथा वेब पर नोटिफिकेशनों की संख्या सीमित भी कर सकते हैं.

उपयोगकर्ता जिन लोगों को फॉलो कर रहा है या फिर उन्होंने हाल में जिन लोगों के साथ बातचीत की है, उनकी सामग्री को हालांकि यह फिल्टर नहीं करता है. नोटिफिकेशन सेटिंग्स में अपनी इच्छा के अनुसार, इसे सक्रिय या निष्क्रिय किया जा सकता है.

ट्विटर के क्वालिटी फिल्टर को पिछले साल शुरू किया गया था, जिसका मकसद सही अकाउंट वाले लोगों को चुनना था. यह फीचर हालांकि भद्दे शब्दों को डिलीट नहीं करता, लेकिन उन्हें छिपा जरूर देता है.

डूबते करियर से परेशान सोनाक्षी सिन्हा

बौलीवुड में जब तक कलाकार या फिल्मकार सफलता की सीढ़ियां चढ़ता रहता है, तब तक का उसका हर कदम सही ठहराया जाता है, पर जैसे ही उसका करियर नीचे लुढ़कना शुरू होता है, वैसे ही आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो जाता है.

सांसद व अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी सोनाक्षी सिन्हा के अभिनय करियर की शुरुआत बहुत अच्छी हुई थी. करियर के शुरुआती दौर में उन्हे काफी सफलता मिल रही थी. मगर फिर वह सफलता के घमंड में चूर होकर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठीं कि पिछले दो वर्ष के दौरान ‘बुलेट राजा’, ‘आर राजकुमार’, ‘एक्शन जैक्सन’ व ‘तेवर’ जैसी उनकी फिल्मों ने बाक्स आफिस पर पानी तक नहीं मांगा.

इन फिल्मों की असफलता से सोनाक्षी सिन्हा ने सबक सीखने की जरुरत महसूस नहीं की और अब वह अपनी शीघ्र प्रदर्शित हो रही एक्शन प्रधान फिल्म ‘अकीरा’ को लेकर परेशान हैं. सोनाक्षी सिन्हा ने ‘अकीरा’ में एक्शन किया है और उन्हे लगा था कि इस फिल्म से उनकी एक्शन गर्ल की ईमेज बन जाएगी, पर वह भूल गई कि उनसे पहले यही कारनामा दीपिका पादुकोण, रानी मुखर्जी, माधुरी दीक्षित, प्रियंका चोपड़ा भी विभिन्न फिल्मों में करके नुकसान उठा चुकी हैं.

बहरहाल, फिल्म ‘अकीरा’ का जब से ट्रेलर बाजार में आया है, तब से सोनाक्षी सिन्हा की परेशानियां कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी हैं. क्योंकि इस फिल्म के ट्रेलर को लोगों ने बिलकुल पसंद नहीं किया. सूत्रों की माने तो उसके बाद इस फिल्म को गर्म करने के लिए उच्चस्तरीय बैठक हुई और इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद सोनाक्षी सिन्हा की पीआर टीम ने सोनाक्षी सिन्हा को सुर्खियों में लाने के लिए बंटी सचदेव से सोनाक्षी के रिश्तों को मीडिया में उछालना शुरू किया, जिसका फायदा होने की बजाय सोनाक्षी सिन्हा को नुकसान ही उठाना पड़ रहा है. क्योंकि ‘अकीरा’ प्रेम कहानी नहीं, बल्कि एक्शन फिल्म है. जब किसी ने सोनाक्षी सिन्हा व फिल्म के निर्माता का ध्यान इस गलती की तरफ दिलाया, तब सूत्रों के अनुसार सोनाक्षी सिन्हा ने अपनी पीआर टीम को खूब खरी खोटी सुनाई.

उसके बाद निर्माता ने अपनी तरफ से ‘यूट्यूब’ पर एक वीडियो ‘‘मेकिंग आफ अकीराः द अकीरा पंच’’ डाला. सोनाक्षी सिन्हा व निर्माता को उम्मीद थी कि वह छा जाएंगी. लेकिन अफसोस ‘यूट्यूब’ पर जहां हर कलाकार के वीडियो को एक ही दिन में लाखों हिट मिल जाते हैं, वहीं सोनाक्षी सिन्हा के इस वीडियो को तीन दिन में सिर्फ पंद्रह हजार हिट ही मिले हैं. यानी कि दर्शक उनके इस वीडियो को भी देखना पसंद नहीं कर रहे हैं. इससे सोनाक्षी सिन्हा न सिर्फ परेशान हैं, बल्कि उन्हे यह भी समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें. उधर उनके इस गिरते करियर की ही वजह से ‘‘दबंग 3’’ से उनकी छुट्टी हो गयी है.

बौलीवुड में चर्चाएं गर्म हैं कि अब सोनाक्षी सिन्हा ने भी दबी जुबान कुछ लोगों के खिलाफ बक बक करना शुरू कर दिया है. पर वह अपनी गलतियों पर कब ध्यान देंगी.

सस्ता होगा कार और बाइक का इन्श्योरेंस

आने वाले समय में आम ग्राहकों के लिए कार बीमा प्रीमियम सस्‍ता होगा जबकि ज्‍यादा रिस्‍क वाले वाहनों मसलन बस ट्रक और ऑडी जैसी गाड़ियों के ओनर को ज्‍यादा प्रीमियम चुकाना पड़ सकता है. इन्‍श्‍योरेंस इंडस्‍ट्री ने आम ग्राहक के लिए मोटर बीमा प्रीमियम सस्‍ता करने और सेफ ड्राइविंग को प्रोत्‍साहित करने के लिए एक प्रस्‍ताव तैयार किया है.

आम ग्राहकों के लिए कम होगा मोटर बीमा प्रीमियम

जनरल इन्‍शयोरेंस कंपनियों का प्रतिनिधित्‍व करने वाली संस्‍था जनरल इन्‍श्‍योरेंस काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल आर. चंद्रशेखरन ने बताया, ‘हम संसद की स्‍थाई समिति के समक्ष ऐसे प्रस्‍ताव रखेंगे जिससे यह सुनिश्चित हो कि आम चार पहिया या दोपहिया चालकों के लिए प्रीमियम सस्‍ता हो जबकि ऐसे वाहन जिनसे दुर्घटना का ज्‍यादा खतरा रहता है या जिन पर रिस्‍क अधिक होता है उनके लिए अधिक प्रीमियम हो. वाहनों के कुछ सेगमेंट से क्‍लेम अधिक आता है. मौजूदा समय में इसकी कीमत जिम्मेदारी से ड्राइविंग करने वाले आम आदमी को भी चुकानी पड़ती है और उसे ज्‍यादा प्रीमियम देना पड़ता है.

10 लाख से अधिक होने पर इंश्‍योर्ड दे मुआवजा

आर चंद्रशेखरन का कहना है कि मोटर व्‍हीकल एक्‍ट के तहत लायबिलिटी को 10 लाख रुपये तक लिमिट किया गया है. हम इतना मुआवजा देंगे लेकिन अगर पीड़ित पक्ष अदालत जाकर इससे अधिक मुआवजे का क्‍लेम करता है तो यह मुआवजा इंश्‍योर्ड को देना होगा. हमारा मानना है कि बीमा इंडस्‍ट्री प्रीमियम के आधार पर ही मुआवजा दे सकती है. अगर किसी को लगता है कि उसके वाहन पर रिस्‍क अधिक है और ज्‍यादा मुआवजा मांगा जा सकता है तो वह असीमित लायबिलिटी  या अधिक लायबिलिटी के लिए अलग एडिशनल कवर ले सकता है. इसके लिए उसे अतिरिक्‍त प्रीमियम देना होगा. इन्‍श्‍योरेंस कंपनियां इस तरह के उत्‍पाद बाजार में लाने पर विचार कर रहीं हैं.

खराब ड्राइविंग विहैवियर पर बढ़ जाएगा प्रीमियम

इंन्‍श्‍योरेंस इंडस्‍ट्री एक मकैनिज्‍म बनाने पर काम कर रही है जिससे वाहन चालक के ड्राइविंग विहैवियर को ट्रैक किया जा सके. ऐसे में अगर किसी ने 4 साल में दो एक्‍सीडेंट किए हैं तो उसकी गाड़ी का प्रीमियम बढ़ जाएगा. वहीं बेहतर रिकॉर्ड वाले वाहन चालक की गाड़ी का प्रीमियम कम होगा.

