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लाश और लिफाफे में उलझी पुलिस

बिहार के जिला मुजफ्फरपुर के थाना अहियापुर की कोल्हुआ बजरंग विहार कालोनी के एक  निर्माणाधीन मकान में 23 अक्तूबर, 2016 की रात मुरौल प्रखंड में तैनात मनरेगा की जूनियर इंजीनियर सरिता देवी को कुरसी से बांध कर आग के हवाले कर दिया गया था. 24 अक्तूबर, 2016 की सुबह मकान मालिक और मोहल्ले वालों की सूचना पर पुलिस वहां पहुंची तो उसे एक जोड़ी लेडीज चप्पलें, अधजले कपड़े, पर्स, रूमाल, 4 गिलास, मिट्टी के तेल का डिब्बा और हड्डियों के अवशेष मिले.

सरिता की मां कुसुम ने अधजली चप्पलें देख कर उस की पहचान की थी. सरिता सीतामढ़ी के सोनबरसा की रहने वाली थी. उस का विवाह नेपाल बौर्डर पर स्थित गांव कन्हौली फूलकाहां के रहने वाले विजय कुमार नायक से हुआ था, जिस से 2 बेटे हैं. पति से संबंध अच्छे  न होने की वजह से सरिता अलग रहती थी. पति गांव में रह कर खेती करता था और सरिता नौकरी कर रही थी. पति को उस का नौकरी करना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए वह उसे नौकरी छोड़ कर गांव में रहने के लिए कहता, लेकिन सरिता को नौकरी छोड़ कर गांव में रहना ठीक नहीं लगता था. वह बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए नौकरी करना चाहती थी. उस का बड़ा बेटा ध्रुव दरभंगा में पौलिटैक्निक कर रहा है तो छोटा बेटा आर्यन उस के साथ रह कर पढ़ रहा था. सरिता पिछले 3 सालों से मुरौल प्रखंड में जूनियर इंजीनियर थी. बजरंग विहार कालोनी में वह विजय गुप्ता के मकान में किराए पर रहती थी. विजय मनरेगा की योजनाओं का एस्टीमेट बनाता था.

उसी मोहल्ले में विजय एक और मकान बनवा रहा था. उसी मकान में एक कमरा किराए पर ले रखा था, जिस में सरिता ने अपना औफिस बना रखा था. वह देर रात तक वहां बैठ कर औफिस के काम निपटाती थी. 24 अक्तूबर, 2016 की सुबह जब लोग उठे तो उन्हें विजय गुप्ता के निर्माणाधीन मकान से धुआं निकलता दिखाई दिया. उन्हें लगा कि शौर्ट सर्किट से मकान में आग लग गई है. उन्होंने शोर मचाया तो तमाम लोग इकटठे हो गए. विजय वहां मौजूद था. वह किसी को अंदर नहीं जाने दे रहा था. उस का कहना था कि किसी ने उस के घर में आग लगा दी है. विजय की इस हरकत से लोगों को दाल में कुछ काला नजर आया तो कुछ लोग उसे किनारे कर के जबरदस्ती मकान में घुस गए. कमरे के अंदर की हालत देख कर सभी के रोंगटे खड़े हो गए. कमरे में राख और हड्डियों के टुकड़े पड़े थे. जली हुई लकडि़यों से अभी भी धुआं निकल रहा था. पूरे मकान में मांस जलने की बदबू फैली हुई थी.

पड़ोसियों ने जब विजय से कहा कि लगता है यहां किसी आदमी को जलाया गया है? उस ने इस की खबर पुलिस को दी या नहीं तो उस ने सफाई देते हुए कहा कि उसे कुछ नहीं पता. सुबह जब वह यहां आया तो उस ने देखा कि उस के घर से धुआं उठ रहा है. लेकिन अभी उस ने कुछ किया नहीं है. वहां जमा लोग विजय से ही तरहतरह के सवाल करने लगे. जबकि उस का कहना था कि यह सब कैसे हुआ? उसे कुछ पता नहीं है. वह खुद ही घर में आग लगने से परेशान है. विजय ने तो पुलिस को इस घटना की जानकारी दी ही, मोहल्ले के भी कुछ अन्य लोगों ने भी पुलिस को फोन कर कर के विजय के घर में घटी घटना की सूचना दी. कुछ ही देर में पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई और विजय तथा मोहल्ले वालों से पूछताछ करने लगी. घटनास्थल के निरीक्षण के बाद पुलिस को लगा कि किसी को कुरसी से बांध कर जिंदा जलाया गया है. उस के बाद हड्डियों पर कैमिकल डाल कर गलाने की कोशिश की गई है, ताकि हत्या का कोई सबूत ही न रह जाए.

पुलिस ने जब सरिता के बारे में पूछताछ की तो मोहल्ले वालों से पता चला कि वह 23 अक्तूबर की शाम को वह अपने घर के पास नजर आई थी. उस के बाद वह दिखाई नहीं दी. मनरेगा से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई तो वे उस के बारे में कुछ नहीं बता सके. इस से पुलिस को लगा कि सरिता को ही जला कर मारा गया है. पुलिस को केवल पैरों की हड्डियां मिली थीं, बाकी हड्डियों को कैमिकल से गला दिया गया था. अधजली चप्पलों से लाश की पहचान की गई थी. बेटी की इस हालत को देख कर वह दहाड़े मार कर रो रही थी. उन का कहना था कि उस की तो किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं थी, वह दिनरात मन लगा कर काम करती थी, फिर उसे किस ने इस तरह बेरहमी से मार दिया.

कुसुम के बताए अनुसार सरिता की पति से नहीं पटती थी, इसलिए वह उस से अलग रहती थी. उस का पति कोई काम नहीं करता था. इस बात को ले कर दोनों में अकसर विवाद होता रहता था. पति के विवाद को भुला कर वह अपने बच्चों की बेहतर परवरिश और बेहतर कैरियर बनाने में लगी थी. वह अपने बच्चों को भी अपनी तरह इंजीनियर बनाने का सपना देख रही थी. उन्होंने बेटी की हत्या की आशंका तो जताई है, पर किसी पर शक नहीं जताया है. पुलिस ने सरिता के मकानमालिक विजय गुप्ता से पूछताछ की तो उस ने बताया कि सरिता से उस की पुरानी जानपहचान थी. वह उस के लिए मनरेगा की योजनाओं का स्टीमेट तैयार करता था. उसी के नए बन रहे मकान में वह विभागीय फाइलों का निपटारा करती थी. उस के पास मकान की एक चाबी भी रहती थी. वह उस के साथ मुरौल प्रखंड के अपने औफिस भी जाती थी. शुरुआती जांच में पुलिस को लगा कि सरिता की हत्या कहीं और कर के लाश को औफिस में ला कर जलाया गया था. जिस से हत्या का कोई सबूत न मिले. लेकिन जब सरिता के बेटे ध्रुव से पूछताछ की गई तो उस ने कुछ और ही बातें बताई थीं. हत्या की सूचना मिलने के बाद भी उस का पति सीतामढ़ी से अहियापुर नहीं आया था.

एक सवाल यह भी है कि हत्या करते समय या जब उसे कुरसी से बांध कर जिंदा जलाया जाने लगा था तो क्या वह चीखीचिल्लाई नहीं थी? अगर वह चीखीचिल्लाई तो आसपास के लोगों को उस की चीख सुनाई क्यों नहीं दी? कहीं ऐसा तो नहीं कि आसपड़ोस के लोग पुलिस के झमेले से बचने के लिए मुंह बंद किए बैठे हों? लाश को पूरी तरह से जलने में 3 से 4 घंटे लगते हैं. इस के अलावा मांस जलने की बदबू भी आती है. डीएसपी आशीप आनंद के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है. पुलिस सरिता और उस के पति के बीच के विवाद, विजय गुप्ता के साथ उस के रिश्तों और मनरेगा के किसी ठेकेदार से विवाद की जांच कर रही है. मनरेगा के कामों को ले कर इंजीनियर, मुखिया और ठेकेदारों के बीच अकसर विवाद होते रहते हैं. विजय गुप्ता ने पुलिस को बताया था कि रोज की तरह वह सुबह मकान पर पहुंचा तो मकान के मेन गेट का ताला टूटा हुआ था. धक्का देते ही वह खुल गया तो अंदर से मांस के जलने की बदबू आई और धुआं उठता दिखाई दिया. इस के बाद उस ने तुरंत पुलिस को सूचना दे दी थी.

सरिता को जिंदा जलाने के मामले की जांच कर रही पुलिस का सिर तब चकरा गया, जब उसे सरिता के सुसाइड करने के संकेत मिले. सरिता की हत्या की गुत्थी सुलझाने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं. पुलिस और फोरैंसिक साइंस लैबोरेटरी की टीम कई बार राख में सुराग ढूंढ चुकी है, पर कुछ हाथ नहीं लगा है. घटनास्थल पर पुलिस को 4 गिलास मिले थे, जिस से अंदाजा लगाया गया था कि कत्ल वाली रात कुछ लोग सरिता से मिलने आए थे. अगले दिन कमरे की तलाशी में पुलिस को एक लिफाफा मिला था, जिसे लोगों ने सरिता का सुसाइड नोट समझा. लेकिन लिफाफे में क्या था, पुलिस यह बताने से बच रही है.

गोपनीय सूत्रों से पता चला है कि उस में सुसाइड नोट ही था, जिस में उस ने बेटे को इंजीनियर बनाने का जिक्र किया है. उस में किसी मुखिया का भी जिक्र है. विजय के बारे में लिखा है कि वह इंसान नहीं, भेडि़या है. उस ने मुखिया पर जिंदगी तबाह करने का आरोप लगाया है. इस के बाद से पुलिस के शक की सुई मुखिया की ओर घूम गई है, पर उस में किसी का नाम और पता नहीं लिखा है, इसलिए पुलिस अभी तक उस तक पहुंच नहीं पाई है. लेकिन पता लगा रही है कि कहीं मुखिया ने सरिता की हत्या कर उसे इस तरह जला कर खुदकुशी का रूप देने की कोशिश तो नहीं की. पुलिस सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और सरिता की हैंडराइटिंग का मिलान करा रही है. पुलिस सुसाइड नोट में उलझी थी कि अगले दिन यानी 25 अक्तूबर, 2016 को सरिता के एक पड़ोसी ने पुलिस को एक लिफाफा दिया, जिसे पुलिस ने खोला तो उस में 3 पन्ने मिले. उन में लाखों रुपए के लेनदेन की बातें लिखी थीं. उस के कई लोगों के पास लाखों रुपए बकाया थे. लेकिन किसी का नाम नहीं लिखा था. नाम की जगह कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया था.

पुलिस नाम पता करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि यह भी हो सकता है कि रुपयों के विवाद में उस की हत्या की गई हो? मनरेगा की योजनाओं में फैले भ्रष्टाचार की वजह से इस में शामिल अफसरों, ठेकेदारों और मुखियाओं के बीच अकसर विवाद होता रहता है. सरिता की मौत से कुछ दिनों पहले ही जिला गोपालगंज के कलेक्ट्रेट में एसडीओ आशुतोष ठाकुर और विजयपुरी प्रखंड के जेई विवेक मिश्र के बीच जम कर मारपीट हुई थी. कलेक्ट्रेट के कौशल विकास केंद्र भवन में तकनीकी पदाधिकारियों की बैठक चल रही थी. उसी दौरान दोनों में पहले तूतू मैंमैं हुई, उस के बाद मारपीट होने लगी.

हंगामा होने के बाद सारे इंजीनियर बाहर आ गए और एसडीओ पर गलत व्यवहार का आरोप लगाने लगे. एसडीओ ने जेई से कहा था कि वह सभी योजनाओं के बिल सुपर चेक नहीं कराता है. इस पर जेई ने कहा था कि 5 लाख रुपए तक के बिल को सुपर चेक करने का अधिकार उस का है. यह सुन कर एसडीओ आगबबूला हो गए और गालीगलौज करने लगे थे. गाली देने पर जेई को भी गुस्सा आ गया था और वह मारपीट करने लगा था. मारपीट का यह मामला भी थाना और अदालत तक पहुंच चुका है. जूनियर इंजीनियर सरिता की हत्या हुई या उस ने खुदकुशी की? इस बात का खुलासा करने में पुलिस को अभी तक कामयाबी नहीं मिल सकी है. उस की मां ने न किसी पर हत्या का आरोप लगाया है और न ही किसी से विवाद की पुष्टि की है. इस की वजह से पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लग रहा है. सरिता के जले जिस्म की राख की तरह इस केस से उठता धुआं अब धीरेधीरे ठंडा पड़ने लगा है.

सनकी पति

कल्लू को अकेला घर आया देख कर घर वालों में से किसी ने पूछा कि अंजू कहां है तो उस ने बेहद इत्मीनान से जवाब दिया कि उस की तो उस ने हत्या कर दी है. पहले तो चौंक कर सभी ने कल्लू की ओर देखा. लेकिन उस के हावभाव देख कर सभी को यकीन हो गया कि इस सिरफिरे का कोई भरोसा नहीं कि यह जो कह रहा है, उसे कर चुका हो. भोपाल के कोटरा इलाके के बापूनगर में मामूली खातेपीते लोग रहते हैं. उन्हीं में एक कल्लू विश्वकर्मा भी था. पेशे से वेल्डर कल्लू की एक पहचान निहायत ही सनकी आदमी की भी थी, जो अड़ोसपड़ोस में हर किसी से झगड़ बैठता था, इसलिए लोग उस से दूर रहने में ही अपनी भलाई समझते थे.

30 साल की अंजू कल्लू की पत्नी थी, जो उस के 5 बच्चों की मां थी. पतिपत्नी में आए दिन झगड़ा होता रहता था, जिस के न केवल उन के बच्चे, बल्कि पड़ोसी भी आदी हो चुके थे. 5 बच्चों की मां होने के बावजूद अंजू जवान और आकर्षक दिखती थी. लेकिन इस बात पर खुश होने के बजाय कल्लू को उस पर शक हो चला था कि उस के किसी से अवैधसंबंध हैं. पतियों के इस तरह के शक की न कोई वजह होती है और न ही इस का कोई इलाज है, जिस की मार बेकसूर पत्नियों को झेलनी पड़ती है. अंजू भी उस में से एक थी, जो पति की बातों और तानों को सुनसुन कर परेशान रहती थी. जब कभी वह उस का शक दूर करने की कोशिश करती, कल्लू समझने के बजाय और भड़क उठता था.

26 अक्तूबर, 2016 को जब सभी लोग दिवाली की तैयारियां कर रहे थे, दोपहर कोई एक बजे कल्लू ने अंजू से कहीं घूमने चलने को कहा. पति की इस पेशकश पर पहले तो वह चौंकी, लेकिन जल्द ही खुश भी हो गई. पति शक्की था, झक्की था, लेकिन कभीकभी उस का प्यार उमड़ता था तो अंजू पुराना सब कुछ भूल जाती थी. उस दिन भी जब कल्लू ने अपनी मारुति कार से कलियासोत डैम घूमने चलने को कहा तो वह झटपट यह सोच कर तैयार हो गई कि कहीं ऐसा न हो कि पति का इरादा बदल जाए. दोनों कार में सवार हो कर कलियासोत डैम पहुचे, जहां पतिपत्नी में किसी बात को ले कर विवाद शुरू हो गया. जब दोनों लड़तेझगड़ते डैम के गेट नंबर 13 पर पहुंचे तो कल्लू ने अंजू को काबू कर के उस का गला दबाना शुरू कर दिया. उस समय वहां सुनसान था. क्योंकि आमतौर पर कम लोग ही उतनी दूर तक घूमने जाते हैं. गुस्साए कल्लू ने तब तक पत्नी की गरदन नहीं छोड़ी, जब तक वह लाश बन कर उस की बांहों में नहीं झूल गई. जब पत्नी के मरने की तसल्ली हो गई तो कल्लू ने इत्मीनान से उस की लाश को डैम के बहते पानी में फेंक दिया. लेकिन फरार होने के बजाय वह सीधे घर जा पहुंचा और पत्नी की हत्या की बात दो टूक कह दी. घर वालों ने सकपका कर आसपड़ोस वालों से यह बात कही तो मोहल्ले वालों ने पहले तो जम कर उस की धुनाई की, उस के बाद उसे रस्सी से बांध दिया और पुलिस को खबर कर दी. खबर मिलते ही पुलिस कल्लू के घर पहुंच गई.

एएसपी आर.डी. भारद्वाज ने जब कल्लू से पूछताछ की तो उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद गोताखोरों की मदद से अंजू की लाश और टूटी हुई चूडि़यां भी घटनास्थल से बरामद कर ली गईं. इस के बाद औपचारिक काररवाई पूरी कर के अंजू के शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भिजवा दिया गया. पुलिस के बारबार पूछने पर कल्लू एक ही बात दोहराता रहा कि अंजू बहुत बकबक करती थी, इसलिए उस ने उसे मार डाला. लेकिन इस मामले से यह उजागर हुआ है कि पतिपत्नी के बीच रोजमर्रा की कलह कभीकभी जानलेवा साबित हो जाती है. सनकी और शक्की पति की अक्ल पर इस कदर परदा पड़ जाता है कि वह अपना अंजाम तो दूर की बात, बच्चों के भविष्य की भी परवाह नहीं करता.

लगता तो यही है कि मामूली शक्ल सूरत वाला कल्लू वेल्डिंग के धंधे से कमा तो अच्छा लेता था, पर अपनी जवान और खूबसूरत पत्नी को ले कर हीनभावना से ग्रस्त था, जिस के चलते उस ने उसे हमेशा के लिए ठिकाने लगा कर खुद अपने हाथों अपनी जमीजमाई गृहस्थी उजाड़ दी.

जॉली एलएल बी 2 : अक्षय कुमार का दमदार अभिनय

हास्य व्यंग्य से युक्त कोर्टरूम ड्रामा वाली फिल्म ‘‘जॉली एलएलबी 2’’ देखकर दर्शक को वास्तव में भारतीय अदालतों की कारवाही की याद आएगी. क्योंकि जिस तरह से भारतीय अदालतों में मुकदमे वर्षों तक घिसटते रहते हैं, उसी तरह यह फिल्म भी घिसटते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ती है. फिल्म में रोमांचक पलो का घोर अभाव है. कहानी में कोई नयापन नहीं है. कई फिल्मों से चीजें उठाकर पेश कर दी गयी हैं.

कहानी की शुरुआत लखनऊ में एक स्कूल के सामने से होती है, जहां लोगों और पुलिस का भी जमावड़ा है. स्कूल के अंदर कक्षाओं में बच्चे परीक्षा देने के लिए बैठे हैं, मगर सभी को प्रश्नपत्र का उत्तर लिखवाने वाले का इंतजार है. अंग्रेजी का पर्चा है. कुछ देर में स्कूल के बाहर वकील जगदीश्वर मिश्रा उर्फ जॉली (अक्षय कुमार) आकर पांच हजार रूपए लेकर माइक पर सवालों के जवाब लिखवा देता है. फिर वह अदालत पहुंचते हैं. पता चलता है कि वह फिलहाल वकील रिजवी के यहां मुंशी हैं, जिनके साथ कभी उनके पिता भी मुशी थे. पर जॉली को अपना खुद का चेंबर चाहिए, वकील बनना है. इसके लिए वह दुबे को को दस लाख रूपए देते हैं. इसी के चलते जॉली, हीना सिद्दिकी (सयानी गुप्ता) से कह देता है कि वकील रिजवी उसका मुकदमा लड़ने के लिए तैयार हैं और दो लाख रूपए चाहिए. जॉली को चेंबर मिल जाता है, पर हीना को सच पता चलता है. वह अपने घर की छत से कूदकर आत्महत्या कर लेती है. अब आत्मग्लानि व अपराध बोध से ग्रसित जॉली, हीना का केस लड़ने का फैसला कर सारे कागजात का अध्ययन करता है.

जॉली घर के अंदर पत्नी के सामने चूहा बने रहते हैं. वह अपनी पत्नी पुष्पा पांडे (हुमा कुरेशी) को खुद ही जाम बनाकर पीने के लिए देते हैं. हीना की शादी के बीस घंटे बाद ही हीना के पति इकबाल कासिम (मानव कौल) का पुलिस इंस्पेटर सूर्यवीर सिंह (इनामुल हक) ने एनकाउंटर कर दिया था और उसे इकबाल कादिर नाम दिया था. उसी दिन हेड कांस्टेबल भदोरिया की भी हत्या सूर्यवीर ने की थी. सारे कागजात पढ़कर जॉली एक पीआईएल दाखिल करता है. जिसकी सुनवाई न्यायाधीश सुंदरलाल त्रिपाठी (सौरभ शुक्ला) की अदालत में शुरू होती है. सूर्यवीर की तरफ से वकील प्रमोद माथुर (अन्नू कपूर) मुकदमा लड़ते हैं. पहले ही दिन अदालत में जॉली की बातों से सूर्यवीर को खतरा महसूस होता है. फिर जब पता चलता है कि जॉली झांसी जाकर भदोरिया के बेटे को गवाही के लिए लेकर आएगा, तो जॉली पर गोली चल जाती है.

अस्पताल से निकलकर जॉली इसी मुकदमें पर काम शुरू करता है. माथुर चालाकी से भदौरिया के बेटे को झूठा साबित कर जॉली व भदोरिया के बेटे को झूठी गवाही देने के लिए सजा सुनवा देता है. जॉली का वकालत का लायसंस खत्म न हो, इसके लिए चार दिन के अंदर जॉली को खुद को निर्दोष साबित करना है. फिर पता चलता है कि इकबाल कासिम की शादी में कश्मीर का एक पुलिस वाला बट मौजूद था. जॉली कश्मीर जाते हैं, वहां से उस पुलिस वाले को लेकर आते हैं. अब बट की गवाही न होने पाए इसके लिए वकील प्रमोद माथुर चाल चलते हैं और अदालत में धरने पर बैठ जाते हैं. सिनेमाई स्वतंत्रता के कई घटनाक्रम घटते हैं. अदालत पूरी रात चलती है. रात के बारह बजे तारीख बदलते ही फिर कारवाही शुरू हो जाती है. अंत में आतंकवादी इकबाल कादिर को पुलिस लेकर आ जाती है. सच सब के सामने आ ही जाता है.

फिल्म ‘‘जॉली एलएलबी 2’’ में आतंकवाद, भ्रष्टाचार, सिस्टम की गड़बड़ी, पुलिस के नकली एनकांउटर सहित तमाम मुद्दे उठाए गए हैं. फिल्म की कहानी में दो हत्याओं के मुकदमे समानांतर चलते रहते हैं, मगर अक्षय कुमार की मौजूदगी और सुभाष कपूर ने इसे गंभीर फिल्म की बजाय हास्य फिल्म की रंगत देने के चक्कर में पूरी फिल्म का बंटाधार कर दिया. फिल्म में जिस तरह से जोक्स पिरोए गए हैं, उससे कहानी व मुद्दे गौण हो जाते हैं. पूरी तरह से मूल कथानक से भटकी हुई कमर्शियल फिल्म बनकर रह जाती है.

पटकथा लेखक के तौर पर सुभाष कपूर बुरी तरह से असफल रहे हैं. फिल्म में उन्होंने जबरन ह्यूमर थोपने की कोशिश की है. फिल्म का क्लाइमेक्स बड़ा अजीबोगरीब है. अचानक हत्यारा अदालत में आकर अपना जुर्म कबूल कर लेता है. मगर फिल्म हंसाने की बजाय बोर करती है.

जॉली की पत्नी पुष्पा के किरदार में हुमा कुरेशी हैं, मगर उनके किरदार को फिल्म में सही ढंग से उभारा ही नहीं गया. यदि यह कहा जाए कि निर्देशक ने एक बेहतरीन प्रतिभा को जाया किया है, तो कुछ भी गलत नहीं होगा. फिल्म में अक्षय कुमार ने अपने स्टार पावर के अलावा अपनी कामिक टाइमिंग व संवाद अदाएगी के मैनेरिजम से फिल्म को काफी कुछ संभाला है. लेखक निर्देशक सुभाष कपूर को याद रखना चाहिए कि फिल्में महज स्टार पावर के बल पर नहीं कथानक के बल पर चलती हैं. अन्नू कपूर के अभिनय की तारीफ करनी पड़ेगी. फिल्म में मानव कौल व निखिल द्विवेदी को भी जाया किया गया है. इन दोनों ने इस फिल्म में क्या सोचकर अभिनय किया, यह बात समझ से परे है.

दो घंटे बीस मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘जॉली एलएलबी 2’’ का निर्माण ‘‘फाक्स स्टार स्टूडियो’’ ने किया है. फिल्म के लेखक व निर्देशक सुभाष कपूर, संगीतकार चिरंतन भट्ट, मंज म्यूजिक व मीत ब्रदर्स, कैमरामैन कमलजीत नेगी व कलाकार हैं – अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी, सौरभ शुक्ला, अन्नू कपूर, मानव कौल, इनामुल हक, निखिल द्विवेदी, सयानी गुप्ता व अन्य.

ई कॉमर्स कंपनियों को है जीएसटी से ‘ऐतराज’

विपक्ष के अलावा अब देश की ई कॉमर्स कंपनियों को भी जीएसटी के नियमों पर ऐतराज जताने लगी है. जीएसटी के टीसीएस नियम पर फ्लिपकार्ट, स्नैपडील और ऐमजॉन इंडिया ने विरोध जताया है. पहली बार ऐसा हुआ है कि ई कॉमर्स की कंपनियां एकजुट होकर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स प्रस्ताव का विरोध कर रही हैं. आमतौर पर ये कंपनियां एक दूसरे के खिलाफ ही नजर आती हैं.

देश की अग्रणी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों फ्लिपकार्ट, स्नैपडील और ऐमजॉन ने जीएसटी कानून के ड्राफ्ट में स्रोत पर टैक्स कटौती (टीसीएस) के नियमों पर चिंता जताई है. टीसीएस (टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स) के तहत ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस में विक्रेता को किए जाने वाले भुगतान का एक हिस्सा सरकार के पास जमा कराना होगा. कंपनियों का कहना है कि इससे सालाना 400 करोड़ रुपये की राशि फंस जाएगी.

देश में टैक्स नीतियों को लेकर पारदर्शी बनाने के लिए सरकार जीएसटी लागू करने पर आमादा है. बजट में भी वित्त मंत्री ने आत्मविश्वास के साथ 1 अप्रैल से जीएसटी लागू करने की बात कही थी.

क्रिकेट और बॉलीवुड में जब हुआ प्यार का इजहार

बॉलीवुड और क्रिकेट का रिश्ता बहुत पुराना है. बॉलीवुड कलाकार के क्रिकेट खिलाड़ी के साथ अफेयर्स की खबरें भी आए दिन आती रहती हैं. जानिए ऐसे ही कुछ क्रिकेट और बॉलीवुड सितारों के लिंक-अप्स जिन्होनें खुब सुर्खियां बटोरी.

शर्मिला टैगोर और मंसूर अली खान पटौदी

शर्मिला और पटौदी की कहानी 1965 में शुरू हुई जब शर्मिला फिल्म की शूटिंग के लिए दिल्ली में थीं उसी समय इन दोनों के कॉमन फ्रेंड ने पटौदी का परिचय शर्मिला से करवाया. शर्मिला का दिल जीतने के लिए पटौदी नें उन्हें एक फ्रिज गिफ्ट में दिया, लेकिन इस तरह से वह शर्मिला का दिल नहीं जीत पाए. चार सालों की मेहनत के बाद अंत में जाकर शर्मिला राजी हुईं और इसके बाद दोनों परिवारों की स्वीकृति से इन्होनें शादी कर ली.

मोहसिन खान और रीना रॉय

शर्मिला और पटौदी की तरह हर कहानी का सुखद अंत नहीं होता. मोसिन और रीना रॉय के डूबते करियर नें इनके रिश्ते को भी खत्म कर दिया और इन दोनों नें तलाक ले लिया.

मो. अजहरुदीन और संगीता

अजहर और संगीता के रिश्ते नें भी बहुत सुर्खियां बटोरी क्योंकि अजहर शादीशुदा थे. लेकिन अजहर ने संगीता के लिए अपनी पहली बीवी को छोड़ दिया. कुछ समय के लिए मीडिया नें संगीता पर अजहर और उनकी बीवी की शादी तोड़ने का आरोपी भी लगाया.

इमरान खान और जीनत अमान

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज इमरान खान अचानक सुर्खियों में आ गए जब ये खबर आई की वह भारतीय अभिनेत्री जीनत अमान को डेट कर रहे हैं. लेकिन यह रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाया.

विवियन रिचर्ड्स और नीना गुप्ता

इनका रिश्ता भी विवादों से भरा रहा. शादीशुदा होते हुए भी विवियन रिचर्ड्स के नीना गुप्ता के साथ संबध थे और इनके इस रिश्ते से एक संतान भी हुई जिसका नाम मसाबा है, जो अब अपनी मां के साथ रह रही हैं.

किम शर्मा और युवराज सिंह

किम का रिश्ता युवराज के साथ काफी समय तक रहा लेकिन कुछ निजी कारणों की वजह से इस रिश्ते का अंत हो गया. लेकिन युवराज ने पिछले साल हेजल कीच से शादी कर ली.

हरभजन सिंह और गीता बसरा

इन दोनों को कई इवेंट्स पर साथ-साथ देखा गया लेकिन इन दोनों नें कभी भी अपने रिश्ते को एक्सेप्ट नहीं किया. इन दोनों की रिलेशनशिप शादी में बदल गई और आज दोनों की एक खूबसूरत बेटी भी है.

दीपिका पादुकोण और एम एस धोनी

खबरों की मानें तो भारतीय क्रिकेट कप्तान एम एस धोनी बॉलीवुड में कुछ सालों पहले ही अपना करियर शुरू करने वाली दीपिका पादुकोण के इस कदर दिवाने हो गए कि उन्होंने दीपिका को टी20 मैच देखने के लिए न्योता दे डाला और दीपिका भी धोनी का दिल न तोड़ते हुए उस मैच में उपस्थित रही लेकिन उनके रिश्ते की असलियत कभी सामने न आ सकी और कयासों के बीच ही सब खत्म हो गया.

दीपिका और युवराज सिंह

एम एस धोनी के बाद दीपिका का नाम युवराज के साथ भी जोड़ा गया. इन दोनों को कई इवेंट्स पर भी साथ-साथ देखा गया लेकिन दीपिका-रणबीर के प्यार के किस्से आम होने लगे और इस रिश्ते का भी अंत हो गया.

अनुष्का शर्मा और विराट कोहली

विराट और अनुष्का के प्यार के बारे में तो सबको पता है. इन दोनों का रिश्ता तो हमेशा से चर्चाओं में बना रहा है. विराट और अनुष्का की शादी की खबरें भी आती रही हैं. अब देखना यह होगा कि इनका प्यार परवान चढ़ पाता है कि नहीं.

जहीर खान और ईशा शरवानी

बॉलीवुड की खूबूसरत अदाकारा ईशा और भारतीय क्रिकेट के दिग्गज व अनुभवी गेंदबाज जहीर खान का अफेयर दो सालों तक चला लेकिन खबरों की मानें तो अपने-अपने करियर के लिए इन दोनों नें अपने इस रिश्ते को खत्म करना ही बेहतर समझा.

विराट कोहली और सारा जेन डियास

पूर्व फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड सारा जेन डियास और क्रिकेटर विराट कोहली की डेटिंग की खबरें भी आयी थी, लेकिन बाद में इसका कुछ खास खुलासा हुआ नहीं.

सौरव गांगुली और नगमा

सौरव गांगुली और नगमा के प्यार के किस्से भी किसी से छुपे नहीं है.

श्रीसंत और रिया सेन

विवादों से जुड़े रहने वाले श्रीसंत का नाम बॉलीवुड दीवा रिया सेन से जोड़ा जाता रहा है.

जग्गा जासूस रणबीर तोड़ेंगे सलमान का रिकॉर्ड

अप्रैल में रिलीज होने वाली फिल्म 'जग्गा जासूस' का ट्रेलर रिलीज हो गया है. ट्रेलर में दोनों रणबीर कपूर और कटरीना कैफ एलियंस की तरह दिख रहे हैं. "जग्गा जासूस" के ट्रेलर के बाद यह खबर आ रही है कि बॉलीवुड के चॉकलेटी हीरो रणबीर कपूर ने बॉलीवुड के सुल्तान खान के एक रिकॉर्ड को तोड़कर नया रिकॉर्ड बना डाला है. ये माना जाता है कि सलमान खान की फिल्मों में सबसे ज्यादा गानें होते हैं. साल 1994 में आई उनकी फिल्म 'हम आपके हैं कौन' में 14 गाने थे. लेकिन जल्द ही सलमान का यह रिकॉर्ड टूटने वाला है. 

रणबीर और कटरीना की आने वाली फिल्म 'जग्गा जासूस' ने सलमान के इस रिकॉर्ड को तोड़ने को तैयारी है. इस फिल्म में कुल 29 गानें हैं.

अनुराग बसु, सिद्धार्थ रॉय कपूर, महेश समत, रणबीर कपूर निर्मित फिल्म 'जग्गा जासूस' 7 अप्रैल को सिनेमा घरों में आएगी. सबसे ज्यादा गानों वाली फिल्म का वर्ल्ड रिकॉर्ड साल 1932 में आई हिन्दी फिल्म 'इंद्रसभा' के नाम है, जिसमें कुल 70 गानें हैं.

अनोखी प्रणाली की मदद से दिव्यांग भी चला रहे हैं कार

खुद भी व्हीलचेयर पर चलने को मजबूर बीजू वर्गीज ने, अपनी तरह के दूसरे लोगों की मदद के लिए एक अनोखी प्रणाली को विकसित किया है. ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा अनुमोदित यह प्रणाली साल 2003 में विकसित की गयी थी. आपकी कार में कोई भी बदलाव किए बिना, इसे 15 मिनट में कार में लगाया जा सकता है और फिर उतनी ही आसानी से हटाया भी जा सकता है.

हाल ही में आयोजित केरल सरकार के ‘व्यापार 2017’ सम्मेलन में करीब 200 प्रदर्शकों में शामिल होकर, स्टॉल लगाकर 44 साल के उद्यमी पुरस्कार विजेता ने अपनी इस प्रणाली को प्रदर्शनी में रखा. केरल सरकार का यह आयोजन लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की एक झलक दिखाने के लिए किया गया है.

बीजू वर्गीज द्वारा विकसित की गई इस प्रणाली का इस्तेमाल कर व्हीलचेयर पर बैठे लोग हस्तचालित ब्रेक, क्लच और एक्सलेटर का प्रयोग कर खुद कार चला सकते हैं. इस प्रणाली को किसी भी कार के गियर में लगाया जा सकता है.

इसकी एक इकाई की कीमत 15,000 से 30,000 के बीच है और यह कीमत व्यक्ति की शारीरिक अशक्तता के आधार पर बदलती है. जो लोग यह खर्च वहन नहीं कर सकते हैं, बीजू उनके लिए यह प्रणाली उनकी कारों में निशुल्क लगा देते हैं. बेशक उन्हें इस बात पर गर्व महसूस होता है कि उनकी ऐसी खोज ने 2500 से भी अधिक अशक्त लोगों के साथ-साथ उनके परिवारों को भी एक नया जीवन दिया. 25 साल की उम्र में एक सड़क हादसे का शिकार हुए बीजू, अपनी रीढ़ की हड्डी में जीवन भर की चोट ले बैठे थे.

आधार कार्ड नहीं तो राशन भी नहीं

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत जरूरतमंद और गरीब लोगों तक 1.4 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी पहुंचाने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है. अब पीडीएस(पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) या सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों से राशन खरीदने के लिए आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा.

जिन लोगों के पास आधार नंबर नहीं है उन्हें आधार कार्ड के लिए आवेदन करने के लिए 30 जून तक का समय दिया गया है. सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई है.

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को पिछले साल नवंबर में देशभर में लागू किया गया था. इसके तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को प्रति व्यक्ति एक से तीन रुपए प्रति किलो की दर पर पांच किलोग्राम अनाज उपलब्ध कराती है.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग ने 8 फरवरी को आधार कानून के तहत अधिसूचना जारी की है. इसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत प्रत्येक ऐसे व्यक्तिगत लाभार्थी जिनके पास राशन कार्ड है, को इस बात का प्रमाण पेश करना होगा कि उनके पास आधार नंबर है या फिर उन्हें इसके तहत सब्सिडी का लाभ लेने को आधार सत्यापन से गुजरना होगा.’ यह अधिसूचना 8 फरवरी से असम, मेघालय और जम्मू-कश्मीर को छोड़कर अन्य सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों पर लागू होगी. यह सभी नए लाभार्थियों पर भी लागू होगी.

बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लाभार्थी जिनके पास आधार नंबर नहीं है या फिर उनका आधार के तहत नामांकन नहीं हुआ है, लेकिन वे सब्सिडी पाने को इच्छुक हैं, उन्हें आधार के लिए 30 जून, 2017 तक आवेदन करना होगा. लाभार्थी को आधार नंबर मिलने तक सस्ता अनाज राशन कार्ड दिखाने या आधार नामांकन आईडी स्लिप या राज्य सरकार को आधार कार्ड के लिए किए गए आवेदन की प्रति के जरिये यह लाभ मिल सकेगा.

इसके अलावा मतदाता पहचानपत्र, पैन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राजपत्रित आधिकारी-तहसीलदार द्वारा आधिकारिक लेटर हेड पर फोटो के साथ पहचान प्रमाणन, पते का कार्ड जो कि डाक विभाग ने जारी किया हो और इस पर फोटो भी हो, किसान फोटो पासबुक और राज्य या संघ शासित सरकारों द्वारा तय कोई अन्य दस्तावेज से भी राशन खरीदा जा सकता है. लाभार्थी आधार नामांकन के लिए अपना नाम पता और मोबाइल नंबर राशन कार्ड नंबर और अन्य ब्योरे के साथ राशन दुकानदार के द्वारा या वेब पोर्टल के जरिये आग्रह कर सकते हैं.

क्रिकेट प्रेमियों को भी नहीं पता होगा इन नियमों के बारे में

क्रिकेट, दुनिया का सबसे लोकुप्रिय खेल जिसे भारत में सिर्फ खेल नहीं धर्म माना जाता है. क्रिकेट इतना लोकप्रिय है कि इस खेल से जुड़े लगभग सारी नियमों के बारे में आप जानते होंगे. लेकिन क्रिकेट जगत में कुछ ऐसे भी नियम हैं जिसके बारे में शायद आपको भी पता नहीं होगा. आइए आज हम आपको बताते हैं, क्रिकेट से जुड़े कुछ मजेदार नियम.

टाइम आउट

यदि विकेट गिरने के तीन मिनट तक दूसरा बैट्समैन क्रीज पर नहीं पहुंचता है तो उसे फील्डिंग टीम की अपील पर टाइम आउट दिया जा सकता है.

लॉस्ट बॉल

यदि मैच के दौरान बॉल खो जाए तो फील्डिंग टीम लॉस्ट बॉल की अपील कर सकती है. ऐसे में बॉल को डेड माना जाएगा. वहीं, इस दौरान बैट्समैन ने जितने रन लिए होंगे वो उसे मिलेंगे.

आउट टाइम तक बैटिंग-बॉलिंग नहीं

कोई प्लेयर इंजरी के कारण जितने समय तक फील्ड से बाहर रहता है, लौटने पर वो उतने ही समय तक बॉलिंग या बैटिंग नहीं कर सकता.

हेल्मेट कनेक्शन

यदि कैच पकड़ते वक्त बॉल फील्डर के किसी भी प्रोटेक्टिव चीज (हेल्मेट, पैड, एल्बो गार्ड) से टकराती है तो बैट्समैन आउट नहीं होगा.

नो अपील-नो आउट

यदि फील्डिंग टीम आउट की अपील (Lbw, कैच में) नहीं करती है तो अंपायर बैट्समैन को आउट होने पर भी आउट नहीं दें सकते.

अंपायर को नहीं बताया तो मिलेंगे 5 रन

यदि इंजर्ड होने या किसी भी कारण से कोई प्लेयर अंपायर की परमिशन के बिना फील्ड से बाहर जाता है तो बैटिंग टीम को एक्स्ट्रा 5 रन मिलते हैं.

स्पाइडर कैम और बॉल

यदि बैट्समैन के शॉट मारने के बाद बॉल स्पाइडर कैम से टकराती है तो उसे डेड बॉल डिक्लेयर किया जाता है. उस पर बैट्समैन को रन नहीं मिलता.

रिटायर्ड आउट

यदि बैट्समैन बिना अंपायर की परमिशन के रिटायर होता है तो उसे रिटायर्ड आउट माना जाता है. हालांकि, ऐसा अधिकतर फ्रेंडली मैच में ही देखने को मिलता है.

हैंडलिंग द बॉल

जब कोई बैट्समैन आउट होने से बचने के लिए जानबूझकर बॉल को हाथ लगाकर विकेट से दूर करता है तो वो ‘हैंडलिंग द बॉल’ रूल के तहत आउट होता है.

हेल्मेट दिलवाएगा रन

यदि बॉल विकेटकीपर के पीछे रखी हेल्मेट पर लगती है तो बैटिंग टीम को 5 एक्स्ट्रा रन मिलते हैं.

मेरी समस्या यह है कि मेरे चेहरे पर बहुत रोएं हैं, जिन की वजह से चेहरा बहुत खराब दिखता है.

सवाल

मैं कालेज में पढ़ने वाली छात्रा हूं. मेरी समस्या यह है कि मेरे चेहरे पर बहुत रोएं हैं, जिन की वजह से चेहरा बहुत खराब दिखता है. कृपया चेहरे के रोओं को हटाने का कोई उपाय बताएं.

जवाब

चेहरे पर रोएं होने का कारण हारमोनल असंतुलन भी हो सकता है. आप चाहें तो ब्लीचिंग, वैक्सिंग, लेजर ट्रीटमैंट या हेयर रिमूविंग क्रीम से इन रोओं को हटा सकती हैं. लेकिन इन सभी उपायों के कुछ साइडइफैक्ट भी हो सकते हैं, इसलिए आप घरेलू उपाय के तौर पर हलदी का पेस्ट बना कर चेहरे पर लगाएं और सूखने तक लगा रहने दें. सूखने पर पानी से धो लें. ऐसा 4-5 सप्ताह तक करें. धीरेधीरे बालों की रंगत हलकी हो जाएगी. इस के अतिरिक्त आटा, दूध व हलदी का उबटन बना कर भी चेहरे पर लगा सकती हैं और सूखने पर रगड़ कर हटा लें. इस से चेहरे के रोएं हलके होने के साथसाथ उन की ग्रोथ भी कम हो जाएगी.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

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