Download App

ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक कराना हुआ आसान

ट्रेन से सफर करने वाले लोगों के लिए अब तत्काल टिकट बुक कराना आसान हो गया है. टिकटों की तत्काल बुकिंग में ई-कैश भुगतान के लिए मोबाइल पेमेंट नेटवर्क मोबिक्विक ने इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) से गठजोड़ किया है.

मोबिक्विक की सह संस्थापक उपासना टाकू ने एक बयान में यह जानकारी दी. इसके अनुसार, 'मोबिक्विक ने आईआरसीटीसी ऐप तथा आईआरसीटीसी फूडऑनट्रेक ऐप पर पेमेंट के डिजिटलीकरण के लिए भारतीय रेलवे से गठजोड़ किया था. अब हम टिकटों की तत्काल ऑनलाइन बुकिंग के लिए गठजोड़ कर रहे हैं, जिससे उपयोक्ता लगभग तुरंत ही टिकट बुक कर सकेंगे. यह सेवा सुनिश्चित करेगी कि उपभोक्ताओं की बुकिंग भुगतान में देरी के कारण अस्वीकृत न हो.'

मोबिक्विक का कहना है कि इस गठजोड़ से ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग का लोड कम करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही यात्रियों के लिए यह सुनिश्चित रहेगा कि उनकी बुकिंग भुगतान में देरी के कारण खारिज नहीं हो. औसतन आधार पर भारतीय रेलवे की 15 प्रतिशत से अधिक दैनिक टिकटें तत्काल बुक की जाती हैं. मोबिक्विक का कहना है कि उसके उपभोक्ता इस सुविधा के तहत तत्काल टिकट के लिए 2 सेकेंड में भुगतान कर सकेंगे.

सर्च इंजन बचायेंगे आपकी जान

आने वाले समय में इंटरनेट के सर्च इंजन लोगों की जान बचाने में भी मदद कर सकते हैं क्योंकि वैज्ञानिक एक ऐसा तरीका विकसित कर रहे हैं, जिससे उन प्रयोगकर्ताओं की पहचान प्रभावी ढंग से की जा सकती है, जिनके द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने का खतरा है. इन सर्च इंजनों के जरिए उन्हें यह जानकारी दी जाएगी कि उन्हें कहां से मदद मिल सकती है.

सर्च इंजन पर डाले गए सवाल केवल उपयोगकर्ताओं की रुचि के बारे में ही नहीं बताते बल्कि उनमें उनके मूड और स्वास्थ्य की स्थिति से जुड़ी जानकारी भी निहित होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों के चलते, गूगल जैसे सर्च इंजन पहले ही खोज के लिए डाले जा रहे उन सवालों के जवाब दे रहे हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि प्रयोगकर्ता शायद आत्महत्या के बारे में विचार कर रहा है. इन प्रयोगकर्ताओं का ध्यान काउंसलिंग और आत्महत्या की रोकथाम करने वाली अन्य सेवाओं की ओर खींचा जाता है.

जर्मनी की लुडविग मैक्सिमिलियन यूनिवर्सिटी (एलएमयू) के फ्लोरियन अरेन्ड ने कहा, ‘इंटरनेट आत्महत्या रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है.’ वास्तव में अनेक अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि आत्महत्या करने को आतुर व्यक्ति भी उपलब्ध सहायता संसाधनों की याद दिलाने पर अपना इरादा बदल सकता है. 

सरकारी सेवाओं के लिए नया ऐप ‘उमंग’

कुछ ही समय में सरकारी सेवाओं के लिए एक नया मोबाइल ऐप आने वाला है. कुछ सरकारी अधिकारियों की मानें तो आने वाले चार महीनों के अंदर नागरिकों के लिए एक सरकारी मोबाइल ऐप लॉन्च किया जा सकता है जिसका नाम 'उमंग' होगा.

हालांकि शुरू में इस ऐप से कुछ ही सरकारी सेवाएं जोड़ी जाएंगी. इनमें सबसे पहले इस ऐप से आधार को जोड़ा जाएगा जो सभी सेवाओं के लिए मान्य है. इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और किसानों व छात्रों के लिए चलाए जाने वाले स्किल डिवेलपमेंट कार्यक्रम को भी इससे जोड़े जाने की योजना है.

इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'चूंकि अधिकांश सरकारी सुविधाएं आधार से लिंक की जा रही हैं इसलिए इसे उमंग के साथ जोड़ा जाएगा. इससे नागरिकों को अलग-अलग सरकारी विभागों के लिए अलग ऐप डाउनलोड करने से छुटकारा मिलेगा.'

