Download App

हिन्दी क्यों नहीं बनती पेट की भाषा

हिन्दी की दुर्दशा को अब बजाय किसी भूमिका या प्रस्तावना के इसे आंकड़ों और तथ्यों के जरिये समझने की जरूरत है कि यह पेट की भाषा क्यों नहीं बन पा रही. पिछले साल भोपाल में आयोजित हुए विश्व हिन्दी सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने  हिन्दी भाषियों को हिन्दी के भविष्य को लेकर यह कहते हुए आश्वस्त किया था कि चिंता या घबराहट की कोई बात नहीं हम सबसे बड़ा बाजार है और हर कोई  हमारा मोहताज है.

बात में दम था इसलिए वह पसंद की गई थी लेकिन एक साल गुजरते गुजरते हिन्दी भाषियों को फिर समझ आ रहा है कि हमारे पास विलाशक थोड़ा बहुत पैसा है और हम दुनिया के बड़े उपभोक्ता सही लेकिन इससे हमें सिवाय स्वांत: सुखाय के क्या हासिल हो रहा है. पैसा तो अंग्रेजी बोलने वाले को ज्यादा मिल रहा है जो आज के प्रतिस्पर्धा के दौर की पहली जरूरत है. आत्मसम्मान और स्वाभिमान से सर तो गर्व से ऊँचा होता है लेकिन पेट पिचकता जा रहा है. हिन्दी भाषी अब भी ग्लानि, कुंठा और आत्महीनता के शिकार इसलिए हैं कि हिन्दी का रोजगार और पेट से कोई संबंध नहीं.

आंकड़े चिंताजनक ओर हैरान कर देने वाले हैं कि देश में धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलने महज 5 फीसदी हैं लेकिन उनकी कमाई हिन्दी भाषियों से लगभग 40 फीसदी ज्यादा है. इतना ही नहीं जो लोग कामचलाऊ अंग्रेजी यानि टूटे फूटे वाक्य बोल लेते हैं वे भी हिन्दी बोलने वालों से 15 प्रतिशत ज्यादा कमा रहे हैं.

देश में हिन्दी बोलने वालों की संख्या 45 करोड़ के लगभग है इनमे से भी 25 करोड़ अंग्रेजी नहीं बोल पाते जाहिर हे वे पिछड़े गंवार और अर्धशिक्षित हैं. इनका पेशा मेहनत मजदूरी और कृषि है. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में नौकरी पाने के लिए अंग्रेजी अनिवार्य है अगर किसी को उच्चतम न्यायालय के फैसले समझना है तो उसे अंग्रेजी आना चाहिए, संसदीय ब्यौरे और मसौदे अंग्रेजी में ज्यादा छपते हैं, बैंकों की भाषा कमोवेश अभी भी अंग्रेजी ही है.

उलट इसके 55 लाख करोड़ की हमारे देश की अर्थव्यवस्था का आधे से ज्यादा बाजार हिन्दी पर टिका है, रोजाना कोई 20 करोड़ अखबार हिन्दी के निकलते हैं और हर साल हिन्दी की औसतन 600 फिल्में बनती हैं जो लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का व्यवसाय करती हैं. टेलीविजन का व्यवसाय अब 20 हजार करोड़ रुपये का आकंड़ा छू रहा है. पर बावजूद इस आर्थिक आधिपत्य के पैसे का बड़ा हिस्सा अंग्रेजी बोलने वालों के खीसे में जा रहा है.

यानि अंग्रेजी की आर्थिक अनिवार्यता से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता फिर ऐसे में हिन्दी के प्रचार प्रसार और प्रोत्साहन के माने क्या यह बात सिरे से ही समझ से परे है. हिन्दी में किताबें सबसे ज्यादा छप रही हैं पर बिकती अंग्रेजी की चुनिंदा किताबें हैं क्योंकि नई पीढ़ी बतौर फैशन इन्हें खरीद कर पढ़ती है. सरकारी विज्ञापनों का बड़ा हिस्सा अंग्रेजी अखबारों और पत्रिकाओं को जाता है जबकि उनके पाठकों की संख्या हिन्दी पाठकों के मुकाबले 90 फीसदी कम है.

ऐसे में अगर हिन्दी भाषियों को अंग्रेजी मुनाफे की जुबान लगती है तो बात हैरत की नहीं है. भविष्य और कैरियर के लिहाज से तमाम अभिभावक चाहते हैं कि बच्चा अंग्रेजी स्कूल में पढ़े, अंग्रेजी लिखना पढऩा-बोलना सीखे जिससे पेट पाल सके. जब हिन्दी से पेट नहीं भरा जा सकता तो हिन्दी दिवस को धार्मिक त्यौहारों की तरह मनाने का कोई औचित्य नहीं रह गया है. हिन्दी अब घरों और समाज में संवादों के आदान प्रदान का काम कर रही है वह भी इसलिए कि यह नेक काम अंग्रेजी में सभी नहीं कर सकते यानि अंग्रेजी नहीं बोल सकते.

सरकार को कोस लें, अंग्रेजी को दोषी ठहरा दें लेखकों और साहित्यकारों को कटघरे में खड़ा कर खुश हो लें पर इस सब से पहले यह सोचें कि हिन्दी को रोजगार की भाषा कैसे बनाएं. हिन्दी दिवस पर दिन भर कर्मकाण्ड कर उसे देर रात वैचारिक समुद्र में विसर्जित कर देने का फैशन यूं ही चलता रहा तो तय है हिन्दी से हो रही कमाई अंग्रेजी बोलने वाले हिन्दी भाषी देसी गिरमिटिये डकारते रहेंगे.

तो क्या अजय देवगन की फिल्म ‘शिवाय’ फ्रेंच फिल्म ‘टेकन’ की कॉपी है?

बौलीवुड में फिल्मकार मौलिक काम करने से क्यों बचते रहते हैं, यह समझ से परे है? ‘एक्शन जैक्सन’, ‘हे ब्रो’, जैसी लगातार कई असफल फिल्मों की वजह से असफलता के दौर से गुजर रहे अभिनेता अजय देवगन ने अपने करियर को नई गति देने के मकसद से बतौर निर्माता व निर्देशक फिल्म ‘शिवाय’ बना रहे हैं, जिसमें उन्होंने खुद ही एक नई अदाकारा के साथ मुख्य भूमिका निभायी है. इतना ही नहीं उनका दावा है कि इस फिल्म की कहानी भी अजय देवगन ने खुद ही लिखी है.

मगर एक अंग्रेजी दैनिक का दावा है कि अजय देवगन ने शिवाय 2008 में प्रदर्शित फ्रेंच फिल्म ‘टेकन’ की कहानी को चुराकर बनायी  है. इससे यह बात उभर कर आती है कि चोरी करन में बौलीवुड में कोई पीछे नहीं रहना चाहता.

सूत्रों के अनुसार अजय देवगन दिवाली के मौके पर प्रदर्शित होने वाली अपनी फिल्म शिवाय के साथ दर्शकों को जोड़ने के लिए फिल्म के एक दो नहीं पूरे चार प्रोमो/ ट्रेलर बाजार में लेकर आने वाले हैं. अजय देवगन अपनी फिल्म की कहानी को छिपाकर रखते हुए पहला ट्रेलर लेकर आए हैं. पर शिवाय से जुड़े सूत्र बताते हैं कि फिल्म शिवाय में अजय देवगन का किरदार वर्तमान समय में भगवान शंकर के विनाशकारी रूप जैसा है.

पहला ट्रेलर देखकर जो कहानी समझ में आती है,वह यह है कि अजय देवगन की एक बेटी का अपहरण हो चुका है, यह वह बेटी है, जो कि अपनी मां व सौतेले पिता के साथ विदेश में रहती है और अब वह अपनी बेटी को छुड़ाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. उनके रास्ते में जो भी आता है, उसका विनाश करते देते हैं.

इस कहानी से साबित होता है कि अजय देवगन ने अपनी फिल्म शिवाय की कहानी पिएरे मोरेल निर्देषित फ्रेंच एक्शन फिल्म टेकन से चुरायी है. 2008 में प्रदर्शित इस फिल्म को लुक बेसेन और रॉबर्ट मार्क कामेन ने मिलकर लिखा है. फिल्म टेकन में भी एक पिता अपनी बेटी व उसकी सहेली का अपहरण

होने के बाद उन्हे छुड़ाने के लिए निकलता है. यह कहानी है ब्रायन मिल्स की है,जो कि अपनी बेटी किम के साथ संबंध बनाना चाहता है जो कि अपनी मां व सौतेले पिता के साथ रह रही है. ब्रायन मिल्स चाहता है कि किम संगीत के क्षेत्र में अपना करियर बनाए. पर किम कहती है कि वह करियर शुरू करने से पहले अपनी सहेली के साथ पेरिस की यात्रा पर जाना चाहती है. ब्रायन न चाहते हुए भी उसे इस बात की इजाजत दे देता है. पेरिस पहुंचने पर इन दोनों का अपहरण हो जाता है. अब ब्रायन इन्हे छुड़ाने के प्रयास में लग जाता है. किम बेची जाती, उससे पहले ही ब्रायन उसे छुड़ा लेता है. फ्रांस की यात्रा करते समय ब्रायन ह्यूमन ट्राफीकिंग व सेक्स गुलामी जैसी समस्या से भी परिचित होता है. इस फिल्म ने सफलता के कई रिकार्ड बनाए थे. इस फिल्म के दो सिक्वल ‘टेकेन 2’ और ‘टेकन 3’ बन चुके हैं.

मगर अभी भी अजय देवगन का दावा है कि उनकी फिल्म शिवाय एक्शन के अलावा इमोश्नल ड्रामा वाली फिल्म है. उनके दिमाग में इस फिल्म की कहानी का ख्याल एक वास्तविक घटनाक्रम को पढ़कर आया. अजय देवगन का दावा है कि उनकी फिल्म किसी भी दूसरी फिल्म से प्रेरित नहीं है. खैर,फिल्म के रिलिज होने पर तो सच सबके सामने होगा.

“रियो में मुक्केबाजों की नाकामी की जिम्मेदारी लेता हूं”

रियो ओलंपिक में भारतीय मुक्केबाजों के पदक नहीं जीत पाने की नैतिक जिम्मेदारी लेने को तैयार राष्ट्रीय कोच गुरबख्श सिंह संधू ने कहा कि पिछले चार साल से चला आ रहा प्रशासनिक गतिरोध भी उस खेल की दुर्दशा के लिये जिम्मेदार है जो कभी तेजी से प्रगति कर रहा था.

संधू ने कहा कि मैं निजी तौर पर आहत हूं और इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं. लेकिन मेरा मानना है कि मौजूदा हालात में मेरे लड़कों का प्रदर्शन संतोषजनक था. उन्हें काफी कठिन ड्रॉ मिले थे. पिछले चार साल से क्या हो रहा है, मैं जानता हूं लेकिन मुझे लगता रहा कि हालात सुधरेंगे.

बीजिंग में विजेंदर सिंह के कांस्य पदक और लंदन ओलंपिक में एमसी मेरीकॉम को मिले कांस्य पदक के बाद मुक्केबाजी को भारत की पदक उम्मीद माना जा रहा था. रियो ओलंपिक में भारत के तीन मुक्केबाजों में से कम से कम एक पदक की उम्मीद थी लेकिन वे नाकाम रहे.

संधू ने कहा कि किस्मत ने हमारा साथ नहीं दिया. मेरे सभी लड़के पदक विजेताओं से हार गए. मैं किसी को बचाने की कोशिश नहीं कर रहा लेकिन हमें यथार्थवादी होना होगा. ड्रॉ काफी कठिन थे.

शिवा थापा (56 किलो) को क्यूबा के रोबेइसी रामिरेज ने हराया जिसने बाद में स्वर्ण पदक जीता. वहीं मनोज कुमार (64 किलो) भी स्वर्ण पदक विजेता उजबेकिस्तान के फजलीददीन गेइबनाजारोव से हारे. विकास कृष्णन को रजत पदक विजेता बेक्तेमिर मेलिकुजेव ने हराया.

उन्होंने कहा कि मैं गुजारिश करता हूं कि हमारे मुक्केबाजों की स्थिति को समझें. हमें अपने अहम को भूलना होगा. सबसे पहले सक्रिय राष्ट्रीय महासंघ का होना जरूरी है क्योंकि उसके बिना हम अनाथ हैं. संधू ने कहा कि मजबूत नींव के बिना कुछ नहीं हो सकता. किसी भी खेल के लिये सक्रिय महासंघ होना बहुत जरूरी है. महासंघ के बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आवाज नहीं सुनी जायेगी और तकनीकी प्रतिनिधित्व भी नहीं होगा.

पिछले दो दशक से अधिक समय से राष्ट्रीय टीम से जुड़े संधू ने कहा कि मुक्केबाजों को तैयारी के लिये सारी सुविधायें मिली लेकिन प्रतिस्पर्धी विदेशी अनुभव नहीं मिल सका.

उन्होंने कहा कि मैंने इस तरह की सुविधायें पहले कभी नहीं देखी. उन्हें सब कुछ मिला और साइ महानिदेशक इंजेती श्रीनिवास ने काफी सहयोग किया लेकिन निलंबन के कारण हमें कजाखस्तान या उजबेकिस्तान या क्यूबा में अभ्यास सह प्रतिस्पर्धाओं में बुलाया नहीं गया जहां हमारे मुक्केबाजों को दबाव के बिना सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजों के खिलाफ खेलने का अच्छा अभ्यास मिलता.

उन्होंने कहा कि इसलिए मैं बार बार कह रहा हूं कि हमें मजबूत महासंघ की जरूरत है. हमें भारत को फिर विश्व मुक्केबाजी सीरीज में लाना होगा. ओलंपिक में उन्हीं मुक्केबाजों का दबदबा रहा जो ये सीरीज और अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ की पेशेवर लीग में खेले.

बारिश ने फेरा भारत के उम्मीदों पर पानी, वेस्टइंडीज ने जीती टी-20 सीरीज

अमित मिश्रा और रविचंद्रन अश्विन के फिरकी के जादू से भारत ने दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में वेस्टइंडीज को 143 रन पर ढेर कर दिया लेकिन बारिश के कारण मैच रद्द हो गया जिससे कैरेबियाई टीम ने दो मैचों की श्रृंखला 1-0 से जीत ली.

तकनीकी कारणों से मैच 40 मिनट देर से शुरू हुआ था. भारतीय पारी में जब सिर्फ दो ओवर हुए थे और टीम ने वेस्टइंडीज के 144 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए बिना विकेट खोए 15 रन बना लिए थे तब बारिश आ गई और मैच दोबारा शुरू नहीं हो सका.

रोहित शर्मा 10 जबकि अजिंक्य रहाणे चार रन बनाकर खेल रहे थे. इस तरह मैच का परिणाम नहीं निकलने में मैच की शुरूआत में विलंब की अहम भूमिका रही और भारत को श्रृंखला गंवानी पड़ी. इसी मैदान पर कल पहले टी20 में भारत एक रन से हार गया था.

पहले मैच में इसी मैदान पर रनों और रिकार्डों की बारिश के बीच दो शतक बने थे लेकिन आज लेग स्पिनर मिश्रा (24 रन पर तीन विकेट) और ऑफ स्पिनर अश्विन (11 रन पर दो विकेट) की बलखाती गेंदों का जादू देखने को मिला जिससे वेस्टइंडीज ने नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए और टीम 19.4 ओवर में सिमट गई.

तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह (26 रन पर दो विकेट) और मोहम्मद शमी (31 रन पर दो विकेट) ने दो-दो जबकि भुवनेश्वर कुमार (36 रन पर एक विकेट) ने एक विकेट चटकाया. वेस्टइंडीज की ओर से सलामी बल्लेबाज जॉनसन चार्ल्स ही कुछ देर टिक कर खेल पाए जिन्होंने सर्वाधिक 43 रन बनाए.

धोनी ने टॉस जीता

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर एक बार फिर गेंदबाजी करने का फैसला किया था. वेस्टइंडीज की शुरुआत अच्छी नहीं रही. चार्ल्स ने भुवनेश्वर पर दो चौकों और एक रन के साथ पांचवें ओवर में टीम का स्कोर 50 रन तक पहुंचाया. मिश्रा ने हालांकि अपनी पहली ही गेंद पर चार्ल्स को लांग आन पर अजिंक्य रहाणे के हाथों कैच करा दिया. उन्होंने 25 गेंद में पांच चौकों और दो छक्कों की मदद से 43 रन बनाए.

अनुभवी मार्लन सैमुअल्स और लेंडल सिमंस इसके बाद क्रीज पर थे. सिमंस ने मिश्रा पर चौके जड़ने के बाद बायें हाथ के स्पिनर रविंद्र जडेजा पर भी लगातार दो चौके मारे लेकिन ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने उन्हें वाइड गेंद पर विकेटकीपर धोनी के हाथों स्टंप करा दिया. बुमराह ने अपनी पहली ही गेंद पर सैमुअल्स को धोनी के हाथों कैच कराके वेस्टइंडीज का स्कोर 76 रन पर चार विकेट किया. कीरोन पोलार्ड (13) ने बुमराह के इसी ओवर में चौका और फिर छक्का जड़ा लेकिन अश्विन ने उन्हें पगबाधा कर दिया. बुमराह ने आंद्रे रसेल (03) को बोल्ड करके वेस्टइंडीज को छठा झटका दिया.

ड्वेन ब्रावो ने अश्विन पर एक रन के साथ 14वें ओवर में टीम के रनों का शतक पूरा किया. मिश्रा ने ब्रावो (03) को बोल्ड किया जबकि आंद्रे रसेल (13) ने भुवनेश्वर की गेंद पर लांग आफ पर विराट कोहली को आसान कैच थमाया. कप्तान कालरेस ब्रेथवेट (18) ने भुवनेश्वर पर चौका जड़ने के बाद मिश्रा की लगातार गेंदों पर चौका और छक्का मारा लेकिन इसी ओवर में बोल्ड हो गए. शमी ने पारी के अंतिम ओवर में सैमुअल बद्री (01) को बोल्ड करके वेस्टइंडीज की पारी का अंत किया.

वो कहानी फिर सही

मध्य प्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव 8 सितम्बर को विधिवत विदा हो जायेंगे और उनकी जगह कोई नया राज्यपाल आ जाएगा लेकिन राम नरेश मुद्दतों तक याद किये जायेंगे. वजह है उनका चर्चित महाघोटाले ‘व्यापमं’ से हार्दिक लगाव. जिसे कुछ लोग भ्रष्टाचार भी कहते हैं क्योंकि इस में उनकी भागीदारी किसी सबूत की मोहताज नहीं रही. अभी भी वे व्यापमं घोटाले से पूरी तरह बरी नहीं हुए हैं.

व्यापमं की जांच कर रही सीबीआई कब क्या कर गुजरे कहा नहीं जा सकता. भोपाल के राज भवन मे रहते अपने जमाने के इस दिग्गज नेता ने भी आत्म कथा लिखने का विकसित होता राजसी शौक पूरा करते अपनी जिंदगी पर एक 200 प्रष्ठ की किताब लिख डाली और नामकरण किया ‘मेरी कहानी’ जिसमें उनकी राजनातिक जिंदगी का सफरनामा है. कांग्रेस के प्रति आभार है और आडवाणी, चरण सिंह और वी पी सिंह जैसे तत्कालीन कई दिग्गजों का जिक्र ही नहीं हैं. व्यापमं घोटाले में उनकी भूमिका और संलिप्तता का उल्लेख भी नहीं है जिससे यह कहानी बगेर सुंदर काण्ड के रामचरित मानस जैसी होकर रह गई है.

रामनरेश यादव की कहानी का औपचारिक विमोचन मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया जिनकी हर सम्भव कोशिश यह रही थी कि एस टी एफ जांच के दौरान यादव को केन्द्र सरकार हटाये नहीं और न ही उनसे सख्ती से पेश आए. इस कहानी मे यादव ने ईमानदारी से इस बात की तो चर्चा की है कि सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह उन पर आंख बंद कर भरोसा करते थे पर व्यापमं वाले हिस्से को वे नहीं लिख पाये जबकि इस घोटाले मे फंसे उनके बेटे शैलेश यादव की रहस्यमय मौत हो गई थी और उनका विश्वशनीय ओ एस डी धनराज यादव तो भर्तियों के बदले घूस लेने के आरोप मे गिरफ्तार भी हुआ था.

 जांच के दौरान यह भी चर्चा थी कि गिरफ्तारी के डर से और पिता की प्रतिष्ठा की खातिर शैलेश यादव ने खुदकुशी कर ली या फिर इस तनाव को बर्दाश्त न कर पाने  के कारण उसकी असामयिक मृत्यु हो गई. सच जो भी हो रामनरेश यादव उससे कन्नी काट गये हैं यानि कलम के साथ न्याय नहीं कर पाये हैं. राजनेताओं द्वारा लिखी किताबें अब पहले सी बिकती नहीं हैं क्योंकि उनमे मुद्दे की कम आत्म मुग्धता, चाटुकारिता और विवादों व वैचारिक मतभेदों का जिक्र ज्यादा रहता है.

इसके अलावा ये किताबें पेशेवर लेखक लिखते हैं जिससे किताब या संस्मरण में लेखक की मूल भावनायें नहीं आ पाती. इनका पाठक वर्ग भी सीमित रहता है. ‘मेरी कहानी’ जैसी किताबों मे सच कम चटपटी गपबाजी और सियासी सनसनी ज्यादा रहती है जिससे ये अपनी अहमियत खो बैठती हैं. किताब का प्रकाशन उनके बेटे अजय यादव ने किया है जिसमे हैरत की एक बात यह भी है कि रामनरेश यादव ने मध्य प्रदेश के राज भवन के संस्मरणों का जिक्र न के बराबर किया है.

अपने एंड्रायड फोन की जीपीएस स्पीड बढाएं

स्मार्टफोन आज केवल कम्युनिकेशन का ही जरिया नहीं रह गया है. आप अपने छोटे से स्मार्टफोन पर आज कई बड़े काम निपटा सकते हैं. यहां तक कि अपनी बैंकिंग भी आप फोन से कर सकते हैं, इसके लिए आपको बैंक तक जाने कि कोई जरुरत नहीं है. यह छोटा सा डिवाइस आज सबसे जरुरी चीज बन गया है, इसके बिना घर बाहर निकलना भी मुश्किल लगता है. इंटरनेट पर क्‍या करना होता है अपराध यहां तक कि इसके जीपीएस यानी आपका ग्‍लोबल पोजीशनिंग सिस्‍टम द्वारा आप पूरे दुनियाभर में कहीं भी अपनी स्थिति यानि लोकेशन को जांच सकते हैं.

चूंकि जीपीएस सिस्टम सीधे सेटेलाइट से कनेक्‍ट होकर आपका मार्गदर्शन करता है. अक्सर देखा गया है कि अधिकांश यूजर्स एंड्रायड मोबाइल में जीपीएस सिस्टम के स्‍लो होने की शिकायत करते हैं. आज हम आपको ऐसे टिप्स बताएंगे जिनकी मदद से आपके स्मार्टफोन का जीपीएस सिस्टम फास्‍ट हो जाएगा.

ऐप डाउनलोड करें

अपने मोबाइल में सबसे पहले GPS Status & Toolbo application ऐप डाउनलोड करके इंस्‍टॉल कर लें.

ऑटो डाउनलोड

जीपीएस डाटा ऐप डाउनलोड करते समय इंटरनेट की स्‍पीड अच्छी होनी चाहिए. इसके लिए आप सारा डाटा रीसेट कर सकते हैं. ऐप में ऑटो डाउनलोड जीपीएस डाटा सेलेक्ट करें. अगर आप चाहें तो ऐप में पुराना डाटा री-डाउनलोड कर सकते हैं.

टाइम बढ़ा सकते हैं

ऐसे करके आप ऐप में एक घंटे से तीन दिन का ऑप्शन टाइम बढ़ा सकते हैं, ऐप से पुराना डाटा हटा सकते हैं व उसे रीसेट कर सकते हैं.

जीपीएस का फीचर ऑन कर दें 4/5 ऐप के इंस्‍टॉल हो जाने के बाद अपने मोबाइल की सेटिंग में जाकर जीपीएस का फीचर ऑन कर दें. अब अपने मोबाइल के Menu>Settings>GPS &Sensors ऑप्‍शन में जाकर .Auto download AGPS को टेप करके ऑन कर लें.

जीपीएस स्पीड

Auto download GPS फीचर ऑन होते ही इंस्‍टॉल ऐप में स्वयं ऑटोमेटिक आवश्यक डाटा जैसे कि लोकेशन, एरिया मैप आदि डाउनलोड हो जाएगा. इसके साथ अन्य जरूरी जानकारियां भी स्मार्टफोन में सेव हो जाएगी. फिर जब भी आप जीपीएस इस्तेमाल करेंगे तो इन्‍हें खुलने में समय नहीं लगेगा. चूंकि ये पहले से ही आपके फोन में सेव होगी.

अगर, आप इन पांच टिप्स को अपनाते हैं तो निश्चित ही अपने मोबाइल की जीपीएस स्पीड को बढ़ा सकते हैं.

सानिया ने जीता कनेक्टीकट ओपन डबल्स खिताब

भारत की शीर्ष टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने रोमानिया की मोनिका निकुलेस्कु के साथ कनेक्टीकट ओपन में डबल्स खिताब अपने नाम किया. अमेरिकी ओपन ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट से पहले कनेक्टीकट ओपन की जीत से उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी.   

सानिया और निकुलेस्कु ने यूक्रेन की कैटरीना बोंडारेंको और ताईवान की चुआंग चिया जंग की जोड़ी को एक घंटे 30 मिनट तक चले फाइनल मुकाबले में सीधे सेट में 7-5, 6-4 से शिकस्त दी.   

सानिया और निकुलेस्कु ने हाल में दोबारा जोड़ी बनायी है और पहला खिताब अपने नाम किया. उन्होंने पिछली बार 2010 में जोड़ी बनायी थी और वेस्टर्न एंड सदर्न ओपन के क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया था. तब अलग होने से पहले दोनों ने एक टूर्नामेंट और साथ में खेला था.   

यह खिताब अपने नाम करने के बावजूद सानिया और निकुलेस्कु ने साफ किया कि यह भागीदारी सिर्फ थोड़े समय के लिये ही है और दोनों अमेरिकी ओपन में अपनी नियमित जोड़ीदारों के साथ ही खेलेंगी. दुनिया की नंबर एक सानिया ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मैं बारबोरा स्ट्राईकोवा के साथ खेलूंगी.   

वहीं निकुलेस्कु ने कहा कि मैं वानिया किंग के साथ खेलती हूं. लेकिन उम्मीद करती हूं कि यह हमारा एक साथ अंतिम टूर्नामेंट नहीं होगा.   

इस टूर्नामेंट में सानिया के साथ जोड़ी बनाने के बारे में पूछने पर निकुलेस्कु ने कहा कि मैंने सिनसिनाटी में सानिया से पूछा था. मुझे लगा था कि शायद वह यहां खेलना चाहती है. मैंने उससे पूछा. जब उन्होंने हां कहा तो मैं काफी उत्साहित हो गई. अब हमने टूर्नामेंट जीत लिया है तो मैं खुश हूं कि मैंने उनसे पूछा था.

माल्या पर कसता SFIO का शिकंजा

किंगफिशर एयरलाइंस में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अपनी जांच का दायरा बढाते हुए गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने विभिन्न बैंकों के पूर्व प्रमुखों से पूछताछ शुरू की है.

आरोप है कि बैंकों ने विजय माल्या की अगुवाई वाली इस विमानन कंपनी के बढ़ते घाटे के बावजूद बिना समुचित जांच के किंगफिशर एयरलाइंस को नया कर्ज दिया था. एसएफआईओ इन आरोपों की भी जांच कर रही है कि किंगफिशर एयरइलाइंस को कर्ज उसके ब्रांडों व अन्य आस्तियों के बढा चढाकर पेाश् किए गए मूल्यांकन के आधार पर दिया गया.

विजय माल्या के खिलाफ तो सीबीआई व प्रतर्वन निदेशालय सहित अनेक एजेंसियों की जांच चल रही है.

सूत्रों ने कहा कि एसएफआईओ ने किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े मामलों में अपनी जांच का दायरा बढाया है. एजेंसी अब संदिग्ध कमियों के लिए बैंकों के साथ साथ उनके शीर्ष प्रबंधन कर्मियों पर ध्यान दे रही है जिन्होंने कंपनी को कर्ज देने में संपत्तियों व देनदारियों का समुचित निरीक्षण नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि एसएफआईओ ने कुुछ सार्वजनिक बैंकों के पूर्व प्रमुखों से पूछताछ की है जिन्होंने किंगफिशर एयरलाइंस को नया कर्ज दिया जबकि उसका घाटा बढ़ रहा था.

कुछ सार्वजनिक बैंकों के पूर्व प्रमुखों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एसएफआईओ ने उनसे संपर्क किया है लेकिन कहा कि एजेंसियां रिण वितरण तथा अन्य तकनीकियों के बारे में सूचना चाहती है. उन्होंने कहा कि शीर्ष प्रबंधन स्तर पर कोई त्रुटि नहीं हुई थी और उन्होंने आधिकारिक सवालों को सम्बद्ध बैंकों के पास भेज दिया.

कैसे करें वाट्सएप में मैसेज शेड्यूल

वॉट्सएप एक गजब का चैट प्‍लेटफॉर्म है लेकिन कई बार आपको ऐसा महसूस होता है कि आप अपनी जरूरत के हिसाब से मैसेज को इस चैट एप में शेड्यूल नहीं कर पाते हैं. फेसबुक में शेड्यूल मैसेज की सुविधा उपलब्‍ध है जो कि इस एप में अब तक नहीं थी. लेकिन अब नए वर्जन मं इस सुविधा को प्रदान किया जा रहा है. क्‍या आप जानते है तूफान मचाने वाले रिलायंस जियो 4जी की असली स्पीड क्या है ? अगर आप भी शेड्यूल वाट्सएप मैसेज करना चाहते हैं तो डालिए एक नजर:

डाउनलोड

सबसे पहले आप अपने एंड्रायड फोन में शेड्यूल वाट्सएप को डाउनलोड करें.

सुपर यूजर जानकारी

एप को डाउनलोड करने पर आपसे सुपर यूजर जानकारी को पूछा जाएगा, जिसे देना होगा.

मैसेज

अब मैसेज को शेड्यूल करने से पहले उसे लिखना होगा. जिसके लिए आपको पेंसिल आईकॉन पर जाना होगा और वहां जो बॉक्‍स खुलकर आये, उसमें मैसेज को लिखना होगा और जिसे भेजना है उसका नाम ऊपर के बॉक्‍स में लिखना होगा.

टाइम

अब आपको किस टाइम पर मैसेज भेजना है उसे सेट कर दें.

भेजना

इतने स्‍टेप को करने के बाद आप मैसेज को शेड्यूल कर चुके हैं. अब बस आपके द्वारा निर्धारित समय पर वह संदेश चला जाएगा. आप चाहें तो उस मैसेज को देख भी सकते हैं.

बॉलीवुड में बंद हो जाएगा स्टूडियो सिस्टम!

हॉलीवुड में फिल्मों का निर्माण स्टूडियो सिस्टम के तहत ही हो रहा है. वहां ‘डिजनी स्टूडियो’, ‘बीबीसी 4 स्टूडियो’,‘फॉक्स स्टार स्टूडियो’ काफी सक्रिय हैं. हॉलीवुड सिनेमा ने तो पूरे यूरोप पर कब्जा करके यूरोपीय देषों के सिनेमा का अंत कर दिया है.

पिछले कुछ वर्षों से भारत में कुछ कॉरपोरेट कंपनियां सिनेमा से जुड़कर स्टूडियो की तरह फिल्में बनाती आ रही हैं. मगर सूत्रों की माने तो बॉलीवुड के कलाकारों की अपनी दादागीरी, कॉरपोरेट कंपनियां द्वारा अपनी बैलेंस सीट पर ध्यान देने, कंपनी के शेअर के भाव कैसे बढ़े इस पर ध्यान देने, फिल्मों के निर्माण का निर्णय करने का दायित्व सिनेमा के समझने वाले को देने की वनिस्पत एमबीए करके आने वाले रंगरूटों को दिए जाने के कारण भारत में कॉरपोरेट या स्टूडियो के तहत बनी फिल्में सुपर फ्लॉप हो रही हैं. जिसकी वजह से हमारे यहां स्टूडियो सिस्टम असफल होता जा रहा है. इतना ही नहीं सिनेमा भी गुड़गोबर हो रहा है.

यह एक कटु सत्य है. इसी के चलते कुछ वर्ष पहले ‘अष्ट विनायक’ सहित दो तीन कॉरपोरेट कंपनियां/स्टूडियो खत्म हो गए. अब फिल्म ‘मोहनजो दाड़ो’ को जिस कदर से बॉक्स ऑफिस पर असफलता मिली है, उसके चलते ‘मोहनजो दाड़ो’ के निर्माण से जुड़ा ‘डिजनी स्टूडियो’ ने भी तय कर लिया है कि अब वह भारत में हिंदी फिल्मों का निर्माण नहीं करेगा. वह सिर्फ अपनी हॉलीवुड फिल्मों को हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं में डब कर प्रदर्शित करता रहेगा.

सूत्रों के अनुसार कुछ वर्ष पहले डिजनी स्टूडियो ने रॉनी स्क्रूवाला की फिल्म प्रोडक्शन कंपनी ‘यूटीवी मोशन पिक्चर्स’ को खरीदकर उसे ‘डिज्नी स्टूडियो’ नाम दे दिया था और इसका सीईओ सिद्धार्थ रॉय कपूर को बनाया था.

सिद्धार्थ रॉय कपूर ही अभिनेत्री विद्या बालन के पति हैं. तथा सिद्धार्थ रॉय कपूर के दो भाई अभिनय के क्षेत्र में कार्यरत हैं. ‘डिज्नी स्टूडियो’ के अंदर चर्चा है कि जब से ‘यूटीवी मोशन पिक्चर्स’ ने डिजनी स्टूडियो के नाम से सिद्धार्थ रॉय कपूर के नेतृत्व में काम करना शुरू किया, तब से डिज्नी स्टूडियो ने सिर्फ असफल फिल्मों का ही निर्माण किया. इसकी सभी फिल्मो ने डिज्नी को करोड़ो रूपए का नुकसान पहॅुचाया. डिज्नी स्टूडियो ने कई बड़े बजट की हिंदी फिल्में बनायी और करोड़ो रूपए डुबाए.

बहरहाल, अब सूत्रों के अनुसार डिज्नी स्टूडियो के बोर्ड ने सर्वसम्मति से हिंदी फिल्मों के निर्माण से तोबा करने के साथ ही सिद्धार्थ रॉय कपूर का कार्यकाल जनवरी 2017 के बाद न बढ़ाने का भी फैसला कर लिया है. तो इस तरह 2016 के अंत तक एक और स्टूडियो खत्म हो जाएगा.

इतना ही नहीं 2016 की शुरूआत में ‘रिलायंस इंटरटेनमेंट’ ने भी फिल्म निर्माण से तौबा करते हुए सिर्फ फिल्म वितरण के क्षेत्र में ही रहने का फैसला कर लिया था. यानी कि भारतीय फिल्म जगत में स्टूडियो सिस्टम का धीरे धीरे अंत होता जा रहा है. जिसका खामियाजा भी भारतीय सिनेमा को ही भुगतना पड़ रहा है. सूत्रों की माने तो ‘फॉक्स स्टार स्टूडियो’ की भी हालत बहुत पतली है. कल को इसके भी बंद हो जाने की खबर आए, तो कोई आश्चर्य वाली बात नही होगी.

पर इस तरह स्टूडियो बंद हों और भारतीय सिनेमा की हालत भी यूरोपीय सिनेमा की तरह हो जाए तो सभी भारतीय फिल्मकारों व कलाकारों को सोचने की जरुरत है कि वह स्वयं कहां गलत हैं? क्या ऐसा होगा?….. पता नही..!!!

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें