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मेट्रो कार्ड की तर्ज पर बनेंगे रेल कार्ड

उपनगरीय रेल यात्रियों को जल्द ही मासिक सीजन टिकट के स्थान पर एक रेल कार्ड मिल सकता है जिसका उपयोग वे समान खरीदने के लिए भी कर सकेंगे. रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे इस प्रस्ताव की शुरुआत को लेकर 31 बैंकों के साथ बातचीत कर रहा है.

अनुमान के मुताबिक देश भर में करीब 1.1 करोड़ लोग रोजाना लोकल रेलगाड़ियों में सफर करते हैं. योजना के अनुसार तीन तरह के रेल कार्ड होंगे. ये कार्ड सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम श्रेणी के होंगे. सिल्वर कार्ड एक महीने, गोल्ड कार्ड छह माह और प्लैटिनम कार्ड एक साल के लिए दिये जायेंगे.

उन्होंने कहा कि एसबीआई, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और पंजाब नैशनल बैंक समेत 31 बैंकों से इस योजना में सहयोग के लिए बातचीत की जा रही है. अधिकारी के मुताबिक बैंकों ने रेल कार्ड परियोजना में बहुत अधिक रुचि दिखायी है और इसके बाद समझौतों पर हस्ताक्षर किये जायेंगे.' बाकी जगहों पर शुरु किये जाने से पहले इसे मुंबई में ट्रायल के तौर पर शुरु किया जायेगा.

विंड पावर प्रोजेक्‍ट्स को सरकार देगी सस्‍ता लोन

साल 2022 तक विंड पावर प्रोडक्‍शन 60 हजार मेगावाट तक पहुंचाने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने पुराने या बंद हो चुके विंड पावर प्रोजेक्‍ट्स को शुरू करके उनके कैपेसिटी तीन से चार गुणा अधिक करने का निर्णय लिया है. इसके लिए सरकार ने इंडस्‍ट्री को इन्‍सेंटिव देने की घोषणा की है. मिनिस्‍ट्री ऑफ न्‍यू एंड रिन्‍यूएबल एनर्जी (एमएनआरई) दवारा विंड पावर प्रोजेक्‍ट्स की रिपावरिंग पॉलिसी में इन इन्‍सेंटिव की घोषणा की है.

क्‍या है मकसद

साल 2010 से पहले देश में ज्‍यादातर लगे विंड टरबाइन की कैपेसिटी 500 किलोवाट से कम है, जिनकी कुल पावर कैपेसिटी 3000 मेगावाट के आसपास है. सरकार को उम्‍मीद है कि इन टरबाइन और जगह का सही ढंग से इस्‍तेमाल किया जाए तो इन प्रोजेक्‍ट्स की कैपेसिटी तीन से चार गुणा बढ़ाई जा सकती है.

क्‍या मिलेगा इन्‍सेंटिव

पॉलिसी में घोषणा की गई है कि जिन विंड पावर प्रोजेक्‍ट्स की कैपेसिटी 1 मेगावाट या उससे कम है, उन्‍हें रिपावरिंग के लिए प्रेरित किया जाएगा. ऐसे प्रोजेक्‍ट्स को सरकार की ओर से इन्‍सेंटिव दिया जाएगा. इन्‍सेंटिव के रूप में इंडियन रिन्‍यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (इरेडा) की ओर से दिए जाने वाले लोन के इंटरेस्‍ट रेट में 0.25 फीसदी की छूट दी जाएगी. यह छूट इरेडा द्वारा नए विंड पावर प्रोजेक्‍ट्स को दिए जाने वाले लोन के इंटरेस्‍ट रेट के अलावा होगी. इरेडा द्वारा नए विंड पावर प्रोजेक्‍ट्स को कम इंटरेस्‍ट रेट पर लोन दिया जाता है.

इसके अलावा इन रिपावरिंग प्रोजेक्‍ट्स को वे सब बेनिफिट्स मिलेंगे, जो नए विंड पावर प्रोजेक्‍ट्स को दिए जा रहे हैं. इसके अलावा स्‍टेट्स द्वारा नए विंड पावर प्रोजेक्‍ट्स को दिए जा रहे बेनिफिट्स भी इन प्रोजेक्‍ट्स को दिए जाएंगे.

जीबीआई का बेनिफिट भी मिलेगा

साल 2012 से लागू जनरेशन बेस्‍ड इन्‍सेंटिव पुराने प्रोजेक्‍ट्स को नहीं दिया जाता, लेकिन रिपावरिंग पॉलिसी के तहत इन प्रोजेक्‍ट्स को नया मानते हुए जीबीआई का लाभ भी मिलेगा. सरकार द्वारा जीबीआई के तौर पर विंड पावर प्रोजेक्‍ट्स से पैदा होने वाली‍ बिजली पर 50 पैसे प्रति यूनिट इन्‍सेंटिव दिया जाता है.