..इन्हें पता होता है आपने कब देखी पॉर्न

इंटरनेट यूज करने या सर्फिंग के बाद हिस्ट्री डिलीट करना अच्छी आदत है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें आपके वेब सर्फिंग की पल-पल की जानकारी होती है. आपने कौन-सी पोर्न साइट कब और कितनी बार विजिट की है इसकी जानकारी इन लोगों के पास होती है.

1. गूगल

अगर आप Gmail अकाउंट यूज करते हैं तो आपके पर्सनल इंफॉर्मेशन गूगल के पास होंगे. इसके अलावा आपकी वेब सर्फिंग आदतों के बारे में गूगल को पता चल जाता है. गूगल अपनी पॉलिसी के अनुसार आपका पर्सनल इंफॉर्मेशन तो यूज नहीं करती. लेकिन, आपकी सर्फिंग हैबिट के अनुसार आपको ऐड दिखाती है.

क्यों है खतरा-

अगर आप किसी अडल्ट कंटेंट या पोर्न वेबसाइट पर विजिट करते हैं तो गूगल को सबसे पहले पता चलता है. गूगल आपकी सर्च हिस्ट्री के हिसाब से आपको प्रोडक्ट्स के ऐड दिखाता है.

2. अडल्ट वेबसाइट्स

रिसर्च के मुताबिक सबसे ज्यादा वायरस अडल्ट कंटेंट वाले वेबसाइट्स से आते हैं. इसके अलावा ये वेबसाइट्स आपकी सर्फिंग भी ट्रैक करती हैं. Daily Beats के मुताबिक पोर्न या अडल्ट वेबसाइट पर क्लिक करते ही आपकी पर्सनल इंफॉर्मेशन उनके सर्वर में सेव हो जाती है.

क्यों है खतरा-

इन वेबसाइट्स से आपके स्मार्टफोन या सिस्टम में खतरनाक वायरस आ सकते हैं. ये वायरस आपकी बैंकिंग और पर्सनल जानकारियां चुरा सकते हैं.

3. कंटेंट नेटवर्क

ऐसी कंपनियां जो मल्टीपल वेबसाइट्स ऑपरेट करती हैं वो कुकीज के जरिए आपकी सर्फिंग हैबिट्स पर नजर रखती हैं. अगर आप फेसबुक अकाउंट से किसी अडल्ट कंटेंट वाली वेबसाइट पर लॉग इन करते हैं तो आपके साथ-साथ आपके फ्रेंड्स की जानकारी भी इन साइट्स के सर्वर में पहुंच जाती है.

4. ऐड नेटवर्क

ऐड नेटवर्क्स अलग-अलग साइट्स से यूजर्स को ट्रैक करती हैं ताकि वो यूजर को उसके इंट्रेस्ट और सर्च हैबिट्स के हिसाब से ऐड्स और पॉप अप भेज सकें.

क्यों है खतरा-

ऐड नेटवर्क के पास आपकी पर्सनल इंफॉर्मेशन नहीं होती लेकिन आपकी सर्फिंग इंफॉर्मेशन उनके पास होती है. ऐसे में अगर आपने पोर्न विजिट किया तो आपकी फेसबुक प्रोफाइल पर पोर्न से जुड़े ऐड पुश किए जाएंगे. ऐसे में आपको शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है.

5. आपका ISP (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर)

आप ऑनलाइन जो कुछ भी करते हैं उसके हर एक मिनट की जानकारी सर्विस प्रोवाइडर के पास होती है. हालांकि ISP की अपनी प्राइवेसी पॉलिसी होती है. पॉलिसी के तहत अपने कस्टमर्स की प्राइवेसी बनाए रखना इनकी जिम्मेदारी है.

क्यों है खतरा-

अगर आपने सही सर्विस प्रोवाइडर नहीं चुना तो आपकी सभी जानकारियां लीक हो सकती हैं.

