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क्या संजय गुप्ता ने शाहरुख खान को दी है सलाह

आगामी 26 जनवरी 2017 को बाक्स आफिस पर दो फिल्में ‘रईस’ और ‘काबिल’ टकराने वाली हैं. फिल्म ‘रईस’ में शाहरुख खान की मुख्य भूमिका है, तो वहीं ‘काबिल’ में रितिक रोशन की मुख्य भूमिका है. यानी कि ‘काबिल’ और ‘रईस’ एक ही दिन टकराएंगी. पहले शाहरुख खान ने अपनी तरफ से कोशिश की कि यह फिल्में एक ही दिन न टकराएं. शाहरुख खान ने खुद ही फिल्म ‘‘काबिल’’ के निर्माता राकेश रोशन ने बात की, पर मामला टांय टांय फिस्स रहा. बात आयी गयी हो गयी. राकेश रोशन झुकने के लिए तैयार नहीं हुए.

राकेश रोशन का तर्क था कि उन्होंने सबसे पहले ‘काबिल’ के प्रदर्शन की तारीख घोषित की थी, इसलिए वह अपनी फिल्म के प्रदर्शन की तारीख नहीं बदलेंगे. शायद राकेश रोशन के दिमाग में रहा होगा कि शाहरुख खान की ‘दिलवाले’ और ‘फैन’ दो फिल्में असफल हो चुकी हैं, इसलिए उन्हे एक सफल फिल्म की बहुत ज्यादा जरुरत है. जबकि उनके बेटे रितिक रोशन की तो एक ही फिल्म ‘‘मोहनजो दाड़ो’’ ही असफल हुई है. यहां तक कि फिल्म ‘काबिल’ के निर्देशक संजय गुप्ता अब तक चुप थे. वह अपनी फिल्म की सफलता को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थे. उन्हे शाहरुख खान की फिल्म ‘रईस’ से नुकसान नजर नहीं आ रहा था.

लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. एक तरफ बौलीवुड में ‘नोटबंदी’ बहुत बड़ा हौव्वा बना हुआ है. तो दूसरी तरफ शाहरुख खान की आलिया भट्ट के साथ वाली फिल्म ‘‘डियर जिंदगी’’ बाक्स आफिस पर अच्छा व्यापार कर रही है. इससे अब ‘काबिल’ से जुड़े लोगों में शायद एक डर पैदा हुआ है, तभी तो मुंबई के अंग्रेजी टेबलाइड दैनिक से बात करते हुए फिल्म ‘‘काबिल’’ के निर्देशक संजय गुप्ता ने शाहरुख खान को पठान बताते हुए कहा है कि शाहरुख खान को सलमान खान की फिल्म के साथ टकराना चाहिए न कि रितिक रोशन की फिल्म ‘काबिल’ से.

इस अंग्रेजी टेबलाइड से बात करते हुए संजय गुप्ता ने कहा है-‘‘दो फिल्मों का यह टकराव नही होना चाहिए. मेरी नजर में राकेश रोशन अपनी जगह सही हैं. उन्होंने सबसे पहले ‘काबिल’ के प्रदर्शन की तारीख 26 जनवरी 2017 घोषित की थी. शाहरुख खान जीवन मूल्यों पर यकीन करने वाले, आदर्शों पर चलने वाले इंसान हैं. वह पठान हैं. मुझे नहीं लगता कि वह किसी दूसरे के पैरों की उंगलियों पर अपना पैर रखना चाहेंगे. यदि उसी दिन किसी अन्य ने पहले अपनी फिल्म के प्रदर्शन की तारीख घोषित की होती, तो उसी दिन राकेश जी कभी भी अपनी फिल्म लेकर न आते. यह सम्मान हमें एक दूसरे के प्रति बरकरार रखना चाहिए.’’

इसके बाद संजय गुप्ता ने अपनी पीड़ा को व्यक्त करते हुए कहा-‘‘रितिक रोशन तो शाहरुख खान से दस साल छोटे हैं, इसलिए दोनों के बीच कोई प्रतिस्पर्धा ही नहीं है. शाहरुख खान की प्रतिस्पर्धा तो आमिर खान व सलमान खान के साथ है. मेरी नजर में यदि दोनों फिल्में एक साथ आएंगी, तो कोई भी फिल्म 150 करोड़ से ज्यादा का व्यापार नही कर पाएंगी. क्योंकि सामान्यतः बाक्स आफिस पर तीन सौ करोड़ से अधिक का व्यापार नहीं होता है. शाहरुख खान अपनी फिल्म के लिए तीन सौ करोड़ का व्यापार चाहते होंगे. मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्यों अपनी फिल्म के व्यापार को सीमित करना चाहते हैं. मैं तो यही चाहूंगा कि टकराव नहीं होना चाहिए.’’

लेनोवो K6 पावर आज होगा लॉन्च

मिली जानकारी के मुताबिक लेनोवो K6 पावर को भारतीय ग्राहकों के लिए दिल्ली में एक भव्य इवेंट के दौरान लांच किया जाएगा. आपको बता दें कि इससे पहले यह स्मार्टफोन बर्लिन में आयोजित आईएफए 2016 ट्रेड शो में स्मार्टफोन के साथ लॉन्च हुआ था.

फोन में सबसे खास बात है इसकी बैटरी. इस फोन में 4000 mah की दमदार बैटरी दी गई है.

ये फोन डार्क ग्रे, गोल्ड और सिल्वर कलर वेरिएंट में लॉन्च किया गया था. इसे मेटल यूनिबॉडी डिजाइन के साथ बनाया गया है. यह स्मार्टफोन एंड्रायड 6.0 मार्शमैलो पर काम करता है. यह फोन 64 बिट स्नैपड्रैगन 430 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर से लैस है. ग्राफिक्स के लिए इसमें एड्रेनो 505 जीपीयू दिया गया है.

वहीं, अगर K6 स्मार्टफोन की बात करें तो इसमें 5.5 इंच फुल HD डिस्प्ले दिया गया है. दो वेरिएंट में आता है, पहला वेरिएंट 2 GB रैम/16 GB स्टोरेज से लैस है तो वहीं, दूसरा वेरिएंट 3GB/32GB स्टोरेज से लैस है. इसकी इंटरनल मेमोरी को माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए बढ़ाया जा सकता है.

इसमें 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया है. साथ ही 8 मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा भी दिया गया है.

‘इम्पावरमेंट ऑफ गर्ल चाइल्ड’ की बात करती है दंगल : आमिर खान

मिस्टर परफैक्शनिस्ट के रूप में मशहूर आमिर खान इन दिनों 23 दिसंबर को प्रदर्शित होने वाली अपनी फिल्म ‘‘दंगल’’ को लेकर काफी उत्साहित हैं. फिल्म ‘दंगल’ की शूटिंग के दौरान कैमरे के पीछे की कुछ हलचलों को लेकर ‘मेकिंग आफ दंगल’ नाम से एक वीडियो फिल्म बनायी गयी है. आमिर खान ने सोमवार को कुछ पत्रकारो को बुलाकर पहले यह वीडियो फिल्म दिखायी, उसके बाद उन्होंने वहां मौजूद सभी पत्रकारों के संग बात करते हुए पत्रकारों के सवालों के जवाब भी दिए..

फिल्म ‘‘दंगल’’ करने की वजह पर रोशनी डालते हुए आमिर खान ने कहा-‘‘मैंने यह फिल्म महज एक स्पोर्ट फिल्म होने के कारण नहीं की. फिल्म स्पोर्ट की हो या कोई और, कहानी महत्वपूर्ण होती है. इसकी कहानी कमाल की है. हम लोग यह मानकर चल रहे हैं कि यह फिल्म एक पहलवान की यानी कि एक कुश्ती लड़ने वाले इंसान की है. पर सही मायनों में यह फिल्म ‘इम्पावरमेंट ऑफ गर्ल चाइल्ड’ की बात करती है. तो दूसरे स्तर पर यह फिल्म देशभक्ति की बात करती है. तीसरे स्तर पर यह फिल्म पिता और बेटी के रिश्तों की दास्तान है. यह सारी बातें ह्यूमर के साथ फिल्म में पेश की गयी हैं. फिल्म के लेखक व निर्देशक नितीश तिवारी ने फिल्म का सुर बहुत अच्छा पकड़ा है.’’

फिल्म ‘‘दंगल’’ में नारी सशक्तिकरण की बात है, इसलिए आमिर खान चाहते हैं कि यह फिल्म टैक्स फ्री की जाए. इस बारे में पत्रकारों से बात करते हुए आमिर खान ने कहा-‘‘हमारी फिल्म ‘‘दंगल’’ नारी सशक्तिकरण की बात करती है. यह संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे, इसलिए मैं चाहता हूं कि ‘दंगल’ को टैक्स फ्री किया जाए. मेरी यह फिल्म टैक्स फ्री करने योग्य है. पर यह निर्णय तो हर राज्य सरकार को लेना है. हम फिल्म के प्रदर्शन से पहले टैक्स फ्री के लिए आवेदन करने वाले हैं, अब टैक्स फ्री होगी या नहीं, यह कह नहीं सकता.’’

फिल्म ‘‘दंगल’’ के किरदार के सुर को सही अर्थों में पकड़ने के लिए आमिर खान ने फिल्म की पटकथा को सबसे ज्यादा सहारा लिया. खुद आमिर खान ने कहा-‘‘यह फिल्म हरियाणा के कुश्तीबाज महावीर फोगट से प्रेरित है. इसलिए मैं महावीर फोगट से दो बार मिला. उनकी बेटियों गीता व बबीता से कई बार मिला. पर किरदार को तैयार करना, किरदार की समझ मुझे पटकथा से मिली. जब पटकथा पसंद आ जाए, तो उसके लिए वजन बढ़ाना हो या जो कुछ भी करना हम करने के लिए तैयार रहते हैं. पर मैं बार बार वजन नहीं बढ़ाउंगा. मेरे डाक्टरों ने भी ऐसा करने से मना किया है. अपने शरीर का वजन घटाना व बढ़ाना बहुत नुकसानदायक है. मगर कलाकार के तौर पर मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपने किरदारों के साथ न्याय करूं. इसलिए मुझे ऐसा करना होता है. पर मैं यह जानता हूं कि इस तरह से मैं अपने शरीर व स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा हूं. पर जब पटकथा पसंद आ जाए तो हम लाजिकली नहीं सोचते.’’

फिल्म ‘‘दंगल’’ में आमिर खान जवान के अलावा 55 साल के मोटे इंसान के रूप में नजर आने वाले हैं. फिल्म के निर्देशक नितीष तिवारी चाहते थे कि आमिर खान पहले जवानी वाले हिस्से की शूटिंग कर ले, उसके बाद वह वजन बढ़ाकर दूसरे हिस्से की शूटिंग करें. मगर आमिर खान ने उल्टा काम किया. उन्होंने पत्रकारों से कहा-‘‘फिल्म की शुरुआत उसकी रेसलिंग/कुश्तीबाजी से होगी. इस फिल्म में मेरे किरदार की अपनी एक यात्रा है. इस फिल्म में मेरा किरदार 30 प्रतिशत फिल्म में युवा है. उसके बाद 20 प्रतिशत में उसकी उम्र चालीस साल के आस पास है. और 50 प्रतिशत फिल्म में उसकी उम्र 55 साल है. 55 साल की उम्र में  वह मोटा होता है. 55 साल के मोटे इंसान वाले हिस्से को निर्देशक बाद में फिल्माना चाहते थे. पर मैने निर्देशक से कहा कि पहले वजन बढ़ा लेता हूं और मोटापा वाला हिस्सा पहले फिल्माते हैं. उसके बाद वजन घटाकर जवानी वाले हिस्से की शूटिंग कर लेंगे. अन्यथा मैं फिर वजन कम करने में आलस्य कर जाउंगा.’

जी हां! सामान्यतः आमिर खान का वजन 68 किलो रहता है. पर ‘दंगल’ के लिए उन्होंने 27 किलो वजन बढ़ाकर 95 किलो किया था. उसके बाद उन्होंने पांच माह का समय लेकर वजन कम किया. वजन बढ़ाने के बाद वजन को 95 किलो बरकरार रखने के लिए आमिर खान को अपने खानपान में काफी बदलाव करना पड़ा था. इस बारे में उन्होंने कहा- ‘‘पूरी तरह से शाकाहारी हो गया था. मछली, चिकन, मांस, अंडा सहित मांसाहारी भोजन छोड़ दिया था. दूध व दूध से बनने वाली हर चीज मसलन दही, पनीर आदि छोड़ दिया था. वजन 95 किलो के आस पास रहे, मेरा मोटापा बरकरार रहे, इसके लिए मैं सेवपुड़ी व समोसा खा रहा था. क्योंकि इनमें कैलरी ज्यादा होती है. चाकलेट या केक बहुत खाया.’’

वजन बढ़ाने से उन्हें तकलीफ भी हुई, पर अभिनय में उन्हें उसका फायदा भी मिला. इस बारे में पत्रकारों से चर्चा करते हुए आमिर खान ने कहा-‘‘जब मैंने अपना वजन 95 किलो किया, तो अपने आपको बीमार महसूस करने लगा था. उन दिनों मेरा हृदय 27 गुना ज्यादा पंपिंग कर रहा था. मेरी सांस लेने का अंदाज बदल गया था. पर यह सब मुझे अब फिल्म ‘दंगल’ के अपने किरदार के लिए करना पड़ा. उन दिनों थकावट बहुत जल्द आ जाती थी. मैं अपने जूतों के फीते बांधने के लिए झुकता, तो पेट रूकावट पैदा करता. जूते का फीता बांधते समय मेरा पेट दबता, जिसका असर मेरे फेफड़ों पर पड़ता. जिसकी वजह से एक जूते का फीता बांधने के बाद कम से कम बीस सेकंड तक मैं हांफता. उसके बाद ही दूसरे जूते का फीता बांधने की कोशिश करता. मैंने यह सब किया. मेरा मानना है कि जब हम किसी किरदार को निभाना चाहते हैं, तो उसके जैसा महसूस होना चाहिए. जैसे कि मैंने कहा कि मेरी श्वासन क्रिया बदल गयी थी. श्वासन क्रिया भी तो मेरी परफार्मेस का एक हिस्सा है. सांस लेने में तकलीफ परफार्मेंस में मेरी मदद करती थी. वजन बढ़ने के बाद बाडी लैंगवेज बदल जाती है’’.

‘‘दंगल’’ की मेकिंग देखने पर पता चलता है कि आमिर खान किसी भी सीन में सिक्स पैक में नहीं नजर आ रहे हैं. इस पर आमिर खान ने कहा-‘‘रेसलर कई तरह के होते हैं. हर रेसलर का सिक्स पैक होना जरुरी नहीं है. अखाड़े में रेसलिंग करने वाले रेसलर मिट्टी में लड़ते हैं और काफी बलशाली व मोटे होते हैं. मगर यदि आप सुशील कुमार जैसे रेसलर को देखेंगे तो यह सब सिक्स पैक वाले और एकदम फिट नजर आते हैं. भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले रेसलर विनेश फोगट, गीता फोगट, बबीता फोगट एकदम फिट नजर आएंगे. इनके शरीर पर चर्बी नजर नहीं आती. यदि मैं ‘मैट रेसलिंग’ का हिस्सा हूं और 70 किलो की प्रतियोगिता का हिस्सा हूं, जिसमें मेरे शरीर में 30 प्रतिशत चर्बी है, तो यह मेरी गति को धीमी करेगा. यहां मोटापा बेकार है. सभी ‘मैट रेसलर’ कम वजन के होते हैं.’’

फिल्म ‘‘दंगल’’ करने के बाद रेसलर यानी कि कुश्तीबाजी को लेकर उनकी सोच में आए बदलाव के संदर्भ में आमिर खान ने कहा-‘‘जब मैं रेसलिंग सीख रहा था, तब रेसलिंग को लेकर मेरी सोच, मेरा नजरिया बदला. ऐसा माना जाता है कि रेसलर कम या मंद बुद्धि के होते हैं, यह गलत सोच है. रेसलर को बहुत तेज दिमाग वाला होना चाहिए. एक सेकंड में उसे प्रतिक्रिया देनी होती है. यदि रेसलर बुद्धिमान नहीं है, तो वह अच्छा रेसलर बन ही नहीं सकता. सच कह रहा हूं कि मुझे यह समझ में आया कि कुश्ती पहलवान बनने के लिए शारीरिक ताकत ज्यादा महत्वपूर्ण नही होती है. इसमें एक्शन रिएक्शन और रिफलेक्शन तेजी से होना चाहिए.’’

यूं तो आमिर खान ने कृपाशंकर से कुश्ती की ट्रेनिंग ले रखी थी, फिर भी शूटिंग के दौरान उन्हे कई बार चोट लगी. इसे स्वीकार करते हुए आमिर खान ने कहा-‘ शूटिंग के दौरान कई जगह चोट लगी. जब मेरी पीठ में चोट लगी, तब डाक्टरों ने दो माह आराम करने के लिए कहा. हमारे पास इतना समय नहीं था, तो हमने दो सप्ताह आराम किया. उसके बाद भी हर दिन मुझे पेनकिलर लेना पड़ता था.’’

सलमान खान और आमिर खान के बीच अच्छे संबंध हैं. सलमान खान हमेशा सोशल मीडिया पर आमिर खान की फिल्मों को प्रमोट करते आ रहे हैं. आमिर खान को उम्मीद है कि सलमान खान ‘दंगल’ को भी प्रमोट करेंगे. फिल्म ‘‘दंगल’’ की मेंकिंग का वीडियो बाजार में लाते हुए आमिर खान ने कहा-‘‘मुझे यकीन है कि सलमान खान इस बार भी मेरी फिल्म को प्रमोट करेंगे. मुझे भी उनकी फिल्म को प्रमोट करना अच्छा लगता है. मैं अपनी फिल्म ‘दंगल’ उन्हे दिखाने के लिए बेताब हूं.’’

मगर आमिर खान अपनी फिल्म ‘‘दंगल’’ को प्रमोट करने के लिए सलमान खान के शो ‘‘बिग बॉस 10’’ में नहीं जाएंगे. इस बात को स्वीकार करते हुए खुद आमिर खान ने कहा-‘‘मैं अपनी फिल्मों को टीवी पर प्रमोट करना पसंद नहीं करता. इसलिए ‘दंगल’ को भी किसी भी टीवी शो में प्रमोट नहीं करुंगा. वैसे फिल्म के प्रोमो व विज्ञापन टीवी पर आएंगे. पर मैं खुद फिल्म को प्रमोट करने के लिए टीवी पर नहीं जाउंगा.’’

अमिताभ बच्चन के साथ ‘‘यशराज फिल्मस’’ की फिल्म ‘‘ठग्स आफ हिंदुस्तान’’ की शूटिंग शुरू करने के लिए आमिर खान इन दिनों अपने चेहरे पर दाढ़ी और बाल बढ़ा रहे हैं.

सुजोय को लगता है डर

‘कहानी’ फिल्म के बाद निर्देशक सुजोय घोष ‘कहानी 2’ को लेकर आये हैं, जो एक इमोशनल थ्रिलर फिल्म है. ये एक साधारण मां की कहानी है, जो बेटी के लिए कुछ भी कर सकती है. इस बार उन्हें अपनी पहली फिल्म की अपार सफलता को देखकर डर लग रहा है. इसे वे एक कठिन परीक्षा समझते हैं जिसकी पढ़ाई उन्होंने ठीक तरह से की है. रिजल्ट की अपेक्षा कर रहे हैं. फिल्म का प्रेशर इतना अधिक है कि उन्हें अभी फिल्म के अलावा कुछ नहीं दिख रहा है.

इसमें उन्होंने काफी बच्चों के साथ शूटिंग की है जो बहुत कठिन था. उन्होंने इसकी पूरी शूटिंग कोलकाता में की है, क्योंकि वे वही पर पले बड़े हुए हैं. इस फिल्म को बनाने के लिए उन्हें काफी सोचना पड़ा, ताकि पहली फिल्म की इज्ज़त बनी रहे. यह न तो सीक्वल है न ही बायोपिक लेकिन किसी फिल्म की कॉपी है कि नहीं यह तो फिल्म देखने के बाद ही पता चल पायेगा.

पिछली फिल्म कहानी के क्लाइमेक्स को जब आलोचकों ने इंग्लिश फिल्म ‘टेकिंग लाइव्स’ से लिया गया माना, सुजोय से इस बारे में पूछा तो उन्होंने स्पष्ट किया था कि न तो उन्होंने वह फिल्म देखी है न ही उन्हें इस बारें में पता है, बल्कि एक संयोग है. लेकिन इस बार इंटरव्यू के दौरान उन्होंने स्वीकार किया है कि कई बार कुछ फिल्म उन्हें प्रेरित करती हैं जिसकी झलक उनके फिल्मों में देखने को मिलती है. कहानी 2 को उन्होंने लिखा है और विद्या बालन को लीड में लिया है.

पहली बार शेयर बाजार में निवेश

शेयर बाजार से वारेन बफेट ने बेहिसाब मुनाफा कमाया है और नुकसान न के बराबर. कामयाबी का गुर उन से साझा करने की विनती की गई तो उन्होंने बताया, ‘‘मैं शेयर बाजार में निवेश नहीं करता बल्कि मैं तो बिजनैस में निवेश करता हूं. ’’

तात्पर्य यह था कि बफेट उन्हीं बिजनैस कंपनियों के शेयर खरीदते हैं जिन की उन्हें समझ है. इस के लिए वे उपलब्ध डाटा, रिपोर्ट और कंपनी की बिजनैस मैनेजमैंट टीम के बारे में पूरी जानकारी जुटा कर बारीकी से अध्ययन करते हैं. यही नहीं, वे बिजनैस मौडल को समझने पर ही निवेश करने की सोचते हैं.

शेयर बाजार में अलगअलग कंपनियों के नाम से शेयर होते हैं जो अलगअलग क्षेत्रों से सबंधित होती हैं. जैसे रियल एस्टेट, औयल, बैंकिंग, कंज्यूमर गुड्स, पावर, स्टील, संचार व मैटल आदि. यदि आप को पहले अपनी पसंद की कंपनी चुननी है तो सब से उस कंपनी के इतिहास को खंगालें और अच्छी तरह से उस कंपनी की बैलेंस शीट और टर्न ओवर के बारे में जांचपड़ताल कर लें. तभी निवेश के बारे में सोचें.

हालांकि यह बात काफी हद तक सही है कि बाजार के भविष्य के बारे में कोई भी नहीं बता सकता. परंतु उपलब्ध आंकड़े, तथ्य एवं अच्छे बिजनैस में पैसा लगा कर जोखिम को कम तो किया ही जा सकता है.

पहली बार अगर आप बाजार में निवेश करने की सोच रहे हैं तो सब से पहले यह पता करें कि बाजार की चाल क्या है. आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, कितने रिटर्न की चाहत रखते हैं. आप शौर्ट टर्म, मिड टर्म या फिर लंबे समय के निवेश की सोच रहे हैं.

ज्यादा रिटर्न, ज्यादा रिस्क

अधकचरे ज्ञान के साथ या फिर ब्रोकर के कहे अनुसार निवेश करना अक्लमंदी नहीं है. वैसे भी पहली बार निवेशक अधिक उत्साह में होता है. लगता है, कोई बनाए न बनाए, वह तो बाजार से पैसा बनाएगा ही. दुख की बात तब होती है जब रिटायर्ड आदमी अपनी तमाम जमापूंजी के साथ खिलवाड़ कर बैठता है. फिक्स्ड डिपौजिट की ब्याज दर घटती देख कर लोग चाहते हैं कि शेयर बाजार से बढि़या रिटर्न लें. ज्यादा रिटर्न, ज्यादा रिस्क.

राकेश झुनझुनवाला ने रातोंरात अत्यधिक मुनाफा कमाने की चाह रखने वाले व्यक्तियों को शेयर बाजार में निवेश न करने की सलाह दी है. उन का कहना है, ‘‘यह तो जुआ खेलने से ही संभव है. बाजार में निवेश लंबी अवधि, संयम एवं उतारचढ़ाव से न घबराने वाले लोगों को ही करना चाहिए.’’

पहली बार निवेश करने वाले निवेशकों को कम से कम इन बातों को जरूर ध्यान में रखना चाहिए-

– बाजार में उतारचढ़ाव आतेजाते हैं. शेयर में गिरावट आने पर घबरा कर तुरंत पैसा निकालने से पहले दस बार सोचें.

– अगर आप ने लंबी अवधि के लिए निवेश किया है तो मासिक या वीकली रिपोर्ट पर ही गौर करें. रोजरोज शेयर की घटतीबढ़ती दरों को देख कर परेशान न हों.

– मार्केट कैपिटलाइजेशन यानी पूंजीकरण के हिसाब से अधिक बड़ी कंपनियों में निवेश शुरुआती दौर में ठीक है. दरअसल, आप का पहला फोकस अपनी पूंजी को गंवाना (किसी भी हाल में) नहीं होना चाहिए.

– अगर लाभ नहीं भी मिले तो पूंजी हर हाल में सुरक्षित रहे. ऐसा सोच कर निवेश करें.

– निवेश से पहले ईपीएस यानी (अर्निंग पर शेयर) जरूर देखें.

– बुक वैल्यू/शेयर जरूर देखें. बुक वैल्यू अच्छी होनी चाहिए.

– ऋण इक्विटी अनुपात यानी डैब्ट इक्विटी रेशियो जरूर देखें. यह जितना निम्न हो, उतना बढि़या है.

– वर्तमान संपत्तियों/ वर्तमान देनदारियों का वर्तमान अनुपात देख कर ही निवेश करने की सोचें.

– ध्यान दें कि 1 साल से कम पैसा निकालने पर शौर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है. इस की दर 15 प्रतिशत है.

– डीमैट अकाउंट की मैंटेनैंस फीस हर बैंक या संस्था की अलग होती है. कुछ बैंक पहले वर्ष कोई फीस नहीं लेते परंतु दूसरे या तीसरे वर्ष उन की फीस में काफी बढ़ोतरी हो जाती है.

– अगर आप सिर्फ म्यूचुअल फंडों में निवेश करना चाहते हैं तो बिना डीमैट अकाउंट खोले भी कर सकते हैं.

– बैंक बेहद कम चार्ज ले कर म्यूचुअल फंडों में निवेश की सुविधा देते हैं. कुछ बैक प्रोसेसिंग फीस भी चार्ज नहीं करते. इन सब के बारे में अच्छी जानकारी लेने के बाद ही निवेश करें. निवेश करने से पहले ब्रोकरेज के बारे में भी पता कर लें. पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही आगे बढ़ें.

– यह जरूर ध्यान में रखें कि बाजार की चाल कोई नहीं जान सकता.

उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए निवेश करें. साथ ही बाजार में फैली अफवाहों और दोस्त, रिश्तेदारों या ब्रोकरों के बताए टिप्स से दूर ही रहें तो अच्छा है. नियमित रूप से बाजार के बारे में जानकारी हासिल करते रहें. शुरुआत हमेशा कम पूंजी से करें ताकि ज्यादा नुकसान न हो. बाजार को कई बार बड़ेबड़े खिलाड़ी भी भांप नहीं पाते हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है.

निवेशक के अधिकार

– हर क्लाइंट का अलग यूनीक क्लाइंट कोड होता है.

– केवाईसी की कौपी एवं अन्य दस्तावेज.

– निवेश या व्यापार सिर्फ आप के यूनीक क्लाइंट कोड के साथ ही करें.

– फंड एवं सिक्युरिटीज समय से प्राप्त करने का अधिकार.

– शुल्क या किसी भी अन्य कटौती का विवरण जानने का अधिकार.

– कंपनी के विरुद्ध शिकायत का अधिकार.

– अकाउंट के सैटलमैंट का अधिकार.

क्रैडिट कार्ड में सेंध से सावधान

क्रैडिट कार्ड के जरिए होने वाली धोखाधड़ी इन दिनों चरम पर है. यह बहुत आसानी से मगर बिना शोर के किया जाने वाला शातिराना अपराध है. जब तक आप को इस अपराध की भयावहता का पता चलता है तब तक आप लुट चुके होते हैं. यह एक इलैक्ट्रौनिक उपकरण, जिस का आकार आप की हथेली से बड़ा नहीं है, के जरिए होता है. इस छोटे से उपकरण का नाम स्किमर है. फिलहाल यह स्किमर पूरी दुनिया में कहर बरपाए हुए है.

आप नियमित क्रैडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो एक बात गंभीरता से समझ लीजिए कि जब भी आप अपना क्रैडिट कार्ड भुगतान करने के लिए किसी को देते हैं या फिर किसी एटीएम मशीन में डालते हैं तो आप स्किमिंग नामक अंतर्राष्ट्रीय अपराध का शिकार बनने की जद में होते हैं या दूसरे शब्दों में इस अपराध के जोखिम जोन में होते हैं. एक बार यदि आप का कार्ड क्लोन कर लिया गया तो आप का सारा पैसा किसी दूसरे देश में खाली कर दिया जाएगा.

पश्चिमी देशों की तरह अब यह अपराध भारत में भी धड़ल्ले से हो रहा है. हर वह भारतीय जिस के पास क्रैडिट कार्ड है, कभी भी और कहीं भी इस लूट का शिकार बन सकता है. कैसे? आइए जानते हैं.

क्रैडिट कार्ड का एक शातिर अपराधी चेन्नई में एचडीएफसी बैंक के इर्दगिर्द सक्रिय था. पूरे शहर में इस बैंक की कई एटीएम मशीनें हैं. हर दिन हजारों लोग इन एटीएम सैंटर में आते हैं और नकदी निकाल कर चले जाते हैं. लेकिन एक रात कुछ अलग हुआ. चेन्नई पुलिस इस शख्स की ताक में थी और आखिरकार उस ने उसे दबोच लिया. यह शख्स था 38 वर्षीय म्यांमार का नागरिक गुणशेखरन. गुणशेखरन पुलिस द्वारा तब धरा गया, जब वह एचडीएफसी के एक एटीएम से पैसे निकाल रहा था. गिरफ्तारी के दौरान उस के पास से 43क्रैडिट कार्ड बरामद हुए जिन के माध्यम से वह 4 करोड़ रुपया निकालने की जुगत में था.

रोजाना सूरज ढलने के बाद गुणशेखरन कई इंटरनैशनल क्रैडिट कार्ड इस्तेमाल कर कई एटीएम से पैसा निकालता था. ये विदड्रौल एकदूसरे से कुछ ही सैकंड के अंतराल पर होते थे. ऐसा लगता था कि एक ही व्यक्ति एटीएम से अलगअलग कार्ड इस्तेमाल  कर पैसा निकाल रहा है. इस से बैंक का धोखाधड़ी प्रकोष्ठ हरकत में आ गया.

एचडीएफसी बैंक के रिस्क कंट्रोल विभाग के अधिकारी महेश राजारमन के अनुसार, किसी भी ग्राहक के लेनदेन पर नजर रखने की आंतरिक व्यवस्था है. यह व्यवस्था किसी भी संदिग्ध लेनदेन को स्वत: अच्छी तरह से जांचने लगती है. लिहाजा, जब बैंक अधिकारी पुलिस को खबर करने की दिशा में सोच रहे थे, तब भी ये लेनदेन जारी रहे. सारे विदड्रौल एक दिन की सीमा के भीतर यानी 15 हजार से कम ही होते थे. लेकिन जब वे 5 लाख तक पहुंचने लगे, तब बैंक वालों ने पुलिस को बुलाना तय किया. पुलिस ने इलाके के सारे एटीएम के सिक्योरिटी गार्ड को ऐसे व्यक्ति पर नजर रखने को कहा जो रात को आता हो और जरूरत से ज्यादा देर तक एटीएम में रुकता हो.

सानथोमे रोड, चेन्नई के बाहरी इलाके में, शहर से कार द्वारा आधे घंटे की दूरी पर है. एक रात गुणशेखरन इस एटीएम में घुसा और अलगअलग कार्डों के जरिए पैसा निकालने लगा. पुलिस ने तभी उसे रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया. मजेदार बात तो यह है कि पुलिस को उस के बारे में कोई खास जानकारी हासिल नहीं हुई. उस ने पुलिस को बताया कि वह तो महज निर्देशों का पालन कर रहा था. अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का दायरा पुलिस की सोच से कहीं अधिक लंबा था. उस ने बताया कि उसे वे सारे कार्ड ब्रिटेन के किसी गिरोह ने दिए थे.

जब चेन्नई पुलिस ने ब्रिटिश पुलिस से संपर्क किया तो पुलिस के हाथों के तोते उड़ गए. पुलिस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि मामला इतना गहरा होगा. इंगलैंड के धोखाधड़ी निरोधक दस्ते के कौर्पोरेट कम्युनिकेशन एग्जीक्यूटिव मार्क बावरमैन के अनुसार, ‘‘ये जालसाज एक उपकरण का प्रयोग करते हैं जो एटीएम मशीन के कार्ड स्लौट के ऊपर फिट हो जाता है. इस कारण जैसे ही आप का कार्ड इस स्लौट से गुजरता है, उस उपकरण की चिप, कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप को पढ़ लेती है. उसी समय एक अति सूक्ष्म कैमरा, उस की-बोर्ड पर भी फिट होता है, जहां आप अपना पिन नंबर टाइप करते हैं. इस तरह जब कई लोग अपने कार्ड स्वाइप कर चुके होते हैं तो ये धोखेबाज उपकरण निकाल कर अपने कारखाने में चले जाते हैं और मूल क्रैडिट कार्डों की क्लोनिंग तैयार कर लेते हैं.’’

बैंकों की निगरानी

इस से पता चलता कि गुणशेखरन मात्र एक बिचौलिया था. चेन्नई पुलिस का मानना है कि वह अकेला नहीं है. पुलिस द्वारा रात के ऐसे पंछियों पर अब नजर रखी जाने लगी है. कई बैंकों की खुद की एक निगरानी व्यवस्था है जो ग्राहक द्वारा क्रैडिट कार्ड के इस्तेमाल पर नजर रखती है और जरा सा भी असामान्य व्यवहार उन्हें सावधान कर देता है. आईसीआईसीआई बैंक के जनरल मैनेजर राजीव सब्बरवाल कहते हैं, ‘‘हम लोग हमेशा असामान्य गतिविधि की ताक में रहते हैं. यदि हम पाते हैं कि किसी ने ग्रौसरी स्टोर में 25 हजार रुपए खर्च कर दिए हैं, तो हमारे लिए यह असामान्य गतिविधि है.’’

लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अपराधों को काफी आसानी से अंजाम दिया जा सकता है. इसलिए ये चिंता का विषय हैं. सूचना प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ विजयमुखी का कहना है, ‘‘मुझे तब फिक्र होती है जब मैं अपना कार्ड, जनरल मैनेजर के स्तर के किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि किसी वेटर को देता हूं. मेरा कार्ड स्वाइप करने में उसे सिर्फ एक मिनट लगता है और अपराध किस जगह पर हुआ, यह जानने का मेरे पास कोई तरीका नहीं है.’’

कई गिरोह हैं सक्रिय

अभी तक तो खबरें यही थीं कि विदेशों में क्रैडिट कार्डों का दुरुपयोग करने वाले कई गिरोह सक्रिय हैं लेकिन अब भारत भी बड़ी तेजी से उन का चारागाह बनता जा रहा है. अब होता यह है कि कार्ड दूसरे देशों में नकल किए जाते हैं और उन का उपयोग भारत में होता है. यह बात उपरोक्त घटना के ठीक 2 दिनों बाद मुंबई में खूकीशेंग नामक एक मलयेशियाई नागरिक की गिरफ्तारी से साबित हुई. खूकीशेंग शहर में जम कर खरीदारी कर रहा था. उस ने कई पांचसितारा होटलों, मौल और ज्वैलरी स्टोर्स में क्लोन किए हुए क्रैडिट कार्डों के जरिए खासी खरीदारी की. खूकीशेंग की उम्र 39 साल है. लेकिन यह किसी को नहीं मालूम कि वह भारत में आया कब? एक मात्र उपलब्ध जानकारी उस तारीख की है जिस दिन उस ने क्रैडिट कार्ड से पहली खरीदारी की. मुंबई पुलिस के उपायुक्त अमिताभ गुप्ता के अनुसार, खूकीशेंग के पास भी 40 फर्जी क्रैडिट कार्ड और उन से खरीदी हुई ज्वैलरी व दूसरे सामान बरामद हुए.

शहर में आने के कुछ समय बाद खूकीशेंग अपने एक साथी चेलिंगकिम के साथ हयात रेजेंसी होटल में ठहरा और इन दोनों ने काम को अंजाम देना शुरू कर दिया. उन्होंने अपना निशाना बनाया ज्वैलरी स्टोर्स, शौपिंग मौल्स और पांचसितारा होटलों को. थोड़े ही समय में उन की खरीदारी का बिल 17 लाख रुपए तक जा पहुंचा. इस बीच वे इतना जरूर ध्यान रखते थे कि अधिकतम क्रैडिट लिमिट के नीचे ही खरीदारी हो. फिर भी खरीदारी कम से कम रकम 40 हजार के करीब होती थी.

खूकीशेंग मुंबई के एक उपनगर के जानेमाने ज्वैलरी स्टोर में घुसा. यहां उस ने 70 हजार रुपयों की एक सोने की चेन पसंद की. दुकानदार ने जब कार्ड स्वाइप किया तो भुगतान खारिज हो गया. इस से पूरी तरह अविचलित खूकीशेंग ने दूसरा कार्ड थमाया जो कारगर रहा. लेकिन अनजाने में वह एक गलती कर बैठा था. खूकीशेंग द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे क्रैडिट कार्ड की गतिविधियों से हौंगकौंग ऐंड शंघाई बैंकिंग कौर्पोरेशन ने उस खाते की निगरानी शुरू कर दी थी. उन्होंने तुरंत दुकानदार को फोन कर बताया कि क्रैडिट कार्ड संदिग्ध होने की वजह से वह लेनदेन गलत  था.

फिर पुलिस ने खूकीशेंग के लिए एक जाल बिछाया. उन्होंने उक्त ज्वैलर से बात की और उन से कहा कि अगर ग्राहक वापस आता है तो वह उन्हें खबर करें. उन्हें ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा. खूकीशेंग फिर आया लेकिन इस दुकान पर नहीं, अगली दुकान पर. पुलिस तो ताक में थी ही. खूकीशेंग पकड़ा गया लेकिन उस का साथी भाग निकला. पुलिस यह देख कर हैरान रह गई कि खूकीशेंग के पास से बरामद क्रैडिट कार्ड जरमन, कनाडाई और ब्रिटिश नागरिकों के थे. इस से जाहिर हुआ कि खूकीशेंग ने वैसी ही थोक के भाव खरीदारियां दूसरे देशों में भी की थीं.

लेकिन खूकीशेंग के पास इतने क्रैडिट कार्ड आए कहां से? पूछताछ के दौरान खूकीशेंग ने बताया कि वह मलयेशिया के एक होटल में मैनेजर था. उस होटल के अधिकांश ग्राहक अंतर्राष्ट्रीय टूरिस्ट थे. उन में से एक अधिकतर भुगतान क्रैडिट कार्ड से करता था. वहीं पर खूकीशेंग के दिमाग में कीड़ा कुलबुलाया. बस, उस ने उस छोटे से इलैक्ट्रौनिक उपकरण का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. सिर्फ एक मिनट का खेल था.  क्रैडिट कार्ड फ्रौड के इस नवीन युग में इस उपकरण को ‘स्किमर’ कहा जाता है. स्किमिंग की इस प्रक्रिया में होता यह है कि जब क्रैडिट कार्ड इस में से गुजरता है तो उस के पीछे की मैग्नेटिक स्ट्रिप इस उपकरण के भीतर की चिप द्वारा पढ़ ली जाती है. बाद में आप इसे अपने पर्सनल कंप्यूटर पर ट्रांसफर कर सकते हैं और मूल स्ट्रिप की क्लोनिंग भी कर सकते हैं. लिहाजा, जब भी कोई भोलाभाला टूरिस्ट भुगतान की खातिर अपना क्रैडिट कार्ड खूकीशेंग को देता, खूकीशेंग उसे अपने स्किमर में उतार लेता.

बैंकों की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में स्किमर का प्रयोग अभी शुरुआती दौर में ही है. लेकिन बैंकों को चिंता हो चली है. खासतौर पर जब कुलजीत जैसे भारतीय, कोड को क्रेक कर चुके हों. कुलजीत लखनऊ में एक ट्रैवल एजेंसी चलाता था. लेकिन उस के इरादे ट्रैवेल प्लान से कहीं अधिक ऊंचे थे. कुलजीत और उस के साथी के पास बाहरी एजेंसियों से इंटरनैशनल क्रैडिट कार्ड के नंबर आ जाते थे जिन का इस्तेमाल वह हवाईजहाज के टिकट बुक करने के लिए करता था.

फिर वह टिकट बेच कर मिली हुई रकम अपने करंट अकाउंट  में ट्रांसफर कर देता. 18 दिनों में कुलजीत के खाते में 15 लाख रुपए जमा हो गए. इस से बैंक अधिकारियों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को खबर कर दी. 2 अप्रैल, 2015 को कुलदीप सलाखों के पीछे पहुंच गया. अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कुलदीप ने स्किमर का इस्तेमाल किया था?

बहरहाल, इन सब उदाहरणों का मकसद आप को इस बात से सावधान करना है कि मात्र एक स्वाइप से आप के कार्ड की सुरक्षा में सेंध लगाई जा सकती है. धोखाधड़ी होने के बाद कोई भारतीय उपभोक्ता क्या कर सकता है, इस दिशा में अभी बहुतकुछ किया जाना बाकी है.

अर्नेस्ट ऐंड यंग के पार्टनर सुनील चंदीरमानी का कहना है कि धोखाधड़ी साबित करने का दारोमदार कार्डधारक का ही है. उसे ही साबित करना होता है कि लेनदेन वाकई धोखाधड़ीपूर्ण है.     

–  क्रैडिट कार्ड को आंखों से ओझल न होने दें.

– अपना पिन नंबर किसी को भी किसी भी सूरत में न दें

– अगर आप इंटरनैट पर लेनदेन कर रहे हैं तो सब से कम क्रैडिट लिमिट वाले कार्ड का इस्तेमाल करें.

जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप में नहीं खेलेगा पाकिस्तान

पाकिस्तान की पुरुष जूनियर हॉकी टीम भारत में होने वाले जूनियर हॉकी टीम वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लेगी. वर्ल्ड कप इसी साल उत्तर प्रदेश में होना है. पाकिस्तान की टीम वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं ले पाएगी क्योंकि उसने खिलाड़ियों के लिए वीजा के लिए आवदेन आधिकारिक समय सीमा के बाद किया था. पाकिस्तान की हॉकी टीम ने 4 दिसंबर को भारत में आना तय किया था.

इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (एफआईएच) ने कहा कि मलेशिया की जूनियर पुरुष टीम 8 से 18 दिसंबर तक लखनऊ में खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान की जगह लेगी.

एफआईएच ने एक बयान में कहा, 'फेडरेशन को इस बात का अफसोस है कि पाकिस्तान की पुरुष जूनियर टीम इस साल उत्तर प्रदेश में होने वाले हॉकी जूनियर वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं ले पाएगी, हालांकि इस टीम ने आधिकारिक रूप से टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई किया था.'

डिजिटल लाइफ सेफ्टी है बेहद जरूरी

पूरी दुनिया अब बस एक क्लिक में समा गई है. सिर्फ एक क्लिक और आप जो चाहें आपके सामने हाजिर. कम्यूनिकेशन, बैंकिंग, शॉपिंग, रिसर्च, गेमिंग और समाचार पढ़ने समेत कई सारे काम हम ऑनलाइन करने लगे हैं. इंटरनेट के बिना जिंदगी की कल्पना करना अब संभव भी नहीं. इससे चीजें जितनी सुविधाजनक हुई हैं, खतरे भी उतने ही बढ़ गए हैं.

साइबर ठग आपके क्रेडिट कार्ड या बैंक अकाउंट की जानकारी चुराने की ताक में बैठे रहते हैं. वे आपकी आइडेंटिटी, पर्सनल डीटेल्स, ईमेल अकाउंट्स और तस्वीरों वगैरह को चुराना चाहते हैं. इस सब से बचना बेहद जरूरी है वरना आप तबाह भी हो सकते हैं. जानें, क्या कैसे सावधानी बरतनी चाहिए…

1. अपने वेबकैम को ढककर रखें

जब आप अपने वेबकैम को इस्तेमाल न कर रहे हों, इसे ढककर रखें. इस तरह से हैकर्स उस कैमरे को हैक करके आपके ऊपर नजर नहीं रख पाएंगे. माइक को भी ऑफ करने में ही भलाई है. ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब हैकर्स ने वेबकैम या माइक के जरिए जासूसी की है.

2. मेसेज को एनक्रिप्ट करें

एनक्रिप्शन में डेटा को कुछ इस तरह से बदला जाता है बीच में उसे कोई भी ऐक्सेस नहीं कर पाता. सिर्फ रिसीवर ही उसे डीकोड कर पाता है. उदाहरण के लिए वॉट्सऐप एंड-टु-एंड एनक्रिप्शन सपॉर्ट करता है. दो यूजर्स के बीच क्या बात हो रही है, इसे बीच में कोई भी नहीं पढ़ सकता.

3. https everywhere ब्राउजर प्लगइन यूज करें

यह प्लगइन सुनिश्चित करता है कि आप सुरक्षित ढंग से वेबसाइट्स ब्राउज करें. यह वेबसाइट से आपके कनेक्शन को एनक्रिप्ट कर देता है. इसका मतलब हुआ कि कोई हैकिंग या सर्विलांस नहीं कर सकता.

4. पीसी की हार्ड ड्राइव के लिए लॉकर

अगर कोई आपके कंप्यूटर का ऐक्सेस लेता है, वह आराम से उसमें मौजूद फाइल्स को भी ऐक्सेस कर सकता है. अगर फाइल्स एनक्रिप्ट की गई होंगी तो ऐसा नहीं किया जा सकता. आप FileVault या BitLockerLuckily का इस्तेमाल करके अपने पीसी की हार्ड ड्राइव को लॉक कर सकते हैं.

5. ईमेल के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन

अगर आपके ईमेल अकाउंट को किसी नए डिवाइस से ऐक्सेस किया जाता है तो आप सेकंडरी सिक्यॉरिटी लेयर सेट कर सकते हैं. इससे इनबॉक्स को ऐक्सेस करने के लिए आपको अपने फोन पर एक टेक्स्ट मेसेज मिलेगा, जिसमें कोड होगा. उस कोड को डालने पर ही आप इनबॉक्स ऐक्सेस कर पाएंगे. सोशल मीडिया अकाउंट्स के लिए भी ऐसी सेटिंग्स की जा सकती हैं.

6. प्राइवेट वेब ऐक्टिविटी

अगर आप क्रोम या अन्य किसी ब्राउजर पर इनकॉग्निटो या प्राइवेट मोड ऑन करके कुछ सर्फ करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि किसी को कुछ पता नहीं चल रहा. आपकी कंपनी, वेबसाइट्स और इंटरनेट प्रोवाइडर्स भी आपकी ब्राउजिंग पर नजर रख सकते हैं. ऐसे में आप Tor नाम का ब्राउजर इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसपर प्राइवेट वेब ऐक्टिविटी की जा सकती है.

7. पासवर्ड्स के लिए पासवर्ड

नया पासवर्ड सेट करने के लिए कॉम्बिनेशन बनाना बहुत ही असुविधाजनक और परेशान कर देने वाला काम है. पासवर्ड मैनेजर्स की मदद से आप एक मास्टर पासवर्ड की मदद से कई सारे पासवर्ड्स को स्टोर कर सकते हैं. मास्टर पासवर्ड को बदलने रहने के लिए कैलंडर रिमाइंडर सेट किया जा सकता है.

बैंकिंग में महिलाओं की बढ़ती रुचि

कुछ दशक पहले तक बैंकों से केवल पुरुषवर्ग ही जुड़ा रहता था. व्यक्ति चाहे वह व्यवसायी हो या नौकरीपेशा, अपना या अपनी फर्म का खाता बैंक में खुलवाता था तथा स्वयं ही उस का संचालन करता था. महिलाओं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की पहुंच बैंक तक थी ही नहीं और न ही उन्हें बैंक से जुड़ी किसी प्रक्रिया की जानकारी थी. आज परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है. लड़कियां और महिलाएं न केवल अपने खाते बैंकों में खुलवा रही हैं बल्कि उन्होंने बैंकिंग प्रक्रिया को समझा भी है. यही नहीं, बड़ी संख्या में महिलाएं बैंकों में नौकरी भी करने लगी हैं. जाहिर है, इन सब से महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता में वृद्घि हुई है.

पहले पुरुष ही अपने नाम से बैंकों में बचत खाते खुलवाते थे. यदि वे अपनी पत्नी या बेटी के नाम से खाते खुलवाते भी थे, तो उन का संचालन वे स्वयं ही करते थे. महिलाओं को बैंक में प्रवेश करने में शर्म व झिझक होती थी. लेकिन पिछले 10 सालों में ही बैंकों में बचत खाते खोलने वाली महिलाओं की संख्या में तीनगुना वृद्घि हुई है.

देश में 13 राज्यों में महिलाओं से जुड़े 8 मुद्दों का 114 पैमानों पर एक सर्वे हुआ, जिस में एक मुद्दा बैंक में बचत खाते से संबंधित भी है. सर्वे के मुताबिक, 2005-06 की तुलना में 2015-16 में बैंक में बचत खाता खुलवाने वाली 15 से 49 वर्ष की महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्घि हुई है. इस मामले में 82.8प्रतिशत के साथ गोवा की महिलाएं सब से आगे हैं. यदि प्रतिशत की बात करें तो इस हिसाब से सब से ज्यादा 400 प्रतिशत बढ़ोतरी मध्य प्रदेश में दर्ज की गई.

आज महिलाओं के न केवल बैंकों में खाते हैं, बल्कि वे नैटबैंकिंग या ई बैंकिंग का इस्तेमाल भी कर रही हैं. अधिकांश खातेदार महिलाओं के पास अपने एटीएम कार्ड भी हैं, जिन से वे जब चाहे अपनी जरूरतों के मुताबिक धनराशि निकाल लेती हैं.

लड़कियों में बैंकिंग के प्रति रुझान उस समय शुरू हो जाता है जब वे स्कूलकालेजों में पढ़ती हैं. तरहतरह की सरकारी छात्रवृत्ति योजनाएं तथा अन्य हितग्राही योजनाओं की राशि या तो सीधे उन के खाते में जमा होती है या फिर उन्हें चैक से भुगतान किया जाता है. दोनों ही स्थितियों में बैंकों में खाता होना जरूरी है. बड़ी हो कर जब वे किसी नौकरी या पेशे को जौइन करती हैं तो भी उन्हें नकद के बजाय बैंकों के माध्यम से खाते में ही भुगतान किया जाता है. इस कारण भी वे अपना खाता बैंक में खुलवाने लगी हैं.

कुछ दशक पहले तक महिलाओं को बैंक की पर्चियां भरना तक नहीं आता था. बात चाहे रुपए या चैक जमा करने की हो या रुपए निकालने की, पर्चियां या फौर्म भरने के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था. वे अपना अंगूठा लगाती थीं या अधिक से अधिक अपने दस्तखत कर देती थीं. लेकिन शिक्षा के प्रचारप्रसार और महिलाओं में बढ़ती जागरूकता के कारण वे बैंकिंग प्रक्रिया में माहिर हो चुकी हैं. उन्हें अब कोई मूर्ख नहीं बना सकता है.

पहले महिलाएं अपने रुपए, पैसे या गहने या तो घर की तिजोरी में रखती थीं या फिर अपने खेत या घरों में गाड़ कर छिपा देती थीं लेकिन आज वे अपने रुपएपैसे बैंक में जमा कराने लगी हैं तथा गहने बैंक लौकर में रखती हैं. उन्हें बैंक के लौकर का संचालन भी भलीभांति आने लगा है और अब वे स्वतंत्र रूप से अकेली बैंक लौकर का संचालन करती हैं.

बैंक से ऋण या कर्र्ज लेने की प्रक्रिया से भी आज की महिलाएं अनजान नहीं हैं, क्योंकि उन्हें स्वरोजगार आदि के लिए कर्ज की आवश्यकता होती है. महिलाएं अपनी बचत को मियादी जमा, आवर्ती जमा आदि में भी रखने लगी हैं. इस कारण उन्हें विभिन्न तरह के खातों से रूबरू होना पड़ता है.

आज किसी भी महिला को बैंक की दहलीज पर जाने में घबराहट नहीं होती और वे सहज रूप से बैंक में प्रवेश कर अपना आर्थिक लेनदेन कर सकती हैं. बैंकों में कार्यरत महिलाकर्मी पुरुषों से बेहतर काम करती हैं. इन सब बातों से स्पष्ट है कि आज की महिलाएं स्मार्ट ही नहीं, दबंग भी हैं. 

किस के पास नहीं है नोटबंदधन

इंदिरा गांधी ने जब अमीरों पर बैंकों का सरकारीकरण कर प्रहार किया था तो देशभर में गरीबों के चेहरों पर मुसकान दौड़ गई थी. इंदिरा गांधी को 1971 के चुनावों में भारी लाभ मिला था पर 1973 तक उन का जादू गायब हो गया था. नोटबंदी इंदिरा गांधी के 1969 के बैंकों के सरकारीकरण जैसी अमीरों की जेब से कालाधन निकालने की तरकीब साबित होती है या इंदिरा गांधी के 1975 में देश को डराने व जनसंख्या पर काबू पाने के लिए दोहरे मतलब से लागू की गई नसबंदी, यह अब केवल अनुमान नहीं रह गया है, परिणाम भी दिखने लगा है.

नोटबंदी का खयाल जितना अच्छा है, व्यवहार में यह उतना ही खतरनाक है. हर आतंकवादी को गोली मार दो कहना आसान है पर असल में आतंकवादी कोई लंबे कान लिए तो नहीं घूमता कि उसे पकड़ा और मार डाला. कालेधन वाले भी इसी तरह विशेष लोग नहीं होते. जिसे सरकार कालाधन कहती है वह किस के पास नहीं है? हर पैसा जिस पर बारबार टैक्स नहीं दिया गया हो कालाधन हो जाता है. एक फैक्टरी में ओवरटाइम करने वाला मजदूर जिसे नकद पैसा दिया गया हो, कालाधन रखता है, हर कुली जिसे सामान उठवाने वाले ने काले पैसे से पैसे दिए, कालाधन रखता है, हर रेस्तरां जहां बिल भी कटता है वहां दी गई टिप कालाधन है. यह हर देश की अर्थव्यवस्था में हरेक के पास होता है, अमीर से ले कर गरीब तक के पास होता है.

नोटबंदी से हर पैसा काला हो जाता है, यहां तक कि वह भी जो बारबार का टैक्स दे कर कमाया गया हो. बैंकों में रखे पैसे के अलावा हर नोट, चाहे किसी के पास हो सरकार ने 8 नवंबर को काला घोषित कर दिया और 120 करोड़ जनता आज कालेधन के साए में है, कालेधन की गुनहगार है.

सरकार ने उसे सजा भी दे दी है. चलो लाइनों में लग जाओ. पहले माह किसी को भी 15,000-20,000 मिलेंगे, बाकी सब एक तरह से जब्त क्योंकि उन का कुछ नहीं हो सकता, कुछ खरीदा नहीं जा सकता.

जिन्होंने अरबों हों या महज 1,000-2,000 रुपए कहीं उठा कर रख रखे थे सब काले हो गए. रातोंरात सरकार ने देश की 120 करोड़ जनता को गुनहगार बना दिया और मजेदार बात यह है कि इस देश में भक्तों की कमी नहीं जो इस अपराधीकरण पर तालियां बजाने से चूकते नहीं हैं.

कालाधन बुरा है, चाहे वह कमा कर, पर टैक्स न दे कर रखा गया हो, रिश्वत का हो, लूट का हो या छीन कर लाया गया हो. कालाधन समाज को खोखला बनाता है क्योंकि उस पैसे को ज्यादा आसानी से बरबाद किया जाता है. विलासिता पर खर्च होने वाला पैसा ज्यादातर काला ही होता है. हालांकि बड़ी गाडि़यां, होटलों में महंगे कमरे, हवाईर् यात्राएं सफेद पैसे से ही की जा सकती हैं, काले से नहीं.

नोटबंदी पर भाजपा खुश हो रही है पर एक बड़ी जनता आंसू बहाएगी जब 4-5 माह बाद उन्हें घर में रखे छिपे 500 व 1000 के नोट दिखेंगे. हर नोट मुंह चिढ़ाएगा. 4-5 माह बाद जब अनजान अथवा बूढ़े अपने पुराने नोट ले कर कुछ खरीदने जाएंगे तो उन्हें पता चलेगा कि सरकार ने अमीर कालापतियों के साथ उन पर भी जहर छिड़क दिया है.

नोटबंदी पर वे खुश हो रहे हैं जो अमीरों के प्रति गहरी ईर्ष्या व गुस्से का भाव रखते हैं पर वे यह भूल रहे हैं कि एक अमीर जिस ने पिछले 20-30 सालों में पैसा कमाया है फिर कमाएगा और फिर टैक्स नहीं देगा और फिर कालाधन जमा करेगा.

कालाधन सिर्फ नोटों में नहीं होता और नोट काला नहीं होता, इस मूल सिद्धांत को भुला कर जनता को जो सजा दी गई है वह जमीदारों वाली सजा है जो दलितों में से एकदो के विद्रोह को कुचलने के लिए पूरी बस्ती में आग लगा देते हैं. आज भी दलित बस्तियों पर पंपों से पैट्रोल छिड़क कर आग लगा दी गई के मामले सुनने में आते हैं. सरकार ने पूरी जनता को गुनहगार मान लिया और हरेक की संपत्ति जब्त कर ली. अब थोड़ीथोड़ी कर के महीनों तक वापस पाओ. काम के घंटों में लाइनों में खड़े हो. नोटबंदी कालाधन समाप्त करने का मूर्खतापूर्ण तरीका है, यह इसी से साबित है कि लोग नए नोटों की कालाबाजारी में लग गए हैं.

नोटबंदी नागरिकों के जीवन के मौलिक अधिकारों पर प्रहार है. यह उन की संपत्ति छीनना है. उन्हें बिना बात गुनहगार मानना है, उन्हें लाइनों में खड़ा करने की सजा देना है और वह भी बिना कुसूर के. नोटबंदी से न पुलिस नाके पर पैसे लेने बंद करेगी, न कर जमा करने वाले ऊपरी पैसा ले कर कम टैक्स वसूलना छोड़ेंगे. बस अब यह सब नए नोटों में होगा.

पुराने नोट जो संदूकों में बंद हैं, खपरैलों में छिपे हैं, गूदड़ों में लिपटे हैं, बेकार ही गए पर लोगों की मानसिकता बदलेगी यह नोटबंदी की जादुई छड़ी से हो ही नहीं सकता. यह जुमलेबाजी को कू्ररता से पेश करने का तरीका है. हर तानाशाह कुछ ऐसा ही करता है. हिटलर ने किया, स्टालिन ने किया, माओ ने किया, पोल पोट ने किया. इन सब को उस समय पूजा गया पर बाद में ही पता चला कि उन्होंने जो किया उस से समर्थ अमीरों को तो दंड मिला पर निर्दोष, सामान्य, गरीब नागरिक भी बुरी तरह पीसे गए थे. जिन्हें नहीं मालूम वे इतिहास पढ़ लें. जो केवल प्रवचन सुनने को ज्ञान पाना मानते हैं, वे इस की असलियत कभी नहीं पहचान पाएंगे और खुद पर हुए अत्याचारों को अपने कर्मों का फल मान कर लुटे रह जाएंगे.

जब इंदिरा गांधी ने बैंकों का सरकारीकरण किया था तो गरीबों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई थी कि अब अमीरों के दिन लद गए हैं. आज स्थिति क्या है? हर तरफ निजी बैंकिंग कंपनियां खुली हैं. बड़े निजी बैंक जो 1969 में सरकार के हाथों में गए निकम्मेपन और भ्रष्टाचार के शिकार हो गए और उन की जगह सूदखोरों ने सहारा और संचिता जैसी लोन बैंकिंग कंपनियां खोल लीं और अरबों रुपया डकार गए. आज चारों ओर नजर घुमाइए निजी बैंक चमचमाते दिखेंगे, तो सरकारी बैंक सौतेले बच्चों की तरह बेहाल मिलेंगे.

इंदिरा गांधी ने कपड़ा मिलों का सरकारीकरण किया. आज सब बंद हो गईं. सरकार ने हवाई सेवाएं सरकारी कीं, आज इंडियन एयरलाइंस भारी नुकसान में है और निजी चमक रही हैं.

नोटबंदी के बाद आज अमीरों व गरीबों दोनों को नुकसान होगा पर कालाधन वैसे का वैसा रहेगा और अब पिंक नोटों में रखा जाएगा. हां, अगर सचमुच कालाधन समाप्त करना है तो धन ही समाप्त कर दो और पूरी जनता को रामायण युग की कुटियाओं में रहने को मजबूर कर दो. अपना उगाओ, अपना खाओ, न पैसा होगा, न काला सफेद होगा.

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