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भारत ने जीता सैफ फुटबॉल चैम्पियनशिप का खिताब

भारतीय महिला टीम ने अपना दबदबा बरकरार रखते हुए कंचनजंगा स्टेडियम में बांग्लादेश को 3-1 से हराकर लगातार चौथी बार सैफ महिला फुटबाल चैम्पियनशिप का खिताब जीत लिया. इस टूर्नामेंट में भारतीय महिला टीम का अजेय अभियान 19 मैच का हो चुका है.

टीम ने इस दौरान 18 मैचों में जीत दर्ज की जबकि एक ड्रा रहा. भारत के लिए पहला गोल 12वें मिनट में स्ट्राइकर दांगमेई ग्रेस ने दागा. दांगमेई को विरोधी गोलकीपर सबीना अख्तर को छकाने में कोई परेशानी नहीं हुई. कमला देवी को 17वें मिनट में भारत की बढ़त को दोगुना करने का मौका मिला लेकिन बाला देवी की कार्नर किक पर उनका हेडर गोल के करीब से बाहर निकल गया.

बांगलादेश ने पलटवार करते हुए 40वें मिनट में सीरत जहां शोपना के गोल की बदौलत 1-1 से बराबरी हासिल की. मध्यांतर तक यही स्कोर रहा. दूसरे हाफ में भी भारत ने तेज शुरूआत की. मैच के 60वें मिनट में बाला देवी को बाक्स के अंदर धक्का दिया गया जिसके बाद रैफरी ने पेनल्टी किक का इशारा किया जिसे सस्मिता मलिक ने गोल में बदलकर स्कोर 2-1 किया. 

7 मिनट बाद सबीना इंदुमति के बेहद धीमे शाट के उछाल को नहीं समझ सकी और गोल गंवा बैठी जिससे भारत ने 3-1 की बढ़त बनाई जो निर्णायक स्कोर साबित हुआ.

धोनी: भारतीय क्रिकेट में एक सदी का अंत

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सफलतम कप्तानों में शुमार और मौजूदा सीमित ओवरों और टी20 की टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कप्तानी से इस्तीफा दे दिया है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने एक बयान जारी कर इसकी घोषणा की. धोनी इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली एकदिवसीय और टी-20 सीरीज में टीम की कमान नहीं संभालेंगे.

धोनी ने अचानक यह फैसला क्यों लिया इस पर ना तो बीसीसीआई ने कुछ कहा है और ना ही धोनी की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आई है. कप्तानी छोड़ने के उनके फैसले को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है. क्रिकेट के जानकार उनके इस फैसले के पीछे कई कारण गिना रहे हैं.

पिछले कुछ वनडे सीरीज में भारतीय टीम का प्रदर्शन अपेक्षा अनुरूप नहीं रहा. इस वजह से वह दबाव में भी थे. दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि वह 2019 विश्व कप के लिए नए कप्तान को पर्याप्त समय देना चाहते हैं. अभी अगले वर्ल्ड कप में 2 साल का समय बचा है, ऐसे में अगले कप्तान, जोकि संभवत: विराट कोहली ही होंगे, को अपने मुताबिक वनडे टीम तैयार करने का मौका मिलेगा.

कप्तानी छोड़ने के मुख्य कारण

फ्लॉप बल्लेबाजी

27.80 की औसत से धोनी ने पिछले 13 वनडे मैचों में सिर्फ 278 रन बनाए. पिछले काफी समय से वह तेजी से रन भी नहीं जुटा पा रहे थे.

कप्तानी में नयापन नहीं

कई दिग्गजों का मानना था कि धोनी की कप्तानी में नयापन नहीं रह गया है और वह काफी डिफेंसिव हो गए हैं. भारत ने 2015 में द. अफ्रीका के खिलाफ वनडे और टी-20 घरेलू सीरीज गंवाई. बांग्लादेश में टीम 1-2 से और ऑस्ट्रेलिया में 1-4 से हारी.

विराट की दावेदारी

टेस्ट में विराट कोहली की शानदार कप्तानी और बल्लेबाजी से दावा ठोका. इससे धोनी की आलोचना शुरू हुई और उन पर दबाव बढ़ा.

विश्व कप की तैयारी

भारत का पिछले वनडे विश्व कप और टी-20 विश्व कप में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. यह सवाल उठने लगे कि अब टीम को अगले विश्व कप के लिए नए कप्तान की जरूरत है जो टीम में नया जोश भर सके.

फिटनेस पर सवाल

धोनी की फिटनेस पर भी अंगुली उठने लगी. धोनी 35 साल के हो गए हैं और उम्र असर दिखाने लगी है.

बतौर कप्तान कब खेला आखिरी मैच

एकदिवसीय मैच

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपने हेलीकॉप्टर शॉट के लिए लोकप्रिय महेंद्र सिंह धोनी ने बतौर कप्तान अपना आखिरी एकदिवसीय मैच 29 अक्टूबर 2016 को न्यूजीलैंड के खिलाफ विशाखापत्तनम में खेला था. इस मुकाबले में उन्होंने 59 गेंद में 4 चौके और 1 छक्के की मदद से 41 रनों की पारी खेली थी. भारत ने धोनी की कप्तानी में अपना आखिरी एकदिवसीय सिरीज न्यूजीलैंड के खिलाफ 3-2 से जीता.

टी20

28 अगस्त 2016 को धोनी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अंतिम बार टी20 में भारतीय टीम की कप्तानी की. हालांकि इस मैच में उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला था.

टैस्ट मैच

धोनी ने (26 से 30 दिसंबर 2014) अपना आखिरी टैस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में खेला था. इस मैच की दोनों पारी में उनके (धोनी के) बल्ले से क्रमशः 11 रन (23 गेंद) और 24 नाबाद रन (39 गेंद) निकले थे. हालांकि यह मुकाबला ड्रॉ पर छूटा था.

धोनी का शानदार करियर

1. धोनी ने 31 अक्टूबर 2015 को जयपुर वन डे में नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 183 रन बनाए थे. यह किसी भी विकेटकीपर बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा स्कोर है. इस मैच में उन्होंने 10 छक्के और 15 चौके लगाए थे. इससे पहले यह रिकॉर्ड स्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट के नाम था.

2. महेंद्र सिंह धोनी ने 72 टी-20 मैचों में भारत की अगुआई की है, जिसमें भारत ने 41 मैच जीते हैं. एक कप्तान द्वारा सबसे ज्यादा टी-20 मैच जीतने का रिकॉर्ड भी धोनी के ही नाम है. धोनी के बाद इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर वेस्टइंडीज के डैरन सैमी हैं, जिन्होंने बतौर कप्तान 27 मैच खेले हैं.

3. वनडे में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी महेंद्र सिंह के खाते में दर्ज है. उन्होंने 2004 से लेकर 2016 तक 283 वनडे मैचों में 197 छक्के लगाए हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड भारत के सचिन तेंडुलकर के नाम था, जिन्होंने 463 वन डे मैचों में 195 छक्के लगाए थे.

4. 283 मैचों में धोनी ने 9 शतक लगाए हैं. नंबर 7 पर बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 2 शतक लगाए हैं, जो इस नंबर पर खेलने वाले खिलाड़ी द्वारा सबसे ज्यादा है. उन्होंने एक शतक 2012 में पाकिस्तान के खिलाफ और दूसरा 2007 में एशिया इलेवन और अफ्रीका इलेवन के बीच खेले गए मैच में लगाया था. अब तक 12 बल्लेबाजों ने अपने देश से नंबर सात पर बल्लेबाजी करते हुए शतक लगाया है.

5. धोनी को सिर्फ उनकी कप्तानी के लिए ही जाना नहीं जाता, बल्कि विकेट के पीछे उनकी काबिलियन का लोहा बड़े-बड़े क्रिकेटर भी मानते हैं. कुल 439 इंटरनैशनल मैचों में उन्होंने 152 बल्लेबाजों को स्टंप आउट किया है. अब तक कुल 3 ही ऐसे विकेटकीपर हैं जिन्होंने 100 से ज्यादा खिलाड़ियों को स्टंप आउट किया है.

6. यह एक अनोखा ही रिकॉर्ड है. 73 टी-20 मैचों में धोनी ने कुल 1112 रन बनाए हैं, जो टी-20 में किसी भी कप्तान द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा रन हैं. उनका सर्वाधिक स्कोर 48 है यानी उन्होंने अब तक एक भी हाफ सेंचुरी नहीं लगाई है. तो यह रिकॉर्ड हुआ बतौर कप्तान बिना हाफ सेंचुरी बनाए सर्वाधिक रन बनाने का. बिना अर्धशतक लगाए सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड धोनी के बाद आयरलैंड के गैरी विलसन का है.

7. यूं तो धोनी विकेटकीपिंग और बैटिंग ही करते हैं, लेकिन उन्होंने बतौर विकेटकीपर भी सबसे ज्यादा बार बॉलिंग की है. धोनी ने विकेटकीपर रहते हुए 132 गेंदें डालीं और 1 विकेट भी लिया.

8. धोनी विश्व के दूसरे ऐसे कप्तान हैं, जिनकी अगुआई में देश ने 100 से ज्यादा बार वन डे में जीत हासिल की है. अक्टूबर 2016 तक भारत उनकी कप्तानी में 108 वनडे जीत चुका है.

9. रिकी पॉन्टिंग और न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग के बाद वह तीसरे ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने 300 से ज्यादा इंटरनैशनल मैचों में भारत के लिए कप्तानी की है.

10. धोनी इकलौते ऐसे भारतीय विकेटकीपर हैं जिन्होंने टेस्ट मैचों में डबल सेंचुरी बनाई है.

11. धोनी विश्व के इकलौते कप्तान हैं जिन्होंने आईसीसी की तीनों ट्रॉफी-टी-20 वर्ल्ड कप, 2011 आईसीसी वर्ल्ड कप, और 2013 में चैम्पियंस ट्रॉफी जीती हैं.

12. जबसे धोनी ने कप्तानी संभाली थी, उससे लेकर अगले 11 टेस्ट मैच तक भारत कोई टेस्ट नहीं हारा था.

महेंद्र सिंह धोनी का टैस्ट करियर

90 टैस्ट मैच में 144 पारी, 4876 रन, 224 उच्चतम स्कोर, बल्लेबाजी औसत 38.09, स्ट्राइक रेट 59.11, 6 शतक और 33 अर्द्धशतक

महेंद्र सिंह धोनी का वनडे करियर

283 वनडे मैच में 246 पारी, 9110 रन, 183 (नाबाद) उच्चतम स्कोर, बल्लेबाजी औसत 50.89, स्ट्राइक रेट 88.80, 9 शतक और 61 अर्द्धशतक

महेंद्र सिंह धोनी का टी20 करियर

73 टैस्ट मैच में 63 पारी, 1112 रन, 48 रन (नाबाद) उच्चतम स्कोर, बल्लेबाजी औसत 35.87, स्ट्राइक रेट 122.33, एक भी शतक और अर्द्धशतक नहीं.

2019 वर्ल्ड कप खेलेंगे धोनी

जानकारों के मुताबिक, धोनी अगला वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं. वह इसके लिए खुद को फिट रखना चाहते हैं. इसी वजह से उन्होंने 2014 में टेस्ट क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया था. अब विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर धोनी अपने खेल पर फोकस कर सकेंगे.

कोहली बन सकते हैं कप्तान

धोनी के कप्तानी छोड़ने पर माना जा रहा है कि टेस्‍ट कप्‍तान विराट कोहली को तीनों फॉर्मेट की कमान सौंपी जा सकती है. धोनी ने 199 वनडे में कप्‍तानी की है जिसमें भारत में 110 मैच जीते हैं और 74 हारे हैं. धोनी ने 72 टी-20 मैचों में भी भारत की कमान संभाली है. इनमें से 41 में टीम को जीत मिली और 28 में हार का स्‍वाद चखना पड़ा. 

गूगल की सहायता से करें बिजनेस

नोटबंदी के बाद से ही बहुत से लघु व्यापार घाटे में चल रहे हैं तो कुछ पर ताला लग गया है. छोटी-बड़े सभी उद्योगों पर विमुद्रीकरण का असर पड़ा है. पर गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने लघु एवं मझोले उपक्रमों के लिए अच्छे दिन लाने की घोषणा की है.

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने दिल्ली में लघु एवं मझोले उपक्रमों (एसएमई) के एक कार्यक्रम में भारतीय लघु एवं मझोले उपक्रमों (एसएमई) के लिए गूगल की कुछ महत्वपूर्ण पहलों की घोषणा की.

गूगल ने भारत में लगभग 5 करोड़ लघु एवं मझोले उपक्रमों के बाजार में पैठ बनाने के लिए कई पहलें शुरू की हैं. कंपनी ने अपनी ‘माई बिजनेस’ पेशकश के तहत एक नया मोबाइल ऐप ‘प्राइमर’ और प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल किए हैं. इन पहलों की घोषणा करते हुए गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने कहा कि कंपनी भारत के लिए उत्पादों पर काम कर रही है और इसे बाद में वैश्विक विस्तार दिया जाएगा.

पिचाई ने कहा, ‘जब हम भारत जैसे देश के लिए कोई समाधान सोचते हैं तो वह पूरी दुनिया में हर किसी के लिए समाधान होता है. इससे हमें प्रेरणा मिली की हम यहां अपनी टीम बनाएं और ज्यादा समय यहां गुजारें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे उत्पाद हर किसी के लिए उपयोगी हों.’

उन्होंने कहा कि ‘माई बिजनेस’ के तहत कोई भी छोटा कारोबारी सिर्फ अपने स्मार्टफोन से अपनी वेबसाइट बना सकता है. इसके अलावा कंपनी ने ‘डिजिटल अनलॉक्ड’ नाम से एक प्रशिक्षण कार्यक्रम पेश किया है. इसके लिए गूगल ने उद्योग संगठन फिक्की और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के साथ साझेदारी की है.

तो ये हैं ‘काबिल’ के असली निर्देशक

रितिक रोशन के करियर में एक खास बात यह है कि रितिक रोशन के अभिनय से सजी उन्हीं फिल्मों ने हमेशा बॉक्स आफिस पर सफलता के रिकार्ड तोड़े हैं, जिन फिल्मों को उनके पिता राकेश रोशन ने निर्देशित किया. ‘जोधा अकबर’, ‘लक बाय चांस’, ‘काइट्स’,‘मोहन जो दाड़ो’ जैसी बुरी तरह से असफल फिल्मों का निर्देशन राकेश रोशन की बजाय अन्य निर्देशकों ने किया है. मगर जब से राकेश रोशन ने घोषणा की है कि उनके द्वारा निर्मित और संजय गुप्ता निर्देशित फिल्म ‘काबिल’ बॉक्स ऑफिस पर तीन सौ करोड़ का व्यापार करेगी, तब से बौलीवुड से जुड़े लोगों के मन में कई तरह के विचार आ रहे हैं? कुछ लोग तो सवाल करने लगे थे कि आखिर फिल्म ‘काबिल’ का असली निर्देशक है कौन?

लोगों के जेहन में उभर रहे इन सवालों का जवाब अंततः खुद राकेश रोशन ने ही दे दिया. मुंबई के एक अंग्रेजी दैनिक से बात करते हुए राकेश रोशन ने रितिक रोशन की असफल फिल्म ‘काइट्स’ की चर्चा करते हुए कहा, ‘‘फिल्म ‘काइट्स’ का निर्माण मैने किया था. जिसमें रितिक रोशन ने अभिनय किया था. मगर इस फिल्म के निर्देशक अनुराग बसु थे. मैंने आधी फिल्म बनने के बाद ही मान लिया था कि यह फिल्म असफल होगी. फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद मैंने रितिक से भी कह दिया था कि फिल्म असफल होगी. इसकी मूल वजह यह है कि मुझे फिल्मों की समझ है. मैं हमेशा अपनी फिल्म के निर्देशक को बताता रहता हूं कि उसे क्या करना है. मगर फिल्म ‘काइट्स’ के निर्देशक अनुराग बसु और उनकी सहायकों की टीम मेरी सलाह के विपरीत काम कर रही थी. फिल्म के आधी बनने के बाद उसे बीच में रोकना उचित नहीं था. इसलिए मैंने सोचा कि अनुराग जो करना चाहते हैं, उन्हें करने दिया जाना चाहिए. पर हमें पता था कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलेगी. और वही हुआ था.’’

इसी इंटरव्यू में फिल्म ‘काबिल’ की चर्चा करते हुए राकेश रोशन ने बता दिया कि ‘काबिल’ का असली निर्देशक कौन है? खुद राकेश रोशन ने कहा है, ‘‘फिल्म ‘काबिल’ के निर्देशक संजय गुप्ता हैं. मगर इस फिल्म में मैंने उनके तकनीकी ज्ञान और संजय गुप्ता ने मेरे अनुभव व मेरे इमोशन का उपयोग किया है.‘काबिल’ में मेरे इमोशन हैं. उन्होंने मेरे अनुभव व मेरे इमोशन का उपयोग किया. मैं अपने निर्देशक को पूरी छूट देता हूं, पर बर्बादी बर्दाश्त नहीं करता. संजय गुप्ता दिन में जिस दृश्य को फिल्माते थे, उसकी फुटेज मेरे पास भेजते थे. मैं तुरंत एडीटिंग रूम में जाकर उस फुटेज को देखता था. यदि मुझे ठीक लगता, तो उन्हें आगे बढ़ने के लिए कहता था अन्यथा उसमे जो कमी होती थी, उसे बदलकर ठीक करने के लिए कहता था. संजय गुप्ता पूरी तरह से मेरे हर निर्देश का का पालन करते रहे. मैंने जब भी उनसे बदलाव करने के लिए कहा, संजय गुप्ता ने वह बदलाव किए. इतना ही नहीं पटकथा का हर बिंदु भी मैंने व संजय गुप्ता ने बैठकर तय किया. संजय गुप्ता के तकनीकी ज्ञान और मेरे इमोशन के मिश्रण से यह फिल्म अच्छी बनी है. मैंने संजय गुप्ता को ऑस्कर अवार्ड विजेता साउंड इंजीनियर रेसुल पुकुटी के अलावा ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘डर्टी पिक्चर्स’ जैसी फिल्मों के बेहतरीन कैमरामैन सुदीप चटर्जी जैसे अति अनुभवी व बेहतरीन तकनीशियन की सेवाएं भी दी. इसलिए ‘काबिल’ बॉक्स ऑफिस पर रिकार्ड तोड़ेगी.’’

अब फिल्म ‘काबिल’ का बॉक्स ऑफिस पर क्या हश्र होगा, यह तो 25 जनवरी के बाद ही पता चलेगा, लेकिन राकेश रोशन ने सब कुछ खुद ही बयां कर दिया है, तो अब पाठक खुद ही समझ लें कि ‘काबिल’ का असली निर्देशक कौन है?

दो महीने बाद हर मोबाईल में होगा पैनिक बटन

नए हैंडसेट में पैनिक बटन का फीचर जोड़ने के लिए सरकार ने हैंडसेट निर्माताओं को दो महीने का और समय दे दिया है. दूरसंचार सचिव जे. एस. दीपक ने कहा, 'मोबाइल उपकरण विनिर्माताओं के आग्रह पर हमने नए हैंडसेटों में पैनिक बटन जोड़ने की समय सीमा को दो महीने के लिए और बढ़ा दिया है. इन कंपनियों ने कहा था कि उनके पास ऐसे माल का भंडार है जिसमें पैनिक बटन नहीं है. ऐसे में हमने उन्हें इसके लिए 28 फरवरी तक का समय दे दिया है.

सरकार ने अप्रैल, 2016 में घोषणा की थी कि एक जनवरी, 2017 से देश में बिकने वाले सभी हैंडसेटों में पैनिक बटन होना अनिवार्य होगा. आदेश के अनुसार पैनिक बटन दबाने पर सीधे इमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल हो जाएगी.

इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज महेंद्रू ने कहा, 'मोबाइल हैंडसेट कंपनियों ने हर महीने दो करोड़ फोन पैनिक बटन के साथ पेश करने के कार्य को काफी गंभीरता से लिया है.'

उन्होंने कहा कि उद्योग इसके लिए पूरी तरह तैयार है. महेंद्रू ने बताया कि नोटबंदी की वजह से इसमें कुछ मामूली अड़चन आई है जिसे एक से दो महीने में सुधार लिया जाएगा. फोन में पैनिक बटन की सुविधा होने से महिलाओं के लिए सहूलियतें हो जाएंगी. आपात स्थिति में उन्हें पुलिस की मदद के लिए मोबाइल फोन में एक बटन दबाने से पुलिस को आपात अलर्ट भेजा जा सकेगा. महिला एवं बाल विकास मंत्री गांधी ने दूरसंचार मंत्रालय को इसके लिए सुझाव दिया था.

ऐसे करेगा पैनिक बटन काम

1. आपके पास स्मार्टफोन है और आप किसी परेशानी में फंस गए तो सबसे पहले इमरजेंसी बटन दबाना होगा.

2. अगर फोन में इमरजेंसी बटन नहीं है तो पावर बटन को तीन बार प्रेस करके इसका इस्तेमाल कर सकते है.

3. यूजर को स्मार्टफोन कीपैड पर '5' या '9' नंबर के बटन को दबाकर कॉल करनी होगी.

क्यों जरूरी बनाया गया पैनिक बटन को

1. पैनिक बटन को लाने का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं की सिक्योरिटी है.

2. मोबाइल में पैनिक बटन जरूर होना चाहिए, यह बात इंडियन वायरलेस टेलिग्राफी एक्ट 1993 के तहत यह बात कही गई है.

3. बतौर टेलिकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद "टेक्नोलोजी का अर्थ है जिंदगी सुविधाजनक और बेहतर बनें और इसका बेहतर उपयोग हम तभी कर सकेंगे जब महिलाओं की सुरक्षा के लिए इसका इस्तेमाल हो"

इस बाबत इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन के नेशनल प्रेसिडेंट पंकज महेंद्रू ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा देने के सरकार के फैसले पर पूरी टेलिकॉम इंडस्ट्री और स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां व सर्विस प्रोवाइडर पूरी तरह से सरकार के साथ है.

बौलीवुड में बदलते रिश्ते व समीकरण

सलमान खान व करण जोहर की पहली फिल्म में अक्षय कुमार बतौर हीरो काम करेंगे. बौलीवुड के बारे में मशहूर है कि यहां कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है. मगर 2017 में बौलीवुड में जो समीकरण बन रहे हैं, उनकी कल्पना तो किसी ने नहीं की थी. यही वजह है कि 2017 की शुरूआत की इस खबर ने हर किसी को चौंका दिया है.

अक्षय कुमार व सलमान खान के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा रही है. तो वहीं करण जोहर और शाहरुख खान की दोस्ती जग जाहिर है. मगर 2017 के शुरू होने के दूसरे ही दिन सलमान खान व करण जोहर ने मिलकर पहली फिल्म बनाने का ऐलान कर हर किसी को चौंका दिया है.

इससे भी ज्यादा चैंकाने वाली बात यह है कि सलमान खान द्वारा बनाई जा रही इस फिल्म के हीरो अक्षय कुमार होंगे. जबकि इस अनाम फिल्म का निर्देशन ‘‘पंजाब 1984’’,‘‘जट्ट’’ और ‘‘जट्ट 2’’ जैसी सुपर हिट पंजाबी फिल्मों के निर्देशक अनुराग सिंह करेंगे. इस फिल्म की शूटिंग जुलाई 2017 के बाद शुरु होगी और यह फिल्म 2018 में सिनेमाघरों में पहुंचेगी.

इस फिल्म की घोषणा करते हुए सलमान खान ने कहा, ‘‘नए साल के जश्न के मौके पर मैं अपने मित्र व अति सफल कलाकार अक्षय कुमार के साथ जुड़ रहा हूं. अक्षय कुमार लाजवाब कलाकार के रूप में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं. मैं करण जोहर के साथ मिलकर एक फिल्म का निर्माण कर रहा हूं, जिसमें अक्षय कुमार मुख्य भूमिका निभाएंगे. मैं इस बात से उत्साहित हूं कि मेरी इस नई फिल्म के साथ मैं, करण जोहर व अक्षय कुमार तीनों एक साथ आ रहे हैं.’’

अक्षय कुमार तो केप टाउन में हैं, पर उन्होने वहां से अपनी खुशी जाहिर करते हुए संदेश भेजा है, ‘‘मैं इससे बेहतरीन 2017 की शुरूआत की कल्पना नहीं कर सकता था.’’

करण जोहर जब पहली बार निर्देशक बने थे, तब उन्होंने सलमान खान को लेकर फिल्म ‘‘कुछ कुछ होता है’’ निर्देशित की थी, उसके बाद सलमान खान की बजाय करण शाहरुख खान की तरफ मुड़ गए थे. पर अब वह सलमान खान के साथ जुड़े हैं. जबकि अक्षय कुामर के साथ मिलकर करण जोहर फिल्म ‘ब्रदर्स’ का निर्माण कर चुके हैं.

सत्ता का रंग सब अखिलेश संग

जिस पार्टी का गठन खुद मुलायम सिंह यादव ने किया और अपने खून पसीने से उसको सींचा पालपोस कर बड़ा किया वही आज उनके साथ नहीं हैं. इसे सत्ता का ही रंग कहा जायेगा कि मुलायम को छोड़ ज्यादातर लोग मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के संग हैं.

मुलायम सिंह को पार्टी संरक्षक बनाकर जब से अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी संभाली तब से पार्टी के बहुतायत लोग उनके साथ हैं. विधायक, मंत्री, विधान परिषद सदस्य और सांसदों की संख्या सबसे अधिक अखिलेश यादव के पक्ष में है. यही वजह है कि मुलायम सिंह यादव ने 5 जनवरी को बुलाये गए पार्टी अधिवेशन को स्थगित कर दिया. मुलायम सिंह यादव अपनी पार्टी और चुनाव चिन्ह बचाने की जद्दोजहद में जुट गये हैं. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सबकुछ पीछे छोड़ कर चुनाव की तैयारी में जुट गये हैं.

मुख्यमंत्री की रणनीति है कि चुनाव घोषणा के पहले पूरी तैयारी कर ली जाए. जिससे बिना सिंबल के या फिर किसी और दल के साथ तालमेल से चुनाव लड़ा जा सके. अखिलेश यादव के पास 2 रास्ते हैं. वह कांग्रेस और कुछ दूसरे दलों के साथ तालमेल का चुनाव लड़ सकते हैं. असल में पार्टी सिंबल को लेकर अखिलेश का मत साफ है कि वह चुनाव आयोग में पूरी बात रखेंगे.

अगर चुनाव आयोग उनकी बात नहीं मानता पार्टी का सिंबल किसी भी तरह से प्रभावित होता है तो वह अपनी इमेज पर चुनाव लड़ेंगे. अखिलेश खेमा मानता है कि मुख्यमंत्री की लोकप्रियता और साफसुथरी इमेज से यह लड़ाई आसान हो जायेगी.

यह सच है कि सपा का पुराना खेमा पार्टी प्रमुख मुलायम के साथ हैं. इसके बाद भी नई पीढ़ी में अखिलेश की स्वीकायर्ता बढ़ रही है. मुलायम की पीढ़ी के साथी नेता भी अपनी परिवार के लोगों को राजनीति में उतार रहे हैं. इसके चलते वह अखिलेश का विरोध नहीं कर सकते हैं. ऐसे लोग दिखावे के लिये भले ही मुलायम के साथ रहते हों पर असल में वह अब इस लड़ाई में अपने को दूर ही रखना पंसद कर रहे हैं. मुलायम के साथ खुले रूप से अमर सिंह और शिवपाल यादव के अलावा कोई बडा नेता दिख नहीं रहा है.

खुद अखिलेश यादव पार्टी के फोरम से इस बात का मैसेज देना चाहते हैं कि वह पिता मुलायम के खिलाफ नहीं हैं. वह उन लोगों के खिलाफ हैं जो मुलायम को गुमराह करने का काम कर रहे हैं. वह बारबार कार्यकर्ताओं से कह रहे हैं कि वह लोग मुलायम का विरोध न करे उनके खिलाफ नारे न लगायें.

असल में अखिलेश भी मुलायम का विरोध करते नजर नहीं आना चाहतें. अखिलेश की सत्ता का रंग लखनऊ की सड़को पर साफ दिख रहा है जहां मुलायम पूरी तरह से अलग थलग पड़े नजर आ रहे हैं.

अब पार्टी और पार्टी का भविष्य दोनों ही अखिलेश में नजर आ रहा है. मुलायम और उनके पक्ष के लोगों को हाशिये पर जाना ही है. इस लड़ाई से प्रदेश की साम्प्रदायिकता विरोधी राजनीति खत्म हो रही है. भाजपा के चेहरे की खुशी परिवर्तन रैली में दिख रही थी. उसे अब मैदान साफ दिख रहा है. सपा की लड़ाई दिल्ली में लड़ी जायेगी. जहां चुनाव तक कोई फैसला होता नहीं दिख रहा है. अखिलेश इस बात को समझ अपनी राह पर चल पड़े हैं. जनता उनका कितना साथ देती है यह देखने वाली बात होगी. 

नए साल में लें नया घर

नोट बैन के बाद से ही विशेषज्ञ लोन दरों में कटौती का अनुमान लगा रहे थे. सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के करीब आधे दर्जन बैंकों ने मानक ब्याज दर में 1.48 प्रतिशत तक की कटौती की है. नोटबंदी के बाद जमा में वृद्धि के बाद बैंकों के इस कदम से मकान, गाड़ी और कंपनी कर्ज सस्ता होगा.

भारतीय स्टेट बैंक के बाद आईसीआईसीआई बैंक तथा सार्वजनिक क्षेत्र के ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स तथा आंध्रा बैंक ने कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) में कटौती की सोमवार को घोषणा की.

एसबीआई ने ब्याज दरों में 0.9 प्रतिशत कटौती की घोषणा की है जिसके बाद इस बैंक की ब्याज दर 8.00% हो गयी है. पीएनबी ने ब्याज दरों में 0.7 फीसदी की कटौती की है जिसके बाद यहां ब्याज दर 8.45% रह गई है. SBI ने महिलाओं को दिए जाने वाले 75 लाख रुपये तक के कर्ज की ब्याज दर भी 9.1 फीसदी से घटाकर 8.6 फीसदी कर दी है.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देना ने भी ब्याज दरों में 0.75 प्रतिशत की कटौती कर लोन अमाउंट पर ब्याज दर 8.55% कर दी है. इसके आलावा सार्वजानिक क्षेत्र के ही बैंक ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने भी ब्याज दरों में 0.8% की कटौती कर दी है जिसके बाद यहां ब्याज दर 8.60% हो गयी है.

आंध्रा बैंक ने 0.8% जिसके बाद इसकी ब्याज दर 8.65%, यूबीआइ ने 0.9% जिसके बाद इसकी ब्याज दर 8.65% और बंधन बैंक ने 1.48% जिसके बाद अब इसकी ब्याज दर 10.52% रह गई है. बैंकों की ओर से ब्याज दरों में कटौती का उद्योग जगत ने स्वागत किया है.

लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू करने के लिए दिया इस्तीफा

केरल क्रिकेट संघ (केसीए) के अध्यक्ष टी. सी. मैथ्यू के नेतृत्व में केसीए के सभी अधिकारियों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित लोढ़ा समिति की सिफारिशों को केसीए में लागू करने के मकसद से केसीए के अधिकारियों ने अपने-अपने इस्तीफे दिए.

मैथ्यू ने कहा कि वह सभी इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं ताकि केसीए में लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू की जा सकें. मैथ्यू ने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार मैं और वह सभी अधिकारी, जिन्होंने नौ साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है, इस्तीफा दे रहे हैं. हमने तय किया है कि केसीए के वरिष्ठतम सदस्य बी. विनोद संघ के नए अध्यक्ष और जयेश जॉर्ज नए सचिव होंगे.'

सर्वोच्च न्यायालय ने लोढ़ा समिति की अनुशंसाओं को लागू करने के संबंध में अड़ियल रुख अपनाए हुए देश के शीर्ष क्रिकेट संघ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को उनके पदों से हटा दिया.

मैथ्यू 2015 में बीसीसीआई द्वारा चुने गए पांच उपाध्यक्षों में से एक थे. वह पश्चिम जोन से आते हैं और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन के खास माने जाते हैं. पेशे से वकील मैथ्यू 1997 से 2005 तक केसीए के कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं. वह इसके बाद 2014 तक केसीए के सचिव और उसके बाद अध्यक्ष बने.

शोकसंतप्त लेखक

अत्यंत दुख के साथ अपने सभी चटोरे और चालू मित्रों को रुंधे गले से सूचित कर रहा हूं कि मेरे प्रिय कंप्यूटर का आकस्मिक निधन हो गया है. मित्रो, सच कहूं तो कंप्यूटर मेरा सबकुछ था. वह मेरा बाप था, वह मेरी मां थी. मेरा भाईबंधु सबकुछ मेरा कंप्यूटर ही था. जबजब मैं उस के साथ होता था तो मुझे किसी की कोई कमी नहीं खलती थी. यहां तक कि मेरी प्रेमिका भी मेरा यह कंप्यूटर ही था और पत्नी भी. इस कंप्यूटर के बीमार होने पर मैं ने इसे कहांकहां नहीं दिखाया. किसेकिसे नहीं दिखाया. जिस ने जहां कहा, इसे वहां ले गया. यहां तक कि क्रांतिकारी लेखक होने के बावजूद झाड़फूंक करने वालों पर भी विश्वास किया. मरता क्या न करता. हूं तो मैं इसी परिवेश का क्रांतिकारी लेखक न. ठीक वैसा ही जीव जैसे कोई देसी कम्यूनिस्ट उम्रभर हर मंच से परंपराओं, धर्म का विरोध करतेकरते टूट गया हो पर जब उस की अपनी बेटी का विवाह हो तो वह चोरीचोरी से अपने घर की खिड़कियां, दरवाजे बंद कर भीतर बेटी के विवाह का मंडप सजा वहां पंडितजी से मंत्रोच्चार करवा रहा हो.

अब बंदा यहीं आ कर तो हार जाता है. मौत के आगे किस का वश चलता है भाईसाहब. पर यहीं आ कर मन मान जाता है कि जाने वाले को बचाने के लिए जितना मुझ से हो सकता था, उतना तो मैं ने किया. बस, इसी बात की प्रसन्नता से अपने मन के दुख को कम किए हुए हूं. अपने दिल पर हाथ रख कर पूरी ईमानदारी से अपने पूरे होशोहवास में कह रहा हूं कि मैं ने 10 सालों से बीमार पत्नी को कभी सरकारी अस्पताल तो छोडि़ए, महल्ले के ही वैद्य तक को दिखाने की कोशिश नहीं की. आप मुझे लेखक कम, गधा अधिक सोच रहे होंगे और मुझ से पूछना चाह रहे होंगे कि मैं ने आखिर ऐसा क्यों किया? दरअसल वह इसलिए कि पत्नी का विवाह के बाद से बस एक काम होता है और वह यह कि उस का बीमार रहना. सुबह टांगों में दर्द तो दिन में सिर में दर्द. शाम ढली नहीं कि उस ने कमर पकड़ी नहीं.

अब रही मांबाप के इलाज की बात. अस्पताल का डाक्टर तो छोडि़ए, उन के मातृपितृ भक्त श्रवणकुमार ने उन्हें कभी अस्पताल का दरवाजा तक नहीं दिखाया. पंचतत्त्व की इस काया को आखिर एक दिन मिट्टी में ही तो मिलना है. फिर बेचारी की हालत में अस्पताल की बैंचों पर डाक्टरों का इंतजार करवा कर क्यों और थकाना और गलती से डाक्टर ने दे मारा ऐसावैसा कुछ, तो निकल पड़े वक्त से पहले ही अनंतयात्रा पर. इधर, हम परेशान तो उधर बिन बुलाए अतिथि से धर्मराज.

फुलटाइम लेखक होने का साहस करने वालों के साथ बहुधा ऐसा ही होता आया है, यह कोई नई बात नहीं. नई बात तो तब हो जो वह अपने मांबाप का इलाज सीना चौड़ा कर करवा सके और उस लेखक के मांबाप मरने के बाद यमराज के पास फख्र से सिर ऊंचा कर कह सकें कि वे अमुक लेखक के मांबाप हैं और इलाज करवाने के बाद मरे हैं. जिस तरह आज के नेता का दिल जनता में नहीं, बस, कुरसी में निवास करता है, उसी तरह आज के लेखक का दिल जिस्म में नहीं, कंप्यूटर में निवास करता है. कंप्यूटर का सब से बड़ा लाभ यह होता है कि एक ही रचना को उस के अलगअलग एंगल से टांगबाजू तोड़ 10 जगह बेहिचके भेजा जा सकता है. हे मेरे दुख में खुश होने वालो, जितना मेरे जेब का बजट था उतना मैं ने अनंतयात्रा पर सिधारे अपने प्रिय कंप्यूटर को ठीक कराने की कोशिश में लुटा दिया. मुझे, बस इसी बात का संतोष है जो कंप्यूटर के न रहने के मेरे गम को कुछ हलका किए हुए है.

मैं घर के आटेदाल के बजट पर कटौती कर जो कर सकता था, इस कंप्यूटर के इलाज के लिए अपनी हद से अधिक किया. ऐसा करने से कम से कम चुनाव नतीजे आने के बाद हार का ठीकरा फोड़ने के लिए सिर ढूंढ़ने के लिए करीब सिर की तलाश नहीं करनी पड़ी. जानता हूं, जो लेखक आज अमुक अखबार में कौलम लिखता है, कल उसे जाना है. यही लेखन का धर्म है. रही बात जाने वाले की. तो जाने वाले को जाने से कौन रोक सकता है? किसी को आने से हम भले ही रोक लें. एक अखबारी बुद्घिजीवी होने के नाते मैं यह भी जानता हूं, जिस तरह से पैसों के चक्कर में लेखक एक अखबार के कौलम से दूसरे अखबार का कौलम बदलता है उसी तरह वह लोनशोन ले कंप्यूटर भी बदल लेगा. भले सैकंडहैंड ही सही. पर सच कहूं, हे कंप्यूटर, तेरी और विवाह से पहले के प्रेम की याद तो मरने के बाद भी दिलोदिमाग में छाई रहेगी. पहले प्यार वाले प्रेमी और पहले कंप्यूटर वाले लेखक के लिए विवाह और दूसरा कंप्यूटर पार्टटाइम ही होते हैं. तो मित्रो, मेरे दिवंगत कंप्यूटर की रस्मक्रिया व भोग आने वाले इतवार को 12 बजे लेखकगृह में होगा. लेखकगृह में लेखक कुछ भी कर सकता है. वही तो उस का इस लोक में एकमात्र अपना घर होता है.

हे कंप्यूटर, जब तक मैं हूं, तुम मेरी हर सांस में जिंदा रहोगे. मैं तुम्हारे साथ बिताए हर पल को अपने साथ संजोए रखूंगा. तुम्हारी मधुर स्मृतियां मेरे दिल में सदा बसी रहेंगी. तुम्हारे बिना ऐसा फील कर रहा हूं कि जैसे वक्त रुक सा गया है. हे कंप्यूटर, तुम जहां भी रहो, शांति से रहो, मेरी चिंता मत करना. अपने प्रिय कंप्यूटर की मधुर स्मृति में, एक शोकसंतप्त लेखक.

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