6. आपका IT पर्सन

कम्प्यूटर से सर्च हिस्ट्री डिलीट करना बेशक अच्छी आदत है. लेकिन आपके कम्प्यूटर में सर्फिंग हिस्ट्री सेव करने के और भी कई तरीके हैं जिनके बारे में आपको नहीं पता लेकिन, आपका IT पर्सन सब जानता है. वो आपके द्वारा विजिट की गई सभी साइट्स का कच्चा चिट्ठा खोल सकता है.

क्यों है खतरा-

कई बार कम्प्यूटर खराब होने पर प्रॉलम के बारे में पता लगाने के लिए IT पर्सन को आपकी सर्फिंग हिस्ट्री खंगालनी पड़ती है. ऐसे में अगर आप रेगुलर प्रोर्न विजिटर हैं तो आपकी पोल खुल सकती है.

7. आपका पार्टनर या रूममेट

अगर आपको लगता है कि सर्च हिस्ट्री डिलीट करके आपने अपने आप को बचा लिया है तो बता दें कि ये आपकी गलतफहमी है. आपका पार्टनर या रूममेट चाहे तो आपकी सर्फिंग हिस्ट्री का पता मिनटों में लगा सकता है.

क्यों है खतरा-

घर, ऑफिस या पब्लिक सिस्टम्स पर पोर्न वेबसाइट्स ओपन करने से बचें नहीं तो आप खतरे में पड़ सकते हैं.

रियो ओलंपिक का रंगारंग समापन, जानें ओलंपिक में भारत का इतिहास

ब्राजील के रियो शहर में 17 दिन बाद 131वें ओलंपिक खेलों का रंगारंग समापन हुआ. क्लोजिंग सेरेमनी ऐतिहासिक मारकाना स्टेडियम में हुई. मेडल टैली में भारत एक कांस्य और एक रजत पदक के साथ 67वें स्थान पर रहा, जबकि सबसे अधि‍क 121 मेडल के साथ अमेरिका शीर्ष पर रहा. समापन कार्यक्रम की शुरुआत बेहतरीन रंग-बिरंगी रोशनी के बीच हुई. ओलंपिक रिंग्स और क्राइस्ट द रिडीमर का आकार बनाकर स्टेडियम में खूबसूरत नजारा पेश किया गया.

रियो ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन

रियो ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. इस बार रियो में 119 खिलाड़ियों का दल भेजा गया था, जिसमें भारत को सिर्फ 2 मेडल मिले. रियो में सिर्फ पीवी सिंधू (सिल्वर) और साक्षी मलिक (ब्रॉन्ज) ही मेडल जीत पाईं. इस साल किसी भी भारतीय पुरुष खिलाड़ी को मेडल नहीं मिला. दो मेडल के साथ भारत को ओलंपिक की मेडल लिस्ट में 67वां स्थान मिला.

खिलाड़ि‍यों ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया: पीएम

रियो ओलंपिक की समाप्ति के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक की मेजबानी के लिए ब्राजील का आभार व्यक्त किया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'पूरी दुनिया के लोगों का स्वागत करने और एक यादगार ओलंपिक आयोजित करने के लिए मेजबान ब्राजील के प्रति आभार.' पीएम ने इसके साथ ही रियो ओलंपिक में शामिल भारतीय दल को बधाई देते हुए कहा कि हर खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया.

जापान की गवर्नर को सौंपा गया ओलंपिक का झंडा

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक ने माराकाना स्टेडियम में टोक्यो में 2020 में मिलने के वादे के साथ इन खेलों का समापन किया. टोक्यो को 2020 ओलंपिक की मेजबानी दी गई है और उसने अपने प्रधानमंत्री शिंजो एबे के नेतृत्व में 32वें ओलंपिक खेलों की तैयारियों की अपनी झलक पेश की. बाक ने इस दौरान रियो के मेयर एडवडरे पेस से ओलंपिक झंडा लेकर टोक्यो की मेयर (गवर्नर) यूरीकी कोइके को सौंपा.

साक्षी मलिक रहीं ध्वजवाहक

इस मौके पर 27 बच्चों ने ब्राजील का नेशनल एंथम गाया. इसके बाद ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले 207 देशों के खिलाड़ियों ने स्टेडियम में मार्च पास्ट करना शुरू किया. ग्रीस ने इसकी शुरुआत की. ब्राजील और जापान का दल एक साथ स्टेडियम में दाखिल हुए, क्योंकि ब्राजील ने इस बार के ओलंपिक की मेजबानी की तो अगले ओलंपिक की मेजबानी जापान करेगा.

क्लोजिंग सेरेमनी में भारत की तरफ से रेसलिंग में रजद पदक जीतने वाली साक्षी मलिक भारतीय ध्वज लेकर स्टेडियम में दाखिल हुईं. पीवी सिंधू स्वदेश वापस लौट चुकी हैं और इसी वजह से वो इस इवेंट का हिस्सा नहीं बनीं.

रियो ओलंपिक खत्म हो चुका है. इस बार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और रेसलिंग में साक्षी मलिक ने सवा करोड़ हिन्दुस्तानियों को मुस्कुराने की वजह दी. सिंधु के सिल्वर और साक्षी के ब्रॉन्ज मेडल के अलावा, दीपा कर्माकर ने भी भारतीयों की उम्मीदें जगाई और 52 साल बाद जिम्नास्टिक्स में क्वालिफाई करने के बाद उन्होंने फाइनल तक का सफर तय किया.

दीपा महिलाओं की व्यक्तिगत वॉल्ट स्पर्धा के फाइनल में चौथे स्थान पर रहीं और मामूली अंकों के अंतर से पदक से चूक गईं. बीजिंग ओलंपिक 2008 में गोल्ड मेडल जीतने वाले अभिनव बिंद्रा भी 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में चौथे स्थान पर रहे.

पदकों के लिहाज से रियो ओलंपिक भारत के लिए निराश करने वाला ही रहा. वैसे ओलंपिक में भारत के इतिहास पर एक नजर दौड़ाई जाए तो साफ हो जाता है कि भारत ने कभी भी ऐसा प्रदर्शन नहीं किया कि उसकी वाहवाही हो सके.

ओलंपिक के इतिहास में भारत ने अब तक 24 बार इन खेलों में भाग लेते हुए 9 गोल्ड, 7 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज मेडल सहित कुल 28 पदक हासिल किए हैं. जबकि अमेरिकी तैराक माइकल फेल्प्स ने 5 ओलंपिक में भाग लेते हुए 23 गोल्ड मेडल सहित अकेले ही भारत के बराबर 28 पदक अपने नाम कर लिए.

आईना दिखाता इतिहास

ओलंपिक में भारत की शुरुआत

साल 1896 में एथेंस में हुए पहले ओलंपिक खेलों में भारत ने हिस्सा नहीं लिया. इसके बाद साल 1900 में पेरिस में हुए दूसरे ओलंपिक खेलों में भारत ने भाग भी लिया और 2 सिल्वर मेडल भी अपने नाम किए. यह दोनों मेडल एंग्लो इंडियन नॉर्मन प्रिचर्ड ने भारत की झोली में डाले.

ओलंपिक से भारत का वनवास

साल 1904 में सेंट लुइस ओलंपिक, 1908 में लंदन ओलंपिक, 1912 में हुए स्टॉकहोम ओलंपिक में भी भारत ने हिस्सा नहीं लिया. जबकि साल 1916 में पहले विश्व युद्ध के कारण ओलंपिक खेल नहीं हो पाए.

फिर शून्य से शुरुआत

साल 1920 में एंटवर्प (बेल्जियम) ओलंपिक और साल 1924 के पेरिस ओलंपिक में भारत की झोली खाली रही और कोई भी खिलाड़ी मेडल जीत पाने में सफल नहीं रहा.

हॉकी के सुनहरे युग की शुरुआत

साल 1928 में एम्सटर्डम में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में भारत हॉकी टीम ने सुनहरा प्रदर्शन करके गोल्ड मेडल हासिल किया और इस साल यही एकमात्र मेडल भारत के नाम रहा. इसके बाद 1932 में लॉस एंजिलिस और 1936 में बर्लिन में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम ने गोल्ड मेडल हासिल किया और भारत की झोली में 1-1 मेडल आया.

आजादी के बाद भारत का ओलंपिक अभियान

साल 1948 में लंदन में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में भी हॉकी का सुनहरा दौर जारी रहा और भारत ने हॉकी में लगातार चौथी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया और यही भारत का एकमात्र मेडल भी रहा.