इस एक एकीकृत ऐप के जरिए केंद्र व राज्य सरकारों की सेवाओं के साथ-साथ म्युनिसिपल सेवाओं के बारे में भी जानकारी ली जा सकेगी. उन्होंने बताया, 'इससे कई सरकारी विभागों की कार्यकुशलता में इजाफा होगा, साथ ही उन्हें डिजिटल प्लैटफॉर्म पर अपने ऐप और प्रॉजेक्ट बनाने से छुटकारा मिलेगा.'

गौरतलब है कि अभी अधिकांश सरकारी विभागों के पास अपने सरकारी ऐप नहीं हैं. भविष्य में उमंग के जरिए डिजिटल लॉकर, आधार और सारे सरकारी विभागों के लिए सिंगल गेटवे विकसित किया जाएगा. इससे सरकार द्वारा टेंडर डॉक्युमेंट और ऐप तैयार करने के लिए कंसल्टैंट पर किए जाने वाले खर्च में भी कमी आएगी.

उमंग को विकसित करने के लिए नोएडा स्थित स्पाइस कनेक्ट ग्रुप की स्पाइस डिजिटल को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है. दिसंबर 2019 तक इस प्रॉजेक्ट में लगभग 200 अलग-अलग ऐप को शामिल कर लिया जाएगा. स्पाइस ग्रुप इसके लिए आधार बेस्ड KYC, डीजीलॉकर के जरिए डॉक्युमेंट ऐक्सेस और सरकारी पेमेंट गेटवे PayGov को उमंग ऐप से जोड़ने में सहायता करेगा.

स्पाइस डिजिटल के अध्यक्ष जतिंदर वर्मा ने बताया, 'इस ऐप में नागरिकों को बार-बार इस्तेमाल करने वाली सेवाओं, शॉर्टकट, भाषाओं आदि को अपने हिसाब से अपडेट करने की सहूलियत मिलेगी.' अभी सरकार के पास 'मोबाइल सेवा' नाम से अपना ऐप स्टोर है जहां अलग-अलग सरकारी विभागों के लिए ऐप उपलब्ध है.

बर्थडे पर दिया मौत का तोहफा

मूल रूप से चमौली, उत्तराखंड का रहने वाला यशपाल मध्य प्रदेश के पीथमपुर इलाके में बनी सिप्ला दवा कंपनी में काम करता था. यशपाल ने पूजा से पहले प्यार किया, फिर घर वालों के भारी विरोध के बाद उस ने पूजा से शादी की थी. यशपाल और पूजा एक ही कालेज में पढ़ते थे. इस दौरान दोनों में अच्छी दोस्ती थी. एक दिन पूजा अचानक गश खा कर गिर पड़ी. डाक्टरों ने जांच कर पूजा के दिल में दिक्कत बताई. डाक्टरों के मुताबिक, उस के एक वौल्व में छेद था. जो ठीक तो हो सकता था, पर इस के लिए लंबा समय और महंगी दवा की जरूरत थी. पूजा की बीमारी जान कर यशपाल बहुत दुखी हुआ. पूजा की बीमारी जानने के बावजूद यशपाल ने उस से शादी का प्रपोजल रखा, जिसे पूजा ने तुरंत मान लिया. इस के बाद उन दोनों की प्रेम कहानी की चर्चा पूरे कालेज में होने लगी.

साल 2011 में यशपाल की नौकरी सिप्ला दवा कंपनी, इंदौर में लग गई. नौकरी के बाद जब शादी की बात आई, तो यशपाल के घर वाले लड़की देखने लगे. यशपाल ने कहा कि वह अपनी गर्लफ्रैंड पूजा से ही शादी करेगा. यशपाल ने घर वालों से पूजा के दिल की बीमारी की बात नहीं छिपाई. पूजा की बीमारी जान कर घर वालों ने यशपाल को काफी समझाने की कोशिश की, पर उस ने किसी की एक न सुनी. आखिरकार यशपाल की जिद के आगे घर वालों को झुकना पड़ा. साल 2012 में यशपाल और पूजा की शादी बड़े धूमधाम से हो गई. शादी के बाद यशपाल पूजा को ले कर इंदौर आ गया. वह इंदौर के एबी रोड पर राऊ इलाके में ओमप्रकाश चौधरी के मकान में किराए पर रहने लगा.

इंदौर का राऊ इलाका धूल, धुआं और शोरशराबे वाला इलाका है. पूजा को दिल की बीमारी थी, इसलिए प्रदूषण की वजह से उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी. उसे दिखाने पर डाक्टर ने कहा कि पूजा को अगर सेहतमंद देखना चाहते हो, तो उसे किसी हिल स्टेशन पर ले जाओ 

यशपाल पहाड़ी इलाके का रहने वाला था. उस ने देहरादून में अपने मामा के घर के पास ही एक मकान किराए पर ले कर पूजा को वहां शिफ्ट कर दिया. पूजा देहरादून में अकेले रहने लगी. इधर इंदौर में यशपाल पूजा के इलाज के लिए पैसे जुटाने में लग गया. वह हर महीने पूजा से मिलने देहरादून आता था. डाक्टरी चैकअप के बाद उस की दवा वगैरह का इंतजाम कर के फिर इंदौर लौट आता. यह सिलसिला पिछले 3 सालों से चल रहा था. यशपाल पूजा को खुश देखना चाहता था. पूजा ने भी यशपाल को प्यार देने में कोई कमी नहीं रखी. टाइमपास करने के लिए पूजा अपना समय इंटरनैट पर गुजारने लगी. उस ने फेसबुक पर अंजलि के नाम से अकाउंट खोल लिया. बस, यहीं से उस का मन बहकने लगा. वह फेसबुक पर नएनए लड़कों से चैटिंग करने लगी. पूजा जिन लड़कों से चैटिंग करती थी, उन में कोटा, राजस्थान का रहने वाला करन सिंह सिद्धू भी था. धीरेधीरे उन की फेसबुक की दोस्ती प्यार में बदल गई. इस के बाद दोनों मोबाइल फोन पर घंटों बातें करने लगे. जब करन को यह पता चला कि पूजा देहरादून में अकेली रहती है, तो उस ने मिलने की इच्छा जाहिर की.

पूजा ने तुरंत करन सिंह को अपना पता दे दिया. पता मिलते ही वह देहरादून पहुंच गया. करन सिंह रात में पूजा के घर पर ही रुका. दोनों में उसी रात सैक्स संबंध बन गए. इस के बाद तो करन सिंह अकसर उस से मिलने कोटा से देहरादून पहुंचने लगा. पूजा करन सिंह को दिलोजान से इतना चाहने लगी कि अब उसे यशपाल का प्यार फीका लगने लगा था. वह यशपाल को छोड़ कर करन सिंह के साथ घर बसाने की सोचने लगी. करन सिंह भी पूजा के प्यार में पागल था. उसे पूजा के रूप में सोने के अंडे देने वाली मुरगी मिल गई थी. पूजा उसे प्यार और सैक्स के अलावा पैसा भी देती थी. उधर यशपाल पूजा की ठीक से देखभाल नहीं कर पा रहा था. इस का उसे मलाल था. इस के लिए उस ने इंदौर की दवा कंपनी सिप्ला को छोड़ने का फैसला लिया. यही फैसला उस के लिए जन्मदिन पर मौत का तोहफा साबित हुआ 

पूजा के पास वह रह सके और उस की देखभाल कर सके, इस के लिए यशपाल ने देहरादून की दवा कंपनी में नौकरी के लिए अर्जी दी. चूंकि यशपाल को सिप्ला जैसी अच्छी दवा कंपनी में काम करने का तजरबा था. सो, उसे देहरादून में एक दवा कंपनी में नौकरी मिल गई. उसे 1 जुलाई को कंपनी जौइन करनी थी. यह खुशखबरी उस ने पूजा को सुनाई, तो वह खुश होने के बजाय दुखी हो गई.  जाहिर सी बात थी, यशपाल के देहरादून आने के बाद करन सिंह के साथ ऐयाशी कर पाना उस के लिए मुश्किल हो जाएगा. उस ने तुरंत करन सिंह को देहरादून बुलाया. पूजा ने उस से कहा कि अगर वह आगे भी उस से जिस्मानी संबंध बनाए रखना चाहता है, तो यशपाल के देहरादून पहुंचने से पहले ही उसे ठिकाने लगाना होगा.

पहले तो यह सुन कर करन सिंह चौंका, पर जब पूजा ने यशपा को रास्ते से हटाने का प्लान बताया, तो उसे सुन कर करन सिंह राजी हो गया. 20 जून की सुबह इंदौर पुलिस ने यशपाल को अपने कमरे में मरा पाए जाने की बात बताई. यशपाल की मौत की खबर मिलते ही उस का भाई हरी सिंह, ताऊ आनंद सिंह, जीजा व दूसरे रिश्तेदार इंदौर पहुंच गए. पूजा को भी यशपाल की मौत की सूचना मिल चुकी थी. वह भी इंदौर पहुंच गई. उस का रोतेरोते बुरा हाल था. पूजा की हालत देख कर यशपाल के घर वाले आंसू रोक न सके. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ जाने के बाद यशपाल की लाश उस के परिवार वालों को दे दी गई. लेकिन अंतिम संस्कार से लौटते ही पुलिस ने पूजा को यशपाल की हत्या के आरोप में हिरासत में ले लिया.

