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विराट में काफी तकनीकी खामियां हैः एंडरसन

टीम इंडिया टेस्ट कप्तान विराट कोहली भले ही इन दिनों अपनी करियर की बेस्ट फॉर्म में हों और कई दिग्गज क्रिकेटर की तारीफ करते ना थक रहे हों, लेकिन इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन की सोच उनके लिए बिल्कुल अलग है.

जिमी के नाम से मशहूर इस गेंदबाज ने विराट पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर विराट की तकनीकी खामियां उजागर नहीं हो रही हैं तो उसका कारण मददगार भारतीय विकेट हैं, जिसमें स्पीड और मूवमेंट की कमी है.

एंडरसन ने इंग्लैंड में 2014 में हुई सीरीज के दौरान विराट को काफी परेशान किया था जहां वो ऑफ साइड से बाहर जाती गेंदों पर लगातार आउट हो रहे थे. मौजूदा सीरीज में हालांकि लगभग 700 रन बनाकर कोहली ने इंग्लैंड की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं.

यह पूछने पर कि विराट की तकनीक में क्या बदलाव आया है, एंडरसन ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि उसमें (विराट में) बदलाव आया है. मुझे सिर्फ इतना लगता है कि उसके अंदर जो तकनीकी खामियां हैं, वो यहां नजर नहीं आ रही हैं. विकेटों ने इसे समीकरण से बाहर कर दिया है. विकेट में इतनी स्पीड नहीं है कि गेंद बल्ले का किनारा ले जैसा कि हमनें इंग्लैंड में कुछ अधिक मूवमेंट के साथ उनके खिलाफ किया था.'

टेस्ट मैचों में इंग्लैंड के सबसे सफल गेंदबाज एंडरसन ने चौथे क्रिकेट टेस्ट के चौथे दिन के खेल के बाद कहा, 'जब यह (स्पीड और मूवमेंट) नहीं होते, तो वह इस तरह के हालात में खेलने का आदी है. वह स्पिन का काफी अच्छा खिलाड़ी है और अगर आप सटीक नहीं हो और मौकों का फायदा नहीं उठाते तो वह आपको परेशान करेगा.'

जीएसटी: मुश्किलें अभी और भी हैं

प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को अगले साल 1 अप्रैल से लागू किए जाने की संभावना कम लग रही है. जीएसटी काउंसिल की छठवीं बैठक में जीएसटी टैक्स पेयर्स पर दोहरे नियंत्रण के मुद्दे पर फैसला नहीं लिया जा सका.

जीएसटी परिषद की अगली बैठक 22-23 दिसंबर को होगी. वित्त मंत्री अरुण जेटली बैठक के बाद नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को 1 अप्रैल 2017 से लागू करने के लक्ष्य के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह पाए.

वित्त मंत्री ने कहा, 'विधेयक के मसौदे में लगभग 195 अनुच्छेद हैं. इसलिए यह पूरे कानून का केंद्रीय विधेयक है. हमने 99 अनुच्छेदों पर चर्चा की और अभी कुछ धाराओं को फिर से लिखने की जरूरत है. आने वाले दिनों में इसमें संशोधन कर लेंगे. उम्मीद है कि अगली बैठक में विधेयक से सम्बधित प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाएगी.'

तो वाट्स ऐप नहीं चला पायेंगे आप

अगर आपको वॉट्स ऐप पर चैंटिंग करना पसंद है तो आपके लिए एक बुरी खबर है. नए साल में आप वॉट्स ऐप नहीं चला पायेंगे. अगर आपका स्मार्टफोन या टैब पुराना है तो 2016 के बाद उस पर वॉट्सऐप काम नहीं करेगा. ब्लैकबेरी, ऐंड्रॉयड और ऐपल के बहुत सारे डिवाइसेज पर वॉट्सऐप सपॉर्ट बंद करने जा रहा है.

आईफोन

आईफोन पर भी वॉट्सऐप काम नहीं करेगा. अगर आपके पास iPhone 3GS या फिर ऐपल का कोई ऐसा डिवाइस है, जो iOS 6 पर रन करता है, तो उसपर भी वॉट्सऐप काम नहीं करेगा.

आईपैड

आईपैड के फर्स्ट, सेकंड, थर्ड और फोर्थ जेनरेशन को अगर आपने अपडेट नहीं किया है तो फौरन अपडेट कर लीजिए. पुराने वर्जन में वाट्स ऐप नहीं चलेगा जरूरी है. वाट्स ऐप का यूज करने के लिए उसमें iOS 9.3 का होने जरूरी है.

विंडोज

विंडोज 7 पर रन करने वाले डिवाइसे पर भी वॉट्सऐप काम करना बंद कर देगा. अगर आप अभी भी विंडोज 7 वाली डिवाइस यूज कर रहे हैं तो अपने सिस्टम पर विंडोज अपडेट कर लें.

ऐंड्रॉयड एक्लेयर

ऐंड्रॉयड 2.1 या 2.2. एक्लेयर वाले फोन या टैबलट्स पर भी अगले साल से वॉट्सऐप काम नहीं करेगा.

मुंबई टेस्टः भारत की इंग्लैंड पर शानदार जीत

भारत ने चौथा टेस्ट मैच एक इनिंग और 36 रन से जीत लिया है. इंग्लैंड टीम की दूसरी इनिंग 195 रन पर सिमट गई. अश्विन ने दूसरी इनिंग में 6 विकेट समेत मैच में कुल 12 विकेट झटके.

विराट की डबल सेन्चुरी (235) और जयंत यादव के 104 रन की बदौलत पहली इनिंग में भारतीय टीम ने 631 रन बनाए थे. पहली इनिंग में इंग्लैंड की टीम 400 रन पर आउट हो गई थी.

पांचवे दिन का खेल

पांचवें दिन के तीसरे ओवर की आखिरी बॉल पर अश्विन ने बेयरस्टॉ को एलबीडब्लयू आउट कर दिया था. वे 51 रन बनाकर आउट हुए. इसके कुछ देर बाद ही अश्विन ने नए बैट्समैन के रूप में आए क्रिस वोक्स (0) को भी बोल्ड कर पवेलियन भेज दिया.

आदिल राशिद (2) भी कुछ खास नहीं कर पाए. दिन के सातवें ओवर में अश्विन ने उन्हें लोकेश राहुल के हाथों कैच करा पवेलियन भेज दिया. आखिरी बैट्समैन जेम्स एंडरसन (2) भी अश्विन का शिकार बने. उनका कैच उमेश यादव ने लिया.

भारत की पहली इनिंग

चौथे दिन भारत की पूरी टीम पहली इनिंग में 631 रन पर आउट हो गई. पहली इनिंग में टीम इंडिया को इंग्लैंड पर 231 रन की लीड मिली. भारत की ओर से विराट कोहली (235), मुरली विजय (136) और जयंत यादव (104) हाईएस्ट स्कोरर रहे.

इस मैच में विराट ने टेस्ट करियर की तीसरी डबल सेन्चुरी तो लगाई ही, साथ ही टेस्ट करियर का बेस्ट स्कोर (235) भी बना डाला. इसके अलावा उन्होंने यादव के साथ मिलकर आठवें विकेट के लिए रिकॉर्ड पार्टनरशिप (241) भी की. साथ ही जयंत यादव नौवें नंबर पर आकर सेन्चुरी लगाने वाले पहले भारतीय प्लेयर बने.

विराट ने लगाई डबल सेन्चुरी

मैच के चौथे दिन विराट ने डबल सेन्चुरी लगाई. वे 340 बॉल पर 235 रन बनाकर आउट हुए. इस दौरान उन्होंने 25 चौके और 1 छक्का भी लगाया. यह विराट के करियर की तीसरी डबल सेन्चुरी रही. विराट ने तीनों डबल इसी साल लगाए हैं.

विराट के करियर का बेस्ट स्कोर

इस मैच में विराट ने अपने टेस्ट करियर का बेस्ट स्कोर (235) भी बनाया. इससे पहले उनका बेस्ट स्कोर 211 रन था. जो उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था. विराट अबतक तीन डबल सेंचुरी लगा चुके हैं. उन्होंने जुलाई 2016 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ पहली डबल सेन्चुरी लगाई थी. उस मैच में उन्होंने 200 रन बनाए थे. दूसरी डबल सेन्चुरी (211 रन) उन्होंने इस साल अक्टूबर में इंदौर टेस्ट में न्यूजीलैंड के खिलाफ लगाई थी.

जयंत यादव ने लगाई पहली सेन्चुरी

इस मैच में जयंत यादव ने अपने टेस्ट करियर की पहली सेन्चुरी लगाई. वे 104 रन बनाकर आउट हुए. इस दौरान उन्होंने 15 चौके भी लगाए.

यादव ने अपने 100 रन 196 बॉल पर पूरे किए थे. आदिल राशिद की बॉल पर उन्हें बेयरस्टॉ ने स्टंप आउट कर दिया.

आठवें विकेट के लिए रिकॉर्ड पार्टनरशिप

विराट कोहली और जयंत यादव के बीच आठवें विकेट के लिए रिकॉर्ड 241 रन की पार्टनरशिप हुई. ये पार्टनरशिप 352 बॉल पर पूरी हुई. भारत की ओर से आठवें विकेट के लिए पार्टनरशिप का ये नया रिकॉर्ड है.

इससे पहले हाईएस्ट पार्टनरशिप का रिकॉर्ड अजहरुद्दीन और अनिल कुंबले के नाम था. उन्होंने नवंबर 1996 में कोलकाता में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 8th विकेट के लिए 161 रन जोड़े थे.

नौवें नंबर पर भारत के लिए लगी पहली सेन्चुरी

जयंत यादव ने इस मैच में एक खास रिकॉर्ड अपने नाम किया. वे किसी टेस्ट मैच में नौवें नंबर पर आकर सेन्चुरी लगाने वाले पहले इंडियन प्लेयर बने. 84 साल के टेस्ट इतिहास में जयंत से पहले ये कारनामा कोई भारतीय खिलाड़ी नहीं कर सका था.

अच्छा काम ही स्टार बनाता है : सरिता जोशी

6 साल की उम्र में ही ऐक्टिंग के क्षेत्र में कदम रखने वाली कलाकार सरिता जोशी को लीड रोल निभाने का मौका 16 साल की उम्र में मिला. उन्होंने हिंदी, मराठी, गुजराती सभी भाषाओं में काम किया है. उन्होंने थिएटर से ऐक्टिंग शुरू की और आज भी वे टैलीविजन सीरियल, फिल्म और थिएटर सभी को समयसमय पर कर रही हैं. उन का मशहूर सीरियल ‘बा, बहू और बेबी’ है, जिस की वजह से वे हर घर में जानी गईं.

5 दशक से ज्यादा समय तक काम कर चुकीं सरिता जोशी को अभी भी लगता है कि उन्हें नई पीढ़ी से बहुतकुछ सीखना बाकी है. हर दिन उन का नया होता है. हर काम उन के लिए चुनौती है.

स्वभाव से नम्र और हंसमुख सरिता जोशी की शादी थिएटर डायरैक्टर प्रवीण जोशी के साथ हुई. उन की 2 बेटियां केतकी दवे और पूरबी जोशी हैं. दोनों ही ऐक्टिंग के क्षेत्र से जुड़ी हैं.

इन दिनों सरिता जोशी ‘सब टीवी’ के सीरियल ‘खिड़की’ में दक्षिण भारतीय महिला अम्मां का किरदार निभा रही हैं. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश:

सीरियल ‘खिड़की’ में आप का रोल क्या है?

इस में मैं पहली बार दक्षिण भारतीय औरत का किरदार निभा रही हूं. इस के लिए मैं ने काफी तैयारी की है. इस में हम दिखाना चाहते हैं कि हमारे मन की एक खिड़की होती है, जो दिमाग से चलती है. वह हमेशा खुली रखनी चाहिए. सही को अंदर आने दें और गलत के लिए खिड़की को बंद कर दें.

पहले और आज की टैलीविजन इंडस्ट्री में आप क्या फर्क पाती हैं?

आज इंडस्ट्री की मांग अलग है. पहले जो स्टार होता था, उस की जगह बन जाने के बाद उसे ज्यादा समय नहीं देना पड़ता था. चरित्र कलाकार और नए कलाकारों को ज्यादा समय दे कर अपनेआप को साबित करना पड़ता था, तब 13 एपिसोड बनते थे, एक समय के बाद शो खत्म हो जाता था. 6 घंटे से 9 घंटे के बाद शूटिंग भी बंद हो जाती थी, जिस से सभी कलाकारों को आराम करने का मौका मिलता था या फिर वे अपने परिवार की देखभाल कर पाते थे.

अब ऐसा नहीं होता. सभी को 10 से 12 घंटे काम करना पड़ता है, जो कई बार तकलीफ वाला होता है. कलाकार तनाव से भर जाते हैं. कई बार नींद कम होने से बीमार भी हो जाते हैं.

मेरे हिसाब से हर प्रोड्यूसर को यह समझना जरूरी है कि एक समयसीमा तय हो, ताकि सभी कलाकार बेहतरीन परफौर्मैंस दे सकें. किसी भी कलाकार के साथ कोई हादसा न हो. इस के अलावा अब काम खूब मिलता है. पैसा भी अच्छा मिल जाता है.

आप अपने किस किरदार को सब से ज्यादा पसंद करती हैं?

मैं ने अलगअलग तरह के तमाम किरदार किए हैं, लेकिन ‘बा, बहू और बेबी’ में ‘बा’ का किरदार, गुजराती फिल्म ‘गंगूबाई’ में गंगूबाई, फिर सकुबाई वगैरह सभी किरदार एकदूसरे से अलग और पसंदीदा हैं.

आप नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ कैसे तालमेल बिठाती हैं?

नई पीढ़ी अच्छी है. वह किसी भी तरह की चुनौती लेने से पीछे नहीं हटती. टीम के सारे लोग मुझे खूब इज्जत देते हैं. सब मुझे ‘बेन’ या ‘बा’ बुलाते हैं. अच्छा लगता है कि मैं इस उम्र में भी काम कर रही हूं.

मैं ने आज तक जो भी काम किया, बहुत संतुष्टि मिली. हर तरह के अवार्ड मिले. लोगों का प्यार मिला. मुझे उन के साथ काम करने में कोई समस्या नहीं होती.

आप किसी रोल को किस तरह चुनती हैं?

मैं कहानी सुनने के बाद अपना रोल देखती हूं. मैं उस में अपनी कितनी छाप छोड़ सकती हूं, यह सोचती हूं. मैं हमेशा किरदार पर ध्यान देती हूं.

आजकल टैलीविजन पर सांप, बिच्छू, डायन, मक्खी और न जाने क्याक्या दिखाया जाता है. क्या आप को लगता कि टैलीविजन के शो ऐसे होने चाहिए?

अगर यह सब काल्पनिक तौर पर कहानी को मजेदार बनाने के लिए है, तो कुछ हद तक ठीक है. पर किसी को गुमराह करना या अंधविश्वास में जकड़ने के लिए दिखाया जाना गलत है, क्योंकि इस से किसी का घर उजड़ सकता है, कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है.

मुझे अगर इस तरह के धारावाहिक में काम करने के लिए बुलाया जाता है, तो मैं माफी मांगने के साथ हाथ जोड़ कर मना कर देती हूं. पैसे के लिए मैं कुछ भी नहीं करती. मैं मिडिल क्लास परिवार से हूं और बहुत मेहनत कर मैं यहां तक पहुंची हूं.

ऐसे नए कलाकारों को आप क्या मैसेज देना चाहती हैं, जो आएदिन ऐक्टिंग के लिए अपना शहर और गांव छोड़ देते हैं?

अपने काम से ही हर कोई ‘स्टार’ बनता है. यह किसी भी क्षेत्र में मुमकिन है. उस के लिए केवल ऐक्टिंग ही सबकुछ नहीं है. अगर आप में ऐक्टिंग की कूवत है, तो मेहनत करें, ट्रेनिंग लें, फिर अपना शहर छोड़ें. इस के बाद भी अगर कामयाब न हों, तो टूटे नहीं. कुछ और काम तलाश करें.

खाली समय में आप क्या करना पसंद करती हैं?

मैं अखबार, पत्रिकाएं, किताबें, कविताएं वगैरह पढ़ती हूं, गाने सुनती हूं, खासकर पुराने गीत. इस के अलावा मैं सुबह शाम थोड़ाबहुत टहल लेती हूं. 

गरमा गरम सीन में कोई हर्ज नहीं : सैयामी खेर

बचपन से ही ऐक्टिंग करने का शौक रखने वाली सैयामी खेर नासिक की रहने वाली हैं. उन्होंने तेलुगु फिल्मों से अपना ऐक्टिंग कैरियर शुरू किया और ‘मिर्ज्या’ उन की पहली हिंदी फिल्म है. सैयामी खेर की दादी उषाकिरण पुराने जमाने की हीरोइन रह चुकी हैं. उन की बूआ तन्वी आजमी हैं. हालांकि उन के पिता एक मौडल रह चुके हैं और उन की मां ‘मिस इंडिया’ रह चुकी हैं, पर वे सब सैयामी खेर को फिल्मी चकाचौंध से दूर रखना चाहते थे, इसलिए वे नासिक में रहे, लेकिन सैयामी को अदाकारी विरासत में मिली है.

खेलों में दिलचस्पी रखने वाली सैयामी खेर को पता नहीं था कि वे हिंदी फिल्मों में इतने बडे़ बैनर तले काम करेंगी. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश:

आप का फिल्मों में कैसे आना हुआ?

मैं नासिक की रहने वाली हूं. मुझे पहाड़ों पर जाना और क्रिकेट खेलना पसंद था. मेरी पढ़ाईलिखाई मुंबई में हुई. कालेज के दौरान मैं हमेशा थिएटर में भी भाग लेती थी. इस के अलावा नादिरा बब्बर के साथ ‘एकजुट’ थिएटर ग्रुप में भी काम किया. मैं ने बहुत सारे इश्तिहारों में भी काम किया. इस तरह मैं ऐक्टिंग की तरफ मुड़ी. मुझे पहले तेलुगु फिल्म मिली और अब हिंदी.

आप को हिंदी फिल्म ‘मिर्ज्या’ का औफर कैसे मिला?

इस फिल्म के आडिशन देने के 6 महीने बाद पता चला कि मुझे यह फिल्म मिली है. इस दौरान डायरैक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने मुझे दिल्ली में 3 महीने की घुड़सवारी सीखने के लिए भेजा था.

हर्षवर्धन कपूर के साथ काम करने का तजरबा कैसा रहा?

बहुत अच्छा था. हम दोनों की कैमिस्ट्री अच्छी रही. हर्षवर्धन ने मुझे हर सीन को करने में सहज बनाया.

इस फिल्म में किस सीन को फिल्माना सब से ज्यादा मुश्किल था?

इस फिल्म की  शूटिंग राजस्थान और लद्दाख में हुई. दोनों ही जगह की आबोहवा बहुत अलग थी. एक जगह तो मुझे बर्फ के पानी में उतर कर जाना पड़ा. वह सीन मेरे लिए बहुत ही मुश्किल था, लेकिन मैं ने किया.

फिल्मों में गरमा गरम सीन करने में आप कितना सहज होती हैं?

अगर वे सीन फिल्म का हिस्सा हैं, स्क्रिप्ट की मांग हैं, तो करने में कोई हर्ज नहीं. लेकिन जरूरत के बिना मैं कोई गरमागरम सीन नहीं करती.

खाली समय में आप क्या करना पसंद करती हैं?

मुझे म्यूजिक और स्पोर्ट्स का काफी शौक है. समय मिलने पर मैं लता मंगेशकर, किशोर कुमार, आशा भोंसले वगैरह गायकों के पुराने गीत सुनती हूं. इस के अलावा मैं सुबहसवेरे दौड़ती हूं. मेरी कोशिश रहती है कि मैं हर दिन 20 किलोमीटर दौड़ लूं. मैं कई बार मुंबई मैराथन भी दौड़ चुकी हूं. ऐक्टिंग के अलावा मुझे खेलना बहुत पसंद है. मैं सचिन तेंदुलकर की फैन हूं.

आप का ड्रीम प्रोजैक्ट क्या है?

मुझे राकेश ओमप्रकाश मेहरा के डायरैक्शन में बनी कोई फिल्म, जिस में अमिताभ बच्चन हों, करने की इच्छा है. इस के अलावा मैं हमेशा कैमरे के सामने रहना चाहती हूं.

आप की कौन सी फिल्में रुपहले परदे पर आ रही हैं?

अभी मैं मणिरत्नम की तेलुगु फिल्म में काम करने वाली हूं.         

अब तो आंखें खोलो

सरकार नोटबंदी के बाद लगातार कहती जा रही है कि यह परेशानी केवल कुछ दिन की है. यह ‘केवल कुछ दिन’ क्या होता है और क्या किसी भी सरकार को केवल कुछ दिन के लिए देश की सारी जनता के साथ खेलने का हुक्म देने का हक है? सिर्फ इसलिए कि मई, 2014 में एक व्यक्ति को लोक सभा चुनावों में बहुमत दे दिया गया था? 25 जून, 1975 की तरह केवल कुछ दिन अनुशासन के नाम पर आपातस्थिति घोषित करने का मौलिक हक क्या हर किसी सरकार के पास है?

सरकारों के पास बहुत कुछ कराने और करने के हक हैं क्योंकि उन के पास फौज, पुलिस और सरकारी नौकरों की एक बड़ी जमात है और हर नागरिक असल में एकदम अकेला होता है और अकेले उस के घर के किसी निष्ठुर, मनमानी करने वाले शासक से निबटने की हिम्मत नहीं होती. अकेला नागरिक तो इतना भयभीत होता है कि वह गली के गुंडों से अपनी कमसिन बेटी की रक्षा नहीं कर पाता, पड़ोसी के भूंकते कुत्तों को चुप नहीं करा सकता.

केवल कुछ दिन किसी को जेल में बंद कर देना पुलिस का बाएं हाथ का काम है जबकि देश का संविधान इस के सख्त खिलाफ है. केवल कुछ दिन के लिए बिजली, पानी काट देना आम है. केवल कुछ दिन के लिए सड़कें बंद कर के उन्हें खोद डालना या उन पर कोई धार्मिक उत्सव करा देना भी आम है, पर क्या ये सरकार के नैतिक हकों में से हैं? केवल कुछ दिन लाइनों में लग कर अपनी ही गाढ़ी कमाई के नए नोट ले लेने की कैद काटना सिर्फ इसलिए कि इस से कुछ जो आराम कर रहे हैं व कुछ अमीर कष्ट में होंगे और उन की संपत्ति धुल कर राख बन जाएगी, क्या बुद्धिमानी का काम है?

बस कुछ दिन बाद अच्छे दिन आएंगे यह गणित आज भक्त लोग सोच नहीं रहे और इसलिए तुगलकी फैसले पर बोल नहीं रहे वरना यह पक्का है कि लखनऊ के हजरतगंज में तीसरी मंजिल में 2 कमरों के मकान में रहने वाले के दिन अच्छे नहीं आएंगे अगर दिल्ली की पौश कालोनी सैनिक फार्म के किसी सेठ के क्व10 करोड़ के प्लौट बेकार हो भी जाएं.

देश को जो काला धन घुन की तरह खा रहा है, शेर की तरह नहीं. शेर को तो गोली से मार कर खुद को सुरक्षित किया जा सकता है पर घुन को मारने के लिए गेहूं या आटे में जहर मिला कर उसे आदमी को खाने को कहा जाएगा तो घुन चाहे मरे या न मरे खाने वाला अवश्य मरेगा.

सरकार ने कहा है कि यह परेशानी लेबर पेन की तरह है. इस के बाद बच्चे पैदा होंगे तो खुशी होगी. हां, यह लेबर पेन है पर बलात्कार के बाद ठहरे गर्भ के कारण, जिस का गर्भपात नहीं होने दिया. हां, बच्चा पैदा होगा, पर उस का पिता कौन है यह पिता को भी पता नहीं होगा और मां उसे सड़क पर छोड़ जाएगी, क्योंकि यह बच्चा इच्छा से नहीं बल्कि जबरन पैदा हुआ है.

सरकारी बलात्कार हुआ है जनता पर. ज्यादा से ज्यादा उसे उस नियोग से पैदा हुए बच्चे का दर्जा दिया जा सकता है जिस का वर्णन रामायण, महाभारत में खुले शब्दों में है और जिस के अभिशाप को दोनों महाकाव्यों के पात्रों ने जीवन भर ढोया है और रामायण, महाभारत इन पात्रों की कुंठा का पर्याप्त वर्णन है.

इस तरह के अच्छे दिन कभी खुशी नहीं देंगे, जिन का जन्म झूठे वादों और देशव्यापी महामारी से हुआ है. यह वह बच्चा होगा जिस पर जन्मजात ठप्पा लगा होगा. कतारों में लगे लोग ही नहीं वे लोग भी जिन की दराजों, अलमारियों, गुदड़ों से वर्षों तक पुराने नोट समयसमय पर निकलते रहेंगे और जो सरकारी धौंस पट्टी के नतीजे की वजह से बेकार हो जाएंगे. वे हर जने को उस बलात्कार के दर्द की याद दिलाएंगे जो किसी भी औरत ने बस कुछ देर के लिए सहा होगा. पर दिखावा जीवन भर खलता रहता है.

प्यार के बदले सैक्स नहीं

प्यार एक गहरा और खुशनुमा एहसास है. जब किसी से प्यार होने लगता है तो हम शुरुआत में अकसर उस की सकारात्मक चीजें ही देखते हैं. उस समय हमें अपना अच्छाबुरा कुछ समझ नहीं आता और यही वह खुमारी होती है जब हम प्रेमी के प्यार के बदले में उस की हर जायजनाजायज मांग भी पूरी करने लगते हैं. लेकिन कुछ पल ठहर कर एक बार सोच लें कि कहीं आप प्रेमी को प्यार के बदले अपना शरीर तो नहीं सौंप रही हैं. अगर ऐसा है तो संभल जाइए, क्योंकि यह सही नहीं है. यह वक्त सिर्फ प्यार करने का है, सैक्स तो शादी के बाद भी हो सकता है. इस में आखिर इतना उतावलापन और जल्दबाजी क्यों?

प्यार को प्यार ही रहने दें

प्यार एक खूबसूरत एहसास है, इसे दिल से महसूस करें न कि शरीर से. एकदूसरे के साथ समय बिताएं, एकदूसरे को समझें, प्यारभरी बातें करें, भविष्य के सपने बुनें, एकदूसरे की केयर करें, अपनेपन का एहसास साथी के मन में जगाएं, उसे विश्वास दिलाएं कि आप उस के लिए एकदम सही जीवनसाथी साबित होंगे. अपने कैरियर पर ध्यान दें. खुद खुश रहें और साथी को भी खुश रखें. यह वक्त बस यही करने का है बाकी जो भावनाएं हैं उन्हें शादी के बाद के लिए बचा कर रखें.

प्यार में आकर्षण बना रहेगा

अगर आप किसी से प्यार करती हैं और सैक्स नहीं किया है तो सैक्स को ले कर चाह और एक आकर्षण बना रहने के कारण साथी के प्रति खिंचाव हमेशा बना रहेगा, लेकिन एक बार सैक्स हो जाने के बाद कोई नयापन नहीं रहेगा और वह आकर्षण जो आप को एकदूसरे के प्रति खींचता था, खत्म हो जाएगा.

अपराधबोध नहीं होगा

एक बार संभोग करने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता. कई बार बाद में पता चलता है कि प्रेमी आप के लिए सही नहीं है तब वक्त से पहले संबंध बना लेने का अपराधबोध होता है. इसलिए जरूरी है कि जब तक पूरी तरह से आश्वस्त न हो जाएं तब तक संबंध न बनाएं.

उत्सुकता बनी रहेगी

जब कोई भी काम समय पर करते हैं तो उस का आनंद ही अलग होता है, लेकिन जब आप सैक्स शादी से पहले ही कर लेते हैं तो इसे ले कर कोई उत्सुकता नहीं रहती. यदि सैक्स न करने से आप की उत्सुकता बनी रहती है तो बेहतर है इसे शादी तक न किया जाए.

यौन रोगों से बचे रहेंगे

सैक्स के प्रति लापरवाही यौन रोग होने का खतरा काफी हद तक बढ़ा देती है. उस समय आप की प्राथमिकताएं शारीरिक आकांक्षाओं को पूरा करना होता है, लेकिन सैक्स करते समय किनकिन सावधानियों का खयाल रखना चाहिए यह बात आप सोचते नहीं हैं और गंभीर बीमारी की गिरफ्त में आ जाते हैं.

सच्चे प्यार में सैक्स का कोई मतलब नहीं

सच्चा प्यार किसी को देखते ही नहीं हो जाता, यह एकदूसरे को जानने और समझने के बाद होता है. सच्चे प्यार में कोई जल्दबाजी नहीं होती, इस में ठहराव होता है. एकदूसरे की आपसी अंडरस्टैंडिंग होती है, एकदूसरे पर भरोसा होता है, एकदूसरे की कद्र होती है. सच्चा प्यार हमेशा के लिए होता है. इस में प्रेमी एकदूसरे से दिल की गहराइयों से जुड़े होते हैं. एकदूसरे के प्रति अपनीअपनी जिम्मेदारियों का एहसास होता है इसलिए उन्हें पता होता है कि सैक्स का सही समय शादी के बाद ही है और ऐसा करने के लिए वे एकदूसरे पर जोर भी नहीं डालते, क्योंकि इस के लिए इंतजार करना भी उन के इसी सच्चे प्यार का एक अहम हिस्सा होता है.

प्रेमी की पहचान करने का सही वक्त

यदि प्रेमी बारबार आप से शारीरिक संबंध बनाने पर जोर दे रहा है तो इस का मतलब उसे आप से ज्यादा इंट्रस्ट संबंध बनाने में है. उसे आप की भावनाओं का खयाल रखते हुए शादी तक इस चीज के लिए सब्र रखना चाहिए, लेकिन अगर वह ऐसा नहीं कर पा रहा है तो या तो उस की नीयत में खोट है या फिर वह आप का साथ निभाने के काबिल ही नहीं है.

सैक्स के नुकसान

बोरियत हो जाएगी

कुछ लोगों के लिए सैक्स ही सबकुछ होता है और जब उन्हें उस की पूर्ति हो जाती है तो उन की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और फिर उन्हें प्रेमिका में कोई रुचि नहीं रहती. उन्हें उस के साथ समय बिताने, घूमने, हंसीमजाक करने में बोरियत लगने लगती है. ऐसे में रिश्ते का लंबे समय तक खिंच पाना मुश्किल हो जाता है.

प्रैग्नैंट हो गईं तो मुश्किल

बाजार में कई तरह के गर्भनिरोधक उपलब्ध हैं, लेकिन कई बार वे भी पूरी तरह से सक्षम नहीं होते. कई बार आप को पता भी नहीं चलता कि आप गर्भवती हैं और जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. इस के बाद मानसिक परेशानी का ऐसा दौर शुरू होता है जो आप को अंदर तक तोड़ कर रख देता है.

शादी न हुई तो दिक्कत

आज सारी परिस्थितियां आप के पक्ष में हैं और आप को लग रहा है कि आप के प्रेमी से ही आप की शादी होगी, लेकिन समय बदलते देर नहीं लगती, हो सकता है कल परिस्थितियां कुछ और हों. आप दोनों की किन्हीं कारणों से शादी न हो पाए, तो फिर क्या करेंगी?

जिस के साथ आप की शादी होगी अगर उस को आप के शादी से पहले के संबंधों के बारे में पता चल गया तो जिंदगी दूभर हो जाएगी या फिर हमेशा आप डरती रहेंगी कि कहीं यह बात खुल गई तो? ऐसे में आप शादी के बाद के खूबसूरत पलों को ढंग से ऐंजौय नहीं कर पाएंगी.

रिश्ते से बाहर आना मुश्किल

अगर आप अपने बौयफ्रैंड के साथ बिना संबंध बनाए डेट कर रहे हैं और आप को लगता है कि आप दोनों इस रिश्ते को आगे बढ़ाने में सहमत नहीं हैं तो रिश्ता खत्म करना आप के लिए काफी आसान होता है, लेकिन एक बार शारीरिक संबंध बन जाने के बाद उस रिश्ते से बाहर आना भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर बहुत कठिन हो जाता है.

मलाल न हो

आप जिस व्यक्ति के साथ संबंध बना रही हैं वह आप के लिए काफी महत्त्वपूर्ण होना चाहिए. केवल शारीरिक जरूरतें पूरी करने के लिए संबंध बनाना सही नहीं है.

ब्लैकमेलिंग का शिकार न हों

कई बार देखने में आता है कि जिस पर हम सब से ज्यादा भरोसा करते हैं वही हमारा विश्वास तोड़ता है. आएदिन अखबार ऐसी सुर्खियों से भरे रहते हैं कि प्यार करने के बाद सैक्स किया, फिर धोखा दिया. अकसर प्रेमी इस तरह की वारदात को अंजाम देते हैं इसलिए अगर बौयफ्रैंड धोखेबाज निकला और उस ने आप का कोई वीडियो बना लिया और फिर इस के जरिए आप को ब्लैकमेल करने लगा तो फिर क्या होगा?

माना कि आप का बौयफ्रैंड ऐसा नहीं है पर यह काम उस का कोई दोस्त या कोई अनजान भी तो कर सकता है, तब क्या करेंगी? किस से मदद मांगेंगी? इसलिए ऐसा काम करना ही क्यों, जिसे करने के बाद परेशानी भुगतनी पड़े. इसलिए तमाम बातों को ध्यान में रख कर ही आगे कदम बढ़ाएं अन्यथा ताउम्र इस का दंश झेलना पड़ेगा.      

सैक्स ही नहीं, प्यार जताने के और भी हैं तरीके

‘लव यू डार्लिंग’, ‘मिस यू माई लव’ यह तो आज के युवा अपनी गर्लफ्रैंड या बौयफ्रैंड से कई बार कहते हैं, लेकिन जब अपना प्यार जताने की बात आती है तो उन्हें एकमात्र तरीका सूझता है सैक्स, क्योंकि वे नहीं जानते कि सैक्स के अलावा भी प्यार जताने के हजार तरीके हैं.

माना कि प्यार अंतरंग होता है, लेकिन इस का मतलब सिर्फ यौन संबंध बनाना ही नहीं होता. यदि आप अपने लवर की आंखों में देखते ही सारी दुनिया भूल जाते हैं, उस का आप के नजदीक होना ही आप की सारी दुनिया है और आप के सारे दुखदर्द की दवा भी वही है तो आप उस से प्यार करते हैं, लेकिन यहां सैक्स बिलकुल नहीं है.

कोई भी रिश्ता बिना प्यार के आगे नहीं बढ़ता. किसी भी रिश्ते में प्यार करना और उसे जताना दोनों महत्त्वपूर्ण हैं और उसे जताने के भी अलगअलग तरीके हैं. यदि आप अपने बौयफ्रैंड या गर्लफ्रैंड को प्यार करते हैं, लेकिन जताना नहीं आता तो आप का वह प्यार आप के बौयफ्रैंड तक कैसे पहुंचेगा? इसलिए प्यार को बयां करने के लिए सिर्फ ‘आई लव यू’ या ‘मिस यू’ कहना ही काफी नहीं, आप को पार्टनर से अपना प्यार जाहिर करना होगा, जताना होगा.

आप दिलों का मिलाप कर के भी अपने प्यार को जता सकते हैं, अपने रिश्ते को मजबूत और लौंग लास्टिंग बना सकते हैं. आप ऐसा कुछ करें कि आप का पार्टनर आप के प्यार को महसूस कर सके.  आइए, जानते हैं सैक्स के अलावा क्या हैं प्यार जताने के खास तरीके :

फूल भेजें

अपने प्यार को जताने का सब से रुमानी और सदाबहार तरीका है प्रेमी को फूल भेजना. आप के द्वारा भेजे गए फूलों की खुशबू बता देगी कि आप अपने प्रेमी को कितना प्यार करते हैं.

पसंदीदा रैस्टोरैंट में डिनर करवाएं

यदि आप के प्रेमी को चाइनीज फूड पसंद है तो आज ही एक अच्छे चाइनीज रैस्टोरैंट में अपने व उस के लिए एक टेबल बुक करें और उसे इन्वाइट कर डिनर करवाएं. आप का यह सरप्राइज दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. जगमगाती मोमबत्तियों के बीच बिताए ये प्यार भरे लमहे हमेशा याद रहेंगे.

रोमांटिक मूवी देखें

हाल ही में रिलीज कोईर् रोमांटिक मूवी देखने हेतु हौल की कौर्नर वाली सीट्स बुक करें और साथ बैठ कर मूवी देखें. हाथों में हाथ डाल कर बैठ कर मूवी के रोमांटिक सीन्स को साथसाथ देखना आप दोनों के प्यार में नजदीकियां लाएगा और जताएगा कि आप अपने प्रेमी से कितना प्यार करते हैं. ऐसी रोमांटिक आउटिंग से आप को अपना प्यार जताने में मदद मिलेगी.

प्रेमी की पसंदीदा चीजों का ध्यान रखें

प्रेमी के प्रति अपना प्यार जताने का एक अन्य महत्त्वपूर्ण तरीका है जैसे उस की मनपसंद ड्रैस पहनना, उस की पसंद का परफ्यूम लगाना. अगर आप के बौयफ्रैंड को आप की रैड कलर की ड्रैस अच्छी लगती है तो उसी ड्रैस को पहन कर उसे रिझाएं, अपना प्यार जताएं.

यूएस की रोचेस्टर यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि पुरुष लाल रंग की तरफ खासतौर से आकर्षित होते हैं, फिर चाहे वह लाल रंग की ड्रैस हो या रैड लिपस्टिक.

ड्रैस के अलावा आप उन को मनपसंद हेयरस्टाइल भी बना कर रिझा सकती हैं जैसे अगर आप उन्हें खुले बालों में पसंद हैं तो अपने लंबे लहराते हुए बालों से उन्हें आकर्षित करें और अपना प्यार जताएं.

गिफ्ट्स दें

आप की गर्लफ्रैंड को पिछले दिनों एक सैक्सी ड्रैस पसंद आई थी जिसे वह खरीदना चाहती थी, लेकिन वह अपना एटीएम कार्ड घर भूल गई थी, इसलिए खरीद नहीं पाई. आप वह ड्रैस खरीद कर उसे सरप्राइज गिफ्ट करें. यकीन मानिए आप का गिफ्ट देख कर वह आप को गले लगा लेगी.

आप के बौयफ्रैंड का आप को आप की पसंद की ड्रैस गिफ्ट कराना दर्शाता है कि वह आप को बहुत प्यार करता है, क्योंकि कोई किसी को यों ही सरप्राइज गिफ्ट नहीं देता. इसी तरह आप भी अपने बौयफ्रैंड के बर्थडे पर सरप्राइज पार्टी अरेंज कर के अपना प्यार जता सकती हैं.

लव मैसेजेस भेजें

जब भी फ्री हों अपने पे्रमी या प्रेमिका को प्यार भरे, अपनी फीलिंग्स जाहिर करते हुए लव मैसेजेस भेजें. चाहें तो ई कार्ड भी सैंड कर सकते हैं. इस के अलावा रोमांटिक सौंग्स जो आप के लवर के फेवरिट हों उन्हें सैंड करें.

ऐसा करना उन के प्रति आप के प्यार को जताएगा और आप के प्यार में खुशनुमा एहसास और नजदीकी लाएगा जो सैक्स संबंध बनाने से भी कहीं अधिक प्रभावी और लौंग लास्टिंग होगा, हमेशा उन की यादों में रहेगा.

गेम खेलें

कई ऐसे खेल हैं जिन्हें खेल कर आप अपने प्रेमी के प्रति अपने प्यार को जता सकते हैं. इन खेलों में पिलो फाइट सब से मजेदार खेल है जिसे खेलते हुए आप न केवल एकदूसरे के नजदीक आएंगे बल्कि एकदूसरे के प्रति अपना प्यार जताने में भी सफल होंगे.

इस के अलावा एकदूसरे की आंखों में आंखें डाल कर लगातार एकदूसरे को देखते रहने वाला रोमांटिक खेल भी आप दोनों के बीच प्यार बढ़ाने में मददगार होगा. इसी तरह स्क्रैबल, लूडो जैसे बोर्ड गेम्स खेलते हुए भी आप एकदूसरे के नजदीक आ सकते हैं और सैक्स करने के बजाय अधिक नजदीकी पा सकते हैं, अपना प्यार जता कर संबंधों में प्रगाढ़ता ला सकते हैं.

म्यूजिक  

संगीत हमेशा दिलों को जोड़ने का काम करता है. आप जब भी एकसाथ हों दोनों के पसंदीदा गीतों को सुन कर एकदूसरे के प्रति प्यार जता सकते हैं. चाहें तो अच्छे से रोमांटिक म्यूजिक के साथ मद्धम रोशनी में एकदूसरे की बांहों में बांहें डाल कर थिरक भी सकते हैं. ये नजदीकियां किसी सैक्स प्लीजर से कहीं अधिक स्थायी होंगी.

एकदूसरे को गुदगुदाएं, सहलाएं

यदि आप अपने लवर के साथ बैठे हैं तो अपना प्यार जताने के लिए उसे गुदगुदाएं. गुदगुदी आप उस के गले व कान के पीछे कर सकते हैं. गले की तरह कान भी शरीर का एक बहुत सैंसिटिव हिस्सा होता है. इस से एकदूसरे के नजदीक आने में मदद मिलती है.

इस तरीके से आप का प्यार और गहरा होगा. आप एकदूसरे के बालों में उंगलियां फिरा कर अपने प्यार को दर्शा सकते हैं. ऐसा करने से आप को नजदीकी का एहसास होगा.

सैक्स संबंध के बगैर अगर आप प्यार जताना चाहते हैं तो अपने पार्टनर को रिझाएं, उस से थोड़ा रूठें, फिर उसे मनाएं, सैक्सी ड्रैस पहन कर उस की ऐक्साइटमैंट बढ़ाएं. ऐसा करतेकरते एकदूसरे  की बांहों में समा जाएं. ऐसा कर के आप न केवल अपना प्यार जता सकते हैं बल्कि अपने प्रेमी या प्रेमिका को दीवाना भी बना सकते हैं. इस से आप दोनों के बीच प्यार और गहरा होगा.

किस करें

जब भी आप को अपने प्रेमी पर प्यार आए तो आप एकदूसरे को किस करें. किस प्यार जताने व नजदीक लाने का सब से महत्त्वपूर्ण साधन है, क्योंकि जब आप प्यार से एकदूसरे को किस करते हैं तो आप का प्यार सुदृढ़ होता है. ऐसा करते हुए आप दोनों को एकदूसरे के नजदीक होने का एहसास होता है. जब आप किस करें, एकदूसरे की सांसों को महसूस करें और अपना प्यार जताएं.

फिल्म ‘राज रिबूट’ में मुख्य भूमिका निभाने वाली पंजाबी लड़की कृति खरबंदा का मानना है, ‘‘शारीरिक अनुकूलता एक समय के बाद खत्म हो सकती है लेकिन प्यार हमेशा कायम रहता है.’’ इसलिए सैक्स के अलावा भी अपना प्यार जताते रहें.   

दिल पर मत ले यार

अब जा कर यह समझ में आया कि देश में बेटियों को बचाने की वकालत इतने जोरशोर से क्यों की जा रही थी. भाई लोगों का भरोसा बेटों पर से उठ चुका लगता है. बेटियों को कोख में ही मौत की नींद सुलाने वाले मांबाप को भी शायद अब शर्मिंदगी हो रही होगी. रियो ओलिंपिक के नतीजे और देश के कर्णधारों द्वारा ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह देने के पीछे भी शायद यही मकसद होगा. ज्यादा बच्चे होंगे, तो बेटियों की तादाद बढ़ेगी. बेटियों की तादाद बढ़ेगी, तो मौडलों की तादाद भी बढ़ेगी और धर्म भी महफूज रहेगा.

रियो ओलिंपिक में बेटियों की कामयाबी ने शायद बेटों को भी नाराज कर दिया लगता है. सोशल मीडिया में वायरल हो रही नौजवानों की भड़ास से तो यही लग रहा है. सरहद पर तैनात जवानों और खिलाडि़यों के मर्द कोच का हवाला देने के पीछे उन का और क्या मकसद हो सकता है?

लगे हाथ मेरे एक दोस्त नीति विषयक विधेयक में सुधार की बात करने लगे हैं. कल मिले थे. कह रहे थे कि ‘दइया रे’, ‘उई मां’, ‘छी: रे’,

‘न बाबा’, ‘हाय राम’, ‘हाय अल्लाह’, ‘धत तेरे की’, ‘तोबातोबा’ जैसे संवेदनशील शब्द लड़कों को ट्रांसफर कर देने चाहिए.

मेरे ये वाले दोस्त इंपोर्टेड माइंडैड हैं. लिफाफा देख कर मजमून भांप लेते हैं. उड़ती चिडि़या के पर गिन लेते हैं. हद तो यह है कि उन्हें अगर एक्वेरियम के सामने खड़ा कर दिया जाए, तो वे यह भी बता देते हैं कि एक्वेरियम में कौन सी मछली है और कौन सा मछला है.

एक दिन वे कह रहे थे, ‘‘बदलाव कुदरत का नियम है, इसलिए आदमी को हर बदलाव के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए.’’

मैं बोला, ‘‘किस बदलाव की बात कर रहे हो?’’

वे कहने लगे, ‘‘मुझे तो एक बड़े बदलाव की बू आ रही है. मुझे लगता है कि जल्द ही वह समय आने वाला है, जब मर्द बाजारों और सड़कों से गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो जाएगा. जैसा थोड़े दिनों पहले हुआ करता था. तब बाजारों और सड़कों में औरतों का दीदार मुश्किल से होता था. अब मर्दों का दीदार मुश्किल होने जा रहा है. कहींकहीं और कभीकभी ही दिखेगा.

‘‘घर से निकलते हुए बुखार के मरीज की तरह कांपेगा. डरेगा कि कहीं किसी लड़की से सामना न हो जाए. बाप अपने जवान हो रहे बेटों को सलाह देंगे कि अकेले मत जाओ… मुन्ना को साथ ले लो… ज्यादा देर तक बाहर मत रहो वगैरह.

‘‘और बड़ी बहनें अपने छोटे भाइयों से कुछ इस तरह पेश आएंगी, ‘ऐ, दरवाजे पर क्यों खड़े हो? चलो, अंदर.’’’

उन की बात सुन कर मैं मुसकरा दिया, तो वे बोले, ‘‘हंसो मत. समाज में तेजी से हो रहे नए बदलाव को महसूस करो.’’

‘‘अच्छा…’’ मुझे उन की बातों में मजा आने लगा था. मजा लेते हुए मैं बोला, ‘‘फ्यूचर में और क्याक्या बदलाव आने वाला है?’’

वे बोले, ‘‘अभी जिस तरह हम यहां बैठ कर चाय सुड़क रहे हैं, फ्यूचर में ऐसा नहीं होगा. हमारी जगह यहां लड़कियां बैठी चाय सुड़क रही होंगी. और यही नहीं, बल्कि हर नुक्कड़, होटल और पानठेलों पर लड़कियां ही होंगी.’’

‘‘तो हम कहां होंगे?’’

‘‘हमारा वजूद घरों में सिमट कर रह जाएगा.’’

‘‘यानी हम बच्चे खिला रहे होंगे?’’

‘‘बिलकुल ठीक,’’ वे बोले, ‘‘मैं यही कहने जा रहा था…’’

अभी वे अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाए थे कि तभी रमटी हमारे हाथों में चाय का गिलास थमा गया, जिस से हमारी बातों में थोड़ी देर के लिए रुकावट पैदा हो गई.

उन्होंने चाय का एक लंबा घूंट लिया और होंठों पर जबान फेर कर अपनी बात आगे बढ़ाई, ‘‘मैं तो यह भी महसूस कर रहा हूं कि फ्यूचर में लड़कों की आदत, उन का बरताव और बातचीत में किस हद तक बदलाव आ सकता है. बातबात पर मूंछें मरोड़ने वाली हमारी बिरादरी की आदत दांतों में उंगली दबाने की हो जाएगी. अभी बातबात में वे जो ‘यार’ कहते हैं

‘छी:’ कहने लगेंगे. कहेंगे ‘छी: रे… कुसुम तो बड़ी वो है…’’’

लगे हाथ उन्होंने यह भी बता दिया कि 2 दोस्त आपस में किस तरह मिलेंगे, ‘‘अपने दोस्त से मिलने के लिए पत्नी, बड़ी बहन या मां से परमिशन लेनी होगी. कई बार यह कह कर डपट दिए जाएंगे कि क्या जरूरत है दोस्त से बारबार मिलने की. अगर उन्हें परमिशन मिल भी गई, तो मां, बहन या पत्नी उन्हें दोस्त के घर छोड़ने जाएंगी. जातेजाते वे यह हिदायत दे कर जाएंगी कि ज्यादा देर तक मत बैठना. इस तरह उन की मुलाकात होगी और वे आपस में इस तरह बतियाएंगे…

‘‘पहला, ‘हाय, कैसा है तू?’

‘‘दूसरा, ‘ठीक हूं. तू बता, कैसा है?’

‘‘पहला, ‘बस, कट रही है जैसेतैसे.’

‘‘दूसरा, ‘अच्छा, यह तो बता कल बाजार चलेगा क्या?’

‘‘पहला, ‘क्यों, कुछ खास बात है क्या?’

‘‘दूसरा, ‘नहीं रे… सोच रहा था कि 2-3 दिन के लिए भाई के घर चला जाऊं. इसलिए कुछ शौपिंग वगैरह करने का इरादा था.’

‘‘पहला, ‘ठीक है. मैं पूछ कर बताता हूं. खैर, तू बैठ न. उस के आने का समय हो गया है. मैं जरा यह काम कर लूं, फिर तेरे लिए चाय बनाता हूं.’’’

सभी भाईबहनें इसे भाई मियां यानी हमारे दोस्त के दिमाग का फुतूर समझ सकते हैं, लेकिन असल में यह रियो ओलिंपिक के बाद बहनों की तारीफ में पढ़े जाने वाले कसीदे और भाइयों की छीछालेदर के अलावा देश के कर्णधारों की ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह के बाद एक व्यंग्यकार की सोच है बस.

बहरहाल, सभी बहनों को साधुवाद. दुआ है कि बहनों की शान में ‘तू चीज बड़ी है मस्तमस्त’ जैसे गीत रचने वाले शायरों को उन के लिए पहले की फिल्मों की तरह ‘चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो…’ जैसे गीत रचने की अक्ल आए.

लेखक : सईद खान

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