साल 1952 में हेलसिंकी में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में भी भारतीय हॉकी टीम ने गोल्ड मेडल जीता, इसके अलावा यहां एक ब्रॉन्ज मेडल भी भारत ने अपने नाम किया. इस तरह भारत के पदकों की संख्या 2 तक पहुंची. साल 1956 मेलबोर्न ओलंपिक में भी हॉकी टीम में शानदार प्रदर्शन करके गोल्ड मेडल जीता और यही एकमात्र मेडल भारत के नाम रहा.

साल 1960 में रोम में आयोजित खेलों में भारत को सिर्फ एक सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. इसके बाद 1964 में टोक्यो ओलंपिक में एक बार फिर भारतीय हॉकी टीम ने गोल्ड मेडल जीता और एक बार फिर भारतीय टीम सिर्फ एक मेडल के साथ वापस लौटी.

हॉकी ने भी किया निराश

साल 1968 में मैक्सिको सिटी और 1972 में म्यूनिख में आयोजित ओलंपिक खेलों में भारत को 1-1 ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा. जबकि 1976 में मोंट्रियाल ओलंपिक में भारत की झोली खाली ही रही. इन तीनों सालों में हॉकी भी खास कमान नहीं दिखा पाई.

हॉकी में फिर लौटी रौनक

1980 के मॉस्को ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम में एक बार फिर और अब तक के आखिरी बार सुनहरा प्रदर्शन कर रिकॉर्ड 8वीं बार ओलंपिक गोल्ड मेडल जीता. इस साल भी भारत के हाथ सिर्फ एक ही मेडल आया.

फिर सिफर पर पहुंचा भारत

भारत में हॉकी का पतन हो गया. 1984 लॉस एंजिलिस, 1988 सियोल और 1992 बार्सिलोना ओलंपिक में भारत की झोली खाली ही रही. इस दौरान कोई भी भारतीय खिलाड़ी इस स्तर पर प्रदर्शन नहीं कर पाया.

लिएंडर पेस के रूप में मिला नया हीरो

साल 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत को लिएंडर पेस के रूप में टेनिस का एक नया हीरो मिला. लिएंडर ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया और पिछले 3 ओलंपिक से सिफर के सफर पर विराम लगाया.

मल्लेश्वरी ने दिखाई महिला शक्ति

साल 2000 में आयोजित सिडनी ओलंपिक में भारत की वेटलिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी ने महिला शक्ति का प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में इन खेलों का एकमात्र ब्रॉन्ज मेडल डाला.

शूटिंग-बॉक्सिंग और कुश्ती का भी दौर आया

साल 2004 में एथेंस ओलंपिक में भारतीय निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौर ने डबल ट्रैप शूटिंग में सिल्वर मेडल जीतकर भारत में शूटिंग चमचमाता दौर का शुभारंभ किया. भारत को एक बार फिर एक ही पदक से संतोष करना पड़ा.

इसके बाद साल 2008 बीजिंग ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा ने भारत को ओलंपिक के इतिहास में पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल दिलाया. अभिनव ने 10 मीटर एयर राइफल में गोल्ड मेडल जीता. उनके अलावा बॉक्सिंग में विजेंदर सिंह औप कुश्ती में सुशील कुमार ने भी ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के पदकों की संख्या पहली बार 3 तक पहुंचा दी.

भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

साल 2012 में आयोजित लंदन ओलंपिक में भारत ने अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 6 मेडल अपने नाम किए. शूटिंग में विजय कुमार ने 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल और सुशील कुमार ने कुश्ती में सिल्वर मेडल अपने नाम किए.

इनके अलावा 10 मीटर एयर राइफल में गगन नारंग, महिला सिंगल्स बैडमिंटन में साइना नेहवाल, महिला बॉक्सिंग में मैरी कॉम और कुश्ती में योगेश्वर दत्त ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. लंदन ओलंपिक में भारत ने 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल सहित कुच 6 मेडल जीते.

रियो का फ्लॉप शो

रियो में भारतीय दल से सवा करोड़ भारतवासियों को काफी उम्मीदें थीं. जैसे-जैसे ओलंपिक आगे बढ़ता गया, भारतीय धुरंधर ढेर होते गए और भारत में निराशा गहराते गई. अंतिम कुछ दिनों में दीपा कर्माकर ने उम्मीदें जगाई, लेकिन वह भी चौथे नंबर पर रहीं.

फिर साक्षी मलिक ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारतीयों को मुस्कुराने की वजह दी. अंत में पीवी सिंधु ने गोल्ड मेडल की उम्मीदें जगाई, लेकिन वह भी चूक गईं और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. अब इस ओलंपिक से नाउम्मीदी की गहराईयों में डूब चुके भारतीयों को सिंधु के सिल्वर मेडल ने खुशी दी और इस तरह से भारत की पदक तालिका 2 तक पहुंच गई.

जातिवाद को मिटाना क्यों जरुरी मानते हैं नितीश भारद्वाज

भगवान कृष्ण का किरदार निभाने के 25 साल बाद फिल्म ‘‘मोहनजो दाड़ो’’ में दुर्जन नामक किसान के किरदार में नजर आए अभिनेता नितीश भारद्वाज हमेशा भगवान कृष्ण की ही तरह बातें करते नजर आते हैं. इन दिनों उन्हे भी भारत देश के विकास की चिंता सता रही है. उनका मानना है कि जातिवाद का खात्मा किए बगैर देश का सही विकास नहीं हो सकता.

एक खास मुलाकात में नितीश भारद्वाज ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से कहा-‘‘देश के विकास के लिए जातिवाद को मिटाना बहुत जरुरी है. देश को मैरिट के आधार पर आगे ले जाना पड़ेगा. अब जरूरत इस बात की है कि लोगों को धर्म या जाति पर नहीं बल्कि आर्थिक स्थितियों के आधार पर आरक्षण दिया जाए. हर उस पिछडे़ हुए की मदद दी जाए, जिसका आधार जाति ना हो. वर्तमान समय मे समाज में आपको दलित भी अमीर और मध्यमवर्गीय मिल जाएंगे. अब देश को आजाद हुए सत्तर वर्ष हो गए. इसलिए अब कौन पिछड़ा है, यह तय करने की ज्यादा जरुरत है. पहले हमारे यहां किसी की जाति जन्म से तय नहीं होती थी, कर्म से होती थी.

पुराणों में लिखा है कि जन्म से हर इंसान शूद्र होता है. पर कर्म से वह ब्राम्हण या क्षत्रिय बनता है. उस वक्त जो धर्म के आधार पर लोगों को अलग अलग बांटा गया, उसका मकसद किसी को पीड़ा पहुंचाना नहीं था. शूद्र का मतलब सेवा भावी इंसान होता था. इसी के चलते महर्षि वेदव्यास ब्राम्हण हुए. शास्त्र में सारे आधार हैं, तो फिर हम उन मूल आधार से दूर क्यों जा रहे हैं?

जाति के आधार पर आरक्षण क्यों दिया जा रहा है. समाज को आगे बढ़ाना है, तो पिछडे़ को हर सुविधा उपलब्ध कराना सरकार का काम है. सिर्फ आर्थिक आधार पर. जातिवाद तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक आप हर इंसान को आर्थिक रूप से मजबूत नही करेंगे. भारत से नीची जाति के लोग जब इंग्लैंड या अमेरिका जाते हैं, तो वहां उन्हें आरक्षण की जरूरत क्यों महसूस नहीं होती? इसके लिए उन्हें राजनीतिक पार्टी गठित करने की जरूरत क्यों नहीं होती? हमारे देश में तो शिक्षा व्यापार हो गया है, जिसके लिए हर सरकार दोषी हैं.’’ 

ऋषि कपूर ने पाकिस्तानी फिल्मकार को क्या दी सलाह

इन दिनों ऋषि कपूर हर किसी को सलाह देने लगे हैं. वह ट्विटर पर भी हर मसले पर खुलकर अपनी बात रखते हैं. तो वहीं वह अपने अभिनय करियर में भी कुछ भी करना नहीं चाहते. सूत्रों की माने तो कुछ समय पहले पाकिस्तानी फिल्मकार नदीम बेग ने अपनी सफलतम हास्य फिल्म ‘‘जवानी फिर नही आनी 2’’ की सिक्वल में अभिनय करने का आफर ऋषि कपूर को दिया, जिसे अस्वीकार करते हुए ऋषि कपूर ने फिल्मकार नदीम बेग को सलाह दे डाली.

सूत्रों की माने तो ऋषि कपूर ने नदीम बेग को सलाह देते हुए कहा-‘‘अपनी किसी पाकिस्तानी फिल्म में एक भारतीय कलाकार को अभिनय करने का अवसर देने की बनिस्बत पाकिस्तानी फिल्मकार को चाहिए कि वह एक ऐसी प्रभावशाली कहानी का चयन करें, जिस पर बनी फिल्म भारत में भी अपना प्रभाव डाल सके.’’

यह एक अलग बात है कि फिल्मकार नदीम बेग कुछ और ही कह रहे हैं. वास्तव में नदीम बेग की फिल्म को ऋषि कपूर के ठुकराने के बाद पाकिस्तानी मीडिया में कई तरह की चर्चाएं होने लगी थी. इन्ही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए नदीम बेग ने अब एक पाकिस्तानी अखबार से कहा है-‘‘यह सच है कि मैने अपनी फिल्म में अभिनय करने का आफर भारतीय कलाकार ऋषि कपूर को दिया था. उन्हे किरदार भी पसंद आया था और वह हमारी फिल्म में अभिनय करना चाहते थे. पर उनकी शर्त थी कि हम अपनी फिल्म को भारत में भी प्रदर्शित करें. माना कि भारत में फिल्म प्रदर्शित करना संभव है, पर सफलता की रिस्क को देखते हुए मैंने इस पर नहीं सोचा.’’

रोहित शेट्टी को नहीं मिल रहे अभिनेता..या..?

लंबे समय तक चर्चा रही कि करण जोहर फिल्म ‘‘राम लखन’’ का रीमेक करने जा रहे है, जिसका निर्देशन रोहित शेट्टी करेंगे. उसके बाद लंबे समय तक इस बात की चर्चा होती रही कि राम व लखन के किरदार में फलां फलां अभिनेता होंगे. ‘‘राम लखन’’ की रीमेक फिल्म के साथ कई कलाकारों के नाम जुड़े और हटे. अंततः एक माह पहले करण जोहर ने ‘राम लखन’ की रीमेक फिल्म को हमेशा के लिए बंद करने का ऐलान कर दिया. उस वक्त करण जोहर ने फिल्म को बंद करने की वजह नहीं बतायी थी.

लेकिन तब से चुप रहे निर्देशक रोहित शेट्टी ने अब चुप्पी तोड़ी है. रोहित शेट्टी ने कहा है कि ‘‘हमारे पास ‘राम लखन’ की पटकथा तैयार है. मगर हमें कोई ऐसा अभिनेता नहीं मिल रहा, जो राम का किरदार निभाए. मैं राम के हिस्से को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहता. हर कोई लखन का किरदार करना चाहता है. अब मैं सोलो हीरो वाली फिल्म कैसे बना लूं. इसलिए ‘राम लखन’ का रीमेक नही बना रहा.’’

रोहित शेट्टी के इस बयान के बाद बौलीवुड में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं. लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या बौलीवुड में अभिनेताओं की इतनी कमी हो गयी कि कोई राम का किरदार निभाने के लिए नहीं मिल रहा? या राम के किरदार को निभाने के लिए रोहित शेट्टी को जिस तरह के प्रतिभाशाली अभिनेता की चाह है, उतने प्रतिभाशाली अभिनेता का बालीवुड  में अभाव हो गया है? या ‘राम लखन’ में राम का किरदार इतना महत्वहीन है कि लोग लखन बनना चाहते हैं, पर राम नहीं? अथवा निर्देशक के तौर पर रोहित शेट्टी की असफलता इतना हावी हो रही है कि उनके साथ कोई भी अभिनेता काम करने को तैयार नहीं? तो बौलीवुड के बिचौलिए कई सवाल कर रहे हैं? क्या कभी इन सवालों पर भी रोहित शेट्टी चुप्पी तोड़ेंगे?

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