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कहानी 2: बाल यौन उत्पीड़न पर बेहतरीन फिल्म

सुजॉय घोष निर्देशित फिल्म ‘कहानी 2: दुर्गारानी सिंह’ से यह बात साफ हो जाती है कि बेहतरीन पटकथा, बेहतरीन निर्देशन और कलाकार की बेहतरीन परफॉर्मेंस के बल पर सामाजिक मुद्दों पर बेहतरीन फिल्म बन सकती है.

फिल्म की कहानी शुरू होती है, कोलकाता के पास चंदन नगर में रह रही विद्या सिन्हा के घर से जो अपनी 14 वर्षीय अपाहिज बेटी मिनी के साथ रह रही है. मिनी का ईलाज भी चल रहा है. डॉक्टर की सलाह पर विद्या अपनी बेटी मिनी को इलाज के लिए अमरीका ले जाने की तैयारी में है. पासपोर्ट बन चुके हैं. विद्या सिन्हा सुबह नर्स का इंतजार करते करते ऑफिस चली जाती है. ऑफिस में ही विद्या सिन्हा को पता चलता है कि अमरीका के डॉक्टर से मिलने का दिन व तारीख तय हो चुकी है.

जब वह ऑफिस से घर लौटती है, तो मिनी घर पर नहीं मिलती है. विद्या सिन्हा के मोबाइल पर एक महिला का फोन आता है कि कोलकाता में आकर अपनी बेटी को ले जाओ. विद्या अपनी बेटी मिनी को लेने के लिए घर से निकलती है, मगर रास्ते में एक कार उसे टक्कर मार देती है. विद्या सिन्हा अस्पताल पहुंच जाती है, जहां वह कोमा में जा चुकी है. डॉक्टर का मानना है कि छह सात दिन में वह कोमा से बाहर आ जाएगी. इस दुर्घटना के केस की जांच करने के लिए पुलिस सब इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह (अर्जुन रामपाल) पहुंचता है, जिसके मुंह से विद्या सिन्हा को देखते ही दुर्गा रानी सिंह (विद्या बालन) का नाम निकलता है. पर डॉक्टर कहता है कि यह विद्या सिन्हा है.

इंद्रजीत सिंह जांच शुरू करता है. वह विद्या सिन्हा के घर पहुंचता है, जहां उसे विद्या सिन्हा उर्फ दुर्गारानी सिंह की डायरी मिलती है. इस डायरी से ही पता चलता है कि कभी दुर्गारानी सिंह और इंद्रजीत सिंह पति पत्नी थे. दो वर्ष के बाद दोनों अलग हो गए थे. दुर्गारानी सिंह के अनुसार इंद्रजीत सिंह उससे नफरत करता है. जबकि अब इंद्रजीत सिंह अपनी पत्नी रश्मि (मानिनी चड्ढा) व बेटी सिमरन के साथ खुश है.

विद्या सिन्हा उर्फ दुगारानी सिंह की डायरी के अनुसार कोलकाता में रहने वाली दुर्गारानी सिंह (विद्या बालन) एक स्कूल में रिसेप्शनिस्ट हैं. जहां मशहूर व अति संपन्न दीवान परिवार की बेटी छह वर्षीय मिनी पढ़ती है. मिनी (नायशा खन्ना) को उसकी कक्षा की शिक्षक हर दिन मिनी की शिकायत के साथ प्रिंसिपल के ऑफिस ले जाती है. और डरी व सहमी मिनी को हमेशा दुर्गारानी सिंह ऑफिस के सामने ही बैठना पड़ता है. मिनी पर आरोप है कि मिनी पढ़ने में रूचि नहीं रखती और कक्षा में सोती रहती है. होमवर्क करके नहीं लाती.

दुर्गारानी सिंह के मन में उत्सुकता जागती है और वह एक दिन मिनी के नजदीक पहुंचकर उससे सच जानने का प्रयास करती है. मिनी कह देती है कि रात में उसे सोने को नहीं मिलता. पर तभी ड्राइवर उसे लेने आ जाता है. उसके बाद मिनी से सच जानने के लिए दुर्गारानी सिंह योजना बनाती है. वह झूठ बोलकर उसकी स्कूल शिक्षक बनकर मिनी को उसके घर पर ट्यूशन पढ़ाने जाने लगती है.

दुर्गारानी सिंह की जिंदगी में अरूण नामक युवक है. दुर्गारानी सिंह चाहती है कि इंदर तो कभी उसका हो नहीं सका, अब वह अरूण के साथ नई जिंदगी की शुरूआत कर सकती है. मिनी को ट्यूशन पढ़ाते पढ़ाते अंततः दुर्गारानी सिंह को पता चलता है कि मिनी के मोहित (जुगल हंसराज) चाचा उसका शारीरिक व यौन उत्पीड़न कर रहे हैं. दुर्गारानी सिंह, पुलिस में मोहित व मिनी की दादी (अम्बा सन्याल) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराती है. पुलिस जांच करने आती है और मोहित से बात करने के बाद उन्हें छोड़ देती है. जबकि मोहित व मोहित की मां, दुर्गारानी सिंह पर चोरी का इल्जाम लगा देते हैं. दुर्गारानी सिंह की स्कूल की नौकरी चली जाती है. मोहित व मिनी की दादी, दुर्गारानी सिंह को मरवाने की सुपारी दे देते हैं.

उधर अरूण, दुर्गारानी सिंह का स्पष्ट जवाब न मिलने पर लंदन चला जाता है. मिनी की दादी और मोहित, मिनी को इतना प्रताड़ित करते हैं कि वह छत से कूद जाती है. और उसका पैर फ्रैक्चर हो जाता है. उपर से उसकी दादी अस्पताल में मिनी को एक इंजेक्शन लगाकर मौत की नींद सुलाना चाहती है, पर ऐन वक्त पर दुर्गारानी सिंह अस्पताल पहुंचकर दादी को मारकर मिनी के साथ कोलकाता से भागकर चंदन नगर पहुंच जाती है.

अस्पताल में कोमा से बाहर आते ही विद्या उर्फ दुर्गारानी सिंह बेटी मिनी को बचाने के लिए निकल पड़ती है. उधर पुलिस भी दुर्गारानी सिंह के पीछे पड़ी है. कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. पता चलता है कि मिनी का अपहरण मिनी के मोहित चाचा ने ही करवाया है जो कि अंततः मारे जाते हैं. दुर्गारानी सिंह, मिनी को लेकर अमरीका के अस्पताल पहुंचती है.

यूं तो यह फिल्म एक रोमांचक फिल्म है. मगर यह फिल्म वर्तमान समय के अति ज्वलंत मुद्दे बाल यौन उत्पीड़न पर आधारित है. छह सात वर्ष की बालिकाओं के साथ उनके घर या रिश्तेदार या अतिकरीबी इंसान जब उनका शारीरिक व यौन शोषण करता है, उस वक्त वह बात बालिका की समझ में कुछ नहीं आता है. मगर जब वह बड़ी होती है, तो शादी के बाद भी उसकी जिंदगी तबाह होती है. इस बात को रेखांकित करने वाली इस फिल्म में एक बहुत प्यारा दृश्य है. जहां पर दुर्गारानी सिंह, मिनी को एक बालिका के प्रति प्यार व बाल यौन उत्पीड़न में अंतर समझाती है. फिल्म के कुछ संवाद काफी अच्छे बन पड़े हैं.

निर्देशक सुजॉय घोष इस बात के लिए बधाई के पात्र हैं कि जिन विषयों या मुद्दों को लोग अपने घर की दरी के नीचे दबा देना ही उचित समझते हैं, उस पर निर्देशक ने खुलकर बात की है. विद्या बालन की तारीफ करनी पड़ेगी कि उन्होंने ऐसे विषय वाली फिल्म में अभिनय करने के लिए हामी भरी. फिल्म में कुछ अनुत्तरित सवाल भी हैं, कुछ कमियां भी हैं, जिन्हें सिनेमाई स्वतंत्रता के नाम पर नजरंदाज किया जा सकता है. सुजॉय घोष बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने बाल यौन उत्पीड़न के मुद्दे को काफी परिपक्वता के साथ फिल्म में उठाया है. ऐसा इम्तियाज अली अपनी फिल्म ‘हाईवे’ में नहीं कर पाए थे.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो विद्या बालन ने काफी बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है. बेटी की सुरक्षा का डर, गुस्सा, बेटी के प्रति सुरक्षा कवच बनने के अहसास को अपने चेहरे के भावों से व्यक्त कर विद्या बालन ने अद्भुत अभिनय क्षमता का परिचय दिया है.

क्लायमेक्स से पहले के कुछ दृश्यों मे तो विद्या बालन अभिनय के बल पर दर्शकों को अपना बना लेती हैं. काफी लंबे समय बाद किसी फिल्म में अर्जुन रामपाल ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है. वह वास्तविक पुलिस सब इंस्पेक्टर के किरदार को परदे पर साकार करने में इतना सफल रहे हैं कि फिल्म खत्म होने के बाद भी वह दर्शकों के दिमाग में रह जाते हैं. विद्या बालन के साथ ही नायषा खन्ना ने भी कमाल का अभिनय किया है. जुगल हंसराज का अभिनय ठीक ठाक ही रहा. इंद्रजीत सिंह के बॉस के किरदार में खराज मुखर्जी ने भी अच्छा परफॉर्म किया है.

फिल्म में पश्चिम बंगाल के मध्यम वर्गीय परिवेश को उकेरने में निर्देशक सुजॉय घोष पूरी तरह से सफल रहे हैं. कैमरामैन भी बधाई के पात्र हैं. फिल्म का संगीत प्रभावित नहीं करता.

इंटरवल से पहले दर्दनाक अतीत के साथ जिंदगी जी रही औरत, एक छह वर्ष की लड़की के व्यवहार की वजह से एक जुड़ाव महसूस करती है. और फिर कहानी इस तरह आगे बढ़ती है कि दर्शक फिल्म का एक भी दृश्य आंखों से ओझल नहीं होने देना चाहता. काफी लंबे समय बाद कोई फिल्म आयी है, जिसका पहला भाग लोगों को अपनी तरफ खींचता है. इंटरवल के पहले जो रोमांच पैदा होता है, उसे इंटरवल के बाद बरकरार रखने में निर्देशक असफल हो जाते हैं. इंटरवल के बाद फिल्म पर से कुछ समय के लिए निर्देशक की पकड़ कमजोर हो जाती है. कुछ घटनाक्रम का अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है, पर इससे फिल्म की गति या फिल्म की रोचकता ज्यादा बाधित नहीं होती है.

तर्कशीलता और दया के साथ एक संवेदनशील विषय से निपटने वाली दुर्लभ फिल्मों में से एक गिनी जाएगी. यह एक ऐसी फिल्म है, हर माता पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चेा को अपने साथ ले जाकर दिखाए. यह फिल्म कहीं न कहीं बच्चों में बाल यौन उत्पीड़न के प्रति जागरूकता लाएगी.

दो घंटे दस मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘कहानी 2’ का निर्माण ‘बाउंड स्क्रिप्ट मोशन पिक्चर्स’ के बैनर तले किया गया है. इसके निर्माता सुजॉय घोष और जयंतीलाल गड़ा हैं. निर्देशक सुजॉय घोष, पटकथा लेखक सुजॉय घोष, संवाद लेखक रितेश शाह, कहानीकार सुजॉय घोष व सुरेश नायर, संगीतकार क्लिंटन सेरेजो, कैमरामैन तपन बसु हैं.

अहान को मिल रहा है स्टार किड होने का फायदा या…

मशहूर अभिनेता, फिल्म निर्माता, व्यवसायी और अब इंटरनेट आधारित कास्टिंग एजंसी ‘‘एफ द काउच’’ की शुरूआत कर चुके सुनील शेट्टी के बेटे अहान किसी सोशल मीडिया से नहीं जुड़े हैं, मगर वह चर्चा के केंद्र में हैं.

बॉलीवुड में चर्चा गर्म है कि अहान को साजिद नाडियाडवाला ने अपनी फिल्म से बतौर अभिनेता लॉन्च करने का मन बनाया है. मजेदार बात यह है कि साजिद नाडियाडवाला ने अभी तक अहान के साथ बनायी जाने वाली फिल्म की आधिकारिक घोषणा नहीं की है.

वह इस फिल्म की आधिकारिक घोषणा सितंबर 2017 में करेंगे. मगर मीडिया में यह बात प्रचारित हो रही है कि साजिद नाडियाडवाला ने ही अहान को अभिनय की खास ट्रेनिंग लेने के लिए लंदन भेजा है.

सूत्र दावा कर रहे हैं कि फिल्म की घोषणा करने या कैमरे के सामने अहान को परफार्म करते हुए देखने से पहले ही साजिद नाडियाडवाला, अहान से इस कदर प्रभावित हो चुके हैं कि उन्होंने अहान को अपनी कंपनी की आगामी तीन फिल्मों में अभिनय करने के लिए अनुबंधित करने का मन बनाया है. एक सूत्र यहां तक दावा कर रहा है कि साजिद नाडियाडवाला ने अहान को तीन फिल्मों के लिए अनुबंधित कर लिया है. यानी कि स्टार पुत्र होने की वजह से अहान को अपनी प्रतिभा को साबित करने के लिए एक नहीं बल्कि तीन-तीन मौके मिलने वाले हैं.

फिलहाल, अहान लंदन में चार माह तक रहकर वहां ट्रेनिंग लेते हुए अपनी अभिनय व एक्शन प्रतिभा को निखारेंगे. उसके बाद वह भारत आकर कुछ ट्रेनिंग लेंगे. तब सितंबर 2017 में उनकी फिल्म की घोषणा की जाएगी. यदि सब कुछ ठीक रहा, तो इस फिल्म की शूटिंग अक्टूबर 2017 में शुरू होगी.यह एक्शन प्रधान रोमांटिक फिल्म होगी.

स्टार पुत्र होने की वजह से ही अहान को कई फायदे मिल रहे हैं. अहान की बहन आथिया शेट्टी को लेकर फिल्म ‘हीरो’ का निर्माण करने वाले अभिनेता सलमान खान भी अहान का हौसला बढ़ाने के लिए मैदान में कूद पड़े हैं.सलमान खान ने अपने ट्वीटर पर अहान की तस्वीर डालते हुए लिखा है-‘‘अहान तुम बहुत अच्छे लग रहे हो. बॉलीवुड में तुम्हारा स्वागत है.’’

डिप्रेशन में हैं तो करें फेसबुक, ट्विटर का इस्तेमाल

सोशल नेटवर्किंग साइटों पर समय बिताना अभी भी समय की बर्बादी समझी जाती है. इस पर अधिक समय गुजारना मानसिक स्वास्थ्य पर अमूमन नकारात्मक प्रभाव डालता है, ऐसा समझा जाता है. लेकिन एक नए अध्ययन ने इन सारी बातों को सिरे से नकार दिया है और एक अलग ही पक्ष सामने रखा है. इनके मुताबिक कुछ लोगों के लिए फेसबुक और ट्विटर अवसाद को नियंत्रित करने का एक साधन हो सकता है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं.

अध्ययन के मुताबिक, किसी व्यक्ति के स्वस्थ होने में सोशल नेटवर्किंग का सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव पड़ता है. पत्रिका 'साइबरसाइकोलॉजी, बिहैवियर एंड सोशल नेटवर्किंग' में प्रकाशित अध्ययन बताता है कि सोशल नेटवर्किंग साइटों और अवसाद के बीच बेहद जटिल संबंध हैं और कुछ लोग वर्चुअल मीडिया से भी सामाजिक समर्थन का फायदा उठाते हैं.

ब्रिटेन के लैनकास्टर यूनिवर्सिटी के डेविड बेकर और गुईलेरमो पेरेज द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, इस जटिल संबंध पर मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, व्यवहार तथा व्यक्तिगत कारणों का प्रभाव पड़ सकता है. निष्कर्ष के मुताबिक, चिकित्सकों को अपने मरीजों को यह सलाह देनी चाहिए कि वे दवा के अलावा, सोशल सपोर्ट सिस्टम का भी सहारा लें.

अब वॉट्सएप में भेज पाएंगे 10 से ज्यादा फोटोज

अगर आप वॉट्सएप यूजर हैं तो आपको मालूम ही होगा कि यह मैसेजिंग ऐप अपने यूजर्स की जरूरतों के हिसाब से अपना अपडेट जारी करता रहता है. अभी हाल ही में वीडियो कॉलिंग फीचर जोड़ा गया है. इसके अलावा लगातार इसमें लगातार कई सारे अपडेट आ रहे हैं.

हालांकि, अभी भी इसमें एक साथ 10 से ज्यादा फोटो सेंड करने की सुविधा में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका मतलब ये है कि यदि अपको 50 फोटो सेंड करने हैं, तो उन्हें 10-10 फोटो करके 5 बार में सेंड करना होगा. लेकिन अब YouTube पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल हो चुका है जिसमें व्हाट्सएप पर एक साथ ढेर सारे फोटो भेजने की ट्रिक बताई गई है.

Lucky Patcher एप

वीडियो में Lucky Patcher एप के बारे में बताया गया है जिसकी मदद से व्हाट्सएप पर 10 से ज्यादा फोटो एक बार में सेंड करने की ट्रिक बताई गई है. जिसको यूज कर आप भी यह काम बहुत ही आसानी से कर सकते हैं.

Apk फाइल करनी होगी इंस्टॉल

आपको बता दें कि Lucky Patcher एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं है. लेकिन एंड्रॉइड यूजर्स इस एप को Apk फाइल की मदद से इन्स्टॉल कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रहे कि एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम Apk फाइल को इन्स्टॉल करने की परमिशन नहीं देता. इस फाइल से फोन के OS के साथ दूसरी सेटिंग्स भी बदल सकती हैं ऐसे में Apk फाइल आपको अपनी रिस्क पर इंस्टॉल करनी होगी.

नए वर्जन में आ सकता है ये फीचर

व्हाट्सएप ने पिछले महीने एंड्रॉइड यूजर्स के लिए BETA वर्जन जारी किया था. इस वर्जन में सबसे पहले वीडियो कॉलिंग दी गई थी. इसके साथ सेल्फी LED स्क्रीन के साथ फोटो एडिटिंग टूल और GIF बनाने का फीचर भी दिया गया. हालांकि, अब सभी स्मार्टफोन पर नॉर्मल अपडेट पर भी ये फीचर आ रहे हैं. इसके अलावा एकबार में 10 से ज्यादा फोटो सेंड करने के फीचर के लिए यूजर्स को इंतजार है.

हमारी शादी को 5 साल हो चुके हैं, पर बच्चे नहीं हुए. क्या हमें आईवीएफ की मदद लेनी चाहिए.

सवाल

मेरी उम्र 27 साल और पति की 30 साल है. हमारी शादी को 5 साल हो चुके हैं. हम लोगों की रिपोर्ट नौर्मल आई है. पति के शुक्राणुओं की संख्या भी लगभग 90 मिलियन आई है, बावजूद इस के हम संतान सुख से वंचित हैं. क्या हमें आईवीएफ तकनीक की मदद लेनी चाहिए?

जवाब

आप को घबराने की जरूरत नहीं है. चूंकि आप के पति के शुक्राणुओं की संख्या ठीक है, इसलिए आप को आईयूआई तकनीक की दरकार नहीं है. लेकिन आप के लिए बढि़या विकल्प आईवीएफ है. इस तकनीक की मदद से संतान सुख की प्राप्ति कर सकते हैं. हां, इस बात का ध्यान रखें कि इस तकनीक के लिए किसी अच्छे चिकित्सक से ही संपर्क करें.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर लगा 15000 डॉलर का जुर्माना

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने राष्ट्रीय टीम के दो खिलाड़ियों पर जुर्माना लगाया है. तेज गेंदबाज अल अमीन हुसैन और बल्लेबाज शब्बीर रहमान पर लगभग 15000 डॉलर का जुर्माना लगाया गया है. इन दोनों खिलाड़ियों पर आरोप है कि कथित तौर पर इन्होंने अपने होटल के कमरे में महिला अतिथियों को बुलाकर अनुशासन का गंभीर उल्लंघन किया था.

सूत्रों के मुताबिक मौजूदा बांग्लादेश प्रीमियर लीग टी-20 टूर्नामेंट के दौरान मैदान के बाहर अनुशासन के गंभीर उल्लंघन के लिए तेज गेंदबाज अल अमीन हुसैन और बल्लेबाज शब्बीर रहमान दोनों पर लगभग 15000 डॉलर का जुर्माना लगाया गया है.

खिलाड़ियों को राष्ट्रीय क्रिकेटरों के रूप में उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई गई और उन्हें चेतावनी दी गई कि भविष्य में इस तरह की हरकत दोहराने पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी. यह बांग्लादेशी खिलाड़ी पर अनुशासनात्मक मामले में अब तक का सबसे अधिक जुर्माना है.

बरिसाल बुल्स की ओर से बीपीएल में खेलने के लिए मिलने वाली अल अमीन की अनुबंध राशि का यह 50 फीसद है. शब्बीर पर अनुबंध राशि का 30 फीसद जुर्माना लगा है. वह राजशाही किंग्स की ओर से खेलते है.

शब्बीस और अफगानिस्तान के क्रिकेटर मोहम्मद शहजाद पर मैदान में भिड़ने के लिए मैच फीस का 15 फीसद जुर्माना भी लगाया है. शहजाद को दो मैचों के लिए प्रतिबंधित किया गया है.

ट्रंप की नीतियों पर अनुमान की अटकलों से बाजार में अस्थिरता

बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई के लिए माहौल उथलपुथल भरा रहा. नवंबर से बाजार में फिर तेजी लौटी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 1,000 और 500 के नोट अचानक प्रचलन से बाहर करने की घोषणा से बाजार में हाहाकार मच गया. शुरुआत में ही बाजार गहरा गोता लगाते हुए सूचकांक 1,700 अंक तक ढह गया. इसी बीच सरकार की बेहतर आर्थिक सुधारों की नीति और अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम से उद्योगपति डोनाल्ड ट्रंप की जीत से बाजार उबरने लगा और शाम तक 339 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ.

नैशनल स्टौक एक्सचेंज यानी निफ्टी भी 541 अंक की गिरावट से उबर कर 111 अंक की बढ़त पर बंद हुआ. बाजार में पुराने नोटों के बंद होने से तरलता की भारी कमी रही लेकिन विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना तथा कालाबाजारी और जाली नोटों पर नकेल कसने की रणनीति तथा ट्रंप की जीत से विश्व बाजार के उत्साहवर्द्धक माहौल का बीएसई सूचकांक पर भी सकारात्मक असर पड़ा और बाजार तेजी पर बंद हुआ. टाटा समूह में मचे घमासान के कारण टाटा के शेयरों में 19 प्रतिशत की गिरावट रही. ट्रंप की औद्योगिक नीतियों को ले कर लगाए जा रहे अनुमान और अटकलों तथा उन की जीत पर अमेरिका में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद बीएसई का सूचकांक11 नवंबर को 700 अंक तक ढह गया.

 

किससे क्या छिपा रहे हैं रितिक रोशन

पिछले एक डेढ़ माह से रितिक रोशन की कार्यशैली में बहुत बड़ा बदलाव नजर आ रहा है. अब तक अममून वह जहां भी जाते थे, उनके साथ उनका अपना स्टाफ यानी कि एक ब्वाय, मैनेजर व कुछ सिक्यूरिटी गार्ड हुआ करते थे. यहां तक कि जब वह विदेश यात्रा पर निकलते थे, तब भी उनके साथ उनके निजी सिक्युरिटी गार्ड के अलावा तीन चार लोग हुआ करते थे. लेकिन पिछले एक डेढ़ माह से रितिक रोशन मुंबई में भी घर से बाहर अकेले ही निकलते हैं. वह निर्माता या निर्देशक से मुलाकात करने के लिए भी अकेले ही जाने लगे हैं.

इतना ही नहीं इन दिनों रितिक रोशन सिंगापुर की यात्रा पर हैं. सूत्रों की माने तो सिंगापुर जाते समय भी रितिक रोशन अकेले ही गए. इस बार वह अपने साथ अपने स्टाफ के किसी शख्स को नहीं ले गए. रितिक रोशन सिंगापुर में कहां घूम रहे हैं, कहां जा रहे हैं, किससे मिल रहे हैं, होटल में भी उनके साथ कौन होता है, इसकी भनक तक किसी को नहीं मिल रही है.

इससे बौलीवुड में चर्चाओं का दौर गर्म हो चुका है. लोग कयास लगा रहे हैं कि आखिर रितिक रोशन किससे और क्या छिपाने का प्रयास कर रहे हैं. बौलीवुड का एक सूत्र तो यहां तक कह रहा है कि रितिक रोशन ने अपनी निजी जिंदगी की किसी हकीकत को छिपाने के लिए यह कदम उठाया है. यदि सूत्र का यह दावा सही है, तो इसके मायने यह हुए कि अब रितिक रोशन को अपने निजी स्टाफ पर भी भरोसा नहीं रह गया..क्या उन्हे इस बात का डर सता रहा है कि उनके निजी जीवन का कोई सच उनका स्टाफ मीडिया तक पहुंचा सकता है..मतलब यह कि बौलीवुड में जितने लोग उतनी तरह की बातें हो रही है.. 

मैं बहुत बेसुरा गाती हूं : विद्या बालन

मूलतः दक्षिण भारतीय विद्या बालन को कोलकाता के लोग बंगाली समझते हैं. तो वहीं वह बहुत अच्छी हिंदी बोलती हैं. उनसे बात करते समय इस बात का अहसास ही नहीं होता कि विद्या बालन हिंदी भाषी नहीं हैं. इन दिनों वह सुजोय घोष निर्देशित फिल्म ‘‘कहानी 2 : दुर्गारानी सिंह’’ को लेकर काफी उत्साहित हैं. उन्हे एक सफल फिल्म की आवश्यकता है. जिन लोगों ने ‘‘कहानी 2 : दुर्गारानी सिंह’’ का ट्रेलर है, वह तो विद्या बालन के अभिनय की तारीफ करते हुए नहीं थक रहे हैं. पर अंतिम फैसला तो 2 दिसंबर को दर्शक ही करेंगे.

विद्या बालन की एक खासियत यह भी है कि उन्होंने संगीत का प्रशिक्षण ले रखा है, मगर अभी तक उन्होने दूसरी बौलीवुड अभिनेत्रियों की तरह किसी भी फिल्म में गीत नहीं गाया है. हाल ही में जब विद्या बालन से मुलाकात हुई, तो उनसे बंगाल, संगीत व महिलाओं के हालात पर विशेष बातचीत की. 

आपको पश्चिम बंगाल खासकर कोलकत्ता के लोग बंगाली समझते हैं?

– मैं मूलतः दक्षिण भारतीय हूं, जबकि कोलकाता के लोग मुझे बंगाली समझते हैं. यह महज संयोग है कि मैने चार फिल्मों की शूटिंग कोलकाता में की और तीनों ही फिल्मों में मैंने बंगाली किरदार निभाए. मैंने 2003 में एक बंगला फिल्म ‘‘भालो ठेको’’ में में भी अभिनय किया था. अब तक मैंने काफी बंगला सीख ली है. मैं बंगला गीत व संगीत की भी दीवानी हूं. कोलकाता में शूटिंग करना मेरे लिए हमेशा सुखद अनुभव रहता है. वहां हमेशा मुझे गर्मजोशी का अहसास मिलता है. वहां के लोग कला और कलाकार की कद्र करना जानते हैं.

आपने कर्नाटकी संगीत की ट्रेनिंग ली थी. पर आपने अभी तक किसी फिल्म में गाना नहीं गाया?

– मैं गायक नही हूं. मैं बहुत बेसुरा गाती हूं. संगीत सीखने का अर्थ यह नही होता कि सभी लता मंगेशकर बन जाएं. कुछ चीजें अपने लिए होती हैं. दक्षिण भारत में हम लड़के व लड़कियों को नृत्य व संगीत बचपन से सिखाया जाता है. इससे हमारे अंदर अनुशासन आता है. इसीलिए मैंने कर्नाटकी संगीत के अलावा नृत्य की भी ट्रेनिंग ली थी. पर मैंने कभी नहीं चाहा कि मैं किसी फिल्म में गाउं.

संगीत व नृत्य की ट्रेनिंग एक कलाकार को अभिनय करने में कहां मदद करती है?

– सिर्फ संगीत ही क्यों, नृत्य, मार्शल आर्ट या पेंटिंग की ट्रेनिंग हो, हर ट्रेनिंग इंसान को कभी न कभी मदद जरुर करती है. वह सारी ट्रेनिंग जिससे आप जिंदगी में एक नए नजरिए से जुड़ सकें, जिंदगी को नए नजरिए से समझ सकें, वह सब कलाकार की मदद करता है. हम गाने, नृत्य, दृश्यों में भावनाओं को व्यक्त करते हैं, यदि कलाकार को इसका अनुभव है, यदि कलाकार ने विविध प्रकार की ट्रेनिंग लेकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीखा है, तो वह उसके लिए मददगार ही होता है. देखिए, यह जरुरी नहीं है कि एक कलाकार के तौर पर आप जो कहानी कह रहे हैं, उसके अनुभव से आप निजी जिंदगी में गुजरे हों, मगर यदि आप किताबें पढ़ते हैं, नाटक देखते हैं, संगीत सुनते हैं, तो आपको एक अनुभव का अहसास होता है, इससे आपकी परफार्मेंस पर असर पड़ता है.

क्या आपको महिलाओं के मुद्दों पर समाज में कोई बदलाव नजर आ रहा है?

– हम कुछ लड़कियों या औरतों से मिलते हैं या कुछ पढ़ते हैं, तो हमें लगता है कि कुछ बदलाव आ गया है. पर जब कुछ अजीब सी चीजें सुनते हैं, तो लगता है कि कोई बदलाव नही आया. आज भी आपसे बात करने से कुछ समय पहले मैं अखबार पढ़ रही थी. मैंने खबर पढ़ी कि एक मां अपनी जुड़वा बेटियों को पैसे के लिए पड़ोसी के 17 साल के बेटे के हाथों बेचते हुए पकड़ी गयी. इस खबर को पढ़ने के बाद मेरे दिमाग में सवाल उठा कि क्या आज भी औरतों की स्थिति व औरतों से जुड़े मुद्दों में फर्क नहीं आया. पर हम पूरी तरह से यह नहीं कह सकते कि कोई फर्क नही आया. कई जगह फर्क आ रहा है, कई जगह फर्क नहीं आया. पर हर जगह से लोग बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं, यह एक अच्छी बात है.

पर जो बदलाव आना चाहिए, वह क्यों नही आ पा रहा है?

– देखिए, यह 10-20 वर्ष का मामला नहीं है. सदियों से जो हमारी सोच चली आ रही है, उसे बदलने का मसला है, जिसमें समय लगेगा. सदियों से कहा जाता रहा है कि यह मर्दों की दुनिया है. औरतों को इसी तरह से रहना चाहिए. औरतों को फलां काम नहीं करना चाहिए. हर औरत की जिंदगी पहले पिता, फिर भाई, फिर पति और फिर बेटे के साए में ही चलनी चाहिए. यह सोच इतनी जल्दी नही बदलेगी. 

अब क्या करेंगी दीपिका सिंह?

आम राय यह है कि टीवी सीरियलों में अभिनय करने वाले कलाकार कम कमाते हैं? जबकि सच कुछ और ही है. सच यह है कि टीवी सीरियलों में अभिनय करने वाले कलाकार भी बहुत बड़ी रकम कमाते हैं. यदि ऐसा न होता, तो सीरियल ‘‘दिया और बाती हम’’ में संध्या राठी का किरदार निभा चुकी अभिनेत्री  दीपिका सिंह की पारिश्रमिक राशि के एक करोड़़ चौदह लाख रूपए निर्माता पर बकाया हैं.

जी हां! ‘‘शशि सुमित प्रोडक्शन’’ निर्मित सीरियल ‘‘दिया और बाती हम’’ कुछ समय पहले तक ‘‘स्टार प्लस’’ पर प्रसारित हुआ करता था. इसमें संध्या राठी का मुख्य किरदार दीपिका सिंह निभा रही थी. सीरियल का प्रसारण जारी रहा, निर्माता धीरे धीरे पैसा देते रहे, पर उन्होंने पूरा पैसा कभी नहीं दिया. निर्माता ने कलाकारों से कहा कि बकाए पैसे को वह ब्याज के साथ चुकाएंगे. सीरियल ‘‘दिया और बाती हम’’ की वजह से दीपिका सिंह को जबरदस्त शोहरत मिल रही थी, इसलिए निर्माता की बातों पर यकीन कर दीपिका सिंह इसमें अभिनय करती रहीं. मगर अब वह बुरी तरह फंस चुकी हैं.

सूत्रों के अनुसार सीरियल ‘‘दिया और बाती हम’’ में अभिनय करने के एवज में 90 लाख रूपए और इस राशि पर 24 लाख रूपए यानी कि कुल एक करेाड़ चौदह लाख रूपए दीपिका सिंह को निर्माता से मिलने हैं. मगर अब सीरियल का प्रसारण बंद हो चुका है. सीरियल ‘दिया और बाती हम’ का दूसरा सीजन भी आने वाला है, जिसमें दीपिका सिंह नहीं होंगी. पर निर्माता उनकी पारिश्रमिक राशि देने पर बहानेबाजी कर रहा है.

सूत्रों की माने तो निर्माता ने दीपिका सिंह से साफ साफ कह दिया है कि वह इतनी बड़ी रकम नहीं चुका सकता. निर्माता चाहता है कि दीपिका सिंह 67 लाख रूपए लेकर लिखकर दे दें कि उन्हे उनकी पूरी पारिश्रमिक राशि मिल गयी. बेचारी दीपिका सिंह की समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें? तो दूसरी तरफ दीपिका सिंह चुप्पी साधे हुए हैं.

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