आईफोन की सुरक्षा में सेंध, उड़ सकता है निजी डेटा

अगर आप आईफोन या ऐपल के कुछ अन्य मशहूर प्रॉडक्ट इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके मतलब की है. इन प्रॉडक्ट में इस्तेमाल होने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम की कुछ खामियों का फायदा उठाते हुए लोगों की जासूसी करने से जुड़ा मामला सामने आया है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के मुताबिक, जांच में इसके पीछे एनएसओ ग्रुप नाम की इजरायली कंपनी का हाथ होने की बात सामने आई है. यह कंपनी ऐसे सॉफ्टवेयर बनाती है जिनकी मदद से खुफिया ढंग से ऐपल प्रॉडक्ट यूजर्स के टेक्स्ट मेसेज, ईमेल्स पढ़े जा सकते हैं. कॉल या कॉन्टैक्ट लिस्ट ट्रैक की जा सकती है. आवाज रिकॉर्ड की जा सकती है, पासवर्ड चुराए जा सकते हैं और फोन कहां है, इस बात का भी पता लगाया जा सकता है.

मामला सामने आने के बाद ऐपल ने गुरुवार को आईओएस का पैच्ड वर्जन 9.3.5 जारी किया. यूजर्स एक नॉर्मल सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इस पैच को आप अपनी डिवाइस में इंस्टॉल कर सकते हैं. ऐपल की इन खामियों को दूर करने के 10 दिन पहले बिल मार्कजेक और जॉन स्कॉट रेल्टन नाम के दो रिसर्चरों और सैन फ्रैंसिस्को की एक मोबाइल सिक्यॉरिटी कंपनी ने इस ओर ध्यान दिलाया.

ये दोनों रिसर्चर यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के मंक स्कूल ऑफ ग्लोबल अफेयर्स के सिटिजन लैब में काम करते हैं. वहीं, ऐपल के प्रवक्ता फ्रेंड सेंज ने कहा, 'हम सभी कस्टमर्स को यही सलाह देते हैं कि वे हमेशा आईओएस का लेटेस्ट वर्जन इस्तेमाल करें ताकि वे सिक्यॉरिटी से जुड़े संभावित खतरों से खुद को बचा सकें.'

दाना मांझी पर संवेदनाओं का कारोबार

यह सभ्य समाज का दुख या सहानुभूति नहीं बल्कि एक रोमांच है जिस पर मीडिया ने सहानुभूति दिखाकर, असलियत पर संवेदनाओं की चादर ढकते हुए जमकर कारोबार किया. एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें दाना मांझी नाम का एक आदिवासी (निवासी कालाहांडी, राज्य ओडिशा) अपनी पत्नी अमंग देई की लाश भवानीपटना अस्पताल से कंधे पर लादकर कोई 12 किलोमीटर पैदल चला. अमंग टीबी की मरीज थी जिसे इलाज के लिए वह 60 किलोमीटर दूर अपने गाँव मेलघरा रामपुर से हफ्ते भर पहले लाया था.

23 अगस्त की रात को उसकी मौत हो गई तो दाना ने अस्पताल प्रबंधन से पत्नी की लाश गांव तक ले जाने के लिए एम्बुलेंस की मांग की लेकिन पैसे न चुका पाने के कारण उसे एम्बुलेंस मुहैया नहीं कराई गई. फौरी तौर पर उसे यही रास्ता बेहतर लगा कि जीवन संगिनी के शव को खुद कंधे पर ढो कर ले जाए. इस कलयुगी सत्यवान पर 12 किलोमीटर चलने के बाद किसी को रहम आया और उसे मदद मिली. इस सफर में उसकी 12 साल के बेटी भी साथ थी.

दाना मांझी की कहानी यहाँ खत्म नहीं होती बल्कि यहाँ से शुरू होती है. कंधे पर पत्नी की लाश ढ़ोते उसका फोटो वायरल हुआ तो सभ्य अभिजात्य और बुद्धिजीवी समुदाय की सहानुभूति इस तरह फट पड़ी की भुखमरी के लिए कुख्यात कालाहांडी का यह गुमनाम आदिवासी को रातों रात हीरो बना दिया गया.

बनाने वालों की असल मंशा मनुवाद और वर्णवाद पर किसी का ध्यान न जाए इस बात की थी इसलिए खासतौर से सोशल मीडिया पर उसकी पत्नी भक्ति और प्रेम के गीत गाये जाने लगे जिनमें रचनाकारों ने बताया कि दाना जैसे पति ऐसे छोटे मोटे हादसों की परवाह नहीं करते और जमाने को चुनोती देते सात जन्मों का यह रिश्ता इतनी शिद्दत से निभाते हैं कि उन पर फख्र करने दिल मचल उठता है.