यशपाल के घर वालों ने इस का विरोध किया. पूजा भी इस बात से इनकार करती रही. शाम तक पुलिस टीम करन सिंह को राजस्थान के हनुमानगढ़ से गिरफ्तार कर उसे इंदौर ले कर पहुंची. करन सिंह को अपने सामने देख पूजा टूट गई. पूजा ने बताया कि यशपाल से दूर रहने के बाद वह करन सिंह से प्यार करने लगी थी. वह यशपाल से अलग हो कर करन सिंह के साथ घर बसाना चाहती थी. जब यशपाल ने फोन पर उसे बताया कि वह देहरादून की कंपनी में 1 जुलाई से जौइन करने वाला है, तो वह चौंक गई. वह हर हाल में करन सिंह को पाना चाहती थी, इसलिए उस ने यशपाल से छुटकारा पाने का प्लान बना लिया. 20 जून को यशपाल का बर्थडे था. प्लान के मुताबिक, पूजा ने यशपाल से फोन पर कहा कि वह इस बार उस के बर्थडे पर एक खास तोहफा देना चाहती है. यह तोहफा उस का फेसबुक फ्रैंड करन सिंह 19 तारीख की रात को ले कर पहुंच जाएगा.

यशपाल ने पूजा से बारबार पूछा, वह तोहफे में क्या दे रही है, यह बता दे. पूजा ने सस्पैंस है कह कर उसे चुप करा दिया. यशपाल की पत्नी पूजा उसे पहली बार उस के बर्थडे पर तोहफा भेजने वाली थी. वह तोहफे में क्या देने वाली है, इसी सोच में वह कई दिनों तक खोया रहा. वह 19 जून की रात को बेसब्री से इंतजार करने लगा. यशपाल ने करन सिंह के लिए अपने ही घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी थी. 19 तारीख की रात को करीब 10 बजे करन सिंह यशपाल के घर पर पहुंचा. यशपाल ने उस का जोरदार स्वागत किया. दोनों बैठ कर देर रात तक शराब पीते रहे.

करन सिंह दिखावे के लिए शराब लेता रहा. उस ने यशपाल को जम कर शराब पिलाई. नशा होने की वजह से यशपाल बेहोश हो कर बिस्तर पर लुढ़क गया. मौका पा कर करन सिंह ने यशपाल के मुंह में रूई ठूंस दी, ताकि उस की आवाज न निकल सके. इस के बाद गला दबा कर उस की हत्या कर दी और बाहर से दरवाजे पर ताला लगा कर वहां से चला गया. लेकिन करन सिंह और पूजा का एकसाथ रहने का प्लान धरा रह गया और वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए.

इस्तीफा नहीं देंगे साइरस मिस्त्री

टाटा समूह के चेयरमैन पद से अपदस्थ किए गए सायरस मिस्त्री फिलहाल ग्रुप की कई अहम कंपनियों के प्रमुख के पद पर डटे हुए हैं. यही नहीं वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील जैसी अहम कंपनियों के पद से इस्तीफा देने के मूड में भी नहीं हैं. मिस्त्री के करीबी एक सूत्र ने बताया कि इन कंपनियों के चेयरमैन के पद को छोड़ने की उनकी कोई योजना नहीं है. सूत्र ने कहा, 'वह टाटा समूह में अपने सभी पदों पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे.'

सायरस मिस्त्री को टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन पद से 24 अक्तूबर को अचानक से हटा दिया गया था. लेकिन वह अब भी समूह की कारोबारी कंपनियों टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स, इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड, टाटा पावर कंपनी, टाटा ग्लोबल बेवरेजेस, टाटा केमिकल्स, टाटा इंडस्ट्रीज और टाटा टेलिसर्विसेज के चेयरमैन है.

अमेरिका में चुनाव और घेरे में बगदादी

याद करना चाहें तो यह भी याद कर सकते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बार के बेहद दिलचस्प चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रवाद की दुहाई देने के साथ ही रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी प्रतिद्वंदी डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के खिलाफ अमेरिकी मतदाताओं को सावधान करते हुए यहां तक कहा था कि अगर वे जीतती हैं तो आईएस का खतरा बढ़ जाएगा. इससे समझा जा सकता है कि दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस का डर कितना बड़ा और सचमुच असर रखने वाला है.

लेकिन इसी सच्चाई का दूसरा पहलू यह भी है कि अगर अमेरिकी चुनाव यानी 8 नवंबर को मतदान के पहले आईएस का सरगना अबू बकर अल बगदादी को खत्म कर दिया जाता है तो क्या डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के पक्ष में मतदान का उछाल देखने को मिलेगा? यह सवाल इसलिए कि इस्लामिक स्टेट का सफाया करने के मकसद से इराकी सेना का साथ देने के लिए अमेरिका ने 67 देशों की मित्र सेना बनाई है और इराकी सेनाओं ने आईएस के नाभिकेंद्र मोसुल में बगदादी को चारों तरफ से घेर लिया है. यह शिकंजा लगातार कसता ही जा रहा है और जैसी कि खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक बगदादी किसी भी समय पकड़ा जा सकता है, बशर्ते वह खुद को आत्मघाती न बना ले.

गौरतलब है कि इराक के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल पर आईएस के कब्जे के बाद ही बगदादी ने खुद को खलीफा घोषित किया था. अब आईएस के उसी गढ़ मोसुल में इराकी और कुर्दिश सेना मिलकर बगदादी के आतंकियों का सफाया करने में लगी है. कहा जा रहा है कि इराकी सेना के घेरे में आ जाने के बाद मोसुल में बगदादी के पांव उखड़ने लगे हैं और बगदादी व उसके संगठन इस्लामिक स्टेट की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. जिस इराक से बगदादी और इस्लामिक स्टेट ने सिर उठाया था, उसी इराक में उसकी और आईएस की कब्र खोदने की निर्णायक तैयारी कर ली गई है और उसके खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी जंग मोसुल में चल रही है.

अमेरिका ने जिन 67 देशों की मित्र सेना बनाई है, वे सभी फिलहाल मोसुल को आजाद कराने के अभियान में शामिल हैं. इराकी फौज के लिए आईएस व बगदादी के खात्मे को आसान बनाने के लिए मित्र सेना बाकायदे मोर्चेबंदी के तहत दुश्मन के ठिकानों पर हवाई हमले कर रही है. जाहिर है कि मोसुल से अपने पांव उखड़ते देख इस्लामिक स्टेट ने जगह-जगह सुसाइड कार बॉम्बर्स तैनात कर दिए हैं और जैसे-जैसे इराकी सेना मोसुल की तरफ बढ़ रही है आईएस की तरफ से हो रहे जवाबी हमले भी बढ़ रहे हैं. आतंकी लगातार सेना पर हमला कर रहे हैं और अपनी हार करीब देखते हुए उन्होंने मोसुल के कई तेल कुओं में आग लगा दी है.

कहा जा रहा है कि बगदादी अब पूरी तरह घिर चुका है और उसके बचने का कोई रास्ता बचा नहीं है. अगर बगदादी का अंत होता है तो ओसामा बिन लादेन के बाद दुनिया के दूसरे सबसे खूंखार आतंकी सरगना को खत्म करने का श्रेय भी अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा के खाते में दर्ज हो जाएगा.

टूटने पर अपने आप जुड़ जाएंगे गैजट्स!

सोचिये, आपका कोई मनपसंद गैजट किसी कारण से कहीं से टूट जाए तो आपको कैसा लगेगा? निश्चित तौर पर कोई ऐसा नहीं चाहेगा कि उसके गैजट के साथ ऐसा हो. लेकिन अब आपको कोई ऐसी चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि आने वाले समय में गैजट्स को ऐसे मटीरियल से बनाया जाएगा जिससे वह टूटने पर अपने आप जुड़ जाएंगे.

हालांकि ऐसे स्मार्ट गैजट्स बनाने की कोशिशें पहले से की जाती रही हैं. इसी कड़ी में कई स्मार्ट कपड़े भी बनाए जाते रहे हैं. इसके लिए प्रिंटेड इलैक्ट्रॉनिक्स को बनाने पर जोर दिया गया लेकिन ऐसे यह बहुत नाजुक होते हैं. साथ ही, इन्हें फ्लेक्सिबल बनाए रखना भी वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती है.

इसके लिए यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की जोसेफ वांग नैनोइंजिनियरिंग लैब इस समस्या के सॉल्युशन पर काम कर रही है. यहां वैज्ञानिकों ने एक ऐसी इंक बनाई है जिसमें मैग्नेटिक पार्टिकल हैं.

अगर इस इंक से किसी कपड़े या डिवाइस को प्रिंट किया जाता है और इंक कहीं से भी टूटती है तो सभी पार्टिकल मैग्नेटिक होने की वजह से एक-दूसरे को आकर्षित करने लगेंगे और टूटा हुआ हिस्सा जुड़ जाएगा. इस इंक में निओडायमियम मैग्नेट का इस्तेमाल किया गया है जो हार्ड ड्राइव औऱ रेफ्रिजेरेटर की मैग्नेट में पाया जाता है.

साइंस अडवांस में छपी एक स्टडी में लैब की टीम ने दावा किया है कि उनकी खुद से जुड़ने वाली यह स्याही से तीन मिलीमीटर तक के कई टूटे हुए हिस्से केवल 50 मिलीसेकंड में रिपेयर हो जाते हैं. स्मार्ट कपड़ों में सेंसर होते हैं जो कपड़ों के ऊपर बुन दिए जाते हैं. लेकिन इनकी वजह से कपड़े भारी और सख्त हो जाते हैं.

पारंपरिक रूप से जो सेल्फ हीलिंग मटीरियल बनाए जाते हैं उनमें कैमिकल रिएक्शन का प्रयोग किया जाता है जिसके लिए बाहरी कारकों जैसे गर्मी की जरूरत होती है. साथ ही, इस प्रक्रिया में बड़े क्रैक्स को रिपेयर करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है. वहीं, मैग्नेटिक इंक को जोड़ने के लिए किसी बाहरी कारक जैसे गर्मी, रोशनी या किसी अन्य कैमिकल की जरूरत नहीं पड़ती.

इसके अलावा, यह मैग्नेटिक इंक काफी सस्ती भी है. बंडोडकर के मुताबिक, 10 डॉलर की इंक से सैकड़ों छोटी डिवाइस बनाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि इस इंक से सोलर पैनल से लेकर मेडिकल इम्प्लांट करने वाली डिवाइस भी बनाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि अगर आप अपनी त्वचा पर कोई प्रिंटेड डिवाइस पहने हुए हैं और वह किसी कारण से टूट जाती है तो अब आपको उसे फेंकने की जरूरत नहीं है बल्कि कुछ ही समय में वह अपने आप जुड़ जाएगी.

रिलेटिव्स जब घर में ठहरने आएं

चाहे कैरियर की बुलंदियां छूने का जज्बा हो या सामाजिक रिश्तों को निभाने की बात, किशोरों ने हर प्लेटफौर्म पर खुद को सर्वोपरि साबित किया है. इसी सामाजिक तानेबाने के चलते उन्हें रिश्तेदारों से रूबरू होने का भी मौका मिलता है. इन में से कुछ अपने सगे रिश्ते होते हैं जबकि कुछ मेलजोल के बाद मजबूत होते हैं. इन सब का घर पर आनाजाना भी लगा रहता है. घर आने वाले लोगों में कुछ अपने सगे रिश्ते मसलन, चाचाचाची, बूआफूफा, मामामामी होते हैं तो कुछ दूर के रिश्तेदार अथवा पेरैंट्स के जानपहचान वाले होते हैं. रिश्तेदारों के घर आने व उन्हें ठहराने को ले कर जहां एक ओर रोमांच होता है, वहीं उन की खातिरदारी की वजह से आप की भी जिम्मेदारी व भागदौड़ बढ़ जाती है. आज के किशोर कुछ तैयारियों के साथ रिश्तेदारों के अपने घर आगमन को यादगार बना सकते हैं. साथ ही खुद भी उन पलों का भरपूर आनंद उठा सकते हैं.

रिश्तेदार के बारे में पता करें

कई बार आप को पहले से ही रिश्तेदारों के आने और ठहरने का पता होता है. वे रिश्तेदार या परिचित न हो कर यदि मातापिता के जानने वाले हैं तो भी आप का फर्ज बनता है कि आप उन की पूरी खातिरदारी करें और उन के बारे में जानकारी हासिल करें. इस क्रम में आप घर आने वाले रिश्तेदारों की पसंदनापसंद मालूम कर सकते हैं. चाहें तो पेरैंट्स से इस काम में मदद ले सकते हैं. जब सारी चीजें पता होंगी तो उन की आवभगत में कोई कोरकसर बाकी नहीं रहेगी.

स्कूल से ले लें छुट्टी

आप के पेरैंट्स कामकाजी हैं और ऊपर से रिश्तेदार घर में ठहरने आ जाएं तो निश्चित ही आप के लिए भी किसी परीक्षा की घड़ी से कम नहीं है, क्योंकि ऐसे में घर में कोई न रहे, यह ठीक नहीं है. ऐसे में एक ही रास्ता बचता है कि पेरैंट्स यदि औफिस से छुट्टी नहीं ले पा रहे, तो आप कालेज या स्कूल से छुट्टी ले लें. रिश्तेदार पहले से बता कर आ रहे हैं तो कई चीजें संतुलित हो जाती हैं, लेकिन अचानक से आ धमकने पर आकस्मिक अवकाश लेना आप की मजबूरी होगी. घर की साफसफाई, कपड़े, बैडशीट और परदे बदलने में मातापिता की मदद करें. इधरउधर पड़े सामान को व्यवस्थित करने में पेरैंट्स का हाथ बंटाएं.

