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बिना गॉडफादर के अच्छी भूमिका मिलना मुश्किल : सना खान

मॉडलिंग से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री सना खान मुंबई की हैं. उन्होंने कई विज्ञापनों, फीचर फिल्म और टीवी रियलिटी शो में काम किया है. 17 साल की उम्र में उन्होंने पहली एड फिल्म शूट की थी. जिसको बहुत तारीफें मिली और एक के बाद एक एड करती गई. एड से ही उन्हें फिल्मों का ऑफर मिलना शुरू हुआ. अत्यंत बोल्ड स्वभाव की सना की फिल्म ‘वजह तुम हो’ रिलीज पर है उनसे मिलकर बात करना रोचक था. आइये जाने क्या कहती है सना अपने बारें में.

प्र. इस फिल्म का मिलना आपके लिए कितना उत्साहपूर्ण था?

इस फिल्म को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं. ‘वजह तुम हो’ के गाने और ट्रेलर लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं. इस फिल्म में मैं एक वकील की भूमिका निभा रही हूं जो काफी चुनौतीपूर्ण है. इस फिल्म में मैं एक बहुत बड़ा केस खुद अपने बॉयफ्रेंड के लिए लड़ रही हूं. यह अलग तरह की थ्रिलर स्टोरी है. जो मुझे पसंद आई और मैंने अभिनय किया. इसमें हर कलाकार जो बीच-बीच में आते है, सबका चरित्र अलग-अलग दिखाया गया है जिसे समझना काफी मुश्किल होता है. लेकिन इसमें मज़ा भी खूब है. जिसे आप पॉजिटिव समझ रहे है वह अंत में निगेटिव दिखता है.

प्र. अपने बारें में बताएं. यहां तक पहुचने की जर्नी कैसी रही?

जर्नी कैसी भी हो, पर उसमें आपको बहुत कुछ सीखने को मिलता है. वही आप को आगे बढ़ने में मदद करती है, क्योंकि कोई भी चीज आपको कभी भी आसानी से नहीं मिलती, हर काम में मेहनत होती है. मैंने रियलिटी शो से शुरू किया और फिल्मों की तरफ आई, काम थोड़ा स्लो हुआ है पर मैंने खुद यहां तक अपने आप को लायी हूं. आज मैं ‘वजह तुम हो’ में मुख्य भूमिका निभा रही हूं. इससे पहले साउथ की फिल्में कर चुकी हूं, अगर कुछ अच्छा काम साऊथ में फिर मिले, तो करना चाहूंगी.

प्र. गॉडफादर न होने से इंडस्ट्री में काम का मिलना कितना कठिन होता है?

ये सही है कि इंडस्ट्री के बाहर के लोगो को काम का मिलना कठिन होता है. स्टार किड्स के लिए ये प्लस पॉइंट होता है कि दर्शक उनके काम को देखना चाहते हैं. उनकी पहली या दूसरी फिल्म फ्लॉप भी हो जाये तो भी उन्हें एक मौका फिर से मिलता है जो ‘आउट साइडर’ को नहीं मिलता. निश्चित तौर पर कुछ लाभ तो कुछ हानि भी होते हैं, क्योंकि उनकी तुलना उनके माता-पिता की एक्टिंग से भी की जाती है. इसके अलावा ‘स्टार किड्स’ बचपन से इंडस्ट्री के लोगों को जानते हैं, उनका ‘कम्फर्ट लेवल’ भी अच्छा रहता है. काम कहीं न कहीं उन्हें अपने दोस्तों या परिवार से मिल ही जाता है. बाहर के कलाकार को वह कठिनाई सबसे अधिक होती है.

प्र. आपको किस तरह के संघर्ष अधिक करने पड़े?

पहले तो काम का मिलना कठिन होता है फिर अच्छे रोल की चाहत होती है. कई बार ऐसे में जो भी मिलता है उसी में संतुष्ट होना पड़ता है, क्योंकि परदे पर आना, दिखना भी तो जरुरी है. एक काम से ही दूसरा काम मिलता है. अभिनय के लिए मौके का मिलना बहुत जरुरी है.

प्र. फिल्म का कौन सी पार्ट आपके लिए मुश्किल था?

फिल्म में अभिनय से अधिक डबिंग का पार्ट सबसे मुश्किल था. मैं रोज डर कर डबिंग के लिए जाती थी. सोचती थी कि किसी तरह से ये पूरा हो जाए, क्योंकि डबिंग में सीन्स के हिसाब से संवाद बोलने पड़ते हैं.

प्र. क्या फिल्मों में आना इत्तफाक था या बचपन से इच्छा थी?

इत्तफाक ही थी. मैंने कभी नहीं सोचा था कि फिल्मों में अभिनय करूंगी. मैं तो पढ़ लिखकर एक अच्छी जॉब कर सेटल होना चाहती थी. ये एक हॉबी की तरह शुरू हुआ था. कॉलेज के दौरान टाइमपास के लिए मॉडलिंग शुरू की थी और कब ये पैशन बन गया पता भी नहीं चला. अब यही करना चाहती हू.

प्र. आगे कौन सी फिल्में कर रही है?

अभी एक फिल्म ‘टॉम डिक एंड हैरी’  कॉमेडी फिल्म कर रही हूं, जिसकी शूटिंग शुरू हो चुकी है. वह अगले साल रिलीज़ होगी.

प्र. आपको किस तरह की फिल्मों में काम करना अधिक पसंद है?

मुझे रोमांटिक, एक्शन और थ्रिलर फिल्में बहुत पसंद हैं. लेकिन फिल्म चयन करते समय सबसे पहले मैं बैनर देखती हूं, उसके बाद निर्देशक, स्क्रिप्ट फिर स्टार कास्ट को देखती हूं.

प्र. आप किस तरह की फिल्में अधिक देखती हैं?

मैं हर तरह की फिल्में देखती हूं, क्योंकि हर कलाकार आपको कुछ नया सिखाता है. कही से बॉडी लैंग्वेज, तो कही से स्टाइल आदि आप ले सकते हैं और उसे अपने एक्टिंग में भी डाल सकते हैं. मुझे जेम्स बोंड और एंजेलिना जोली की फिल्में बहुत अच्छी लगती हैं.

प्र. आपके यहां तक पहुंचने में परिवार का कितना सहयोग रहा?

परिवार का सहयोग बहुत जरुरी है. मेरी मां का सबसे अधिक सहयोग रहा. मैं अपनी मां के साथ रहती हूं. मानसिक रूप से जब मैं परेशान रहती थी, तो उनका सहयोग हमेशा मिला.

प्र. तनाव आने पर क्या करती हैं?

तनाव होता है, पर उससे मैं अपने आप को दूर रखती हूं. अधिक तनाव होने पर मां से शेयर करती हूं.

प्र. कंट्रोवर्सी को कैसे लेती हैं? आप के साथ हुई घटनाओं में कितनी सच्चाई है?

कंट्रोवर्सी को मैं अधिक महत्व नहीं देती. जो हुई भी है, वह सारी अफवाह है. मैंने धीरज नहीं खोया और कानूनन जो करना है, कर रही हूं. इसलिए कई बार मैं मीडिया की खबरों पर ध्यान नहीं देती.

प्र. फिल्मों में इंटिमेट सीन्स करने में कितनी सहज हैं?

मैं तो कभी भी सहज नहीं हूं और चाहती हूं कि ऐसे दृश्य हो भी नहीं. लेकिन आज इंडस्ट्री बदल रही है. दर्शकों के टेस्ट बदल रहे हैं. स्क्रिप्ट अगर अच्छी है तो थोड़ी सी इंटिमेट सीन्स की वजह से मैं उसे छोड़ नहीं सकती, क्योंकि मैं एक कलाकार हूं और हर तरह के सीन्स करना है.

प्र. कितनी फैशनेबल और मेकअप पसंद करती हैं?

मुझे फैशन पसंद है. कहीं भी बिना अच्छी ड्रेस किये नहीं जाती. मेकअप भी अच्छा लगता है. मैं खुद अपना मेकअप और हेयर स्टाइल करती हूं.

प्र. समय मिले तो क्या करती हैं?

समय मिलता है तो घर पर सोती हूं. टीवी देखती हूं और घरवालों से बातें करती हूं, जिम जाती हूं, रीडिंग करती हूं और फिल्में देखती हूं.

प्र. आप कितनी फूडी हैं?

मैं सबकुछ खाती हूं. मुझे थोड़ी देर-देर बाद खाने का शौक भी है.

प्र. कहां घूमने जाना पसंद करती हैं?

वह बजट के अनुसार होता है. अधिक बजट है और समय है तो विदेश चली जाती हूं. नहीं तो आस-पास के जगहों जैसे लोनावाला, खंडाला, पुणे आदि जगहों पर घूमने जाती हूं.

प्र. किस बात से गुस्सा आता है?

जो झूठी बातें करते हैं. पीठ पीछे कुछ भी कहते हैं. सामने अच्छी बातें करते हैं.

प्र. ‘कास्टिंग काउच’ का सामना आपको कभी करना पड़ा?

अवश्य करना पड़ा और इंडस्ट्री में सभी को करना पड़ता है. मैं मुंबई से हूं, पर शुरुआत में बहुत संघर्ष रहा, क्योंकि तब आपको कुछ पता नहीं होता है जिसका लाभ लोग उठाना चाहते है. ऐसे कई लोग आये जिन्होंने अजीब शर्त फिल्म में काम करने के लिए रखी. मैं सोचती हूं कि क्या उन्होंने अपना चेहरा आईने में नहीं देखा? आसपास गंदे लोग बहुत हैं. जिन्हें काम देना होता है वे ऐसी घटिया बातें नहीं करते.

प्र. क्रॉस बॉर्डर को लेकर आजकल कई बातें चल रही हैं, आपकी राय इस बारें में क्या है?

मेरे हिसाब से कला की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन देश की बात करें, तो हमारे देश के निर्णय के साथ मैं हूं. इसके अलावा हमारे देश में बहुत टैलेंट है, उन्हें पहला मौका हमेशा मिलना चाहिए. ऐसा भी नहीं है कि जिन्हें वे विदेश से ला रहे हें, वे कोई ‘माइंड ब्लोइंग’ अभिनय कर रहे हैं. इसका अर्थ यह निकलता है कि हमारे निर्माता, निर्देशक गोरी चमड़ी पर अधिक फ़िदा हैं. नहीं तो बिना अभिनय टैलेंट के कई विदेशी कलाकार ऐसे हैं जो 10-15 फिल्में कर चुके है.

क्या अब आमिर और सुशांत का होगा टकराव

फिल्म ‘‘पी के’’ में आमिर खान के साथ सुशांत सिंह राजपूत ने एक छोटा सा किरदार निभाया था, जिसकी कहानी में काफी अहमियत थी. पर अब जो हालात नजर आ रहे हैं, उससे लगता है कि बहुत जल्द सुशांत सिंह राजपूत और आमिर खान एक साथ सिनेमा घरों में एक दूसरे से एक जैसे किरदार की वजह से टकराने वाले हैं. इसकी वजह यह है कि यह दोनों ही कलाकार अलग अलग फिल्मों में अंतरिक्ष यात्री का किरदार निभा रहे हैं.

फिल्म निर्देशक संजय पूरण सिंह चौहान की बहुमहत्वाकांक्षी   फिल्म ‘‘चंदामामा’’ में सुशांत सिंह राजपूत एक अंतरिक्ष यात्री का किरदार निभा रहे हैं. इस बड़े बजट की फिल्म को संजय पूरण सिंह चौहान अमेरिका के नासा में जाकर फिल्माने वाले हैं, जिसमें कई विदेशी कलाकार व तकनीशियन भी होंगे. सूत्रों के अनुसार यह काफी यथार्थ परक होगी. संजय पूरण सिंह चौहान इससे पहले ‘‘लाहौर’’ जैसी फिल्म निर्देशित कर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार हासिल कर चुके हैं.

जबकि आमिर खान मशहूर अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा की जीवनी पर बन रही फिल्म ‘‘सारे जहां से अच्छा’’ में अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का किरदार निभाने वाले हैं. सूत्रों की माने तो सुशांत सिंह राजपूत और आमिर खान की यह दोनों फिल्में एक साथ दिसंबर 2018 में रिलीज हो सकती हैं.

‘बेफिक्रे’ को लेकर कटघरे में सेंसर बोर्ड

भारतीय सेंसर बोर्ड हमेशा अपनी ही शैली में काम करता है. सरकारें बदल जाती हैं. सेंसर बोर्ड के चेयरमैन बदलते हैं, लेकिन सेंसर बोर्ड की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आता. यहां तक कि ‘संस्कारी चेयरमैन’ के रूप में मशहूर सेंसर बोर्ड के वर्तमान चेयरमैन पहलाज निहालानी भी उसी अंदाज में काम कर रहे हैं. सेंसर बोर्ड सदैव छोटे फिल्म निर्माताओं के लिए ‘संस्कारी’ बन जाता है, मगर जब बड़े फिल्म निर्माता की फिल्म हो, तो वह अपने सारे ‘संस्कार’ भूल जाता है.

इन दिनों सेंसर बोर्ड ‘यशराज फिल्मस’ की आदित्य चोपड़ा निर्देशित फिल्म ‘‘बेफिक्रे’’ की वजह से आरोपों के घेरे में है. इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने ‘यूए’ प्रमाणपत्र से पारित किया है, जिसमें ‘मिडल फिंगर’, ‘किसिंग सीन’, रणवीर सिंह का ‘बट’ सीन के साथ साथ फिल्म के नायक रणवीर सिंह और नायिका वाणी कपूर के अपने शरीर से कपड़े उतारने के सीन भी हैं. इन सारे दृश्यों को सेंसर बोर्ड ने बड़ी दरियादिली दिखाते हुए पारित किया है. जबकि निर्माता निर्देशक ने फिल्म ‘‘बेफिक्रे’’ के जो पोस्टर लगाए हैं, उन पर लोगों को आपत्ति हैं और कुछ लोगों ने इन पोस्टरों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करायी है. फिल्म ‘बेफिक्रे’ को जिस अंदाज में पारित किया गया है, उसको लेकर तमाम शिकायतें सेंसर बोर्ड तक पहुंच चुकी हैं.

अब बडे़ बैनर की फिल्मों में हीराईनें बिकनी पहने नजर आ जाती हैं. जबकि छोटी फिल्म में इस तरह के दृश्यों पर कैंची चला दी जाती है. फिल्म ‘बार बार देखो’ में कई दृश्यों पर सेंसर बोर्ड की कैंची चली थी, मगर ‘बेफिक्रे’ मे रणवीर सिंह का ‘बट’ सीन भी नहीं काटा गया. ‘बेफिक्रे’ में रणवीर सिंह का किरदार हीरोईन वाणी कपूर को अपशब्द कहता है, उस पर भी कैंची नहीं चली. इतना ही नहीं हौलीवुड फिल्म ‘स्पेक्ट्रम’ में जेम्स बांड और मोनिका ब्लूची के किसिंग सीन पर सेंसर बोर्ड ने कैंची चला दी  थी. मजेदार बात यह है कि सेंसर बोर्ड के ‘संस्कारी’ चेयरमैन पहलाज निहलानी का दावा है कि फिल्म ‘बेफिक्रे’ में कुछ भी गलत नही है. यह फिल्म पेरिस की कहानी है.

उधर केंद्रीय फिल्म प्रमाणबोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने कुछ लोगों से बात करते हुए कहा कि,‘हमारे यहां एक नियम सा है. जब कोई छोटी फिल्म होती है, तो उसके किसी सीन या पोस्टर पर कोई उंगली नहीं उठाता. मगर बड़े बैनर की फिल्म है, इसलिए जिसे देखे वह अपनी शिकायत लेकर पहुंच रहा है.’’

जबकि सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पहलाज निहालानी ‘बेफिक्रे’’ से जुड़े सारे विवादों पर कहते हैं-‘‘देखिए, इस फिल्म में जहां कैंची चलाने की जरूरत थी, वहां हमने कैची चलायी है. फिल्म में जितने भी किसिंग सीन थे, उनकी लंबायी हमने कम की है. क्लायमैक्स के सीन को हमने छोटा किया है. हमने किसिंग के सारे क्लोजअप दृश्यों को हटा दिया है, मगर जो दृश्य बचे हैं, वह रचनात्मकता को बरकरार रखने के लिए हमने छोड़े हैं. मैं खुद फिल्म निर्माता हूं. मुझे पता है कि जब हम कोई कहानी कहते हैं, तो उसके लिए किस तरह की रचनात्मक स्वतंत्रता की जरूरत होती है. फिल्म ‘बेफिक्रे’ की कहानी फ्रांस के पेरिस शहर की है. एक पेरिस निवासी किस ढंग से जीवन जीता है, किस तरह से वह रिश्तों को निभाता है, उसकी कहानी इस फिल्म में है. पेरिस में हर इंसान जब एक दूसरे से मिलता है, तो ‘किस’ से ही एक दूसरे का अभिवादन करता है. इस बात का ख्याल हमने रखा है.’’

तो कुछ देर बाद पहलाज निहलानी कहीं न कहीं अपना बचाव करते हुए व ट्रिब्यूनल पर उंगली उठाते हुए कहते हैं- ‘‘देखिए, जब हम इस तरह के दृश्यों पर कैंची चलाते हैं, तो हम पर आरोप लगता है कि हम सेंसर बोर्ड की गाइड लाइन के खिलाफ काम कर रहे हैं. हम पर ‘संस्कारी’ होने का आरोप लगता है. जब हम रचनात्मकता को बरकरार रखते हुए इस तरह के दृश्यों को छोड़ देते हैं, तो हम पर कुछ ज्यादा ही स्वतंत्र होने का आरोप लग जाता है. इतना ही नहीं कई फिल्मों में जब हमने इस तरह से दृश्यों को काटा, तब वह फिल्मकार दिल्ली में ट्रिब्यूनल में चले जाते हैं और वहां से उन दृश्यों के साथ फिल्म को पास करा कर ले आते हैं. अब हमें कई तरह की दुविधाओं के साथ काम करना पड़ रहा है.’’

फिल्म ‘‘बेफिक्रे’’ में रणवीर सिंह के ‘बट’ शॉट को लेकर काफी आलोचना की जा रही है. जबकि पहलान निहलानी का दावा है कि उन्होंने इस सीन की लंबाई काफी कम की है. अब यह सीन सिर्फ झलक मात्र है. दूसरी बात हमने यह ध्यान रखा है कि नायक अपनी प्रेमिका के  साथ अकेले कमरे के अंदर है. वह वही कर रहे हैं, जो कि एक आम दंपति करता है. इसमें गलत क्या है? इस तरह के दृश्य तो मधुर भंडारकर की फिल्म ‘जेल’ में भी थे. हमने तो कई विदेशी फिल्मों में भी इस तरह के दृश्यों पर कैची नहीं चलायी.’’

सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पहलाज निहलानी चाहे जितनी सफाई दें, मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भारतीय फिल्म सेंसर बोर्ड हर फिल्म को एक ही तराजू पर क्यों नहीं तौलता है, बेचारा छोटी फिल्मों का निर्माता ट्रिब्यूनल के चक्कर नहीं काट सकता, इसलिए उसकी फिल्म के साथ अलग रवैया अपनाना सही नहीं कहा जा सकता.

शाहरुख खान का फिल्म ‘रईस’ को लेकर असली डर

शाहरुख खान की ‘मनसे’ अध्यक्ष राज ठाकरे से मुलाकात का हर राजनीतिक दल विरोध कर रहा है. मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरूपम और भारतीय जनता पार्टी की नेता शायना एनसी ने भी विरोध दर्ज कराया है. सभी का मानना है कि शाहरुख खान अपनी फिल्म ‘‘रईस’’ में पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा खान को लेकर सफाई देने गए थे. राज ठाकरे भी कह चुके हैं कि शाहरुख खान उन्हे यह बताने गए थे कि ‘रईस’ के प्रमोशन के लिए माहिरा खान मुंबई नहीं आ रही हैं.

पर बौलीवुड के अंदरूनी सूत्र इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं. बौलीवुड के सूत्र मानते हैं कि शाहरुख खान यह बात राज ठाकरे को फोन पर भी बता सकते थे. अथवा मीडिया के माध्यम से भी स्पष्ट कर सकते थे कि माहिरा खान नहीं आ रही हैं. बौलीवुड के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि शाहरुख खान अपने अंदर के डर की वजह से राज ठाकरे से मिलकर अगली रणनीति तय करने गए थे. और राज ठाकरे से मुलाकात करने के बाद ही शाहरुख खान, फिल्म के निर्देशक राहुल ढोलकिया और निर्माता रितेश सिद्धवानी ने बयान देना शुरू किया कि उनकी फिल्म ‘‘रईस’’ की कहानी गुजरात के शराब माफिया व गैंगस्टर अब्दुल लतीफ की कहानी नहीं है.

वास्तव में धीरे धीरे यह राज खुल चुका है कि फिल्म ‘‘रईस’’ की कहानी गुजरात के शराब माफिया अब्दुल लतीफ के जीवन पर आधारित है. मूलतः गुजरात के अहमदाबाद शहर में अवैध शराब विक्रेता के रूप में बहुत बड़ा मुकाम हासिल कर लेने वाले अब्दुल लतीफ का राजनीतिक नेताओं के साथ संबंध थे. उसने टीनएजर युवकों के हाथ बोटल में शराब भरकर लोगों तक पहुंचाने का जाल बिछा रखा था. वह गरीब मुस्लिम परिवारों की आर्थिक मदद भी करता था. जुए के अड्डे भी चलाता था. बाद में वह दाउद इब्राहिम से जुड़ गया था और 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट में भी वह आरोपी था.

गुजरात पुलिस ने 1995 में उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया था. बाद में 1997 में जेल से भागते समय पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया था. उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री शकर सिंह वाघेला थे. बाद में इसी गुस्से में अब्दुल लतीफ के बेटे शेख आरिफ अब्दुल लतीफ ने शंकर सिंह वाघेला के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था. जब अब्दुल लतीफ के बेटों को पता चला कि फिल्म ‘रईस’ बन रही है, तो इसकी कहानी पता चलते ही अप्रैल 2016 में अब्दुल लतीफ के बेटे मुश्ताक लतीफ ने निर्माताओ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा अदालत में दायर किया.

मुश्ताक अब्दुल लतीफ के वकील ने अदालत से कहा था-‘‘फिल्म ‘रईस’ में उनके मुवक्किल के पिता को गलत ढंग से चित्रित किया जा रहा है. उनके पिता ‘टाडा’ में आरोपी थे. वह बोटल में शराब भरकर बेचने के आरोपी थे. लेकिन उन्होंने कभी भी वेश्यागृह नहीं चलाए. अब्दुल लतीफ ने शराब की बिक्री में औरतों का उपयोग नहीं किया. बल्कि मुश्ताक के पिता अब्दुल लतीफ तो गरीबों पर पैसा लुटाया करते थे.’’

वैसे अब्दुल लतीफ पर पहले शरीक मिन्हाज ने ‘‘लतीफः द किंग आफ क्राइम’’ बना चुके हैं. यह फिल्म 6 जून 2014 को प्रदर्शित हुई थी. सूत्र बताते हैं कि उसके बाद ही राहुल ढोलकिया और शाहरुख खान ने ‘रईस’ की योजना बनायी.

सूत्रों के अनुसार 25 जनवरी 2017 को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘‘रईस’’ की कहानी 80 के दशक के गुजरात की है. यह एक ऐसे इंसान की कहानी है, जिसने पूरे गुजरात में बोटलों में शराब भरकर बेचते हुए अपना बहुत बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया था. कहानी उसके आगे बढ़ने और उन रिश्तों की है, जिसकी वजह से पूरे राज्य में एकछत्र राज्य कायम हुआ था. रईस को किसी गैंगस्टर की बजाय एक अतिखडूस व्यापारी की कथा कहा जाना ज्यादा उचित होगा. जिसे किसी से डर नहीं लगता.

रईस (शाहरुख खान) ने निडरता से इस तरह से व्यापार किया कि उसने शोहरत भी पायी. गलत ढंग से बहुत पैसा कमाया. पर लोगों के बीच अपने आपको स्वीकार भी करवाया. वह हमेशा व्यापार को लेकर नए नए आइडिया सोचता रहा. उसने अपने शराब के व्यापार में हर किसी का उपयोग किया.

फिल्म के निर्देशक राहुल ढोलकिया कहते हैं-‘‘मीडिया में गलत खबरें छप रही हैं कि यह फिल्म अब्दुल लतीफ की जिंदगी पर आधारित है. हककीत में मेरी यह फिल्म मेरी काल्पनिक कहानी पर आधारित है. यह गुजरात की पृष्ठभूमि पर एक काल्पनिक अपराध कथा है.’’ जबकि शाहरुख खान कहते हैं- ‘‘हमारी फिल्म ‘रईस’ की कहानी 1980 के गुजरात की पृष्ठभूमि पर है. मगर मेरे किरदार या फिल्म की कहानी का किसी जीवित या मृत इंसान से कोई वास्ता नहीं है. यह पूरी तरह से एक काल्पनिक किरदार है.’’

बौलीवुड के एक अंदरूनी सूत्र का मानना है कि अब्दुल लतीफ 1993 के बम विस्फोट से जुडा हुआ था, इस कारण शायद कुछ राजनेता इसका विरोध कर सकते हैं. यह डर शाहरुख खान को सता रहा है.

आईटीआर में हो सकते हैं बड़े बदलाव

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आईटी रिटर्न में संशोधन के प्रावधान के दुरूपयोग की कोशिश को लेकर करदातओं को कड़ी चेतावानी दी है. उन्होंने कहा है कि जो लोग आय में संशोधन के लिये फार्म में भारी बदलाव करते हैं, उन्हें जांच और दंडनीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

सीबीडीटी ने बताया कि 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद कुछ करदाता मौजूदा वर्ष की अघोषित आय दिखाने के इरादे से आय में गड़बड़ी के लिये पूर्व आकलन वर्ष के फाइल किये गये रिटर्न में संशोधन के प्रावधान का दुरूपयोग कर सकते हैं.

बोर्ड ने एक बयान में कहा कि रिटर्न में संशोधन का प्रावधान मूल रिटर्न में कोई भूल-चूक या गलत जानकारी में सुधार के लिये किया गया है न कि पूर्व की अघोषित आय को दिखाने के लिये शुरू में घोषित आय में व्यापक रूप से बदलाव के लिये.

बयान में यह भी कहा गया कि अगर विभाग के नोटिस में पिछले साल के आईटीआर (आयकर रिटर्न) में आय की मात्रा, नकदी, लाभ आदि तथा खातों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो उसकी जांच की जाएगी ताकि सही आय का पता लगाया जा सके. ऐसे मामलों में कानून के प्रावधानों के अनुसार जुर्माना तथा अभियोजन चलाया जा सकता है.

बेरहम हत्यारा

उस दिन दिवाली थी और तारीख थी 30 अक्तूबर, 2016. शाम होते ही अलवर शहर जगमगाने लगा था. हर घर रोशन हो चुका था. चौराहे और इमारतें सजावट की रोशनी से झिलमिला रही थीं. रात गहराते ही शहर की गलीमोहल्लों में पटाखे चलने लगे थे. आसमान में आतिशबाजी की सतरंगी छटा बिखरी हुई थी. दिवाली के मौके  पर कानूनव्यवस्था एवं शांति बनाए रखने के लिए पुलिस के जवान शहर में गश्त कर रहे थे.

रात करीब पौने 12 बजे का समय रहा होगा, जब शहर कोतवाली थाने की पुलिस को सूचना मिली कि स्कीम नंबर-1 आर्यनगर में कबूतर पार्क के पास किसी का कटा हुआ पैर पड़ा है, जिसे कुत्ते नोच रहे हैं. कबूतर पार्क कोतवाली से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर था. पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची तो वहां जांघ तक कटा एक अधजला पैर 2 पौलीथिन में बंधा हुआ पड़ा मिला. पैर से दुर्गंध नहीं आ रही थी, लेकिन यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि इस पैर को कब काटा गया था.

अलबत्ता यह जरूर पता चल गया था कि वह किसी का दाहिना पैर है. पैर की अंगुलियों में बिछिया थीं. नाखूनों पर नेल पौलिश लगी थी. इस से पुलिस को यह विश्वास हो गया कि पैर किसी महिला का है. पुलिस ने आसपास पूछताछ की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. इस के बाद कानूनी काररवाई कर के पैर को राजीव गांधी सामान्य अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया. उसी रात शहर कोतवाली में इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. पैर पौलीथिन की जिन 2 थैलियों में रखा था, उन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया था. इन थैलियों में एक थैली पर ‘सांगानेरी हाउस’ स्पैशलिस्ट इन ट्रैडिशनल सूट्स, ब्लौक प्रिंटिंग टाई डाई आयटम्स, तिलक मार्केट, अलवर लिखा था.

अगले दिन 31 अक्तूबर को गोवर्धन पूजा थी. बाजारों में सुबह से ही चहलपहल शुरू हो गई थी. इसी बीच सुबह करीब 9.50 बजे कोतवाली थाना पुलिस को फोन पर सूचना मिली कि चावंड पाड़ी मोहल्ले में एक कटा हुआ हाथ पड़ा है. खबर मिलते ही थानाप्रभारी राम सिंह मौके पर जा पहुंचे. वहां विनोद झालानी के मकान के सामने सड़क पर एक कटा हुआ हाथ पड़ा मिला. यह दाहिना हाथ था. पुलिस इस सिलसिले में पूछताछ कर ही रही थी कि तभी थानाप्रभारी के साथ गए सिपाहियों को वहां से थोड़ी दूरी पर चावंड माता के मंदिर के पास वाले गंदे नाले के पास कटा हुआ एक और हाथ नजर आया. यह बायां हाथ था. उस हाथ को कुत्तों ने नोच डाला था.

50 मीटर की दूरी में कटे हुए 2 मानव हाथ मिलने और इस से 9-10 घंटे पहले एक महिला का पैर मिलने से पुलिस को शक हुआ कि बाकी मानव अंग भी आसपास हो सकते हैं. कोतवाली प्रभारी राम सिंह ने मौके से ही एसपी राहुल प्रकाश और अन्य अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दे दी. कटे हुए 2 हाथ और एक पैर मिलने से एसपी को यह अंदाजा हो गया कि किसी महिला की हत्या की गई है और उस के अंग काट कर शहर में अलगअलग जगहों पर फेंक दिए गए हैं.

एसपी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए एडिशनल एसपी पारस जैन और सीओ (उत्तर) जय सिंह नाथावत को मौके पर भेजा. इन पुलिस अधिकारियों ने वहां पहुंच कर जांचपड़ताल की, साथ ही आसपास के लोगों से पूछताछ भी की. लेकिन न तो हाथपैर की शिनाख्त हुई और न ही यह पता चला कि कटे हाथ कब फेंके गए थे.

इसी दौरान पुलिस को एक और सूचना मिली. इस सूचना में बताया गया था कि स्कीम नंबर-1 आर्यनगर के मकान नंबर-231 के सामने सड़क पर कटा हुआ एक पैर पड़ा है. पुलिस अधिकारियों ने चावंड पाड़ी में मिले दोनों कटे हाथ जब्त कर के सामान्य अस्पताल की मोर्चरी में रखवाने के लिए भेज दिए और वहां से स्कीम नंबर-1 चले गए.

वहां अनिल गुप्ता के मकान नंबर 231 के सामने सड़क पर एक पैर पड़ा था. यह बायां पैर था और कुत्तों ने नोच रखा था. यह जगह कबूतर पार्क के पास ही थी, जहां दिवाली की रात दाहिना पैर मिला था. पुलिस ने यह पैर भी जब्त कर के मोर्चरी भिजवा दिया.

10-12 घंटे के दौरान शहर में 4 अलगअलग स्थानों पर 2 कटे पैर व 2 कटे हाथ मिलने की खबर पूरे शहर में आग की तरह फैल गई थी. लोगों ने वाट्सऐप सोशल मीडिया पर कटे मानव अंगों के फोटो डाल दिए. इस से शहर में सनसनी फैल गई. सनसनी फैलने की वजह यह थी कि शहर में इस तरह की वारदात पहले कभी सुनने में नहीं आई थी. अलवर तो दूर, पूरे राजस्थान में इस तरह की सनसनीखेज वारदात शायद ही कभी सुनने को मिली हो. अलबत्ता कई साल पहले नोएडा के पास निठारी में इस तरह की घटनाएं जरूर सामने आई थीं.

मामला गंभीर था. त्यौहार के मौके पर शहर में इस तरह 4 जगह मानव अंग मिलने की घटना से एसपी राहुल प्रकाश परेशान हो उठे. उन्होंने अपने मातहत अधिकारियों को बुलाया और उन से चारों जगह मिले अंगों के बारे में पूरी जानकारी ली. 2 हाथ और 2 पैर मिलने से एसपी को यह अंदाजा जरूर हो गया था कि किसी महिला की हत्या कर के शव के टुकड़े अलगअलग जगहों पर फेंके गए हैं. लेकिन अभी तक न तो सिर मिला था और न ही धड़.

एसपी ने सब से पहले पुलिस के जवानों को सिर और धड़ की तलाश में लगाने के निर्देश दिए, ताकि लोगों से शिनाख्त कराई जा सके कि कटे अंग किस के हैं. एसपी के निर्देश पर पुलिस की 5 टीमें गठित की गईं. इन टीमों को शहर में कचरे के ढेरों और बडे़ नालों के आसपास सिर व धड़ की तलाश में लगाया गया. इस काम में सफाईकर्मियों की भी मदद ली गई.

दूसरी ओर पुलिस ने शहर से लापता हुए लोगों के बारे में भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी. शहर सहित आसपास के पुलिस थानों में पिछले 15 दिनों में लापता हुए लोगों की जो रिपोर्ट दर्ज हुई थीं, उन के बारे में भी जांचपड़ताल शुरू की गई. पुलिस ने लापता लोगों की दर्ज रिपोर्ट को सूचीबद्ध कर के उन के नामपतों के आधार पर घरघर जा कर पूछताछ की.

इस में पता चला कि ज्यादातर लापता लोग अपने घर लौट चुके हैं, लेकिन रिपोर्ट दर्ज कराने वालों ने पुलिस को इस की जानकारी नहीं दी थी. इस के अलावा पुलिस पूरीपूरी रात शहर के हर इलाके में गश्त करती रही. रात को घूमते मिले हर व्यक्ति से पूछताछ की गई. उन के नामपते नोट किए गए.

31 अक्तूबर की रात शांति से निकल गई. एक नवंबर का दिन भी निकल गया. पुलिस को कहीं से भी कोई मानव अंग मिलने की सूचना नहीं मिली. पुलिस को कचरे के ढेरों एवं नालों के आसपास भी ऐसा कुछ नहीं मिला. लापता संदिग्ध लोगों के घरों के तलाशी अभियान में भी पुलिस को कोई कामयाबी नहीं मिली. पुलिस ने दिवाली की रात कबूतर पार्क के पास मिले दाहिने पैर के साथ मिली पौलीथिन पर लिखे सांगानेरी हाउस के पते पर भी जा कर पूछताछ की, लेकिन कोई हल नहीं निकला.

2 नवंबर की सुबह हो गई. एसपी राहुल प्रकाश अपने आवास पर इसी मामले पर सोचविचार कर रहे थे. अनुभव के आधार पर वे मान रहे थे कि यह वारदात किसी साइको किलर की हो सकती है. किलर मानसिक रूप से विक्षिप्त भी हो सकता है. जिस तरह चारों हाथपैर अलगअलग काट कर फेंके गए थे, उस से लगता था कि वह निर्दयी भी रहा होगा. क्योंकि यह काम कोई सामान्य इंसान नहीं कर सकता था. अलबत्ता अब तक यह बात साफ हो गई थी कि अंग किसी महिला के हैं. इसलिए अनुमान लगाया गया कि महिला उस हत्यारे की पत्नी या प्रेमिका थी. निर्दयता से काटे गए अंगों से यह अनुमान भी लगाया जा रहा था कि हत्यारा उस महिला से बहुत ज्यादा नफरत करता था.

मानव अंग घरों में सब्जी काटने वाले चाकू से काटने संभव नहीं थे, इसलिए यह अनुमान लगाया गया कि महिला की हत्या के बाद किसी धारदार और पैने औजार से अंग काटे गए होंगे. मामले की जांच में जुटे अधिकारी अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे थे. इसी बीच 2 नवंबर को सुबह करीब साढ़े 7 बजे सूचना मिली कि रंगभरियों की गली में एक दुकान के सामने मानव धड़ पड़ा है. पुलिस मौके पर पहुंची, वहां धड़ के रूप में एक कंकाल सा पड़ा मिला. धड़ से मांस व आंतें वगैरह गायब थीं. पुलिस ने उस कंकालनुमा धड़ को जब्त कर के सामान्य अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिया.

पुलिस अधिकारी इस मामले पर नए सिरे से विचार करने के लिए जुटे ही थे कि एक और सूचना आ गई. इस सूचना में बताया गया था कि राम मार्केट, ढकपुरी मोहल्ले में पौलीथिन में मांस के टुकड़े पड़े हैं. पुलिस ने मौके पर पहुंच कर मांस के टुकड़े जब्त कर लिए. मांस के टुकडे़ उसी कंकालनुमा धड़ का हिस्सा माने गए, जो सुबह रंगभरियों की गली में मिला था. पुलिस ने उन टुकड़ों को भी अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिए.

उसी दिन दोपहर करीब सवा 3 बजे कंपनी बाग के पीछे सेढ़ का टीला के पास कुछ बच्चे खेल रहे थे. तभी उन्हें प्लास्टिक के एक छोटे बोरे में कटा हुआ मानव सिर नजर आया. बच्चों ने इस की जानकारी आसपास के लोगों को दी. उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी. मौके पर पुलिस को प्लास्टिक के बोरे में क्षतविक्षत मानव सिर मिला. सिर में केवल हड्डियां नजर आ रही थीं. उस के पास ही लंबे बालों का गुच्छा भी पड़ा मिला. कटा हुआ सिर कई दिन पुराना लग रहा था. चेहरा भी क्षतविक्षत था, जिस से पहचान नहीं हो पा रही थी.

लंबे बालों का गुच्छा मिलने से यह अनुमान लगाया गया कि सिर किसी महिला का है. बाल भी उसी महिला के होंगे. जिस जगह पर सिर मिला था, वहां पर लोग कचरा डालते थे. पुलिस पूछताछ में लोगों ने बताया कि उस दिन सुबह नगर परिषद के कर्मचारी वहां से कचरा उठा कर पूरी तरह सफाई कर के गए थे. दोपहर में कटा सिर मिलने से यह अंदाजा लगाया गया कि कटा हुआ सिर प्लास्टिक के बोरे में रख कर सुबह 8-9 बजे से दोपहर 2-3 बजे के बीच फेंका गया था. वहीं रंगभरियों की गली में सुबह ही कंकालनुमा धड़ मिलने से यह अनुमान लगाया गया कि उसे रात को किसी समय फेंका गया था.

30 अक्तूबर की रात से 2 नवंबर की शाम तक 4 दिनों के दौरान शहर में 7 अलगअलग स्थानों से मानव अंग मिल चुके थे. सिर व धड़ मिलने के साथ मानव शरीर के सभी अंग मिल चुके थे. 4 दिनों से शहर में महिला के अंग काट कर शहर में अलगअलग जगहों पर फेंकने से लोगों में दहशत फैलने लगी थी. लोग तरहतरह की चर्चाएं कर रहे थे. कोई इसे किसी तांत्रिक का कारनामा बता रहा था तो कोई कह रहा था कि अलवर में कनपटीमार जैसा कोई नया सनकी किलर आ गया है. कोई इसे नरपिशाच का कारनामा बता रहा था.

पुलिस अधिकारी भी हैरानपरेशान थे. जांचपड़ताल में हत्यारे का कोई सुराग नहीं मिल रहा था. अभी तक न तो कटे अंगों की शिनाख्त हुई थी और न ही यह पता चला था कि महिला की हत्या कितने दिनों पहले की गई थी. यह भी आशंका थी कि संभव है, एक से ज्यादा व्यक्ति की हत्या की गई हो. पुलिस के लिए यह मामला चुनौती बनता जा रहा था.

जयपुर रेंज के आईजी हेमंत प्रियदर्शी इस मामले को ले कर बेहद परेशान हो उठे. वे जयपुर से रोजाना मामले की मौनिटरिंग कर रहे थे. आईजी ने साइको किलर को पकड़ने के लिए फोरैंसिक लैब हैदराबाद के अधिकारियों से मार्गदर्शन ले कर अलवर के एसपी राहुल प्रकाश को दिशानिर्देश दिए.

एसपी राहुल प्रकाश ने 2 नवंबर की रात पुलिस अधिकारियों की बैठक ले कर इस मामले के सभी बिंदुओं पर विचारविमर्श किया. इस में यह बात भी निकल कर सामने आई कि हत्यारे ने किसी छोटे वाहन यानी दुपहिया, साइकिल या रिक्शा में रख कर या पैदल चल कर अलगअलग जगहों पर मानव अंग फेंके होंगे.

इस का कारण यह था कि ढकपुरी व रंगभरियों की गली में जिन स्थानों पर मानव अंग मिले थे, वहां कार आदि चौपहिया वाहन नहीं पहुंच सकते थे. इस से यह भी अनुमान लगाया गया कि हत्यारा शहर का ही कोई व्यक्ति है. कुछ अंग ऐसी जगहों पर मिले थे, जहां दिन भर आवागमन रहता था. व्यापक चर्चा के बाद नए सिरे से जांच करने के लिए स्पैशल टीम बनाई गई.

पुलिस दल ने उन सभी जगहों का दोबारा जा कर निरीक्षण किया, जहांजहां मानव अंग मिले थे. उन जगहों का पूरा मैप बनाया गया. ये सातों स्थान 2 किलोमीटर की परिधि में थे. आर्यनगर और चावंड पाड़ी के बीच भी आधा किलोमीटर का ही फासला था. रंगभरियों की गली व ढकपुरी और राम मार्केट पुराने शहर के हिस्से थे. पुलिस ने इन सभी क्षेत्रों में एक्टिव मोबाइल नंबरों की डिटेल्स निकलवाईं. इस के अलावा जहांजहां मानव अंग मिले थे, उन के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की भी खोजबीन की गई.

इस खोजबीन में करीब 30 जगहों पर कैमरे लगे मिले. पुलिस ने इन की फुटेज निकलवाई. इस के अलावा मृतका के पैरों की माप भी ली गई. उस के पैरों में 5 नंबर का जूता या चप्पल आ सकती थीं. पुलिस ने कई संदिग्ध लोगों से भी पूछताछ की. इस व्यापक छानबीन का निष्कर्ष निकाल कर पुलिस ने शहर के उन इलाकों में डोर टू डोर सर्वे शुरू करने का निर्णय लिया, जहां मानव अंग मिले थे.

3 नवंबर को सुबह से ही पुलिस ने डोर टू डोर सर्वे शुरू कर दिया. इस काम में शहर के सभी थानों के सैकड़ों पुलिसकर्मियों को लगाया गया. पुलिस ने यह अभियान शुरू किया ही था कि एक और नई सूचना आ गई. सूचना पर पुलिस दल बांसवाली गली पहुंचा, वहां एक पौलीथिन में बंधे महिला के स्तन, खाल व मांस के टुकड़े मिले, जिन से दुर्गंध नहीं आ रही थी. इस से यह अनुमान लगाया गया कि महिला के ये अंग फ्रिज में रखे रहे होंगे. पांचवें दिन मिले ये अंग भी पुलिस ने अस्पताल की मोर्चरी भिजवा दिए.

बांसवाली गली शहर की पुरानी आबादी में थी. यह जगह भी उसी 2 किलोमीटर के दायरे में थी. पुलिस ने डोर टू डोर सर्वे में इसी 2 किलोमीटर के दायरे पर सारा फोकस कर दिया. एकएक घर में जा कर पुलिस ने महिलाओं के बारे में जानकारी ली. उन के नामपते नोट किए.

इसी दिन दोपहर करीब ढाई बजे पुलिस की एक टीम सक्कापाड़ी मोहल्ले में एक पुराने मकान पर पहुंची. इस घर में एक युवक और करीब 3 साल की एक बच्ची मिली. युवक ने अपना नाम योगेश मल्होत्रा उर्फ चूचू बताया. उस की उम्र 35 साल थी. चूचू से उस की पत्नी के बारे में पूछा गया तो उस ने बताया कि वह घरों में झाड़ूपोंछे का काम करती है और शाम 4 बजे तक आएगी. पुलिस ने चूचू का मोबाइल नंबर नोट कर लिया.

शाम 4 बजे पुलिस दल दोबारा चूचू के मकान पर पहुंचा तो वहां ताला लटक रहा था. पुलिस ने पड़ोसियों और आसपास के अन्य लोगों से पूछताछ की तो यह तो पता नहीं चला कि चूचू कहां गया है, लेकिन चौंकाने वाली कई बातों की जानकारी जरूर मिली. 5 दिनों से चुप बैठे लोगों ने पुलिस को बताया कि चूचू की पत्नी आरती धनतेरस के दिन से दिखाई नहीं दे रही है.

पड़ोसियों ने यह भी बताया कि धनतेरस की शाम पतिपत्नी में झगड़ा हुआ था. रात को उन के मकान से केरोसिन के जलने की बदबू भी आई थी और धुआं भी उठता देखा गया था. लेकिन आसपास के लोग इसलिए नहीं बोले कि चूचू के घर में हर रोज झगड़ा होता था. लोगों ने बताया कि चूचू को मोपेड पर प्लास्टिक के बोरे में सामान ले जाते भी देखा गया था. उस के मकान में एक तहखाना होने की बात भी पता चली.

मोहल्ले वालों से ही पुलिस को पता चला कि चूचू करीब साढ़े 4 साल पहले आरती को पटना से ले कर आया था. आरती उस की दूसरी पत्नी थी. इस से पहले वह 2 शादियां कर चुका था. चूचू शादीपार्टियों में स्टाल लगाने के साथ रंगपेंट का भी काम करता था. उस के 2 भाई थे. उस के पिता व भाई की मौत हो चुकी थी. सक्कापाड़ी में उस का खुद का मकान था. उस की 3 बहनें भी थीं.

पुलिस की अब तक की जांचपड़ताल से सारी कडि़यां जुड़ती नजर आने लगी थीं. इसलिए शक की सुई पूरी तरह चूचू पर आ कर टिक गई. यह भी तय हो गया कि दोपहर में पुलिस के डोर टू डोर सर्वे के बाद वह मकान में ताला लगा कर फरार हो गया था.

एसपी के निर्देश पर पुलिस दल ने चूचू के पड़ोसियों से उस के रिश्तेदारों के बारे में जानकारी हासिल की. पुलिस का अनुमान था कि चूचू अपनी करीब 3 साल की बेटी को साथ ले कर गया है या फिर उस ने उसे किसी रिश्तेदार के घर छोड़ दिया है. यह भी आशंका थी कि वह बेटी को मकान में बंद कर गया हो. पुलिस ने ऐहतियात के तौर पर 2 जवान चूचू के मकान पर तैनात कर दिए.

दूसरी ओर पुलिस ने चूचू के मोबाइल की टावर लोकेशन तलाश की. उस के मोबाइल की लोकेशन हरियाणा की आ रही थी. इस आधार पर पुलिस की टीमें हरियाणा रवाना की गईं. पुलिस ने 4 नवंबर को तड़के चूचू को हरियाणा के हिसार से उस की बहन लाली के घर से पकड़ लिया.

चूचू के साथ उस की 3 साल की बेटी भावना भी थी. चूचू ने अपनी पत्नी आरती की हत्या की बात मान ली. उस समय तक चूचू की बहन लाली को इस बात का पता नहीं था कि उस का भाई अलवर में भाभी की हत्या कर के हिसार में उस के घर आया है.

पुलिस दल चूचू व उस की बेटी को अलवर ले आया. अलवर ला कर पुलिस थाने में चूचू से मनोवैज्ञानिक तरीक से गहन पूछताछ की गई. चूचू ने पुलिस को बताया कि 30 अक्तूबर को दिवाली के दिन सुबह उस का अपनी पत्नी आरती से झगड़ा हुआ था. वजह यह थी कि आर्थिक तंगी के चलते आरती उस मकान को लिखवाना चाहती थी. जबकि चूचू कुछ दिन बाद मकान बेचना चाहता था. आरती से उस का पहले भी कई बातों को ले कर झगड़ा होता रहता था.

उस ने पुलिस को बताया कि उस की पत्नी आरती 25 साल की थी. वह काफी सुंदर थी. इसलिए उसे पत्नी के चरित्र पर भी शक था. रोजरोज के झगड़ों व चरित्र पर शक के कारण उस ने आरती से पीछा छुड़ाने का फैसला लिया था.

दिवाली की शाम पौने 7 बजे जब पूरा शहर त्यौहार मना रहा था, चूचू ने अपनी पत्नी आरती पर घर में केरोसिन छिड़क कर आग लगा दी थी. इस से आरती जल गई. कुछ देर बाद उस ने दम तोड़ दिया. आरती की मौत के बाद उस ने बेटी भावना को दूध पिला कर व बिस्कुट खिला कर सुला दिया. इस के बाद वह अलवर शहर के खपटा पाड़ी मोहल्ले में रहने वाली अपनी बहन काला के पास पहुंचा और सारी बात बता कर उस से मदद मांगी.

बहन काला ने उस की मदद करने से इनकार कर दिया. इस के बाद चूचू वापस घर लौट आया. उस ने घर के दरवाजे बंद कर लिए. पूरा मोहल्ला दिवाली की खुशियां मनाने में मशगूल था. चूचू सोचने लगा कि लाश को ठिकाने कैसे लगाया जाए? काफी सोचविचार के बाद उस ने फैसला किया कि आरती के अंगों को काट कर अलगअलग कर दिया जाए और फिर उन्हें एकएक कर के फेंका जाए. उस ने उसी रात छुरी से आसपास की खाल काटने के बाद हाथपैर काट कर अलग कर दिए. इस के बाद उस ने आरती की गरदन काटी और जोर से मरोड़ कर अलग कर दी.

दिवाली की रात को ही वह सब से पहले आरती का दायां पैर पौलीथिन में रख कर अपनी टीवीएस मोपेड से कबूतर पार्क पहुंचा. पार्क के पास कोई नहीं था. मौका देख कर उस ने वह पैर सड़क के पास फेंक दिया. वह वापस अपने घर आया और पौलीथिन में दूसरा पैर रख कर मोपेड से स्कीम नंबर एक में फेंक आया. घर आ कर वह तीसरी बार में आरती के दोनों हाथ अलगअलग पौलीथिन में डाल कर चावंड पाड़ी में फेंक आया तो सिर को उस ने कंपनी बाग के पीछे सेढ़ का टीला के पास एक नाली में फेंक दिया.

घर आ कर उस ने रात में ही आरती के धड़ की छाती और पेट की चमड़ी को चाकू से उतार कर एक पौलीथिन में डाल लिया. उसी में उस ने उस के दोनों स्तनों को भी काट कर रख लिया. इस के बाद उस ने छाती और पेट के अंदर हाथ डाल कर गुर्दे एवं आंतें खींच कर बाहर निकालीं और उन्हें चाकू से काट कर पौलीथिन में रख कर फ्रिज में रख दी. धड़ पर उस ने बर्फ तोड़ कर डाल दी, जिस से बदबू न आए.

2 दिनों बाद सुबह करीब 5 बजे उस ने फ्रिज में रखीं तीनों पौलीथिन निकाली और राम मार्केट, ढकपुरी वाली गली में फेंक आया. धड़ को चावल के कट्टे में र्ख कर रंगभरियों की गली में सड़क पर फेंक दिया. अंत में स्तनों और कूल्हे के मांस वाली पौलीथिन को उस ने साथ ले जा कर बांसवाली गली में फेंक दिया. इस तरह चूचू ने 8 जगहों पर आरती के शरीर के अंग फेंके. आरती के अंगों को काटने के लिए उस ने चाकू के अलावा आरी का भी उपयोग किया था.

चूचू मांसाहारी था, इसलिए मीट लेने बकरा मंडी जाता रहता था. उस ने बकरा मंडी में कसाइयों को छुरी से बकरे की खाल उतारते देखा था. उसी से उसे आइडिया आया था और उस ने आरती के शरीर की खाल उतार कर उस के टुकड़े किए थे.

चूचू को अपनी पत्नी की हत्या कर के उस के टुकड़े करने का कोई मलाल नहीं था. उस के चेहरे पर किसी तरह की शिकन भी नहीं थी. न ही कोई डर और न ही अफसोस. ऐसी जघन्य वारदात के बाद भी चूचू पूरी तरह सामान्य दिखाई दे रहा था. उस की चालढाल या व्यवहार से किसी को इस बात का अहसास नहीं हुआ था कि शहर में जगहजगह मानव अंग मिलने से पूरे शहर में जो दहशत थी, वह उसी की करतूत थी.

चूचू इतना शातिर था कि जब शहर में किसी जगह मानव अंग मिलते थे तो वह वहां पहुंच जाता था और लोगों से इस विषय पर बात करता था. वह कहता था कि पुलिस अभी तक कबाड़ी के हत्यारे का पता नहीं लगा सकी तो इस महिला के हत्यारे तक कैसे पहुंचेगी? उस की बातों और तर्कों से किसी को उस पर कभी शक नहीं हुआ.

पुलिस को बताए अनुसार, चूचू की पहली पत्नी छोड़ कर चली गई थी. उस के बाद 4, साढ़े 4 साल वह आरती को पटना से 25 हजार रुपए में खरीद कर लाया था और हिसार में उस से शादी की थी. आरती से उसे एक बेटी हुई थी, जिस का नाम उस ने भावना रखा था. चूचू के 5 भाईबहन थे. पहले उस के पिता की मौत हुई, उस के बाद मां भी चली गई. उस के एक भाई की भी मौत हो चुकी थी. उस की 2 बहनें हिसार में और एक अलवर में रहती है. उस के परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी. चर्चा यह भी है कि पहले वह वेश्यावृत्ति के काम में लिप्त था. इसी के चलते उस के घर लोगों का आनाजाना लगा रहता था.

4 नवंबर को जब पुलिस हिरासत में चूचू को सक्कापाड़ी मोहल्ला स्थित उस के घर लाया गया तो मोहल्ले वालों की भीड़ लग गई. लोग ‘मारो मारो, फांसी दो’ के नारे लगाने लगे. पुलिस ने चूचू की निशानदेही पर अधजले कपड़े, केरोसिन की कैन, प्लास्टिक का अधजला पाइप, चाकू, छुरी व अन्य औजार बरामद किए. जयपुर से डा. राहुल शर्मा के नेतृत्व में आई एफएसएल टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए.

मां आरती की हत्या और पिता चूचू की गिरफ्तारी से 3 साल की मासूम बच्ची भावना बेसहारा हो गई है. उसे तो यह भी नहीं मालूम कि उस की मां अब इस दुनिया में नहीं है. 3 दिनों तक यह बच्ची महिला पुलिस कांस्टेबलों के संरक्षण में रही. उस के बाद 6 नवंबर को पुलिस ने उसे बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्रवण सिंघल के समक्ष पेश किया, जहां से उसे मदर टेरेसा होम भेज दिया गया.

इस से पहले पुलिस ने 5 नवंबर को चूचू को मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया. मजिस्ट्रैट ने उसे 2 दिनों के रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया. पुलिस ने आरती के कटे हुए अंगों का पोस्टमार्टम कराया.

इन अंगों की सुपुर्दगी व दाहसंस्कार के लिए पुलिस ने आरती के पटना में रहने वाले परिजनों से संपर्क किया, लेकिन 2 दिनों तक इंतजार करने के बाद भी पटना से कोई नहीं आया तो 7 नवंबर को पुलिस ने नगर परिषद के सहयोग से आरती के अंगों का दाहसंस्कार कर दिया. पुलिस के बारबार संपर्क करने पर आरती के घर वालों ने अपना मोबाइल ही बंद कर लिया था.

2 दिनों की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद पुलिस ने 7 नवंबर को चूचू को फिर से अदालत में पेश किया तो पुलिस के आग्रह पर उसे और 2 दिनों के रिमांड पर दे दिया गया. बाद में रिमांड अवधि पूरी होने पर 9 नवंबर को पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

एसपी राहुल प्रकाश ने शहर में सनसनी फैलाने वाली इस वारदात का परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को 2-2 हजार रुपए का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है. इस पुलिस टीम में एएसपी मुख्यालय पारस जैन, सीओ (सिटी) जय सिंह नाथावत के अलावा एसआई, एएसआई से ले कर कांस्टेबल स्तर के 20 जवान शामिल थे.

लेखिका : प्रगति अग्रवाल            

अमेजन ने भारत में लॉन्च किया प्राइम वीडियो सर्विस

ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन इंडिया ने भारत में अपनी वीडियो सर्विस अमेजन प्राइम वीडियो लॉन्च कर दी है. इसके तहत अमेजन की प्राइम सर्विस लेने वाले ग्राहकों को फिल्मों, ऑरिजनल सीरीज और दुनियाभर से प्रीमियम कॉन्टेंट का एक्सक्लूसिव एक्सेस दिया जाएगा.

प्राइम वीडियो ऐप एंड्रायड और आईओएस यूजर्स के लिए उपलब्ध है. अगर आप अमेजन प्राइम यूजर हैं तो आप अभी से इस ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं.

गौरतलब है कि कंपनी ने अपने शॉपिंग पोर्टल और ऐप पर प्राइम सब्स्क्रिप्शन सर्विस को जुलाई में भारत में लॉन्च किया था. इसके तहत शॉपिंग करते वक्त सेम डे या वन-डे डिलिवरी का ऑप्शन फ्री में मिलता है.

अमेजन प्राइम वीडियो सब्सक्रिप्शन

फिलहाल यूजर्स इसे 499 रुपये प्रति साल की दर से सब्सक्राइब कर सकते हैं. हालांकि, इसकी वास्तविक कीमत 999 रुपये है, जिसे अभी लागू नहीं किया गया है. अगर आंकड़ों पर ध्यान दिया जाए तो यूजर को महज 50 रुपये प्रति महीने में अमेजन प्राइम वीडियो का सब्सक्रिप्शन मिल सकता है.

वहीं, नेटफिल्कस का सब्सक्रिप्शन 650 रुपये प्रति महीने का है. तो हॉटस्टार का 190 रुपये प्रति महीना है. आपको बता दें कि अमेजन ने फिल्ममेकर्स के साथ हाथ मिलाया है. जिसके तहत आने वाली फिल्मों का टीवी प्रीमियर दिखाने के लिए भी डील की गई है.

ऐसे में अमेजन वीडियो सर्विस नेटफ्लिक्स से काफी आगे है. सूत्रों के मुताबिक, भारत के हिसाब से कॉन्टेंट जुटाने के लिए अमेजन ने 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. अगर आंकड़ों पर देखा जाए तो यह कीमत टॉप 3 हिंदी मनोरंजन चैनल्स के सालाना प्रोग्रामिंग बजट से भी ज्यादा है. 

तो इसलिए हैंग करता है आपका स्मार्टफोन

स्मार्टफोन हैंग होना, बहुत आम समस्या है. कई बार तो नया स्मार्टफोन भी हैंग होने लगता है. पर समस्या सिर्फ आपके फोन के कन्फिगरेशन की ही नहीं है. आपके फोन यूजिंग हैबिट्स के कारण भी आपका फोन हैंग कर सकता है. वक्त रहते अपनी उन आदतों को बदल दीजिए, तो आपका फोन हैंग नहीं करेगा.

1. बिना जरूरत अपडेट करना

कई स्मार्टफोन कंपनियां अपने हैंडसेट के पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट करने की सुविधा देती हैं. लेकिन ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट करने से स्मार्टफोन स्लो हो सकता है. इसकी वजह फोन में पुराने हार्डवेयर. कम स्पीड वाला प्रोसेसर और रैम हो सकती है. स्मार्टफोन में ऐप्स अपडेट करने में भी कई बार यह समस्या आती है.

2. एक साथ कई ऐप्स खोल के रखना

जब आप स्मार्टफोन पर ऐप्स यूज करने के बाद बैक करते हैं, तो ऐप्स बंद न होकर मिनीमाइज हो जाते हैं, पूरी तरह क्लोज नहीं होते और बैकग्राउंड में ओपन ही रहते हैं. ऐसा करते करते कई ऐप्स बैकग्राउंड में ओपन ही रह जाते हैं. इंटरनेट ऐक्सेस करने पर ये भी सक्रिय हो जाते हैं. इस वजह से फोन स्लो हो जाता है और कई बार हैंग भी हो जाता है.

3. कैशे डीलिट न करना

अगर आप फोन पर इंटरनेट का ज्यादा यूज करते हैं तो इससे भी आपका फोन स्लो हो जाता है. इंटरनेट पर जब भी कुछ सर्च किया जाता है तो यह फोन की टेंपोरेरी मेमोरी में सेव हो जाता है. जैसे जैसे डेटा बढ़ते जाता है, स्मार्टफोन स्लो होने लगता है.

4. थर्ड पार्टी ऐप्स इन्स्टॉल करना

आप कई बार अपने स्मार्टफोन में ऐसे ऐप्स इन्स्टॉल कर लेते हैं जो प्ले स्टोर पर भी नहीं होते. ऐसे ऐप्स से सॉफ्टवेयर के करप्ट होने का खतरा रहता है. इससे फोन भी हैंग होता है.

5. फोन ऑफ या रिस्टार्ट नहीं करना

बहुत से यूजर अपने स्मार्टफोन को कभी ऑफ या रिस्टार्ट नहीं करते. ऐसे में लगातार यूज करते रहने से स्मार्टफोन स्लो हो जाता है और हैंग होने लगता है.

6. सही चार्जर यूज न करना

कई बार आप किसी भी चार्जर से फोन चार्ज कर लेते हैं. ऐसा करने से फोन की बैटरी पर असर पड़ता है.

7. बेमतलब के ऐप्स फोन में रखना

बहुत से यूजर्स अपने स्मार्टफोन में ऐसे ऐप्स रखते हैं जिनको वे कभी यूज नहीं करते. ऐसे फोन की इंटरनल मेमोरी का स्पेस कवर करते हैं और आपका फोन हैंग होने लगता है.

 

 

 

 

 

मेरी आंखों के नीचे सूजन रहती है. इस से मेरी उम्र भी अधिक दिखती है. कुछ घरेलू उपाय बताएं.

सवाल

मैं 40 वर्षीय महिला हूं. मेरी समस्या यह है कि मेरी आंखों के नीचे सूजन रहती है, जो न केवल खराब लगती है, बल्कि इस से मेरी उम्र भी अधिक दिखती है. कृपया मुझे इस समस्या से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपाय बताएं?

जवाब

आंखों के नीचे सूजन होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे- मानसिक तनाव, थकान, सुस्ती, नींद का पूरा न होना आदि. अगर इन में से कोई कारण है तो पहले उसे दूर करने का प्रयास करें. इस के अलावा आंखों के नीचे की सूजन को दूर करने के लिए आप संतुलित आहार लें. खूब पानी पीएं. भोजन में नमक का सेवन कम करें. घरेलू उपाय के तौर पर आप खीरे के स्लाइस काट कर आंखों पर रखें. ठंडे दूध में रुई को भिगो कर आंखों पर रखें. इन सभी उपायों से आंखों के नीचे की सूजन कम होने में मदद मिलेगी.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

कहीं आपका भी याहू अकाउंट तो नहीं हुआ हैक

अमेरिका की मल्टीनैशनल टेक्नॉलजी कंपनी याहू के 1 अरब से ज्यादा यूजर्स के अकाउंट्स हैक हो गए हैं. कंपनी को जानकारी मिली है कि 2013 में सिक्यॉरिटी में सेंध लगाकर बहुत सारे यूजर्स की जानकारियां हैक कर ली गई थीं.

गौरतलब है कि सितंबर में ही याहू ने 50 करोड़ अकाउंट्स हैक होने की बात कही थी. इस हिसाब से देखें तो तो दुनिया के सबसे बड़े हैक के मामले में याहू का ही रिकॉर्ड टूटा है.

याहू ने बताया कि साल 2013 में उसके कस्टमर्स के यूजर अकाउंट्स को हैक कर लिया गया था. हैक हुए अकाउंट्स की संख्या 1 अरब से ऊपर है और प्रभावित यूजर्स दुनिया के विभिन्न हिस्सों से संबंध रखते हैं. इस घटना में यूजर नेम, टेलिफोन नंबर और जन्मतिथि समेत कई जानकारियां चुरा ली गई थीं.

याहू का कहना है कि 2013 में हुए इस हैक में यूजर्स के क्रेडिट कार्ड और बैंक अकाउंट खतरे में नहीं आए, क्योंकि उनकी जानकारी अलग जगह स्टोर की जाती है. फिर भी चिंता की बात यह है कि यूजर्स के अनक्रिप्टेड सिक्यॉरिटी क्वेश्चन्स को भी चुरा लिया गया, जिनकी मदद से कंपनी यूजर्स को ऑथेंटिकेट करती है.

खतरे को कम करने के लिए याहू प्रभावित यूजर्स को सचेत कर रहा है और उन्हें अपना पासवर्ड बदलने के लिए कह रहा है. हैकिंग इतने बड़े पैमाने पर हुई है और 2013 से लेकर अब तक इतना वक्त बीत चुका है कि यूजर्स की इन्फर्मेशन को कई बार चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है.

याहू अपने यूजर्स को अपने ऑनलाइन अकाउंट्स को रिव्यू करने के लिए कह रहा है. याहू के यूजर्स को न सिर्फ पासवर्ड बदलना होगा, बल्कि अपने सिक्यॉरिटी क्वेस्चन और उनके जवाब भी बदलने होंगे. साथ ही उन अन्य अकाउंट्स के साथ भी ऐसा करना होगा, जिनमें याहू के अकाउंट्स जैसे पासवर्ड या सिक्यॉरिटी क्वेस्चन वगैरह रखे गए हैं.

यह खबर उस वक्त आई है, जब याहू अपने मुख्य बिजनस को टेलिकम्यूनिकेशन कंपनी वेरिजॉन को 4.8 बिलियन डॉलर्स (करीब 32,495 रुपये) में बेचने पर सहमत हो चुका है. इस लीक के बाद से अब ये सवाल उठने लगे हैं कि यह डील हो भी पाएगी या नहीं. यह भी माना जा रहा है कि इससे सौदे की कीमत भी घट सकती है. इस खबर के आने के बाद याहू के शेयर्स में 2.7 फीसदी की गिरावट भी देखने को मिली है.

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