एक ऐसी ही कविता की शुरुआत थी

संगिनी

तो क्या हुआ जो चार कांधे न मिले मैं अकेला ही बहुत हूँ चल सकूँ लेकर तुझे मोक्ष के उस द्वार…

ऐसी कवितायें बड़ी मार्मिक होती हैं जो क्रूरता ढ़कने के काम आती हैं. दाना ने कितनी बार बीमार पत्नी को यूं ही कंधे पर ढोकर भागा दौड़ी की होगी और रोज कितने दाना अपने मां, बाप पत्नी और परिजनो को यूं ही ढोते होंगे इससे किसी ने सरोकार नहीं रखा कुछ ने जरूर सरकार को कोसकर अपना फर्ज पूरा कर लिया.

बिहार, ओडिशा, छ्तीस्गढ़ पश्चिम बंगाल सहित दक्षिणी और पूर्वी राज्यों मे ऐसे नजारे आम हैं जिनमें से कोई उजागर हो जाए तो सभ्य शिक्षित समाज को अपने मुख्य धारा होने पर दाग लगता महसूस होने लगता है. लिहाजा वे घबराकर कवितायें लिखने लगते हैं घड़ियाली आँसू बहाने लगते हैं पर आदिवासियों की बदहाली के बाबत कुछ न कह पते न कर पाते.

करोड़ों आदिवासी जानवरों से बदतर जिंदगी जी रहे हैं और रसूखदारों के खेतों में बैलों की तरह जुते हल चला रहे हैं. इस सच को दाना के बहाने भी किसी ने नहीं देखा फिर उस ऐतिहासिक सच की तो बात करना ही बेमानी है जो तथ्यों से यह साबित करता है कि ये आदिवासी ही देश के मूल निवासी हैं जिन्हे आर्यों ने आकर अपना गुलाम बनाया, उनकी औरतों का बलात्कार किया और धर्म ग्रंथ रचते उन्हें शूद्र और सेवक करार दे दिया.

यही आर्य अब दाना की पत्नी भक्ति की आरतियाँ उतार रहे हैं जिससे कोई बड़ी बगावत ना हो आदिवासियों का शिक्षित और जागरूक होता वर्ग मान ले की समाज उनसे हमदर्दी रखता है और कवितायें लिखने की हद तक रखता है, बाकी तो सभी पहले से जानते हैं कि नीची जाति में पैदा होना, आर्यों की सेवा करना और अमंग की तरह यूं मर जाना सब पिछले जन्मों के कर्मों का फल है इसके बाद भी दाना महान है क्योकि उसमें वाकई संवेदनाएं हैं वह सुविधाभोगी नहीं है. उसके कंधों में वाकई पत्नी की लाश को अकेले उठाने का दम है. वह सभ्य समाज की तरह चार लोगों का मोहताज नहीं है.

शोषण को अपनी किस्मत मान बैठे ऐसे महान आदिवासियों से नक्सलियों और हल्ला मचाने बाले दूसरे संगठनो को भी सबक लेना चाहिए कि जिंदगी यूं भी गुजारी जा सकती है तो वे भी मिसाल बने तो इधर संवेदनाओं के कारोबारी हौसलाफजाई के लिए तैयार बैठे हैं.

अब क्या होगा रितिक रोशन का?

फिल्म ‘कृष 3’ की असफलता के साथ ही रितिक रोशन के करियर का पतन शुरू हो गया था. फिल्म ‘बैंग बैंग’ की असफलता के बाद पिछले दिनों जिस तरह अपनी पत्नी से तलाक के बाद कंगना रनौत के साथ रिश्तों को लेकर रितिक रोशन विवादों में घिरे रहे हैं, उससे उनके इमेज के साथ-साथ करियर को भी नुकसान हुआ है.

सूत्रों के अनुसार रितिक रोशन ने स्वयं एक पी आर की सलाह पर इस विवाद को बेवजह का तूल दिया था, वह चाहते तो मसले को आराम से बैठकर बिना किसी को भनक लगे ही सुलझा सकते थे. पर पी आर की सलाह पर रितिक ने जिस तरह कुछ अंग्रेजी दैनिकों में अपने ईमेल वगैरह विज्ञापन की तरह छपवाया, उसका खामियाजा उन्हे भुगतना पड़ रहा है.

उनकी हालिया प्रदर्षित फिल्म ‘मोहनजोदड़ो’ भी बाक्स आफिस पर बुरी तरह से असफल हुई है. इस फिल्म में रितिक के अभिनय की भी काफी आलोचना हो रही है. कहा जा रहा है कि लगभग हर दृष्य में रितिक ने अपने आपको दोहराया ही है. वैसे फिल्मृ ‘मोहनजोदड़ो’ के प्रदर्शन से 1 सप्ताह पहले जब रितिक ने प्रेस से मुलाकात की, उस वक्त बातचीत के दौरान रितिक में कोई उत्साह नजर नहीं आ रहा था. ऐेसा लग रहा था कि वह निजी जीवन के विवादों व करियर में मिल रही असफलता से टूट चुके हैं, और जब वह प्रेस बात कर रहे थे,तब भी वह अंदर से फिल्म ‘मोहनजोदड़ो’ की सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं थे.

यह सच है कि रितिक रोशन के गिरते करियर को और अधिक गिराने में कंगना के साथ उनके रिश्ते के विवाद ने भी अहम भूमिका निभायी. इसके लिए पूरी तरह से खुद रितिक रोशन ही दोषी हैं. एक पुरानी कहावत है,‘जब इंसान की सोच नकारात्मक हो जाती है, जब इंसान दूसरे को बर्बाद करने की सोचने लगता है, तो वह सबसे पहले खुद को बर्बाद करता है.’

इस मसले पर जब हमने कुछ दिन पहले कंगना रनौत के साथ दो सफल फिल्में कर चुके निर्देशक आनंद एल राय से पूछा था कि रितिक और कंगना के बीच जो कुछ हो रहा है, उसको लेकर वह क्या सोचते हैं? इस पर आनंद एल राय ने कहा, ‘मुझै लगता है दोनों समझदार हैं. इन दोनों को सुलझे हुए तरीके से व्यवहार करना चाहिए. मैं किसी की निजी जिंदगी को लेकर कोई बात हीं करना चाहता. आप लोकप्रिय हैं, तो आपकी जिंदगी की हर बात बहुत जल्द आम लोगों तक पहुंच जाती है. ऐसे में अनचाहे दबाव जिंदगी में बनते हैं. जरूरी होता है कि अनचाहे दबाव से बचकर रचनात्मक चीजों पर ध्यान लगाएं. इस तरह की घटनाएं देखकर दुःख होता है. हर कलाकार की अपनी निजी जिंदगी होती है, जिसका हानि लाभ उसे ही भुगतना पड़ता है.’

आनंद एल राय की यह बात फिलहाल रितिक पर पूरी तरह से सटीक बैठती है. कंगना विवाद पर बौलीवुड से रितिक को कोई सपोर्ट नहीं मिला. जबकि कंगना को कुछ कलाकारों का सपोर्ट भी मिला. बहुत कुरेदे जाने पर रितिक ने कहा,‘जब सच आपके साथ होता है, तो आपको किसी के सपोर्ट की जरुरत नहीं होती है. मुझे बचपन से सिखाया गया है कि मर्द की मर्दांनगी हमेशा औरत को प्रोटेक्ट करने में है. मैं दयालु हूं मगर किसी ने गलत किया, तो उसे ठीक करने का दायित्व भी मेरा ही है. मेरा सामाजिक दायित्व है कि मैं उसे सही करुं. इसके अलावा अन्याय के खिलाफ विद्रोह करना भी जरुरी है.’

रितिक अपने पक्ष में चाहे जो तर्क दें, मगर यह सच है कि वह अपने करियर को संभाल नहीं पा रहे है. सूत्रों की माने तो फिल्म मोहनजोदड़ो की बाक्स आफिस पर जो दुर्गति हुई है, उससे रितिक काफी टूट चुके हैं. रितिक ने फिल्मकार आशुतोष गोवारीकर के संग अपनी दोस्ती व सारे रिश्ते खत्म कर दिए हैं. इतना ही नही वह अपने घर के अंदर खुद को बंद कर अकेले रह रहे हैं.

यहां तक की वह अपने ही पिता राकेश रोशन के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘काबिल’ की शूटिंग के लिए सेट पर नहीं जा रहे हैं. जिससे फिल्म के निर्माता को हर दिन 12 लाख रूपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है. उधर उन्हें ‘यशराज फिल्मस’ की फिल्म ‘ठग’ से भी हाथ धोना पड़ा है.

काबिल के साथ भी कई तरह की मुसीबतें हैं. रितिक पूरे मन से इस फिल्म की शूटिंग नहीं कर पा रहे हैं. तो वहीं काबिल के ही साथ शाहरूख खान की फिल्म ‘रईस’ भी रिलीज होने वाली है. काबिल के साथ प्रियदर्शन निर्देशित मोहनलाल के अभिनय से सजी मलयालम फिल्म ‘ओपम’ भी रिलीज होने वाली है. माना जा रहा है कि काबिल और ओपम की कहानी लगभग एक जैसी ही है. अक्षय कुमार भी ‘काबिल’ व ‘रईस’के साथ अपनी फिल्म ‘क्रैक’ को रिलीज करने वाले हैं. ऐसे में यदि खुदा न खास्ता काबिल भी बाक्स आफिस पर धराशायी हो गयी, तो रितिक का क्या होगा? इस सवाल का जवाब तो समय ही दे सकते हैं.

मिल्खा सिंह के पीछे भाग रहे ओमप्रकाश मेहरा

एक फिल्मकार की सबसे बड़ी सफलता यही होती है कि उसकी फिल्म को पूरे विश्व में पसंद किया जाए. राकेश ओमप्रकाश मेहरा हमेशा अपनी पहचान रखने वाली फिल्में बनाते हैं और उनकी हर फिल्म को पूरे विश्व में पसंद किया जाता है.

उन्होंने 2013 में मशहूर धावक मिल्खा सिंह पर फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ बनायी थी, जिसे भारत में जबरदस्त सफलता मिली थी. उसी वक्त यह फिल्म अमरीका सहित कई देशों में भी प्रदर्शित हुई थी और वहां भी इस फिल्म ने जबरदस्त सफलता बटोरी थी.

तब से यह फिल्म कई देशों में रिलीज हो चुकी है. और इस फिल्म को देखने की इच्छा लोगों में बढ़ती ही जा रही है. अब फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ यूरोप के जर्मनी, आस्ट्रिया व स्विटजरलैंड में प्रदर्शित हो रही है.

अपनी इस फिल्म के प्रमोशन के साथ साथ वहां दर्शकों की प्रतिक्रिया को समझने के लिए राकेश ओमप्रकाश मेहरा यूरोप की यात्रा पर हैं. वह 27 अगस्त तक वियाना और म्यूनिख की यात्रा कर चुके थे. 27 अगस्त को वह जुरिच पहुंचे हैं.

इसके बाद वह फ्रंटफर्ट जाएंगे. वह 29 व 30 अगस्त को वह बर्लिन में रहेंगे. फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ के लिए इस यात्रा के दौरान अंतिम प्रमोशन डसेलडोर्फ में करेंगे.

राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने हमें ‘ईमेल’ पर बताया कि अब तक फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ को यूरोप में बहुत अच्छा व सकारात्मक  प्रतिक्रिया मिल रही है.

क्या रणबीर कपूर को कुसूरवार मानती हैं कटरीना…???

कटरीना कैफ और रणबीर कपूर कुछ वर्षों तक लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बाद अलग हो चुके हैं. इस रिश्ते के टूटने को लेकर रणबीर कपूर ने अभी कुछ कुछ बातें कही हैं, जिससे कटरीना कैफ बहुत नाराज हैं. फिर भी कटरीना कैफ ने चुप्पी साध रखी है. वह रणबीर कपूर को लेकर कोई बात नहीं करना चाहतीं.

मगर जब हमारी मुलाकात कटरीना कैफ से हुई, तो हमने रणबीर कपूर का नाम लिए बगैर उनसे सवाल किया कि किसी भी रिश्ते को बरकरार रखने के लिए कितनी और किस तरह की कोशिशें की जानी चाहिए?

इस सवाल पर कटरीना ने कहा- ‘‘मेरे हिसाब से अगर आप काम पर जाते हैं और अपने काम पर ध्यान नहीं देते हैं, तो आपका बॉस आपको काम से निकाल देता है या आपको डांटता है या आपको काम पर ध्यान देने की चेतावनी देता है. मेरे हिसाब से हर रिश्ते के साथ भी यही नियम लागू होता है. अगर आप किसी के संग रिश्ते में हैं और आप सिर्फ अपने काम पर ध्यान देंगे, अपनी प्रेमिका को प्यार नहीं देंगे, उस पर ध्यान नही देंगे, उस रिश्ते को महत्त्व नहीं देंगे, तो क्या होगा.. आपका यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा.’’

कटरीना कैफ ने आगे कहा- ‘‘हम अक्सर देखते हैं कि जब आपके सामने कोई समस्या आ जाती है, तो लोग भाग खड़े होते हैं. रिश्ते में हैं, या प्यार में हैं, उस पर सोचते ही नहीं हैं, समस्या आते ही भाग खड़े होते हैं. ऐसे लोग अपने परिवार पर आयी समस्या से भी पलायन कर जाते हैं. ऐसे लोग सोचते हैं कि हमें यह समस्या नहीं चाहिए, हम भाग जाते हैं, कोई और मिल जाएगा.

मेरे हिसाब से यह एटीट्यूड सही नहीं है. मेरे लिए इंसानी रिश्ते बहुत मायने रखते हैं. कीमती होते हैं. मेरे लिए हर रिश्ता बहुमूल्य होता है.

देखिए,जब हम शादी करते हैं, तो एक बंधन हो जाता है. शादी के मंडप के नीचे हम एक दूसरे के साथ सुख दुःख,अच्छे व बुरे वक्त सहित हर मौके पर एक साथ रहने का संकल्प लेते हैं. ऐसा ही होना चाहिए. लेकिन आज की पीढ़ी इसे भूलकर पलायनवाद का रास्ता अख्तियार कर रही है. यह गलत है.’’

अब कटरीना कैफ ने जो कुछ कहा वह उनके अंतर्मन की आवाज थी या..पता नहीं..? कहीं वह रणबीर कपूर को तो  पलयानवादी नहीं बताना चाहती..?

बहरहाल,वैसे कटरीना कैफ ने नौ सिंतबर को प्रदर्शित हो रही नित्या शर्मा निर्देशित फिल्म ‘‘बार बार देखो’’ में एक दिल्ली निवासी आउट स्पोकन, मध्यमवर्गीय लड़की दिया का किरदार निभाया है. जबकि इस फिल्म में दिया के बचपन के दोस्त जय के किरदार में सिद्धार्थ मल्होत्रा हैं. जय और दिया के बीच प्यार भी है. मगर जय का सारा फोकस अपने करियर पर है. स्वाभाविक तौर पर जब एक के लिए करियर और दूसरे के लिए परिवार अहमियत रखता है,तो समस्या होनी ही है.

गूगल क्रोम के फीचर्स जो बनाते हैं इसे बेस्ट

गूगल चाहता है कि उसे इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की सारी इंटरनेट संबंधी जरूरतें वह इस तरह पूरी कर दे कि उन्हें कहीं और जाने की जरूरत ही ना पड़े.

क्रोम वेब स्टोर वैसे तो बस 6 साल पुराना है, लेकिन अपनी प्रॉडक्टिविटी के कारण वह हमें अपना आदी बना चुका है. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि क्रोम ने हमें कई तरह के एक्सटेंशन भी दिए हैं.

क्रोम के ये एक्सटेंशन ना केवल हमारी अलग-अलग जरूरतें को पूरा करते हैं, बल्कि इन्होंने ब्राउजर की परिभाषा को ही बदल डाला है. सैकड़ों और हजारों नहीं, बल्कि क्रोम के तो लाखों एक्सटेंशन मौजूद हैं. आज हम आपके लिए लेकर आए हैं  ऐसे क्रोम एक्सटेंशन, जिनका इस्तेमाल आपको जरूर करना चाहिए.

अर्थ व्यू फ्रॉम गूगल अर्थ

इस्तेमाल: हर टैब को बना देता है और भी ज्यादा दिलचस्प

ब्लैंक टैब को देखना बोरिंग होता है ना. चिंता मत कीजिए, बहुत सारे क्रोम एक्सटेंशन्स ऐसे हैं जो कि आपके टैब को मजेदार बनाएंगे. अर्थ व्यू फ्रॉम गूगल अर्थ आपके दिन की शुरूआत को खूबसूरत बनाता है.

जब भी आप एक नया टैब खोलते हैं, तो अर्थ व्यू उपग्रह से ली गई धरती की खूबसूरत तस्वीरें आपको दिखाता है. आप इनमें से किसी तस्वीर को चुनकर अपना वॉलपेपर भी बना सकते हैं.

गूगल सिमिलर पेजेज

इस्तेमाल: जिस पेज को आप ब्राउज कर रहे हैं, उससे मिलते-जुलते वेबसाइट्स दिखाना

आप अपनी पसंद और जरूरत के मुताबिक वेबसाइट्स को फिल्टर कर सकते हैं. गूगल सिमिलर पेजेज ऐसा सर्च टूल है, जिसके इस्तेमाल से आप जिस चीज के बारे में पढ़ रहे हैं, उसी विषय से जुड़े बाकी वेबसाइट्स भी आपको दिख जाएंगे.

इंटरनेट की दुनिया समंदर जैसी बड़ी है, तो सोचिए कि यह एक्सटेंशन कितने काम आ सकता है आपके.

डेटा सेवर

इस्तेमाल: आपका इंटरनेट डेटा बचाता है

इस क्रोम एक्सटेंशन से आप डेटा के इस्तेमाल को मैनेज कर सकते हैं. यह कंप्रेशन तकनीक का इस्तेमाल कर आपका डेटा बचाता है.

गूगल सर्वर की मदद से आप जिन वेबसाइट्स को खोलते हैं, उनमें लगने वाला डेटा आप इस एक्सटेंशन से मैनेज कर सकते हैं. साथ ही, यह आपको बताएगा कि कौन सी वेबसाइट्स आपका डेटा फटाफट इस्तेमाल कर लेती हैं और कौन सी कुछ दिनों में करती हैं.

यह आपको कम डेटा लेने वाली वेब सर्विस का विकल्प भी देता है. हां, इनकॉगनिटो मोड में खोले गए पेजेज पर यह काम नहीं करता.

कैरट ब्राउजिंग

इस्तेमाल: 'ऐरो की' की मदद से वेबपेज ब्राउज करने में मदद करता है

कैरट एक कर्सर है, जिसके इस्तेमाल से आप पेज पर दिए गए टेक्स्ट को चुन सकते हैं. इसे इन्सटॉल करने के बाद अपने ब्राउजर को रिस्टार्ट करें.

कर्सर को किसी दिशा में ले जाने के लिए पेज पर कहीं भी क्लिक करें. ऐरो की का इस्तेमाल कर डॉक्युमेंट इधर-उधर ले जा सकते हैं. यह आपके समय की बचत करता है. इतने लंबे समय तक माउस के इस्तेमाल का आदी होने के कारण आपको इस एक्सटेंशन से अभ्यस्त होने में थोड़ा वक्त जरूर लगेगा, लेकिन फिर आदत हो जाने पर आप माउस को कभी याद नहीं करेंगे.

गूगल ट्रांसलेट

इस्तेमाल: जिन भाषाओं को आप नहीं जानते, उन्हें आपकी भाषा में अनुवाद कर देता है

अगर आप किसी नई जगह पर हैं और वहां की भाषा नहीं जानते, तो यह एक्सटेंशन आपके लिए चमत्कार से कम नहीं. किसी नई भाषा को सीखने में भी इससे काफी मदद मिल सकती है.

अगर आप किसी विदेशी वेबपेज पर जाते हैं, तो क्रोम को पता चल जाता है. वह आपको उस पेज का अनुवाद करने का प्रस्ताव देता है.

आप ना केवल एक शब्द को, बल्कि पूरे पन्ने को भी अपनी भाषा में अनुवादित कर पढ़ सकते हैं. इसके लिए आपको अपनी प्राथमिक भाषा चुननी होगी.

गूगल स्कॉलर बटन

इस्तेमाल: स्कॉलरली लेखों का सुझाव देता है

छात्रों, शिक्षकों और ब्लॉगर्स के लिए यह वाकई बहुत काम का एक्सटेंशन है. इससे आपको विश्वसनीय लेख और पाठन सामग्री आसानी से मिल सकते हैं.

अगर आपको पढ़ने का शौक है, तो यह आपके लिए किसी खजाने से कम नहीं.

गूगल मेल चेकर

इस्तेमाल: यह एक्सटेंशन बता देगा कि अपने इनबॉक्स में कितने मेल आपने नहीं पढ़े

यह बेहद सुरक्षित और आधिकारिक है. यह आपके मेल बॉक्स को अधिक सुविधाजनक बनाता है.

गूगल इनपुट

इस्तेमाल: अपनी पसंद की भाषा में करें टाइप

अपनी भाषा में सुनना और पढ़ना ही नहीं, बल्कि गूगल इनपुट टूल्स का इस्तेमाल कर आप अपनी भाषा में टाइपिंग का भी अभ्यास कर सकते हैं. यह 90 से अधिक भाषाओं में आपको वर्चुअल कीबोर्ड उपलब्ध कराता है.

30 से ज्यादा लिपियों में यह लिप्यांतरण करता है. 40 से ज्यादा भाषाओं में यह हैंडराइटिंग इनपुट भी देता है.

लिप्यांतरण (ट्रांसलिटरेशन) के लिए आपको अंग्रेजी में टाइप करना होगा, लेकिन स्क्रीन पर वे शब्द उस भाषा में दिखेंगे जिसे आपने चुना है. आपको बस उच्चारण का ध्यान रखते हुए अंग्रेजी में ठीक से टाइप करना होगा.

सेव टू गूगल ड्राइव

इस्तेमाल: एक क्लिक से करें तस्वीरें और फाइल्स सेव

अगर आपको तस्वीरों की काफी जरूरत पड़ती है और आप गूगल ड्राइव पर काफी निर्भर करते हैं, तो यह एक्सटेंशन आपका समय बचाएगा.

गूगल ड्राइव खोलने की जगह और 'सेव-ड्रैग-ड्रॉप' का तरीका इस्तेमाल करने की जगह इस एक्सटेंशन के इस्तेमाल से आप केवल एक राइट-क्लिक कर तस्वीर को ड्राइव फोल्डर में सुरक्षित कर सकते हैं. इसके इस्तेमाल से आप वेब पर मौजूद अन्य सामग्रियों को भी गूगल ड्राइव में सेव कर सकते हैं.

डिक्शनरी

इस्तेमाल: यह एक्सटेंशन आपको शब्दों की परिभाषाएं और मतलब बताता जाता है.

वेब की दुनिया में इतना कुछ पढ़ने को उपलब्ध है कि वक्त कम पड़ जाता है. पढ़ते हुए और ब्राउजिंग करते हुए अगर आपको शब्दों का अपना ज्ञान बढ़ाने का भी मौका मिले, तो? अगर कुछ पढ़ते हुए ऐसे शब्द सामने आएं जिनका मतलब समझ ना आए, तो? ऐसी मुश्किलों का इलाज गूगल डिक्शनरी के पास है.

क्रोम के इस एक्सटेंशन का इस्तेमाल कर आप किसी शब्द को रेखांकित कर उसपर 2 बार क्लिक करें, तो उसका मतलब स्क्रीन पर दिखने लगेगा.

शेयर टू क्लासरूम

इस्तेमाल: यह शैक्षणिक उपयोगिता वाला क्रोम एक्सटेंशन है. इससे छात्रों और शिक्षकों को एक ही वेबपेज को एक-दूसरे के साथ साझा करने में मदद मिलती है.

स्कूलों और कक्षाओं में कई जगह तकनीक का खूब इस्तेमाल हो रहा है. इस एक्सटेंशन द्वारा शिक्षक केवल एक क्लिक में ही किसी वेबपेज को अपने छात्रों के पास पुश कर सकते हैं.

इससे छात्रों के स्क्रीन पर भी वही वेबपेज आ जाएगा. इस एक्सटेंशन के इस्तेमाल से वेबपेजेज को बहुत जल्द एक-दूसरे के साथ साझा किया जा सकता है.

शेयर टू क्लासरूम एक्सटेंशन को इस्तेमाल करने के लिए गूगल क्लासरूम के साथ गूगल ऐप्स से एजुकेशन अकाउंट बनाने की जरूरत होती है.

नोएडा बना स्मार्टफोन प्रॉडक्शन का हब

आप अपने नए स्मार्टफोन की बैक-क्लिप निकालेंगे तो मुमकिन है आपको वहां 'मेड इन इंडिया' का स्टिकर दिखाई पड़े. फिर चाहे आपको फोन सैमसंग का हो या किसी डोमेस्टिक ब्रैंड जैसे कार्बन, लावा या इनटेक्स का. 'मेड इन इंडिया' के साथ ही इस बात की भी काफी संभावनाएं हैं कि यह डिवाइस नोएडा या ग्रेटर नोएडा में बनाई गई हो.

जब से केंद्र सरकार ने पिछले बजट में इंपोर्टेड डिवाइस और स्थानीय बनी डिवाइसों की ड्यूटी पर 10.5% का अंतर किया, तब से यह इलाका (नोएडा, ग्रेटर नोएडा) भारत का सबसे बड़ा स्मार्टफोन हब बन गया है. इसकी क्षमता साल भर में 14 करोड़ स्मार्टफोन बनाने की है जोकि साल भर की डिमांड से 40% ज्यादा है. हालांकि ऐसा नहीं है कि क्वैलकम और मीडियाटेक प्रोसेसर भी यहां बना रहे हैं. स्मार्टफोन के सभी अहम पार्ट्स अभी भी चीन और ताइवान से ही आते हैं लेकिन इतने बड़े पैमाने पर स्मार्टफोन का प्रॉडक्शन इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण शुरुआत है. मौजूदा वक्त में स्थानीय इंडस्ट्रीज में डिवाइस के जरूरी पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 5-8% है जोकि अगले पांच साल में 35% तक हो सकता है.

नोएडा और ग्रेटर नोएडा इलाके में इन्वेस्टमेंट के पीछे बड़ा हाथ सैमसंग और एलजी जैसी कोरियन कंपनियों का है. सैमसंग ने तकरीबन एक दशक पहले स्थानीय तौर पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू की थी. वर्तमान में सैमसंग की कैपिसिटी साल में 40 लाख स्मार्टफोन बनाने है कि जो सबसे ज्यादा है. हालांकि कंपनी ने इस संख्या की पुष्टि नहीं की है. सैमसंग ने इलाके में स्मार्टफोन कंपोनेंट्स के बहुत से सप्लायर्स भी जेनरेट किए हैं. 

इंटरनेट की ये हरकतें कहीं आपको अपराधी न बना दें

इंटरनेट एक सागर की तरह है जिसमें असीमित जानकारियां हैं. आप जितना ज्‍यादा उसमें खोजेंगे आपको उतनी ही जानकारियां उसमें मिलेगी.

लेकिन कई बार इंटरनेट पर गैर-कानूनी जानकारियां या अन्‍य चीजें भी पड़ी हुई होती हैं जिससे देखना या चलाना कानूनी रूप से स्‍वीकृत नहीं है. आइए जानते हैं कि इंटरनेट पर क्‍या-क्‍या स्‍वीकृत नहीं है:

टोरेंटिंग कॉपीराइट कन्‍टेंट

टोरेंटिंग करना कानूनी रूप से अनिवार्य है लेकिन इसके कॉपीराइट डेटा को सेव करना या उसका इस्‍तेमाल करना कानूनी रूप से अवैध है.

ऑनलाइन कम्‍यूनिटी में ट्रॉलिंग

ट्रॉलिंग, कोई नई बात नहीं है. लेकिन अगर इससे कोई व्‍यक्ति शोषण का शिकार बनता है तो यह कानूनी रूप से अपराध की श्रेणी में आता है.

साइबरबुलिंग

इंटरनेट पर की जाने वाली बुलिंग को साइबरबुलिंग कहा जाता है जो कि अपराध की श्रेणी में आता है. इसे कई श्रेणियों में बांटा जाता है. बच्‍चों को लेकर की जाने वाली साइबरबुलिंग सबसे जघन्‍य अपराध माना जाता है और इसके लिए कड़ी का प्रावधान कानून के द्वारा बनाया गया है.

वीडियो कॉल रिकॉर्ड करना

अगर आप अपने सामने वाले व्‍यक्ति की बिना सहमति के उसके साथ की जाने वाली वीडियो चैट को रिकॉर्ड करते हैं तो वह एक अपराध माना जाएगा.

नकली पहचान बनाना

अगर आप इंटरनेट का इस्‍तेमाल नकली पहचान बनाकर करते हैं तो यह गलत होगा. इंटरनेट के इस्‍तेमाल के लिए अपनी सही पहचान बनाना अनिवार्य होता है.

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