मुसकरा कर करें स्वागत

कौलबैल बजे और पेरैंट्स के बजाय आप के द्वारा दरवाजा खोले जाने पर सामने रिश्तेदार खड़े हों, तो उन्हें देख कर आप के चेहरे पर मुसकराहट होनी चाहिए. आप अपना परिचय देते हुए उन का गर्मजोशी से स्वागत करें. भले ही वे आप के पेरैंट्स के परिचित हों. आप के चेहरे की मुसकराहट देख कर उन्हें खुद ब खुद एहसास हो जाएगा कि उन का आना पूरे परिवार को अच्छा लगा और वे आप के साथ भी घुलमिल कर बात करेंगे.

पुरानी यादों को ताजा करें

यदि रिश्तेदार आप के पूर्व परिचित हैं तो आप दोनों के बीच कई ऐसी सुनहरी यादें होंगी जिन्हें साझा कर माहौल को खुशनुमा बनाया जा सकता है. वे लमहे आप को खुल कर हंसने अथवा मुसकराने का मौका दे सकते हैं. इस से आप के बीच का रिश्ता और मजबूत बनेगा. यह भी कोशिश करें कि यदि पूर्व में आप दोनों के बीच किसी बात को ले कर कोई गलतफहमी अथवा मतभेद हुआ हो तो उसे लगेहाथ सुलझा लें, क्योंकि रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलाने का इस से बेहतर मौका आप को फिर नहीं मिल सकता.

पसंदीदा म्यूजिक वीडियो लगाएं

रिश्तेदारों की खुशामदी के दौरान उन की पसंद का म्यूजिक या कोई वीडियो लगा कर उन के लिए वह लमहा यादगार बनाया जा सकता है, लेकिन यह तभी हो पाएगा जब आप उस से अच्छी तरह से वाकिफ हों. निश्चित रूप से उन के लिए आप का यह प्रयास किसी सरप्राइज से कम नहीं होगा. यह ध्यान रहे कि कहीं ऐसे में आप उन के सामने किसी की शिकायत या अपने परिवार की मजबूरी ले कर न बैठ जाएं. आप की इस गलती से सारा मजा किरकिरा हो सकता है.

काम में हाथ बंटाएं

घर आने वाले रिश्तेदारों में यदि आप की बूआ, भाभी, मामी, चाची या कोई अन्य परिचित हों तो संभव है कि वे आप के परिवार से पूरी तरह से घुलेमिले होंगे. आप के पेरैंट्स के न रहने पर यदि वे ही किचन संभाल रही हैं तो आप का फर्ज बनता है कि उन के काम में हाथ बंटाएं. किचन में कौन सा सामान कहां रखा है यह आप को भलीभांति पता होना चाहिए. किचन के अलावा भी कई ऐसे काम हैं जो आप के स्तर के हो सकते हैं.

हर संभव मदद पहुंचाएं

रिश्तेदारों का आप के घर आने और ठहरने का एक मकसद शौपिंग या उस शहर में कोई जरूरी काम भी हो सकता है. यदि आप को उन के आने का प्रयोजन पता है तो उन की मदद करने में पीछे न रहें. यदि शाम को टहलने जा रहे हैं तो उन्हें भी अपने साथ लेते जाएं. समय निकाल कर उन्हें अपने शहर की अच्छी जगहों पर घुमाएं और शौपिंग कराएं. वे किसी जरूरी काम से शहर आए हों, तो उन की मदद करें.

जरूरत का सामान मौजूद रहे

आप रिश्तेदारों को जिस कमरे में ठहरा रहे हैं उस में उन की जरूरत का हर सामान जैसे पानी की बोतल, तौलिया, पेस्ट, पत्रपत्रिकाएं आदि मौजूद रहनी चाहिए. साथ ही आप भी समय निकाल कर उन के पास जरूर बैठें. इस से वे बोर नहीं होंगे. परिवार में कोई अन्य सदस्य मौजूद हो तो उन्हें उन के पास बैठने के लिए प्रेरित करें, लेकिन यह भी देखना जरूरी है कि हर वक्त उन को घेरे भी न रखें. कुछ वक्त उन्हें खाली भी छोड़ दें.                                     

डोडा बरफी: दलिया और दूध का कमाल

डोडा बरफी पंजाब की सब से खास मिठाई है. अब यह पंजाब के बाहर भी मिठाई की दुकानों में बिकने लगी है. यह खोए और पनीर की बनी मिठाई से अलग है. यह खोए और पनीर की मिठाई से ज्यादा दिनों तक चल सकती है. इसीलिए लोग इसे पसंद कर रहे?हैं. पंजाब में दूध और गेहूं की पैदावार ज्यादा होती है. गेहूं से बनने वाले दलिए से डोडा बरफी तैयार करने से किसानों को भी मदद मिलने लगी है. अब दलिए की ज्यादा खपत होने लगी है. दूध और दलिया दोनों ही पौष्टिक होते हैं. इस में मेवे मिला कर बरफी को और भी अच्छा बना लिया जाता है. डोडा बरफी अपने नाम की ही तरह बहुत अलग है. ऐसे में इस का स्वाद हर किसी को पसंद आता?है. करीब 500 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिकने वाली डोडा बरफी तेजी से मिठाई कारोबार में अपना असर छोड़ रही है.

मुंबई की रहने वाली दीपिका सिंह कहती हैं, ‘इस का रंग देख कर यह चाकलेट की तरह लगती है. इस का स्वाद बहुत मजेदार होता है. यह खोए की बरफी और चाकलेट दोनों से अलग होती है. मेवे और कोको पाउडर इस के स्वाद को दूसरी मिठाइयों से अलग कर देते हैं. डोडा बरफी में खोए की मिठाई जितनी कैलोरी नहीं होती है. इसी वजह से इसे हर कोई खा सकता है. दूध और लस्सी वाले पंजाब की अब नई पहचान डोडा बरफी बनती जा रही है.

सामग्री : 4 कप दूध, डेढ़ कप ताजी क्रीम, 3 चम्मच दलिया, 2 कप चीनी, 1 बड़ा चम्मच घी, 1 कप काजू (बारीक कुटे हुए), 1 कप बादाम (बारीक कटे हुए), 2 बड़े चम्मच कोको पाउडर, 2 बड़े चम्मच पिस्ता (लंबे कटे हुए).

बरफी बनाने की विधि : सब से पहले एक पैन में घी डाल कर गरम करें. फिर इस में दलिया डाल कर मध्यम आंच पर हलका भूरा होने तक भूनें. इसे निकाल कर अलग रख लें. अब एक भारी तले की कड़ाही में दूध डाल कर मध्यम आंच पर उबालें. जब दूध उबल जाए तब उस में क्रीम डालें और दूध गाढ़ा होने तक उबालें. इस में करीब 40 मिनट लगेंगे. अगर दूध कड़ाही में लगे, तो चम्मच से छुड़ाते रहें.

अब दूध में दलिया और चीनी डाल कर मिलाएं और 20 मिनट तक पकाएं. चम्मच से चलाते रहें ताकि दूध कड़ाही के किनारों पर न चिपके. अब उस में कोको पाउडर, काजू और बादाम डालें और तब तक पकाएं जब तक कि यह मिश्रण बड़ी लोई जैसा नहीं हो जाता. इस में करीब 15 मिनट लगेंगे. अब एक थाली में घी लगा लें और तैयार मिश्रण को उस में फैला लें. इस के बरफी के आकार के पीस काट लें और पिस्ता डाल कर हलके हाथ से चम्मच से दबा दें. डोडा बरफी तैयार है. ठंडा होने के बाद इसे पेश करें. इस मिठाई को बनाने के बाद 15 दिनों तक फ्रिज में रखा जा सकता?है.                                     

देशभर में लागू हो गया खाद्य सुरक्षा कानून

सरकार ने कहा कि केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के शामिल होने के साथ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून इस महीने से पूरे देश में लागू हो गया है. देश की करीब तीन चौथाई आबादी को बहुत सस्ती दर पर हर माह निश्चित मात्रा में अनाज की कानूनी गारंटी वाले इस कार्यक्रम पर सरकार सालाना 1.4 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है. अब देश के 36 राज्यों-केन्द्र शासित प्रदेशों के कम से कम 80 करोड़ लोग इस कानून के दायरे में आ गए हैं.

खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने कहा, ‘जब हम सत्ता में आये तब खाद्य कानून केवल 11 राज्यों में लागू था. मुझे इस बात की खुशी है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को अब सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू कर दिया गया है.’ उन्होंने कहा कि केवल दो राज्य केरल और तमिलनाडु छूट गये थे और उन्होंने भी नवंबर से इसे लागू कर दिया है.

इस कानून को वर्ष 2013 में पारित किया गया था. इस कानून के तहत सरकार प्रति व्यक्ति प्रतिमाह एक से तीन रुपये प्रति किलो की दर से पांच किलो खाद्यान्न देती है. सब्सिडी खर्च के बारे में पासवान ने कहा कि यह करीब 11,726 करोड़ रुपये प्रति माह अथवा करीब 1,40,700 करोड़ रुपये सालाना बैठेगा. उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत 80 करोड़ लोगों को इसके दायरे में लिया गया है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें