Download App

2017 में निवेश करें, पर जरा ध्यान से

अगर आप भी नए साल में निवेश की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं, तो सावधानी बरतना बहुत जरूरी है. आपके लिए यह जानना जरूरी है कि पिछले साल निवेश के उपलब्‍ध तमाम विकल्‍पों में से किसने कितना रिटर्न दिया है. इस जानकारी के आधार पर आप तय कर सकते हैं कि कहां पैसा लगाना चाहिए और कहां नहीं.

सही प्लैनिंग है जरूरी

आपके लिए निवेश पर अधिकतम रिटर्न पाने के लिए सही प्लैन बनाना जरूरी है. प्रोपर प्लैनिंग के तहत आपको अपना पैसा एक साथ कई जगहों पर लगाना चाहिए. इससे आपको ज्‍यादा मिलने के साथ ही रिस्क भी कम हो जाएगा.

सेंसेक्‍स में करें निवेश

साल 2016 में सेंसेक्‍स ने 2 फीसदी रिटर्न दिया जबकि निफ्टी ने 3 फीसदी रिटर्न दिया. इस अवधि में निफ्टी बैंक ने 8 फीसदी, मेटल ने 45 फीसदी और एफएमसीजी सेक्‍टर ने 3 फीसदी रिटर्न दिया. ऑटो सेक्‍टर का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा और ऑटो सेक्‍टर ने 11 फीसदी रिटर्न दिया जबकि निफ्टी आईटी और फार्मा ने ने‍गेटिव रिटर्न दिया. ऐसे में आप कुछ पैसा स्‍टॉक मार्केट में भी लगा सकते हैं.

सोने में भी कर सकते हैं निवेश

साल 2016 में गोल्ड ने निवेशकों को 14 फीसदी रिटर्न दिया है. 31 दिसंबर 2015 को सोने की कीमत 24,950 रुपए प्रति 10 ग्राम थी वहीं 30 दिसंबर 2016 को सोने की कीमत 28,500 रुपए प्रति 10 ग्राम थी. इस तरह से सोने ने इस साल 14 फीसदी रिटर्न दिया. यानी सोना अब भी रिटर्न के लिहाज से निवेश का आकर्षक विकल्‍प बना हुआ है.

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) 

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी पीपीएफ भी नोटबंदी के बाद सबसे अधिक रिटर्न देने वाली स्‍कीमों में से एक है. मौजूदा समय में पीपीएफ पर सालाना 8 फीसदी रिटर्न मिल रहा है. कोई भी व्‍यक्ति बैंक में जाकर पब्लिक प्रॉविडेंट फंड अकाउंट खुलवा सकता है.

प्रॉपर्टी में रहा फ्लैट रिटर्न

प्रॉपर्टी सेक्‍टर को आम तौर पर निवेश के लिए आकर्षक माना जाता रहा है. लेकिन 2016 में देश के ज्‍यादातर हिस्‍सों में प्रॉपर्टी की कीमतें पिछले साल के स्‍तर पर ही बनी रहीं यानी निवेशकों को प्रॉपर्टी सेक्‍टर में खास रिटर्न नहीं मिला. जेएलएल, इंडिया के सीओओ (बिजनेस एंड इंटरनेशनल डायरेक्‍टर) रमेश नैयर ने कहा कि साल 2016 ने इन आशंकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था प्रॉपर्टी की कीमतें कम हो जाएंगी और निवेशकों को नुकसान होगा.

बैंक एफडी पर घटा रिटर्न

साल 2016 में बैंक एफडी पर मिलने वाला रिटर्न घट गया है. दिसंबर 2015 में भारतीय स्‍टेट बैंक की विभिन्‍न अवधि की एफडी पर 7 फीसदी से 7.25 फीसदी तक रिटर्न मिल रहा था जो अब घट कर 6.50 फीसदी से 6.85 फीसदी पर आ गया है. बैंक एफडी पर मिलने वाले रिटर्न में पिछले साल की तुलना में गिरावट आई. लेकिन अगर आप रिस्‍क नहीं लेना चाहते हैं तो आप बैंक एफडी में पैसा लगाकर आकर्षक रिटर्न हासिल कर सकते हैं.

सुकन्‍या समृदि्ध स्‍कीम

नोट बंदी के बाद बिना रिस्‍क के आकर्षक रिटर्न हासिल करने के लिए सुकन्‍या समृद्धि स्‍कीम भी बेहतर विकल्‍प है. आप अपनी 10 साल तक की उम्र की लड़की के नाम से सुकन्‍या समृदि़ध स्‍कीम में अकाउंट खुलवा सकते हैं. मौजूदा समय में इस स्‍कीम में सालाना 8.5 फीसदी रिटर्न मिल रहा है.

 

अब सरकार देगी आपको तनख्वाह

नोटबैन की चोट पर मरहम फेरते हुए सरकार आम आदमी को एक बड़ा तोहफा दे सकते हैं. सरकार देश में हर महीने सबको एक फिक्‍स रकम देने की तैयारी कर रही है. इस साल पेश होने वाले आम बजट में यह घोषणा की जा सकती है. माना जा रहा है कि जल्द जरूरतमंदों को हर महीने आमदनी के तौर पर एक तयशुदा रकम मिलेगी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक सर्वे और आम बजट में इसका ऐलान हो सकता है. सरकार की तरफ से इस बात की अधिकारिक पुष्टी नहीं हुई है.

आ सकती है नई स्कीम

सरकार यूनीवर्सल बेसिक इनकम नामक एक नई स्कीम शुरू कर सकती है. इस स्कीम के अंतर्गत राज्‍य या सरकार देश के हर नागरिक को एक निश्चित रकम देगी. चाहे कोई व्यक्ति काम कर रहा हो या नहीं.

पायलट प्रोजेक्‍ट के रूप में लाई गई स्कीम

यूनीवर्सल बेसिक इनकम का प्रस्ताव लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गाय स्टैंडिंग ने तैयार किया है. प्रोफेसर गाय स्‍टैंडिंग का कहना है कि इंदौर और दिल्‍ली में छोटे समूह के बीच इस स्‍कीम को पायलट प्रोजेक्‍ट के तौर पर लागू किया गया. इसमें वयस्‍कों को 500 रुपए महीना और बच्‍चों को 150 रुपए महीने दिए गए. इसके बेहतर नतीजे सामने आए. इन लोगों ने हर माह एक निश्चित रकम मिलने के बाद अपनी इनकम को बढ़ाने का प्रयास किया और इसमें सफल भी रहे.

शुरुआत होगी गरीबों से

सरकार शुरूआत में गरीबों को 1 महीने तक 1 निश्चित रकम देकर इस स्कीम की शुरूआत कर सकती है. जिनके पास इनकम का कोई स्रोत नहीं है, उन्हें इस स्कीम से बड़ा फायदा हो सकता है. सरकार इस तरह से 20 करोड़ लोगों को हर माह 1 निश्चित रकम दे सकती है. बाद में इस स्‍कीम के तहत देश के हर नागरिक को कवर किया जा सकता है.

क्या देने के लिए हैं इतने पैसे?

गाय स्‍टैंडिंग का कहना है कि इस स्‍कीम को लागू करने के लिए मोदी सरकार के पास पर्याप्‍त फंड है. स्‍कीम को देश भर में लागू करने पर सकल घरेलू उत्‍पाद यानी जीडीपी का 3 से 4 फीसदी खर्चा आएगा. वहीं मौजूदा समय में सरकार सब्सिडी पर जीडीपी का 4 से 5 फीसदी खर्च कर रही है. यह स्कीम लागू करने के बाद सब्सिडी खत्म की जा सकती है.

गावस्कर: धोनी संन्यास ले लेते तो..

पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर को खुशी है कि महेंद्र सिंह धोनी ने सिर्फ सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ी है और संन्यास नहीं लिया. उनका मानना है कि यह विकेटकीपर बल्लेबाज भारतीय टीम में अभी काफी योगदान दे सकते हैं.

गावस्कर ने कहा, “अगर धोनी एक खिलाड़ी के तौर पर भी संन्यास ले लेते तो फिर उनकी वापसी के लिए मैं उनके घर के सामने धरने पर बैठने वाला पहला व्यक्ति होता. एक खिलाड़ी के रूप में वह अब भी विस्फोटक हैं. वह एक ओवर में मैच का पासा पलट देते हैं. भारत को एक खिलाड़ी के रूप में उनकी सख्त जरूरत है. धोनी के कप्तान नहीं रहने से उनकी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग में मदद मिलेगी. हां, ऐसा होगा.”

धोनी की प्रशंसा करते हुए गावस्‍कर यहीं नहीं रुके. सनी ने कहा, ‘अगर जिंदगी के 15 सेकंड बचे हों तो मैं धोनी का वर्ल्‍डकप का आखिरी छक्‍का देखकर खुशी-खुशी मरना चाहूंगा.’

उन्‍होंने कहा, ‘धोनी जोखिम लेने में कमाल के थे. टी20 वर्ल्‍डकप-2007 में भी उन्‍होंने आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा से करवाया तो 2011 के वर्ल्‍डकप के फाइनल में मैन ऑफ सीरीज बने युवराज से पहले आकर मैच की जिम्‍मेदारी उठाई.’

आगे उन्होंने कहा कि “विराट कोहली निश्चित तौर पर उन्हें नंबर पर चार या पांच बल्लेबाज के रूप में उपयोग करेंगे, क्योंकि इससे नीचे उन्हें बल्लेबाजी के लिए उतारने का कोई मतलब नहीं बनता है. विकेटकीपिंग अब अधिक आसान हो जाएगी, क्योंकि उन्हें अब गेंदबाजी में बदलाव और क्षेत्ररक्षण के बारे में नहीं सोचना होगा. इनसे कई बार आपका ध्यान भंग होता है.”

गावस्कर ने कहा कि धोनी और कोहली मैदान में एक दूसरे के पूरक बन सकते हैं. इससे निश्चित तौर पर भारत को मदद मिलेगी, क्योंकि धोनी का शांतचित होने से विराट को भी मदद मिलेगी. टेस्ट क्रिकेट में आपको अपनी गलती में सुधार करने के लिए समय मिलता है, लेकिन सीमित ओवरों की क्रिकेट में चीजें तेजी से बदलती हैं और कुछ करने के लिए बहुत अधिक समय नहीं होता है और ऐसे में आपको जल्दी में फैसले करने होते हैं और यहां पर धोनी काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं.

किसने क्या कहा

माइकल वॉन (इंग्लैंड के पूर्व कप्तान)

यहां तक कि सर्वकालिक महान कप्तानों में से एक ने फैसला कर लिया कि अब बहुत हो चुका. शाबाश धोनी एक अविश्सनीय कप्तानी दौर के लिए.

मुहम्मद कैफ (भारतीय क्रिकेटर)

आपने 9 साल तक टीम का नेतृत्व किया और बढि़या नतीजे दिए. भारत आपको कप्तान के रूप में पाकर खुश है.

माइकल क्लार्क (ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान)

धोनी को भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक के रूप में याद किया जाएगा. वह बेहतरीन इंसान है और अब भी भारतीय क्रिकेट में काफी योगदान दे सकता है.

सुरेश रैना (भारतीय क्रिकेटर)

भारत का वो सबसे सफल कप्तान जिसने अपनी सोच को हकीकत में तब्दील किया, जिन्होंने कई लोगों को सपने देखने और उन्हें हकीकत में तब्दील करने के लिए प्रेरित किया. आपको सलाम.

इरफान पठान (भारतीय ऑलराउंडर)

बतौर कप्तान धोनी की विरासत का बखान करने के लिए शब्द भी कम है, बेहद शानदार एमएस धोनी.

हर्षा भोगले (मशहूर कमेंटेटर)

सभी बातों को ध्यान में रख कर देखें तो उन्होंने सही फैसला लिया है. बीते कुछ सालों में यह कोहली की टीम बन चुकी है. इस फैसले के बारे में एक अच्छी बात ये है कि अभी भी धोनी का कोई सानी नहीं. हालांकि मैं जानना चाहता हूं कि इस फैसले के लिए किसकी राय ली गई थी. मुझे किसी पर शक नहीं.

नहीं रहे मशहूर अभिनेता ओम पुरी

देश के बेहतरीन एक्टर्स में शुमार ओम पुरी का निधन हो गया है. 66 साल के ओम पुरी की मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना बताया जा रहा है. ओम पुरी उन चंद कलाकारों में से एक थे जिन्होंने समानान्तर सिनेमा से लेकर कमर्शल सिनेमा तक में कामयाबी हासिल की. उनकी मौत की खबर सुनकर उनके फैंस सकते में हैं.

ओम पुरी का जन्म अंबाला के एक पंजाबी परिवार में हुआ था. 1993 में ओम पुरी ने नंदिता पुरी के साथ शादी की थी. 2013 में उनका तलाक हो गया था. उनका इशान नाम का एक बेटा भी है.

पुरी ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से ग्रेजुएशन किया. उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से भी पढ़ाई की. यहां नसीरुद्दीन शाह उनके क्लासमेट थे.

ओम पुरी का फिल्मी सफर

पद्मश्री ओमपुरी ने 'अर्ध्य सत्य', 'धारावी' 'मंडी' जैसी सैकड़ों फिल्मों में सशक्त अभिनय किया है. ओम पुरी ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत मराठी नाटक पर आधारित फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से की थी. वर्ष 1980 में रिलीज 'आक्रोश' ओम पुरी के सिने करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई.

सनी देओल के साथ घायल और 1996 में गुलजार की माचिस में उन्होंने सिख आतंकवादी का किरदार निभाया. 'माचिस' में बोला गया उनका डायलॉग 'आधों को 47 ने लील लिया और आधों को 84 ने' काफी मशहूर हुआ.

ओम पुरी ने अपनी हिंदी सिनेमा करियर में कई सफल फिल्मों में अपने बेहतरीन अभिनय का परिचय दिया है. एक बिना फिल्मी परिवार से होने के कारण उन्हें हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाने के लिए काफी कड़ा संघर्ष करना पड़ा.

उन्हें हिंदी सिनेमा में अपनी बेहतरीन अभिनय के चलते कई पुरुस्कारों से भी नवाजा गया है. ओम पुरी ने बॉलीवुड के अलावा ब्रिटेन और अमेरिका की भी फिल्मों में काम किया.

किसने क्या कहा

अशोक पंडित

अशोक पंडित ने ट्वीट कर बताया कि इस खबर से वो शॉक में हैं. उन्होंने ट्वीट किया कि “ओम पुरी का अचानक यूं चले जाना हिंदी सिनेमा का बड़ा नुक्सान है. बहुत कम एक्टर ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपने शक्ल सूरत के बजाय अपने अभिनय क्षमता से अपनी पहचान बनायी, ओम पुरी उन सबके लिए एक मिसाल हैं!”

शबाना आजमी

उनके निधन पर शबाना आजमी ने कहा कि उनसे करीब की दोस्ती रही थी, उनके साथ कई फिल्मों में काम किया, उनका निधन होना बहुत अफसोस की बात है.

मधुर भंडारकर

मधुर भंडारकर ने कहा कि यकीन नहीं होता कि इतना एक्टिव इंसान इस तरह अचानक चला गया, बहुत दुखद बात है, फिल्म इंडस्ट्री में उनका बहुत कमाल का योगदान रहा है.

डेविड धवन

डेविड धवन ने कहा कि बड़ा धक्का लगा उनकी डेथ की न्यूज सुनकर. 1974 में हम रूम मेट रह चुके थे. वो ब्रिलियंट एक्टर थे.

रजा मुराद

ओम पुरी की मौत पर एक्टर्स रजा मुराद ने दुख जताया है. उन्होंने कहा कि ओम पुरी ने बीच में बहुत ज्यादा शराब पीनी शुरू कर दी, जिसकी वजह से उनकी सेहत खराब हो गई. मुराद के मुताबिक, बेहद आम शक्ल सूरत होने के बावजूद ओम पुरी ने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया.

शाहरुख करेंगे टीवी पर वापसी

इन दिनों बॉलीवुड कलाकारों के लिए टीवी बहुत बड़ा माध्यम बन चुका है. सभी फिल्म कलाकार अपनी फिल्म को प्रचारित करने के लिए टीवी के ही किसी न किसी कार्यक्रम का सहारा लेते हैं.

अब शाहरुख खान ने भी लोगों के बीच पहुंचकर अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए टीवी पर वापसी करने का निर्णय लिया है. अतीत में शाहरुख खान ‘क्या आप पांचवीं पास हैं’ और ‘जोर का झटका’ जैसे टीवी के बुरी तरह से असफल हुए रियालिटी शो का संचालन कर चुके हैं. पर अब एक बार फिर वह एक रियालिटी शो का संचालन करते हुए नजर आने वाले हैं.

सूत्रों की माने तो जब से शाहरुख खान ने सलमान खान के साथ ‘लक्स स्टार अवार्ड’ का संचालन किया है, तभी से उनके मन में पुनः टीवी पर वापसी कर लोकप्रियता हासिल करने का कीड़ा कुलबुलाने लगा था. और अब खबर है कि वह ‘स्टार प्लस’ पर ही एक विदेषी रिएलिटी शो के भारतीयकरण वाले रिएलिटी शो का संचालन करते हुए जून 2017 से नजर आ सकते हैं.

शाहरुख खान के अति नजदीकी सूत्र दावा कर रहे हैं कि शाहरुख खान इन दिनों अपनी फिल्म ‘रईस’ के प्रचार के लिए वक्त देने की बजाय इस रिएलिटी शो की पटकथा लेखकों के साथ ज्यादा समय बिता रहे हैं. सूत्रों के अनुसार शाहरुख खान अपनी तरफ से पटकथा लेखकों को कुछ सलाह दे रहे हैं. बहरहाल, अभी तक इस रिएलिटी शो का नाम तय नहीं हुआ है.

क्या ‘‘मूवर्स एंड शेकर्स’’ की होगी वापसी?

1997 में शेखर सुमन के राजनीतिक हास्य व्यंग वाले टीवी शो ‘‘मूवर्स एंड शेकर्स’’ ने हंगामा मचा दिया था. उस वक्त शेखर सुमन ने साबित कर दिखाया था कि राजनीति जैसे गंभीर विषय पर भी रोचक व मनोरंजक कार्यक्रम पेश किया जा सकता है. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. इन बदले हुए हालात में ‘‘मूवर्स एंड शेकर्स’’ जैसा कार्यक्रम बनाना आसान नहीं है. शायद इसी वजह से अब शेखर सुमन इसे ‘वेब’ पर लेकर आने की सोच रहे हैं.

खुद शेखर सुमन कहते हैं, ‘‘मैं ‘‘मूवर्स एंड शेकर्स’’ को भी लाना चाहता हूं. हो सकता है कि इसे मैं वेब पर ले आऊं. टीवी पर भी संभव है. लेकिन अब कुछ लोगों का धैर्य कम होता जा रहा है. उनका संयम खत्म हो गया है. अब वह सकारात्मक आलोचना भी नहीं सुन सकते.’’

समाज व लोगों में आए इस बदलाव पर शेखर सुमन ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए कहा, ‘‘अव्वल तो यह बदलाव ही नहीं है. बदलाव वह होता है, जो अच्छी चीजें लेकर आता है. बदलाव अच्छी सीरत या अच्छी सूरत के लिए होता है. पर जो गिरावट आयी है, वह विभत्स है. जब किसी चीज के पीछे कोई सोच नहीं रहती है, तो वह चीजें सड़ने गलने लगती हैं. राजनीति की स्थिति भी कुछ ऐसी ही होती जा रही है. अब राजनीति में उस हैसियत के लोग नहीं रहे. पहले पढ़े-लिखे सुलझे इंसान थे, उन्हें पता था कि किस चीज की कितनी एहमियत है और वह किस काम को किस मंशा से कर रहे हैं. अब लोग चाहते हैं कि उनकी सिर्फ तारीफ की जाए. जब इस तरह के खुदगर्ज नेता आपके इर्दगिर्द पैदा हो जाएं, तो फिर ‘‘‘मूवर्स एंड शेकर्स’’ जैसा कार्यक्रम नहीं बन सकता.”

शेखर जी न आगे कहा, ‘‘मूवर्स एंड शेकर्स’’ को हम सकारात्मक सोच के साथ बनाते थे. पर जो कार्यक्रम बदलाव लाने की बजाय किसी की सोच में नफरत पैदा कर रहा है, तो ऐसा कार्यकम बनाने का फायदा नहीं.’’

 

जैकी-सोनू की फिल्म ‘कुंग फू योगा’ का पोस्टर रिलीज

​एडवेंचर, कॉमेडी, थ्रिल और हाई एक्शन से भरपूर, सोनू सूद और जैकी चैन अभिनीत फिल्म कुंग फू योगा का पहला पोस्टर रिलीज हो गया है.

लॉरेंस पॉल के सहयोग से शक्ति सागर सूद प्रोडक्शंस द्वारा प्रस्तुत, उच्च-प्रत्याशित बहुभाषी एक्शन कॉमेडी फिल्म कुंग फू योगा में अंतरराष्ट्रीय एक्शन स्टार जैकी चैन संग फिल्म में सोनू सूद, लेज एक्सओ, दिशा पाटनी और अमायरा दस्तूर अभिनय करते हुए नजर आएंगे तो वहीं फिल्म के निर्देशन की कमान निर्देशक स्टेनली टोंग ने संभाली है.

​फिल्म ​अंग्रेजी, हिंदी, तमिल और तेलुगू ​भाषा में 3 फरवरी, ​2017 ​को सभी सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी, फिल्म को लेकर अभिनेता सोनू सूद उत्साहित तो है ही वे जैकी चैन के साथ पहली बार स्क्रीन शेयर कर के खुद को गर्वान्वित महसूस कर रहे है.

​सोनू सूद कहते है, "​यह मेरे लिए एक भावुक क्षण है, क्योंकि मेरे प्रोडक्शन हॉउस में मेरे स्वर्गीय पिता शक्ति सूद इनका नाम जुड़ा है और फिल्म के हम प्रस्तुत करता है. भगवान की कृपा है की उन्होंने हमें यह मौका दिया है हम यह फिल्म प्रेक्षकों के सामने बड़े स्तर पंहुचा सके. कुंग फू योगा यह फिल्म मेरे पिता एक श्रद्धांजलि है.

​जैकी चैन कहते है कि "​मैं आभारी और गर्व  महसूस कर रहा हु इस एक्सन पैक फिल्म का हिस्सा बनकर, इस फिल्म का सफर बहुत मजेदार रहा. कुंग फू योगा ने मुझे भारतीय अभिनेताओं और तकनीशियनों के साथ काम करने का अवसर दिया है. हम सभी ने फिल्म पर बहुत मेहनत की है और मैं उम्मीद करता हूं दर्शक फिल्म को पसंद करेंगे."

​निर्देशक स्टेनली टोंग कहते हैं, "कुंग फू योग पर ​काम करना एक रोलर कोस्टर की सवारी से कम नहीं था​. इस फिल्म में सोनू सूद और जैकी चैन के बिच भरपूर एक्शन सीन है जिसके आप गवाह होंगे.

एसबीआई ग्राहक नहीं चला सकेंगे पेटीएम

देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने पेटीएम, मोबीक्विक, एयरटेल मनी समेत सभी ई-वॉलिट्स को ब्लॉक कर दिया है. अब एसबीआई की नेट बैंकिंग से इन वॉलिट्स में रकम ट्रांसफर नहीं की जा सकेगी. हालांकि डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स के जरिए इन वॉलिट्स में पैसे ट्रांसफर किए जा सकेंगे. बैंक ने इस फैसले को लेकर आरबीआई को दी गई सफाई में सुरक्षा और कारोबारी हित का हवाला दिया है.

पेटीएम को ब्लॉक किए जाने पर एसबीआई ने कहा है कि सुरक्षा के उल्लंघन के चलते ऐसा हुआ है. बैंक के मुताबिक कई ग्राहक फिशिंग के शिकार हुए थे, जिसके चलते यह फैसला लिया गया. बैंक ने कहा कि पेटीएम पर यह रोक अस्थायी है और सुरक्षा मानकों की समीक्षा के बाद इस रोक को हटाने पर विचार किया जाएगा.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पेटीएम के प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा के उल्लंघन का भी मामला सामने आया था. इसके अलावा इन ई-वॉलिट्स को ब्लॉक करने की वजह प्रतिस्पर्धा भी है. बैंक खुद अपने ऐप 'SBI Buddy' को प्रमोट करना चाहता है. एसबीआई अपने ग्राहकों को दूसरे ई-वॉलिट्स पर ट्रांसफर नहीं करना चाहता.

 

 

गेम खेलने से कम हो सकता है आपका डिप्रेशन

स्मार्टफोन पर गेम खेलने को अक्सर बुरी आदत या लत कहा जाता है, लेकिन अगर आप डिप्रेशन में हैं तो वही गेम आपके लिए मददगार भी साबित हो सकता है. यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि अमेरिका के वैज्ञानिकों ने ऐसा दावा किया है. वैज्ञानिकों ने रिसर्च करने के लिए एक खास तरह का गेम बनाया और डिप्रेशन के शिकार लोगों पर उसका परीक्षण किया.

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एक रिसर्चर ने कहा, 'हमने पाया कि मामूली रूप से डिप्रेशन की जद में आए लोगों की स्थिति काफी बेहतर हुई है.' डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों को हफ्ते में पांच बार 20-20 मिनट तक गेम खेलना जरूरी था, लेकिन कई लोग ऐसे भी थे जिन्होंने काफी समय तक गेम खेला.

वैज्ञानिकों ने पाया कि सामान्य उपचार के मुकाबले विडियो गेम के जरिये अवसाद को दूर करने की तकनीक ज्यादा प्रभावी है. एक और स्टडी में वैज्ञानिकों ने 600 से ज्यादा लोगों को लेकर शोध किया.

वैज्ञानिकों ने पाया कि डिप्रेशन का इलाज करने वाली बाकी थेरेपी के साथ ही विडियो गेम तकनीक भी काफी सकारात्म परिणाम देती है. हालांकि जो लोग मामूली रूप से डिप्रेशन के शिकार हैं, उन्हीं के लिए विडियो गेम तकनीक प्रभावी है.

सीएनजी किट वाले ऑटोमैटिक स्कूटर से कम होगा प्रदूषण

देश के महानगरों में प्रदषूण बहुत बड़ी समस्या है. सीएनजी के प्रयोग से प्रदूषण स्तर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है. कार और बस में ईंधन विकल्‍प के रूप में सीएनजी का उपयोग बहुत पहले से हो रहा है. पर अब आप सीएनजी से स्कूटर भी चला सकते हैं. महानगर गैस लिमिटेड ने सीएनजी से चलने वाले दुपहिया वाहन मुंबई में लॉन्च किए हैं. शुरुआती दौर में इन स्कूटर्स में इटली की कंपनी लोवाटो की भारतीय इकाई ईको फ्यूल द्वारा तैयार सीएनजी किट लगाया जाएगा.

सिर्फ 60 पैसे में तय करें 1 किमी

कंपनी के मुताबिक सीएनजी किट के साथ यह स्‍कूटर 60 पैसे प्रति किलोमीटर की किफायत से चलेगा. सीएनजी से कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है. दुपहिया वाहनों के इस सीएनजी किट में 1.2 किलो के 2 सिलिंडर्स लगे हैं. यह प्रति किलो 120 से 130 किलोमीटर का माइलेज देंगे.

इन स्‍कूटर्स में लग सकेगी सीएनजी किट

लोवाट को स्कूटर्स के 18 मॉडल्स के लिए अनुमति मिली है. इसमें होंडा एक्टिवा, एक्‍टिवा 125, डियो, हीरो माएस्‍ट्रो, डुएट, प्‍लेजर, सुजुकी स्‍विश, एक्‍सेस, लेट्स, टीवीएस वीगो, ज्‍यूपिटर, स्‍कूटी जेस्‍ट, वेस्‍पा वीएक्‍स, यामाहा फसीनो 110, यामाहा रे 110 और यामाहा अल्‍फा 110 शामिल हैं.

वारंटी की कोई गैरंटी नहीं

हालांकि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि किट लगाने से स्‍कूटर निर्माता कंपनी की ओर से मिलने वाली वारंटी समाप्‍त होगी कि नहीं. क्‍योंकि कारों की तरह ये किट फैक्‍ट्री फिटेड नहीं हैं.

बाइक के लिए भी आएंगी सीएनजी किट

सीएनजी से चलने वाले स्कूटर्स की श्रेणी के काफी लोकप्रिय होने की संभावना है. ऐसे में लोवाट अब दुपहिया बाइक्स के लिए भी ऐसे ही सीएनजी किट लाने की योजना बना रहा है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें